असाधारण अंक
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
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(सं0 पटना 1476) पटना, बुधवार, 10 िसत(cid:224)बर 2025 I ———
माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर सिविल अपील संख्या-4880/2017 राज्य सरकार एवं अन्य बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य तथा संबद्ध वादों के विचाराधीन रहने के फलस्वरूप राज्याधीन सेवाओं में विगत कई वर्षों से अवरूद्ध प्रोन्नति के कारण राज्य सरकार के सुचारू कार्य संचालन में उत्पन्न हो रही कठिनाई तथा राज्य के पदाधिकारियों/कर्मचारियों के निरन्तर सेवानिवृत होने के कारण राज्य के प्रशासनिक हित में राज्याधीन सेवाओं में प्रोन्नति के पद सोपान में तदर्थ एवं पूर्णतः अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत राज्य कर्मियों को मूल कोटि की वरीयता के आधार पर प्रोन्नति के पदानुक्रम में विहित वेतनमान के साथ उच्चतर पद का प्रभार देने की प्रक्रिया के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक-13.10.2023 द्वारा प्रावधान निर्गत किए गए हैं, ताकि राज्य के पदाधिकारियों/कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सके।
सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300 दिनांक-13.10.2023 के निर्गत होने के उपरांत विभिन्न संगठनों एवं अभ्यावेदनों के माध्यम से राज्याधीन सेवाओं में कार्यरत बेंचमार्क दिव्यांगजनों को भी अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के आलोक में 04 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण अनुमान्य कराते हुए उच्चतर पद का प्रभार दिए जाने हेतु अनुरोध किया जाता रहा है।
2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 10 िसत(cid:224)बर 2025राज्याधीन सेवाओं में प्रोन्नति एवं आरक्षण का मामला माननीय सर्वाेच्च न्यायालय, नई दिल्ली के समक्ष विचाराधीन रहने की स्थिति में राज्य के दिव्यांगजनों को अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के आलोक में उच्चतर पद के प्रभार संबंधी प्रावधानों से आच्छादित करने के प्रस्ताव पर विद्वान महाधिवक्ता, बिहार द्वारा भी सहमति प्रदान की गयी है। तदनुसार अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 में निहित प्रावधानानुसार राज्य के दिव्यांग कर्मियों/पदाधिकारियों को उच्चतर पद का प्रभार दिये जाने के क्रम में दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित प्रवर्ग के अनुरूप (100 रिक्तयों के आधार मानते हुए) निम्नवत प्रक्रिया अपनायी जायेगी :-
| (क) | अंध और निम्न –ष्टि; | मूल कोटि की वरीयता क्रमांक-01 से 25 तक = 01 पद। |
| (ख) | बधिर और श्रवण शक्ति में ]्रास; | मूल कोटि की वरीयता क्रमांक-26 से 50 तक = 01 पद। |
| (ग) | चलंत दिव्यांगता जिसके अंतर्गत प्रमस्तिष्क घात, रोगमुक्त कुष्ठ, बौनापन, तेजाब आक्रमण के पीड़ित और पेशीय दुष्पोषण भी है; | मूल कोटि की वरीयता क्रमांक-51 से 75 तक = 01 पद। |
| (घ) | स्वपरायणता, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता और मानसिक रूग्णता; | मूल कोटि की वरीयता क्रमांक-76 से 100 तक = 01 पद। |
| (ड.) | प्रत्येक दिव्यांगता के लिए पहचान किए गए पदो में ं खंड (क) से खंड (घ) के अधीन व्यक्तियों में से बहुदिव्यांगता जिसके अंतर्गत बधिर, अंधता भी हैं; |
इस अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-7462, दिनांक-28.04.2025 में निहित प्रावधान प्रभावी माने जायेंगे। चूंकि राज्याधीन सेवाओं में कार्यरत दिव्यांग कर्मियों/पदाधिकारियों को अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक-13.10.2023 में निहित प्रावधान के आलोक में दी जा रही है। अतएव दिव्यांग कर्मियों/पदाधिकारियों को उच्चतर पद का प्रभार देने की प्रक्रिया मेेंं भी सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक-13.10.2023 के प्रावधान प्रभावी माने जायेंगे।
उक्त प्रस्ताव में विधि विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता, बिहार की सहमति प्राप्त है। इस संकल्प में दिये गए प्रावधान के अतिरिक्त किसी बिन्दु पर संशय की स्थिति उत्पन्न होने पर सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा समय-समय पर निर्गत दिशा-निदेश प्रभावी माने जायेंगे।
उपर्युक्त प्रावधान इस संकल्प के निर्गत होने की तिथि से प्रभावी माने जायेंगे। ———
अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,