(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 28 अ(cid:274)हायण 1947 (श0)
(सं0 पटना 1793) पटना, शु(cid:272)वार, 19 (cid:464)दस(cid:224)बर 2025 (VII) ———
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(Geo-spatial services) वर्तमान परिवेश में भू-सूचना प्रौद्योगिकी (Geo information technology) एक आवश्यक और दूरदर्शी तकनीक के रूप में उभरकर सामने आई है। राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 तथा प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के माध्यम से भारत सरकार द्वारा भू-स्थानिक डेटा के उपयोग को सभी प्रमुख योजनाओं, आधारभूत संरचना निर्माण तथा प्रा—तिक संसाधन के समग्र रूप से प्रबंधन के लिए अनिवार्य माना गया है। ऐसे में बिहार राज्य के सभी विभागों को भी अपने योजना-निर्माण, अनुश्रवण और मूल्यांकन प्रणालियों को आधुनिक, सटीक और डेटा-आधारित बनाना आवश्यक है ताकि भू-सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग विभागों द्वारा बनाई जा रही योजनाओं में वैज्ञानिक –ष्टिकोण, स्थानिक विश्लेषण और वास्तविक प्रदर्शन की प्रमाणिकता को सुनिश्चित किया जा सके।
2. बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर (बिरसेक), विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत गठित बिहार काउन्सिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी की एक इकाई है, जिसकी स्थापना सन् 1988 में हुई। यह राज्य की नोडल रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी.आई.एस.) संस्थान है जिसे भू-सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने और लागू करने का दायित्व सौंपा गया है। बिरसेक को तारामंडल परिसर में एक आधुनिक जी.आई. एस. प्रयोगशाला और प्रशिक्षण केंद्र से सुसज्जित किया गया है, जिसमें उच्च-क्षमता वाले वर्कस्टेशन, सर्वर तथा उन्नत जीआईएस/रिमोट सेंसिंग सॉफ्टवेयर शामिल हैं।
3. हाल के वर्षों में बिरसेक द्वारा प्रा—तिक संसाधन एवं आधारभूत संरचना से जुडी योजना, जिला/ प्रखंड/गाँव स्तर के बेस मैप तथा थीमैटिक लेयर तैयार करना, —षि, जल संसाधन, वन, नगर विकास एवं आपदा प्रबंधन हेतु जी.आई. एस. आधारित अध्ययन, फसल क्षेत्र एवं उत्पादन आकलन (गेहूँ, धान, जूट), पराली जलाने का अनुश्रवण, वन/पेड़ आच्छादन का आकलन व अन्य संसाधन मैपिंग सम्बंधित कार्य सफलतापूर्वक किया गया है।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 (cid:464)दस(cid:224)बर 2025 4. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य तथा वैश्विक स्तर पर उपलब्ध सफल उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार के अंतर्गत सभी विभागोेंं द्वारा भू-स्थानिक अनुप्रयोगों (Geo-spatial applications) को अपनाने की व्यापक संभावनाएँ हैं तथा इसकी आवश्यकता भी महसूस की जा रही है। इस परिपेक्ष्य एवं बिरसेक के सु–ढ़ीकरण के निमित भू-स्थानिक सेवाऐं (Geo-spatial services) उपलब्ध कराये जाने हेतु एक नीति तैयार की गई है।
5. इस नीति के तहत राज्य के सभी सरकारी विभाग बिरसेक की भू-स्थानिक (Geo-spatial) सेवाओं का उपयोग निम्नलिखित मामलों में कर सकेंगे:
i. आधारभूत-संरचना से जुडी परियोजनाओं (infrastructure projects), जिनकी लागत 50 करोड़ रुपये या इससे अधिक होगी, के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, की तैयारी में भू-स्थानिक विश्लेषण (Geospatial Analytics) को एक अतिरिक्त अनिवार्य घटक के रूप में उपयोग करना होगा। ii. नए सेटेलाइट टाउनशिप (satellite townships), ग्रीनफील्ड टाउनशिप (greenfield township), एरिया डेवलपमेंट, औद्योगिक क्षेत्र (industrial estates), परिवहन, रक्षा और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर आदि से जुड़ी स्थानिक योजना (Spatial Planning) या अन्य गतिविधियों में संबंधित विभाग भू-स्थानिक मास्टर प्लान (Geo-spatial Master Plan) को एक अतिरिक्त घटक के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
iii. आवश्यकतानुसार विभाग योजनाओं के प्रगति का अनुश्रवण (progress monitoring), डैशबोर्ड, मूल्यांकन (assessments) और अन्य भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित अध्ययन के लिए भी बिरसेक की सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।
| Cost Norms | ||
| सभी आधारभूत-संरचना परियोजनाओं, जिनकी लागत 50 करोड़ रुपये या इससे अधिक होगा, के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (Detailed Project Report) तैयार करने में भू-स्थानिक विश्लेषण को एक अतिरिक्त (add-on) घटक के रूप में अनिवार्य रूप से उपयोग करना | कुल परियोजना लागत का 0.25% | |
| (Spatial स्थानिक योजना Planning)/गतिविधियों के लिए स्थानिक मास्टर प्लान का उपयोग | बिरसेक द्वारा प्रस्तावित तथा संबंधित विभाग द्वारा सहमति के अनुरूप | |
| भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित प्रगति का (GIS-based progress अनुश्रवण monitoring), डैशबोर्ड, संबद्ध अनुप्रयोग (allied applications), भौगोलिक सूचना प्रणाली-आधारित मूल्यांकन/अध्ययन | (skilled कुशल मानव-दिवस person days) की गणना तथा सॉफ्टवेयर/इमेजरी आवश्यकता के आधार पर बिरसेक द्वारा समर्पित (customised) प्रस्ताव के अनुरूप |
| प्रमुख राजमार्ग और रेल मार्ग, प्रमुख जिला सड़कें (ODR) और सामान्य जिला सड़कें। इसके साथ ग्रामीण संपर्क मार्ग, छोटे रेखीय कार्य, तथा छोटे पुल और पुलिया (culverts) | भू-आ—ति और भूमि उपयोग (land-use) का विश्लेषण, मार्गाधिकार (Right of Way-RoW) का अनुकूलन, गाँवों तक पहुँच एवं जंक्शन का विश्लेषण, संपर्क मार्गों की पुष्टि, पर्यावरण से संबंधित बाधाओ का चित्रण, स्थल ं जाँच, निर्माण तथा पैकेेज-स्तर की प्रगति अनुश्रवण, पहले/बाद की छवियों के आधार पर अनुश्रवण, तथा तैयार-हो चुके निर्मित ढ़ाँचे का GIS आधारित अभिलेख (as-built GIS asset) | ||
| Urban Infrastructure शहरी जलापूर्ति, सीवरेज, वर्षाजल निकासी ठोस (stormwater), (Solid Waste अपशिष्ट प ्रबंधन Management – SWM) नेटवर्क, टाउन सेंटर का पुनर्विकास, क्षेत्र आधारित विकास (Area Based Development- ABD) परियोजनाएँ, साथ ही टाउनशिप और आवासीय कॉलोनियाँ | |||
| सिंचाई, नहर प्रणालियाँ, बाढ़ एवं जलग्रहण प्रबंधन: बड़े और मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ, बैराज एवं तटबंध निर्माण कार्य, नदी प्रशिक्षण (river training), चेक डैम, छोटे जलाशय (small tanks) और जलग्रहण क्षेत्र के उपचार (watershed treatments) | |||
| औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स एवं आर्थिक आधारभूत-संरचना औद्योगिक पार्क, ग्रोथ सेंटर, लॉजिस्टिक्स/ वेयरहाउसिंग क्लस्टर, पर्यटन सर्किट (tourism circuits) | |||
| पर्यावरण, वन एवं परि–श्य पुनस्र्थापन: वनीकरण क्षेत्र (afforestation blocks), जैव-विविधता गलियारे (biodiversity corridors), तथा इको-सेंसिटिव ज़ोन zone की योजना (eco-sensitive planning) | |||
| ऊर्जा एवं प्रसारण आधारभूत ट्रांसमिशन लाइने , ं संरचना: सबस्टेशन, सोलर पार्क, तथा बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर rooftop एकत्रीकरण (large aggregation) | |||
| सामाजिक आधारभूत संरचना: स्कूलो ं का आधुनिकीकरण, जिला/राज्य स्तर पर प्राथमिक Health स्वास्थ्य केंद्र (Primary Center – PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centers – CHC) की आधारभूत संरचना का विस्तार। |
| डिजिटल कनेक्टिविटी एवं ई-गवर्नेंस आधारभूत संरचना: ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fiber Cable–OFC) मार्ग, मोबाइल टावर, और डेटा सेंटर्स। | मौजूदा कॉरिडोर के (along) ऑप्टिकल फाइबर केबल लिए मार्ग अनुकूलन, कवरेज सिमुलेशन (OFC) के (coverage simulations) के आधार पर मोबाइल टावर का चयन, PM गति शक्ति (PM Gati Shakti) लेयर्स के साथ एकीकरण, तथा उपयोगिताओं (utility) के सह-स्थान नियोजन (co-location planning) | |||
| * सूची केवल संकेतात्मक (indicative) है और पूर्ण (exhaustive) नहीं है |
Bihar Remote Sensing Application Centre 8.1 विभागों द्वारा वैसी परियोजना और योजना से जुड़ी गतिविधियां जिसमे भू-स्थानिक (Geo- spatial) से संबंधित सहायता अनिवार्य हो, कि सूचि प्रत्येक तीन महीने में तैयार कर बिरसेक को प्रेषित की जाएगी। 8.2 जहाँ भू-स्थानिक सेवाऐं अनिवार्य नहीं हो, वैसे में जब भी विभागों को बिरसेक की सहायता की आवश्यकता हो, तो संबंधित विभाग द्वारा बिरसेक को सूचित करना होगा।
ः- 9.1 विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का दायित्व होगा कि वह बिरसेक को पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराकर उसकी संस्थागत क्षमता को मज़बूत करे, तथा आवश्यकता पड़ने पर भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से मार्गदर्शन प्राप्त करे।
9.2 विभाग को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण भू-स्थानिक सेवाऐं सुनिश्चित करने हेतु स्पष्ट सेवा मानक और मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) जारी करनी होंगी, साथ ही सभी भू-स्थानिक कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी होगी।
9.3 परिस्थितियों के अनुसार लागत मानकों, सेवा श्रेणियों और अन्य आवश्यक सुधारों के प्रस्ताव भी विभाग द्वारा समय-समय पर प्रस्तुत किए जाएंगे। Monitoring and Review .—बिहार राज्य में भू-स्थानिक सेवाए एवं प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से संबंधित कार्यों के अनुश्रवण, समीक्षा तथा नीति में आवश्यक संशोधनों की स्वी—ति के लिए एक चार-सदस्यीय राज्य भू-सूचना विज्ञान एवं गति शक्ति संचालन स्टीयरिंग समिति निम्नवत् गठित की जाएगी:
| मुख्य सचिव | अध्यक्ष | |
| विकास आयुक्त | सदस्य | |
| सचिव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग | सदस्य | |
| नोडल अधिकारी (PM Gati Shakti), उद्योग विभाग | सदस्य | |
| परियोजना निदेशक, बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BCST),पटना | सदस्य |
यह समिति प्रत्येक तिमाही बैठक करेगी और इस नीति की प्रगति की समीक्षा करेगी। इसके अतिरिक्त समिति नीति में तय मानकों, सेवाओं तथा अन्य संबंधित आवश्यकताओं में जरुरी संशोधनों को भी अनुमोदित करेगी।5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 19 (cid:465)दस(cid:224)बर 2025 सम्यक विचारोपरांत राज्य सरकार नेे बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (बिरसेक) के भू-स्थानिक सेवाओं (Geo-spatial services) के उपयोग हेतु नीति-2025 पर स्वीकृति प्रदान करने का निर्णय लिया है, जिसकी हिन्दी एवं अंग्रेजी प्रति अनुलग्नक-1 एवं 2 के रूप में संलग्न है। यह संकल्प मंत्रिपरिषद् की दिनांक-09.12.2025 को सम्पन्न बैठक में मद संख्या-16 पर लिए गये निर्णय के आलोक में बिहार राज्य के सभी विभागों द्वारा विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वित्तीय एवं प्रशासनिक नियंत्रण में गठित बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (बिरसेक) के भू-स्थानिक सेवाओं (Geo-spatial services) के उपयोग हेतु नीति-2025 पर स्वीकृति प्रदान की गयी है।
इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में सर्वसाधारण की जानकारी हेतु प्रेषित किया जाए। ————
अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,