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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 20 May 2026

Published 20 May 2026

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2026-05-20.20
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट

(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 30 1948 (श0) सं(cid:201)या 20 पटना, बुधवार,———————— 20 2026(ई0) i`"B भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu,बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 02-14 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। ---

भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 15-15 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण। ---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक, उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक।

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भाग-9—वि(cid:6980)ापन

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भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 16-16 पूरक

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पूरक-क

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(cid:464)बहार गजट, 20 2026 2

भाग-1

िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन,बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं। ————

सं० सं० 11/न०वि०/विविध-14/2026 न०वि० एवं आ०वि०--पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड, पटना अंतर्गत डेवलपमेंट ऑफ मंदिरी नाला परियोजना (इनकम टैक्स चौराहा से अशोक राजपथ), कुल लम्बाई 1289 मीटर, का नामकरण (मंदिरी नाला पथ) किया जाता है। 2. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं॰ 1/416062/Estb/54/2025-SEC_2-ELECTION_DEPT--श्री राहुल कुमार, अवर निर्वाचन पदाधिकारी, जहानाबाद सदर (HRMS Employee ID-30061439) का प्रथम संतान हेतु वित्त विभाग के पत्रांक-9889 दिनांक 01.12.2015 में निहित प्रावधानों के अधीन एवं वित्त (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार, पटना के ज्ञापांक- PCFC/ELECTION/BELS/2022/0133 310 दिनांक 17.02.2026 से प्राप्त आदेयता के आलोक में दिनांक 02.12. 2025 से 16.12.2025 तक कुल 15 (पन्द्रह) दिनों के पितृत्व अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

2. इस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। (s)--श्री मदन प्रसाद श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में संवेदक श्री मनोज कुमार, नव निर्माण बिल्डर्स, पटना से रू॰ 50,000/- (पचास हजार) रिश्वत लेने के आरोप में दिनांक-04.06.2007 को गिरफ्तार होने तथा श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-73/07 के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-7957(एस) सहपठित ज्ञापांक-7958(एस) दिनांक-04.07.2007 के द्वारा श्री श्रीवास्तव को दिनांक-04.06.2007 से अगले आदेश तक निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7536(एस) अनु॰ दिनांक-05.06.2008 द्वारा अनुशासनिक कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त संचालित अनुशासनिक कार्यवाही के तहत्‌ आरोप निम्नवत्‌ गठित किया गयाः- ''राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के कार्यपालक अभियंता के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-102 के 13वें 27वें कि॰मी॰ तक पथ के निर्माण कार्य से संबंधित संवेदक श्री मनोज कुमार, नव निर्माण विल्डर्स, पटना से आपके द्वारा रिश्वत की मांग की गयी। संवेदक श्री मनोज कुमार के लिखित आवेदन पर मंत्रीमंडल निगरानी विभाग के धावा दल द्वारा दिनांक-04.06.2007 को आपके पटना स्थित सरकारी आवास संख्या-43/84, न्यू पुनाईचक, पटना में आपको श्री मनोज कुमार, संवेदक से रू॰ 50,000/- (पचास हजार रूपये) रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।''3 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 2. विभागीय जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-719 दिनांक-30.08.2012 द्वारा उक्त संचालित अनुशासनिक कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त सक्षम प्राधिकार के आदेश से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(1) में निहित प्रावधान के तहत्‌ पुर्नजाँच हेतु विभागीय पत्रांक-4066(एस) अनु॰ दिनांक-22.05.2013 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को भेजी गयी।

3. पथ निर्माण विभाग के संकल्प ज्ञापांक-7536(एस) दिनांक-05.06.2008 द्वारा श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध संचालित अनुशासनिक कार्यवाही में आय से अधिक सम्पत्ति मामले में दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-89/07 से संबंधित पूरक आरोप पत्र को विभागीय ज्ञापांक-2655(एस) अनु॰ दिनांक-28.03.2014 द्वारा सन्निहित किया गया, जिसमें आरोप निम्नवत्‌ हैः- ''आपके विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-73/07 के अनुसंधान के क्रम में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा पाया गया कि आपके द्वारा आय से ज्ञात स्त्रोतों से काफी अधिक परिसम्पत्तियाँ अर्जित की गयी है। इस संबंध में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या-89/07 दिनांक-31.07.2007 धारा-13(2) सहपठित धारा-13(1) ई भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 अंतर्गत दर्ज किया गया है।''

4. इसी बीच अनुशासनिक कार्यवाही सम्पन्न होने के पूर्व ही श्री मदन प्रसाद श्रीवास्तव दिनांक-30.04.2015 को सेवानिवृत हो जाने की स्थिति में इनके विरूद्ध संचालित अनुशासनिक कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4361(एस) दिनांक-19.05.2015 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत्‌ सम्परिवर्तित किया गया।

5. प्रधान सचिव-सह-जाँच आयुक्त, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-156 दिनांक-10.12.

2024 द्वारा संचालित अनुशासनिक कार्यवाही से संबंधित जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के तहत्‌ इनके विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री श्रीवास्तव से विभागीय पत्रांक-2309(एस) अनु॰ दिनांक-13.03.2025 द्वारा बचाव का लिखित अभ्यावेदन/निवेदन की मांग की गयी।

6. श्री मदन प्रसाद श्रीवास्तव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-29.03.2025 द्वारा अभ्यावेदन/निवेदन समर्पित करने हेतु 04 (चार) सप्ताह समय की मांग की गयी। तदोपरांत उनके अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-29.03.2025 के विभागीय समीक्षोपरांत अभ्यावेदन/निवेदन समर्पित करने हेतु विभागीय पत्रांक-3208(एस) दिनांक-21. 04.2025 द्वारा श्री श्रीवास्तव को 10 (दस) दिनाें का समय दिया गया। श्री श्रीवास्तव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-29.04.2025 एवं पत्रांक-शून्य दिनांक-20.05.2025 द्वारा विभाग को अभ्यावेदन/निवेदन समर्पित किया गया।

7. श्री श्रीवास्तव द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उनके द्वारा कहा गया है कि उनके मामले में Bihar CCA Rules, 2005 के नियम-17(3), 17(4), 17(23) एवं 18(1) का अनुपालन नहीं किया गया है। अनुशासनिक कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष अपने पूरक बचाव-बयान में उक्त सभी तथ्यों का ही उल्लेख किया गया था, जिसकी समीक्षोपरांत श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित पाए जाने का मंतव्य गठित किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री श्रीवास्तव द्वारा अपने अभ्यावेदन/निवेदन मेें बचाव में कोई नया तथ्य का समावेश नहीं किया गया है। इसी बीच श्री श्रीवास्तव द्वारा अभ्यावेदन/निवेदन के रूप में एक अन्य अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-20.05.2025 समर्पित किया गया। उक्त अभ्यावेदन में श्री श्रीवास्तव द्वारा उन पर प्रमाणित आरोपों के बिन्दु पर कोई अन्य तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि आरोप से अलग हटकर तत्कालीन समय में परियोजनाओं के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त किए जाने संबंधी विभागीय आदेश के आलोक में संवेदक को Target दिये जाने, Target को पूरा नहीं किए जाने की स्थिति में संवेदक के विरूद्ध दंड एवं पेनाल्टी आदि अधिरोपित किए जाने का जिक्र किया गया। आर्थिक दंड से बचने हेतु परिवादी मनोज कुमार द्वारा फेबरीकेटेड शिकायत पत्र निगरानी में दाखिल किये जाने आदि का उल्लेख करते हुए Trap Memorandum पर श्री श्रीवास्तव द्वारा सवाल खड़ा किया गया है। उक्त अभ्यावेदन मेें श्री श्रीवास्तव द्वारा ऐसा कोई विचारणीय तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे उनके विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित नहीं पाये जाने में सहायक हो।

8. उपर्युक्त के आलोक में श्री मदन प्रसाद श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन/निवेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपो के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत स्थायी रूप से पेंशन शून्य किये जाने संबंधी दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त किया गया। 09. अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-9008(एस) अनु॰ दिनांक-24.11.2025 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। स्मारोपरांत बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-5221 दिनांक-30.03.2026 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी।

अतएव उपर्युक्त के आलोक में आरोपी श्री मदन प्रसाद श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-30.04.2015) के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन/निवेदन स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने तथा उनके विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित पाये जाने की स्थिति में बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता हैः-(cid:464)बहार गजट, 20 2026 4 (i) स्थायी रूप से पेंशन शून्य। (ii) श्री श्रीवास्तव के निलंबन अवधि (दिनांक-04.06.2007 से 30.04.2015) का विनियमन नियमानुसार अलग से की जायेगी।

10. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। -3048(s)--श्री राजेश्वर कुमार दास, तत्कालीन कनीय अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पटना के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना के पदस्थापन काल में श्री मोकेन्द्र कुमार की भतीजी दीक्षा आर्या से मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने के नाम पर रुपये 28,30,000/- की धोखाघड़ी किये जाने के आरोप के लिए श्री दास के विरूद्ध दर्ज रूपसपुर थाना कांड संख्या-299/2022, दिनांक 29.05.2022 एवं अनुसंधानोपरांत माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दायर किये जाने के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के परिपत्र संख्या-8334 दिनांक 15.09.2020 की कंडिका-5 (i) में अंकित निदेशों के आलोक में श्री दास द्वारा इसकी सूचना विभाग को उपलब्ध नहीं कराये जाने के लिए श्री दास के विरूद्ध विभागीय पत्रांक-7163 (एस) दिनांक 12.08.2025 द्वारा आरोप पत्र गठित कर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त आरोप पत्र के तहत गठित आरोप निम्नवत है :-

(i) श्री दास के विरूद्ध श्री मोकेन्द्र कुमार, पिता-स्व॰ दल्लू सिंह यादव, स्थायी पता-ग्राम मीरगंज, पो॰-नोआवॉ, थाना-शकुराबाद, जिला-जहानाबाद, पिन-804429, वर्त्तमान पता-कृष्णा सोनफूल अपार्टमेन्ट, फ्लैट नं॰-204, नॉर्थ ब्लॉक-ए, थाना-राजीवनगर, जिला-पटना द्वारा उनकी भतीजी दीक्षा आर्या को मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने के नाम पर धोखाधड़ी का लगाये गये आरोप के लिए श्री दास, तदेन कनीय अभियंता के विरूद्ध रूपसपुर थाना कांड संख्या-299/2022 दर्ज है, परन्तु श्री दास के द्वारा उक्त दर्ज थाना कांड एवं माननीय अपर मुख्य न्यायाधीश प्रथम दानापुर के न्यायालय में दाखिल अंतिम रिपोर्ट/आरोप पत्र की सूचना जान-बूझकर विभाग से छुपाया गया और इसकी सूचना नहींं दी गयी जो सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र संख्या-8334 दिनांक 15.09.2020 के कंडिका-5 (i) के अनुसार कदाचार है।

2. श्री दास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में मुख्य रूप से इस तथ्य को अंकित किया है कि उनके विरूद्ध दर्ज थाना कांड एवं माननीय न्यायालय में दाखिल आरोप पत्र की जानकारी उन्हें नहीं थी। फलतः इसकी सूचना विभाग को नहीं दे सके। इस संदर्भ में श्री दास द्वारा निम्नलिखित तथ्य अंकित किया गया है :-

(i) श्री दास ने अपने स्पष्टीकरण उत्तर में प्रतिवेदित किया है कि इस घटनाक्रम में थाने पर बुलाए जाने के आलोक में दिसम्बर-2022 में वे अपने साले श्री राहुल कुमार जिनके साथ श्री मोकेन्द्र कुमार का पैसे के लेन-देन का विवाद है, के साथ रूपसपुर थाना गये थे। उन्होंने स्वीकार किया है कि थाना प्रभारी के द्वारा उन दोनों (यथा-श्री मोकेन्द्र कुमार एवं श्री राहुल कुमार) के साथ उनसे भी पूछ-ताछ की गयी तथा हम तीनों को आपसी सहमति से मामले को सुलझाने का सुझाव थाना प्रभारी द्वारा दिया गया। इसके अतिरिक्त श्री दास द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि पूछ-ताछ के क्रम में थाना प्रभारी के द्वारा उनके विरूद्ध F.I.R दर्ज होने की बात नहीं बतायी गयी, क्योंकि संभवतः तत्समय तक उनके विरूद्ध FIR दर्ज नहीं किया गया था।

(ii) श्री दास द्वारा अपने बचाव में यह भी कहा गया है कि श्री मोकेन्द कुमार से पैसे के लेन-देन का विवाद वस्तुतः उनकेे साले श्री राहुल कुमार से था।

3. श्री दास का उक्त वक्तव्य कि उन्हें आलोच्य थाना कांड/दायर आरोप पत्र की सूचना नहीं दी गयी थी, पूरी तरह भ्रामक एवं गलत है। विदित हो कि दिनांक 29.05.2022 को ही उनके विरूद्ध रूपसपुर थाना कांड संख्या-299/2022 दर्ज किया गया था। उक्त थाना कांड में माननीय न्यायालय में दायर आरोप पत्र में धारा-41 (ए) की उप धारा-(7) के तहत नोटिस दिया गया तथा इसके पश्चात वे दिनांक 26.12.2022 को थाना पर उपस्थित होकर नोटिस में दिए गए निर्देशों का पालन करने का वचन दिए तथा पावती पर हस्ताक्षर बनाए। ध्यातव्य हो कि उक्त थाना कांड एवं माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दायर किये जाने की पुष्टि अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के कार्यालय पत्रांक-442 दिनांक 24.01.2025 से भी होती है। यह भी उल्लेखनीय है कि श्री दास द्वारा स्वीकार किया गया है कि दिसम्बर-2022 में रूपसपुर थाने पर बुलाये जाने के उपरांत उनसे आलोच्य मामले के संंबंध में पूछ-ताछ की गयी थी।

श्री दास का यह कथन कि श्री मोकेन्द्र कुमार से पैसे का लेन-देन उनके साले श्री राहुल कुमार से था, यह कथन भी सही प्रतीत नहीं होता है। इस संबंध में आलोच्य मामले में श्री दास के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने संबंधी थानाध्यक्ष, रूपसपुर थाना को संबोधित श्री मोकेन्द्र कुमार के पत्र दिनांक 25.05.2022 से स्पष्ट है कि हड़पे गए राशि रुपये5 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 28,30,000/- को लौटाने के क्रम में श्री दास द्वारा रुपये 7,00,000/- का चेक श्री मोकेन्द्र कुमार को दिया गया था, परन्तु Material Alternation in Cheque के कारण उक्त चेक Clear नहीं हो सका। इसको लेकर परिवादी श्री मोकेन्द्र कुमार द्वारा श्री दास के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया। तदनुसार दिनांक 29.05.2022 को श्री दास एवं उनके साले श्री राहुल कुमार के विरूद्ध रूपसपुर थाना में FIR दर्ज किया गया।

4. इस प्रकार, श्री दास द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में बिना साक्ष्य आधारित तर्क/तथ्य प्रस्तुत करना कि आलोच्य मामले में उनका कोई लेना-देना नहीं था तथा उनके विरूद्ध दर्ज थाना कांड एवं माननीय न्यायालय में दाखिल आरोप पत्र की सूचना उन्हें पूर्व में नहीं थी, फलतः विभाग को सूचित नहीं कर पाए, पूरी तरह निराधार एवं विभाग को गुमराह किए जाने वाला वक्तव्य है। श्री दास उक्त धोखाधड़ी के मामले में अपने साले श्री राहुल कुमार के साथ संलिप्त थे एवं आलोच्य घटना की उन्हें पूर्णतः जानकारी थी, जिसकी पुष्टि उक्त कंडिका-3 में अंकित तथ्यों से होती है।

5. श्री दास को उनके विरूद्ध दर्ज थाना कांड/माननीय न्यायालय में दर्ज आरोप पत्र की सूचना विभाग को अपने स्तर से ही ससमय उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य था, जबकि इनके द्वारा उक्त घटना को छुपाया गया। इस प्रकार श्री दास का उक्त कृत्य सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8334 दिनांक 15.09.2020 में प्रावधानित नियम के साथ-साथ सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के निय-3 (1)(i) (ii) एवं (iii) का भी उल्लंघन है।

अतएव उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राजेश्वर कुमार दास, तत्कालीन कनीय अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, पटना के स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 (v) के तहत निम्न दंड अधिरोपित किया जाता है :-

6. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। (s) दिनांक-04.05.2026 को पूर्वाहन करीब 1.15 बजे भागलपुर से उत्तर बिहार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल विक्रमशीला सेतु के गिर जाने के कारणों की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त उक्त पुल के रख-रखाव एवं अनुश्रवण से संबंधित अभियंताआें को चिन्हित कर कार्रवाई करने का निदेश प्राप्त हुआ।

2. उक्त पुल के रख-रखाव एवं अनुश्रवण की जिम्मेवारी राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल भागलपुर की थी, जिसके कार्यपालक अभियंता श्री साकेत कुमार रौशन हैं। प्रथम द्रष्टया श्री रौशन के कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता परिलक्षित होता है। अतः इस आलोक में श्री साकेत कुमार रौशन, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) में निहित प्रावधान के तहत तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री रौशन का मुख्यालय अभियंता प्रमुख (मु0) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।

4. श्री रौशन को निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्त्तों के तहत अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। सं॰ 01/पद सृजन-01/2021 (पार्ट-2) (s)--विभागीय चयन समिति की अनुशंसा के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-646 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-647 (एस) दिनांक 30.01.2026 द्वारा श्री आलोक कुमार, सेवानिवृत्त अपर सचिव को भू-अर्जन विशेषज्ञ (भा॰प्र॰से॰) के पर नियोजित किया गया था। श्री कुमार के द्वारा दिनांक 08.04.2026 को अपराह्‌न में अपने पद से त्याग-पत्र देने के फलस्वरूप उनके स्थान पर विचारण सूची में अंकित मो॰ इबरार आलम, सेवानिवृत्त अपर सचिव को भू-अर्जन विशेषज्ञ (भा॰प्र॰से॰) के पद पर 02 (दो) वर्ष या इनकी उम्र 65 वर्ष पूरी होने में जो पहले हो तक के लिए संविदा के आधार पर नियोजित करते हुए तिरहुत (मुजफ्फरपुर) एवं सारण (छपरा) प्रमंडल आवंटित किया जाता है।6 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 2. भू-अर्जन विशेषज्ञ को सेवा निवृत्ति के समय अपुनरीक्षित वेतनमान्‌ में प्राप्त मूल वेतन एवं ग्रेड-पे तथा पुनरीक्षित वेतनमान्‌ में प्राप्त मूल वेतन तथा उस पर तत्समय देय महंगाई भत्ता का योगफल में से मूल पेंशन (Commutation सहित) एवं उस पर सेवा निवृत्ति की तिथि को देय मंहगाई राहत का योगफल घटाने पर जो राशि आयेगा, वही राशि मानदेय/संविदा वेतन के रूप में अनुमान्य होगा, परंतु पेंशन पर महंगाई राहत मिलता रहेगा।

3. उक्त पदाधिकारियों को निगरानी स्वच्छता अनुकूल रहने की प्रत्याशा में नियोजित किया जा रहा है। निगरानी स्वच्छता प्रतिकूल रहने पर अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा।

4. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा।

5. उपर्युक्त नियोजित पदाधिकारी संबंधित जिले/प्रमंडल में सप्ताह में न्यूनतम 04 (चार) दिन एवं राज्य मुख्यालय में न्यूनतम 01 (एक) दिन प्रति सप्ताह रहकर कार्य करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से सुमित वत्स, अवर सचिव (प्र॰को॰)। (s)--श्री उमेश नन्दन सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ओन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत के उक्त पदस्थापन अवधि में OPRMC (Output & Performance Based Road Assets Maintenance Contract) के अंतर्गत पैकेज संख्या-58 में आरा-सासाराम राज्य उच्च पथ के दीर्घकालीन पथ संधारण में पायी गयी गंभीर अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-9685 (एस), दिनांक 20.12. 2018 के द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9953 (एस) दिनांक 31.12.2018 के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही संचालन के दौरान श्री सिंह दिनांक 31.03.2020 को सेवानिवृत हो गये, फलतः विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5662 (एस), दिनांक 29.09.2020 के द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया तथा विभागीय अधिसूचना संख्या-5663 (एस) दिनांक 29.09.2020 के द्वारा उनके निलंबन को सेवानिवृति की तिथि 31.03.2020 के अपराह्‌न के प्रभाव से समाप्त किया गया। श्री सिह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप के बिन्दु निम्नलिखित है :-

(i) पथ के कि0मी0 89 से कि0मी0 57 के विडियोग्राफी रिपोर्ट में लगातार अनेकों स्थान पर Pot holes एवं Patches पाये गये, जबकि PM कार्य माह अप्रैल एवं मई 2014 में कराया गया है, जिसकी Pot Patch मरम्मति भी कराया गया है, परंतु उसकी गुणवत्ता अत्यंत कमजोर प्रतीत होती है।

(ii) पथ के कि0मी0 74 एवं 75 में नोखा के निकट Riding Surface में सुधार की आवश्यकता बतायी गयी है एवं कि0मी0 78 में Patch work कराया जा रहा था, परंतु पथ पर Riding Surface Quality खराब एवं कई स्थलों पर प्रतिवेदित Pots में भी सुधार की आवश्यकता बतलायी गयी है। उक्त पथ का संधारण OPRMC पैकेज (वर्ष 2014 से फरवरी, 2019) के तहत कराया जा रहा है एवं OPRMC Contract की विहित शर्त्तों के अनुरूप पथ की Riding Quality 3500 mm तक रखने की है, परंतु इस पथ की Riding Quality भी पूर्णरूपेण असंतोषजनक पायी गयी जिसके कारण पथ के रख-रखाव की स्थिति अत्यंत ही दयनीय हो गयी।

(iii) OPRMC से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उसके साथ संलग्न Roughness Measurement Report एवं कतिपय फोटोग्राफ सहित करायी गयी विडियोग्राफी के आधार पर आलोच्य आरा-सासाराम पथ (कि0मी0 89 से 57) के Observed Report के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि पथांश के विभिन्न अंतराल पर छोटे-बड़े अनेको Pot holes/patches पाये गये हैं एवं Designation wise Officer's Inspection Report के अन्तर्गत OM मद के Non-compliances के विभिन्न बिन्दुओं को भी उद्धृत किया गया है, जो प्रथम द्रष्टया पथ के रख-रखाव में बरती गयी लापरवाही की पुष्टि प्रतीत होती है।

(iv) अंकनीय है कि दो माह पूर्व अर्थात सितम्बर, 2018 तक OM (Ordinary Maintainance) घटक के अंतर्गत संवेदक को भुगतान होते रहे है, जिससे यह परिलक्षित होता है कि पथ का बिना रख-रखाव सुनिश्चित कराये संवेदक को भुगतान किया जाता रहा, जो सरकारी राशि का दुरूपयोग एवं संवेदक के साथ मिलीभगत की पुष्टि करता है। इसके लिए श्री सिंह दोषी प्रतीत होते है।

(v) सहायक अभियंता का यह दायित्व है कि वे पथो का निरीक्षण माह में कम से कम दो बार अवश्य की जाय एवं तदोपरांत यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसका Rectification का कार्य responce time में ही संवेदक के माध्यम से सुनिश्चित कराया जाना अपेक्षित होता है, जिसकी आलोच्य मामले में7 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 पूर्ण रूप से उपेक्षा की गई। इस प्रकार श्री सिंह के द्वारा अपने पद पर रहते हुए वांछित कार्रवाई सुनिश्चित नहीं कर विहित पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती गई।

2. श्री सिंह के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1068 अनु॰ दिनांक 03.07.2024 से प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी के द्वारा उक्त सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-5588 (एस), दिनांक 14.11.2024 के द्वारा श्री सिंह से लिखित अभिकथन के रूप में अभ्यावेदन की मांग की गई। असमति का सृजित बिन्दु निम्नवत्‌ है :-

(i) के संबंध में संचालन पदाधिकारी की समेकित समीक्षा मे अन्तर्निहित मंतव्य के अनुसार इसे अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। आपने अपने बचाव-बयान में उल्लेख किया है कि पथ में SDBC का प्रावधान 25mm का है, जबकि उस पथ पर भारी वाहनों का दबाव है, जिसे Pots, Patches, Depression, Edge Damage स्वभाविक है। उन्होंने पथ के मजबूतीकरण हेतु विभाग को संज्ञान में लाया गया तथा इस हेतु पत्रांक-1221 अनु॰, दिनांक 28.11.2018 द्वारा प्राक्कलन तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति हेतु विभाग को समर्पित भी किया गया है।

आपके बचाव-बयान एवं संचालन पदाधिकारी के मतव्य को एक हद तक मान भी लिया जाय तो कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-01 के निरीक्षण प्रतिवेदन को संलग्न करते हुए नोडल पदाधिकारी, OPRMC ने जो अपना प्रतिवेदन समर्पित किया है उसमें स्पष्ट रूप से आलोच्य पथ के अलग-अलग पथांशों में पाये गये Pots, Patches एवं Edge Break को इंगित किया गया है।

इसके अलावा यह भी उल्लेखनीय है कि कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता पथ प्रमंडल संख्या-01 द्वारा उक्त पथ का निरीक्षण दिनांक 20.11.2018 को किया गया तथा एतद्‌्‌ संबंधी प्रतिवेदन उनके द्वारा दिनांक 22.11.2018 को समर्पित किया गया। पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन का पत्रांक-1221 (अनु॰) दिनांक 28.11.2018 द्वारा उक्त पथ के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण हेतु प्राक्कलन तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति हेतु अधीक्षण अभियंता, भोजपुर पथ अंचल, आरा को समर्पित किया गया। स्पष्ट है कि निरीक्षण के बादमामला उजागर होने के पश्चात्‌्‌ मामले को विभाग के संज्ञान में लाया गया। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि आप दिनांक जुलाई 2017 से ही इस प्रमंडल में पदस्थापित थे, किन्तु आपके द्वारा लापरवाही एवं उदासीनता बरतते हुए आलोच्य पथांश के सुधार के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जबकि आपने स्वंय इस बात का स्वीकार किया है कि SDBC का प्रावधान 25mm होने की वजह से आलोच्य पथ मे ंहमेशा Pots, Patches, Depression, Edge Damage आदि होते रहते है। Pot Patch कराया तो गया हैं, परन्तु इसकी गुणवत्ता काफी कमजोर होने के कारण पथ की स्थिति खराब हुई हैं। इस हद तक आरोप संख्या-01 प्रमाणित प्रतीत होता है। (ii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी की समेकित समीक्षा मे अन्तर्निहित मंतव्य के अनुसार इसे अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है, जबकि आपने अपने बचाव-बयान में उल्लेख किया है कि आलोच्य पथ के Video Graphy Report जो आपको एवं संचालन पदाधिकारी को भी साक्ष्य के रूप में समर्पित किया गया था, में आलोच्पथ-आरा-सासाराम पथ के सम्पूर्ण Stretch का Video Graphy ही Irregular Rough Surface/Patches से भरा हुआ हैं, जो कहीं-कहीं Continuous हैं। इसके अलावा पथ के videography में लगातार Pot Hole दिखायी दिये हैं। अगर बतौर सहायक अभियंता, आपके द्वारा उल्लेखित तथ्यो ंको एक हद तक मान लिया जाय तो भी आलोच्य पथ के Riding Surface में इस तरह का अनियमितता पाया जाना आपके पथ संधारण संबंधी दायित्वों के प्रति उदासीनता एवं उपेक्षात्मक प्रवृृति को परिलक्षित करता हैं। (iii) के संबंध में संचालन पदाधिकारी की समेकित समीक्षा मे अन्तर्निहित मंतव्य के अनुसार इसे अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि मासिक प्रगति प्रतिवेदन (Form-10) के अवलोकन से प्रतीत होता है कि संवेदक से लगातार कटौति की गयी हैं, लेकिन जैसा कि उपरोक्त कंडिका में भी अंकित किया गया है कि आलोच्य पथ के Videography report में संपूर्ण पथ ही Pot Hole/ Patches/Continuous Patches से भरा हुआ हैं, जिसके कारण इस पथ का Riding Surface Quality भी बेहद खराब हैं। पथ में पाया गया यह अनियमितता सहायक अभियंता का पथ का ससमय संधारण संबंधी उनके विहित कार्य दायित्वों के प्रति उदासीनता एवं उपेक्षात्मक प्रवृृति को परिलक्षित करता हैं। (iv) के संबंध में संचालन पदाधिकारी की समेकित समीक्षा मे अन्तर्निहित मंतव्य के अनुसार इसे अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है, जबकि इस संबंध में आपके द्वारा उल्लेख किया गया है(cid:464)बहार गजट, 20 2026 8 कि आपने संवेदक के विपत्र से प्रावधानित कटौतियाँ करते हुए किये गये कार्यो का भुगतान किया है, फिर भी आलोच्य पथ से संबंधित आरोप संख्या-01, 02 एवं 03 में पाये गये अत्यधिक Pot/Pot holes/Patches/Continuous Patches एवं खराब Riding Surface से स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा पथ के संधारण में अनियमितता बरती गयी हैं, जिससे यह प्रमाणित होता है कि आपके द्वारा पथ का बिना रख-रखाव सुनिश्चित कराये संवेदक का भुगतान किया जाता रहा हैं। बतौर सहायक अभियंता आपके द्वारा यह कहा जाना कि संवेदक के विपत्र से कटौति करते हुए भुगतान किया गया हैं, आप पर गठित आरोप की तीव्रता कम नही ंहो जायेगी, क्योंकि इनके पर्यवेक्षण के अभाव मे ंही पथ की स्थिति खराब होती गयी तथा साथ ही Response Time में आपके द्वारा त्रुटियों का निराकरण नहीं कराया गया। (v) के संबंध में संचालन पदाधिकारी की समेकित समीक्षा मे अन्तर्निहित मंतव्य के अनुसार इसे अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। इस आरोप के लिए संचालन पदाधिकारी के समेकित निष्कर्ष को अगर एक हद तक मान भी लिया जाय तो बतौर सहायक अभियंता आपके द्वारा आलोच्य पथ के Rectification कार्य कराये जाने के बावजूद भी पथ में अनेक जगहों पर Pot/Pot holes/Patches/Continuous Patches एवं खराब Riding Surface पाया जाना आरोप संख्या-05 को अप्रमाणित नहीं करता है। आलोच्य मामले में पथ के संधारण में आपके द्वारा उदासीनता बरती गयी हैं, जो आपके विहित पदीय दायित्व के अनुकूल नहीं हैं। संचालन पदाधिकारी का यह कथन कि पथांश के कुछ भाग में त्रुटियों का कारण तकनीकी हो सकता हैं-ग्राह्‌्‌य नहीं हैं, क्योंकि सहायक अभियंता स्वंय तकनीकी पदाधिकारी हैं। पथ की खराब स्थिति के लिए तकनीकी कारणों से वे भली-भांति अवगत होते हैं, जिसका Response Time में Rectification कराया जाना उनका परम दायित्व हैं। पथ की गुणवत्ता बनाये रखना सहायक अभियंता की जिम्मेवारी हैं, जिसमें आप स्पष्ट रूप से विफल रहे हैं।

3. श्री सिंह ने पत्र दिनांक 28.03.2025 के द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया। संचिका में उपलब्ध अभिलेखों से एवं श्री सिंह से प्राप्त अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-03 यथा-पथ में बडे़ पैमाने पर पाये गये Pot Holes/Defects के कारण उत्पन्न Hazards को समय-सीमा के अन्दर ठीक नहीं कराये जाने एवं आरोप संख्या-05 यथा- पथ का दीर्घकालीन संधारण में पाये गये त्रुटियों का न तो सुधार कराया गया और न ही संवेदक के विरूद्ध अन्य कोई प्रशासनिक कार्रवाई (अर्थात्‌ डिबार करने/कालीसूची में डालने आदि) ही कार्रवाई की गयी, के आरोप प्रमाणित पाये गये है।

4. स्पष्टतः पथ का संधारण उचित गुणवत्ता का नहीं था। पथ के संधारण हेतु कराये गये Patch work काफी कमजोर गुणवत्ता का पाया गया था। पथ के विभिन्न कि॰मी॰ पथांश में कई स्थानों पर गढ़़्‌ढ़े पाये गये तथा कई जगहों पर Service Level तक Cracks भी पाये गये है। आरोपी अभियंता द्वारा पथों के निरीक्षण में शिथिलता बरतने के कारण ही पथ की अवस्था जीर्ण-शीर्ण हुई। पथ का उचित रख-रखाव सुनिश्चित कराये बिना संवेदक को OM मद में भुगतान किया जाता रहा, जो सरकारी राशि का दुरूपयोग एवं श्री सिंह के अन्यथा मंशा को दर्शाता है। सहायक अभियंता द्वारा संवेदक पर उचित नियत्रंण सुनिश्चित नहीं किया गया, जिसके फलस्वरूप निरीक्षण के क्रम में पथ की गुणवत्ता कमजोर पायी गयी। स्पष्ट है कि सहायक अभियंता द्वारा दीर्घकालीन पथों के संधारण में गंभीर चूक बरती गयी है। ये संविदा शर्त्तो के अनुपालन कराने में विफल रहे है, जो उनके अक्षमता को दर्शाता है एवं इनके पदीय दायित्व के प्रतिकूल होने का परिचायक है। 5. विभागीय समीक्षा में श्री उमेश नन्दन सिंह के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर को इस हद तक स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है। अतएव इनके द्वारा समर्पित उत्तर को सक्षम प्राधिकार के द्वारा अस्वीकृत करते हुए उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत के दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णित दण्ड को संसूचित किये जाने से पूर्व नियमानुसार विभागीय पत्रांक-8093 (एस) दिनांक 22.09.2025 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-4900 दिनांक 09.03.2026 के द्वारा विभाग द्वारा निर्णित दण्ड पर सहमति व्यक्त की गयी। 6. उपर्युक्त के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री उमेश नन्दन सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपाें के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत निम्नलिखित दण्ड अधिरोपित किया जाता है :-

7. श्री सिंह से निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में नियमानुसार अलग से कार्रवाई की जायेगी। 8. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।9 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 (s)--श्री राज किशोर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, हाजीपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर के द्वारा पथ अवर प्रमंडल, हाजीपुर के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए उनसे विभागीय पत्रांक-1557(एस) अनु॰ दिनांक-17.03.2023 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ हैंः-

(i) हाजीपुर-लालगंज-वैशाली पथ के कि॰मी॰ 23 से कि॰मी॰ 33 में पैच पॉट के अलावे विभिन्न अंशों में Raising कार्य कराना था। Raising कार्य एकरारनामा में निहित प्रावधान के अनुसार जी॰एस॰बी॰ के ऊपर तीन-तीन इंच ग्रेड- II एवं ग्रेड-III कार्य के पश्चात्‌ 20 मि॰मी॰ प्रीमिक्स कारपेटींग का कार्य कराया जाना था। इस पथांश में संवेदक द्वारा जी॰एस॰बी॰ के ऊपर ग्रेड-II का कार्य कहीं-कहीं आंशिक रूप से ही कराया गया एवं ग्रेड-III का कार्य कराये बिना प्रीमिक्सींग का कार्य करा दिया गया। कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हाजीपुर के पत्रांक-1042 दिनांक-21.10.2009 द्वारा श्री प्रसाद को प्रीमिक्स कारपेट को हटाकर ग्रेड-II एवं ग्रेड-III कार्य कराने के पश्चात्‌ फिर से प्रीमिक्स कारपेटिंग कराने का निदेश दिया गया था परन्तु तत्‌समय निर्धारित अवधि तक श्री प्रसाद के द्वारा इसमें कोई रूचि नहीं ली गयी और न हीं किसी प्रकार का सकारात्मक प्रयास ही किया गया है, जो उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं कर्त्तव्य में लापरवाही का द्योतक है।

(ii) श्री प्रसाद के द्वारा इन गलत कार्यों का विपत्र बनवाने हेतु कनीय अभियंताओं पर दबाव बनाने का प्रयास भी किया गया। साथ ही साथ श्री प्रसाद के द्वारा कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हाजीपुर से उक्त गलत कार्य को एलाऊ कर भुगतान करने का अनुरोध किया गया है। इस तरह श्री प्रसाद के द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करने हेतु भ्रष्ट मनोवृति का परिचय दिया गया है।

2. उक्त के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा पत्रांक-821 (अनु॰) दिनांक-07.08.2023 द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया, जिसकी विभागीय समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1025(एस) दिनांक-10.02.2025 द्वारा अनुशासनिक कार्यवाही संचालित की गयी।

3. संचालित अनुशासनिक कार्यवाही में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, राष्ट्रीय उच्च (दक्षिण) उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-2449 (अनु॰) दिनांक-01.08.2025 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित 02 (दो) आरोपों को अप्रमाणित होने का निष्कर्ष दिया गया। तत्पश्चात्‌ उक्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। विभागीय तकनीकी समिति के द्वारा भी दोनों आरोपों को अप्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया एवं आरोप मुक्त करने की अनुशंसा की गयी।

4. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विचारोपरांत संचालित अनुशासनिक कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री राज किशोर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, हाजीपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर को आरोप मुक्त किया जाता है। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। (s)--श्री शरदेन्दु भूषण, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, हिलसा के विरूद्ध आय से अधिक सम्पत्ति मामले में विशेष निगरानी ईकाई, पटना द्वारा दायर निगरानी थाना कांड संख्या-01/2015, दिनांक 30.06.2015 के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-7132, दिनांक 03.08.2015 के द्वारा उन्हें निलंबित किया गया तथा अनुशासनिक कार्रवाई के तहत उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9629 (एस) अनु॰, दिनांक 09.10.2015 के द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन अनुशासनिक कार्यवाही का संचालन किया गया। उक्त अनुशासनिक कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्री भूषण से लिखित अभ्यावेदन/निवेदन प्राप्त करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-8643 (एस), दिनांक 20.11. 2018 के द्वारा उनके विरूद्ध का दण्ड अधिरोपित किया गया। कालांतर में उक्त दण्ड के विरूद्ध उनके द्वारा समर्पित पुनविर्लोकन अभ्यावेदन को भी समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-1065 (एस) दिनांक 29.01.2019 द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया।10 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 2. श्री भूषण के द्वारा उक्त दण्डादेश एवं पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने संबंधी आदेश के विरूद्ध माननीय पटना उच्च न्यायालय में CWJC No-12763/2018 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 07.10.2024 को पारित न्यायादेश एवं विभाग द्वारा दायर LPA No-186/2025 में दिनांक 14.05.2025 को पारित न्यायादेश के आलोक में संसूचित बर्खास्तगी के दण्ड तथा पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने संबंधी आदेश को विभागीय अधिसूचना संख्या-8249 (एस) दिनांक 26.09.2025 के द्वारा निरस्त किया गया। उक्त अधिसूचना की कंडिका-10 में यह निर्णय लिया गया कि श्री भूषण की सेवा पुनस्र्थापित हो जाने के पश्चात LPA No-186/2025 में दिनांक 14.05.2025 को पारित न्यायादेश के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 में विहित प्रावधान के तहत उनके विरूद्ध नये सिरे से अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी, तद्‌नुसार उनके देय अनुवर्त्ती लाभों पर निर्णय लिया जायेगा।

3. उपर्युक्त लिये गये निर्णय के आधार पर श्री भूषण के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1211 (एस) दिनांक 10.02.2026 के द्वारा आलोच्य मामले में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन संबंधी आरोपों के लिए मुख्य जाँच आयुक्त के अधीन अनुशासनिक कार्यवाही का संचालन किया गया है। साथ ही के बिन्दु पर विद्वान महाधिवक्ता से परामर्श प्राप्त किया गया। श्री भूषण को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9 (5) के तहत पुनः निलंबित किये जाने के बिन्दु पर विद्वान महाधिवक्ता का परामर्श निम्नवत है :-

"In the present case, the petitioner was dismissed from service and dismissal has been set aside by the Hon'ble court with liberty to hold enquiry, the petitioner shall be deemed to have been placed under suspension from the date of the original order of dismissal, removal or compulsory retirement and shall continue to remain under suspension until further orders and there is no requirement of passing fresh order of suspension, however a recital to that effect may be issued reiterating the status of his suspension."

4. उपर्युक्त तथ्यों एवं विद्वान महाधिवक्ता से प्राप्त परामर्श के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत निम्नलिखित निर्णय लिये जाते है :-

(i) श्री भूषण बर्खास्तगी की तिथि 20.11.2018 से लगातार अगले आदेश तक निलंबित माने जायेंगे। इस निलंबन अवधि में उनको बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 में विहित प्रावधानों के तहत अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

(ii) श्री भूषण के निलंबन अवधि का विनियमन उनके विरूद्ध संचालित अनुशासनिक कार्रवाई के फलाफल के आधार पर नियमानुसार किया जायेगा।

(iii) निलंबन अवधि में श्री भूषण का मुख्यालय, पूर्व निर्धारित मुख्यालय-अभियंता प्रमुख (मु॰) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना होगा।

5. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। (s)--माननीय मंत्री, पथ निर्माण विभाग द्वारा दिनांक-03.

04.2026 को पथ प्रमंडल, अररिया अंतर्गत जयनगर से घुरना-भाया-नरपतगंज पथ के निर्माण हेतु कार्यारंभ किये जाने का आयोजन किया गया था, जिसमें अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) एवं श्री विजय कुमार यादव, सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, फारबिसगंज, पथ प्रमंडल, अररिया उपस्थित थे। अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) द्वारा विषयगत पथ के प्राक्कलन के संबंध में श्री यादव, सहायक अभियंता से कुछ बिन्दुओं पर पृच्छा की गयी। तत्पश्चात्‌ श्री यादव द्वारा अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) के साथ अभद्रतापूर्ण गैर जिम्मेदराना रवैया अपनाते हुए प्राक्कलन के संबंध में किसी भी तरह का संतोषप्रद जवाब नहीं दिया गया। उक्त कृत्य श्री यादव की कार्य के प्रति लापरवाही/उदासीनता, उच्चाधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार एवं गैर जिम्मेदार रवैया का द्योतक है।11 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 2. अतः श्री विजय कुमार यादव, सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, फारबिसगंज, पथ प्रमंडल, अररिया को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1)(क) के तहत्‌ तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री यादव का मुख्यालय अभियंता प्रमुख (मुख्यालय), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. निलंबन अवधि के दौरान श्री यादव को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के अध्याधीन शर्त्तों के तहत्‌ अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

5. इनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई प्रारम्भ करने हेतु नियमानुसार अलग से आरोप पत्र निर्गत की जायेगी। 6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। (s)--श्री संजय कुमार भारती, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति प्रभारी मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ दक्षिण उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पथ प्रमंडल, लखीसराय पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितता के लिए विहित प्रपत्र में आरोप-पत्र गठित कर सक्षम प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत उनसे विभागीय पत्रांक-336 (एस) दिनांक 16.01.2026 के द्वारा लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री भारती के विरूद्ध गठित आरोप का बिन्दु निम्नलिखित है :-

(i) कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, लखीसराय का प्रतिवेदन पत्रांक-595 (अनु॰) दिनांक 07.05.2025, जो मुख्य अभियंता, दक्षिण के पत्रांक-1931 (अनु॰) दिनांक 09.06.2025 से विभाग को प्राप्त हुआ है, में प्रतिवेदित है कि IRQP Cum Output & Performance based road asset maintenance of Jamalpur-Dharhara-Kajra Road (From Piribazar to Basauni) Length 7.55 km for the year 2015-16 के कार्यो का DLP की अवधि के समाप्ति के पूर्व Price Escalation गणना/समायोजन किये बिना SD राशि का भुगतान निम्नवत किया गया :-

SD Refund SD Refund
1 3969616 18.06.2018
2 5136116 05.01.2021
3 2803116 01.03.2023

(ii) SD राशि के उक्त भुगतान में प्रथम Refund को छोड़कर शेष दोनों भुगतान में CMBD Clause-C41 के उपबंधों का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके कारण संवेदक को Excess SD Refund हुआ। श्री संजय कुमार भारती, तदेन कार्यपालक अभियंता तीसरे SD Refund से संबंधित है तथा उनके लापरवाही एवं गलत मंशा के कारण संवेदक को तीसरा Excess SD Refund हुआ।

2. श्री भारती ने पत्रांक-212 अनु॰, दिनांक 19.01.2026 के द्वारा अपना लिखित अभिकथन समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा अंकित किया गया है कि आलोच्य कार्य उनके पदस्थापन के पूर्व वर्ष 2014-15 में पूर्ण हो चुका था। इस कार्य में संवेदक का कुल रुपये 79,39,223/-SD के रूप में कटौती की गयी थी। दिनांक 18.06.2018 को तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक को जमानत की राशि का 50 प्रतिशत राशि वापस की गयी, परन्तु इसका उल्लेख उनके द्वारा रोकड़ पंजी में नहीं किया गया, जिसके कारण श्री भारती से पूर्ववती कार्यपालक अभियंता के द्वारा दिनांक 05.01.2021 को रुपये 51,36,116/-संवेदक के अनुरोध पर वापस कर दिया गया। निश्चित रूप से इसका कारण संवेदक एवं SD की प्रथम किस्त वापस किये जाने के बावजूद रोकड़पंजी में अंकित नहींं किया जाना हैै।

2.1 श्री भारती ने अंकित किया है कि उनके पदस्थापन के बाद उनके समक्ष यह तथ्य प्रस्तुत किया गया कि पूर्व में SD के राशि में से मात्र रुपये 51,36,116/- वापस किया गया है, जिसके आलोक में उनके द्वारा शेष राशि रुपये 28,03,116/- संवेदक के अनुरोध पर वापस कर दिया गया । यह तथ्य बाद में उजागर हुआ कि संवेदक को SD के राशि में से रुपये 39,69,616/- पूर्व में ही वापस कर दिया गया है एवं इसका उल्लेख रोकड़पंजी में नहीं किया गया। प्रथम कार्यपालक अभियंता, रोकड़पाल एवं संवेदक के गलती के कारण बाद के पदाधिकारियों द्वारा शेष SD राशि को वापस करने के लिए विवश होना पड़ा। इस मामले में भुगतान के समय तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री राजेन्द्र माँझी ने Cash Book को घेरकर Refunded नहीं लिखा। फलतः तत्कालीन रोकड़पाल श्री महेश्वर प्रसाद एवं तत्कालीन लेखा पदाधिकारी श्री रामेश्वर प्रसाद के द्वारा बिना जाँचे परखे उपस्थापित संचिका में मेरे पूर्ववर्ती एवं मेरे द्वारा गलतफहमी में भुगतान किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन रोकड़पाल, तत्कालीन लेखा पदाधिकारी तथा संवेदक का मिलीभगत नजर आता है न कि मेरा।12 (cid:464)बहार गजट, 20 2026 श्री भारती ने अंकित किया है कि इस मामले में संवेदक को जो अधिक राशि रुपये 39,69,616/- का भुगतान हुआ था, दिनांक 29.12.2025 को कार्यपालक अभियंता, लखीसराय को वापस कर दिया गया है। राशि वापस हो जाने के बाद कोई वित्तीय क्षति का मामला नहीं बनता है।

3. श्री भारती के बचाव बयान की समीक्षा किया गया। उन्होंने यह तर्क दिया है कि 50 प्रतिशत रिफन्ड का उल्लेख तदेन कार्यपालक अभिंयता द्वारा रोकड़पंजी में नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी अंकित किया है कि इसे Cash Book में घेरकर Refunded अंकित नहीं किया गया, जिससे अग्रेतर Refund में विरोधाभाष की स्थिति उत्पन्न हुई। 3.1 कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल लखीसराय का एतद्‌ संबंधी प्रतिवेदन पत्रांक-595 अनु॰, दिनांक 07.05.2025 एवं श्री भारती के द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य में Cash Book की छायाप्रति संलग्न है, जिसके अवलोकन से प्रथम दृष्ट्‌या उपरोक्त कथन का स्पष्ट रूप से समर्थन नही हो पा रहा है, लेकिन इसी तथ्य का अंकन कार्यपालक अभियंता को समर्पित श्री धनंजय कुमार, प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी के स्पष्टीकरण उत्तर में भी किया गया है।

3.2 प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी के स्पष्टीकरण उत्तर से स्पष्ट होता है कि SD Refund के दूसरे किस्त की भुगतान के लिए दुसरी संचिका उपस्थापित की गयी थी तथा इसमें प्रथम Refund की कोई जानकारी नहीं थी। इसी दौरान तृतीय Refund के समय जो संचिका उपस्थापित की गयी, उसमें सिर्फ द्वितीय Refund की जानकारी थी तथा प्रथम Refund की जानकारी छुपाया गया था। नव प्रवृत्त CFMS में प्रथम Refund की प्रविष्टि भी नहीं की गयी थी। स्वभाविक रूप से श्री भारती के द्वारा द्वितीय Refund के आधार पर तृतीय Refund किया गया।

3.3 उपर्युक्त तथ्यों के बावजूद आरोप संबंधी यह तथ्य सही है कि तृतीय Excess SD Refund में CMBD की Clause C-41 का उल्लंघन हुआ है। श्री भारती के समक्ष भुगतान हेतु उपस्थापित संचिका में उनके द्वारा पूर्व में हुए भुगतानों का बिना जाँच-परख किये, Refund किया गया, जो उनके विहित कर्त्तव्य एवं दायित्वों के प्रति कोताही का परिचायक है। इस हद तक यह आरोप प्रमाणित होता है।

सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत उपर्युक्त प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री संजय कुमार भारती, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल लखीसराय सम्प्रति प्रभारी मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ दक्षिण उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 (II) के तहत

का दण्ड अधिरोपित किया जाता है। प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 01/स्था॰-15/2024 (s)--भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), नई दिल्ली के पत्रांक-11012/ 555/2023-Admn.(E-233676)/7161 दिनांक 21.01.2026 एवं पत्रांक-11012/48/ 2025-Admn.(E-288879) दिनांक 14.11.2025 के आलोक में श्री मनोज कुमार, अधीक्षण अभियंता (कार्यकारी प्रभार, वेतन स्तर-13), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) में महाप्रबंधक (तक॰) {General Manager (Tech)} के पद पर अंतिम रूप से चयनोपरांत प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्ति हेतु श्री कुमार की सेवा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन सौंपी जाती है तथा प्राधिकरण में योगदान हेतु तात्कालिक प्रभाव से विरमित किया जाता है।

2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 01/स्था॰-02/2025 (s)--1. श्री उमाशंकर प्रसाद, मुख्य अभियंता, सीमांचल उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुए मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री सुनील कुमार सुमन, मुख्य अभियंता, उत्तर, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्याें के अतिरिक्त मुख्य अभियंता, सीमांचल उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का प्रभार दिया जाता है।

13 (cid:464)बहार गजट, 20 2026

प्र॰2/स्था॰-मुक॰-09-06/2020 (s)--सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ संख्या-856/2020 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 14.02.2020 को पारित आदेश तथा अभिलेखीय स्थिति आदि के आलोक में उक्त वाद के वादीगण के प्रोन्नति की तिथि को निम्नांकित तालिका में उनके नाम के सामने स्तम्भ-6 में अंकित तिथि से Shift Back किया जाता है :-

क्र॰सं॰ नाम सहायक अभियंता का वर्ष 2011 का वरीयता क्रमांक कनीय अभियंता का वर्ष 2009 का वरीयता क्रमांक वास्तविक प्रोन्नति का प्रसंग Shift Back करने की तिथि
1 2 3 4 5 6
1 श्री भगवान लाल 1124 2661 4853 (एस) दिनांक 01.04.2010 31.12.2008
2. श्री अनिल कुमार 1138 3076 4853 (एस) दिनांक 01.04.2010 31.12.2008
3. श्री विजय कुमार यादव 1142 3091 4853 (एस) दिनांक 01.04.2010 31.12.2008
4. श्री अजय कुमार 1149 3191 4853 (एस) दिनांक 01.04.2010 31.12.2008

बिहार-राज्यपाल के आदेश से सुमित वत्स,अवर सचिव (प्र॰को॰)। प्र॰2/स्था॰-02प्रो॰-03/2023 (s)--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक 13.10.2023 द्वारा अधिसूचित ''अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023'' के प्रावधानोन्तर्गत उच्चतर पद का अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार देने के बिन्दु पर विचारण हेतु गठित विभागीय स्क्रीनिंग समिति की दिनांक 18.02.2026 को सम्पन्न बैठक में की गई अनुशंसा के आलोक में उपरोक्त नियमावली के प्रावधानों के अधीन पथ निर्माण विभाग संवर्ग के निम्नलिखित सहायक शोध पदाधिकारियों को पूर्णतः अस्थायी व्यवस्था के अन्तर्गत विहित वेतनमान (वेतन स्तर-09) सहित सहायक निदेशक का अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार प्रदान किया जाता है :-

क्र॰ सं॰ नाम वरीयता (वर्ष 2023) अभ्युक्ति
1 2 3 4
1. श्री हरेश प्रियदर्शी 1
2. श्री विनय कुमार 10
3. श्री संजय कुमार 18

होने पर कनीय कर्मी, जिनको विहित वेतनमान्‌ सहित उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार प्रदान किया गया है, का कार्यकारी प्रभार तत्समय उपलब्ध रिक्ति की उपलब्धता के आलोक में समाप्त करते हुए आरोप मुक्त कर्मी को विहित वेतनमान्‌ सहित उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार प्रदान किया जाएगा।

3. (क) संबंधित पदाधिकारी पदस्थापन होने तक पूर्व धारित पद पर ही उच्चतर पद का प्रभार ग्रहण करेंगे तथा पूर्व से धारित पद के कार्यों का भी निष्पादन करेंगे।(cid:464)बहार गजट, 20 2026 14 (ख) वैसे पदाधिकारी जो पूर्व से कार्यकारी व्यवस्था के अन्तर्गत अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभार में हैं उन्हें अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली 2023 के अधीन संबंधित उच्चतर पद का प्रभार देने हेतु निर्गत विभागीय अधिसूचना के विरूद्व प्रभार ग्रहण की तिथि से आर्थिक लाभ देय होगा।

4. अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रावधानों के आलोक में उच्चतर पद का प्रभार प्राप्त करने वाले पदाधिकारियों के संबंध में भविष्य में अर्हत्ता को प्रभावित करने वाले किसी प्रकार की त्रुटि/विसंगति पाए जाने पर उन्हें प्रदत्त प्रभार आदेश को रद्द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा भुगतान की गई राशि की वसूली कर ली जाएगी। 5. कार्यकारी व्यवस्था के तहत विहित वेतनमान्‌ के साथ उच्चतर पद का कार्यकारी प्रभार माननीय उच्चतम्‌ न्यायालय में विचाराधीन सिविल अपील संख्या-4880/2017 बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य तथा अन्य सम्बद्ध वादों में पारित होने वाले अंतिम आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा।

6. उपरोक्त कार्रवाई अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के प्रावधानों के आलोक में की गई है, अतएव यह इस नियमावली में किसी भी परिवर्तन के फलाफल से प्रभावित होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से

सुमित वत्स,अवर सचिव (प्र॰को॰)। —————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

(cid:464)बहार गजट, 9—571+10-डी0ट(cid:547)0पी0।

Website: https://egazette.bihar.gov.in

15 (cid:464)बहार गजट, 20 2026

भाग-2

बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और

नियम आदि।

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गृह विभाग

(विषेष शाखा)

आदेश

11 मार्च 2026

सं॰ एल/एच॰जी॰-14-06/2018-4992--बिहार गृह रक्षा वाहिनी सेवा के निम्नांकित चार परीक्ष्यमान जिला समादेष्टा (पुलिस उपाधीक्षक के समकक्ष) की सेवा बिहार पुलिस मेनुअल के नियम-648(क) में निहित प्रावधान के आलोक में उनके नाम के सामने स्तंभ-4 में अंकित तिथि से संपुष्ट की जाती हैंः-

क्र॰ नाम/पदनाम/पदस्थापन नियुक्ति की तिथि सम्पुष्टि की तिथि
1 2 3 4
1 श्री सुबाष सिंह, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, भोजपुर 02.02.2022 (पूर्वाह्‌न) 12.09.2025
2 मो॰ एहतेशाम अली, जिला समादेष्टा, केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान, बिहटा 01.02.2022 (पूर्वाह्‌न) 29.10.2025
3 श्री प्रेमचंद, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, वैशाली 01.02.2022 (पूर्वाह्‌न) 23.04.2025
4 श्री अमृतांशु, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, सीतामढ़ी 02.02.2022 (पूर्वाह्‌न) 02.02.2025

आदेश से, शैलेन्द्र कुमार, अवर सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

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(cid:464)बहार गजट, 20 2026 16

भाग-9-ख

िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द।

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सूचना --------

No. 480--I, Ashok Kumar Keshri, son of late Sita Ram Keshri, resident of Gudri Bazar, Devi Asthan, Arrah, Bhojpur, Bihar, Pin code-802301, declare Vide Affidavit number 2011 dated 09/08/2024, that in my daughter Ankita Kumari's matriculation certificate, my name is incorrectly mentioned as Ashok Prasad Keshri. I shall be known as Ashok Kumar Keshri for all purposes.

Ashok Kumar Keshri. No. 481--I, Nikhil S/o Bindhyachal Singh R/o-279, Defence colony, Patna, P.O.-Lohia Nagar, Distt.-Patna-800020 Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 1462 dt 17.03.26 that my name is written in my all educationa and other documents as Nikhil which in true and correct. I want to add surname Singh in my name. Now I will be known as Nikhil Singh for all purposes.

Nikhil. सं॰ 482--मैं धीरज कु मार शर्मा, पिता राज कु मार शर्मा, निवासी-ग्राम-सैदपुर दिघवारा, थाना-दिघवारा, जिला-

ं कि मेरे आधार कार्ड में मेरा नाम सारण, बिहार-841207 शपथ पत्र सं. 9210 दिनांक 30.07.24 द्वारा सूचित करता हू धीरज कु मार है। मेरे सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में धीरज कु मार शर्मा है। धीरज कु मार एवं धीरज कु मार शर्मा दोनों नाम ं। आगे सभी कार्यों एवं हेतु धीरज कु मार शर्मा के नाम से जाना व पहचाना जाउं गा। एक ही व्यक्ति है जो मैं स्वयं हू

धीरज कु मार शर्मा.

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(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 20 May 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2026-05-20.20/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2026-05-20.20.