Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 March 2025

Published 19 March 2025

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2025-03-19.12
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40

(cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 28 फाल्गुन 1946 (श0) सं(cid:201)या 12 पटना, बुधवार, ———————— 19 मार्च 2025 (ई0) भाग-1— नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 02-19 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 20-21 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची पृष्ठ

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 22-22 पूरक

---

पूरक-क 23-27(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 2

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत

सूचनाएं। —————

जल संसाधन विभाग

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अधिसूचनाएं

10 मार्च 2025

सं0 11/से॰सं॰-11-01/2025-1110--कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के कार्यालय आदेश संख्या-467 दिनांक-16.12.1998 तथा वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-630 दिनांक-12.01.2010 एवं 2110 दिनांक-26.02.2010 के आलोक में बिहार अभियंत्रण सेवा के निम्नांकित पदाधिकारी का उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-5 में अंकित तिथि से सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर सेवा संपुष्ट करते हुए स्तम्भ-6 में अंकित तिथि से वेतन बैण्ड-II जमा ग्रेड वेतन 5400/- से वेतन बैण्ड-III जमा ग्रेड वेतन 5400/- में उत्क्रमित करते हुए वेतन अनुमान्य किया जाता है :-

क्र॰ सं॰ नाम/आई॰डी॰ प्रथम प्रभार/सेवा विनियमन की तिथि विभागीय परीक्षा उत्तीर्णता की तिथि सेवा संपुष्टि की तिथि वेतन बैण्ड-II जमा ग ्रेड वेतन 5400/- से वेतन बैण्ड-III जमा ग ्रेड वेतन 5400/- में उत्क्रमण एवं वेतन अनुमान्य की तिथि अभ्युक्ति
1 2 3 4 5 6 7
1 श्री अमरेन्द्र कुमार 5075 16.09.2008 10.07.2010 16.09.2010 16.09.2012

हद तक संशोधित समझा जाय।

3. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश कुमार कमल, अवर सचिव (प्रबंधन)।

-------ं

4 मार्च 2025

सं0 11/से॰सं॰-11-02/2024-941--जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-II के निम्नलिखित 24 (चौबीस) सहायक अभियंताओं (असैनिक) की सेवा उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-5 में अंकित तिथि से सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर संपुष्ट की जाती है :-

क्र॰ सं॰ नाम/आई॰डी॰ प्रथम प्रभार की तिथि विभागीय परीक्षा उत्तीर्णता की तिथि सेवा संपुष्टि की तिथि अभ्युक्ति
1 2 3 4 5 6
1 श्री उज्जवल सिंह 5557 30.05.2022 06.01.2024 30.05.2024
2 मो॰ जावेद अंसारी 5642 02.03.2022 20.07.2024 20.07.2024
3 श्री निशान्त अब्रीन 5683 10.03.2022 26.04.2023 10.03.2024
4 श्री मुकेश कुमार रंजन 5694 25.03.2022 30.12.2023 25.03.2024
5 सुश्री/श्रीमती कविता कुमारी 5764 02.03.2022 30.12.2023 02.03.2024
6 सुश्री/श्रीमती अनामिका 5738 07.03.2022 13.05.2023 07.03.2024
7 सुश्री/श्रीमती मनीषा 5725 23.03.2022 19.01.2024 23.03.2024
8 श्री शुभम रंजन 5560 28.02.2022 (अपराह्‌न) 26.04.2023 01.03.2024
9 श्री अनिल कुमार चैाधरी 5660 28.04.2022 13.12.2023 28.04.2024
10 श्री अभिषेक कुमार 5566 07.03.2022 30.12.2023 07.03.2024
11 श्रीमती प्रीति रानी 5687 07.03.2022 22.02.2023 07.03.2024
12 श्री प्रशान्त सोनी 5554 02.05.2022 28.03.2023 02.05.2024
13 श्री विनोद कुमार जयसवाल 5577 04.03.2022 09.10.2024 09.10.2024
14 श्री अनुराग मिश्रा 5587 25.03.2022 30.12.2023 25.03.2024
15 सुश्री/श्रीमती आकांक्षा चौहान 5705 14.03.2022 (अपराह्‌न) 14.12.2023 15.03.2024
16 सुश्री/श्रीमती पल्लवी राना 5722 02.03.2022 16.08.2024 16.08.2024
17 सुश्री/श्रीमती आकांक्षा साहु 5745 26.03.2022 21.06.2023 26.03.2024
18 सुश्री/श्रीमती राजुल राज 5803 07.03.2022 30.12.2023 07.03.2024
19 मो॰ उमर फारूक 5521 02.03.2022 15.10.2024 15.10.2024
20 श्री अभिषेक सौरभ 5581 02.03.2022 08.11.2024 08.11.2024
21 श्री विजय कुमार पौरूष 5588 26.03.2022 25.10.2024 25.10.2024
22 श्री रंजन कुमार 5639 28.02.2022 20.03.2023 28.02.2024
23 सुश्री/श्रीमती एकता कुमारी 5770 28.02.2022 30.12.2023 28.02.2024
24 सुश्री/श्रीमती प्रीति चौधरी 5785 10.03.2022 06.08.2024 06.08.2024
3 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 4

2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

3. भविष्य में उपर्युक्त सहायक अभियंताओं की अर्हता में किसी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर इसे तदनुसार संशोधित/रद्द कर दिया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश कुमार कमल, अवर सचिव (प्रबंधन)।

-------ं

पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

27 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-04 (पथ)-आरोप-88/2020-596(s)--श्री विभूति चन्द्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना से पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में NH-19/NH-102 के अवशेष पथांशों के सुदृढ़ीकरण कार्य की गति अत्यन्त धीमी पाये जाने, स्वीकृत प्राक्कलन में अनावश्यक संशोधन कराने की चेष्टा करने एवं Professional Competence के अभाव संबंधी आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-5827(एस) दिनांक-05.10.2020 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसके संबंध में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर विभागीय समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाये जाने के फलस्वरूप इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-564(एस) दिनांक-27.01.2021 द्वारा निलंबित किया गया तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4308(एस) अनु॰ दिनांक-26.08.2021 द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुये इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत्‌ गठित कुल 04 (चार) आरोप निम्नवत्‌ हैंः-

(i) दिनांक-17.07.2020 को अपर मुख्य सचिव के द्वारा सारण जिलान्तर्गत पथों के निरीक्षण के क्रम में तरैया-मशरख पथ के संधारण में उदासीनता बरतने के कारण पथ काफी क्षतिग्रस्त पाया गया, जिसके हेतु श्री चन्द्र को सचेत करते हुए अविलम्ब पथ के रख-रखाब में सुधार सुनिश्चित करने के निदेश दिये गये तथा संबंधित संवेदक के विपत्र से सेवा स्तर के संधारण में चूक के लिए नियमानुसार कटौती सुनिश्चित करने का भी निदेश विभागीय ज्ञापांक-196/गो॰ दिनांक-22.07.2020 द्वारा दिया गया था। परन्तु इसका अनुपालन श्री चन्द्र के द्वारा नहीं किया गया।

(ii) एन॰एच॰-19/एन॰एच॰-102 के अवशेष पथांशों के सुदृढ़ीकरण कार्य की गति अत्यन्त धीमी,स्वीकृत प्राक्कलन में अनावश्यक संशोधन कराने की चेष्टा एवं Professional Competence के अभाव संबंधी आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-5827 (एस) दिनांक-05.10.2020 द्वारा श्री चन्द्र से स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसके अनुपालन में श्री चन्द्र द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तरपत्रांक-शून्य दिनांक-14.10.2020 को विभागीय समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाया गया। (iii) पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत कार्यान्वित किये जा रहे विभिन्न योजनाओं का Comparative Physical and Financial Progress Report from July-2020 to November-2020 के आंकड़ों की विभागीय समीक्षा की गयी, जिसमें पाया गया कि निम्न योजनाओं की भौतिक प्रगति काफी धीमी एवं वित्तीय प्रगति या तो शून्य रही अथवा काफी कम है तथा वैसी योजना जिसके कार्यान्वयन हेतु भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता थी, में भी श्री विभूति चन्द्र के द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गयी, जिसके फलस्वरूप कार्य बाधित रहाः- Name of Road/Head Sanctioned

Sl. No. Name of Road/Head Sanctioned Length (km.) Financial Progress within 5 Months in % Physical Progress July to Nov- 2020
(i) Widening & Strengthening form (Single Lane to Double Lane) Manjhi to Barauli (SH-96) from (km- 0+000 to 20+250) for the year 2019-20 (Plan) 20.25 0.15 Very Slow
(ii) Sitalpur-Parsa Road to Bankerwa Road SBD CRF 6.50 - Slow
(iii) W/S work of Chapra-Madhura main road to NH-102 Raipura road Via Hasanpur, Huspur, Devi Asthan Mund, Tarwar Basdih Road RIDF NABARD 18.40 6.10 Very Slow
(iv) Widening & Strengthening work of Manpur-Garkha Road in km 0.00 to 18.100 for the year 2018-19 Under Plan Head (NABARD) 18.10 5.40 Very Slow
(v) I.R.Q.P. work of Chainwa-Chainpur road in km 0.00 to 6.44 for the year 2018-19 Under Plan Head (SBD) (PLAN) 6.44 0.00 No Progress
(vi) Construction of Approach Road of Lok Nayak Jai Prakash Narayan Smriti Bhawan cum Library Sitab Diyara to Main Road in km 0 to 1.10 for the year 2017-18 (DEPOSIT) 1.10 0.00 LA Process to be Expedited
(vii) Sonepur-Darihara-Rewaghat road (0 to 21.0 km) Under CMBD (PLAN) 21.00 17.06 Very Slow
(viii) Sonepur-Darihara-Rewaghat Road (22.0 to 39.40 km) Under CMBD (PLAN) 18.40 19.09 Very Slow
(ix) W/S work with maintenance work Hariharnath-Pahleja Ghat RCD road to Gangajal Road in km 0 to 6.90 for 2016-17 (PLAN) 6.90 0.00 No Progress
(x) Improvement work from Chapra- Sonepur Road (Gola Bazar) to Chapra Sonepur Road (Dudhaila More) via Chhoa Mill, Screw Pile Bridge, Najarmira, Rahar Diyara, Balli Tola, Sahpur Diyara, Hariharnath-Pahlejaghat and Dudhaila Bazar Road (Total Length- 6.480 km) for the year- 2019-20 (PLAN) 6.48 13.53 Very Slow
(xi) Strengthening work of the Sikatia- Paigamberpur Road in km (0.000 to 15.385) for the year 2019-20 PLAN 15.39 18.20 Very Slow
(xii) Widening and Strengthening work of Khaira-Akhtiyarpur Road in km 0.00 to 9.600 km for the year 2019- 20 under plan head (SBD) (PLAN) 9.66 4.49 Very Slow
5 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025

(a) पथ प्रमंडल, छपरा में छपरा शहर अन्तर्गत अवस्थित एन॰एच॰-19 एवं एन॰एच॰-102 के लेफ्ट आउट पथांश (नये बायपास के निर्माण के फलस्वरूप) के सुदृढ़ीकरण का कार्य पथ प्रमंडल, छपरा द्वारा कराया जाना है, जिसके निमित्त लगभग 04 माह से विभाग स्तर से अनुश्रवण किया गया। यह छपरा शहर का प्रमुख पथांश है, जिस पर होकर वीरकुवर सिंह सेतु से वाहन छपरा शहर को पार कर उत्तर प्रदेश एवं उत्तर बिहार में जाते हैं। उक्त सुदृढ़ीकरण कार्य में संतोषजनक प्रगति नहीं पायी गयी। लगभग 13 कि॰मी॰ पथांश में से कुछ मीटर में ही कालीकरण कार्य प्रारम्भ हुआ पाया गया।

(b) बाढ़ के कारण गंडक नदी के तटबंध में हुए कटाव के फलस्वरूप एस॰एच॰-104 में अंबेडकर चौक, मशरख के पास पथ में कटाव स्थल पर नये पुल निर्माण कराये जाने की आवश्यकता को देखते हुए इसका DPR समर्पित करने तथा नये पुल के निर्माण हेतु अग्रतर कार्रवाई के निदेश विगत 04 माह से दिये जाने के बावजूद इसका अनुपालन श्री चन्द्र द्वारा नहीं किया गया तथा DPR के गठन हेतु एजेन्सी भी विनिश्चित नहीं किया।(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 6 (c) विभागीय स्पष्ट निदेश के बावजूद पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत बाढ़ से क्षतिग्रस्त पथों में कालीकरण करके स्थायी पुनर्स्थापन नहीं कराया गया, जबकि हर पथ के लिए OPRMC एजेन्सी विनिश्चित है। (d) निरीक्षण के क्रम में पाया गया कि गरखा-मानपुर पथ एक प्रमुख पथ है, जिसका निर्माण मार्च-2021 तक पूर्ण होना है। परन्तु पथ में कराये गये निर्माण कार्य में Flank में पर्याप्त मिट्‌टी नहीं डलवायी गयी है। अनेके स्थानों पर बिजली के पोल पथ के बिल्कुल किनारे पाये गये, जबकि इन्हें हटाने का प्राक्कलन में प्रावधान था। जिस पथांश में कालीकरण कराया गया उसमें कुछ जगह पर कालीकरण क्षतिग्रस्त पाया गया।

(e) श्री चन्द्र, तदेन कार्यपालक अभियंता माह जून-2020 से ही पथ प्रमंडल, छपरा में पदस्थापित रहे एवं तब से लगातार इन्हें कार्य में सुधार लाने हेतु निदेशित किया जाता रहा है। परन्तु इनके पदस्थापन अवधि में जहाँ एक ओर निर्माणाधीन पथों की प्रगति धीमी हो गयी वहीं दूसरी ओर पथाें का रख-रखाब भी खराब हो गया। इनके द्वारा विभाग से दिये जाने वाले निर्देशों का अनुपालन में समयबद्धता का पालन नहीं किया गया।

2. उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में मुख्य अभियंता (बजट एवं योजना)-सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3564(ई) अनु॰ दिनांक-12.06.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन के तहत्‌ आरोप संख्या-(i) एवं (iii) को आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप संख्या-(ii) को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। आरोप संख्या-(iv) के संबंध में निष्कर्ष गठित किया गया कि आरोप संख्या-(iv) के पाँचों अंश, आरोप संख्या-(i), (ii) एवं आरोप संख्या-(iii) का ही परिवर्तित रूप है, अतएव आरोप संख्या-(i), (ii) एवं (iii) में दिये गये निष्कर्ष आरोप संख्या-(iv) के सभी अंशों में मान्य होगा। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप संख्या-(i), (iii) एवं (iv) के संबंध में विभागीय पत्रांक-5295(एस) अनु॰ दिनांक-01.09.2023 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी।

3. श्री विभूति चन्द्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-03.10.2023 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया है, जिसमें अंकित तथ्यों/तर्काें की समीक्षा की गयी, जो निम्नवत्‌ हैः-

(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(i) को इस आधार पर आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया कि उच्चाधिकारी द्वारा दिये गये निदेश के आलोक में क्षतिग्रस्त पथांश का निराकरण कर 02 से 03 दिनों के अंदर Compliance Report मुख्यालय को उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही पथ के सेवा स्तर के संधारण में चूक के लिए संवेदक के विपत्र से कटौती करने के संबंध में दिनांक-22.07.2020 को दिये गये निदेश के आलोक में सितम्बर माह में मात्र 27,383/- रू॰ की सांकेतिक कटौती की गयी।

(ii) उक्त संबंध में आरोपी श्री चन्द्र के द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से यह उल्लेख किया गया है कि क्षतिग्रस्त पथांश की मरम्मति कराने के पश्चात्‌ ही मुख्यालय को Compliance Report उपलब्ध कराया जा सकता था, परन्तु क्षतिग्रस्त पथांश की 02 से 03 दिनाें के अंदर मरम्मति कराया जाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं था, इसलिए मुख्यालय को उक्त अवधि में Compliance Report उपलब्ध नहीं कराया गया। क्षतिग्रस्त पथांश की मरम्मति कराने के पश्चात्‌ मात्र एक महीने के बाद संवेदक के विपत्र से नियमानुसार कटौती की गयी, इसमें कोई अनियमितता नहीं है।

(iii) संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, आरोपी के द्वारा उपलब्ध कराये गये उत्तर एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के समेकित विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि श्री चन्द्र के द्वारा पथ के सवा स्तर के संधारण में चूक के लिए संवेदक के विपत्र से तत्समय कटौती नहीं की गयी है, बल्कि लगभग दो महीने बाद मात्र 27,383/- रू॰ की कटौती की गयी। साथ ही उच्चाधिकारी के निदेश के आलोक में आरोपी श्री चन्द्र के द्वारा Compliance Report भी विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया। अतः आरोप संख्या-01 इस हद तक प्रमाणित होता है।

(iv) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(iii) को इस आधार पर आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया कि श्री चन्द्र के द्वारा कार्यों की प्रगति में तेजी लाने हेतु कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया और सुनवाई के दौरान उनके द्वारा धीमी प्रगति के लिए संवेदक के विरूद्ध ठोस कार्रवाई करने का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में कुल 10 योजनाओं की प्रगति धीमी रहने के आरोप के विरूद्ध मात्र 06 योजनाओं की (आरोप पत्र में अंकित तालिका के क्रमांक-04, 05, 06, 07, 08 एवं 09) प्रगति को धीमी माना गया है।

(v) उक्त के संबंध में आरोपी श्री चन्द्र के द्वारा 06 योजनाओं की प्रगति, जिसे संचालन पदाधिकारी ने धीमी माना है, योजना तालिका क्रमांक-04 के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए अंकित किया है कि अपर मुख्य सचिव महोदय के समीक्षात्मक बैठक में इस योजना के संबंध में "On time" Remarks दिया गया, जबकि योजना तालिका7 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 क्रमांक-05, 07, 08 की प्रगति धीमी रहने के कारण संवेदक पर LD लगाये जाने के साथ उसे Debar किया गया है। योजना तालिका क्रमांक-06 की प्रगति धीमी रहने का कारण भू-अर्जन का आवंटन भवन निर्माण विभाग से होना अंकित किया गया है, जबकि योजना क्रमांक-09 के धीमी प्रगति का कारण इस योजना को Descope करने का प्रस्ताव मुख्यालय स्तर पर विचाराधीन होना बताया गया है।

(vi) श्री चन्द्र के द्वारा उक्त बचाव बिन्दुओं के साक्ष्य के रूप में मुख्य रूप से तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के द्वारा की गयी समीक्षात्मक बैठक में रखे गये Progress Report 2020-21 को संलग्न कर प्रस्तुत किया गया है, जिसके Remarks Column में तदेन अपर मुख्य सचिव के द्वारा योजनावार अंकित Remarks निम्नवत्‌ हैंः-

(i) तालिका क्रमांक-04 के योजना में अंकित Remark "On time"
(ii) तालिका क्रमांक-05 के योजना में अंकित Remark "Agency slow, must be completed this month"
(iii) तालिका क्रमांक-06 के योजना में अंकित Remark "Allotment is an issue"
(iv) तालिका क्रमांक-07 के योजना में अंकित Remark "Likely to be completed by 31.12.2020"
(v) तालिका क्रमांक-08 के योजना में अंकित Remark "Likely to be completed by 31.12.2020"
(vi) तालिका क्रमांक-09 के योजना में अंकित Remark "FS to visit this month"

(vii) उक्त Progress Report में कृत कार्रवाई/किये जाने वाले कार्रवाई के संबंध में अंकित प्रविष्टि के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि इसमें सिर्फ तालिका योजना क्रमांक-04 के संबंध में "On time" का Remarks तदेन अपर मुख्य सचिव के द्वारा अंकित किया गया है, जबकि शेष सभी 05 (पाँच) योजनाओं के संबंध में पूर्व से अंकित प्रविष्टि के उलट एक तरह से प्रतिकूल Remarks ही अंकित किया गया है। उल्लेखनीय है कि इसी Report के आधार पर स्वयं तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के द्वारा विभागीय पत्रांक-5827(एस) दिनांक-05.10.2024 द्वारा श्री चन्द्र से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी, जिसे पुनः उनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र में भी साक्ष्य के रूप में संलग्न किया गया है। अतः श्री चन्द्र के द्वारा अपने बचाव में रखे कंडिका-(v) का तथ्य निराधार एवं तथ्य से परे है। अतएव आरोप संख्या-(iii) आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।

(viii) आरोप संख्या-(iv) के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा यह निष्कर्ष गठित किया है कि आरोप संख्या-(iv) के पाँचों अंश, आरोप संख्या-(i), (ii) एवं (iii) का ही परिवर्तित रूप है, अतएव आरोप संख्या-(i), (ii) एवं (iii) में दिया गया निष्कर्ष आरोप संख्या-(iv) के सभी अंशाें में मान्य होगा। उक्त के संबंध में श्री चन्द्र के द्वारा अपने उत्तर के तहत्‌ मुख्य रूप से यह उल्लेख किया गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(i) एवं (iii) को आंशिक रूप से प्रमाणित और आरोप संख्या-(ii) को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा दो भिन्न-भिन्न मंतव्यों को आरोप संख्या-(iv) में मानने का निष्कर्ष दिया गया, जो कतई संभव नहीं हो सकता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में आरोप संख्या-(iv) को अप्रमाणित भी माना जा सकता है और प्रमाणित भी माना जा सकता है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा विरोधाभाषी मंतव्य दिया गया है। आरोप संख्या-(iv) के संबंध में आरोपी के द्वारा दिया गया तर्क तथ्यपूर्ण है कि इस आरोप के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा कोई स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया है। अतः आरोप संख्या-(iv) के संदर्भ में श्री चन्द्र का उत्तर स्वीकार्य योग्य है। 4. उपर्युक्त सम्यक्‌ विभागीय समीक्षा में श्री विभूति चन्द्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध गठित आरोपों में से आरोप संख्या-(i) एवं (iii) आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने की स्थिति में इनके द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुये उक्त आंशिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(v) के तहत्‌ निम्न दंड संसूचित किया जाता हैः-

(i) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।'' (ii) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह्‌ भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि के रूप में मानी जायेगी।

5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 8

27 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-04 (पथ)-आरोप-88/2020-594(s)--श्री नरसिंह कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-02, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सुरसंड, पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी से पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में प्रभाराधीन पथों के निर्माण कार्य में विलम्ब, NH-19/NH-102 के अवशेष पथांशों के सुदृढ़ीकरण कार्य की गति अत्यन्त धीमी पाये जाने एवं संवेदक के साथ मिलकर स्वीकृत प्राक्कलन में अनावश्यक संशोधन कराने की चेष्टा करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-5826(एस) दिनांक-05.10.2020 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसके संबंध में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर विभागीय समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाये जाने के फलस्वरूप इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-566(एस) दिनांक-27.01.2021 द्वारा निलंबित किया गया तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4309(एस) अनु॰ दिनांक-26.08.2021 द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुये इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप पत्र के तहत्‌ गठित कुल 03 (तीन) आरोप निम्नवत्‌ हैंः-

(i) पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत श्री नरसिंह कुमार, तदेन सहायक अभियंता सम्प्रति निलंबित के प्रभाराधीन पथों के निर्माण कार्य में विलम्ब, एन॰एच॰-19/एन॰एच॰-102 के अवशेष पथांशों के सुदृढ़ीकरण कार्य की गति अत्यन्त धीमी पाये जाने एवं ठेकेदार के साथ मिलकर स्वीकृत प्राक्कलन में अनावश्यक संशोधन कराने की चेष्टा करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक- 5826 (एस) दिनांक- 05.10.2020 द्वारा श्री नरसिंह कुमार, तदेन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति निलंबितसे स्पष्टीकरण पूछा गया, जिसके अनुपालन में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक- 14.10.2020 को विभागीय समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाया गया।

(ii) पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत कार्यान्वित किये जा रहे विभिन्न योजनाओं का Comparative Physical and Financial Progress Report from July-2020 to November-2020 के आंकड़ों की विभागीय समीक्षा की गयी, जिसमें पाया गया कि श्री कुमार के प्रभाराधीन निम्न योजनाओं की भौतिक प्रगति काफी धीमी एवं वित्तीय प्रगति या तो शून्य रही अथवा काफी कम हैः-

Sl. No. Name of Road/Head Sanction ed Length (km.) Financial Progress within 5 Months in % Physical Progress July to Nov- 2020
(i) Widening & Strengthening form (Single Lane to Double Lane) Manjhi to Barauli (SH-96) from (km- 0+000 to 20+250) for the year 2019-20 (Plan) 20.25 0.15 Very Slow
(ii) Sitalpur-Parsa Road to Bankerwa Road SBD CRF 6.50 - Slow
(iii) W/S work of Chapra-Madhura main road to NH- 102 Raipura road Via Hasanpur, Huspur, Devi Asthan Mund, Tarwar Basdih Road RIDF NABARD 18.40 6.10 Very Slow
(iv) I.R.Q.P. work of Chainwa-Chainpur road in km 0.00 to 6.44 for the year 2018-19 Under Plan Head (SBD) (PLAN) 6.44 0.00 No Progress
(v) Construction of Approach Road of Lok Nayak Jai Prakash Narayan Smriti Bhawan cum Library Sitab Diyara to Main Road in km 0 to 1.10 for the year 2017-18 (DEPOSIT) 1.10 0.00 LA Process to be Expedited
(vi) Sonepur-Darihara-Rewaghat road (0 to 21.0 km) Under CMBD (PLAN) 21.00 17.06 Very Slow
(vii) Sonepur-Darihara-Rewaghat Road (22.0 to 39.40 km) Under CMBD (PLAN) 18.40 19.09 Very Slow
(viii) W/S work with maintenance work Hariharnath- Pahleja Ghat RCD road to Gangajal Road in km 0 to 6.90 for 2016-17 (PLAN) 6.90 0.00 No Progress
(ix) Improvement work from Chapra-Sonepur Road (Gola Bazar) to Chapra Sonepur Road (Dudhaila More) via Chhoa Mill, Screw Pile Bridge, Najarmira, Rahar Diyara, Balli Tola, Sahpur Diyara, Hariharnath-Pahlejaghat and Dudhaila Bazar Road (Total Length- 6.480 km) for the year- 2019-20 (PLAN) 6.48 13.53 Very Slow
(x) Strengthening work of the Sikatia-Paigamberpur Road in km (0.000 to 15.385) for the year 2019-20 PLAN 15.39 18.20 Very Slow
9 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025

(iii) इसके अतिरिक्त पथ प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत पथ निर्माण विभाग के सड़कों की प्रगति एवं रख-रखाब की स्थिति का निरीक्षण विभागीय अपर मुख्य सचिव के द्वारा जिलाधिकारी, सारण के साथ दिनांक- 17.12.2020 को किया गया, जिसमें श्री कुमार से संबंधित निम्न त्रुटियाँ/अनियमिततायें पायी गयीः-

(a) पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत छपरा शहर अन्तर्गत अवस्थित एन॰एच॰-19 एवं एन॰एच॰-102 के लेफ्ट आउट पथांश (नये बायपास के निर्माण के फलस्वरूप) के सुदृढ़ीकरण का कार्य पथ प्रमंडल, छपरा द्वारा कराया जाना है, जिसके निमित्त लगभग 04 माह से विभाग स्तर से अनुश्रवण किया गया। यह छपरा शहर का प्रमुख पथांश है, जिस पर होकर वीरकुवर सिंह सेतु से वाहन छपरा शहर को पार कर उत्तर प्रदेश एवं उत्तर बिहार में जाते हैं। उक्त सुदृढ़ीकरण कार्य में संतोषजनक प्रगति नहीं पायी गयी। लगभग 13 कि॰मी॰ पथांश में से कुछ मीटर में ही कालीकरण कार्य प्रारम्भ हुआ पाया गया।

(b) श्री कुमार के द्वारा स्पष्ट विभागीय निदेश के बावजूद पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत बाढ़ से क्षतिग्रस्त अपने प्रभाराधीन पथों में कालीकरण करके स्थायी पुर्नस्थापन नहीं कराया गया, जबकि हर पथ के लिए OPRMC एजेन्सी विनिश्चित है।

(c) श्री कुमार, तदेन सहायक अभियंता को कार्य में सुधार लाने हेतु निदेशित किया जाता रहा है। परन्तु इनके पदस्थापन अवधि में जहाँ एक ओर इनके प्रभाराधीन पथों के निर्माण की प्रगति धीमी हो गयी वहीं दूसरी ओर पथाें का रख-रखाब भी खराब हो गया। इनके द्वारा विभाग से दिये जाने वाले निर्देशों का अनुपालन में समयबद्धता का पालन नहीं किया गया।

2. उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में मुख्य अभियंता (बजट एवं योजना)-सह-संचालन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3295(ई) अनु॰ दिनांक-30.05.2023 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन के तहत्‌ आरोप संख्या-(i) को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-(ii) को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया तथा आरोप संख्या-(iii) के संबंध में निष्कर्ष गठित किया गया कि आरोप संख्या-(iii) के अंतर्गत उल्लिखित अधिकांश लांक्षण आरोप संख्या-(i) एवं (ii) का ही पुनरावृति है। इस आरोप में कोई नया लांक्षण आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध लगाया गया प्रतीत नहीं होता है, अतएव आरोप संख्या-(i) एवं (ii) में दिये गये निष्कर्ष आरोप संख्या-(iii) के लिए लागू होता है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित पाये गये आरोप संख्या-(ii) एवं आरोप संख्या-(iii) को भी अांशिक रूप से प्रमाणित मानते हुये उक्त के संबंध में विभागीय पत्रांक-5294(एस) अनु॰ दिनांक- 01.09.2023 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी।

3. श्री नरसिंह कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-02, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सुरसंड, पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी के द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-26.09.2023 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया है, जिसमें अंकित तथ्यों/तर्काें की समीक्षा की गयी, जो निम्नवत्‌ हैः- (i) श्री नरसिंह कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध कुल तीन आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(i) को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-(ii) को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। साथ ही आरोप संख्या-(iii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्ष गठित किया गया कि आरोप संख्या-(iii) के अंतर्गत उल्लिखित अधिकांश लांक्षण आरोप संख्या-(i) एवं (ii) की ही पुनरावृति है। इस आरोप में कोई नया लांक्षण आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध लगाया गया प्रतीत नहीं होता है, अतएव आरोप संख्या-(i) एवं (ii) में दिये गये निष्कर्ष आरोप संख्या-(iii) के लिए लागू होता है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के उपरांत आरोप संख्या-(ii) एवं (iii) को आंशिक रूप से प्रमाणित मानते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

(ii) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(ii) को इस आधार पर आंशिक रूप से प्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया कि आरोपी द्वारा कार्यों की प्रगति में तेजी लाने हेतु कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया और सुनवाई के दौरान कार्यों में तेजी लाने के संबंध में संवेदक को निदेशित करने अथवा उसके विरूद्ध कार्रवाई हेतु वरीय पदाधिकारी को लिखित सूचना दिये जाने संबंधी कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीें किया गया।

(iii) संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन तथा आरोपी के द्वारा उपलब्ध कराये गये द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर एवं इसके साथ संलग्न किये गये दस्तावेजों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आरोपी श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-(ii) एवं (iii) मुख्य रूप से विभिन्न योजनाओं की प्रगति धीमी रहने से संबंधित है।(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 10 (iv) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(ii) को इस आधार पर आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया कि श्री कुमार के द्वारा कार्यों की प्रगति में तेजी लाने हेतु कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया और सुनवाई के दौरान उनके द्वारा धीमी प्रगति के लिए संवेदक के विरूद्ध ठोस कार्रवाई करने का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने मंतव्य में कुल 10 योजनाओं की प्रगति धीमी रहने के आरोप के विरूद्ध मात्र 06 योजनाओं की (आरोप पत्र में अंकित तालिका के क्रमांक-04, 05, 06, 07, 08 एवं 09) प्रगति को धीमी माना गया है।

(v) उक्त के संबंध में श्री कुमार के द्वारा 06 योजनाओं की प्रगति, जिसे संचालन पदाधिकारी ने धीमी माना है, योजना तालिका क्रमांक-04, 06, 07 के संबंध में अंकित किया है कि कार्य की प्रगति धीमी रहने के कारण संवेदक पर LD लगाये जाने के साथ उसे Debar किया गया। योजना तालिका क्रमांक-05 के संबंध तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के द्वारा की गयी समीक्षात्मक बैठक में रखे गये Progress Report 2020-21 का संदर्भ देते हुये प्रगति धीमी रहने के कारण भू-अर्जन तथा आवंटन की समस्या बताया गया है। योजना तालिका क्रमांक-08 के धीमी प्रगति का कारण इस योजना को Descope करने का प्रस्ताव मुख्यालय स्तर पर विचाराधीन होना बताया गया है, जबकि योजना तालिका क्रमांक-09 को विभागीय वेवसाईट पर Uploaded Progress Report के आधार पर कार्य की धीमी प्रगति नहीं होना अंकित किया गया है।

(vi) श्री कुमार के द्वारा उक्त बचाव बिन्दुओं के साक्ष्य के रूप में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के द्वारा की गयी समीक्षात्मक बैठक में रखे गये Progress Report 2020-21 को संलग्न कर प्रस्तुत किया गया है, जिसके Remarks Column में तदेन अपर मुख्य सचिव के द्वारा योजनावार अंकित Remarks निम्नवत्‌ हैंः-

(i) तालिका क्रमांक-04 के योजना में अंकित Remark "Agency slow, must be completed this month"
(ii) तालिका क्रमांक-05 के योजना में अंकित Remark "Allotment is an issue"
(iii) तालिका क्रमांक-06 के योजना में अंकित Remark "Likely to be completed by 31.12.2020"
(iv) तालिका क्रमांक-07 के योजना में अंकित Remark "Likely to be completed by 31.12.2020"
(v) तालिका क्रमांक-08 के योजना में अंकित Remark "FS to visit this month"
(vi) तालिका क्रमांक-09 के योजना में अंकित Remark "FS to visit this month"

(vii) उक्त Progress Report में कृत कार्रवाई/किये जाने वाले कार्रवाई के संबंध में अंकित प्रविष्टि के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि तदेन अपर मुख्य सचिव के द्वारा सभी 06 (छः) योजनाओं के संबंध में पूर्व से अंकित प्रविष्टि के उलट एक तरह से प्रतिकूल Remarks ही अंकित किया गया है। उल्लेखनीय है कि इसी Report के आधार पर स्वयं तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के द्वारा विभागीय पत्रांक-5856(एस) दिनांक-05.10.2024 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी, जिसे पुनः उनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र में भी साक्ष्य के रूप में संलग्न किया गया है। अतः श्री कुमार के द्वारा अपने बचाव में रखे कंडिका-(v) का तथ्य निराधार एवं तथ्य से परे है। अतएव आरोप संख्या-(ii) आंशिक रूप से प्रमाणित होता है।

(viii) आरोप संख्या-(iii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा यह निष्कर्ष गठित किया है कि आरोप संख्या-(iii) के अंतर्गत उल्लिखित अधिकांश लांक्षण आरोप संख्या-(i) एवं (ii) का ही पुनरावृति है। इस आरोप में कोई नया लांक्षण आरोपित पदाधिकारियों के विरूद्ध प्रतीत नहीं होता है, अतएव आरोप संख्या-(i) एवं (ii) में दिये गये निष्कर्ष आरोप संख्या-(iii) के लिए लागू होता है। उक्त संबंध में आरोपी श्री कुमार के द्वारा अपने उत्तर के तहत्‌ मुख्य रूप से यह उल्लेख किया गया है कि आरोप संख्या-(iii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या--(i) एवं (ii) को ही पुनरावृति माना है। चूँकि आरोप संख्या--(i) एवं (ii) संलग्न साक्ष्यों एवं तथ्यों से प्रमाणित नहीं होते हैं, इसलिए आरोप संख्या-(iii) भी प्रमाणित नहीं होता है। उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-(i) को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-(ii) को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का निष्कर्ष गठित किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा दो भिन्न-भिन्न मंतव्यों को आरोप संख्या-(iii) में मानने का निष्कर्ष दिया गया, जो युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में आरोप संख्या-(iii) को अप्रमाणित भी माना जा सकता है और आंशिक रूप से प्रमाणित भी माना जा सकता है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा विरोधाभाषी मंतव्य दिया गया है। आरोप संख्या-(iii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा कोई स्पष्ट मंतव्य नहीं दिये जाने के आलोक में इस आरोप के संदर्भ में श्री कुमार का उत्तर स्वीकृत किया जाता है। 4. उपर्युक्त सम्यक्‌ विभागीय समीक्षा में श्री नरसिंह कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-02, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सुरसंड, पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी के विरूद्ध गठित आरोपों में से आरोप संख्या-(ii) आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने की स्थिति में इनके द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को11 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 अस्वीकृत करते हुये उक्त आंशिक रूप से प्रमाणित आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(v) के तहत्‌ निम्न दंड संसूचित किया जाता हैः-

(i) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।'' (ii) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह्‌ भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि के रूप में मानी जायेगी।

5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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30 दिसम्बर 2024

सं0 निग/सारा-01 (पथ) आरोप-52/2020-6606(s)--श्री संजय कुमार सिन्हा, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, बक्सर सम्प्रति सहायक अभियंता, सेतु शोध एवं विकास प्रमंडल-02, सेतु प्रबंधन उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पथ प्रमंडल, बक्सर पदस्थापन अवधि में निमेज-सेमरा-गाय घाट-गंगौली पथ के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य में पायी गयी अनियमितता के आलोक में उनसे आरोप पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक-3206 (एस) दिनांक 10.07.2024 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में आरोप के निम्नलिखित दो बिन्दु है :-

(i) पथ के 8th kmमें कराये गये SDBC Gr-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा औसतन 4.17% पाया गया जबकि विभागीय मार्गदर्शिकानुसार Tolerance Limit 4.19% है।

(ii) पथ के 8th kmमें कराये गये WMM कार्य में औसत FI 49.04% पाया गया जबकि विभागीय मार्गदर्शिकानुसार Tolerance Limit 40% है। 2. श्री सिन्हा ने पत्रांक-शून्य दिनांक 05.08.2024 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा आरोप संख्या-(i) के संबंध में प्रतिवेदित किया गया है कि आरोप पत्र में SDBC Gr-II कार्य के मद के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी है, जबकि Agreement में SDBC Gr-I अंकित है।

Agreement के Bill of Quantities (BOQ) के Sl. No.-8 के कार्य मद SDBC के item of work में Gr-I अंकित है। Agreement के BOQ में Anomaly को दृष्टिगत रखते हुए आरोप संख्या-(i) के संबंध में श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए उन्हें उक्त आरोप से मुक्त किया जाता है। 3. आरोप संख्या-(ii) के संबंध में श्री सिन्हा ने कोई ठोस साक्ष्यगत बचाव का आधार प्रस्तुत नहीं किया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत आलोच्य पथ के 8th km में कराये गये WMM कार्य में औसत FI 49.04% पाया गया है, जबकि विभागीय मार्गदर्शिकानुसार Tolerance Limit 40% है। विभागीय समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित पाये गये आरोप संख्या-(ii) के लिए श्री संजय कुमार सिन्हा, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, बक्सर सम्प्रति सहायक अभियंता, सेतु शोध एवं विकास प्रमंडल-02, सेतु प्रबंधन उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के स्पष्टीकरण-3 के अन्तर्गत निम्नलिखित दण्ड अधिरोपित किये जाते है :- 'चेतावनी, जिसकी प्रविष्टि उनके चरित्रपुस्त में की जायेगी।'' 4. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, अवर सचिव।

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5 फरवरी 2025

सं0 निग/सारा-01 (पथ) आरोप-33/2019-867(s)--श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (दक्षिण), पथ निर्माण विभाग के कार्यालय में प्रतिनियुक्त के पथ प्रमंडल डिहरी-ऑन-सोन के पदस्थापन अवधि में अकबरपुर-यदुनाथपुर पथ के कि॰मी॰ 24.50 से 45.60 (कुल 21.10 कि॰मी॰) में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के प्राक्कलन गठन में पायी गयी अनियमितता के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-9658 (एस) दिनांक 06.11.2019 द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-9839 (एस) दिनांक 13.11.2019 के द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री प्रकाश के विरूद्ध गठित किये गये आरोप के बिन्दु निम्नवत्‌ है :-

(i) पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन, के अन्तर्गत अकबरपुर-यदुनाथपुर पथ के कि॰मी॰ 24.50 से कि॰मी॰ 45.60 (कुल 21.10 कि॰मी॰) में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के प्राक्कलन गठन में अनियमितता बरती गयी।(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 12 (ii) निविदा निष्पादन के उपरांत मेसर्स बीरेन्द्र प्रसाद सिंह का परिवाद पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें शिकायत की गयी कि इस कार्य के लिए जो प्राक्कलन गठित किया गया, उसमें सरजमीन की आवश्यकता से अधिक मात्रा में सामग्री का प्रावधान कर दिया गया है, ताकि संवेदक एवं अभियंता के द्वारा सरकारी राशि का दुरूपयोग किया जा सके।

(iii) उक्त शिकायत पत्र के आलोक में आलोच्य पथ की जाँच उड़दस्ता प्रमंडल, संख्या-4 से करायी गयी, जिसके जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-192, दिनांक-11.08.2017 से निम्न त्रुटियाँ परिलक्षित होता हैः-

(a) कि॰मी॰ 33.00 से 45.60 के बीच existingनन बिटुमिनस लेयर 373.21mm पाया गया है, जबकि प्राक्कलन में 200mm दिखाया गया है।

(b) उक्त आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 33.0 से 45.6 हेतु प्राक्कलन में प्रावधानित Existing Crust के तुलना में स्थल पर उड़नदस्ता दल द्वारा Crust Thickness अधिक पाया गया, जिससे यह सिद्ध होता है कि Exaggerated प्राक्कलन का गठन किया गया है।

(c) तथ्यों से विदित होता है कि तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ओन-सोन ने बिना कार्यस्थल का भ्रमण किये हुए प्राक्कलन बनाया है।

उपर्युक्त पायी गयी त्रुटियाँ यह सिद्ध करता है कि आलोच्य कार्य के लिए गठित प्राक्कलन Exaggerated था, ताकि सरकारी राशि का गबन किया जा सके। इसके लिए श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन दोषी प्रतीत होते है।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-147 अनु॰, दिनाक 31.03.2023 के द्वारा एतद संबंधी जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री प्रकाश के विरूद्ध गठित सभी चार आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित होने संबंधी मंतव्य प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होकर इसकी प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्राक-3766 (एस) दिनांक 03.07.2023 के द्वारा श्री प्रकाश से लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री प्रकाश ने पत्रांक-30 अनु॰, दिनांक 14.07.2023 के द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया।

3. श्री प्रकाश ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से अंकित किया है कि उड़नदस्ता जाँच दल के द्वारा निर्धारित पद्धति के अनुरूप तीन चैनेज पर तीन स्थान (Left, Right एवं Middle) में पथ कटिंग कर Thickness की जाँच नहीं की गयी है।

उपर्युक्त के संबंध में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न Thickness Chart से स्पष्ट होता है कि आलोच्य पथ के जिन पथांशों के संबंध में आरोप लगाया गया था, उनमें से 02 कि॰मी॰ यथा-37वे एवं 42वें कि॰मी॰ का चयन कर निर्धारित पद्धति के अनुरूप तीन चैनेज पर तीन स्थान (Left, Right एवं Middle) में पथ की कटिंग कर Thickness की जाँच की गयी है। इस प्रकार श्री प्रकाश का यह कहा जाना कि पथ की जाँच निर्धारित पद्धति के अनुरूप नहीं की गयी है, तथ्यगत नहीं है। विभागीय तकनीकी समति द्वारा भी इस तथ्य को संपुष्ट किया गया है।

4. श्री प्रकाश के द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में यह उल्लेख किया गया है कि पथ में पाये गये अवयवों की ग्रेडिंग एवं गुणवत्ता की जाँच नहीं की गयी, जबकि तथ्य यह है कि आरोप का बिन्दु अवयवों की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है, बल्कि प्राक्कलन बनाने में Existing crust की मुटाई को वास्तविकता से कम दर्शाये जाने से संबंधित है। अतः आरोपी का उक्त कथन तथ्यगत नहीं है।

5. उपर्युक्त के अतिरिक्त श्री प्रकाश ने अपने उत्तर में यह भी अंकित किया है कि उनके द्वारा विषयांकित उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन को मान्‌नीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है एवं उक्त वाद में I.A भी दायर किया गया है।

इस संबंध में तथ्य यह है कि श्री प्रकाश के द्वारा मान्‌नीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-25450/2019 दायर किया गया था, जिसमें ऐसा प्रतीत होता है कि इनके द्वारा I.A भी दायर किया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त वाद को दिनांक 20.06.2023 को पारित न्यायादेश के तहत वादी के याचिका को Disposed of कर दिया गया है। इस न्यायादेश में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के संबंध में कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया गया है। अतः आरोपी द्वारा मान्‌नीय उच्च न्यायालय में वाद दायर किये जाने संबंधी संदर्भ दिये जाने का कोई औचित्य नहीं है।

6. मामले की सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में श्री सूरज प्रकाश के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-30 अनु॰, दिनांक 14.07.2023 को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-4555 (एस) दिनांक 18.09. 2024 के द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध निम्नलिखित दंड संसूचित किया गया :-

''02 (दो) वर्षो की अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दण्ड।'' 7. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री प्रकाश ने पत्रांक-शून्य, दिनांक 30.09.2024 के द्वारा पुनिर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया, जिसमें उन्होंने उन सब तथ्यों का ही अंकन किया है जो विभागीय कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा अपने बचाव-बयान के रूप में संचालन पदाधिकारी को समर्पित किया गया था। उल्लेखनीय है कि संचालन पदाधिकारी ने श्री प्रकाश के द्वारा दिये गये बचाव-बयान के संबंध में अंकित किया है कि आलोच्य कार्य का प्राक्कलन DPR Consultant के द्वारा तैयार किया गया है एवं इसके विपत्र का भी भुगतान किया गया है। वस्तुतः Consultant के द्वारा13 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 तैयार किये गये DPR के प्रावधान एवं Crust के Composition के मिलान की आंशिक जबावदेही सहायक अभियंता की भी होती है। DPR Consultant के स्तर से मूलतः अनियमितता बरती गयी है, जिसको पकड़ने में श्री सूरज प्रकाश बतौर सहायक अभियंता-अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में विफल रहे।

8. संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोपों के संबंध में गठित किये गये मंतव्य पर सक्षम प्राधिकार के स्तर से सहमति व्यक्त की गयी है तथा इसी के आधार पर इनसे द्वितीय कारण-पृच्छा की मांँग की गई है। श्री सूरज प्रकाश के द्वारा अपने बचाव में अंकित किये गये तथ्यों को पूर्व में संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच के क्रम में निराकरण करते हुए अमान्य कर दिया गया है तथा इसपर विभागीय सहमति भी है। साथ ही श्री प्रकाश ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर में भी Thickness की जाँच आदि से संबंधित तथ्यों को अंकित किया है, जिसे विभागीय समीक्षोंपरांत अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध दण्ड अधिरोपित किया गया है।

उपर्युक्त कंडिका-7 एवं 8 के अंकित तथ्यों के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (दक्षिण), पथ निर्माण विभाग के कार्यालय में प्रतिनियुक्त के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य, दिनांक 30.09.2024 को अस्वीकृत किया जाता है।

9. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, अवर सचिव।

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3 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-01 (पथ) आरोप-57/2022-59(s)--श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, तकनीकी परीक्षक, कोषांग, निगरानी विभाग, बिहार, पटना के पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन पदस्थापन काल में निमियाडीह-चितौली पथ के कि॰मी॰ 0 से 15.60 में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 के द्वारा दिनांक 04.07. 2019 एवं दिनांक 21.01.2020 तथा उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 के द्वारा दिनांक 19.07.2019 को की गयी। एतद्‌ संबंधी जाँच प्रतिवेदन उड़नदस्ता प्रमंडल, संख्या-04 के पत्रांक-208 अनु॰ (गो॰), दिनांक 15.11.2019 के द्वारा समर्पित किया गया, जिसके विभागीय समीक्षोपरांत उपर्युक्त पथ कार्य में निम्नलिखित त्रुटि पायी गयी :-

''पथ के 6वे, 8वें एवं 13वें कि॰मी॰ में कराये गये SDBC Gr-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसतन मात्रा क्रमशः 4.26%, 4.22% एवं 3.75% पायी गयी है। पूरे पथ के लिए अलकतरा की औसतन मात्रा 4.076% पायी गयी जो विभागीय मार्गदर्शिकानुसार अलकतरा की औसत मात्रा 4.09% से कम है।''

2. उक्त पायी गयी त्रुटि से संबंधित एकमात्र आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-5090 (एस) दिनांक 23.08.2023 के द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुए श्री पाण्डेय से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उन्होंने पत्रांक-शून्य, दिनांक 19.12.2023 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से यह तथ्य अंकित किया गया है कि कार्य संपादन के समय प्रमंडल में संलग्न सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल से प्रतिवेदन लिया गया, जिसमें बिटुमीन की मात्रा Satisfactory प्रतिवेदित किया गया। इसके अतिरिक्त स्पष्टीकरण में अंकित है कि MORTH के प्रावधानानुसार Sample Collection हेतु कोर कटर का इस्तेमाल किये जाने का प्रावधान है, जबकि उड़नदस्ता दल द्वारा Sample Collection हेतु छेनी-हथौड़ी का प्रयोग किया गया है। इस विधि से Sample Collection करने में Sample के छोटे-छोटे टुकड़े का संग्रहण सही तरीके से नहीं हो पाता है।

3. श्री पाण्डेय के स्पष्टीकरण के तकनीकी बिन्दुओं को देखते हुए इसकी तकनीकी एवं विभागीय समीक्षोपरांत यह पाया गया कि उनके द्वारा बचाव में दिया गया तथ्य मान्य नहीं है तथा उन्होंने अलकतरा की मात्रा को Tolerance Limit से कम पाये जाने के संबंध में कोई ठोस साक्ष्यगत आधार प्रस्तुत नहीं किया है।

4. अतः विभागीय समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन, सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, तकनीकी परीक्षक, कोषांग, निगरानी विभाग, बिहार, पटना के स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-शून्य, दिनांक 19.12.2023 को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 14 (I) के तहत निम्नलिखित दण्ड अधिरोपित किये जाते है :- ''आरोप वर्ष 2019-20 के लिए निन्दन।''

5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 14

3 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-01 (पथ) आरोप-57/2022-66(s)--श्री वृन्दावन राय, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक 30.06.2021) के उक्त पदस्थापन काल में निमियाडीह-चितौली पथ के कि॰मी॰ 0 से 15.60 में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 के द्वारा दिनांक 04.07.2019 एवं दिनांक 21.01.2020 तथा उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 के द्वारा दिनांक 19.07. 2019 को की गयी। एतद्‌ संबंधी जाँच प्रतिवेदन उड़नदस्ता प्रमंडल, संख्या-04 के पत्रांक-208 अनु॰ (गो॰), दिनांक 15.11. 2019 के द्वारा समर्पित किया गया, जिसके विभागीय समीक्षोपरांत उपर्युक्त पथ कार्य में निम्नलिखित त्रुटि पायी गयी :-

''पथ के 6वे, 8वें एवं 13वें कि॰मी॰ में कराये गये SDBC Gr-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसतन मात्रा क्रमशः 4.26%, 4.22% एवं 3.75% पायी गयी है। पूरे पथ के लिए अलकतरा की औसतन मात्रा 4.076% पायी गयी जो विभागीय मार्गदर्शिकानुसार अलकतरा की औसत मात्रा 4.09% से कम है।''

2. उक्त पायी गयी त्रुटि से संबंधित एकमात्र आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-4937 (एस) दिनांक 19.08.2023 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139 के तहत श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उन्होंने पत्र दिनांक 26.08. 023 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से यह तथ्य अंकित किया गया है कि MORTH के प्रावधानानुसार Sample Collection हेतु कोर कटर का इस्तेमाल किये जाने का प्रावधान है, जबकि उड़नदस्ता दल द्वारा Sample Collection हेतु छेनी-हथौड़ी का प्रयोग किया गया है। इस विधि से Sample Collection करने में Sample के छोटे-छोटे टुकड़े का संग्रहण सही तरीके से नहीं हो पाता है।

3. श्री राय के स्पष्टीकरण के तकनीकी बिन्दुओं को देखते हुए इसकी तकनीकी एवं विभागीय समीक्षोपरांत यह पाया गया कि उनके द्वारा बचाव में दिया गया तथ्य मान्य नहीं है तथा उन्होंने अलकतरा की मात्रा को Tolerance Limit से कम पाये जाने के संबंध में कोई ठोस साक्ष्यगत आधार प्रस्तुत नहीं किया है।

4. अतः विभागीय समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में श्री वृन्दावन राय, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक 30.06.2021) के स्पष्टीकरण उत्तर पत्र दिनांक 26.082023 को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 (सी) के तहत निम्नलिखित दण्ड अधिरोपित किये जाते है :-

''श्री राय के पेंशन से 02 (दो) वर्षो तक 05 (पाँच) प्रतिशत पेंशन की कटौती का दण्ड।'' 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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24 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-05 (लोको)-3015/2002-575(s)-- स्व॰ शिव कुमार ठाकुर, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, पटना सम्प्रति दिनांक-31.01.2000 को सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, पत्राचार का पता-2403, B1, Cleo County, Sector 121, Noida, UP-201301 द्वारा ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए इनके विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग (ग्राम्य अभियंत्रण संगठन एवं पंचायती राज) के पत्रांक-2092 अनु0 दिनांक-10.07.95 से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3151 (एस) अनु0 दिनांक-27.04.96 द्वारा इनके सेवाकाल में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसे दिनांक-31.01.2000 को इनकी वार्धक्य सेवानिवृति के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3739 (एस) अनु0 दिनांक-29.05. 02 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

2. संचालन पदाधिकारी के अनेक पत्रों द्वारा सूचित किये जाने के बावजूद भी स्व॰ ठाकुर विभागीय कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुए। तदोपरांत संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-345 अनु0 दिनांक-05.05.04 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें इनके विरूद्ध गठित सभी 14 (चौदह) आरोप के प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर निर्णय के क्रम में श्री ठाकुर के द्वारा दिनांक 21.11.2008 को संचालन पदाधिकारी के समक्ष बिना साक्ष्य के अपना बचाव-बयान समर्पित किया गया। मामले की विभागीय समीक्षा के उपरांत पत्रांक-6890 (एस) अनु0 दिनांक-25.06.09 द्वारा श्री ठाकुर से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी तथा पत्रांक-9949 (एस) दिनांक-09.09.09 द्वारा स्मारित भी किया गया। 4. स्व॰ ठाकुर द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित नहीं करने के उपरांत निर्णय हेतु सचिव स्तर पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए विभागीय पत्रांक-10482 (एस) दिनांक-16.07.10, पत्रांक-11011 (एस) दिनांक-28.07.10 एवं पत्रांक-12440 (एस) दिनांक-19.08.10 द्वारा श्री ठाकुर को तीन बार व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया, परन्तु श्री ठाकुर द्वारा हर बार विषय से हट कर नये-नये तथ्यों को अंकित करते हुए इसे टालने का प्रयास किया जाता रहा। श्री ठाकुर द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना मेंं दायर याचिका में फैसला आने के पश्चात ही द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का उल्लेख किया गया। बाध्य होकर विभाग द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा समर्पित करने हेतु प्रेस विज्ञप्ति निर्गत की गयी।15 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 5. वर्णित परिस्थिति में संपूर्ण मामले के समीक्षोपरांत पाया गया कि विभागीय कार्यवाही एवं न्यायालीय मामला अलग-अलग है। श्री ठाकुर के मामले के निष्पादन में पारदर्शिता एवं आरोपी को अपना बचाव बयान एवं पक्ष रखने का भरपूर अवसर दिया गया, किन्तु श्री ठाकुर द्वारा विषय से हटकर मामले को लगातार टालने का प्रयास किया जाता रहा है। श्री ठाकुर के विरूद्ध गठित आरोप प्रपत्र-'क' में इनस रु0 4,78,780.00 (चार लाख अठहत्तर हजार सात सौ अस्सी) रूपये की वसूली के आरोप को भी प्रमाणित पाया गया।

6. उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही के अन्तर्गत श्री ठाकुर के विरूद्ध प्रपत्र-'क' के तहत गठित आरोपों के प्रमाणित पाये जाने की स्थिति में निर्णित दंड अधिरोपण के बिन्दु पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श प्राप्त कर विभागीय अधिसूचना संख्या-6866 (एस) दिनांक-23.07.14 द्वारा श्री ठाकुर, सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध सरकार के निर्णयानुसार इनके पेंशन से 20 प्रतिशत की कटौती का दंड संसूचित किया गया।

7. उक्त संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री ठाकुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-18386/2008 दायर किया गया, जिसमें दिनांक-17.02.17 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश को Set aside करते हुए नये सिरे से जाँच की कार्रवाई करने हेतु अनुशासनिक प्राधिकार को Remand back किया गया, जिस पर विधि विभाग से प्राप्त विधिक परामर्श के आलोक में सम्यक्‌ विचारोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार श्री ठाकुर के विरूद्ध उक्त संसूचित दंडादेश अधिसूचना संख्या-6866 (एस) दिनांक-23.07.14-सहपठित ज्ञापांक-6867 (एस) दिनांक-23.07.14 को निरस्त किया गया।

8. पुनः नये सिरे से आरोप पत्र गठित कर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-03 को अप्रमाणित एवं शेष 13 आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के संबंध में श्री ठाकुर के उपलब्ध तीन विभिन्न स्थायी/पत्राचार पता पर द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। तीनों विभागीय पत्र डाक विभाग द्वारा यह अंकित करते हुए वापस कर दिया गया कि वे उक्त पता पर नहीं रहते है। श्री ठाकुर को उक्त पत्रों की तामिला नहीं हो पाने के फलस्वरूप उन्हें प्रेस विज्ञाप्ति के माध्यम से सूचना प्रकाश की तिथि के एक सप्ताह के अन्दर विभागीय मुख्यालय में उपस्थित होकर द्वितीय कारण-पृच्छा से संबंधित विभागीय पत्र प्राप्त करने तथा पत्र प्राप्ति के 15 दिनोें के अन्दर द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित करने का निदेश दिया गया। इसके बावजूद भी श्री ठाकुर के द्वारा कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया गया। श्री ठाकुर को द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किये जाने हेतु विभाग द्वारा पर्याप्त अवसर प्रदान किये जाने के उपरांत भी द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर प्राप्त नहीं हो सका। तदोपरान्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री ठाकुर के विरूद्ध प्रमाणित प्रतिवेदित आरोपों का उन्हें दोषी पाते हुए उनके विरूद्ध दण्ड अधिरोपण पर निर्णय हेतु प्रस्ताव गठित किया गया।

9. मामले में अंतिम निर्णय लिये जाने के क्रम में श्रीमती इन्दिरा ठाकुर के पत्रांक-शून्य, दिनांक 29.06.2024 द्वारा विभाग को यह सूचना दी गयी कि श्री शिव कुमार ठाकुर, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता की मृत्यु दिनांक 17.09.2023 को हो गयी हैं। प्राप्त पत्र में श्रीमती इन्दिरा ठाकुर के द्वारा स्व॰ ठाकुर के मृत्यु प्रमाण-पत्र की प्रति भी संलग्न किया गया। विभागीय पत्रांक-4576 (एस) दिनांक-19.09.2024 द्वारा मृत्यु प्रमाण-पत्र की सत्यता की जाँच हेतु पत्र रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, नोएडा, गौतम बुद्ध नगर, उत्तरप्रदेश, पिन कोड-201301 को भेजा गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गौतमबुद्धनगर, नोएडा के पत्रांक-4218, दिनांक 15.10.2024 द्वारा मृत्यु प्रमाण-पत्र को सत्यापित किया गया। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में मामले की पुनः समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8811, दिनांक-18.07.2017 की कंडिका-4 में निहित प्रावधानों के आलोक में स्व॰ शिव कुमार ठाकुर, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता की दिनांक-17.09.2023 को मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप उनकेे विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को औपचारिक रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

10. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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5 फरवरी 2025

सं0 निग/सारा-1 (पथ)-आरोप-57/2018-865(s)--श्री सुनील कुमार सुमन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कोचस सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (उप महाप्रबंधक), बिहार चिकित्सा सेवाएँ एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड, पटना के पथ प्रमण्डल, कोचस पदस्थापन अवधि में OPRMC (Output & Performance Based Road Assets Maintenance Contract) के अंतर्गत पैकेज संख्या-61 में सासाराम-चौसा राज्य उच्च पथ के दीर्घकालीन पथ संधारण में पायी गयी गंभीर अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-9691 (एस), दिनांक-20.12.2018 के द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-02 (एस) दिनांक-01.01.2019 के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय अधिसूचना संख्या-4603 (एस), दिनांक-10.09.2021 के द्वारा श्री सुमन के निलंबन को समाप्त किया गया। उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप के बिन्दु निम्नलिखित है :-

(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 16

(i) कि0मी0 0.00 से कि0मी0 22.00 के निरीक्षण में तीसरे कि0मी0 में Patch Repair का कार्य कराया जा रहा था। इसी पथांश में 300 मी0 में पूर्व में ही PCC कार्य कराया गया था। स्थल पर मौजूद सम्बद्ध पदाधिकारियों द्वारा सूचित किया गया कि बिटुमिनस कार्य द्वारा पथ परत को सुगम कराया गया था, परंतु बगल में नाला एवं बसावट होने के कारण पानी सड़क पर आ जाता है, जिसके संबंध में कार्यपालक अभियंता के स्तर पर कोई निरोधात्मक उपाय नहीं किये गये। फलतः प्रासंगिक पथ क्षतिग्रस्त हो गया।

(ii) Pot Patch की मरम्मति करायी गयी है जिसकी गुणवत्ता अत्यंत ही कमजोर है। (iii) कि0मी0 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के Riding Surface में कई स्थानों पर Pots पाये गये है। उक्त पथ का संधारण OPRMC पैकेज (वर्ष 2014 से फरवरी, 2019) के तहत कराया जा रहा है एवं OPRMC Contract की विहित शर्त्तों के अनुरूप पथ की Riding Quality 3500 mm तक रखने की है, परंतु इस पथ की Riding Quality भी पूर्णरूपेण असंतोषजनक पायी गयी जिसके कारण पथ के रख-रखाव की स्थिति अत्यंत ही दयनीय हो गयी।

(iv) अंकनीय है कि दो माह पूर्व तक OM (Ordinary Maintainance) घटक के अंतर्गत संवेदक को भुगतान होते रहे है, जिससे यह परिलक्षित होता है कि पथ का बिना रख-रखाव सुनिश्चित कराये संवेदक को भुगतान किया जाता रहा, जो सरकारी राशि का दुरूपयोग एवं संवेदक के साथ मिलीभगत की पुष्टि करता है। इसके लिए श्री सुमन दोषी प्रतीत होते है।

(v) कार्यपालक अभियंता का यह दायित्व है कि वे पथो का निरीक्षण माह में कम से कम एक बार अवश्य की जाय एवं तदोपरांत यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसका Rectification का कार्य responce time में ही संवेदक के माध्यम से सुनिश्चित कराया जाना अपेक्षित होता है, जिसकी आलोच्य मामले में पूर्ण रूप से उपेक्षा की गई। इस प्रकार श्री सुमन के द्वारा अपने पद पर रहते हुए वांछित कार्रवाई सुनिश्चित नहीं कर विहित पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती गई।

2. श्री सुमन के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1271 अनु॰ दिनांक-22.04.2019 से प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी के द्वारा उक्त सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-247 (एस), दिनांक-13.01.2021 के द्वारा श्री सुमन से लिखित अभिकथन के रूप में अभ्यावेदन की मांग की गई। असहमति का सृजित बिन्दु निम्नवत्‌ है :-

(i) आरोप संख्या-01 के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जबकि विभागीय समीक्षा में पाया गया कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में आपके द्वारा आलोच्य पथ के घनी बसावट एवं स्थल पर पानी निकासी का अपेक्षित सुविधा नहीं होने के कारण पथ हमेशा क्षतिग्रस्त होने का तर्क दिया गया। इस तथ्य से भलिभांति अवगत होने के बावजूद इसके स्थाई समाधान हेतु आपके द्वारा ससमय आवश्यक कार्रवाई नहीं की गयी। पथ की स्थाई मरम्मति हेतु आपके द्वारा DPR का प्राक्कलन पत्रांक-1102 दिनांक-09.10.2018 द्वारा अधीक्षण अभियंता, भोजपुर पथ अंचल, आरा को समर्पित किया गया, जिसे काफी विलम्ब से कार्रवाई किया जाना माना जायेगा। यदि आपके द्वारा उक्त संबंध में ससमय कार्रवाई की गयी होती तो पथ के लगातार क्षतिग्रस्त होने की समस्या का निराकरण ससमय किया जा सकता था। साथ ही OPRMC के प्रावधानों के अनुसार पथ को सतत्‌ संधारित किये जाने एवं अच्छी स्थिति बनाये रखने हेतु संवेदक के माध्यम से Engineer-In-Charge के रूप में आपका दायित्व था, जिसका अनुपालन आपके द्वारा नहीं किया गया।

(ii) आरोप संख्या-02 के संबंध में जाँच पदाधिकारी के द्वारा अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जो सहमति योग्य नहीं हैं, क्योंकि विभागीय कार्यवाही के क्रम में ही आपके द्वारा स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि आलोच्य पथ में अनेक कारणों से Patch Work की अधिकता है। पथ में Patch Work की अधिकता होना अर्थात्‌ बार-बार Patch Work कराया जाना इसकी खराब गुणवत्ता का ही द्योतक है।

(iii) आरोप संख्या-03 के संबंध में जाँच पदाधिकारी के द्वारा अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, जो सहमति योग्य नहीं हैं, क्योंकि आलोच्य पथ से संबंधित Videography report जो, विभागीय कार्यवाही के क्रम में आरोपी एवं संचालन पदाधिकारी को साक्ष्य के रूप में उपलब्ध कराया गया है, के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आलोच्य पथ के विडियोग्राफि रिपोर्ट में 15 (पन्द्रह) जगहों पर Irregular Rough Surface/Patches पाये गये हैं, जो कहीं-कहीं Continuous है। साथ ही जगह-जगह पर Road Cracking पायी गयी है, जिससे आपके विरूद्ध गठित आरोपों की पुष्टि होती है।

(iv) आरोप संख्या-04 के संबंध में भी संचालन पदाधिकारी का मंतव्य सहमति योग्य नहीं है, क्योंकि आलोच्य पथ के Videograpy report के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इसमें 15 (पन्द्रह) जगहों पर बड़ें पैमाने पर Irregular Rough Surface/Patches पाये गये है, इससे प्रतीत होता है कि आपके द्वारा Response Time में त्रुटियों का निराकरण नहीं कराया गया, जबकि दूसरी ओर OM मद में संवेदक को लगातार भुगतान होता रहा।17 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 (v) आरोप संख्या-05 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के द्वारा आपके बचाव-बयान के आधार पर अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है, जो सहमति योग्य नहीं है, क्योंकि विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में आपके द्वारा आलोच्य पथ का माह में एक बार निरिक्षण किये जाने की बात कही गयी है, परन्तु आपके द्वारा अपने कथन के समर्थन में कोई अभिलेख संलग्न नहीं किया गया है।

3. श्री सुमन ने पत्र दिनांक-22.03.2021 के द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा बचाव के निम्नलिखित मुख्य बिन्दु दिये गये :-

(i) आरोप संख्या-1 के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के संदर्भ में श्री सुमन ने मुख्य रूप से अंकित किया है कि इस पथ के क्षतिग्रस्त होने के कारण मात्र घनी बसावट एवं स्थल पर पानी निकासी ही नहीं है बल्कि पथांश का PCC परत काफी पुराना (13 वर्ष) होने एवं आरा-मोहनियाँ पथ के जर्जर होने के कारण वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस पथ पर बालू लदे अत्यधिक भारी वाहनों का परिचालन भी है। पुराने जीर्ण-शीर्ण PCC पथांश का समाधान OPRMC के प्रावधानित राशि से कतई संभव नहीं था बल्कि स्थायी मरम्मति ही एकमात्र समाधान था। इसके लिए उनके द्वारा कार्य का आकलन कर Provisional Sum के अन्तर्गत मुख्यालय से राशि की भी मांग की गयी। पथ के बृहद स्थायी मरम्मति /मजबूतीकरण हेतु निदेशानुसार उनके द्वारा DPR तैयार कर अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया। उन्होंने अंकित किया है कि जिस समय उन्हें निलंबित किया गया था उस समय DPR संबंधित मुख्य अभियंता से तकनीकी अनुमोदन प्राप्त कर प्रशासनिक स्वीकृति हेतु मुख्यालय स्तर पर भी प्रक्रियाधीन थी। उन्होंने पथांश के स्थायी मरम्मति हेतु घटना के तिथि से पूर्व ही हर संभव प्रयास किया।

(ii) आरोप संख्या-2 के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के संदर्भ में श्री सुमन ने मुख्य रूप से अंकित किया है कि Patch work एक बिटुमिनस कार्य है, ऐसी स्थिति में IRC के निदेशानुसार Patch work से नमूना संग्रह कर इसके विभिन्न मदों की गुणवत्ता जाँच किया जाना आवश्यक है, परन्तु विभाग द्वारा इसकी गुणवत्ता जाँच कराये बगैर आधारहीन तथ्यों के आधार पर खराब गुणवत्ता का आरोप लगाया गया है। उन्होंने विभिन्न परिस्थितिजन्य बाधाओं का उल्लेख करते हुए अंकित किया है कि पथ को Service Level तक बनाये रखने हेतु उन्होंने पथ में बार-बार Patch work कराया।

(iii) आरोप संख्या-3 के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के संदर्भ में श्री सुमन ने मुख्य रूप से अंकित किया है कि पथ के IRI (Internation Roughness Index) जाँच Bump Indicator से कराये बगैर ही आरोप पत्र गठित किया गया है, जिसमें Riding Quality के संबंध में आरोप प्रमाणित/तकनीकी साक्ष्य पर आधारित नहीं है बल्कि नेत्रानुमान मात्र पर आधारित है।

(iv) आरोप संख्या-4 के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के संदर्भ में श्री सुमन ने मुख्य रूप से अंकित किया है कि OPRMC प्रावधानों के तहत irregular rough surface/Patches का संधारण उनके द्वारा ससमय Response time के अन्दर संवेदक के माध्यम से कराया जाता रहा है और इसी आधार पर OM मद में संवेदक को भुगतान किया जाता रहा है। विदित हो कि आलोच्य पथ का संधारण OPRMC के Package No-61 के तहत किया जा रहा था, जिसमें कुल 09 (नौ) पथ थे। उक्त सभी पथों का OM मद का मासिक भुगतान समेकित रूप से किये जाने का प्रावधान है। किसी विशेष परिस्थिति में OM मद के अन्तर्गत कुल 27 (सताईस) तरह के त्रुटियों का response time में compliance नहीं किये जाने की स्थिति में weightage के आधार पर कटौती कर शेष पथांशों का भुगतान किये जाने का प्रावधान है। भुगतान किये जाने का मतलब यह नहीं है कि जिस पथ में सुधार कर दिया गया है उसमें भुगतान कर देने के बाद irregular rough surface उत्पन्न नहीं हो सकता है।

(v) आरोप संख्या-5 के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु के संदर्भ में श्री सुमन ने मुख्य रूप से अंकित किया है कि उनके द्वारा अपने क्षेत्राधीन पथों का माह में कम से कम एक बार या कभी-कभी इससे भी अधिक बार निरीक्षण किया गया है। OPRMC के अन्तर्गत संबंधित पथों का निरीक्षण माह में एक बार करते हुए Monthly Inspection Report OPRMC Cell में Online भेजे जाने के विभागीय निदेश के आलोक में उनके द्वारा माह में एक बार निश्चित रूप से पथों का निरीक्षण करते हुए तद्‌नुसार Monthly Inspecton Report OPRMC Cell में Online भेजा गया है।

4. श्री सुमन के द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर का विभागीय समीक्षा की गयी, तद्‌नुसार पाया गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा विषयांकित पथ के जीर्ण-शीर्ण अवस्था को सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। जिस पथ की मरम्मति करायी गयी उसकी गुणवत्ता अत्यन्त ही खराब पायी गयी तथा कार्य विशिष्टता के अनुरूप नहीं थे। इस पथ में जगह-जगह Patch work पाया गया तथा कई जगह Service Level तक Crack भी नजर आया। नियमानुसार Bituminous कार्य द्वारा Patch work से पथ निर्माण को सुगम कराया जाना था, लेकिन आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसका पालन नहीं किया गया। इसके समर्थन में Videography report के अनुसार पन्द्रह जगहों पर पथ में Pots(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 18 पाये गये। पथ का बिना रख-रखाव सुनिश्चित कराये संवेदक को OM (Ordinary maintenance) मद में भुगतान किया जाता रहा, जो सरकारी राशि का दुरूपयोग एवं आरोपित पदाधिकारी का संवेदक से मिलीभगत को दर्शाता है। 5. उपलब्ध अभिलेखों से यह भी स्पष्ट होता है कि आरोपित कार्यपालक अभियंता द्वारा आलोच्य पथ का नियमित निरीक्षण नहीं किया गया है, जिसके फलस्वरूप पथ की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। नोडल पदाधिकारी, OPRMC द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रतिवेदन एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार कई जगह पथ में Pots पाये जाने एवं Cracks पाया जाना स्पष्ट करता है कि पथों की मरम्मति विशिष्टता के अनुरूप नहीं की गयी है।

6. सम्यक समीक्षोपरांत यह स्पष्ट है कि पथाें के संधारण में गंभीर चूक बरती गयी है। श्री सुमन संविदा की शर्त्ताे को अनुपालन कराने में विफल रहे है, जो सरकारी सेवक के आचरण के अनुरूप नहीं है। उनके द्वारा नियमित पर्यवेक्षण नहीं करने से पथ की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। यह उनकी लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता का द्योतक है। उपर्युक्त कर्त्तव्यहीनता, दायित्व निर्वहन में चूक तथा सरकारी राशि का दुरूपयोग तथा लापरवारी का प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सुमन के अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005, यथा सशाेंधित नियमावली 2007 के नियम 14 (vi) के तहत ''संचयी प्रभाव से 04 (चार) वेतन वृद्धि पर रोक'' लगाये जाने के निर्णित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-4605 (एस) दिनांक-10.09.2021 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2733 दिनांक-22.12.2021 के द्वारा उक्त निर्णित दण्ड पर सहमति व्यक्त की गयी। तदालोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2863(एस) दिनांक-20.06.2022 के द्वारा श्री सुमन के विरूद्ध निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया गया :-

''संचयी प्रभाव से 04 (चार) वेतन वृद्धि पर रोक'' 7. उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री सुमन ने पत्र दिनांक-03.08.2022 के द्वारा अपना पुर्नविचार अभ्यावेदन समर्पित किया जिसमें मुख्य रूप से अंकित किया है कि उनके विरूद्ध गठित 05 (पाँच) आरोपों में से कौन-कौन से आरोप किस-किस आधार पर प्रमाणित किया गया है- यह निर्गत दण्डादेश में स्पष्ट नहीं किया गया है। श्री सुमन द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि पथ की Riding Quality संतोषजनक नहीं पाये जाने, पथ के Videography Report में 15 (पन्द्रह) जगहों पर Pots पाये जाने तथा कराये गये Patch Work की गुणवत्ता ठिक नहीं होने के आधार पर आलोच्य पथ के रख-रखाव की स्थिति अत्यंत दयनीय मानते हुए उनके विरूद्ध कठोर दण्ड अधिरोपित किया गया है, जबकि पथ की स्थिति दयनीय नहीं थी। Patch Work की तकनीकी जाँच कराये बगैर इसकी गुणवत्ता को खराब बताया जाना उचित नहीं है। श्री सुमन द्वारा यह तर्क दिया गया है कि गैर तकनीकी पदाधिकारियों के द्वारा त्रुटिपूर्ण विश्लेषण के कारण उनके विरूद्ध आरोप को प्रमाणित किया गया है।

8. श्री सुमन के पूर्णविचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा की गयी तथा पाया गया की उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में समर्पित किये गये तथ्यो/तर्कों के अतिरिक्त कोई नया तथ्य/तर्क उपलब्ध नहीं कराया गया है, लेकिन मामले की समीक्षा के क्रम में पाया गया की उनके विरूद्ध अधिरोपित दण्ड प्रमाणित पाये गये आरोपों के समानुपातिक नहीं है। उनके विरूद्ध अधिरोपित दण्ड प्रमाणित आरोपों की तुलना में excessive पाया गया।

अतः सम्यक समीक्षोपरान्त श्री सुनील कुमार सुमन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कोचस सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, (उप महाप्रबंधक), बिहार चिकित्सा सेवाएँ एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड, पटना के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14(vi) के तहत अधिसूचना संख्या-2863(एस) दिनांक-20.06.2022 के द्वारा संसूचित ''संचयी प्रभाव से 04 (चार) वेतन वृद्धि पर रोक'' के दण्ड को निम्नरूपेण पुनरीक्षित किया जाता है :-

(क) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 (v) के तहत ''संचयी प्रभाव के बिना 02 (दो) वेतनवृद्धियों पर रोक।''

9. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, अवर सचिव।

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10 फरवरी 2025

सं0 01/स्था॰-01/2018-1055(s)--श्री सुनील कुमार, अभियंता प्रमुख (मुख्यालय), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन), पथ निर्माण विभाग, बिहार पटना का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है ।

2. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण चन्द्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।19 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025

27 दिसम्बर 2024

सं0 1/स्था॰-21/2024-6580(s)--श्री सुनील कुमार, मुख्य अभियंता, पथ निर्माण विभाग सम्प्रति प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना को स्थानान्तरित करते हुए कार्यकारी व्यवस्था के अन्तर्गत अपने ही वेतनमान में अभियंता प्रमुख (मुख्यालय), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण चन्द्र श्रीवास्तव, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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18 जनवरी 2025

सं0 01/स्था॰-23/2024-396(s)--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक 13.10.2023 में निहित प्रावधान के आलोक में, अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली-2023 के क्रम में गठित विभागीय स्क्रीनिंग समिति की दिनांक 05.12.2024 को आयोजित बैठक में की गई अनुशंसा के आलोक में निम्न मुख्य अभियंता (असैनिक) को अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव के पद का विहित वेतनमान (वेतन स्तर-14) सहित, अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम मूलकोटि की वरीयता (सिविल लिस्ट)/मेधा सूची क्रमांक
1 2 3
1 श्री सुनील कुमार सिन्हा, मुख्य अभियंता 348 1987/619

2. सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक 13.10.2023 से निर्गत अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रभावी रहने की स्थिति में वरीय पदाधिकारी के आरोप मुक्त होने की स्थिति में कनीयतम्‌ पदाधिकारी, जिसको विहित वेतनमान्‌ सहित उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार प्रदान किया गया है, का कार्यकारी प्रभार तत्समय रिक्ति की उपलब्धता के आलोक में समाप्त करते हुए आरोप मुक्त पदाधिकारी को विहित वेतनमान्‌ सहित उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार प्रदान किया जाएगा। 3. उपर्युक्त पदाधिकारियों को पदभार ग्रहण करने की तिथि से अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार का आर्थिक लाभ निम्नरूपेण देय होगा :-

(क) संबंधित पदाधिकारी पदस्थापन होने तक पूर्व धारित पद पर ही उच्चतर पद का प्रभार ग्रहण करेंगे तथा पूर्व से धारित पद के कार्याें का भी निष्पादन करेंगे।

(ख) वैसे पदाधिकारी जो पूर्व से कार्यकारी व्यवस्था के अन्तर्गत अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभार में है उन्हें अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली 2023 के अधीन संबंधित उच्चतर पद का प्रभार देने हेतु निर्गत विभागीय अधिसूचना के विरूद्ध प्रभार ग्रहण की तिथि से आर्थिक लाभ देय होगा। 4. अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रावधानों के आलोक में उच्चतर पद का प्रभार प्राप्त करने वाले पदाधिकारियों के संबंध में भविष्य में अर्हत्ता को प्रभावित करने वाले किसी प्रकार की त्रुटि/विसंगति पाए जाने पर उन्हें प्रदत्त प्रभार आदेश को रद्द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा भुगतान की गई राशि की वसूली कर ली जाएगी। 5. कार्यकारी व्यवस्था के तहत विहित वेतनमान्‌ के साथ उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार माननीय उच्चतम्‌ न्यायालय में विचाराधीन सिविल अपील संख्या-4880/2017 बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य तथा अन्य सम्बद्ध वादों में पारित होने वाले अंतिम आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा। 6. यह अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक 13.10.2023 से निर्गत अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रावधानों के आलोक में की गई है, जो इस नियमावली में किसी भी परिवर्तन के फलाफल से प्रभावित होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुमित वत्स, अवर सचिव (प्र॰को॰)।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 52—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bihar.gov.in

(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 20

भाग-2

बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और

नियम आदि।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं-शुद्धि पत्र

27 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-1 (NH)-47/2014-599(s)--श्री अजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (योजना अनुश्रवण एवं गुण नियंत्रण)-3, मुख्य अभियंता, उत्तर का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के पदस्थापन काल के दौरान एन0एच0-98 के जसोईया मोड़ से दाउदनगर पथ में कराये गये कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए उनके विरूद्ध संसूचित दंडादेश को पुनरीक्षण हेतु अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसे सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत अधिसूचना संख्या-6274 (एस) दिनांक 11.12.2024 द्वारा अस्वीकृत किया गया।

2. उक्त अधिसूचना के कंडिका-4 के पैराग्राफ-2 में टंकण भूल के कारण अधिसूचना संख्या-11957 (एस) दिनांक 11.12.2024 अंकित हो गया है, जिसके स्थान पर अधिसूचना संख्या-11957 (एस) दिनांक 11.12.2014 पढ़ा जाय। 3. विभागीय अधिसूचना संख्या-6274 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-6275 (एस) दिनांक 11.12.2024 की शेष शर्त्ते एवं तथ्य यथावत रहेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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11 फरवरी 2025

सं0 निग/सारा-01 (पथ) आरोप-33/2019-1065(s)--श्री सूरज प्रकाश, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सहायक अभियंता, मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर), पथ निर्माण विभाग के कार्यालय में प्रतिनियुक्त के पुनर्विचार अभ्यावेदन अस्वीकृत करने से संबंधित अधिसूचना संख्या-867 (एस) दिनांक 05.02.2025 में उनका वर्त्तमान पदस्थापन टंकण भूलवश ''मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (दक्षिण), पथ निर्माण विभाग के कार्यालय में प्रतिनियुक्त'' अंकित हो गया है। 2. उपर्युक्त अधिसूचना में श्री सूरज प्रकाश का वर्त्तमान पदस्थापन जहाँ-जहाँ ''मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (दक्षिण), पथ निर्माण विभाग के कार्यालय में प्रतिनियुक्त'' अंकित है, उसे ''मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर), पथ निर्माण विभाग के कार्यालय में प्रतिनियुक्त'' पढ़ा जाय। 3. अधिसूचना संख्या-867 (एस) दिनांक 05.02.2025 की शेष तथ्य एवं शर्त्ते यथावत रहेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, अवर सचिव।

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20 जनवरी 2025

सं0 निग/सारा-01 (पथ) आरोप-57/2022-425(s)--श्री वृन्दावन राय, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक 30.06.2021) के उक्त पदस्थापन काल में निमियाडीह-चितौली पथ के कि॰मी॰ 0 से 15.60 में पथ संधारण कार्य सहित चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य पायी गयी अनियमितता के आलोक में प्रमाणित पाये गये आरोप के संबंध में बिहार पेंशन नियमावली के नियम,139 (सी) के तहत्‌ विभागीय अधिसूचना21 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 संख्या-66(एस) सहपठित ज्ञापांक-67(एस), दिनांक-03.01.2025 के द्वारा उनके विरूद्ध निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया गया है :- ''श्री राय के पेंशन से 02 (दो) वर्षो तक 05 (पाँच) प्रतिशत पेंशन की कटौती का दण्ड।'' 2. उक्त दण्डादेश में टंकण भूलवश ''02 (दो) वर्षो तक'' अंकित हो गया है, जिसके स्थान पर ''01 (एक) वर्ष तक'' पढ़ा जाये।

3. विभागीय अधिसूचना संख्या-66 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-67(एस) दिनांक-03.01.2025 की शेष शर्ते एवं तथ्य यथावत रहेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 52—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bihar.gov.in

(cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 22

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द । ————— सूचना -------

la0 241--म(cid:583), कु मार(cid:547) शोभा गु(cid:431)ा (Kumari Shobha Gupta (cid:466)पता-Mishri Lal Gupta, पित-Manish Kumar Gupta, िनवासी-Near Manish Medical Store, Mansoorgunj, Begampur, Patna-800009, वत(cid:91)मान िनवासी-A-44, Vijay Shree Jagat Apartment Near Gravity Mall, Kankarbagh, P.S.-Kankarbagh Patna-800020 Bihar शपथ प(cid:287) सं. 9040 (cid:465)द. 12.09.24 (cid:430)ारा सूिचत करती हू ं (cid:465)क मेरे सारे शै(cid:162)(cid:468)णक (cid:292)माण प(cid:287)(cid:585) म(cid:581) मेरा नाम Kumari Shobha Gupta है। आधार काड(cid:91) म(cid:581) Kumari Shobha Gupta alias Shobha Raniyer दज(cid:91) है। Kumari Shobha Gupta एवं Shobha Raniyer दोन(cid:585) नाम एक ह(cid:547) (cid:229)य(cid:466)(cid:416) का है जो म(cid:583) (cid:232)वयं हू ं। सभी काय(cid:607) एवं उ(cid:423)े(cid:230)य(cid:585) हेतु Kumari Shobha Gupta alias Shobha Raniyer के नाम से जानी व पहचानी जाऊं गी।

कु मार(cid:547) शोभा गु(cid:431)ा (Kumari Shobha Gupta).

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No. 242&&I, Bobby Mishra (बाँबी िम(cid:302)ा) D/o Kamaldev Shukla W/o Sanjeev Kumar Mishra (संजीव कु मार िम(cid:302)) Hasanpur Bagahi Narsinghpur, Dholi, Sakra, Muzaffarpur, Bihar- 843105 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.- 1366 dt. 20.11.24 that my name is written in my all educational documents as Bobby Kumari whereas in Aadhar, Pan Card written as Bobby Mishra (बॉबी िम(cid:302)ा), Bobby Mishra (बॉबी िम(cid:302)ा) एवं Bobby Kumari (बॉबी कु मार(cid:547)) both are same and one person. From now I shall be known as Bobby Mishra (बॉबी िम(cid:302)ा) for all future purposes.

Bobby Mishra (बाँबी िम(cid:302)ा).

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la0 243--मैं श्रेयष स्पर्ष (Shreyash Sparsh), पुत्र, श्री पुष्पेष कुमार, निवासी-ग्राम-तिलक ताजपुर, थाना-रून्नी सैदपुर, जिला-सीतामढ़ी, बिहार, वर्तमान पता-403, अन्नपूर्णा अपार्टमेंट, जलालपुर हाइट्‌स, जिला-पटना का निवासी हूँ। यह कि शपथ पत्र सं0-34, दिनांक-03.01.2025 द्वारा घोषणा करता हूँ कि मेरे एल0आई0सी0 पॉलिसी में मेरा पुकारू नाम स्पर्ष (Sparsh) गलत अंकित हो गया है। यह कि मेरे सी0बी0एस0ई0 के दसवीं एवं बारहवीं के प्रमाण पत्रों तथा मेरे आधार कार्ड में मेरा सही नाम श्रेयष स्पर्ष (Shreyash Sparsh) अंकित है। अतः मैं स्पर्ष (Sprash) के स्थान पर श्रेयष स्पर्ष (Shreyash Sparsh) के नाम से सभी कार्यों हेतु जाना एवं पहचाना जाऊँगा।

श्रेयष स्पर्ष (Shreyash Sparsh)।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 52—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bihar.gov.in

23 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-29/2021--2164 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 19 मार्च 2025

श्री संजीव कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सासाराम सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, जमुई के मंडल कारा, सासाराम में पदस्थापन के दौरान वित्तीय वर्ष 2019-20 में वित्तीय नियमों एवं विभागीय निर्देषों का उल्लंघन करते हुए सरकारी एजेन्सी BMSICL से दवा क्रय नहीं कर प्राप्त आवंटन की कुल राषि की दवा का क्रय निजी एजेन्सी से किये जाने में बरती गई गंभीर वित्तीय अनियमितता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए श्री संजीव कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में आरोप पत्र गठित किया गया। अनुषासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरान्त विभागीय ज्ञापांक 8310 दिनांक 20.09.2021 द्वारा आरोप पत्र (साक्ष्य सहित) की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से लिखित अभिकथन की माँग की गई। तद्‌आलोक में श्री कुमार द्वारा पत्रांक 4085 दिनांक 20.11.2021 के माध्यम से लिखित बचाव अभिकथन समर्पित किया गया, जिसे सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त अस्वीकृत करते हुए अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-644 दिनांक-25.01.2022 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई तथा विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा उप निदेषक, कारा चिकित्सा सेवा, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-13655/सा0प्र0, दिनांक-15.12.2011 की कंडिका-2(1)(ग) में निहित प्रावधान के आलोक में आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमण्डल, पटना के आदेश ज्ञापांक-427/स्था0, दिनांक-27.04.2022 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही जाँच हेतु संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना को हस्तांतरित किया गया । 3. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना के पत्रांक-443/स्था0, दिनांक-03.07.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री संजीव कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित सभी तीन (03) आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

4. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक-6397 दिनांक-25.07.2023 द्वारा श्री संजीव कुमार को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे पन्द्रह (15) दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।

5. तद्‌आलोक में श्री संजीव कुमार द्वारा पत्रांक-4541 दिनांक-24.09.2023 के माध्यम से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि दवा के क्रय में उनके द्वारा बिहार वित्तीय नियमावली एवं बिहार कारा हस्तक के नियमों का पूर्णतः पालन किया गया है। उनके द्वारा किसी प्रकार के नियम का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है। मंडल कारा, सासाराम में संसीमित बंदियों के उपयोग हेतु कारा चिकित्सक द्वारा Indent किए गये दवाओं की आपूर्ति विभागीय निदेशानुसार BMSICL के माध्यम से किये जाने हेतु केन्द्रीय कारा, बक्सर से अनुरोध किया गया, परन्तु BMSICL से दवाओं की आपूर्ति नहीं की गई। संचालन पदाधिकारी का यह निष्कर्ष कि बिना विभाग/सक्षम प्राधिकार की स्वी—ति के BMSICL के अतिरिक्त अन्य एजेन्सी से D24,78,080.00/-रूपये का दवा का क्रय किया गया है, कतई सही नहीं है, क्योंकि स्थानीय दवा विक्रेताओं से मात्र D4,89,561.00/-रूपये की दवा ली गई है। शेष D16,73,090.00/-रूपये की दवा बिहार वित्त नियमावली 241 (एल0) के प्रावधानों के अनुरूप एकल निविदा पूछताछ के24 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 माध्यम से सरकार के उपक्रम द्वारा निर्धारित दर तालिका द्वारा उनके सांस्थिक वितरकों तथा संस्थानों से की गयी है, जिसमें से 15.45 लाख रूपये के दवाओं का क्रय सरकारी उपक्रमों के सांस्थिक वितरकों के माध्यम से तथा शेष 1.27 लाख रूपये के दवाओं का क्रय उपक्रमों से सीधे किया गया है। शेष D3,15,429.00/-रूपये का व्यय दवाओं पर नहीं, अपितु कारा में संसीमित बंदियों के जाँच एवं शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) पर हुआ है।

आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहना है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का यह कहना कि BMSICL से दवाओं का क्रय नहीं करके प्राइवेट एजेन्सी से दवा क्रय किये जाने का कोई औचित्य नहीं है, सर्वथा आधारहीन है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया कि वस्तुस्थिति यह है कि BMSICL से उन्हें ही नहीं अपितु कई अन्य काराओं को एक रूपया की भी दवा नहीं दी गयी है। निष्चित रूप से प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का निष्कर्ष घोर दुर्भावनापूर्ण एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित है। ऐसा लगता है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी येन-केन प्रकारेण आरोप प्रमाणित करने में लगे हुए हैं, जबकि उनका कर्त्तव्य है कि सम्यक्‌ वस्तुस्थिति को संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखें। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि यदि BMSICL से दवा प्राप्त हो जाती तो यह नौबत नहीं आती। मात्र अति आवश्यक दवाओं का हीं क्रय किया गया है। ये दवायें स्थानीय बाजार से नहीं बल्कि बिहार विा नियमावली, 2005 के नियम 131 (एल0) के तहत एकल निविदा पूछ-ताछ के माध्यम से सरकारी उपक्रमों/उनके थोक विक्रेताओं से कम्पनी द्वारा निर्धारित दर पर ली गयी है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उन्होंने बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 3 (1) (i) एवं (ii) का अनुपालन करते हुए र्काव्य के प्रति पूरी शील निष्ठा से दायित्व का निर्वहन किया है। 6. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। श्री कुमार का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि BMSICL के माध्यम से कारा में दवाओं की आपूर्ति नहीं किये जाने की स्थिति में निजी एजेंसियों से दवा क्रय की गई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में मंडल कारा, सासाराम में दवा मद में प्राप्त आवंटन- D9,60,000.00 (नौ लाख, साठ हजार रूपये) मात्र है तथा निजी एजेंसी से कुल D24,78,080.00 (चौबीस लाख, अठहत्तर हजार, अस्सी रूपये) के दवाओं का क्रय किया गया है, तथा BMSICL से दवाओं का क्रय शून्य है। BMSICL से दवाओं का क्रय नहीं कर निजी एजेंसी से इतनी अधिक मात्रा में दवा क्रय किये जाने का कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं था। बिहार विा नियमावली के नियम-126 के अनुसार दक्षता, मितव्ययिता एवं पारदर्षिता लोक क्रय के मूल सिद्धांत हैं, जिसका अनुपालन नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस नियम का उल्लंघन कर लगभग तिगुनी मात्रा में दवा क्रय किया गया है। आरोपित पदाधिकारी को पूर्व के वर्षों में दवा की वास्तविक खपत के आधार पर वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए दवा का क्रय किया जाना चाहिए था। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसकी अनदेखी कर बिहार वित्त नियमावली के नियम-126 एवं बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-797 (viii) के प्रावधानों का घोर उल्लंघन किया गया है।

विभागीय पत्रांक 6952 दिनांक 14.11.2007 द्वारा दवा क्रय के संबंध में सभी काराधीक्षकों को स्पष्ट निदेश दिया गया है कि प्राप्त आवंटन के अधिकतम 10% का उपयोग अतिआवश्यक (emergency) दवाओं को स्थानीय बाजार से क्रय में किया जा सकेगा। साथ ही इस संबंध में विभागीय पत्रांक 2737 दिनांक 28.05.2014 द्वारा BMSICL के माध्यम से राज्य की काराओं में दवाओं की आपूर्ति विहित प्रक्रिया एवं पद्धति के अंतर्गत किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपरोक्त विभागीय निर्देशों का उल्लंघन करते हुए प्राप्त आवंटन के विरूद्ध निजी एजेंसी से लगभग तिगुनी राशि की दवा का क्रय बिना किसी आकस्मिक परिस्थिति में किया गया है। मंडल कारा, सासाराम में वर्ष 2019-20 में निजी एजेंसी से D24,78,080.00 की लगभग तिगुनी मात्रा में दवा क्रय करने की कोई आकस्मिक परिस्थिति (emergency) नहीं थी। कुल आवंटन के विरूद्ध निजी एजेंसी से लगभग तीन गुणा अधिक मात्रा में दवाओं का क्रय वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। यह बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम 841(xiii) के विहित प्रावधानों के भी प्रतिकूल है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होता है कि मंडल कारा, सासाराम में वित्तीय वर्ष-2019-20 में BMSICL से दवा का क्रय नहीं किया गया है, अपितु निजी एजेंसी से D24,78,080.00 (चौबीस लाख, अठहत्तर हजार, अस्सी रूपये) मूल्य की दवा का क्रय किया गया, जो वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल क्रय किए गए दवा मूल्य का शत-प्रतिशत है। अतः आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है।

7. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री संजीव कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सासाराम सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, जमुई के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005, भाग-V, नियम-14 (वृहत शास्तियाँ) के उपनियम-(vii) के प्रावधान के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- '' कालमान वेतन में तीन (03) वेतनवृद्धि निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दण्ड, जिसका प्रभाव/कुप्रभाव इनकी भविष्य की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ेगा और यह इन्हें स्वतः अनुमान्य होंगी ''। 8. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 2538 दिनांक 25.03.2024 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-4841 दिनांक-06.03.2025 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है।25 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 9. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री संजीव कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सासाराम सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, जमुई के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005, भाग-V, नियम-14 (वृहत शास्तियाँ) के उपनियम-(vii) के प्रावधान के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- '' कालमान वेतन में तीन (03) वेतनवृद्धि निम्नतर प्रक्रम पर अवनति का दण्ड, जिसका प्रभाव/कुप्रभाव इनकी भविष्य की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ेगा और यह इन्हें स्वतः अनुमान्य होंगी ''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-15/2022--2165

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19 मार्च 2025

श्री विपिन कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार के विरूद्ध मंडल कारा, खगड़िया में पदस्थापन के दौरान मंडल कारा, खगड़िया में संसीमित सजावार बंदी रणवीर यादव, पे0-हरिबल्लभ यादव के एम्स, नई दिल्ली में लम्बे समय से इलाजरत्‌ रहने तथा इलाज के नाम पर उक्त बंदी के दिल्ली स्थित आवास पर रहने की घटना में कर्त्तव्य के प्रति बरती गई गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पत्र के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7492 दिनांक-08.07.2022 द्वारा श्री विपिन कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई तथा विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, मुंगेर प्रमण्डल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, मंडल कारा, खगड़िया को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, मुंगेर प्रमण्डल, मुंगेर के पत्रांक-3729 दिनांक-26.05.2023 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री विपिन कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल 06 आरोपों में से आरोप संख्या-01 को अप्रमाणित तथा शेष आरोप संख्या-02, 03, 04, 05 एवं 06 को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

3. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक-5768 दिनांक-06.07.2023 द्वारा श्री विपिन कुमार को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे पन्द्रह (15) दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई थी।

4. तद्‌आलोक में श्री विपिन कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार द्वारा पत्रांक-3057 दिनांक-28.08.2023 के माध्यम से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि सजावार बंदी रणवीर यादव को इलाज के लिए नई दिल्ली (AIIMS) भेजने की अनुमति सभी स्तर से मिलने के उपरान्त प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी को उक्त बंदी का प्रभार दिया गया था। पुलिस अधीक्षक, खगड़िया द्वारा प्रतिनियुक्त पुलिसकर्मी को बंदी का प्रभार दे दिए जाने के बाद दिल्ली में इलाज के क्रम में आवासन एवं सुरक्षा की पूरी जिम्मेवारी प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी की थी। इस संबंध में कोई कठिनाई होने पर प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी को पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में लाना चाहिए था और इसकी सूचना उन्हेें भी दिया जाना चाहिए था, परन्तु ऐसी कोई सूचना किसी भी स्तर से प्राप्त नहीं हुई है। श्री कुमार का कहना है कि बंदी के New Delhi, (AIIMS) में अस्पताल से बाहर आवासन के लिए वे कहीं से भी जिम्मेवार नहीं हैं, क्योंकि उसके आवासन और सुरक्षा की जिम्मेवारी प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मियों की थी।

आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा कतिपय बीमारियों के लिए बंदी की चिकित्सा AIIMS, New Delhi के सर्जरी विभाग में कराने की अनुशंसा की गई थी, परन्तु बंदी द्वारा प्रदत्त अभिलेख में डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी का कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं है। वस्तुतः कारा से बंदी का प्रभार सुरक्षा बल को दिए जाने के बाद उनकी चिकित्सा कराने का दायित्व प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी एवं प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल की थी। Department of Surgery से भिन्न किसी विभाग में इलाज कराए जाने की स्थिति में इसकी सूचना उच्च कक्षपाल द्वारा उन्हें दी जानी चाहिए थी, जो नहीं दी गई। AIIMS में चिकित्सकों द्वारा बंदी के किस बीमारी की चिकित्सा की गई और राज्य मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में चिकित्सा हुई अथवा नहीं, इसकी समीक्षा चिकित्सा सेवा से संबंधित कोई व्यक्ति/विशेषज्ञ द्वारा हीं किया जा सकता है। उनका कहना है कि कोई कारा अधीक्षक इस सन्दर्भ में निर्णय लेने हेतु तकनीकी रूप से सक्षम नहीं होता है।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी को निर्धारित अवधि में बदले जाने का जो दायित्व पुलिस अधीक्षक, खगड़िया का था, उस दायित्व के निर्वहन में अगर कोई चूक हुई हो तो उसके लिए कारा अधीक्षक अर्थात्‌ उन्हें आरोपित किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उनकेे (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा बंदी को वापस लाए जाने के लिए किए गए प्रयासों पर संचालन पदाधिकारी द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया है और उनके द्वारा किए गए प्रयासों को सार्थक26 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 प्रयास नहीं बताते हुए आरोप को प्रमाणित किया गया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनके द्वारा समय-समय पर बंदी रणवीर यादव से संबंधित इलाज प्रतिवेदन, वापस लाने हेतु प्रयास एवं अन्य —त्य किया गया है तथा विभिन्न पत्रों के माध्यम से महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना को बंदी रणवीर यादव के इलाज से संबंधित जानकारी से अवगत कराया जाता रहा है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि कारा के कतिपय पत्रों के द्वारा प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल, श्री लालबाबू कुमार एवं कक्षपाल, श्री जयकिशोर सिंह को उक्त बंदी के आवासन, स्वास्थ्य प्रतिवेदन की माँग एवं वापसी हेतु निदेशित किया गया है। इस संदर्भ में उच्च कक्षपाल, श्री लालबाबू कुमार द्वारा कोई भी सूचना नहीं दी गई। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनके स्तर से कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई है। उनके स्तर से बंदी रणवीर यादव को मंडल कारा, खगड़िया लाने हेतु किए गए पत्राचार एवं प्रयास को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा कहीं भी रेखांकित नहीं किया गया है एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा भी तथ्यहीन एवं आधारहीन बातों से आरोपों को प्रमाणित किया गया है। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि बंदी के एम्स, नई दिल्ली में अस्पताल से बाहर आवासन के लिए वे कहीं से भी जिम्मेवार नहीं हैं, क्योंकि उसके आवासन और सुरक्षा की जिम्मेवारी प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मियों की थी। आरोपित पदाधिकारी का यह कथन स्वीकार करने योग्य नहीं है, क्योंकि काराधीक्षक के रूप में अपने अधीनस्थ कर्मियों के कार्यों पर सतत्‌ निगरानी एवं पर्यवेक्षण करने का दायित्व आरोपित पदाधिकारी का है। विभागीय त्रिसदस्यीय समिति द्वारा बंदी के नई दिल्ली में लम्बे समय से इलाजरत्‌ रहने के संबंध में जाँच के क्रम में पाया गया कि बंदी का इलाज एम्स, नई दिल्ली के ओ०पी०डी० से लगातार कराया जाता रहा है तथा इस क्रम में बंदी का आवासन उनके स्थानीय आवास पर हीं रहा है। बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-224 में वर्णित है कि ''यदि राज्य से बाहर बंदी के इलाज के लिए विनिर्दिष्ट अस्पताल की राय में उस बंदी को विनिर्दिष्ट अस्पताल में अन्तः रोगी इलाज पाने की आवश्यकता नहीं है तो उस बंदी को कारा में वापस भेज दिया जाएगा।'' इस प्रकार बंदी रणवीर यादव को एम्स के ओ.पी.डी. में दिखाने के बाद बिहार कारा हस्तक के उपरोक्त प्रावधान के आलोक में उनके साथ प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी एवं सहयोग में प्रतिनियुक्त कारा के उच्च कक्षपाल को बंदी को वापस कारा में लाना चाहिए था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। आरोपित पदाधिकारी को भी बंदी के इलाजोपरांत वापस कारा में लाने हेतु आवष्यक कार्रवाई करनी चाहिए थी, किन्तु उनके द्वारा सार्थक प्रयास नहीं किया गया। फलस्वरूप बंदी रणवीर यादव लम्बे समय तक इलाज के क्रम में एम्स के बाहर नई दिल्ली में हीं रहा। यह बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-224 के विहित प्रावधानों का उल्लंघन है। इस प्रकार प्रतिनियुक्त कक्षपाल के साथ-साथ आरोपित पदाधिकारी भी अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रहे हैं। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि कारा से बंदी का प्रभार सुरक्षा बल को दिए जाने के बाद उनकी चिकित्सा कराने का दायित्व प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी एवं प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल की थी। Department of Surgery से भिन्न किसी विभाग में इलाज कराए जाने की स्थिति में इसकी सूचना उच्च कक्षपाल द्वारा उन्हें दी जानी चाहिए थी, जो नहीं दी गई। आरोपित पदाधिकारी के उक्त कथन से स्पष्ट है कि उनका अपने अधीनस्थ कर्मियों पर सम्यक्‌ नियंत्रण का घोर अभाव था। कारा के मुख्य नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी होने के नाते आरोपित पदाधिकारी का यह दायित्व था कि बंदी का इलाज मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में कराया जा रहा है अथवा नहीं, के संबंध में बंदी के साथ प्रतिनियुक्त कक्षपाल से निरंतर सम्पर्क स्थापित करते हुए उक्त बंदी का हो रहे इलाज से संबंधित चिकित्सा पूर्जा तथा उसके आवासन की सारी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए थी। तद्‌नुसार आरोपित पदाधिकारी द्वारा आवश्यक कार्रवाई किया जाना था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि नई दिल्ली में अस्पताल से बाहर बंदी के आवासन की सम्पूर्ण जिम्मेवारी सुरक्षा बल की है, न कि कारा अधीक्षक की। बंदी रणवीर यादव का आवासन उनके आवास संख्या-C/385, गेस्ट हाउस, डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली में होना प्रतिनियुक्त सुरक्षा कर्मी तथा बंदी के साथ आरोपित पदाधिकारी की संलिप्तता को दर्शाता है, जिसका स्पष्ट प्रमाण त्रिसदस्यीय समिति द्वारा जाँच के क्रम में बंदी का उसके नई दिल्ली स्थित आवास में पाया जाना है। इस प्रकार बंदी रणवीर यादव के नई दिल्ली में इलाज के दौरान सुरक्षा एवं इलाज के प्रावधानित नियमों का अनुपालन आरोपित पदाधिकारी द्वारा नहीं किया गया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बंदी के साथ प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी एवं सहयोग में प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल द्वारा बंदी को कारा में वापस लाया जाना चाहिए था। आरोपित पदाधिकारी का कारा के मुख्य नियंत्री एवं पर्यवेक्षी पदाधिकारी होने के नाते यह पदीय दायित्व था कि बंदी रणवीर यादव के साथ प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल पर कड़ी निगरानी रखते तथा बंदी के इलाज के संबंध में अद्यतन स्थिति प्राप्त करते रहते, किन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय त्रिसदस्यीय जाँच दल द्वारा नई दिल्ली जाकर जाँच किये जाने पर उक्त बंदी इलाज के नाम पर एम्स में भर्ती न होकर दिल्ली स्थित आवास में पाया गया। इस प्रकार इस मामले में प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल के साथ-साथ आरोपित पदाधिकारी भी दोषी हैं। आरोपित पदाधिकारी का अपने द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन में कहना है कि प्रतिनियुक्त उच्च कक्षपाल द्वारा उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने ऊपर लगे आरोप के संबंध में कोई तथ्यपरक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि उनके द्वारा इस पूरे आरोप प्रकरण के लिए प्रतिनियुक्त कक्षपाल को हीं27 (cid:464)बहार गजट, 19 मार्च 2025 पूर्णरूपेण जिम्मेवार ठहराया गया है, जो उनका आरोपों से बचने का प्रयास मात्र है। इस प्रकार स्पष्ट है कि मंडल कारा, खगड़िया के सजावार बंदी रणवीर यादव, पे0-हरिबल्लभ यादव के एम्स, नई दिल्ली में काफी दिनों से इलाजरत्‌ रहने तथा इलाज के नाम पर उक्त बंदी के दिल्ली स्थित आवास पर रहने की घटना में आरोपित पदाधिकारी द्वारा गंभीर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता बरती गई है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा बंदी रणवीर यादव को जिस तत्परता के साथ एम्स, नई दिल्ली भेजे जाने हेतु कार्रवाई की गई, वैसी तत्परता उक्त बंदी के इलाज के उपरांत वापस कारा में लाये जाने हेतु नहीं दिखाई गई है। यही नहीं आरोपित पदाधिकारी द्वारा कर्त्तव्य के प्रति जानबूझ कर निष्क्रियता अपनाकर बंदी रणवीर यादव को दिल्ली में लम्बे समय तक अस्पताल से बाहर रहने में अनुचित लाभ पहुँचाने का कृत्य किया गया है, जो बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-224, 796 (i) (ii) तथा गृह विभाग (विषेष शाखा) बिहार, पटना के पत्रांक-624 दिनांक-18.07.2001 की कंडिका-10, 11 एवं 12 के विहित प्रावधानों का उल्लंघन है। अतः आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है।

6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री विपिन कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए तथा प्रमाणित पाये गये आरोपों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (vii) के प्रावधान के तहत उनके विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- '' वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से दो (02) वेतनवृद्धि घटाकर संचयी प्रभाव से वेतन की अवनति का दण्ड''।

7. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 2224 दिनांक 13.03.2024 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। तद्‌आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-4840 दिनांक-06.03.2025 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 8. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री विपिन कुमार, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, कटिहार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (vii) के प्रावधान के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- '' वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से दो (02) वेतनवृद्धि घटाकर संचयी प्रभाव से वेतन की अवनति का दण्ड''। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 52—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: http://egazette.bihar.gov.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 March 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2025-03-19.12/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2025-03-19.12.