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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 26 February 2026

Published 26 February 2026

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2026-02-26.238
Languages
English, Hindi

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(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 7 फा(cid:227)गुन 1947 (श0)

(सं0 पटना 238) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 26 फरवर(cid:547) 2026 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 26 फरवरी 2026 सं॰ वि॰स॰वि॰-07/2026-1111/वि॰स॰।—''बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक, 2026'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक-26 फरवरी, 2026 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।

आदेष से, ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026

[foúlúfoú&08@2026]

बिहार में कार्यरत सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एम0एफ0आई0) और छोटे ऋण प्रदाताओं (एस0एल0पी0) को विनियमित करना, प्रपीड़क और अनैतिक वसूली प्रथाओं पर रोक लगाना, उचित ब्याज दरों के साथ पारदर्शी उधार संचालन सुनिश्चित करना, व्यापक सुरक्षा उपायों के माध्यम से कमजोर उधारकर्ताओं को शोषण से बचाना, तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले संतुलित विनियामक ढाँचे को बनाए रखते हुए विवाद समाधान और उधारकर्ता राहत के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करना।

और जबकि राज्य का प्रयास स्वयं सहायता समूहों के हितों की रक्षा करना तथा धन उधार देने वाली सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं द्वारा धन उधार देने के लेन-देन को विनियमित करके उन्हें अनुचित कठिनाई से राहत प्रदान करना है, जो स्वयं सहायता समूहों को अनुचित रूप से अत्यधिक ब्याज दरों पर ऋण प्रदान कर रही हैं तथा वसूली के लिए प्रपीड़क तरीके अपना रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे दरिद्र हो रहे हैं तथा कभी-कभी उधारकर्ता आत्महत्या तक कर रहे हैं।

इसलिए, भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-

I (1) इस अधिनियम को बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) अधिनियम, 2026 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में है, जिसमें राज्य के क्षेत्रीय अधिकारिता के अंतर्गत आने वाले सभी जिले, अनुमंडल, प्रखंड और पंचायतें शामिल हैं।

(3) यह उस तारीख से प्रवृा होगा जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे। (1) यह अधिनियम बिहार की प्रादेशिक सीमाओं के भीतर सूक्ष्म ऋण या लघु ऋण देने के व्यवसाय में लगे सभी व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों, सीमित देयता भागीदारी, कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों, डिजिटल उधार प्लेटफार्मों, मोबाइल अनुप्रयोगों और किसी भी अन्य इकाइयों या व्यक्तियों पर लागू होगा, चाहे उनका निगमन, रजिस्ट्रीकरण या निवास स्थान कहीं भी हो।

(2) इस अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित इकाइयों पर उनके उधार परिचालन के संबंध में लागू नहीं होंगे:

(क) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अधीन परिभाषित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक; (ख) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के अधीन स्थापित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक; (ग) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अधीन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी वैध रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र रखने वाली और आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत काम करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ;

(घ) राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 के अधीन विनियमित आवास वित्त कंपनियाँ; (ङ) लागू सहकारी कानूनों के अधीन रजिस्ट्रीकृत प्राथमिक —षि ऋण सोसाइटियाँ, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और राज्य सहकारी बैंक;

(च) सरकारी विभाग, वैधानिक निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, और एजेंसियाँ जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विकासात्मक उधार या वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों के लिए विशेष रूप से अधिसूचित किया गया हो।

(3) उप-धारा (2) में उपबंधित छूट के होते हुए भी, प्रपीड़क वसूली के तरीकों, उधारकर्ता संरक्षण उपायों और उचित वसूली प्रथाओं के निवारण से संबंधित इस अधिनियम के सभी प्रावधान उप-धारा (2) में उल्लिखित प्रत्येक इकाई पर लागू होंगे जब वे बिहार राज्य के भीतर उधारकर्ताओं से ऋण की वसूली में संलग्न हों।

इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:

(क) से बिहार राज्य सरकार अभिप्रेत है; (ख) '' '' से अभिप्रेत है कोई भी व्यक्ति, कर्मचारी, ठेकेदार, वसूली एजेंसी, संग्रह अभिकर्ता, क्षेत्र पदाधिकारी, या तृतीय-पक्ष सेवा प्रदाता जो उधारदाता द्वारा ऐसे उधारदाता की ओर से ऋण, संवितरण, अनुश्रवण, संग्रह या वसूली गतिविधियों को करने के लिए लगाया जाता हो, नियोजित, नियुक्त या अधि— त किया जाता हो, और इसमें डिजिटल वसूली प्लेटफॉर्म और स्वचालित वसूली प्रणाली शामिल हैं; (ग) '' '' से अभिप्रेत है कोई भी व्यक्ति, या व्यक्तियों का समूह या सरकारी कार्यक्रमों के तहत गठित स्वयं सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह, महिला समूह, किसान उत्पादक संगठन, सूक्ष्म उद्यम, या समान आर्थिक हित रखने वाले व्यक्तियों का कोई समूह जो किसी उत्पादक उद्देश्य के लिए सूक्ष्म वित्त संस्थाओं या धन उधार देने वाली एजेंसियों या संगठनों से इस निबंधन और शर्तों के साथ एक करार के3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 तहत ऋण के रूप में धन प्राप्त करता है कि धन को ऐसे सूक्ष्म वित्त संस्थाओं या धन उधार देने वाली एजेंसियों या संगठनों को एक निश्चित समय अवधि के भीतर चुकाया जाएगा, जैसा भी मामला हो; (घ) " " से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 7 के अधीन विनिर्दिष्ट और निषिद्ध कोई भी कार्य, आचरण, व्यवहार या अभ्यास, जब किसी ऋण राशि, ब्याज, शुल्क या प्रभारों के पुनर्भुगतान के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से किया जाता हो;

(ङ) '' '' से अभिप्रेत होगा वित्त विभाग, बिहार सरकार, अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उल्लिखित; (च) " " से अभिप्रेत है किसी भी वेबसाइट, मोबाइल अनुप्रयोग, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म या इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली, जिसके माध्यम से डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंटरनेट सम्पर्कता का उपयोग करके ऋण उत्पन्न, संसाधित, स्वी—त, वितरित, अनुश्रवण या वसूल किए जाते हैं, जिसमें पीयर-टू-पीयर उधार मंच और फिनटेक अनुप्रयोग शामिल हैं;

(छ) " " से अभिप्रेत है पति/पत्नी, दाक संतान सहित बच्चे, माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहन, सास-ससुर, कानूनी बच्चे और कोई अन्य व्यक्ति जो जीविका के लिए पूरी तरह या काफी हद तक उधारकर्ता पर निर्भर है और आमतौर पर उधारकर्ता के साथ रहता है;

(ज) " " में कोई भी व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, साझेदारी फर्म, सीमित देयता भागीदारी, कंपनी, सोसाइटी, ट्रस्ट, डिजिटल प्लेटफॉर्म ऑपरेटर, या इस अधिनियम के अधीन आच्छादित ऋण को आगे बढ़ाने के व्यवसाय में लगे किसी भी अन्य इकाई शामिल है, लेकिन इसमें धारा 2 की उप-धारा (2) के अधीन छूट प्राप्त इकाइयाँं शामिल नहीं हैं;

(झ) " " से अभिप्रेत है उधारकर्ता को अग्रिम धनराशि या नकद या वस्तु के रूप में समतुल्य मूल्य, जो उधारदाता द्वारा उधारकर्ता को स्पष्ट रूप से प्रभारित ब्याज पर या किसी अन्य प्रतिफल या लाभ के लिए दिया जाता है और इसमें शामिल हैं:

(i) डिजिटल प्लेटफॉर्म या मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से वितरित ऋण; (ii) उत्पादक गतिविधियों, उपभोग आवश्यकताओं, आपातकालीन उद्देश्यों या किसी अन्य वैध उद्देश्यों के लिए दिए गए ऋण;

(iii) परिक्रामी ऋण सुविधाएँ और ऋण लाइनें अथवा अधिविकर्ष (ओभरड्राफ्ट); (iv) स्वर्ण, संपत्ति या अन्य परिसंपत्तियों द्वारा सुरक्षित ऋण;

(ञ) '' '' से निदेशक (संस्थागत वित्त) या ऐसा कोई पदाधिकारी अभिप्रेत है जिसे बिहार सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के अधीन पंजीकरण प्राधिकारी के —त्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया जाए;

(ट) " " से बिहार सरकार के वित्त विभाग के प्रधान सचिव या ऐसा कोई पदाधिकारी अभिप्रेत है जिसे बिहार सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन अधिसूचना द्वारा अपीलीय प्राधिकारी के कार्यों के निष्पादन के लिए नियुक्त किया जाए;

(ठ) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन परिभाषित पदों के प्रयोजनार्थ ' ' से एमएफआई द्वारा उधारकर्ता को उधार दी गई राशि पर वापसी अभिप्रेत होगा।

(ड) " " से अभिप्रेत है कोई भी व्यक्ति, साझेदारी फर्म, व्यक्तियों का समूह, जिसमें कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अधीन पंजीकृत कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अधीन परिभाषित एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी, सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन पंजीकृत एक सोसाइटी, और इसी तरह, जिस भी तरीके से और जिस भी नाम से गठित किया गया हो, जिसका प्रमुख या आकस्मिक कार्य जरूरतमंद उधारकर्ताओं को पैसा उधार देना या किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करना है;

(ढ) " " से अभिप्रेत है और इसमें शामिल हैं:

(i) महिला उधारकर्ता, विशेष रूप से एकल महिलाएँ, विधवाएँ, और हाशिए के समुदायों की महिलाएँ;

(ii) किसान, —षि मजदूर, किरायेदार किसान और संबद्ध —षि गतिविधियों में लगे व्यक्ति; (iii) भारत के संविधान में परिभाषित अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्य; (iv) दैनिक वेतन भोगी, प्रवासी श्रमिक और असंगठित क्षेत्र के रोजगार में लगे व्यक्ति; (v) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अधीन परिभाषित दिव्यांगजन; (vi) साठ वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक; (vii) सरकारी सर्वेक्षणों द्वारा पहचाने गए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से संबंधित उधारकर्ता; (viii) उभयलिंगी (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति; (ix) सड़क विक्रेता, घरेलू कामगार और हाशिए पर रहने वाले अन्य व्यवसाय समूह;

4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026

(x) सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर राज्य सरकार द्वारा असुरक्षित के रूप में अधिसूचित व्यक्तियों की कोई अन्य श्रेणी। (ण) " " से ऐसे परिवार को दिया गया ऋण अभिप्रेत है जिसकी वार्षिक पारिवारिक आय तीन लाख रुपये तक हो या ऐसी सीमा जो सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा नियत करे।

:- इस खंड के प्रयोजन के लिए, परिवार से एक व्यक्तिगत परिवार इकाई, अर्थात पति, पत्नी और उनका अविवाहित पुत्रों और पुत्रियाँ अभिप्रेत होगा।

(त) इस अधिनियम में प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित शब्दों के वही अर्थ होंगे जो सुसंगत अधिनियमों में उनके लिए समनुदेशित हैं।

II (1) सरकार अधिसूचना द्वारा धन उधार देने वाली संस्थाओं के पंजीकरण प्राधिकारी के रूप में पदाधिकारियों की नियुक्ति कर सकेगी तथा ऐसे प्राधिकारी की अधिकारिता के क्षेत्र को परिभाषित कर सकेगी। (2) पंजीकरण प्राधिकारी ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएँ।

(3) इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को राज्य में कार्यरत या इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पश्चात्‌ धन उधार देने का व्यवसाय शुरू करने का इरादा रखने वाली कोई भी धन उधार देने वाली इकाई, इस अधिनियम के अधीन पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना कोई ऋण नहीं देगी या कोई ऋण वसूल नहीं करेगी:

परन्तु, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख को राज्य में कार्यरत प्रत्येक धन उधार देने वाली इकाई, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से नब्बे दिन के भीतर, इस अधिनियम के तहत पंजीकरण प्राधिकारी से पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करेगी।

(4) धन उधार देने वाली इकाई के पंजीकरण के लिए प्रत्येक आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा, जैसा कि सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाय, और यह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में, ऐसे दस्तावेजों और फीस के साथ होगा जो विहित किया जायः

(5) ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, पंजीकरण प्राधिकारी धन उधार देने वाली इकाई द्वारा प्रस्तुत ब्यौरों का सत्यापन करेगा और उपधारा (2) में निर्दिष्ट ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में और ऐसे समय के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करेगा या प्रदान करने से इंकार करेगा जो विहित किया जायः

परन्तु ऐसा कोई भी आवेदन आवेदक को सुनवाई का अवसर दिए बिना तथा उसके कारण को अभिलिखित किए बिना अस्वीकार नहीं किया जाएगा।

(6) यदि संबंधित पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा उपधारा (3) के अधीन निर्धारित पंजीकरण के लिए आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से 90 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र स्वतः तैयार हो जाएगा और निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन प्रदान किया जाएगा।

(7) उपधारा (3) या (4) के अधीन प्रदान किया गया प्रमाणपत्र, उसमें विनिर्दिष्ट निबंधनों और शर्तों की पूर्ति के अधीन, प्रदान किए जाने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा:

परन्तु यदि कोई धन उधार देने वाली इकाई उस जिले या क्षेत्र के अलावा किसी अन्य जिले या क्षेत्र में अपना कारोबार चलाने का इरादा रखती है, जहाँ उसने पंजीकरण कराया है, तो वह ऐसे पंजीकरण का ब्यौरा ऐसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत करेगी, जैसा कि संबंधित जिले या क्षेत्र के पंजीकरण प्राधिकारी को विहित किया जाय, जहाँ वह अपना कारोबार चलाने का इरादा रखती है। (8) प्रत्येक पंजीकरण प्रमाणपत्र का नवीकरण तीन वर्ष की अवधि के लिए, ऐसी रीति से और ऐसी फीस के भुगतान तथा ऐसी शर्तों की पूर्ति पर किया जाएगा, जैसा कि विहित किया जाए।

(9) इस अधिनियम के अधीन स्वीकृत पंजीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए प्रत्येक आवेदन, ऐसे प्रमाणपत्र की अवधि की समाप्ति की तारीख से कम से कम साठ दिन पूर्व किया जाएगा।

परन्तु पंजीकरण प्राधिकारी पूर्वाेक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ किन्तु प्रमाण पत्र की निर्धारित अवधि की समाप्ति से पूर्व नवीकरण के लिए आवेदन पर विचार कर सकेगा, यदि उसका समाधान हो जाता है कि आवेदक पर्याप्त कारण से समय पर नवीकरण के लिए आवेदन करने से निवारित हुआ था। (10) उपधारा (2) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, पंजीकरण प्राधिकारी धन उधार देने वाली संस्था द्वारा दिए गए ब्यौरों का सत्यापन करेगा और पंजीकरण की समाप्ति की तारीख से पूर्व, विहित इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र का नवीकरण करेगा या नवीकरण करने से इंकार करेगा:

परन्तु ऐसा कोई आवेदन, आवेदन पर सुनवाई का अवसर दिए बिना तथा कारण अभिलिखित किए बिना अस्वीकार नहीं किया जाएगा।5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 (11) यदि संबंधित पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा उपधारा (6) के अधीन विहित समय-सीमा के भीतर आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो पंजीकरण प्रमाणपत्र का नवीकरण स्वतः तैयार किया जाएगा तथा ऑनलाइन ऐसे प्रारूप में प्रदान किया जाएगा जो विहित किया जाय।

(12) पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा पंजीकरण प्रमाणपत्र देने से इनकार करने, पंजीकरण प्रमाण पत्र के निलंबन या प्रतिसंहरण के विरुद्ध अपील की जा सकती है, तथा पंजीकरण प्रमाण पत्र देने से इंकार करने, पंजीकरण प्रमाणपत्र के निलंबन या प्रतिसंहरण के तारीख से 60 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की जा सकेगी। अपीलीय प्राधिकारी से ऐसी अपील प्रस्तुत करने के 30 दिनों के भीतर अपना निर्णय देने की अपेक्षा की जाती है।

(13) (1) प्रत्येक पंजीकरण प्राधिकारी अपनी अधिकारिता के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लिए वैध पंजीकरण वाले सभी एमएफआई का रजिस्टर ऐसे प्रारूप में रखेगा जो विहित किया जाय। (2) उपधारा (1) के अधीन रखे गए रजिस्टर ऐसी रीति से और ऐसे अंतरालों पर प्रकाशित किए जाएँगे, जो विहित किए जाएँ। (14) डिजिटल उधार देने वाले प्लेटफॉर्म इसके अतिरिक्त केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा मानकों, लागू होने वाले डेटा स्थानीयकरण आवश्यकताओं और बिहार सरकार द्वारा सुसंगत केन्द्रीय प्राधिकारियों के परामर्श से यथा विहित ग्राहक संरक्षण दिशानिर्देशों का अनुपालन करेंगे।

(15) कोई व्यक्ति या इकाई जो उचित पंजीकरण और प्रमाणीकरण के बिना ऋण देती है, उसे अवैध धन उधार देने का व्यवसाय करने वाला माना जाएगा और इस अधिनियम के तहत दंड के लिए उत्तरदायी होगा, बशर्ते कि ऐसे व्यक्ति को विहित समय सीमा के भीतर अपने कार्यों को नियमित करने का उचित अवसर दिया जाए। (1) उधारदाताओं द्वारा ली जाने वाली प्रभावी ब्याज दर को उसके सभी कार्यालयों, उसकी वेबसाइट तथा विवरणिका या ब्रोशर या विज्ञापन नोटिस में, जैसा भी मामला हो, प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। (2) कोई भी सूक्ष्म वित्त संस्था (एमएफआई) या धन उधार देने वाली एजेंसी या संगठन, इस अधिनियम के लागू होने से पहले या बाद में, उसके द्वारा दिए गए किसी ऋण के संबंध में उधारकर्ता से ब्याज के रूप में मूल राशि से अधिक राशि नहीं वसूलेगा।

(3) प्रत्येक सूक्ष्म वित्त संस्था (एमएफआई) या धन उधार देने वाली एजेंसी या संगठन को एक कैशबुक, एक खाता बही और अन्य लेखा पुस्तकें ऐसे प्रारूप में और ऐसे तरीके से रखनी और बनाए रखनी होंगी, जैसा कि विहित किया जाय।

(4) प्रत्येक ऋण आवेदन पत्र में आवश्यक जानकारी शामिल होनी चाहिए जो उधारकर्ता के हित को प्रभावित कर सकती है, ताकि अन्य धन उधार देने वाली इकाइयों द्वारा प्रस्तुत निबंधन और शर्तों के साथ सार्थक तुलना की जा सके और उधारकर्ता द्वारा उचित निर्णय लिया जा सके। ऐसा आवेदन पत्र, आवेदन पत्र के साथ जमा किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज़ों को इंगित करेगा।

(5) प्रत्येक पंजीकृत उधारदाता को किसी भी ऋण का वितरण करने से पहले निम्नलिखित प्रकटीकरण और पारदर्शिता आवश्यकताओं का अनिवार्य रूप से अनुपालन करना होगा: (क) हिंदी भाषा में एक लिखित ऋण समझौता प्रदान करना जिसमें मूल ऋण राशि, घटती शेष राशि पद्धति पर गणना की गई ब्याज की वार्षिक प्रतिशत दर, प्रसंस्करण शुल्क, बीमा प्रीमियम, यदि कोई हो, देरी से भुगतान के लिए दंडात्मक शुल्क, ऋण की कुल लागत, मासिक किस्त राशि और देय तिथियों के साथ पूर्ण पुनर्भुगतान समय-सारणी स्पष्ट रूप से बताई गई हो;

(ख) ऋण वितरण से कम से कम बहत्तर घंटे पहले उधारकर्ता को एक व्यापक ऋण-पूर्व प्रकटीकरण विवरण प्रदान करना, जिसमें सभी निबंधन और शर्तें, इस अधिनियम के तहत उधारकर्ता के अधिकार और दायित्व, चूक के परिणाम, उपलब्ध शिकायत निवारण तंत्र और विनियामक प्राधिकरणों के संपर्क विवरण की व्याख्या करना;

(ग) बिहार राज्य में उधारकर्ता सेवाओं, शिकायत समाधान और दस्तावेज़ भंडारण के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे के साथ एक कार्यालय स्थापित करना और उसका रखरखाव करना, जो निर्धारित व्यावसायिक घंटों के दौरान उधारकर्ताओं के लिए सुलभ रहे;

(घ) यह सुनिश्चित किया जाना कि उधारकर्ताओं के साथ सभी संचार, दस्तावेज, नोटिस और पत्राचार हिंदी या उधारकर्ता द्वारा समझी जाने वाली स्थानीय भाषा में प्रदान किए जाएँ, और किसी भी उधारकर्ता को हिंदी या स्थानीय भाषा के अलावा किसी अन्य भाषा में दस्तावेजों को समझने या हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य नहीं किया जाए;

6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026

(ङ) उधारकर्ता से प्राप्त प्रत्येक पुनर्भुगतान के लिए उधारदाता का नाम, पता और पंजीकरण संख्या वाली कंप्यूटर-उत्पन्न या उचित रूप से हस्ताक्षरित रसीदें जारी करना, चाहे वह नकद, चेक या डिजिटल भुगतान मोड के माध्यम से हो, और ऐसी रसीदों में प्राप्त राशि, भुगतान की तारीख और बकाया राशि का स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना;

(च) लिखित अनुरोध के सात कार्य दिवसों के भीतर उधारकर्ता को ऋण समझौते, पुनर्भुगतान समय-सारणी और लेनदेन इतिहास सहित सभी ऋण-संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी निःशुल्क प्रदान करना;

(छ) सभी शाखा कार्यालयों, वेबसाइटों और सभी विज्ञापनों में ली जाने वाली अधिकतम ब्याज दरें, प्रसंस्करण शुल्क, दंडात्मक प्रभार, ऋण के मानक निबंधन और शर्तें तथा शिकायत निवारण संपर्क जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करना।

(6) प्रत्येक उधारदाता, उधारकर्ता को एक ऋण पासबुक या डिजिटल ऋण विवरण प्रदान करेगा जिसमें निम्नलिखित अनिवार्य जानकारी होगी: (क) उधारदाता का नाम, पता और पंजीकरण विवरण तथा उधारकर्ता का पूरा विवरण; (ख) स्वी—त मूल धन और तिथियों के साथ वास्तव में वितरित राशि; (ग) प्रभावी वार्षिक प्रतिशत ब्याज दर और गणना की विधि; (घ) सभी प्रभारों, फीसों, बीमा लागतों और अतिरिक्त खर्चों का विस्तृत विवरण; (ङ) किस्त की राशि और देय तिथियों को दर्शाते हुए पूर्ण पुनर्भुगतान समय-सारणी; (च) चालू शेष के साथ प्राप्त सभी पुनर्भुगतानों की पावती और तारीख; (छ) प्रत्येक भुगतान के बाद वर्तमान बकाया मूलधन और ब्याज राशि; (ज) ऋण की पूर्ण चुकौती पर अंतिम मुक्ति प्रमाण पत्र।

(7) कोई भी उधारदाता ऐसी कोई राशि, फीस या शास्ति प्रभारित नहीं करेगा जिसका ऋण समझौते और उधारकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित ऋण-पूर्व प्रकटीकरण विवरण में स्पष्ट रूप से खुलासा न किया गया हो। (8) प्रत्येक उधारदाता को उधारकर्ताओं के प्रश्नों, शिकायतों और सहायता के लिए प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा संचालित एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर स्थापित करना होगा, और ऐसी हेल्पलाइन सभी कार्य दिवसों में व्यावसायिक घंटों के दौरान चालू रहेगी।

(9) - प्रत्येक एमएफआई को प्रत्येक माह की 10 तारीख से पहले पंजीकरण प्राधिकारी को मासिक विवरण प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उधारकर्ताओं की सूची, प्रत्येक को दिया गया ऋण तथा की गई अदायगी पर ली जाने वाली ब्याज दर का विवरण देना होगा। (10) प्रत्येक एमएफआई को प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को समाप्त होने वाली वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक रिटर्न अगले वित्तीय वर्ष के ''मई'' माह के अंत तक पंजीकरण प्राधिकारी को प्रस्तुत करना होगा।

(11) 1) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) - सूक्ष्म वित्त संस्था (एमएफआई) उन व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को उधार दे सकते हैं जो संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) या स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य नहीं हैं या उन उधारकर्ताओं को जो संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) या स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य हैं।

2) कोई उधारकर्ता एक से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) या संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) का सदस्य नहीं हो सकता।

3) दो (02) से अधिक सूक्ष्म वित्त संस्था (एमएफआई) या धन उधार देने वाली एजेंसी या संगठन एक ही उधारकर्ता को ऋण नहीं देंगे।

4) ऋण स्वी—त होने और पहली किस्त की अदायगी की नियत तिथि के बीच एक न्यूनतम अधिस्थगन अवधि होगी। यह अधिस्थगन, अदायगी की आवृत्ति से कम नहीं होगा। उदाहरण के लिए साप्ताहिक अदायगी के मामले में, अधिस्थगन एक सप्ताह से कम नहीं होगा।

5) वसूली मानदंडों का उल्लंघन करके किए गए ऋण की वसूली तब तक स्थगित कर दी जाएगी जब तक कि सभी पूर्व मौजूदा ऋणों का पूर्ण भुगतान नहीं कर दिया जाता।

6) ऋणों की सभी स्वी—ति और वितरण केवल एक केंद्रीय स्थान पर ही किया जाएगा और इस कार्य में एक से अधिक व्यक्ति शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, वितरण कार्य पर नजदीकी पर्यवेक्षण रखा जाएगा। (1) कोई उधारदाता इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा विहित राशि से अधिक ऋण के लिए किसी भी प्रकार की सुरक्षा, संपाश्र्विक गारंटी या तीसरे पक्ष के आश्वासन की मांग नहीं करेगा, प्राप्त नहीं करेगा या बनाए नहीं रखेगा, और ऐसे ऋण केवल उधारकर्ता की ऋण पात्रता, पुनर्भुगतान क्षमता, आय मूल्यांकन और ऐसे अन्य मानदंडों के आधार पर दिए जाएंगे, जो विहित किए जायें।7 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 (2) सरकार इस अधिनियम के प्रारंभ होने के 90 दिनों के भीतर नियमों द्वारा वह सीमा राशि विहित करेगी, जिस तक कोई प्रतिभूति या संपाश्र्विक की आवश्यकता नहीं होगी, इसमें उधारकर्ताओं की आर्थिक स्थिति, आय स्तरों में क्षेत्रीय भिन्नता, मुद्रास्फीति दर और उधारदाताओं का उचित संरक्षण सुनिश्चित करते हुए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाएगा।

(3) इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व उपधारा (1) के अंतर्गत आच्छादित ऋणों के लिए किसी उधारदाता द्वारा प्राप्त कोई प्रतिभूति, संपाश्र्विक या गारंटी शून्य और अप्रवर्तनीय मानी जाएगी, और उसे ऐसे प्रारंभ से तीस दिन के भीतर बिना किसी लागत या शर्त के उधारकर्ता या गारंटीकर्ता को वापस कर दी जाएगी। (4) विहित सीमा राशि से अधिक के ऋणों के लिए, लेकिन इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट समग्र ऋण सीमा के भीतर रहने पर, उधारदाता केवल निम्नलिखित स्वीकार्य रूपों में प्रतिभूति प्राप्त कर सकते हैं: (क) उचित मूल्यांकन और भंडारण सुरक्षा उपायों के साथ सोने के आभूषणों को गिरवी रखना; (ख) बैंक जमा या सरकारी प्रतिभूतियों पर धारणाधिकार; (ग) उधारकर्ता के प्राथमिक निवास या व्यक्तिगत रूप से खेती की जा रही —षि भूमि के अतिरिक्त अन्य अचल संपत्ति का बंधक;

(घ) वित्तीय रूप से सु–ढ़ तृतीय पक्षों से उनकी स्पष्ट लिखित सहमति और दायित्व के पूर्ण प्रकटीकरण के साथ गारंटी;

परन्तु ऐसी प्रतिभूति का मूल्य ऋण राशि से पच्चीस प्रतिशत से अधिक न हो और प्रतिभूति व्यवस्था से उधारकर्ता या गारंटीकर्ता पर अनुचित कठिनाई न आए।

(5) कोई भी उधारदाता, उधारकर्ता के दैनिक जीवन या आजीविका के लिए आवश्यक किसी भी दस्तावेज को अपने पास नहीं रखेगा, जब्त नहीं करेगा या प्रतिभूति के रूप में माँग नहीं करेगा, जिसमें वास्तविक निवास के लिए उपयोग की जाने वाली आवासीय संपत्ति के मूल दस्तावेज, व्यक्तिगत रूप से खेती की जा रही —षि भूमि, राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पेंशन दस्तावेज या कोई सरकार द्वारा जारी कोई अन्य हकदारी दस्तावेज शामिल होंगे।

(6) जहाँ स्वीकार्य प्रतिभूति ली जाती है, वहाँ उधारदाता एक उचित प्रतिभूति समझौता निष्पादित करेगा जिसमें प्रदान की गई प्रतिभूति, मुक्ति की शर्तें तथा उधारकर्ता के अधिकारों का स्पष्ट उल्लेख होगा, तथा ऋण की पूर्ण चुकौती के तुरंत बाद ऐसी प्रतिभूति वापस कर देगा।

(7) बिहार सरकार समय-समय पर आर्थिक स्थिति, उधारकर्ता की प्रतिपुष्टि और सूक्ष्म विा (माइक्रोफाइनेंस) क्षेत्र की कार्यप्रणाली के आधार पर उप-धारा (2) के अन्तर्गत विहित सीमा राशि की समीक्षा और पुनरीक्षण कर सकेगी, परन्तु सीमा को कम करने वाला कोई भी पुनरीक्षण मौजूदा उधारकर्ताओं और ऐसे पुनरीक्षण से पहले स्वी—त ऋणों पर लागू नहीं होगा।

III किसी भी उधारदाता की ओर से कार्य करने वाला कोई भी उधारदाता, अभिकर्ता (एजेंट), कर्मचारी, ठेकेदार या प्रतिनिधि किसी भी ऋण राशि, ब्याज, प्रभार, शास्ति या देय होने का दावा की गई किसी भी अन्य राशि को वसूलने के उद्देश्य से निम्नलिखित कार्यों, पद्धतियों या समान गतिविधियों में शामिल नहीं होगा, प्रयास नहीं करेगा, धमकी नहीं देगा, सुविधा नहीं देगा या प्रोत्साहित नहीं करेगा : (1) (क) उधारकर्ता, पारिवारिक सदस्यों या सहयोगियों के खिलाफ शारीरिक हमला, मारपीट, सदोष अवरोध, आपराधिक अभित्रास या हिंसा; (ख) उधारकर्ता से जुड़े किसी भी व्यक्ति को शारीरिक अपहानि या हिंसा की धमकी देना; (ग) बल या धमकी के माध्यम से उधारकर्ता या परिवार के सदस्यों की मुक्त आवाजाही को प्रतिबंधित करना, अवरोध करना या रोकना; (घ) उधारकर्ता या गारंटीदाता से संबंधित किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, नष्ट करना या नुकसान पहुंचाने की धमकी देना; (ङ) वैध अधिकार के बिना उधारकर्ता के निवास, कार्यस्थल या परिसर में जबरन प्रवेश करना या छोड़ने के लिए कहे जाने के बाद भी वहाँ रहना।

(2) (क) किसी भी संप्रेषण में अपमानजनक, अश्लील, धमकी, जातिवादी, सांप्रदायिक या भेदभावपूर्ण भाषा का प्रयोग करना; (ख) बार-बार कॉल, संदेश या मुलाकात करना जिससे मानसिक परेशानी हो या दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न हो; (ग) लिखित सहमति के बिना, कार्यदिवसों में सुबह 7ः00 बजे से पहले या शाम 8ः00 बजे के बाद या रविवार और छुट्टियों के दिन किसी भी समय उधारकर्ताओं से संपर्क करना; (घ) उधारकर्ताओं को उलझाने या मजबूर करने के लिए उनकी वित्तीय स्थिति या व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर शर्मिंदा करना या अपमानित करना; (ङ) उधारकर्ताओं के निवास, कार्यस्थल या पड़ोस में सार्वजनिक रूप से विघ्न उत्पन्न करना; (च) विधिक परिणामों के बारे में गलत बयान देना या भुगतान के लिए —त्रिम आग्रह पैदा करना।8 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 (3) (क) एसएमएस, व्हाट्‌सऐप, ईमेल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से धमकी, भयभीत करने वाले या अपमानजनक संदेश भेजना; (ख) स्पष्ट लिखित सहमति के बिना व्यक्तिगत जानकारी, वित्तीय विवरण, तस्वीरें या निजी डेटा का खुलासा या प्रकाशन; (ग) नकली विधिक नोटिस, अदालती समन या धोखाधड़ी वाले कानूनी दस्तावेज बनाना या वितरित करना; (घ) पुलिस पदाधिकारियों, अदालत के पदाधिकारियों, वकीलों या सरकारी पदाधिकारियों का प्रतिरूपण करना; (ङ) अलग से लिखित सहमति के बिना उधारकर्ता के फोन संपर्क, कॉल लॉग या डिजिटल डेटा तक पहुँचना या उसका उपयोग करना; (च) वैध प्राधिकार के बिना उधारकर्ता के उपकरणों पर ट्रैकिंग युक्ति या निगरानी सॉफ्टवेयर स्थापित करना; (छ) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नकली प्रोफाइल बनाना या उधारकर्ता की पहचान का दुरुपयोग करना।

(4) : (क) दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों या सरकार द्वारा जारी किए गए हकदारी पत्रों को अभिगृहीत करना, अधिहृत करना या अवैध रूप से अपने पास रखना; (ख) उधारकर्ता की कार्यस्थल उपस्थिति, रोजगार या व्यावसायिक कार्यों में बाधा डालना; (ग) पेशेवर संबंधों को खतरे में डालने के लिए नियोक्ताओं, सहकर्मियों या व्यावसायिक सहयोगियों से संपर्क करना; (घ) दबाव में संपत्ति का निपटान करने के लिए बाध्य करना; (ड.) बैंक खातों या वैध आय स्रोतों तक पहुँच को अवरुद्ध करना।

(5) : (क) पारिवारिक सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों या पड़ोसियों पर प्रतिसंदाय के लिए सामाजिक प्रपीड़न हेतु दबाव डालना; (ख) बच्चों के विद्यालयों या शैक्षणिक संस्थाओं में जाकर उन्हें शर्मिंदा करना; (ग) वसूली के उद्देश्य से धार्मिक स्थानों, सामाजिक समारोहों, त्योहारों या सामुदायिक समारोहों में व्यवधान डालना

(6) (क) आपराधिक पृष्ठभूमि या हिंसा की पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को वसूली एजेंट के रूप में नियुक्त करना; (ख) अरजिस्ट्रीकृत या अनधि—त वसूली एजेंसियों या संग्रह कर्मियों का उपयोग करना; (ग) इस अधिनियम या अन्य लागू कानूनों के तहत विहित सीमा से अधिक राशि की माँग करना; (घ) छिपे हुए शुल्क या अघोषित शुल्क वसूलना; (ङ) उचित कानूनी प्रक्रियाओं के बिना गारंटर या परिवार के सदस्यों से वसूली का प्रयास करना।

IV (1) पंजीकरण प्राधिकारी किसी भी समय, स्वप्रेरणा से या उधारकर्ता या किसी अन्य प्रभावित व्यक्ति से शिकायत प्राप्त होने पर, उधारदाता को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकेगा कि इस अधिनियम के तहत उनके अनुपालन प्रमाणन या पंजीकरण को रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए, यदि उनका मानना है कि उधार ने इस अधिनियम या इसके तहत बनाए गए नियमों के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया है।

(2) उत्तर पर विचार करने के बाद, यदि कोई हो, तथा उधारदाता को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, पंजीकरण प्राधिकारी लिखित में कारण दर्ज करके ऐसे पंजीकरण को रद्द या निलंबित कर सकेगा। (3) उपधारा (1) के तहत जाँच लंबित रहने तक, पंजीकरण प्राधिकारी लिखित रूप में कारण दर्ज करके अनुपालन प्रमाणीकरण या पंजीकरण को निलंबित कर सकेगा।

(4) जिस उधारदाता का पंजीकरण या प्रमाणन निलंबित या रद्द कर दिया गया है, वह निलंबन की अवधि के दौरान या रद्दीकरण के बाद कोई नया ऋण वितरित नहीं करेगा या मौजूदा ऋणों की वसूली नहीं करेगा। (1) पंजीकरण प्राधिकारी या उसके द्वारा प्राधि—त कोई भी पदाधिकारी किसी भी उधारदाता या उधार देने की गतिविधियों में लगे हुए व्यक्ति के परिसर में प्रवेश कर सकेगा, तथा इस अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए अभिलेखों और दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकेगा या उन्हें प्रस्तुत करने की माँग कर सकेगा।

(2) प्राधि—त पदाधिकारी परीक्षा, जाँच या कानूनी कार्यवाही के लिए आवश्यक समझे जाने वाले किसी भी दस्तावेज़ को जब्त कर सकेगा। ऐसे दस्तावेज़ केवल उस अवधि तक ही रखे जाएँगे जितनी अवधि इन उद्देश्यों के लिए आवश्यक हो।

(3) पंजीकरण प्राधिकारी या प्राधि—त पदाधिकारी उधारदाता से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बुलाकर पूछताछ कर सकेगा, यदि उसे लगता है कि उसके पास सुसंगत जानकारी है।9 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 V (1) कोई भी उधारकर्ता किसी उधारदाता द्वारा इस अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा सकेगा :

(क) पंजीकरण प्राधिकारी के पास जिसने अनुपालन प्रमाणीकरण जारी किया है। (ख) उस पंजीकरण प्राधिकारी के पास, जिसकी क्षेत्रीय अधिकारिता है, जहाँ उल्लंघन हुआ था; या (ग) शारीरिक हिंसा, आपराधिक धमकी या गंभीर धमकियों से जुड़े उल्लंघनों के लिए अधिकारिता वाले थाना के पास।

(2) उपधारा (1) में उल्लिखित प्रत्येक प्राधिकारी इस अधिनियम के अंतर्गत दायर प्रत्येक शिकायत को सात कार्य दिवसों के भीतर प्राप्त करने, पंजीकृत करने, अभिस्वी—ति देने और संसाधित करने के लिए बाध्य होगा, और शिकायतकर्ता को कमियों को सुधारने का उचित अवसर प्रदान किए बिना तकनीकी आधार पर किसी भी शिकायत को अस्वीकार या खारिज नहीं किया जाएगा।

(3) पंजीकरण प्राधिकारी धारा 8 में उल्लिखित प्रक्रियाओं के समान प्रक्रियाओं का पालन करेगा तथा उचित समझे जाने पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा।

(4) जहाँ प्रथम–ष्ट्‌या संज्ञेय अपराध का साक्ष्य पाया जाता है, वहां पंजीकरण प्राधिकारी शिकायत को अधिकारिता वाले पुलिस थाने को अग्रेषित करेगा।

(5) कोई भी पुलिस पदाधिकारी ऐसी शिकायत प्राप्त करने या दर्ज करने से इनकार नहीं करेगा। (1) बिहार सरकार अधिसूचना द्वारा उधारकर्ताओं और उधारदाताओं के बीच सिविल विवादों के समाधान के लिए एक या एक से अधिक लोकपालों की नियुक्ति कर सकेगी।

(2) लोकपाल की शक्तियाँ, कार्य, योग्यताएँ, अधिकार क्षेत्र और प्रक्रियाएँ बिहार सरकार द्वारा विहित की जाएँगी ।

(3) इस धारा में कोई भी बात पक्षकारों के बीच विवादों का न्यायनिर्णयन करने के लिए सिविल न्यायालयों की अधिकारिता को बाधित नहीं करेगी।

VI कोई भी व्यक्ति या संस्था जो धारा-4 का उल्लंघन करते हुए (पंजीकरण और अनुपालन प्रमाणन प्राप्त किए बिना) ऋण देने का कार्य करता है, उसे तीन वर्ष तक के कारावास और पाँच लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। कोई भी उधारदाता जो (ंक) धारा-5 के तहत उधारकर्ताओं को आवश्यक प्रकटीकरण, ऋण प्रलेखीकरण या रसीदें प्रदान करने में विफल रहता है; या

(ख) इस अधिनियम के तहत पंजीकृत कार्यालय, हेल्पलाइन स्थापित करने या ऋण-पूर्व प्रकटीकरण देने में विफल रहता है; या

(ग) इस अधिनियम की धारा-5(10) के अधीन अपेक्षित वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने में असफल रहने पर कम से कम दस हजार रुपये के जुर्माने से दण्डनीय होगा जो बढा़कर एक लाख रुपये तक आर्थिक दण्ड दिया जा सकेगा । कोई भी उधारदाता या एजेंट जो धारा 8 का उल्लंघन करते हुए किसी भी प्रकार की प्रपीड़क वसूली में संलग्न होता है, सुविधा प्रदान करता है, या प्रयास करता है, उसे दंडित किया जाएगा

(ंक) धारा-7 के खंड (1), (2) एवं (6) के तहत शारीरिक प्रपीड़न, पीछा करने, उत्पीड़न या धमकी के लिए तीन साल तक की कैद या पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों;

(ख) डिजिटल प्रपीड़न, पहचान का दुरुपयोग, अवैध निगरानी या धारा-7 के खंड (3) के तहत प्रतिरूपण के माध्यम से धमकी या धारा-7 के खंड (4) और (5) के तहत आवश्यक दस्तावेजों की जब्ती या परिवार और बच्चों पर दबाव के लिए, पाँच साल तक की कैद या पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों। जहाँ कोई उधारकर्ता या उनके पारिवारिक सदस्य आत्महत्या कर लेता है, और यह साबित हो जाता है कि धारा-7 में परिभाषित प्रपीड़क वसूली पद्धतियों का उपयोग ऐसी आत्महत्या से तुरंत पहले किया गया था, उधारदाता या उनके एजेंटों को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरक माना जाएगा, और वे भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 108 के तहत दंडनीय होंगे । जो व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पहले भी दोषसिद्ध हो चुका है, उसे कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक बढ़ायी जा सकेगी, तथा जुर्माने से, जो दस लाख रुपए से कम नहीं होगा, किन्तु जिसे पाँच करोड़ रुपए तक बढ़ाया जा सकेगा, दंडनीय होगा।10 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों का कोई उल्लंघन, जिसके लिए कोई विशिष्ट दंड का प्रावधान नहीं है, दस हजार रुपए तक के जुर्माने से दंडनीय होगा।

धारा 13 और 17 को छोड़कर धारा 12, 14, 15 और 16 के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। जहाँ इस अधिनियम के तहत कोई उल्लंघन किसी कंपनी, साझेदारी फर्म, सोसायटी या अन्य इकाई द्वारा किया जाता है, वहाँ प्रत्येक निदेशक, भागीदार, प्रबंधक या पदाधिकारी जो उल्लंघन के समय व्यवसाय के संचालन के लिए प्रभारी और जिम्मेदार था, उल्लंघन का दोषी माना जाएगा और दंड के लिए उत्तरदायी होगा, जब तक कि ऐसा व्यक्ति यह साबित नहीं कर देता कि उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना हुआ था और उन्होंने ऐसे उल्लंघन को रोकने के लिए उचित तत्परता बरती थी। इस अध्याय के अधीन किसी भी ऋणदाता या अभिकर्ता के दोषसिद्धि पर, पंजीकरण प्राधिकारी इस अधिनियम के तहत उनके अनुपालन प्रमाणन या पंजीकरण को निलंबित या रद्द कर देगा। : अपंजी—त उधारदाताओं द्वारा दिए गए सभी ऋण, इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट ब्याज दर सीमा का उल्लंघन करने वाले ऋण, प्रपीड़क साधनों से प्राप्त ऋण, या इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले ऋणों को उल्लंघन की सीमा तक उन्मोचित माना जाएगा, और उधारकर्ताओं पर ऐसी अतिरिक्त राशि को चुकाने का कोई कानूनी दायित्व नहीं होगा। : कोई भी सिविल न्यायालय, न्यायाधिकरण, प्राधिकरण या मध्यस्थ उपधारा (1) के अधीन उन्मोचित समझे गए ऋणों या राशियों की वसूली के लिए किसी वाद, आवेदन, याचिका या कार्यवाही पर विचार नहीं करेगा और ऐसी अवैध राशियों की वसूली के लिए सभी लंबित कार्यवाहियां ऐसी अवैधता का निर्धारण होने पर तत्काल समाप्त हो जाएंगी। : जहाँ किसी उधारकर्ता ने इस अधिनियम के अधीन निर्धारित सीमाओं से अधिक राशि पहले ही चुका दी है, ऐसा उधारकर्ता; उधारकर्ता संरक्षण निधि से या सीधे उधारदाता से बारह प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ अतिरिक्त राशि की वापसी का हकदार होगा।

VII

(1) बिहार सरकार एक प्राधिकरण, चाहे विद्यमान हो या गठित किया जाने वाला हो, को अभिहित कर सकेगी, जो बिहार में कार्यरत उधारदाताओं की सूचना के लिए एक ऑनलाइन डाटाबेस का सृजन, अनुरक्षण और संचालन करेगा तथा जिसमें उधारदाताओं को पंजीकरण, नवीकरण आदि के लिए आवेदन करने तथा पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने और सभी संबंधित मामलों के लिए सुविधा होगी।

(2) उप-धारा (1) के अधीन अभिहित प्राधिकारी किसी भी नियामक या सक्षम प्राधिकारी से उधारदाताओं के बारे में ऐसी जानकारी साझा करने की अपेक्षा कर सकेगा, जैसा कि विहित किया जाय।

(1) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, सरकार पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए या ऐसे मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए, जैसा कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाय, ए0डी0जे0 सहित अधीनस्थ न्यायाधीश के संवर्ग में एक या अधिक अभिहित न्यायालयों का गठन कर सकेगी।

(2) अभिहित न्यायालय के अलावा, प्रेसिडेंसी नगर दिवाला अधिनियम, 1909 और प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 के अधीन गठित न्यायालय सहित किसी भी न्यायालय को ऐसे किसी भी मामले के संबंध में अधिकारिता नहीं होगी, जिस पर इस अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं।

(3) किसी अन्य न्यायालय में लंबित कोई मामला, जिस पर इस अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं, इस अधिनियम के प्रकाशन की तिथि को अभिहित न्यायालय को स्थानांतरित हो जाएगा।

सरकार, आदेश द्वारा, अभिहित न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजनार्थ, संबंधित जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के परामर्श से, कम से कम 7 वर्ष का अनुभव रखने वाले एक या अधिक अधिवक्ताओं को विशेष लोक अभियोजक/विशेष सरकारी अधिवक्ता के रूप में नियुक्त कर सकेगी।

(1) अभिहित न्यायालय, राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधि—त किसी पदाधिकारी द्वारा की गई शिकायत पर, इस अधिनियम के अधीन अपराध गठित करने वाले तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट का अवलोकन करने के पश्चात्‌, अभियुक्त को विचारण के लिए न्यायालय को सौंपे बिना अपराध का संज्ञान ले सकेगा।11 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 (2) अभियुक्त व्यक्ति पर विचारण करते समय अभिहित न्यायालय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधान में विहित प्रक्रिया का पालन करेगा।

(3) अभिहित न्यायालय उसे भेजे गए व्यक्ति के संबंध में रिमांड की शक्ति का प्रयोग करेगा जैसा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधान के अधीन यथा उपबंधित है।

(4) अभिहित न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन अपराध का विचारण करते समय, इस अधिनियम के अधीन अपराध के अलावा किसी अन्य अपराध का भी विचारण कर सकेगा, जिसके लिए अभियुक्त पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अधीन उसी विचारण में आरोप लगाया जा सकेगा। (1) अभिहित न्यायालय द्वारा पारित अंतिम आदेश के विरुद्ध अंतिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय, पटना के न्यायक्षेत्र में अपील की जा सकेगी।

(2) अभिहित न्यायालय द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्ध कोई व्यक्ति/एमएफआई उच्च न्यायालय, पटना में अपील कर सकेगा। इस अधिनियम के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए सरकार या पंजीकरण प्राधिकारी या सरकार के किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई वाद या अन्य कार्यवाही नहीं की जाएगी। (1) राज्य सरकार, अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी।

(2) इस धारा द्वारा नियम बनाने की प्रदत्त शक्ति इस शर्त के अधीन होगी कि नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात्‌ बनाए जाएँ।

(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम या अधिसूचना, बनाए जाने के पश्चात्‌ यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के या पूर्वाेक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या अधिसूचना में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो जाएँ या दोनों सदन सहमत हो जाएँ कि नियम या अधिसूचना नहीं बनाई जानी चाहिए तो नियम या अधिसूचना उस तारीख से, जब ऐसा उपांतरण या निष्प्रभावन अधिसूचित किया जाता है, केवल ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगी या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, जैसा भी मामला हो। तथापि, ऐसा कोई उपांतरण या निष्प्रभावन उस नियम या अधिसूचना के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।

(4) बिहार सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी और जब तक कि उनके किसी विशिष्ट दिन को प्रवृत्त होने का उल्लेख न किया गया हो, वे उस दिन प्रवृत्त होंगे जिस दिन वे इस प्रकार प्रकाशित हों। इस अधिनियम के अधीन जारी की गई सभी अधिसूचनाएँ, जब तक कि उनके किसी विशिष्ट दिन को प्रवृत्त होने का उल्लेख न किया गया हो, उस दिन प्रवृत्त होंगी जिस दिन वे इस प्रकार प्रकाशित हों। इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन कार्य करने वाला प्रत्येक पदाधिकारी, पंजीकरण प्राधिकारी, लोकपाल या व्यक्ति, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2(28) के अर्थान्तर्गत लोक सेवक माना जाएगा । इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अतिरिक्त होंगे, न कि उसके अल्पीकरण में। परन्तु किसी विवाद की स्थिति में, बिहार राज्य के भीतर सूक्ष्म वित्त और लघु ऋण वसूली से संबंधित मामलों में इस अधिनियम के उपबंध ऐसे विवाद की सीमा तक अभिभावी होंगे। राज्य सरकार समय-समय पर, उधारदाताओं, पंजीकरण प्राधिकारियों, लोकपालों या इस अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए नियोजित किसी अन्य पदाधिकारी या व्यक्ति को ऐसे निर्देश जारी कर सकेगी जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों से असंगत न हों, जैसा कि वह उचित समझे, और ऐसे सभी व्यक्ति ऐसे निर्देशों का पालन करेंगे। इस अधिनियम के अनुवादित संस्करण के अर्थ और व्याख्या में किसी विसंगति के मामले में अंग्रेजी भाषा संस्करण सभी प्रकार से बाध्यकारी तथा प्रबल होगा। यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो बिहार सरकार , राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत न होने वाले ऐसे प्रावधान कर सकेगी जो उसे कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों।12 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश नहीं किया जाएगा। ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य का प्रयास स्वयं सहायता समूहों के हितों की रक्षा करना तथा धन उधार देने वाली सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं द्वारा धन लेन-देन को विनियमित करके उन्हें अनुचित कठिनाई से राहत प्रदान करना है, जो स्वयं सहायता समूहों को अत्यधिक ब्याज दरों पर ऋण प्रदान कर रही हैं तथा वसूली के लिए प्रपीड़क तरीके अपना रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे दरिद्र हो रहे हैं तथा कभी-कभी उधारकर्ता आत्महत्या तक कर रहे हैं।

बिहार में कार्यरत सूक्ष्म वित्त संस्थाओं और छोटे ऋण प्रदाताओं को विनियमित करना, प्रपीड़क और अनैतिक वसूली प्रथाओं पर रोक लगाना, उचित ब्याज दरों के साथ पारदर्शी उधार संचालन सुनिश्चित करना, व्यापक सुरक्षा उपायों के माध्यम से कमजोर उधारकर्ताओं को शोषण से बचाना तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले संतुलित विनियामक ढाँचे को बनाए रखते हुए विवाद समाधान और उधारकर्ता राहत के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाना आवश्यक है, जिसे अधिनियमित करना ही इस विधेयक का अभीष्ट है। iVuk] fnukad&26-02-2026

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 238-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 26 February 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2026-02-26.238/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2026-02-26.238.