(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 4 चै(cid:287) 1947 (श0)
(सं0 पटना 203) पटना, मंगलवार, 25 माच(cid:91) 2025 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 25 मार्च 2025
सं॰ वि॰स॰वि॰-03/2025-1472/वि॰स॰।—''बिहार काष्ठ आधरित उद्योग ;स्थापना एवं विनियमनद्ध विध्ेयक, 2025'', जो बिहार विधन सभा में दिनांक-25 मार्च, 2025 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।
आदेष से, ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 [ ]
बिहार राज्य में आरामिलों, विनियर मिलों, प्लाईवूड पेस्टिंग इकाईयों तथा कम्पोजिट इकाईयों की स्थापना एवं संचालन का विनियमन ''काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990 के द्वारा किया जाता है।
और चूँकि काष्ठ एवं इसके अन्य रूपों जैसे चंदन, कत्था लकड़ी आदि कच्चे पदार्थों पर आधारित और भी अनेक उद्योग है। इन उद्योगों जैसे कत्था उद्योग, काष्ठ कोयला उद्योग, इत्यादि का महत्वपूर्ण प्रभाव बिहार राज्य के वन/वृच्छादन/हरियाली पर पड़ता है, इसलिए वैधानिक तंत्र के माध्यम से इनका विनियमन आवश्यक है।
और चूँकि शुल्क/जुर्माना आदि के रूप में काष्ठ आधारित उद्योगों से प्राप्त की गई राशि का उपयोग राज्य में वन/वृक्ष आच्छादन को बढ़ाये जाने हेतु योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए किये जाने हेतु प्रावधान बनाये जाने हैं।
और चूँकि उपरोक्त तथ्यों एवं आवश्यकताओं के आलोक में वर्तमान ''बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990'' को प्रतिस्थापित करने के लिए ''बिहार काष्ठ आधारित उद्योग (स्थापना एवं विनियमन) अधिनियम, 2025'' का प्रारूप तैयार किया गया है।
इसलिए अब भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में यह बिहार राज्य के विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित होः-
- (1) यह अधिनियम ''बिहार काष्ठ आधारित उद्योग (स्थापना एवं विनियमन) अधिनियम, 2025'' कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह बिहार राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगा।
इस अधिनियम में, जबतक कोई बात, विषय या संदर्भ के विरूद्ध न हो- से अभिप्रेत है बिहार काष्ठ आधारित उद्योग (स्थापना एवं विनियमन) अधिनियम, 2025;
से अभिप्रेत है राज्य सरकार द्वारा काष्ठ आधारित उद्योगों सहित अन्य उद्योगों की स्थापना के लिए अधिसूचित क्षेत्र;
से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-10 के अधीन प्रदत्त अनुज्ञप्ति; से अभिप्रेत है कोई ऐसा व्यक्ति जिसे इस अधिनियम की धारा 10 के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान की गई हो;
से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 5 के अधीन नियुक्त अनुज्ञापन पदाधिकारी;
इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए से अभिप्रेत है कोई आवेदनकर्त्ता जिनमें कोई व्यक्ति या हिंदु अविभाजित परिवार का कर्त्ता या भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अधीन कोई साझेदार प्रतिष्ठान या कंपनी अधिनियम, 2013 के अधीन कोई कंपनी या कोई पंजीकृत सहकारी सोसाइटी शामिल है;
से अभिप्रेत है राज्य में प्रधान मुख्य वन संरक्षक की कोटि का कोई वन पदाधिकारी;
से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 6 के अधीन नियुक्त विहित प्राधिकार; से अभिप्रेत है अपने प्राकृतिक रूप में काष्ठ का ऐसा बोटा जिसके छाल के नीचे का मध्य घेरा तीस सेन्टीमीटर या उससे अधिक हो और इसमें ऐसा गोल बोटा भी शामिल है जिसका छाल हटाया गया हो या जिसकी सतह के अनुप्रस्थ काट को, इसके परिवहन और/या भंडारण में सुविधा के प्रयोजनाथर्, वर्गाकार या लगभग वर्गाकार बनाने के लिए हाथ से या किसी बैंड सॉ या अन्य किसी मशीन या उपस्कर द्वारा काट-छाँट किया गया हो;
से अभिप्रेत है गोल बोटों को चिरान काष्ठ में परिवर्तित करने के लिए काष्ठ आधारित
उद्योग;
से अभिप्रेत है शहतीर, कड़ी, तख्ते, पट्टे और किसी गोल बोटा के चिराई से प्राप्त
ऐसे उत्पाद;
उसके व्याकरणिक रूप, भेदों तथा सजातीय पदों सहित से अभिप्रेत है विद्युत या यांत्रिक शक्ति की सहायता से यांत्रिक अथवा रसायनिक प्रक्रिया द्वारा काष्ठ की चिराई करने, कटाई करने, फांक करने, छिलने, रूपांतरित करने, उसे गढ़ने या उसका संशोषण (सीजनिंग) करने की संक्रिया और उसके अंतर्गत उसका परिरक्षण तथा उपचार किया जाना भी आता है। इसमें काष्ठ से भिन्न अन्य अवशेषों (कत्था या गूदा) की निकासी का कार्य या ऐसे सभी कार्य, जिनमें काष्ठ का उपयोग, एक कच्चा माल के रूप में किया जाता है, भी शामिल होंगे;
3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 9 के तहत् राज्य स्तर पर संकलित वरीयता सूची के अंतर्गत वरीयता स्थिति वाला काष्ठ आधारित उद्योग;
से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 9 के तहत् राज्य स्तर पर संकलित वरीयता सूची से बाह्य वरीयता स्थिति वाला काष्ठ आधारित उद्योग;
से अभिप्रेत है बिहार राज्य; (एस॰एल॰सी॰) से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-3 के तहत् राज्य सरकार द्वारा गठित समिति;
से अभिप्रेत है यंत्रचालित वाहन अथवा मानव या पशु द्वारा खींचा जानेवाला कोई वाहन एवं इसके अंतर्गत् ट्रक, ट्रैक्टर, ट्रॉली, मोटर वाहन, नाव तथा गाड़ी सम्मिलित हैं;
के अंतर्गत् वृक्ष आते हैं जबकि वे गिर गये हों या गिराये गए हों और बाँस से भिन्न किसी भी प्रजाति का समस्त काष्ठ चाहे वह किसी भी प्रयोजन के लिए काटा गया, रूपांतरित किया गया, गढ़ा गया, चीरा गया या खोखला किया गया हो अथवा नहीं;
का तात्पर्य किसी ऐसे उद्योग से है जिसमें काष्ठ कच्चे माल के रूप में प्रसंस्कृत किया जाता है (आरा मशीन / विनियर / प्लाईवुड या कोई अन्य प्रकार जैसे चंदन, कत्थे की लकड़ी, काष्ठ कोयला की इकाई आदि)। का तात्पर्य किसी वृक्ष से प्राप्त लकड़ी के अपूर्ण दहन से प्राप्त कार्बन से है। का अभिप्राय है कोई उद्योग जहॉं विभिन्न प्रकार के काष्ठ आधारित उद्योग संचालित हैं।
से अभिप्रेत है एक पचांग वर्ष जो जनवरी महीने के प्रथम दिन को प्रारम्भ होकर उस वर्ष के दिसम्बर महिने के 31वें दिन को समाप्त होता है।
(2) वैसे शब्द तथा अभिव्यक्ति जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं, किन्तु परिभाषित नहीं हैं और जो भारतीय वन अधिनियम, 1927 (1927 का 16) में परिभाषित हैं के वही अर्थ होंगे जो उक्त अधिनियम में उनके लिए निर्दिष्ट किए गए हैं। (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम में या इसके द्वारा नियत —त्यों के निष्पादन हेतु एक राज्य स्तरीय समिति का गठन करेगी। (2) राज्य स्तरीय समिति में निम्नलिखित शामिल होंगेः
| (क) | प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एच0ओ0एफ0एफ0) | - | अध्यक्ष |
| (ख) | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय का एक प्रतिनिधि, जो वन संरक्षक की कोटि से अन्यून पंक्ति का होगा | - | सदस्य |
| (ग) | पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार का एक प्रतिनिधि, जो वन संरक्षक की कोटि से अन्यून पंक्ति का होगा एवं जो कार्य नियोजनाओं/कार्य योजनाओं को तैयार किए जाने से संबद्ध होगा | - | सदस्य |
| (घ) | निदेशक/अपर निदेशक, उद्योग विभाग, बिहार | - | सदस्य |
| (च) | प्रबंध निदेशक, बिहार वानिकी विकास निगम लिमिटेड | - | सदस्य |
| (छ) | वन मुख्यालय में कार्यरत वन संरक्षक की कोटि से अन्यून पंक्ति का एक पदाधिकारी | - | सदस्य सचिव |
(3) राज्य स्तरीय समिति, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रादेशिक संभाग से ऐसे किसी अधिकारी को, जो वन संरक्षक की कोटि से अन्यून पंक्ति का हो तथा कृषि विभाग, बिहार सरकार और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार के अधिकारियों को सहयोजित कर सकेगी। (4) राज्य स्तरीय समिति अपनी प्रत्येक बैठक में किसी एक काष्ठ चिरान संघ द्वारा नामित काष्ठ आधारित उद्योग या इसके संघ के एक प्रतिनिधि को विशेष निमंत्रित के रूप में आमंत्रित करेगी। (5) राज्य स्तरीय समिति की बैठक के लिए गणपूर्त्ति स्थायी सदस्यों की कम से कम पचास प्रतिशत की उपस्थिति से होगी।
(6) राज्य स्तरीय समिति की बैठक तीन माह में कम से कम एक बार होगी।
राज्य स्तरीय समिति (एस.एल.सी.)ः (i) जैसे और जब यह विनिश्चय करे, मांग और आपूर्ति के संबंध में समुचित अध्ययन के द्वारा राज्य में काष्ठ की उपलब्धता का आकलन करेगी। ऐसे तरीके से जो क्षेत्र के वनों एवं वृक्ष आच्छादन को प्रतिकूलतः प्रभावित नही करे, काष्ठ के वहनीय उपयोग के लिए समुचित तंत्र का यत्न करेगी।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 (ii) यदि यह संतुष्ट हो कि नये काष्ठ आधारित उद्योगों के लिए विधिक रूप से काष्ठ उपलब्ध है (जैसे वन, वनों इत्यादि के बाहर वृक्ष आदि) तो वह ऐसे काष्ठ आधारित उद्योगों के नामों का अनुमोदन करेगी, जिनको नयी अनुज्ञप्ति दिए जाने या विद्यमान अनुज्ञापित क्षमता को बढ़ाये जाने के लिए विचार किया जा सकता है।
(iii) सुनिश्चित करेगी कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के पास संचित काष्ठ आधारित उद्योगों से वसूल की गई धन राशि का उपयोग केवल वनीकरण/ वृक्षारोपण के प्रयोजनार्थ किया जाए।
(iv) राज्य सरकार द्वारा प्रसंगित किसी अन्य मामले की समीक्षा करेगी और समुचित अनुशंसाएं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजेगी। (1) राज्य सरकार, अधिसूचना के द्वारा वन प्रमंडल पदाधिकारी से अन्यून पंक्ति के किसी पदाधिकारी को इस अधिनियम के उद्देश्यों के लिए अनुज्ञापन पदाधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगी। (2) राज्य सरकार उन स्थानीय सीमाओं को विनिश्चित कर सकेगी जिनके अन्तर्गत किसी अनुज्ञापन पदाधिकारी द्वारा उन शक्तियों का प्रयोग तथा उन कर्त्तव्यों का पालन किया जाएगा जो उसे इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त या इसके अधीन सौंपे गए हों। राज्य सरकार अधिसूचना के द्वारा वन संरक्षक से अन्यून पंक्ति के किसी पदाधिकारी को इस अधिनियम के उद्देश्यों के लिए विहित प्राधिकार के रूप में नियुक्त कर सकेगी। (2) उन स्थानीय सीमाओं को विनिश्चित कर सकेगी जिनके भीतर किसी विहित प्राधिकार द्वारा उन शक्तियों का प्रयोग तथा उन कर्त्तव्यों का पालन किया जाएगा जो उसे इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त या इसके अधीन सौंपे गए हों। इस अधिनियम के आरंभ होने की तिथि को या इसके बाद कोई व्यक्ति किसी काष्ठ आधारित उद्योग की स्थापना तथा/अथवा संचालन इस अधिनियम के तहत प्राधिकार के बिना एवं उन शर्तों का अनुपालन किए बिना, जो इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा समर्पित आवदेन पर प्रदत्त अनुज्ञप्ति के अध्यधीन हो, नहीं करेगा। (2) इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990 के अधीन निर्गत अनुज्ञप्ति इस अधिनियम केे तहत् जारी की गयी समझी जाएगी। (1) राज्य में काष्ठ आधारित उद्योगों के संचालन हेतु निकटतम अधिसूचित वनों अथवा संरक्षित क्षेत्रों की सीमा से दूरी के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय/माननीय पटना उच्च न्यायालय/केन्द्रीय प्राधि—त समिति के राज्य विशिष्ट आदेश/ अनुमोदन के अनुसार दूरी अथवा (पथ तट/रेल तट/नहर तट के वृक्षारोपणों को छोड़कर) निकटतम अधिसूचित वनों अथवा संरक्षित क्षेत्रों की सीमा से दस किलोमीटर की हवाई दूरी, जो कम हो, से बाहर अनुमति दी जायेगी। (2) उप-धारा (1) के प्रावधान सुरक्षित वन घोषित पथ तट/नहर तट/रेल तट के वृक्षारोपण पर लागू नहीं होंगे।
(3) निकटतम अधिसूचित वन अथवा संरक्षित क्षेत्र की सीमा से हवाई दूरी पर विचार किए बिना औद्योगिक संपदा अथवा नगरीय क्षेत्र (नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत) में काष्ठ आधारित उद्योग स्थापित की जा सकती है। (4) राज्य सरकार, अधिसूचना के द्वारा, उसमें उल्लिखित कारणों से, किसी क्षेत्र को अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अवधि के लिए प्रतिषिद्ध क्षेत्र घोषित कर सकेगी। इस अधिनियम या उसके तहत् किए गए आदेश के अधीन किसी क्षेत्र को प्रतिबंधित/प्रतिषिद्ध घोषित किए जाने की अवधि में, निम्नलिखित परिणाम होंगे; यथा- उस क्षेत्र में काष्ठ आधारित उद्योग की स्थापना के लिए कोई अनुज्ञप्ति मंजूर नहीं की जाएगी;
उस कालावधि के दौरान उस क्षेत्र में काष्ठ आधारित उद्योग की कोई अनुज्ञप्ति नवीकृत नहीं की जाएगी;
उस क्षेत्र में अवस्थित काष्ठ आधारित उद्योग का संचालन नहीं होगा और उसका परिचालन बन्द रखा जाएगा;
इस प्रकार से परिचालन नहीं होने या बंद किए जाने के फलस्वरूप हुए नुकसानों से संबंधित कोई दावा ना तो किसी प्राधिकार के समक्ष निहित होगा और ना ही इस बन्दी के फलस्वरूप हुआ कोई हरजाना अनुज्ञाप्तिधारी को देय होगा।5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 (5) (क) राज्य सरकार इस धारा के तहत् किसी क्षेत्र को प्रतिबंधित या प्रतिषिद्ध घोषित किए जाने की तिथि तक प्राप्त किए गए काष्ठों/काष्ठ उत्पादों के निष्पादन के लिए निदेश निर्गत कर सकेगी। (ख) प्रभावित काष्ठ आधारित उद्योग को धारा 8 की उप धारा (1) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए प्रतिबंधित स्थान और प्रतिषिद्ध क्षेत्र के बाहर संचालन की अनुमति होगी। काष्ठ की उपलब्धता के आकलन और विभिन्न काष्ठ आधारित उद्योगों द्वारा काष्ठ की अनुमानित वार्षिक खपत के आलोक में राज्य स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य सरकार के द्वारा, समय-समय पर, विभिन्न काष्ठ आधारित उद्योगों के परिसंचालन के लिए उनकी संख्या और उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की संख्या तथा/अथवा प्रकार का निर्धारण किया जायेगा। ऐसे मामलों में, जहाँ काष्ठ आधारित उद्योगों की संख्या इस अधिनियम की धारा 9 के अधीन निर्धारित काष्ठ आधारित उद्योगों की अनुमत संख्या से कम है, नए काष्ठ आधारित उद्योग के लिए अनुज्ञप्ति प्रदान की जा सकेगी। (2) राज्य सरकार नयी अनुज्ञप्ति जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन निर्गत कर सकती है। (3) इस अधिनियम की धारा 7 के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन ऐसे प्रपत्र में होगा और उसके साथ ऐसा आवेदन शुल्क तथा प्रतिभूति जमा किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए। (4) कोई आवेदन प्राप्त होने पर अनुज्ञापन पदाधिकारी, ऐसी जाँच करने के पश्चात् जैसा कि वह ठीक समझे, इस अधिनियम के तहत बनाये गए नियम के अनुसार अनुज्ञप्ति प्रदान करने की कार्रवाई कर सकेगा। (5) राज्य स्तरीय समिति की पूर्वानुमति प्राप्त किए बिना किसी काष्ठ आधारित उद्योग के लिए कोई अनुज्ञप्ति मंजूर अथवा नवीकृत नहीं की जाएगी। परन्तु यह कि किसी काष्ठ आधारित उद्योग की अनुज्ञप्ति के नवीकरण की शक्ति राज्य स्तरीय समिति संबंधित वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगी। (6) इस धारा के अधीन मंजूर की गयी अनुज्ञप्ति इस अधिनियम के प्रावधानों तथा ऐसे शर्त्तों के, जो इसमें विहित किए जाए, के अध्यधीन होगी। (7) अनुज्ञप्ति राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अवधि के लिए निर्गत की जाएगी तथा इसकी समाप्ति के उपरांत इसका नवीकरण ऐसे प्रपत्र में एवं ऐसे शुल्क के साथ जिसे राज्य सरकार द्वार विहित किया जाय, आवेदन दिए जाने पर किया जायेगा। (8) घरेलू मूल के गोल बोटों का उपयोग नहीं करने वाले या तीस सेंटीमीटर व्यास से अधिक बैंड साँ या री-साँ या चक्रीय आरा के बिना प्रचालन करने वाले उद्योगों के लिए ऐसे मामलों में अनुज्ञप्ति की आवश्यकता नहीं होगी जहाँ उनके द्वारा निम्नलिखित का उपयोग किया जाता हैः चीरी हुई इमारती लकड़ी, बेंत, बांस, नरकट, प्लाईवुड, विनियर या वैध श्रोतों से प्राप्त आयातित काष्ठ,
ब्लॉक बोर्ड, मेडियम डेंसीटी फाईवर (एम.डी.एफ.) या विधिसंगत श्रोतों से प्राप्त किए गए इसी प्रकार के काष्ठ आधारित उत्पाद, कृषि-वानिकी/कृषिगत फसल के रूप में घोषित प्रजातियों से और/या राज्य में पातन एवं पारगमन व्यवस्था से मुक्त विधिसंगत श्रोतों से प्राप्त किया गया गोल बोटा/काष्ठः परन्तु यह कि राज्य स्तरीय समिति द्वारा विशिष्ट आवश्यकता वाले उद्योगों में 60 सेंटीमीटर व्यास तक के चक्रीय आरा को संस्थापित करने की अनुमति दी जा सकेगी। (9) इस धारा की उप धारा (8) के अधीन के उद्योग संबंधित अनुज्ञापन पदाधिकारी के कार्यालय में निबंधित होंगे तथा राज्य सरकार द्वारा निर्गत निदेशों के अनुसार विनियमित होंगे। विक्रय/उत्तराधिकार इत्यादि की स्थिति में अनुज्ञप्ति का हस्तांतरण राज्य स्तरीय समिति की अनुमति से किया जायेगा। (2) राज्य सरकार द्वारा इस धारा के तहत अनुज्ञप्ति के हस्तांतरण हेतु मार्गदर्शन निर्गत किया जा सकेगा।
- काष्ठ आधारित औद्योगिक इकाईयों के प्रत्येक वर्ग के लिए वरीयता सूची तैयार एवं प्रकाशित की जाएगी। (2) इस अधिनियम की धारा 11 के अधीन हस्तान्तरित अनुज्ञप्ति के मामले में संबंधित काष्ठ आधारित उद्योग की वरीयता अपरिवर्तित रहेगी।6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 (3) विभिन्न प्रकार के काष्ठ आधारित उद्योगों की पारस्परिक वरीयता सूची तैयार करने हेतु राज्य सरकार दिशा-निर्देश जारी करेगी। किसी काष्ठ आधारित उद्योग की स्थिति को विनिश्चित करने, उसकी कार्यशैली की जाँच करने के प्रयोजनार्थ या इस अधिनियम एवं इसके अधीन बनाये गए नियमों के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने की दृष्टि से, अनुज्ञापन पदाधिकारी या अनुज्ञापन पदाधिकारी द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत वन परिसर पदाधिकारी (वनपाल) से अन्यून स्तर का कोई अन्य वन पदाधिकारीः किसी काष्ठ आधारित उद्योग में प्रवेश कर सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा; किसी दस्तावेज, बही, रजिस्टर या अभिलेख को, जो किसी काष्ठ आधारित उद्योग पर नियंत्रण रखने वाले किसी व्यक्ति के अथवा उसके संबंध में नियोजित किसी व्यक्ति के कब्जे या अधिकार में हो, जाँच के लिए पेश किए जाने का आदेश दे सकेगा;
किसी व्यक्ति, परिसर, वाहन, मशीन, औजार या उपकरण, जिसका उपयोग इस अधिनियम के प्रावधानों अथवा इसके अन्तर्गत बनाए गए नियमों के उल्लंघन के लिए किया गया हो अथवा किए जाने की मंशा हो, की तलाशी ले सकेगा तथा इस प्रयोजनार्थ किसी वाहन अथवा व्यक्ति को रोक सकेगा;
ऐसे काष्ठ, संयत्रों और मशीनरी, औजार, वाहन और किसी अन्य वस्तु को, जिसके बारे में उसे संदेह है कि वह इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन किये जाने में अन्तगर््रस्त है या उपयोग में लाया गया है या अन्तगर््रस्त की जानेवाली है या उपयोग में लाई जानेवाली है, जप्तकर सकेगा।
(2) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधान जो तलाशी और जप्ति से संबंधित हैं, जहाँतक हो सके, इस धारा के अधीन तलाशी और जप्ति में लागू होंगे। प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी, यथास्थिति काष्ठ आधारित उद्योग के कामकाज के संबंध में ऐसी विवरणियाँ, ऐसे प्रपत्रों में और अन्तराल पर ऐसे अधिकारी को समर्पित करेगा जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाय। समस्त काष्ठ आधारित उद्योग राज्य सरकार के द्वारा विहित प्रपत्रों में संगत कागजात के साथ अभिलेखों का संधारण करेंगे तथा उन्हें नियमित रूप से अद्यतन करेंगे। ऐसे अभिलेख निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत किए जाएंगे। ऐसे काष्ठ भण्डारों जिनका लेखा-जोखा संतोषप्रद रीति में नहीं पाया जाएगा उनके संबंध में माना जाएगा कि वे अवैध रूप से प्राप्त किए गए हैं और ऐसे भण्डार अधिहरण हेतु संभाव्य होंगे। इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के दिन को एवं उस दिन से विद्युत से संबंधित तत्समय प्रभावी किसी अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी काष्ठ आधारित उद्योग के प्रयोजनार्थ किसी विद्युत् ऊर्जा का उपभोग तबतक नहीं किया जायेगा और कोई विद्युत संयोजन (इलेक्ट्रिक कनेक्शन) तबतक नहीं लगाया जाएगा या उस प्रयोजन के लिए तबतक चालू नहीं रखा जाएगा जबतक कि ऐसा काष्ठ आधारित उद्योग इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विधिवत अनुज्ञप्त एवं संचालित नहीं हो। (2) राज्य सरकार इस धारा के उद्देश्यों के लिए नियम बना सकेगी। - यदि अनुज्ञापन पदाधिकारी को, या तो इस निमित्त किए गए निर्देश से या अन्यथा, यह समाधान हो जाता है कि- अनुज्ञप्तिधारी काष्ठ आधारित उद्योग पर पूर्णतः या अंशतः अपने नियंत्रण से अलग हो गया है या ऐसी ईकाई इस अधिनियम की धारा 11 के तहत् राज्य स्तरीय समिति के अनुमोदन के बिना प्राप्त की गयी है; या अनुज्ञप्तिधारी ने अपनी इकाई का संचालन बन्द कर दी है; या अनुज्ञप्तिधारी ने युक्तियुक्त कारण के बिना, अनुज्ञप्ति की शर्त्तों में से किसी शर्त्त का या अनुज्ञापन पदाधिकारी द्वारा विधिपूर्वक दिए गए किसी निदेश का उल्लंघन किया है या इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों में से किसी प्रावधान का उल्लंघन किया है; या अनुज्ञप्तिधारी ने अपने काष्ठ आधारित उद्योग के परिसर में ऐसा काष्ठ/ पादप उत्पाद रखा है जिसके संबंध में वह संतोषप्रद रूप से लेखा-जोखा देने में समर्थ नहीं है जिसके परिणामस्वरूप वह धारा 18 के अधीन अधिहरण हेतु संभाव्य है; या अनुज्ञप्तिधारी वन संरक्षण के हित के प्रतिकूल कार्यकलापों में संलिप्त हैं, तो किसी ऐसी अन्य शास्ति, जिसके लिए अनुज्ञप्तिधारी इस अधिनियम के अधीन भागी हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले7 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 बिना, अनुज्ञापन पदाधिकारी, अनुज्ञप्तिधारी को कारण बताने का अवसर देने के पश्चात् अनुज्ञप्ति प्रतिसंहृत या निलंबित कर सकेगा और वह धनराशि, यदि कोई हो, या उसका कोई भाग, जो अनुज्ञप्ति में अधिरोपित शर्तों के सम्यक पालन के लिए प्रतिभूति के रूप में जमा किया गया हो, जब्त कर सकेगा।
(2) उप धारा (1) के अधीन निर्गत प्रत्येक आदेश की एक प्रति अनुज्ञप्तिधारी, विहित प्राधिकार और राज्य स्तरीय समिति को दी जाएगी।
(3) इस अधिनियम की धारा 10, 11 एवं 17 के तहत अनुज्ञापन पदाधिकारी के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे आदेश की तामिला की तिथि से 30 दिनों के भीतर विहित प्राधिकार के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
(4) विहित प्राधिकार या तो स्वप्रेरणा से या अपील आवेदन पर, अनुज्ञापन पदाधिकारी द्वारा इस अधिनियम की धारा 10,11 एवं 17 के अंतर्गत पारित आदेश से संबंधित अभिलेखों की मांग आदेश की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर कर सकेगा तथा ऐसी जाँच कर सकेगा या करवा सकेगा तथा ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जैसा वह उचित समझे। परंतु यह कि किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई आदेश उसे सुने जाने का अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाएगा। अनुज्ञापन पदाधिकारी, अवैध रूप से रखे गए काष्ठ के भण्डार के साथ-साथ कारखाना और मशीनरी, उपकरणों और उपस्करों, वाहन या उनके किसी अन्य वस्तुओं के जिनका उपयोग अपराध के किए जाने में किया गया है, को पूर्णतः या अंशतः अधिहरण का आदेश दे सकेगा जहाँ- कोई काष्ठ आधारित उद्योग धारा 8 के अधीन प्रतिबंधित या प्रतिषिद्ध घोषित क्षेत्र में स्थापित है अथवा संचालित किया जाता है; या
कोई काष्ठ आधारित उद्योग बिना वैध अनुज्ञप्ति के स्थापित है और/या परिचालित किया जाता है; या
कोई काष्ठ आधारित उद्योग अनुज्ञप्ति के निलंबन या प्रतिसंहरण के बाद परिचालित किया जाता है; या
कोई काष्ठ आधारित उद्योग धारा 16 के प्रावधान के विरूद्ध विद्युत ऊर्जा या विद्युत प्रतिष्ठापन की सहायता से परिचालित किया जाता है; या
काष्ठ आधारित उद्योग के परिसर में बिना लेखा-जेाखा वाला काष्ठ पाया गया हो। (2) जिस अपराध के लिए जप्ति की कार्रवाई की गयी हो उस अपराध का परीक्षण करने की अधिकारिता रखने वाले दण्डाधिकारी को संपत्ति अधिहरण के लिए कार्यवाही प्रारम्भ किए जाने की जानकारी भेजी जाएगी। (3) उप धारा (1) के अधीन किसी संपत्ति को अधिहृत करने हेतु आदेश तबतक नहीं किया जाएगा जबतक कि उस व्यक्ति को, जिससे उस संपत्ति को जप्तकिया गया है, और उस दशा में जबकि ऐसी संपत्ति का स्वामी ज्ञात हो, ऐसे व्यक्ति को- उन आधार, जिनपर ऐसी संपत्ति को अधिहरित किया जाना प्रस्तावित है, की लिखित सूचना नहीं दे दी जाती है;
अधिहरण के आधारों के विरूद्ध लिखित अभ्यावेदन ऐसे युक्तियुक्त समय के अंतर्गत जो नोटिस में विनिर्दिष्ट किया जाए, देनेे का अवसर न दे दिया गया हो; और
मामले में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दिया जाता है। (4) अधिहरण आदेश के विरूद्ध अपील।- अधिहरण आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, आदेश के तीस दिनों के भीतर, या यदि ऐसे आदेश की जानकारी उसे नहीं दी गई हो तो ऐसे आदेश की जानकारी होने के तीस दिनों के भीतर, आदेश की सत्यापित प्रति एवं ऐसे शुल्क के साथ ऐसे प्रपत्र में, जैसा विहित किया जाय, संबंधित क्षेत्र, जिसमें जप्ति की गई है, के विहित प्राधिकारी के समक्ष लिखित अपील कर सकेगा। (5) कतिपय परिस्थितियों में न्यायालय आदि की अधिकारिता का वर्जन।- इस धारा की उप धारा-2 के तहत् किसी सम्पत्ति के अधिहरण की कार्यवाही आरंभ होने के बारे में परीक्षण की अधिकारिता रखने वाले दण्डाधिकारी को सूचना प्राप्त होने पर उस सम्पत्ति के, जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन अधिहरण की कार्यवाही आरम्भ की गई हो, कब्जा, परिदान या वितरण के संबंध में आदेश देने की अधिकारिता किसी न्यायालय को नहीं होगी। —
(1) जहाँ धारा 18 की उप-धारा (1) या उप-धारा (3) या उप-धारा (4) के तहत किसी संपत्ति या उसके किसी अंश के संबंध में, जैसा भी हो, अधिहरण हेतु पारित आदेश अंतिम हो गया हो वहाँ8 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 यथास्थिति ऐसी संपत्ति या उसका ऐसा अंश, सभी ऋणभारों (एनकम्ब्रेन्सेज) से मुक्त रूप से राज्य सरकार में निहित हो जाएगा। (2) धारा 18 की उप-धारा (1) या उप-धारा (3) या उप-धारा (4) के अधीन पारित अधिहरण आदेश किसी ऐसी अन्य शास्ति जिसके लिए वह व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन भागी हो, के अधिरोपण को वर्जित करने वाला नहीं समझा जाएगा। (1) इस अधिनियम के अन्तर्गत बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त किए किसी काष्ठ आधारित उद्योग का संचालन संज्ञेय अपराध होगा। (2) यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई नियमावली के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है या उल्लंघन करने का प्रयास करता है या उसके उल्लंघन का दुष्प्रेरण करता है तो वह तीन महीने के कारावास, जिसका विस्तार एक वर्ष तक हो सकेगा और/या 10000/- (दस हजार) रूपये के जुर्माना, जो 100000/- (एक लाख) रूपये तक विस्तारित हो सकेगा या दोनों से दंडित किया जाएगा। (1) कोई वन पदाधिकारी, बिना किसी दण्डाधिकारी के आदेश या वारंट के, किसी व्यक्ति को, जिसके विरूद्ध इस अधिनियम के तहत बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त किए किसी काष्ठ आधारित उद्योग के संचालन का यथोचित संदेह हो, गिरफ्तार कर सकता है। (2) इस धारा के तहत् गिरफ्तारी करने वाला प्रत्येक पदाधिकारी बिना अनावश्यक विलम्ब अभियुक्त को बन्धेज पर छोड़ेगा, या गिरफ्तार व्यक्ति को मामले में अधिकारिता रखने वाले दण्डाधिकारी या निकटतम थाना के थानाध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत करेगा। सहायक वन संरक्षक की श्रेणी से अन्यून कोई वन पदाधिकारी, जो या जिसके अधीनस्थ ने धारा-21 के तहत् किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, ऐसे व्यक्ति को इस आशय के बन्धेज को हस्ताक्षरित करने पर कि जब कभी आवश्यकता हो, मामले में अधिकारिता रखने वाले दण्डाधिकारी या निकटतम थाना के थानाध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होगा, छोड़ सकेगा। - जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, वहाँ प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का प्रभारी और उस कंपनी के प्रति उत्तरदायी था, और वह ऐसे अपराध का दोषी समझा जायेगा और कार्रवाई किए जाने का भागी होगा, और तदनुसार दण्डित किया जायेगा। परंतु यह कि इस उप-धारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति को इस अधिनियम में प्रावधानित किसी दंड का भागी नहीं बनायेगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या यह कि उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए समुचित तत्परता बरती थी। (2) उप धारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ किसी कम्पनी द्वारा इस अधिनियम के तहत् कोई अपराध किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत या लापरवाही के कारण किया गया है वहाँ ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जायेगा और कार्रवाई किए जाने का भागी होगा और तदनुसार दण्डित किया जायेगा। इस धारा के प्रयोजन के लिए - ''कम्पनी'' से अभिप्रेत है, कोई निगमित निकाय जिसमें कोई फर्म या सहकारी समिति या व्यक्तियों का कोई अन्य संघ शामिल है;
फर्म के संबंध में ''निदेशक'' के अन्तर्गत फर्म का भागीदार भी शामिल है। जहाँ कोई काष्ठ, चिरा हुआ या बिना चिरा हुआ, और/या काष्ठ या किसी काष्ठ आधारित उद्योग से बरामद होता है जिसके लिए इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाये गए नियमावली के प्रावधानों के अधीन कोई विधिमान्य अनुज्ञप्ति नहीं है, वहाँ जबतक कि तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, जिसे साबित करने का भार अभियुक्त पर होगा, यह माना जाएगा कि वह काष्ठ आधारित उद्योग संचालित था। (2) जहाँ इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाये गए नियमावली के विरूद्ध किसी अपराध के लिए किसी अभियोजन में, यह स्थापित हो जाता है कि अवैध घोषित कोई काष्ठ किसी व्यक्ति के काष्ठ आधारित उद्योग के परिसर में, या किसी ऐसे स्थल पर जहाँ चिरान/प्रसंस्करण किया जा रहा था, जप्त किया गया था, वहां जबतक कि तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, जिसके साबित9 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025 करने का भार अभियुक्त पर होगा, यह माना जाएगा कि ऐसे व्यक्ति ने इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गए नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान, ऐसा अपराध गठित करनेवाले तथ्यों के बारे में अनुज्ञापन पदाधिकारी के या किसी ऐसे व्यक्ति के, जिसे राज्य सरकार द्वारा या अनुज्ञापन पदाधिकारी द्वारा इस निमित्त समुचित रूप से प्राधिकृत किया गया हो, लिखित प्रतिवेदन पर लेगा। प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय से न्यून कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का परीक्षण नहीं करेगा। इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा शक्ति प्रदत्त वन पदाधिकारीः किसी व्यक्ति से, जिसकी अनुज्ञप्ति प्रतिसंहरित कर लिए जाने का दायी हो या धारा 17 की उप धारा (1) के खण्ड (ग) के अधीन जिसकी अनुज्ञप्ति रद्द अथवा निलंबित रखे जाने का दायी हो या उसके संबंध में युक्तियुक्त रूप से यह संदेह है कि उसने धारा 14 के अधीन विवरणी प्रस्तुत नहीं करने या धारा 15 के अधीन काष्ठ का लेखा जोखा नहीं रखने, या अवैध रूप से प्राप्त आधा घनमीटर आयतन से कम काष्ठ/किसी अन्य स्वरूप यथा चन्दन, कत्था लकड़ी, काष्ठकोयला का प्रसंस्करण का अपराध किया है, ऐसे प्रतिसंहरण या निलंबन के बदले या ऐसे प्रत्येक अपराध के शमन के रूप में, जैसा भी हो, ऐसी धनराशि स्वीकार कर सकेगा जो इस अधिनियम के तहत बनाए गए नियम में विहित हो और ऐसी राशि दण्डस्वरूप अधिरोपित कर सकेगा जो नियम में विहित हो और अवैध रूप से प्राप्त किए गए काष्ठ को, जिसको जब्त किया गया था, अधिहरित किए जाने का आदेश करेगा;
यदि इस अधिनियम की धारा 18 के अधीन अधिहरित किए जाने योग्य कोई सम्पत्ति जप्त की गई हो तो इस अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकार द्वारा अधिहरण का आदेश पारित किए जाने के पूर्व, नियम के अन्तर्गत विहित मूल्य का भुगतान कर दिये जाने पर, विमुक्त कर सकेगा। (2) वन पदाधिकारी को, यथास्थिति, ऐसी धनराशि का या, ऐसे मूल्य का, या दोनों का, भुगतान कर दिये जाने पर, अभियुक्त व्यक्ति को, यदि वह हिरासत में हो, छोड़ दिया जायेगा, जप्त संपत्ति विमुक्त कर दी जाएगी, और ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध या ऐसी संपत्ति के संबंध में आगे कोई और कार्यवाही नहीं की जायेगी। (3) वैद्य अनुज्ञप्ति के बिना परिचालित काष्ठ आधारित उद्योग पर इस धारा के प्रावधान लागू नहीं होंगे। अनुज्ञापन पदाधिकारी और प्रत्येक ऐसे पदाधिकारी को, जिसे किन्हीं कर्त्तव्यों का निर्वहन करने के लिए समुचित रूप से प्राधिकृत किया गया है या जिससे इस अधिनियम के अन्तर्गत अपेक्षित हो, भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधान के अर्थ के अंतर्गत लोक सेवक समझा जायेगा। इस अधिनियम के अन्तर्गत अधिहरण योग्य होने के बहाने एवं परेशान करने हेतु कोई वन पदाधिकारी अनावश्यक रूप से कोई सम्पत्ति जब्त करता है तो वह 10000/- (दस हजार) रूपये के जुर्माने, जो 100000/- (एक लाख) रूपये तक विस्तारित हो सकेगा, से दंडनीय होगा। इस अधिनियम के प्रावधान या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या इनके तहत किए गए आदेश के अनुसरण में अच्छे मंशा से की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही राज्य सरकार या किसी अधिकारी या किसी व्यक्ति या प्राधिकारी के विरूद्ध संस्थित नहीं होगी। यथास्थिति न्यायालय या अनुज्ञापन पदाधिकारी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को, जिनके द्वारा दी गई जानकारी के परिणामस्वरूप इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी प्रावधान के उल्लंघन का निर्विवाद रूप से पता लगा हो, उतनी रकम, जो जुर्माने की रकम के और/या समपहृत और/या अधिहृत संपत्ति के मूल्य के एक चौथाई से अनधिक हो, पुरस्कार स्वरूप देने की अनुमति का आदेश दे सकेगा। राज्य सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा हितधारकों की प्रतिक्रिया के लिए पूर्व प्रकाशन की शर्त्तों के अघ्यधीन नियम बना सकेगी। (2) विशेषकर और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयाेंं या उनमें से किसी विषय के लिये प्रावधान कर सकेंगे, अर्थात् - धारा 10 की उप धारा (3) के अधीन वह प्रपत्र जिसमें आवेदन किया जायेगा और वह शुल्क तथा प्रतिभूति जमा जो ऐसे आवेदन के साथ संलग्न होगा;
धारा 10 की उप धारा (5) के अधीन शर्त्ताें का निर्धारण जिनके अधीन अनुज्ञप्ति मंजूर की जा सकेगी;
10 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025वह कालावधि जिसके लिए, वह फीस जिसकी अदायगी पर, और वह शर्त्त जिसके अघ्यधीन धारा 10 की उप धारा (6) के तहत अनुज्ञप्ति नवीकृत की जा सकेगी;
प्रपत्र जिसमें, वह अधिकारी जिसको तथा वे अवधि जिन में धारा 14 के अधीन विवरणियाँ प्रस्तुत की जाएंगी;
धारा 16 की उप धारा (2) के अधीन विद्युत् संयोजन आदि लगाए जाने के लिए प्रावधान; शुल्क/जुर्माना आदि के रूप में काष्ठ आधारित उद्योगों से प्राप्त धन राशि का उपयोग राज्य में वन/वृक्ष आच्छादन को बढ़ाने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु प्रावधान; कोई अन्य विषय जिसे विनियमित किये जाने की आवश्यकता हो या जो विनियमित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल चौदह दिनों की अवधि के लिए रखा जायेगा, जो एक सत्र या एक से अधिक लगातार सत्रों में पूरी हो सकेगी, और यदि, जिस सत्र में यह रखा गया हो उसकी अथवा उसके ठीक बाद वाले सत्र की समाप्ति के पहले, दोनों सदन नियम में कोई सुधार करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन सहमत हों कि नियम बनाया ही नही जाए, तो उसके बाद, यथास्थिति, नियम केवल ऐसे सुधार के साथ लागू होगा अथवा प्रभावी ही नहीं होगा; किन्तु ऐसे किसी सुधार या निरस्तीकरण का उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी कार्य की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। - किसी अन्य अधिनियम या विधि, नियम, आदेश में अंतर्विष्ट कोई बात अथवा राज्य के किसी क्षेत्र में विधि का बल रखनेवाली कोई बात काष्ठ आधारित उद्योग के मामले में तथा प्रसंस्करण (प्रॉसेसिंग), के संबंध में लागू नहीं होगी, जिसके लिए इस अधिनियम मेंं प्रावधान निहित हैं। और यह भी कि सभी काष्ठ आधारित उद्योग पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा अन्य केन्द्रीय एवं राज्य के अधिनियमों के अन्तर्गत इन उद्योगों के लिए प्रासंगिक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्धारित सभी पर्यावरणीय अथवा अन्य विनियमों एवं मार्गदर्शनों का अनुसरण करेंगे।
इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधान निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे- (क) सामान्य बढ़ईगिरी का संचालन जो काष्ठ चिरान का क्रियाकलाप नहीं करते हैं; (ख) राज्य सरकार के स्वामित्त्व वाले काष्ठ आधारित उद्योग। यदि इस अधिनियम के प्रावधानाें को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, आदेश द्वारा, इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप कुछ भी कर सकेगी जो उस कठिनाई को दूर करने के उद्देश्य से उसे आवश्यक या उचित प्रतीत होती है'ः परंतु यह कि इस अधिनियम के लागू होने की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के समापन के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं किया जायेगा। - बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990, (समय-समय पर यथासंशोधित) और इसके अधीन बनाए गए नियम तथा निर्गत आदेश जो इस अधिनियम में किए गए प्रावधानों के प्रतिकूल हों इसके द्वारा निरसित किये जाते हैं। (2) परन्तु ऐसे-निरसन के होते हुए भी उक्त अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन किया गया कोई कार्य या की गयी कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन किया गया कार्य या की गई कार्रवाई समझी जायेगी मानों यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था जिस दिन ऐसा कार्य किया गया था या ऐसी कार्रवाई की गई थी। इस अधिनियम के किन्ही प्रावधानों के संबंध में इसके अंग्रेजी एवं हिन्दी पाठों में अन्तर होने की स्थिति में अंग्रेजी पाठ मान्य होगा।
ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव। ,11 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 माच(cid:91) 2025
उद्देश्य एवं हेतु
रिट याचिका (सिविल) संख्या-202/1995ः टी0एन0 गोदावरमन थिरूमल बनाम भारत संघ एवं अन्य में भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्देशो के तहत, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश के आरा मिलों सहित विभिन्न काष्ठ आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विनियमन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये है। चूँकिं, वर्तमान बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990 केवल आरा मिलों से संबंधित है, इसलिए वर्तमान अधिनियम, 1990 को निरसित कर एक नया अधिनियम बनाने की आवश्यकता है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में बिहार राज्य में वन एवं वृक्ष आवरण के संरक्षण एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ''बिहार काष्ठ आधारित उद्योग (स्थापना एवं विनियमन) विधेयक, 2025 तैयार किया गया है, जिससे काष्ठ आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विनियमन (जिसमें काष्ठ की उपलब्धता का आकलन एवं स्थायी आधार पर नई मशीनों की स्थापना भी शामिल है) तथा ऐसे उद्योगों की संख्या निर्धारित करने तथा ऐसे उद्योगों से प्राप्त शुल्क एवं उदग्रहण की राशि का वनरोपण कार्यो में उपयोग करने का प्रावधान किया जा सके। इसलिए अब उपर्युक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए बिहार काष्ठ आधारित उद्योग (स्थापना एवं विनियमन) विधेयक, 2025 के प्रावधानों को लागू किया जाना आवश्यक है यही इस विधेयक का उद्देश्य है तथा इसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ट है।
(डॉ सुनील कुमार) भार-साधक सदस्य । iVuk fnukad&25-03-2025
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,