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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 24 February 2026

Published 24 February 2026

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2026-02-24.221
Languages
English, Hindi

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(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 5 फा(cid:227)गुन 1947 (श0)

(सं0 पटना 221) पटना, मंगलवार, 24 फरवर(cid:547) 2026 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 24 फरवरी 2026

सं॰ वि॰स॰वि॰-04/2026-1062/वि॰स॰।—''बिहार सिविल न्यायालय विधेयक, 2026'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक-24 फरवरी, 2026 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।

आदेष से, ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव।

2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 24 फरवर(cid:547) 2026

[foúlúfoú&06@2026º fcgkj flfoy U;k;ky; fo/ks;d] 2026

बिहार सिविल न्यायालय विधेयक, 2026 को अधिनियमित करने के लिए विधेयक। प्रस्तावना।-चूँकि विद्यमान बंगाल, आगरा एवं असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 संयुक्त रूप से तत्समय बंगाल, आगरा और असम राज्यों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अधिनियमित किया गया था, जिसमें वर्त्तमान बिहार प्रांत भी तत्कालीन बंगाल प्रांत में शामिल था और अब बिहार एक पृथक एवं पूर्ण राज्य है;

इसलिए पृथक सिविल न्यायालय अधिनियम आवश्यक एवं समीचीन है; अतः अब भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय-I प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम विस्तार एवं प्रारंभ।-

(1) यह अधिनियम बिहार सिविल न्यायालय अधिनियम, 2026 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह अधिनियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगा।

2. परिभाषाएँ।- इस अधिनियम में अन्यथा जब तक संदर्भ में अपेक्षित न हो-

(क) ''उच्च न्यायालय'' से अभिप्रेत है, बिहार राज्य के लिए पटना उच्च न्यायालय;

(ख) ''जिला न्यायाधीश'' से अभिप्रेत है, प्रधान जिला न्यायाधीश और उसमें जिला न्यायाधीश शामिल हैं;

(ग) ''सिविल न्यायाधीश'' से अभिप्रेत है, सिविल न्यायाधीश और जिसमें सिविल न्यायाधीश (वरीय कोटि) और सिविल न्यायाधीश (कनीय कोटि) शामिल हैं;

(घ) ''राज्य सरकार'' से अभिप्रेत है बिहार सरकार।

अध्याय-II सिविल न्यायालय की स्थापना

3. न्यायालयों का वर्गीकरण।- इस अधिनियम के अधीन सिविल न्यायालय के निम्नलिखित वर्ग होगें यथाः-

(i) प्रधान जिला न्यायाधीश का न्यायालय; (ii) जिला न्यायाधीश का न्यायालय; (iii) सिविल न्यायाधीश (वरीय कोटि) का न्यायालय, और (iv) सिविल न्यायाधीश (कनीय कोटि) का न्यायालय।

4. जिला न्यायाधीश एवं सिविल न्यायाधीशों की संख्या।- जिला न्यायाधीश एवं सिविल न्यायाधीशों का संवर्ग बल राज्य सरकार द्वारा, उच्च न्यायालय के परामर्श से, समय-समय पर विनिश्चित या उपातंरित किया जा सकेगा।

5. जिला न्यायाधीश या सिविल न्यायाधीश संवर्ग में रिक्तियाँ।-

(1) मृत्यु, त्यागपत्र या न्यायाधीश के हटाये जाने या अन्य कारण से जब कभी जिला न्यायाधीश या सिविल न्यायाधीश का पद रिक्त हो या जब कभी जिला एवं सिविल न्यायाधीशों के पदों की संख्या में वृद्धि हो, तो भारत का संविधान के अनुच्छेद 233 एवं 234 में विहित प्रावधानों के अनुसार रिक्ति को भरा जा सकेगा।

(2) इस धारा की किसी बात से यह अर्थ नही लगाया जाएगा कि किसी जिला न्यायाधीश अथवा सिविल न्यायाधीश को, उस अवधि के लिए, जो उपयुक्त सोचा जाय,3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 24 फरवर(cid:547) 2026 उसे अंतरित कृत्यों के अतिरिक्त, यथास्थिति, अन्य जिला न्यायाधीश अथवा सिविल न्यायाधीशों के कृत्यों में से किसी कृत्य का निर्वहन करने हेतु नियुक्ति करने से उच्च न्यायालय को रोकना है।

6. न्यायालयों का प्रशासनिक नियंत्रण।- पटना उच्च न्यायालय के अधीक्षण के अध्यधीन प्रधान जिला न्यायाधीश का अपने स्थानीय अधिकारिता सीमा के भीतर स्थित सभी सिविल न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण होगा।

7. जिला न्यायालय का अस्थाई प्रभार।- प्रधान जिला न्यायाधीश की मृत्यु, पद त्याग या उनके हटाये जाने अथवा बीमारी से असमर्थ हो जाने, स्थानांतरण या अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन से अन्यथा अथवा उस स्थान से जहाँ उनका न्यायालय आयोजित होता हो, उसकी अनुपस्थिति की स्थिति में वरिष्ठतम जिला न्यायाधीश, अपने सामान्य कर्त्तव्यों का त्याग किये बिना, प्रधान जिला न्यायाधीश के कार्यालय का पद भार ग्रहण करेगा और उसके प्रभार में तब तक बना रहेगा जब तक प्रधान जिला न्यायाधीश पद भार ग्रहण न कर लें या उस पर नियुक्त अधिकारी पद भार ग्रहण न कर लें।

8. सिविल न्यायाधीश के कार्यालय के अवकाश पर कार्यवाहियों का स्थानान्तरण।- (1) एक जिला न्यायाधीश अथवा सिविल न्यायाधीश की मृत्यु, पद त्याग अथवा हटाये जाने अथवा बीमारी, स्थानांतरण, एक माह से अधिक अवकाश में रहने, अथवा कर्त्तव्यों के अनुपालन से अन्यथा असमर्थता की स्थिति में उद्‌भूत प्रत्येक रिक्ति की स्थिति में, प्रधान जिला न्यायाधीश लंबित सभी या किसी कार्यवाही को, अपने प्रशासनिक नियंत्रणाधीन अन्य सक्षम न्यायालय या अपने स्वयं के न्यायालय में उनके निपटारे हेतु अंतरित कर सकेगा। (2) उप धारा (1) के अधीन स्थानांतरित कार्यवाहियों का निपटारा इस तरह किया जायेगा मानों वे उसी न्यायालय में संस्थित की गई हों;

परंतु प्रधान जिला न्यायाधीश उप धारा (1) के अधीन जिला न्यायाधीश या सिविल न्यायाधीश के न्यायालय से, अपने या किसी अन्य न्यायालय को अंतरित किसी कार्यवाही को पुनः अंतरित कर सकेगा।

(3) उस कार्यवाही के प्रयोजनार्थ, जो सिविल न्यायालय की अधिकारिता में लंबित न हो, उप धारा (1) के अधीन निर्देशित घटना के होने पर और उस मामले में जिसके संबंध में न्यायालय की अनन्य अधिकारिता हो, जिला न्यायाधीश उस न्यायालय की सभी या किसी अधिकारिता का प्रयोग कर सकेगा।

9. न्यायालयों की अधिकारिता का स्थानीय-सीमा नियत करने की शक्ति।-

(1) राज्य सरकार, पटना उच्च न्यायालय के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन किसी सिविल न्यायालय की अधिकारिता की स्थानीय-सीमा नियत और परिवर्तित कर सकेगी।

(2) वही स्थानीय अधिकारिता किसी दो या दो से अधिक सिविल न्यायाधीशों को यदि समनुदेशित की गई हो तो प्रधान जिला न्यायाधीश इनमें से प्रत्येक को, उच्च न्यायालय के यथास्थिति किसी समान या विशेष आदेश के अध्यधीन, जिसे वह उपयुक्त समझे, ऐसे सिविल मामलों को समनुदेशित कर सकेगी।

(3) जब उप धारा (2) के अधीन किसी स्थानीय-सीमा में उत्पन्न सिविल कार्यवाही प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा दो या दो से अधिक सिविल न्यायाधीशों में से किसी एक को समनुदेशित की गई हो वहाँ वैसी पारित डिक्री या आदेश केवल इस कारण से अविधिमान्य नही होगी कि वह मामला, जिसमें वह पूर्णतः या अंशतः इस स्थानीय सीमा के बाहर किसी स्थान में, यदि वह स्थान उप धारा (1) के अधीन नियत स्थानीय-सीमा के भीतर उत्पन्न हुआ था।

(4) इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक सिविल न्यायालय की अधिकारिता की वर्त्तमान स्थानीय-सीमा इस धारा के अधीन नियत समझी जायेगी।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 24 फरवर(cid:547) 2026 10. न्यायालयों की बैठक का स्थान।-

(1) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के अधीन उस स्थान अथवा स्थानों को नियत अथवा परिवर्तिंत कर सकेगी, जिस स्थान या जिन स्थानों पर अधिनियम के अधीन कोई सिविल न्यायालय आयोजित किया जाना हो;

परंतु आपात स्थिति में, उच्च न्यायालय उक्त न्यायालय की स्थानीय-सीमा के अन्दर उक्त न्यायालय की बैठक का कोई स्थान नियत कर सकेगा।

(2) सभी स्थान, जहाँ कोई ऐसा न्यायालय अभी आयोजित किया जाता है, इस धारा के अधीन नियत समझें जायेगे।

11. न्यायालय अवकाश।-

(1) उच्च न्यायालय, सिविल न्यायालयों में प्रत्येक वर्ष अनुपालन किये जाने वाले अवकाश-दिनों का कैलेण्डर तैयार करेगा।

(2) वैसा तैयार किया गया कैलेण्डर राजपत्र में प्रकाशित किया जायेगा।

(3) कैलेण्डर में विर्निदिष्ट अवकाश के दिन किसी सिविल न्यायालय द्वारा किया गया कोई भी न्यायिक कार्य केवल उस दिन किए जाने के कारण, अविधिमान्य नही होगा।

12. न्यायालय की मुहर।- इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक सिविल न्यायालय इस प्रारूप और आकार की मुहर का उपयोग करेगा जो उच्च न्यायालय द्वारा विहित किया गया हो।

अध्याय-III साधारण अधिकारिता

13. प्रधान जिला न्यायाधीश की मूल अधिकारिता का विस्तार।- तत्समय प्रवृत किसी अधिनियमिति द्वारा उपबंधित के सिवाय, प्रधान जिला न्यायाधीश की अधिकारिता का विस्तार सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा-15 के प्रावधानों के अध्यधीन, सिविल न्यायालयों द्वारा तत्समय संज्ञेय सभी मूल वादों तक होगा।

14. सिविल न्यायाधीश की अधिकारिता का विस्तार।-

(1) उपर्युक्त के सिवाय और उप धारा-3 के प्रावधानों के अध्यधीन, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिविजन) की अधिकारिता का विस्तार वैसे वादों तक होगा जिसका मूल्य 10 लाख रूपये से अधिक न हो। (2) उपर्युक्त के सिवाय और उप धारा-3 के प्रावधानों के अध्यधीन, सिविल न्यायाधीश (सिनियर डिविजन) के अधिकारिता का विस्तार 10 लाख रूपये मूल्य से अधिक सभी वादों तक होगा।

(3) उच्च न्यायालय, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी सिविल न्यायाधीश के संबंध में उसको नाम देते हुए कि उसकी अधिकारिता का विस्तार, अधिसूचना में यथाविर्निदिष्ट 50 लाख रूपये से अनधिक मूल्य के सभी वादों तक, होगा; परंतु उच्च न्यायालय, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, धनीय अधिकारिता को परिवर्तित या संशोधित कर सकेगा।

15. जिला न्यायाधीश के निर्णय तथा आदेश के विरूद्ध अपील।- तत्समय प्रवृत किसी अधिनियमिति द्वारा उपबंधित के सिवाय किसी जिला न्यायाधीश के आदेश के विरूद्ध कोई अपील उच्च न्यायालय में संस्थित होगी।5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 24 फरवर(cid:547) 2026 16. सिविल न्यायाधीश के आदेश अथवा डिक्री के विरूद्ध अपील।-

(1) उपर्युक्त के सिवाय, सिविल न्यायाधीश की डिक्री या आदेश के विरूद्ध कोई अपील निम्नलिखित के समक्ष संस्थित होगी :-

(क) प्रधान जिला न्यायाधीश के समक्ष, जहाँ मूल वाद का अथवा उससे उत्पन्न किसी कार्यवाही में पारित डिक्री या आदेश का मूल्य 50 लाख रूपये से कम हो; और

(ख) किसी अन्य मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष; परन्तु उसमें नियत धनीय अधिकारिता को उच्च न्यायालय, राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा, समय-समय पर संशोधित अथवा परिवर्तित कर सकेगी। (2) उप धारा-(1) के अधीन प्रधान जिला न्यायाधीश के समक्ष संस्थित कोई अपील प्राप्त करने का कृत्य जहाँ जिला न्यायाधीश को समुदेशित कर दिया गया हो वहाँ अपील जिला न्यायाधीश के समक्ष किया जा सकेगा।

अध्याय-IV विशेष अधिकारिता

17. सिविल न्यायाधीश द्वारा कतिपय कार्यवाहियों मे जिला न्यायालय की अधिकारिता का प्रयोग।- (1) उच्च न्यायालय, समान या विशेष आदेश द्वारा, किसी सिविल न्यायाधीश को संज्ञान लेने अथवा किसी प्रधान जिला न्यायाधीश को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के अधीन कार्यवाहियों को अपने प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन सिविल न्यायाधीश को अंतरित करने हेतु प्राधिकृत कर सकेगा।

(2) प्रधान जिला न्यायाधीश सिविल न्यायालय द्वारा संज्ञान ली गई अथवा अंतरित की गई कार्यवाही को वापस ले सकेगा और उसका निपटारा या तो स्वयं कर सकेगा अथवा उसके निपटारे के लिए अपने प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन किसी सक्षम न्यायालय को अंतरित कर सकेगा।

(3) अन्तिम पूर्ववर्ती धारा में निर्देशित कार्यवाही का निपटारा- सिविल न्यायाधीश द्वारा, यथास्थिति, संज्ञान ली गई या उसको अंतरित की गई कार्यवाहियों का निपटारा जिला न्यायाधीश द्वारा निपटारा करते समय कार्यवाही में लागू नियमों के अधीन रहते हुए किया जायेगा।

अध्याय-V अनुपूरक प्रावधान

18. न्यायाधीशों द्वारा वादों का विचारण नही किया जाना जिसमें वे हितबद्ध हो।- (1) सिविल न्यायालय का पीठासीन अधिकारी वैसे किसी वाद या अन्य कार्यवाही का विचारण नही करेगा जिसका वह एक पक्षकार हो अथवा जिसमें वह व्यक्तिगत रूप से हितबद्ध हो।

(2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपीलीय सिविल न्यायालय का पीठासीन अधिकारी अपने द्वारा किसी अन्य हैसियत में पारित डिक्री या आदेश के विरूद्ध अपील का विचारण नहीं करेगा।

(3) उप धारा (1) अथवा (2) में यथा निर्देशित कोई वाद, कार्यवाही या अपील जहाँ किसी ऐसे अधिकारियों के समक्ष आता हो वहाँ वह अधिकारी तुरंत मामले के अभिलेख को निर्देश से संबंधित परिस्थितियों के रिर्पोट के साथ, उस न्यायालय को सम्प्रेषित कर देगा जिसका वह ठीक अधीनस्थ हो।

(4) वरीय न्यायालय तब सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 24 के अधीन मामले का निपटारा करेगा।6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 24 फरवर(cid:547) 2026 (5) इस धारा में किसी बात से उच्च न्यायालय की असाधारण मूल सिविल अधिकारिता को प्रभावित करना नहीं समझा जायेगा।

19. संचालन।- सिविल न्यायालय अपने समक्ष सभी मामलों में न्याय, साम्या और सत्य निष्ठा के अनुसार कार्य करेगा।

20. निरसन और व्यावृत्ति।-

(1) बिहार राज्य में लागू बंगाल, आगरा एवं असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 एतद द्वारा निरसित किया जाता है।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, बंगाल, आगरा और असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 अथवा उसके द्वारा निरसित किसी अधिनियमिति के अधीन गठित सभी न्यायालय, की गई नियुक्ति, किया गया नाम निर्देशन, बनाई गई नियमावली, अधिसूचना और किए गए आदेश, प्रदत्त अधिकारिता और शक्तियाँ अथवा अभिव्यक्त रूप से या विवक्षित रूप से करने के आशय से वैसा गठित, किया गया, प्रदत्त और प्रकाशित किया गया क्रमशः इस अधिनियम के अधीन गठित, किया गया, प्रदत्त और प्रकाशित किया समझा जाएगा; और

(3) बंगाल, आगरा और असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 के अधीन किया गया या किये जाने के आशय से कि गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन की गई समझी जायेगी; और

(4) बंगाल, आगरा और असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 अथवा उसके द्वारा निरसित किसी अधिनियम के प्रति निर्देशित कोई अधिनियमिति या दस्तावेज इस अधिनियम अथवा उसके अनुरूप भाग के प्रति निर्देशित समझा जायेगा।

ख्याति सिह, प्रभारी सचिव। ¼eaxy ik.Ms;½

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(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 221-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0। Website: https://egazette.bihar.gov.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 24 February 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2026-02-24.221/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2026-02-24.221.