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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 31 January 2026

Published 31 January 2026

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2026-01-31.93
Languages
English, Hindi

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(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 11 माघ 1947 (श0)

(सं0 पटना 93) पटना, शिनवार, 31 जनवर(cid:547) 2026 ———

22 tuojh 2026 सं॰ अ॰सं॰क॰-01-23/2018-374—निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक-1298, दिनांक-12.04.2018 द्वारा श्री जटाशंकर पाण्डेय, (बिहार अल्पसंख्यक कल्याण सेवा) कोटि क्रमांक-156/2013 तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान बर्खास्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, जमुई को दिनांक-14.03.2018 को ₹10,000/-(दस हजार रूपये) रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किये जाने का आरोप प्रतिवेदित किया गया। श्री पाण्डेय के विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड सं॰-010/2018 दिनांक-15.03.2018 की धारा 7/13 (2) सहपठित धारा 13 (1) (डी॰) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत प्राथमिकी दर्ज किये जाने की सूचना दी गयी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-216, दिनांक-27.04.2018 द्वारा श्री पाण्डेय को सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 (1) (ग) एवं 9 (2) (क) में निहित प्रावधानों के तहत श्री पाण्डेय को न्यायिक हिरासत की तिथि (दिनांक-14.03.2018) के प्रभाव से निलंबित किया गया। श्री पाण्डेय के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्र सं॰-605 दिनांक-08.06.2018 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की गई। उन्होने अपने स्पष्टीकरण में गठित आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि श्री शैलेश कुमार मिश्रा (परिवादी) के सेवा विस्तार के लिए ₹10,000/-(दस हजार रूपये) की मांग की गयी थी। श्री मिश्रा (परिवादी) के पास श्री पाण्डेय का ₹10,000/-(दस हजार रूपये) ऋण के रूप में बकाया था, उसी ऋण को वापस करने के बहाने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के गठित धावा दल द्वारा एक सुनिश्चित षडयंत्र के द्वारा पकड़वाया गया, ताकि श्री मिश्रा (परिवादी) को ऋण की राशि वापस ना करना पड़े। इसलिए श्री मिश्रा द्वारा लगाये गये आरोप असत्य एवं निराधार है। श्री पाण्डेय के विरूद्ध गठित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण पर सम्यक्‌ रूप से विचारोपरांत असंतोषजनक पाये जाने के कारण बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के नियम 17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प संख्या-1629 दिनांक-01.10.2018 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त से मामलें की वृहद जाँच कराने का निर्णय लिया गया।

4. प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-36/प्र॰ स॰ गो॰ को॰ दिनांक-15.04.2024 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 31 जनवर(cid:547) 2026 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि आलोच्य मामले में अभिलिखित साक्ष्य/तथ्य, साक्षियों के गवाही एवं उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये पत्र की विवेचना से स्पष्ट होता है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 एवं सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियमों एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 का स्पष्टतः उल्लंघन किया गया है। साथ ही आरोपी पदाधिकारी श्री जटाशंकर पाण्डेय, तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान द्वारा बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1976 के नियम-3 (1) के उल्लंघन का आरोप प्रमाणित पाया गया है। विभागीय पत्र संख्या-1409 दिनांक-14.05.2024 एवं विभागीय स्मार-पत्र 1585 दिनांक-03.06.2024 द्वारा प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त के जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए श्री पाण्डेय से लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री पाण्डेय द्वारा अपने लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन में अंकित किया है कि जब वे सिवान जिला में जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित थे तब उन्हें श्री शैलेश कुमार मिश्रा, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर, जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय, सिवान द्वारा दिनांक-12.03.2018 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में एक मनगढंत एवं झूठा आवेदन रिश्वत मांगने के आरोप में दिया गया। दिनांक-14.03.2018 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के ट्रैप टीम के द्वारा शिकायतकर्ता के भेष में आकर उन्हें झूठे ट्रैप केस में ट्रैप कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस प्रकार उनके द्वारा कोई ठोस तथ्यात्मक साक्ष्य उपस्थापित नहीं किया जा सका, जिससे उनकी निर्दोषिता सिद्ध हो सके। प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना के जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा परिवादी का कार्य प्रणाली सही नहीं होने का हवाला देते हुए नियोजन निरस्त करने की सूचना दिनांक-13.06.2017 को दी गयी एवं इसके बावजूद दिनांक-31.10.2017 तक संविदा समाप्त होने के बाद भी मात्र दो महीने का अवधि विस्तार किया गया। दिनांक-31.12.2017 तक संविदा समाप्त हो चुका था एवं इनकी कार्य प्रणाली सहीं नहीं पाई गयी थी तो इन्हें दो माह का अवधि विस्तार किन परिस्थितियों में दिया गया एवं इसके उपरांत इनके अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया गया। यह परस्पर विरोधाभासी है एवं इससे यह परिलक्षित होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा श्री शैलेश कुमार मिश्रा परिवादी से दोहन के उद्देश्य से कार्य प्रणाली सही नहीं होने के बावजूद भी कार्य लिया जाता रहा। अन्ततः आरोपित पदाधिकारी द्वारा रिश्वत की मांग के विरूद्ध परिवादी श्री शैलेश कुमार मिश्रा द्वारा दिनांक-12.03.2018 को पुलिस अधीक्षक-सह-थानाध्यक्ष, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को एक लिखित आवेदन दिया गया, जिसमें श्री जटाशंकर पाण्डेय तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी सिवान द्वारा सेवा अवधि विस्तार के एवज में ₹ 10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत की मांग का आरोप लगाया गया। निगरानी धावा दल द्वारा अग्रेतर कार्रवाई के क्रम में दिनांक-14.03.2018 को परिवादी से ₹ 10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत लेने के क्रम में आरोपी पदाधिकारी श्री जटाशंकर पाण्डेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान को उनके कार्यालय कक्ष से रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार परिवादी को माह जून 2017 में कार्य प्रणाली सही नहीं होने की नोटिस निर्गत करने के बाद 31.10.2017 को संविदा समाप्त होने के उपरान्त उन्हें दो माह (1 जनवरी 2018 से 28 फरवरी 2018 तक) का अवधि विस्तार भयादोहन के लिये किया गया था एवं पुनः उनके अभ्यावेदन को अस्वीकृत कर दिया गया था। आरोपी पदाधिकारी का यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है, तथा आरोपी पदाधिकारी द्वारा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 का स्पष्ट उल्लंघन किया गया। (1) (i) पूरी शीलनिष्ठा रखेगा, (ii) कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा रखेगा, और (iii) ऐसा कोई काम न करेगा जो सरकारी सेवक के लिये अशोभनीय हो। श्री जटाशंकर पाण्डेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान में पदस्थापन के दौरान परिवादी श्री शैलेश कुमार मिश्रा से संविदा अवधि विस्तार के लिये ₹10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत की मांग की तथा रिश्वत लेते रंगे हाथो पकड़े गये।

इस प्रकार उन्होने ऐसा कार्य किया है जो सरकारी सेवक के लिये अशोभनीय है, एवं उनके कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। श्री पाण्डेय के इस कृत्य से सरकार की छवि धूमिल हुई है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री पाण्डेय का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 की कंडिका-14 (xi) के अधीन ''सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिये निरर्हता होगी'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 31 जनवर(cid:547) 2026 अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर विभागीय पत्र सं0-2674 दिनांक-02.09. 2024 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री जटाशंकर पाण्डेय के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड ''सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिये निरर्हता होगी'' पर परामर्श की मांग की गई। जिस पर आयोग के पत्रांक-14 दिनांक-01.04.2025 द्वारा सहमति संसूचित है। श्री जटाशंकर पाण्डेय (अ0क0से0) कोटि क्रमांक-156/2013 तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान बर्खास्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, जमुई को प्रमाणित आरोपो के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के नियम 14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी, का दण्ड अधिरोपित पर राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की दिनांक-03.06.2025 को सम्पन्न बैठक में मद संख्या-03 पर स्वीकृति प्रदान की गयी है। श्री जटाशंकर पाण्डेय द्वारा उक्त दण्डादेश के विरूद्ध विभाग में पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से इनका कहना है किः-

i. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के नियम-17 के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना दोष सिद्ध किया है। निगरानी विभाग बिहार, पटना द्वारा श्री जटाशंकर पाण्डेय को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने की सूचना प्राप्त होने पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के संगत प्रावधानों के तहत इन्हें निलंबित कर इनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, पूर्णिया निर्धारित किया गया तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पटना द्वारा विभागीय कार्रवाई प्रारम्भ की गयी है। प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं संलग्न साक्ष्य एवं अभिलेख निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से प्राप्त प्रतिवेदन, गवाहों का परीक्षण तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखों के आधार पर बिना पक्षपात पूर्ण किये जाँच प्रतिवेदन समर्पित किये जाने के उपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के नियम 14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी, का दण्ड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया। ii. याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए दस्तावेज कभी उपलब्ध नहीं कराये गये।

विभागीय ज्ञापांक-1386 दिनांक-18.06.2021 द्वारा श्री जटाशंकर पाण्डेय, निलंबित पदाधिकारी द्वारा मांगी गयी 21 बिन्दुओं से संबंधित साक्ष्य/अभिलेख उन्हें उपलब्ध करा दी गयी थी। iii. तीनों गवाहों से याचिकाकर्ता की पीठ पीछे पूछताछ की गयी। विभागीय कार्यवाही 45/2018 के अन्तर्गत विभागीय पत्रांक-3030 दिनांक-15. 12.2021 द्वारा श्री मणिकान्त सिंह, सिपाही, सत्यापनकर्ता निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को गवाही हेतु सचिव-सह-जाँच आयुक्त के समक्ष दिनांक-18.12.2021 को पूर्वाह्‌न 11.00 बजे उपस्थित होने हेतु निदेशित किया गया। साथ ही पत्रांक-3029 दिनांक-15.12.2021 द्वारा श्री जटाशंकर पाण्डेय तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी बक्सर बर्खास्त को भी जाँच आयुक्त-सह-सचिव के समक्ष दिनांक-28.12.2021 को पूर्वाह्‌न 11.00 बजे उपस्थित होकर अपना बचाव बयान समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। पत्रांक-147, दिनांक-21.01.2022 द्वारा श्री मणिकान्त सिंह, सिपाही, सत्यापनकर्ता निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को गवाही हेतु सचिव-सह-जाँच आयुक्त के समक्ष दिनांक-25.01.2022 को पूर्वाह्‌न 11.00 बजे उपस्थित होने हेतु निदेशित किया गया। साथ ही पत्रांक-148 दिनांक-21.01.2022 द्वारा श्री जटाशंकर पाण्डेय तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी बक्सर बर्खास्त को भी जाँच आयुक्त-सह-सचिव के समक्ष दिनांक-25.01.2022 को पूर्वाह्‌न 11.00 बजे उपस्थित होकर अपना बचाव बयान समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। पत्रांक-278, दिनांक-11.02.2022 द्वारा सत्यापनकर्ता निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को गवाही हेतु सचिव-सह-जाँच आयुक्त के4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 31 जनवर(cid:547) 2026 समक्ष दिनांक-22.02.2022 को पूर्वाह्‌न 11.00 बजे उपस्थित होने हेतु निदेशित किया गया। साथ ही पत्रांक-277 दिनांक-11.02.2022 द्वारा श्री जटाशंकर पाण्डेय तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी बक्सर बर्खास्त को भी जाँच आयुक्त-सह-सचिव के समक्ष दिनांक-22.02.2022 को पूर्वाह्‌न 11.00 बजे उपस्थित होकर अपना बचाव बयान समर्पित करने हेतु निदेशित किया गया है। जाँच प्रतिवेदन में गवाही का प्रतिपरीक्षा के समय आरोपित पदाधिकारी को उपस्थित रहने का उल्लेख किया गया है।

iv. याचिकाकर्ता द्वारा अपने बचाव पक्ष के गवाह को पेश करने के लिये दायर किया आवेदन खारिज कर दिया गया। निगरानी थाना कांड सं॰-010/2018 के क्रम मे संबंधित साक्षियों की सूची में श्री गोपाल पासवान, पुलिस उपाधिक्षक-सह-धावा दल प्रभारी, श्री लालदेव पासवान, पुलिस निरीक्षक-सह-अनुसंधानकर्ता, तथा श्री मणिकान्त सिंह, सिपाही, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के रूप में है। अतिरिक्त 11 गवाह, जो थाना कांड सं॰-010/18 से संबंधित नहीं है का परीक्षण जाँच आयुक्त द्वारा खारिज कर दिया गया है।

v. शिकायतकर्ता जो सबसे महत्वपूर्ण और सक्षम गवाह है, जिसने याचिकाकर्ता के विरूद्ध आरोप लगाया है, और कथित गिरफ्तारी के समय कथित रूप से धनराशि सौंपी, को विभागीय कार्यवाही में गवाही के रूप में नामित नहीं किया गया। शिकायतकर्ता श्री शैलेश कुमार मिश्रा, डाटा इन्ट्री आपरेटर विभागीय कार्यवाही सं॰-48/2018 में गवाह के रूप में नहीं है बल्कि श्री पाण्डेय पर उनके द्वारा लगाये गये आरोपो के आधार पर निगरानी धावा दल द्वारा प्राप्त परिवाद की जाँच के उपरांत ही इन्हें गिरफ्तार किया गया।

vi. जाँच अधिकारी का आचरण किसी भी तरह से स्वतंत्र निर्णय के अनुरूप नहीं था, वह पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण था तथा आरोप-पत्र का गठित किया जाना एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हुए अपने ऊपर लगाये गए आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन, आधारहीन एवं मनगढंत आदि बताया है तथा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार करने एवं बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए पुनः सेवा में लेने का अनुरोध किया गया है। प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं संलग्न साक्ष्य एवं अभिलेख से स्पष्ट है कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से प्राप्त प्रतिवेदन, गवाहों का परीक्षण तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य एवं अभिलेखों के आधार पर बिना पक्षपात पूर्ण किये जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। उपरोक्त बिन्दुओं की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर किये जाने के उपरांत यह स्पष्ट हुआ कि श्री पाण्डेय द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन आवेदन का आधार स्वीकार योग्य नहीं है। यह भी पाया गया कि पुनर्विलोकन आवेदन में मुख्य रूप से उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जिनकी समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर किये जाने के उपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री पाण्डेय के विरूद्ध "सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निर्रहता होगी" का दंड विनिश्चित किया गया है। उक्त विनिश्चित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना एवं राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक दिनांक-03.06.2025 को मद सं0-03 के रूप में स्वीकृति के उपरांत ही श्री पाण्डेय को उक्त दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है। 12. श्री जटाशंकर पाण्डेय (अ0क0से0) कोटि क्रमांक-156/2013 तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान बर्खास्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, जमुई का पुनर्विलोकन आवेदन संख्या-01/2025 दिनांक-24.07.2025 द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन आवेदन को खारिज करते हुए प्रमाणित आरोपो के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के नियम 14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निर्रहता होगी, का अधिरोपित दण्ड पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की दिनांक-13.01.2026 को संपन्न बैठक मेें मद संख्या-21 में स्वीकृति प्राप्त है।

13. अतएव श्री जटाशंकर पाण्डेय (अ0क0से0) कोटि क्रमांक-156/2013 तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सिवान बर्खास्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, जमुई का पुनर्विलोकन आवेदन संख्या-01/2025 दिनांक-24.07.2025 द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन आवेदन को खारिज करते हुए प्रमाणित आरोपो के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (समय-समय पर यथासंशोधित) के5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 31 जनवर(cid:547) 2026 नियम 14 (xi) के तहत सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निर्रहता होगी, का अधिरोपित दण्ड पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 93-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 31 January 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2026-01-31.93/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2026-01-31.93.