असाधारण अंक
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
3 भा(cid:289) 1947 (श0)
(सं0 पटना 1416) पटना, सोमवार, 25 अग(cid:232)त 2025
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श्रीमती श्वेता मिश्रा, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-445/2024, (596/2023) तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, कैमूर के विरूद्ध राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित शेल्टर होम में अनियमितता से संबंधित सी॰बी॰आई॰ से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3630 दिनांक 23.09.2020 द्वारा आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया। आरोप पत्र में श्रीमती मिश्रा के विरूद्ध अल्पावास गृह, कैमूर का पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण नहीं करने, अपने पदेन दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने तथा वस्तुस्थिति की गंभीरता का आकलन अक्षमता संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया।
शेल्टर होम में अनियमितता से संबंधित सी॰बी॰आई॰ से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई हेतु राज्य स्तर पर गठित वरीय पदाधिकारियों की त्रिसदस्यीय समिति की दिनांक 01.04.2022 को सम्पन्न बैठक में श्रीमती मिश्रा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने की अनुशंसा की गयी।
त्रिसदस्यीय समिति से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय स्तर पर आरोप पत्र पुनर्गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-6667 दिनांक 04.05.2022 द्वारा श्रीमती मिश्रा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्रीमती मिश्रा से प्राप्त स्पष्टीकरण पर समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गई। समाज कल्याण विभाग से प्राप्त मंतव्य में उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। तदुपरांत सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9746 दिनांक 25.05.2023 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2015-16) एवं (ii) 02 (दो)े वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड श्रीमती मिश्रा को अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। 2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 अग(cid:232)त, 2025 उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्रीमती मिश्रा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-3299/2024 में दिनांक 29.10.2024 को पारित न्यायादेश में श्रीमती मिश्रा के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-9746 दिनांक 25.05.2023 द्वारा संसूचित दंडादेश को निरस्त कर दिया गया।
माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 29.10.2024 को पारित न्यायादेश के विरूद्ध एल॰पी॰ए॰ दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग, बिहार, पटना का परामर्श प्राप्त किया गया। प्राप्त परामर्श के आलोक में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 29.10.2024 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-559 दिनांक 10.01.2025 द्वारा श्रीमती मिश्रा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9746 दिनांक 25.05. 2023 द्वारा संसूचित दंडादेश को निरस्त करते हुए नये सिरे से आवश्यक साक्ष्य/साक्षी सहित आरोप पत्र गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत नियमानुकूल अग्रतर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्रीमती मिश्रा के विरूद्ध नये सिरे से आरोप पत्र पुनर्गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3266 दिनांक 24.02.2025 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।
सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ संख्या-3299/2024, में दिनांक-29.10.2024 को पारित न्यायादेश के अनुपालन एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-559 दिनांक 10.01.2025 द्वारा लिये गये निर्णय के विरूद्ध श्रीमती मिश्रा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में एम॰जे॰सी संख्या-643/2025 (श्वेता मिश्रा बनाम बिहार राज्य व अन्य) दायर किया गया।
उक्त अवमाननावाद में दिनांक-16.05.2025 को पारित न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः- ............. 6. In the present case also, the respondents admit in paragraph no.10 of the show cause that punishment order dated 25.05.2023 has been set aside by the Government vide Resolution No.559 dated 10.01.2025 and has also informed in paragraph no.15 that filing of LPA does not arise. In situation like this, the opposite parties instead of granting promotion and consequential benefits to the petitioner during the period she became entitled for, cannot restrain themselves from said act in contemplation of any future departmental proceeding without any evidence. Such action shows the intent of the opposite parties to commit contempt.
7. In view of the clarification made by the Apex Court, the duty now remains for the opposite parties to act judicially to grant the right, which has been affected to the petitioner. The law does not permit acting otherwise to reopen the action.
8. It can only be held to be not possible to repose any confidence in the action of the opposite parties for the same event.
9. The contempt petition is thus consigned. उल्लेखनीय है कि सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-3299/2024 में दिनांक 29.10.2024 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के अनुपालन में संकल्प ज्ञापांक-559 दिनांक 10.01.2025 द्वारा श्रीमती मिश्रा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9746 दिनाक 25.05.2023 द्वारा संसूचित दंडादेश को निरस्त किया जा चुका है।
अतएव सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰-3299/2024 में दिनांक 29.10.2024 को पारित न्यायादेश के अनुपालन हेतु श्रीमती मिश्रा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर एम॰जे॰सी॰ संख्या-643/2025 में दिनांक-16.05. 2025 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में श्रीमती श्वेता मिश्रा, बि०प्र०से०, कोटि क्रमांक-445/2024, तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, कैमूर सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, मनिहारी, कटिहार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3266 दिनांक 24.02.2025 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को वापस लिया जाता है।
बिहार राज्यपाल के आदेश से, सरकार के अवर सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,