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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 05 February 2026

Published 05 February 2026

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2026-02-05.177
Languages
English, Hindi

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(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 16 माघ 1947 (श0)

(सं0 पटना 177) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 5 फरवर(cid:547) 2026 ———

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[Approval for Bihar Global Capability Centre (GCC) Policy -2026] सूचना प्रौद्योगिकी को आज वैश्विक परिदृश्य में प्रगति और विकास का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है। विगत दशक में इस क्षेत्र में भारत की सफलता, विशेष रूप से सेवाओं के निर्यात और इससे उत्पन्न हुए रोजगार के अनेक अवसर, इसकी महत्ता को सिद्ध करते हैं।

राज्य की बिहार आई.टी. पॉलिसी-2024 को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली है, जिसने राज्य में एक सशक्त तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र की आधारशिला रखी और महत्वपूर्ण निवेश को आकर्षित किया। इस सकारात्मक गति को आगे बढ़ाते हुए, राज्य अब एक समर्पित जी.सी.सी. नीति प्रस्तावित कर रहा है, जिसका उद्देश्य तकनीकी अवसंरचना को और सुदृढ़ बनाना तथा राज्य को जी.सी.सी. के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी के केंद्र के रूप में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का उदय भारत के ग्लोबल नॉलेज और नवाचार केंद्र के रूप में परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जी.सी.सी. का यह परिवर्तन चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) को आगे बढ़ा रहा है और वैश्विक औद्योगिक परि–श्य को नया आयाम दे रहा है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, उन्नत डेटा विश्लेषण और ऑटोमेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के नवाचार केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। ये तकनीकें विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में स्केलेबल, प्रोडक्टिव एवं कॉस्ट-इफेक्टिव डिजिटल सॉल्यूशन विकसित कर डिजिटल ट्रॉसफॉर्मेशन को संभव बनाती है।

इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (जी.सी.सी.) नीति-2026 को प्रतिपादित करने का निर्णय लिया है। बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (जी.सी.सी.) नीति-2026 के प्रारूप की प्रति संलग्न है।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 फरवर(cid:547) 2026 राज्य को जी.सी.सी. के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ वैश्विक प्रतिभा, उत्कृष्ट बुनियादी ढाँचा, नीतिगत सहयोग और व्यापार में सुगमता जैसे तत्वों से संचालित एक प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुखी पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान किया जायेगा, ताकि उद्यमों को नवाचार, अनुसंधान एवं विकास तथा उच्च मूल्य वाली सेवाओं के लिए सक्षम बनाया जा सके। :-

(क) उन्नत अनुसंधान और औद्योगिक विकास एकीकरण के माध्यम से एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना, जिससे सतत्‌ विकास वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।

(ख) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना एवं निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना तथा टेक प्रोफेसनल्स हेतु रोजगार सृजन।

(ग) राज्य को 'ग्रॉस डोमेस्टिक नॉलेज' में अग्रणी बनाना, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना और बौद्धिक संपदा ढाँचे को सुदृढ़ करना।

(घ) उभरती तकनीकों को मूल्य श्रृंखलाओं में समाहित कर क्षेत्रीय विकास को गति देना, जिससे उत्पादकता में वृद्धि हो और संतुलित एवं समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित हो। ➢ कोई भी निजी/सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी/एलएलपी (बहुराष्ट्रीय या भारतीय), जो नवीनतम फोब्र्स ग्लोबल 2000 सूची या Fortune 1000 सूची में सूचीबद्ध हो, अथवा जिसके पिछले पूर्ण तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक कारोबार रु॰ 1000 करोड़ से अधिक हो, केवल वही इस नीति के अंतर्गत पात्र जी.सी.सी. के रूप में विचारणीय होगी।

➢ जिन कम्पनियों का पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर रु॰ 500 करोड़ से रु॰ 1000 करोड़ के बीच है, उन्हें बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च-स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा पात्रता हेतु विचार किया जा सकता है। उक्त समिति निम्नवत्‌ होगी :-

1. मुख्य सचिव, बिहार अध्यक्ष
2. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, उद्योग विभाग सदस्य
3. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग सदस्य
4. अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, सूचना प्रावैधिकी विभाग । सदस्य सचिव

नई इकाईयाँ माना जायेगा तथा वे इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहनों हेतु पात्र होंगी। ➢ बिहार में जीएसटी पंजीकरण वाली विद्यमान जी.सी.सी इकाईयाँ, जो मौजूदा मानवबल की तुलना में न्यूनतम 50% या उससे अधिक विस्तार करती है तथा इस नीति की अधिसूचना के अधीन न्यूनतम 25 नयें प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करती है, और इस खंड के अंतर्गत निर्दिष्ट अन्य मानदंडों (जो विस्तार पर लागू हो) को भी पूर्ण करती हैं, वे अतिरिक्त/वृद्धिशील रोजगार के अनुरूप प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु पात्र होगी।

➢ इस नीति के अन्तर्गत उपलब्ध सभी प्रोत्साहन एवं सुविधाएँ नीति अवधि के दौरान पात्र होने वाली प्रथम 25 जी.सी.सी इकाईयों पर ही लागू होगी।

➢ जी.सी.सी. इकाई की वाणिज्यिक उत्पादन/संचालन न्यूनतम 30 करोड़ रुपये के निवेश के साथ-साथ न्यूनतम 25 प्रत्यक्ष कर्मियों के नियोजन के साथ स्थापित होनी चाहिए तथा अगले पाँच वर्षों तक 25 या उससे अधिक प्रत्यक्ष कर्मी बनाये रखना होगा।

बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (जी.सी.सी) नीति-2026 के तहत्‌ पात्र इकाईयों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा, जो निम्नवत्‌ है :-

सभी पात्र जी.सी.सी. इकाईयाँ अधिकतम 50 करोड़ रुपये की सीमा तक निम्नलिखित मदों में की गई पूंजीगत व्ययों पर कैपेक्स सहायता (Capital Expenditure Assistance) प्राप्त करने की पात्र होगी। I. पात्र जी.सी.सी. इकाईयों को एक बार कैपेक्स सहायता के रूप में उनके द्वारा किये गये स्थायी पूंजी निवेश पर अधिकतम 30% तक की राशि प्राप्त करने के लिए पात्र होगी, जिसकी अधिकतम सीमा रु॰ 50 करोड़ होगी। परियोजना प्रस्ताव का मूल्यांकन केवल R.B.I पंजीकृत वित्तीय संस्थान या बैंक द्वारा किया जाना चाहिए। स्थायी पूँजी निवेश में भूमि खरीद, भवन खरीद अथवा निर्माण, प्लांट और मशीनरी, अनुसंधान एवं विकास उपकरण, संचालन से सीधे जुड़े कोई भी उपकरण/सामग्री, स्टाम्प शुल्क और भूमि रूपांतरण शुल्क (यदि कोई भुगतान किया गया हो) शामिल है।3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 फरवर(cid:547) 2026 II. भूमि की लागत भूमि के अलावा कुल प्रस्तावित निवेश के 20% से अधिक नहीं होगी। III. नवीकरणीय ऊर्जा व्यय-कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए उपकरणों की खरीद पर किया गया व्यय।

IV. वाणिज्यिक उत्पादन/संचालन के बाद प्रोत्साहन राशि की प्रतिपूर्ति पाँच (5) समान वार्षिक किस्तों में की जाएगी। I. लीज पर दिए गए कार्यालय/वाणिज्यिक स्थान से संचालित होने वाली जी.सी.सी. इकाईयों को भुगतान की गई लीज किराया राशि के 50% की प्रतिपूर्ति की जाएगी। लीज किराया की प्रतिपूर्ति अधिकतम 120 वर्गफीट प्रति कर्मचारी के लिए रु॰ 55 प्रति वर्गफीट प्रति माह की दर से की जायेगी, जिसमें प्रति वित्तीय वर्ष रु॰ 2.5 की वृद्धि की जायेगी। यह सब्सिडी 05 वर्षों के लिए राज्य में स्थित कार्यालय स्थल के लिए देय होगी।

II. पात्र जी.सी.सी इकाईयों को 5 वर्षों की अवधि के लिए ऊर्जा बिल का 25% वार्षिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। III.

क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गये व्ययों की 50% प्रतिपूर्ति 5 वर्षों तक की जायेगी। IV.

➢ प्रथम वर्ष में सीटीसी का 30% (अधिकतम रू॰ 15 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष)। ➢ द्वितीय वर्ष में सीटीसी का 20% (अधिकतम रू॰ 12 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष)। ➢ तृतीय वर्ष में सीटीसी का 10% (अधिकतम रू॰ 9 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष)।

बिहार के स्थायी निवासी की स्थिति में पात्र नियोजन के विरूद्ध वेतन प्रतिपूर्ति निम्न के अनुसार की जायेगी :-

➢ प्रथम वर्ष में सीटीसी का 50% (अधिकतम रू॰ 15 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष)। ➢ द्वितीय वर्ष में सीटीसी का 40% (अधिकतम रू॰ 12 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष)। ➢ तृतीय वर्ष में सीटीसी का 30% (अधिकतम रू॰ 9 लाख प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष)। यह लाभ प्रति पात्र जी.सी.सी. इकाई के लिए प्रतिवर्ष अधिकतम 200 प्रत्यक्ष कर्मचारियों तक लागू होगा। V.

राज्य सरकार किसी भी पात्र जी.सी.सी. इकाई के लिए पेटंेंट दाखिल करने हेतु शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति करेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 5 वर्षों में 50 लाख रूपये तक होगी। VI.

पात्र जी.सी.सी. इकाईयाँ अंतर्राष्ट्रीय मानक के गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए भुगतान की गई कुल फीस के 50% प्रतिपूर्ति पाने की पात्र होगी, जिसकी अधिकतम सीमा 5 वर्ष की अवधि में 25 लाख रुपये होगी। VII.

पात्र जी.सी.सी इकाईयॉं किसी कर्मचारी के कौशल प्रमाणन शुल्क के 50% की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 5 वर्षों में 1 करोड़ रुपये तक होगी। प्रति कर्मचारी अधिकतम सीमा रु॰ 50,000.00 (पचास हजार) होगी।

पटना एवं दानापुर नगर निगम क्षेत्र के बाहर स्थापित जी.सी.सी इकाईयों को, विभिन्न प्रोत्साहनों के

अन्तर्गत निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार, अतिरिक्त 10% प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा।

वैसी इकाईयाँ जिसमें 500 प्रत्यक्ष पात्र रोजगार का सृजन हो रहा हो, वैसी इकाईयाँ टेलर मेड पैकेज के लिए पात्र होगें। टेलर मेड प्रोत्साहन, इस नीति के तहत्‌ निर्धारित प्रोत्साहन के अतिरिक्त होगा। सभी प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन/संचालन की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि के लिए प्रतिपूर्ति की

जाएगी (वेतन प्रतिपूर्ति प्रोत्साहन को छोड़कर, जो तीन वर्ष के लिए है)।

:- I. प्रथम चरण क्लीयरेंस के लिए सभी आवेदन राज्य SIPB पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे, जिसमें प्रस्तावित परियोजना की व्यवहार्यता की जाँच की जाएगी और निवेशक को आवश्यक स्वीकृति प्रदान की जायगी। सूचना प्रावैधिकी विभाग निवेश प्रस्तावों की जाँच के लिए आंतरिक समिति का गठन करेगा और SIPB के समक्ष निर्णय हेतु प्रस्तुत करेगा। यह स्वीकृति निवेशक द्वारा वाणिज्यिक संचालन शुरू करने से पहले प्राप्त करना अनिवार्य है।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 5 फरवर(cid:547) 2026 II.

।-वित्तीय प्रोत्साहनों की क्लीयरेंस का प्रस्ताव राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। SIPB निवेश प्रस्ताव के अनुसार देय प्रोत्साहनों की मात्रा की अनुशंसा करेगा। पूँजीगत व्यय प्रोत्साहन (Capex Incentive) से संबंधित प्रस्ताव का स्वीकृति प्राधिकार मंत्रिपरिषद्‌ होगा। III. (Opex) ।-पात्र इकाईयों को राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) द्वारा अनुशंसित संचालन व्यय (Opex) प्रोत्साहनों की स्वीकृति प्राधिकार निम्नवत्‌ होंगे :-

(SIPB) (Opex)
रु॰ 50 करोड़ या उससे कम अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/ सचिव, सूचना प्रावैधिकी विभाग।
रु॰ 50 करोड़ से अधिक एवं 125 करोड़ तक मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति।
रु॰ 125 करोड़ से अधिक उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की अनुशंसा पर मंत्रिपरिषद्‌।

इस नीति के अन्तर्गत लाभ प्राप्त करने वाला जी.सी.सी. इकाईयों, सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार सरकार द्वारा समय-समय पर इस नीति और संबंधित अन्य नीतियों के लिए जारी की जाने वाली शर्त्तों, प्रक्रियाओं, निर्देशों, स्पष्टीकरणों या संशोधनों का पालन करेंगे।

सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार, पटना के द्वारा इस नीति के लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विस्तृत कार्यान्वयन दिशा-निर्देश जारी करेगा।

यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी तथा 5 वर्ष तक प्रभावी रहेगी। राज्य सरकार को समय-समय पर नीति के विभिन्न पहलूओं की समीक्षा और संशोधन करने का अधिकार होगा।

सूचना प्रावैधिकी विभाग द्वारा इस नीति को लागू किया जाएगा। नीति के अनुवादित संस्करण के अर्थ और व्याख्या में किसी विसंगति के मामले में, अंग्रेजी भाषा संस्करण सभी मामलों में बाध्यकारी तथा अभिप्रभावी होगा।

प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद्‌ द्वारा दिनांक-29.01.2026 को मद्‌ संख्या-18 के रूप में स्वीकृति प्रदान की गयी है। ————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 177-571+1000-डी0ट(cid:547)0पी0। Website: https://egazette.bihar.gov.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 05 February 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2026-02-05.177/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2026-02-05.177.