;बपकरू201द्ध 0;बपकरू547द्ध0-40
;बपकरू464द्ध
असाधारण अंक
;बपकरू464द्ध ;बपकरू430द्ध ;बपकरू292द्ध
6 ;बपकरू287द्ध 1947 ;0द्ध
;0 210द्ध , ;बपकरू232द्ध , 27 ;बपकरू91द्ध 2025
सं॰ प्र0-10/अग्रिम (विविध)-05/2024—3519 (वि0) वित्त विभाग ———— संकल्प 26 मार्च 2025 विषयः- बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की अनुशंसा के उपरान्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा दिनांक-04.01.2024 को पारित न्यायादेश के आलोक में गृह निर्माण अग्रिम के प्रावधानों में संषोधन के उपरांत निर्धारित सुरक्षात्मक शर्त्तों (Safeguards) के अधीन निजी व्यक्ति से बने-बनाये मकान/फ्लैट का क्रय किये जाने की स्थिति में भी गृह निर्माण अग्रिम के रूप में अधिकतम 25.00 लाख रू0 एवं गृह वृहद्दीकरण अग्रिम के रूप में अधिकतम 10.00 लाख रू0 8.5 प्रतिषत साधारण ब्याज की दर पर स्वीकृति के संबंध में। विा विभाग, बिहार के संकल्प संख्या-2140 दिनांक-28.02.2024 द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा सिविल ऑरिजनल/इन्हेरेंट/ एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी अपीलेट जूरिस्डीक्शन, रिट पिटिशन (सिविल) संख्या- 643/2015 (ऑल इंडिया जजेज एशोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य) में दिनांक-04.01.2024 को पारित आदेश के आलोक में बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को विभिन्न भाा/सुविधाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है । वित्त विभागीय संकल्प सं0-2140, दिनांक-28.02.2024 की कंडिका-I (a) एवं (b) में उल्लेख किया गया था कि न्यायिक पदाधिकारियों को गृह निर्माण अग्रिम आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत HBA Rules, 2017 के अनुरूप अनुमान्य होगा। साथ ही निजी व्यक्तियों से बने-बनाये मकान/फ्लैट खरीदने हेतु आवश्यक प्रावधान, उच्च न्यायालय के परामर्श के आलोक में निर्गत किया जाएगा।
2. उक्त आलोक में बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को गृह निर्माण अग्रिम की स्वीकृति प्रदान किये जाने का प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन था।
3. अतः सम्यक् विचारोपरांत बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों के लिए निम्नलिखित शर्तों के अधीन गृह निर्माण अग्रिम की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-
3.1 प्रयोजन बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए गृह निर्माण अग्रिम स्वीकार्य हैः-2 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025 i. पदाधिकारी द्वारा अपने या संयुक्त रूप से अपने पति/पत्नी के स्वामित्व वाले प्लॉट पर एक नये मकान का निर्माण/अथवा
ii. एक प्लॉट खरीदना और उसपर मकान बनाना/अथवा iii. सरकारी भवन समितियों/स्व-वित्त योजनाओं/हाउसिंग बोर्डो/ विकास प्राधिकरणों एवं अन्य वैधानिक अर्द्ध सरकारी निकायों के माध्यम से एक मकान/फ्लैट खरीदना और निर्माण करना या प्राप्त करना।
iv. निर्धारित अधिकतम लागत की शर्त के अधीन पदाधिकारी द्वारा अपने या अपनी पत्नी/पति के संयुक्त स्वामित्व वाले मौजूदा मकान में रहने के स्थान का विस्तार करना/अथवा
v. मकान बनाने के लिए अन्य स्रोतों से लिये गए ऋण या अग्रिम की अदायगी, भले ही मकान का निर्माण शुरू कर दिया गया हो, बषर्ते कि गृह निर्माण अग्रिम का आवेदन अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण के पूर्व ही दिया गया हो।
vi. लागत की अधिकतम सीमा के अधीन किसी रिहायशी कालोनी में उस प्लॉट, जिस पर दुकान एवं आवास का निर्माण किया जाना है, पर भवन के केवल रिहायशी हिस्से का निर्माण।
vii. मकान/फ्लैट प्राईवेट पार्टी, रजिस्टर्ड बिल्डर, आर्किटेक्ट, गृह निर्माण सोसाईटी, निजी व्यक्ति आदि से खरीदना।
3.2 शर्तेंः-
i. उस प्लॉट की स्थिति में, जिस पर पदाधिकारी का अपनी पत्नी/पति के साथ संयुक्त रूप से स्वामित्व है, अग्रिम के भुगतान के लिए पति और पत्नी दोनों को उस भूमि/मकान को प्रतिभूति के रूप में बिहार के राज्यपाल के पास बंधक रखने के लिए इच्छुक होना चाहिए। ऐसी स्थिति में पति/पत्नी, जैसा भी मामला हो, की ओर से आवेदन पत्र के साथ एक पत्र भेजा जाए कि यदि आवेदन किया गया गृह निर्माण अग्रिम स्वीकृत हो जाता है तो पति/पत्नी अग्रिम लौटाने के लिए भूमि/संपत्ति के अपने हिस्से को अपनी पत्नी/पति के हिस्से के साथ संयुक्त रूप से प्रतिभूति के रूप में बंधक रखेंगे। बंधक वित्त विभागीय नियमावली के नियम 393 के आलोक में पदाधिकारी के खर्च पर वि0नि0फार्म-13 में रखा जायेगा।
ii. केवल भूमि की खरीद के लिए गृह निर्माण अग्रिम अनुदेय नहीं है। iii. किराया-क्रय पद्धति के आधार पर मकान खरीदने के लिए गृह निर्माण अग्रिम स्वीकार्य नहीं है, परन्तु फ्लैटों/मकानों के किराया क्रय को सीधी खरीद में बदलने पर यह अनुदेय हो जाता है, बशर्तें कि मकान स्टेट हाउसिंग बोर्डों या इसी प्रकार के सरकार द्वारा नियंत्रित निकायों से खरीदा जाता है।
iv. सहकारी समितियों/स्व-वित्त योजनाओं को पेशगी की रकम या आरंभिक रजिस्टे्रेशन की राशि का भुगतान करने के लिए गृह निर्माण अग्रिम अनुमान्य नहीं है।
3.3 पात्रता
i. बिहार न्यायिक सेवा के सभी स्थायी पदाधिकारी। ii. अस्थायी पदाधिकारी जिनकी सेवा 10 वर्ष से कम न हो बशर्ते वे किसी अन्य राज्य सरकार के अधीन स्थायी रूप से नियुक्त न हो।
iii. निलंबित पदाधिकारी पात्र हैं, किन्तु उन्हें दो स्थायी पदाधिकारियों की ओर से बांड देना होगा। टिप्पणीः- जब पति और पत्नी दोनों सरकारी पदाधिकारी हों, तो दोनों में से केवल एक को ही अग्रिम अनुमान्य होगा। 3.4 अग्रिम प्रदान करने के लिए शर्तें (परिशिष्ट-'क' के अनुसार)ः-
i. कार्य के स्थान पर अथवा उस स्थान पर जहाँ आवेदक सेवानिवृति के पश्चात् अंतिम रूप से बसना चाहता है, भूमि क्रय कर मकान का निर्माण करने/भूमि उपलब्ध रहने पर मकान निर्माण करने के लिए अग्रिम देय है।
ii. इन नियमों के तहत सेवा की संपूर्ण अवधि के दौरान केवल एक बार ही अग्रिम स्वीकार्य है।
iii. निर्माण किये जाने वाले/खरीदे जाने वाले मकान की लागत (भूमि की लागत को छोड़कर), निर्धारित अधिकतम लागत की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। विशिष्ट3 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025 मामलों में, अधिकतम लागत की सीमा में अधिकतम 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है।
iv. यदि पदाधिकारी इस प्रयोजन के लिए अन्य सरकारी ोत या हाउसिंग बोर्ड या अर्द्ध सरकारी निकायों या स्थानीय निकायों या बैंकों से इसी उद्देश्य से कोई ऋण या अग्रिम लिए हाें तथा बकाया ऋण/अग्रिम को ब्याज के साथ एक किस्त में लौटाने का वचन देते हैं, तो आवेदक को गृह निर्माण अग्रिम के नियमों के अन्तर्गत अग्रिम की स्वीकृति दी जा सकती है।
v. पदाधिकारी या उनकी पत्नी/पति/नाबालिक बच्चे के नाम से उस कस्बे/शहर में पहले से ही कोई मकान नहीं होना चाहिये जहाँ सरकार से अग्रिम लेकर मकान का निर्माण करने या खरीदने का प्रस्ताव है। परन्तु यदि कर्मचारी हिन्दू अविभाजित परिवार का सदस्य है, जिसका उस स्थान पर एक मकान हो, तो इन नियमों के तहत अग्रिम प्रदान की जा सकती है, परंतु यह राशि सामान्य पात्रता के 60 प्रतिशत तक सीमित होगी। vi. आवेदक के पास भूमि का स्पष्ट स्वामित्व होना चाहिए। भूमि पर पदाधिकारी का अपना या अपनी पत्नी/पति के साथ संयुक्त रूप से स्वामित्व होना चाहिए। यह ऋण भार कुर्क किये जाने से मुक्त होनी चाहिए।
vii. यदि अग्रिम, निजी पार्टियों/भूमि मालिक से मकान/फ्लैट खरीदने के लिये है, तो मकान/फ्लैट पर किसी भी प्रकार का देनदारी नहीं होनी चाहिए। आवेदक, पंजीकृत मूल्यांकक द्वारा अपने खर्च पर इसका मूल्यांकन कराए। मूल्यांकन निबंधन हेतु निर्गत निर्देश के अनुसार अवर निबंधक द्वारा की जाएगी।
viii. फ्लैट क्रय हेतु अग्रिम के संबंध में आवेदक को भूमि मालिक एवं रजिस्टर्ड बिल्डर के बीच सम्पादित किये गये एकरारनामा के साथ प्रस्तावित फ्लैट का स्वीकृत नक्शा भी प्रस्तुत करना होगा।
ix. रजिस्टर्ड बिल्डर द्वारा किये जा रहे नये प्रोजेक्ट RERA (REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY) द्वारा स्वीकृत (Approved) होना चाहिये। x. आवेदक द्वारा मकान/फ्लैट क्रय करने के दौरान विक्रेता का KYC प्राप्त करना होगा। 3.5 अग्रिम की राशि
(क) बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को गृह निर्माण अग्रिम निम्न प्रकार से
अनुमान्य होगीः-
i. स्वीकृति के समय पदाधिकारी के मूल वेतन का 34 गुणा अथवा ii. पदाधिकारी की अदायगी के क्षमता के अनुसार परिकलित राशि, अथवा iii. अधिकतम 25,00,000/- (पच्चीस लाख) रूपये, इनमें से जो भी कम हो।
(ख) किसी मौजूदा मकान के विस्तार/वृहद्दीकरण के लिए अधिकतम अनुमान्य राशि 34 माह के मूल वेतन के आधार पर आकलित किया जायेगा, जो अधिकतम 10,00,000/- (दस लाख) रूपये अथवा वृहद्दीकरण की लागत अथवा भुगतान क्षमता-इनमें से जो भी कम होगी, देय होगा।
3.6 लागत सीमा-प्रस्तावित भवन निर्माण/फ्लैट क्रय की अधिकतम लागत का प्रश्न है, यह संबधित पदाधिकारी के मूल वेतन के 139 गुणा हो सकती है परंतु इसकी अधिकतम सीमा एक करोड़ रूपये तक होगी। 3.7 अदायगी की क्षमता-अग्रिम की राशि की गणना करने के लिए, अग्रिम अदायगी की क्षमता
| (क) 20 वर्ष के बाद सेवा निवृत होने वाले पदाधिकारी। | मूल वेतन का 40% |
| (ख) 10 वर्ष के बाद परन्तु 20 वर्ष के पहले सेवा निवृत होने वाले पदाधिकारी। | मूल वेतन का 40%, मृत्यु-सह-सेवा निवृति उपदान का 65% समायोजित किया जाएगा। |
| (ग) 10 वर्ष के अन्दर सेवा निवृत होने वाले पदाधिकारी। | मूल वेतन का 50%, मृत्यु-सह-सेवा निवृति उपदान का 75% समायोजित किया जाएगा। |
i. बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को स्वीकृत किये जाने वाले गृह निर्माण/गृह वृहद्दीकरण अग्रिम पर 8.5 प्रतिशत साधारण ब्याज देय होगा। अग्रिम के स्वीकृत्यादेश में निहित शर्तो के अनुपालन एवं सक्षम पदाधिकारियों द्वारा मूलधन की पूरी राशि का4 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025 ससमय भुगतान का प्रमाण-पत्र नहीं देने पर निर्धारित सूद की दर के अतिरिक्त 2.5 प्रतिशत सूद चार्ज किया जायेगा।
ii. अग्रिम पर प्रथम किस्त के भुगतान की तिथि से साधारण ब्याज देय होगा। iii. ब्याज की गणना प्रत्येक माह के अंतिम दिवस को रहने वाले बकाये राशि के आधार पर की जाएगी।
iv. अगर मूलधन के बकाये का भुगतान माह के मध्य तक कर दिया जाता है, तो उस माह का ब्याज नहीं लिया जाएगा।
v. यदि प्रशासनिक कारणों से वेतन विलम्ब से निकलता है, तो देय ब्याज अवशेष की गणना हेतु वसूली उसी माह में मानी जाएगी जिस माह का वेतन निकला हो।
vi. यदि अग्रिम के मूलधन का कोई भाग मृत्यु-सह-उपादान की राशि से समायोजित किया जाता है तो वह सेवानिवृत्ति की तिथि को ही समायोजित समझा जायेगा, उस तिथि के उपरांत ब्याज देय नहीं होगा।
vii. यदि किसी पदाधिकारी की सेवाकाल में मृत्यु हो जाती है एवं मूलधन के किसी भाग का समायोजन उनके मृत्यु-सह-उपादान से होता है, तो उनकी मृत्यु की तिथि के बाद ब्याज देय नहीं होगा।
3.9 अग्रिम राषि की किस्ताें का भुगतान
i. मकान का विस्तार करने/निर्माण के लिए (एक मंजिल/दुमंजिला) ः 50 प्रतिशत बंधन-पत्र के निष्पादन पर और शेष 50 प्रतिशत जब भूमि तल के विस्तार में निर्माण प्लिंथ स्तर तक पहुंच जाये और पहली मंजिल के विस्तार में छत तक पहुंच जाये। ii. भूमि की खरीद और निर्माण के लिए (एक मंजिला मकान) : एग्रीमेन्ट और जमानत बांड का निष्पादन होने पर 40 प्रतिशत या प्लॉट की वास्तविक कीमत, जो भी कम हो। शेष राशि का 50 प्रतिशत बंधन-पत्र का निष्पादन होने पर तथा बाकी निर्माण के प्लिंथ स्तर तक पहुंचने पर।
iii. भूमि की खरीद और निर्माण के लिए (दुमंजिला मकान) : एग्रीमेन्ट और जमानत बांड का निष्पादन होने पर 30 प्रतिशत या प्लॉट की वास्तविक कीमत, जो भी कम हो। शेष राशि का 50 प्रतिशत बंधन-पत्र का निष्पादन होने पर तथा बाकी निर्माण के प्लिंथ स्तर तक पहुंचने पर।
iv. फ्लैट की खरीद/निर्माण या निर्मित मकान की खरीद पर एकमुश्त भुगतान। v. सरकारी गु्रप हाउसिंग सोसाईटी से मकान/फ्लैट खरीदने पर-30 प्रतिशत बंधन-पत्र के निष्पादन पर और बाकी मांग पर उपयुक्त किस्तों में।
3.10 अग्रिम के उपयोग के लिए समय सीमायें
i. प्लॉट/भूमि की खरीदः दो माह के अन्दर पूरी हो जाये और क्रय के कागजात वित्त विभाग के निरीक्षण के लिए प्रस्तुत कर दिये जायें अन्यथा अग्रिम की रकम ब्याज सहित एक मुश्त वापसी करनी होगी।
ii. बने बनाये मकान की खरीदः अग्रिम मिलने के तीन महीने के अन्दर मकान का कब्जा पूरा हो जाये और उसे सरकार को रेहन रख दिया जाये।
iii. नये फ्लैट की खरीद/निर्माणः अग्रिम या किस्त लेने के एक माह के भीतर उसका उपयोग हो जाना चाहिये अन्यथा प्राप्त रकम ब्याज के साथ जमा करनी होगी।
विशेष परिस्थितियों में, वित्त विभाग उपर्युक्त कंडिकाओं में उल्लिख्ति समय सीमाओं मे छूट भी दे सकता है।
3.11 अग्रिम की वापसी
i. अग्रिम की वसूली भुगतान के अगले माह से अधिकतम 189 (एक सौ नवासी) किस्तों में की जाएगी, जिसमें मूलधन 129 किस्तों में तथा सूद 60 किस्तों में होगी।
ii. वापस की जाने वाली राशि पूर्ण रूपयों में निर्धारित की जायेगी। यदि इसमें एक रूपये से कम की कोई राशि हो तो उसे आखिरी किस्त में वसूल की जाएगी।
iii. किस्तों की नियमित अदायगी नहीं होने पर दण्ड स्वरूप 2.5 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त शुल्क देय होगा।
iv. यदि पदाधिकारी चाहे तो कम अवधि में भी अग्रिम का भुगतान कर सकते हैं। v. यदि कोई पदाधिकारी सामान्य सेवा निवृत्ति/अधिवार्षिता के अलावा किसी अन्य कारण से नौकरी में नहीं रहता है या फिर पूरे अग्रिम की वसूली से पहले ही उसकी मृत्यु हो जाती है, तो पूरी बकाया राशि उसके बाद से देय हो जायेगी। फिर भी यदि उस समय तक5 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025 मकान पूरा न हुआ हो और रेहन भी न रखा गया हो, तो सरकार, सुयोग्य मामलों में, ब्याज सहित बकाया राशि की वसूली आसान किस्तों में करने की इजाजत दे सकती है। vi. यदि पदाधिकारी या उसका उत्तराधिकारी किसी कारणवश अग्रिम को पूरा नहीं लौटाता तो सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वह मकान को रेहन रख ले और बकाया राशि को ग्रेच्यूटी से मकान बेचकर या उत्तराधिकारी को भुगतेय अन्य राशि या अन्य प्रकार से वसूल करने के लिए कार्रवाई करें।
3.12 अग्रिम की वापसी की समय-सीमाः-
वसूली निम्नलिखित के अनुसार शुरू की जायः- i. भूमि की खरीद तथा मकान के निर्माण के मामले में, मकान के पूरा हो जाने के बाद के पहले माह के वेतन से अथवा जिस तिथि को प्लॉट की खरीद के लिए अग्रिम स्वीकृत किया गया था, उसके 24 महीने के ठीक बाद के वेतन से, जो भी पहले हो। ii. मकान के निर्माण के लिए अग्रिम के मामले में मकान के पूरा हो जाने के अगले माह के वेतन से अथवा अग्रिम की प्रथम किस्त की निकासी के तिथि के 18 माह के ठीक बाद के वेतन से, जो भी पहले हो।
iii. बने बनाये मकान/फ्लैट की खरीद के मामले में, जिस महीने में अग्रिम लिया गया है, के अगले महीने के वेतन से।
iv. यदि अधिकारी चाहे तो अग्रिम की वापसी निर्दिष्ट अवधि से कम समय में भी की जा सकती है।
v. वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना वसूली न तो रोकी जाएगी और न ही विलम्बित/स्थगित की जायगी।
3.13 बंधन-पत्र की वापसी (रिकन्वेयन्स आफ डीड)ः-
जब लिये गये अग्रिम को ब्याज सहित पूरा-पूरा लौटा दिया जायेगा तो सरकार को रेहन रखी गयी संपति को विनिर्दिष्ट रूप में अधिकारी को पुनः लौटा दिया जायेगा। पुनः लौटाने का विलेख वित्त विभाग जो सामान्यतः राज्यपाल की ओर से रेहन-विलेख को स्वीकार करता है, द्वारा निष्पादित किया जाएगा पुनः लौटाने के विलेख को पंजीकृत कराया जाना अनिवार्य है। 'रिकन्वेयन्स डीड' के निष्पादन में और पंजीकरण में जो भी खर्चा आएगा वह संबंधित अधिकारी द्वारा वहन किया जाएगा। जैसे ही 'रिकन्वेयन्स डीड' का निष्पादन व पंजीकरण हो जाता है, तो यह संबद्व अधिकारी को उसके द्वारा पहले ही जमा कराए जा चुके रेहन विलेख, विक्रय विलेख व अन्य दस्तावेजों के साथ लौटा दिया जाए। यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु वसीयतनामा लिखे बिना हो जाती है और अग्रिम की वसूली ग्रेच्युटी या किसी और ोत से की जाए तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी के नाम रिकन्वेयन्स डीड कर दी जाए। यदि एक से ज्यादा कानूनी उत्तराधिकारी हो तो अन्य उत्तराधिकारियों से कोई अनापत्ति शपथ-पत्र प्राप्त करके, किसी एक उत्तराधिकारी के नाम रिकन्वेयन्स डीड की जा सकती है।
3.14 (क) बीमाः-
मकान/फ्लैट के निर्माण कार्य के पूरा होने/खरीदने के तत्काल बाद, सरकारी कर्मचारी उस मकान का बीमा करवा लेगा। बीमे की रकम अग्रिम की रकम से कम नहीं होगी और आग, बाढ़ व तड़ित से क्षति होने के विरूद्ध यह बीमा वह तब तक जारी रखेगा जब तक समस्त अग्रिम व उसके उपर ब्याज की वापसी न कर दी जाए। वित्त विभाग के पास वह पॉलिसी को जमा करा देगा/बीमे का नवीकरण प्रति वर्ष किया जाएगा व प्रीमियम की रसीदें वित्त विभाग के निरीक्षण के लिए नियमित रूप से प्रस्तुत की जाएँगी।
(ख) बीमा न कराए जाने (नॉन इंश्योरेंश) की मुआफी :
सरकार नान-इंश्योरेंस की अवधि को एक वर्ष तक माफ करने के लिए सक्षम है। यह सुनिश्चित किया जाना है कि सरकारी कर्मचारी द्वारा जान-बूझकर यह अनियमितता नहीं की जाती वरन् ऐसी परिस्थितयों के कारण हुआ जो उसके नियंत्रण से बाहर है। यदि कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाईटी से मकान लिया गया है और सोसाईटी ने बीमा कराया है तो दोबारा बीमे की जरूरत नहीं है। किन्तु जहां उसके विस्तार की जरूरत हो तो वैसा किया जाये।
4. अन्य शर्त्ते जो उपर्युक्त में अंकित नहीं है, उन बिन्दुओं पर केन्द्र सरकार के गृह निर्माण नियमावली में निर्धारित नियम/शर्त्त/प्रक्रिया लागू होगी।
5. यह प्रावधान निर्गत होने की तिथि से प्रभावी होगा। इसके निर्गत होने के उपरांत गृह निर्माण अग्रिम हेतु आवेदन करने वाले आवेदकों को उपरोक्त नियम/शर्त/प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
6. इस नियमावली के अंतर्गत निर्धारित नियम/शर्त/प्रक्रिया की व्याख्या करने और आवश्यकतानुसार क्षांत/संशोधित करने का अधिकार विा विभाग, बिहार सरकार को होगा।6 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025 7. बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों हेतु गृह निर्माण अग्रिम से संबंधित पूर्व में निर्गत वित्त विभागीय संकल्प, परिपत्र एवं आदेश इस हद तक संशोधित समझा जाएगा।
8. प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति वित्त विभागीय संलेख ज्ञापांक-2785, दिनांक-11.03.2025 के क्रम में दिनांक-19.03.2025 की बैठक के मद संख्या-16 में दी गयी है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प का प्रकाशन सर्वसाधारण की जानकारी हेतु बिहार गजट के असाधारण अंक में किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, आनंद किषोर, प्रधान सचिव।7 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025
परिशिष्ट-'क'
बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों के लिए गृह निर्माण अग्रिम की स्वीकृति हेतु निजी
व्यक्तियों से बने बनाये मकान/फ्लैट क्रय किये जाने के लिए सुरक्षात्मक उपाय (Safeguard) के रूप में
आवेदक से प्राप्त किये जाने वाले निम्नलिखित अभिलेखों/ दस्तावेजों/षपथ-पत्रों की सूचीः-
i. सेल डीड/सेल एग्रीमेंट।
ii. स्वीकृत नक्शा।
iii. 12 वर्षों का सम्पाि अवभार प्रमाण-पत्र।
iv. जमीन (निर्मित एपार्टमेंट) का भू-स्वामित्व/म्यूटेशन प्रमाण-पत्र।
v. निबंधित बंध-पत्र।
vi. स्थानीय सरकारी वकील की राय।
vii. जमीन (निर्मित एपार्टमेंट) का मालगुजारी रसीद।
viii. अद्यतन सम्पति कर का रसीद।
ix. Empanelled valuer का प्राक्कलन।
x. विधि विभाग का परामर्श।
xi. Seller KYC (प्रपत्र संलग्न)।
आवेदक का घोषणा-पत्र
1. मेरी पत्नी/पति सरकारी सेवा में नहीं है। यदि है तो दोनों (पति/पत्नी) में से किसी एक को ही गृह निर्माण अग्रिम अनुमान्य होगा।
2. मेरी पत्नी/पति के नाम से उस शहर/कस्बा में कोई मकान नहीं है जहाँ के लिए अग्रिम लिया जा रहा है।8 ;बपकरू464द्ध ;द्धए 27 ;बपकरू91द्धए 2025
विक्रेता का KYC विवरण
विक्रेता का फोटो 1. विक्रेता का नाम ः- 2. पिता/पति का नाम ः- 3. जन्मतिथि ः- 4. आवासीय पता ः- ............................................................................................................................. .............................................................................................................................
मोबाईल नं0 ः- ई-मेलः-
5. बैंक का विवरण :-(क) खाता संख्या-
(ख) बैंक तथा शाखा का नाम-
6. आधार संख्या ः-
7. पैंन संख्या ः-
8. व्यवसाय ः-
9. बेची जा रही सम्पत्ति का विवरणः-
सम्पत्ति का पता ................................................................................................................................................