असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
4 (cid:207)ये(cid:231)ठ 1948 (श0)
(सं0 पटना 528) पटना, सोमवार, 25 मई 2026
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25 मई 2026
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा के0बी0 जानकीरमण के मामले में पारित आदेश के अनुपालन में तत्कालीन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प ज्ञापांक-7457 दिनांक-11.09.2002 की कंडिका-2(i) द्वारा निम्न मार्गदर्शी सिद्धान्त निरूपित किया गया है-
"(i) सरकारी सेवकों की प्रोन्नति पर विचार करते समय आरोपों के केवल निम्नांकित मामलों का कुप्रभाव पड़ेगा और विभागीय प्रोन्नति समिति इस संकल्प में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार विचार करेगी- (क) निलम्बित सरकारी सेवक, (ख) सरकारी सेवक जिनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया हो और आरोप पत्र निर्गत किया गया है, और
(ग) सरकारी सेवक जिनपर किसी आपराधिक आरोप के लिये फौजदारी न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही लंबित हो, [व्याख्या-आपराधिक कार्यवाही उस तिथि से लंबित समझी जायेगी, जिस तिथि से फौजदारी न्यायालय में अभियोग-पत्र समर्पित किया गया है]।"
2. पुनः तत्कालीन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प 2 (cid:464)बहार गजट (असाधारण), 25 मई 2026 (क) निलंबन, (ख) अनुशासनिक कार्यवाही प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया हो और आरोप पत्र निर्गत किया गया हो, एवं (ग) किसी आपराधिक आरोप के लिये फौजदारी न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही लंबित हो (आपराधिक कार्यवाही उस तिथि से लंबित समझी जायेगी जिस तिथि को न्यायालय में अभियोग-पत्र समर्पित किया गया हो)। उपर्युक्त के अतिरिक्त, सम्यक विचारोपरान्त सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 10(1)(क) के तहत नोटिस निर्गत होने पर भारत संघ बनाम के0बी0 जानकीरमण के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये न्यायादेश के अनुसार मुहरबंद लिफाफा का मामला माना जायेगा, अतः लोकायुक्त अधिनियम की धारा 10(1)(क) के तहत निर्गत नोटिस का भी कुप्रभाव सरकारी सेवक की प्रोन्नति पर पड़ेगा।"
3. उक्त वर्णित दोनों कंडिकाओं में यह स्पष्ट रूप से प्रावधानित है कि किसी सरकारी सेवक के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही FIR दर्ज होने अथवा अभियोजन स्वीकृत होने की तिथि से प्रारम्भ नहीं समझी जायेगी बल्कि उस तिथि से प्रारम्भ/लंबित समझी जायेगी, जिस तिथि को फौजदारी न्यायालय में अभियोग पत्र (Charge Sheet) समर्पित किया गया हो।
4. उक्त संदर्भ में चाको एपेन बनाम भारत संघ एवं अन्य में ओ0ए0 संख्या-941 एवं 1131/2011 में दिनांक-08.02.2012 को पारित न्यायादेश में विस्तृत समीक्षा के उपरान्त यह न्याय निर्णय पारित किया गया है कि-
"The person becomes an accused for the purpose of trial after the charges are framed."
5. उक्त निर्णय पारित करने के क्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इशर सिंह बनाम आंध्र प्रदेश सरकार एवं अन्य [2004 (11) SCC 585] में दिनांक-15.03.2004 को पारित न्यायादेश का संदर्भ लिया गया है, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत् है-
'The person becomes an accused for the purpose of trial after the charges are framed.'
6. अतः उक्त वर्णित न्यायादेशों के आलोक में सम्यक् विचारोपरान्त सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प ज्ञापांक-7457 दिनांक-11.09.2002 की कंडिका-2(i) (ग) तथा संकल्प ज्ञापांक-7979 दिनांक-06.11.2003 की कंडिका-2(ग) में निहित व्याख्या को निम्नवत् संशोधित किया जाता है-
"सरकारी सेवक, जिन पर किसी आपराधिक आरोप के लिए फौजदारी न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही लंबित हो, [व्याख्या-किसी सरकारी सेवक के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही FIR दर्ज होने अथवा अभियोजन स्वीकृत होने की तिथि से प्रारम्भ नहीं समझी जायेगी बल्कि उस तिथि से प्रारम्भ/लंबित समझी जायेगी, जिस तिथि को फौजदारी न्यायालय में न्यायालय द्वारा आरोप निर्धारित (Charge frame) किया गया हो।]"
7. उपरोक्त पर विद्वान महाधिवक्ता की सहमति एवं सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 9. यह तुरत प्रवृत होगा। आदेष- आदेष दिया जाता है कि सर्वसाधारण की जानकारी के लिए इसे बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 528-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0। Website: https://egazette.bihar.gov.in