(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 7 फा(cid:227)गुन 1947 (श0)
(सं0 पटना 239) पटना, वृह(cid:232)पितवार, 26 फरवर(cid:547) 2026 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 26 फरवरी 2026 सं॰ वि॰स॰वि॰-12/2026-1114/वि॰स॰।—''बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) विधेयक, 2026'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक-26 फरवरी, 2026 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।
आदेष से, ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव।2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026
[foúlúfoú&09@2026]
नामांकन के विनियमन एवं शुल्क के निर्धारण तथा उससे संबंधित या अनुषांगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम।
माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा के लिए तदर्थ आधार पर नामांकन पर्यवेक्षण समिति एवं शिक्षण शुल्क निर्धारण समिति का गठन पूर्व में ही किया गया है;
और जबकि, राज्य के निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा लिये जाने वाले नामांकन एवं शिक्षण शुल्क निर्धारण के लिए एक कानून बनाना आवश्यक है ताकि ऐसे शुल्क उचित, शोषण रहित और पारदर्शी हो, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों की वित्तीय स्थिरता और स्वायत्तता की भी रक्षा हो;
और जबकि, इस्लामिक शिक्षा अकादमी एवं अन्य बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य (2003) 6 एससीसी 697 और पी.ए. इनामदार एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य (2005) 6 एससीसी 537, तथा अन्य सुसंगत न्यायिक निर्णयों में भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को कायम रखते हुए वहन क्षमता, पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना है;
और जबकि, भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय ने निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में शुल्क को विनियमित करने के लिए वैधानिक ढाँचे को निरूपित किया गया है। राज्य में निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं द्वारा ली जाने वाली शुल्क को विनियमित करना अनिवार्य है, ताकि शिक्षा की मुनाफाखोरी और व्यावसायीकरण को रोका जा सके, साथ ही निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके, ताकि छात्रों और अभिभावक के हितों की रक्षा की जा सके, यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसा शुल्क उचित, शोषणरहित और पारदर्शी हो,
साथ ही निजी शैक्षणिक संस्थाओं की वित्तीय स्थिरता और स्वायत्तता भी सुनिश्चित की जा सके, यह प्रस्तावना माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा नामांकन एवं शुल्क के विनियमन के संदर्भ में अधिकथित प्रमुख सिद्धांतों को इस तरह प्रतिबिंबित करती है, जिससे छात्रों और शैक्षणिक संस्थाओं के अधिकारों में संतुलन बना रहे; अतः अब भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप से यह अधिनियमित होः (क) इस अधिनियम को "बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) अधिनियम, 2026" कहा जायेगा।
(ख) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (ग) यह उस तिथि से प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न होः- (क) से अभिप्रेत है कि एक व्यापक शैक्षणिक क्षेत्र जिसके अन्तर्गत महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षा प्रदान की जाती है तथा शोध कार्य किया जाता है। उदाहरणस्वरुप- चिकित्सा, अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, कृषि, पशु चिकित्सा विज्ञान आदि;
(ख) से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय सहित कोई व्यावसायिक शैक्षणिक महाविद्यालय या संस्थान, जो किसी ट्रस्ट (न्यास), सोसाइटी या संघ या व्यक्ति या संगठन द्वारा संचालित या प्रबंधित हो तथा जो राज्य सरकार या केन्द्र सरकार से वित्तीय सहायता या सहायता अनुदान प्राप्त करता हो;
(ग) से अभिप्रेत है केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा स्थापित केन्द्रीय या राज्य स्तरीय प्राधिकार जो व्यावसायिक शिक्षण के लिए मानदंड एवं शर्तों का निर्धारण करे ताकि व्यावसायिक शिक्षण के मापदंड को निर्धारित किया जा सके;
(घ) से अभिप्रेत है वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राशि चाहे उसे किसी नाम से पुकारा जाए, नगद अथवा अन्य रूप में दी जाने वाली या प्राप्त की जाने वाली अथवा वसूली जाने वाली राशि जो इस नियम के द्वारा निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त हो;
(ङ)
से अभिप्रेत है राज्य/केन्द्र सरकार द्वारा संचालित एवं प्रबंधित व्यावसायिक शैक्षणिक महाविद्यालय या संस्थान;
(च) से अभिप्रेत है स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार। (छ) से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित; (ज) से अभिप्रेत है वैसे व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान जो केन्द्र/राज्य सरकार या किसी सार्वजनिक निकाय द्वारा संचालित और प्रबंधित नहीं हो। इसमें सहायता प्राप्त एवं गैर-सहायता प्राप्त दोनों प्रकार के महाविद्यालय या संस्था शामिल है जैसा कि इस अधिनियम में परिभाषित है;
3 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026(झ) से अभिपे्रत है समिति को व्यावसायिक संस्थान द्वारा गैर वापसी योग्य अदा की जाने वाली निर्धारित शुल्क जो संस्था द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करने के समय प्रक्रियात्मक शुल्क के रूप में अदा की जाए;
(ञ) से अभिप्रेत है व्यावसायिक अध्ययन का पाठ्यक्रम जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए;
(ट) से अभिप्रेत है सक्षम वैधानिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित या विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय अथवा संस्थान जो किसी अन्य नाम से पुकारा जाय, व्यावसायिक शिक्षा प्रदान अथवा संचालित करती हो तथा डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट चाहे जिस नाम से हो किसी कोर्स में प्रदान करती हो;
(ठ)
से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के धारा-4 के तहत् गठित समिति;
(ड) से अभिप्रेत है ऐसा सरकारी विभाग जिसके अन्तर्गत संबंधित शैक्षणिक विषय या पाठ्यक्रम का प्रशासनिक रूप से संचालन किया जाता है;
(ढ) से अभिप्रेत है बिहार सरकार; (ण) से अभिप्रेत है एक निकाय/संगठन/परिषद जो केन्द्र सरकार/राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित हो तथा व्यावसायिक शिक्षा के लिए मानक निर्धारित करे अथवा जो किसी शैक्षणिक प्रक्षेत्र के पाठ्यक्रम को विनियमित करे। उदाहरण स्वरूप-एन०एम०सी०, ए०आई० सी०टी०ई॰ आदि;
(त) से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय सहित कोई व्यावसायिक शैक्षणिक महाविद्यालय या संस्थान जो किसी ट्रस्ट, सोसाइटी या संघ या व्यक्ति या संगठन द्वारा संचालित या प्रबंधित हो तथा जिसे राज्य सरकार या केन्द्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता या सहायता अनुदान प्राप्त नहीं होता हो;
(थ) से अभिप्रेत है राज्य विधानमंडल या संघ द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन स्थापित विश्वविद्यालय;
(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी न्यायालय या प्राधिकार के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में या किसी करार में किसी बात के होते हुए भी. गैर-सहायता प्राप्त व्यावसायिक शैक्षणिक महाविद्यालयों या संस्थाओं में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सभी प्रवेश इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किये जाऐंगे।
(2) इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में किया गया कोई भी प्रवेश अवैध होगा। (1) राज्य सरकार, निजी व्यावसायिक संस्थाओं में नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारित करने के प्रयोजनार्थ एक नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति का गठन करेगी, जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे-
| (क) | एक प्रख्यात शिक्षाविद् या एक सेवानिवृत्त सरकारी पदाधिकारी जिन्होंने राज्य सरकार के अधीन कम-से-कम प्रधान सचिव के पद से अन्यून स्तर पर सेवा दी हो | अध्यक्ष |
| (ख) | चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त व्यक्ति | सदस्य |
| (ग) | व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त व्यक्ति (चिकित्सा शिक्षा को छोड़कर) | सदस्य |
| (घ) | अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार | पदेन सदस्य |
| (ड़) | अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार | पदेन सदस्य |
| (च) | अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग, बिहार सरकार | पदेन सदस्य |
| (छ) | एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, जिसे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नामित किया जाएगा | सदस्य |
| (ज) | स्वास्थ्य विभाग द्वारा नामित/सहयोजित एक प्रतिष्ठित स्वतंत्र व्यक्ति | सदस्य |
| (झ) | स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव से अन्यून पदाधिकारी | सदस्य सचिव |
(2) अध्यक्ष एवं सदस्यों (पदेन सदस्य को छोड़कर) की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा गठित चयन समिति की अनुशंसा पर सरकार द्वारा की जायेगी।4 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 (3) अध्यक्ष एवं सदस्यों (पदेन सदस्य को छोड़कर) का कार्यकाल प्रारम्भ में तीन वर्ष का होगा, जिसे दो वर्ष तक अथवा 75 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक, जो भी पहले हो, विस्तारित किया जा सकेगा। समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों का मानदेय एवं अन्य शर्तें इस अधिनियम के धारा-11 के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा निर्धारित होंगे।
(4) समिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल किसी रिक्ति या समिति के गठन में किसी दोष के कारण अमान्य नहीं माना जाएगा।
(5) सहायता प्राप्त या गैर सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थाओं से संबद्ध व्यक्ति सदस्य के पात्र नहीं होगें।
(6) नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति की बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष करेंगे और समिति विनियमों द्वारा अपनी प्रक्रिया स्वयं अपना सकती है, जैसा वह उचित समझे।
(7) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी पूर्व से तदर्थ आधार पर गठित एवं कार्यरत नामांकन पर्यवेक्षण समिति एवं शिक्षण शुल्क निर्धारण समिति तब तक कार्य करती रहेगी जब तक की इस अधिनियम के अधीन नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति का गठन नहीं हो जाता। (1) समिति यह निगरानी करेगी कि निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थाएँ समुचित प्राधिकार द्वारा निर्धारित मानदण्डों एवं प्रक्रियाओं का पालन कर रही हैं।
(2) वर्त्तमान में लागू किसी अन्य कानून या न्यायालय या प्राधिकार के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश या किसी करार में निहित किसी बात के होते हुए भी नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति निजी व्यावसायिक शैक्षणिक महाविद्यालय/संस्थाओं में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रों के प्रवेश के लिए शुल्क संरचना निर्धारित करेगी। विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और विभिन्न व्यावसायिक शैक्षणिक महाविद्यालयों या संस्थाओं में छात्रों के प्रवेश के लिए अलग-अलग शुल्क संरचना निर्धारित की जा सकेगी।
(3) नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त होंगी-
(क) किसी भी निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान को संबंधित महाविद्यालय या संस्थान के लिए सत्र प्रारंभ होने के 3 माह पूर्व या जैसा समिति द्वारा निदेशित किया जाय, सभी सुसंगत दस्तावेजों और लेखा पुस्तकों तथा समिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया शुल्क जमा कर प्रस्तावित शुल्क संरचना उपस्थापित करने की अपेक्षा कर सकती है।
(ख) सत्यापित कर सकती हैं कि क्या ऐसे महाविद्यालय या संस्था द्वारा प्रस्तावित शुल्क संरचना उचित है।
(ग) ऐसे महाविद्यालय या संस्था के लिए शुल्क संरचना को अनुमोदित करना या अन्य शुल्क संरचना निर्धारित करना, जो ऐसे महाविद्यालय या संस्था द्वारा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रों के प्रवेश के लिए ली जाएगी।
(4) नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित शुल्क संरचना को संबंधित विभाग को संसूचित किया जाएगा, जिसके बाद संबंधित विभाग निजी व्यावसायिक शिक्षा/संस्था के अधीन चल रहे पाठ्यक्रमों के लिए शुल्क संरचना को अधिसूचित करेगा।
(5) ऐसी अधिसूचना के बाद, शुल्क संरचना निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थाओं पर तीन वर्ष की अवधि के लिए या ऐसी अनुमति देने के लिए सक्षम राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय वैधानिक निकाय द्वारा अनुमत अवधि के लिए बाध्यकारी होगी। इस प्रकार निर्धारित शुल्क उस शैक्षणिक वर्ष में किसी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था में प्रवेश लेने वाले छात्र पर लागू होगा और उस संस्था में उसके व्यावसायिक पाठ्यक्रम के पूरा होने तक संशोधित नहीं किया जाएगा।
(6) निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था को उप धारा 5(4) के अधीन संबंधित विभाग द्वारा अधिसूचित शुल्क के अलावा कोई अन्य शुल्क लेने या एकत्र करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और एक शैक्षणिक वर्ष में एक छात्र से एक बार में एक सत्र से अधिक शुल्क एकत्र करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। (1) नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति, निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखते हुए, किसी निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था द्वारा व्यावसायिक पाठ्यक्रम में छात्रों के प्रवेश के लिए ली जाने वाली शुल्क का निर्धारण निम्नवत् करेगी, अर्थातः- (क) व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था का स्थान; (ख) व्यावसायिक पाठ्यक्रम की प्र—ति; (ग) उपलब्ध बुनियादी ढाँचा; (घ) वेतन, प्रशासन और रख-रखाव पर व्यय; (ङ) महाविद्यालय या संस्था की वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक उचित अधिशेष; (च) ऐसे अन्य कारक, जो समिति विनिश्चित करे; और5 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 (छ) शुल्क निर्धारित करते समय संस्था में संचालित पाठ्यक्रमों की संख्या और प्रकार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि शुल्क का भार विभिन्न पाठ्यक्रमों के बीच समान और तर्कसंगत रूप से वितरित किया जा सके।
(2) समिति द्वारा निर्धारित की जाने वाली शुल्क में निम्नलिखित शामिल होंगे-
(क) शिक्षण शुल्क; (ख) पुस्तकालय शुल्क; (ग) प्रयोगशाला शुल्क; (घ) कम्प्यूटर शुल्क; (ङ) कॉशन राशि (एक बार); (च) परीक्षा शुल्क; (छ) छात्रावास शुल्क; (ज) ऐसी अन्य शुल्क जो समिति विनिश्चित करे या राज्य सरकार द्वारा निर्देशित हो या वैधानिक प्राधिकार द्वारा अनुशंसित हो।
7.
।-राज्य सरकार नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति के अंतर्गत आने वाले व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अधिसूचित करेगी। राज्य सरकार अधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से आवश्यकतानुसार विभिन्न शैक्षणिक विषयों के किसी व्यावसायिक पाठ्यक्रम को नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति के दायरे में जोड़ने या हटाने का अधिकार रखती है। किसी निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था की ओर से या ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो ऐसे संस्था के प्रबंधन का प्रभारी या उत्तरदायी है, किसी छात्र से या उसके संबंध में ऐसे संस्था में किसी व्यावसायिक पाठ्यक्रम में उसके प्रवेश या उसमें बने रहने के लिए कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा या वसूल नहीं किया जाएगा। जहाँ संबंधित विभाग, किसी शिकायत की प्राप्ति पर या अन्यथा, उचित जाँच के बाद संतुष्ट हो जाता है कि निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था ने धारा 5(4) के अधीन संबंधित विभाग द्वारा अधिसूचित नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक कैपिटेशन शुल्क एकत्र किया है, तो वहः-
(क) संबंधित संस्था को समिति निर्धारित शुल्क से अधिक एकत्रित शुल्क वापस करने या इस प्रकार एकत्रित की गई कैपिटेशन शुल्क वापस करने का निर्देश दे सकेगा;
(ख) किसी विशेष पाठ्यक्रम में सीटों में कटौती/आवंटन न करने की सिफारिश सांविधिक प्राधिकार से कर सकेगा;
(ग) व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था के पक्ष में दिए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी)/सहमति/ वचन-पत्र/ अनिवार्यता प्रमाण-पत्र को सांविधिक प्राधिकार से वापस ले सकेगा;
(घ) ऐसे संस्था के विरूद्ध कोई अन्य उचित कार्रवाई करने के लिए सांविधिक प्राधिकार और/या संबंधित विश्वविद्यालय को सिफारिश कर सकेगा।
परन्तु संबंधित विभाग द्वारा निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किया जाएगा;
समिति के कोई सदस्य, पदाधिकारी या कर्मचारी को इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की गई तात्पर्यित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जायेगी। राज्य सरकार अधिकारिक गजट में अधिसूचना के द्वारा इस अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति के लिए नियम बना सकेगी। राज्य सरकार, समय-समय पर इस अधिनियम के उपबंधों, नियमों या उसके अधीन बनाए गए आदेशों के कार्यान्वयन के प्रयोजनार्थ, किसी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था को या नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, जैसा वह इस संबंध में ठीक समझे और व्यावसायिक शैक्षणिक संस्था या नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति ऐसे निदेश से आबद्ध होगी। इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य राज्य विधि में
अंतर्विष्ट किसी असंगत बात होते हुए भी, प्रभावी होंगे।
यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, सरकारी राजपत्र में आदेश प्रकाशित कर ऐसे उपबंध कर सकेंगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो और जो उसे कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो।
राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति के गठन के पश्चात स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित एवं इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पूर्व कार्यरत नामांकन पर्यवेक्षण समिति एवं शिक्षण शुल्क निर्धारण समिति अस्तित्व में नहीं रहेंगी। ऐसी समाप्ति के होते हुए भी ऐसी6 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 26 फरवर(cid:547) 2026 किसी शुल्क निर्धारण प्राधिकार/निकाय द्वारा लिया गया निर्णय इस अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई/लिया गया निर्णय समझा जायेगा। ख्याति सिंह, प्रभारी सचिव। राज्य में निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों के छात्र/छात्राओं और अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों की वित्तीय स्थिरता और स्वायत्तता सुनिश्चित करने केे उद्देश्य से नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति गठित करने की आवश्यकता है। यही इस विधेयक का उद्देश्य है तथा इस प्रयोजनार्थ को अधिनियमित करना ही इस विधेयक का अभिष्ट है। A iVuk] fnukad&26-02-2026
izHkkjh lfpo] fcgkj fo/kku lHkkA ————
अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,