िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 12 (cid:207)ये(cid:231)ठ 1948 (श0)
(सं0 पटना 560) पटना, मंगलवार, 2 जून 2026 —
jktLo ,oa Hkwfe lq/kkj foHkkx fcgkj jS;rh Hkwfe Ø; uhfr] 2026 ———— ladYi 29 ebZ 2026 1. केन्द्र/राज्य सरकार के विभिन्न विभागों/निकायों को उनकी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये समय-समय पर रैयती भूमि की आवश्यकता होती है। भू-अर्जन की प्रक्रिया में लगने वाले समय और लागत को बचाने एवं लोकहित की परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में क्रियान्वित करने हेतु प्रतिफल का भुगतान करके भू-धारकों (भू-स्वामियों) की आपसी सहमति से भूमि प्राप्त की जा सकती है। आपसी सहमति से राज्य सरकार द्वारा भूमि धारकों से भूमि क्रय करना कई परिस्थितियों में दोनों पक्षों के साथ-साथ व्यापक लोकहित में भी लाभकारी है।
2. भारत सरकार द्वारा भू-अर्जन अधिनियम, 1894 को निरस्त करते हुए '' प्रख्यापित किया गया है जो कि 01.01.2014 से प्रभावी है। इस अधिनियम की धारा 46 में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भिन्न व्यक्तियों की दशा में सीधे भूमि क्रय करने पर उक्त अधिनियम की दूसरी अनुसूची में उल्लिखित पुनर्वासन और पुनव्र्यस्थापन संबंधी लाभ दिये जाने एवं क्रय की कार्यवाही समाहर्त्ता के माध्यम से करने की व्यवस्था है।
3. भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में अतिशय समय एवं श्रम साध्य होने के कारण रैयतों से सीधे भूमि क्रय करने की व्यवस्था को प्रोत्साहित किये जाने के उद्देश्य से केन्द्र/राज्य सरकार के विभागों/निकायों के लिए भू-स्वामियों से सीधे भूमि क्रय किये जाने हेतु प्रक्रिया निर्धारित करते हुए विनिश्चित की जाती है, जिससे लोकहित की सभी (लघु, मध्यम एवं वृहद) परियोजनाओं हेतु संबंधित अधियाची (प्रशासी)/क्रय निकाय द्वारा भूमि सीधे रैयतों से क्रय की जा सकती है। 4.
(i) केन्द्र/राज्य के विभागों/निकायों द्वारा लघु परियोजनाओं अर्थात ऐसी परियोजनाएं जिनमें परियोजना के लिए क्रय की जाने वाली भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत-रु० 100.00 करोड़ तक है, जिसमें सभी आस्तियां सन्निहित हैं, के लिए परियोजनावार/जिलावार भूमि की दरों की स्वी—ति एवं कुल भूमि(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 2 जून 2026 2 मूल्य की स्वीकृति हेतु संबंधित जिले के समाहर्त्ता की अध्यक्षता में
| 1 | समाहर्त्ता | अध्यक्ष |
| 2 | अपर समाहर्त्ता (राजस्व)/उप विकास आयुक्त | सदस्य |
| 3 | जिला भू-अर्जन पदाधिकारी/भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अंचलाधिकारी | सदस्य |
| 4 | जिला वन पदाधिकारी/जिला कृषि पदाधिकारी | सदस्य |
| 5 | जिला अवर निबंधक/अवर निबंधक | सदस्य |
| 6 | भवन/पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता | सदस्य |
| 7 | जिस विभाग/संस्थान के लिए भूमि क्रय की जानी है, द्वारा नामित/अधिकृत पदाधिकारी | सदस्य सचिव |
(i) केन्द्र/राज्य सरकार के विभागों/निकायों द्वारा मध्यम एवं वृहद परियोजनाओं अर्थात ऐसी परियोजनाएं जिनमें परियोजना के लिए क्रय की जाने वाली भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत-रु० 100.00 करोड़ से अधिक है, जिसमें सभी आस्तियां सन्निहित हैं, के लिए भूमि की दरों की स्वी—ति एवं कुल भूमि मूल्य की स्वीकृति परियोजनावार/प्रमंडलवार करने हेतु संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में रैयती भूमि के क्रय की दर तथा कुल भूमि मूल्य की स्वीकृति हेतु
| 1 | प्रमंडलीय आयुक्त | अध्यक्ष |
| 2 | समाहर्त्ता/ अपर समाहर्त्ता (राजस्व)/उप विकास आयुक्त | सदस्य |
| 3 | जिला भू-अर्जन पदाधिकारी/भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अंचलाधिकारी | सदस्य |
| 4 | जिला वन पदाधिकारी/जिला कृषि पदाधिकारी | सदस्य |
| 5 | जिला अवर निबंधक/अवर निबंधक | सदस्य |
| 6 | भवन/पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता | सदस्य |
| 7 | जिस विभाग/संस्थान के लिए भूमि क्रय की जानी है, द्वारा नामित/अधिकृत पदाधिकारी | सदस्य सचिव |
5. (i). अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय द्वारा नामित सदस्य जो कि समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। उनके द्वारा समिति की बैठकों का संचालन किया जायेगा एवं बैठक की कार्यवाही अभिलेखबद्ध रूप में संधारित करेंगे।
(ii).
द्वारा भूमि क्रय करने के प्रस्ताव/संदर्भ/आवेदन पत्र पर क्रय की जाने वाली भूमि की दर एवं कुल भूमि मूल्य का विनिश्चय करते हुए प्रस्ताव अनुमोदन हेतु संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त को प्रेषित करेंगे। विलंब की स्थिति में समाहर्त्ता अपने स्पष्टीकरण के साथ प्रस्ताव एक सप्ताह के अन्दर प्रमंडलीय आयुक्त को प्रेषित करेंगे। प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा प्रस्ताव को 15 दिनों के अन्दर अनुमोदित किया जायेगा। 15 दिनों के अन्दर प्रस्ताव अनुमोदन नही हो पाने की स्थिति में प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा स्पष्टीकरण के साथ प्रस्ताव (iii).
को अनुमोदन हेतु प्रेषित किया जायेगा। द्वारा भूमि क्रय करने के प्रस्ताव/संदर्भ/आवेदन पत्र पर क्रय की जाने वाली भूमि की दर एवं कुल भूमि मूल्य का विनिश्चय करते हुए प्रस्ताव अनुमोदन हेतु संबंधित को प्रेषित करेंगे। 15 दिनों के अन्दर प्रस्ताव अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय द्वारा अनुमोदित किया जायेगा। 6. उपरोक्त दोनो समितियां क्रय की जाने वाली भूमि के विवाद रहित एवं भार रहित होने का परीक्षण भी करेगी। इस हेतु समितियां भूमि की स्थलीय जाँच हेतु यथावश्यक किसी भी विभाग/अधिकारी से सहयोग प्राप्त कर सकेगी। साथ ही भूमि के दर एवं मूल्य के निर्धारण करने हेतु समिति के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों की प्रति-परीक्षा भी कर सकेगी।
7. उपरोक्त दोनो समितियां निम्नलिखित सिद्वान्तों के आधार पर क्रय की जाने वाली भूमि का दर एवं भूमि का कुल मूल्य, जिसमें भूमि पर स्थित परिसम्पत्तियों का मूल्य, खड़ी फसलों, वृक्षों एवं संबंधित अनुषांगिक व्यय (यदि कोई हो, भी सम्मिलित है) का अपने क्षेत्राधिकार अंतर्गत अनुमोदन कर सकेगी। (i) उस क्षेत्र में जहां भूमि स्थित है, क्रय किये जाने हेतु प्रस्तावित भूमि के आस-पास परियोजना प्रारम्भ होने अथवा परियोजना के अनुमोदन से 03 वर्ष पूर्व तक के निष्पादित विक्रय विलेखों में अंकित भूमि की दर का औसत अथवा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अंतर्गत मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार द्वारा निर्धारित सर्किल दर (MVR), जो अधिक हो को अपनाया जायेगा।(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 2 जून 2026 3 (ii) इस नीति के तहत प्राप्त की जानेवाली भूमि का किस्म/प्रकृति का निर्धारण उस क्षेत्र विशेष की भूमि के निबंधन के लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार द्वारा निर्धारित किस्म/प्रकृति के अनुसार किया जायेगा।
(iii) भूमि पर स्थित परिसम्पत्तियों/फसल/वृक्ष इत्यादि के मूल्य का निर्धारण समिति द्वारा यथावश्यक परिसम्पत्तियों का आंकलन एवं मूल्य का निर्धारण जिला वन पदाधिकारी/जिला कृषि पदाधिकारी एवं कार्य विभागों के जिले में कार्यरत कार्यपालक अभियंता स्तर के पदाधिकारी द्वारा कराया जा सकेगा।
MVR (iv) MVR (v) संबंधित भू-स्वामियों से भूमि क्रय किये जाने हेतु दर एवं कुल भूमि मूल्य पर सहमति प्राप्त की जायेगी और सहमति पत्र (एकरारनामा/एग्रीमेंट- मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा निर्धारित प्रपत्र) पर हस्ताक्षर करने के दिनांक को लागू सर्किल दर/प्रचलित बाजार मूल्य को सभी प्रयोजनों हेतु स्वीकार किया जायेगा।
(vi) इस नीति के तहत प्राप्त की जानेवाली भूमि स्टाम्प/पंजीयन शुल्क से मुक्त होगी। 8. संबंधित अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय, समाहर्त्ता द्वारा नामित अधिकारियों के सहयोग से भू-स्वामियों से वार्ता कर आपसी सहमति के आधार पर क्रय की जाने वाली भूमि के भू-अभिलेखों के अनुसार स्वामित्व आदि के सम्यक परीक्षण एवं जांचोपरान्त विवादरहित एवं भारमुक्त होने की दशा में भूमि के बाजार मूल्य एवं पुनर्वासन एवं पुनव्र्यस्थापन संबंधी अन्य लाभों का संज्ञान लेते हुए संबंधित भू-स्वामियों की लिखित सहमति सहित क्रय की जाने भूमि की दर एवं कुल भूमि मूल्य का युक्तिसंगत एवं औचित्यपूर्ण प्रस्ताव संबंधित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। जिसमें क्रय की जाने वाली भूमि का क्षेत्रफल और भूमि का अन्य विवरण (यथा-भूमि का किस्म/प्रकृति, खाता, खेसरा, रैयत का नाम, चौहद्दी इत्यादि की विवरणी) शामिल हो। 9. क्रय की जाने वाली भूमि का दर एवं कुल भूमि मूल्य पर अनुमोदन के उपरान्त एवं विक्रय विलेख निष्पादन के पूर्व संबंधित अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय द्वारा रैयतों से प्राप्त की जाने वाली भूमि की रैयतवार/खेसरावार विवरणी, जिसमें भूमि का रकवा, किस्म/प्रकृति, कुल देय राशि इत्यादि पर निम्नानुसार सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया जायेगाः-
| 1 रू0 100 करोड़ तक | जिलास्तरीय रैयती भूमि क्रय समिति | प्रमंडलीय आयुक्त | |
| 2 रू0 100 करोड़ से अधिक | प्रमंडलस्तरीय रैयती भूमि क्रय समिति | प्रशासी/क्रय निकाय |
10. उपरोक्त कंडिका-8 में उल्लिखित सक्षम प्राधिकार के अनुमोदनोपरान्त अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय द्वारा भू-स्वामी से विक्रय विलेख निबंधित कराकर भूमि पर दखल-कब्जा प्राप्त कर सकेगा। अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि क्रय की गई भूमि का नामान्तरण अधियाची (प्रशासी) विभाग/क्रय निकाय के पक्ष में ससमय करा लिया जायेगा।
11. समिति द्वारा विनिश्चित की गयी दरों एवं कुल भूमि मूल्य के संबंध में सम्बन्धित क्रय करने वाले निकाय की सहमति न होने की दशा में अथवा दरों पर भू-स्वामियों और क्रय करने वाले निकाय के मध्य किसी विवाद अथवा समझौते के अनुपालन को लेकर कोई बिन्दु उत्पन्न होता है तो संबंधित समिति के समक्ष क्रय निकाय द्वारा तर्कसंगत एवं औचित्यपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया जायेगा, जिस पर समिति द्वारा निर्णय लेकर समाधान किया जायेगा और उपर वर्णित प्रक्रिया के अनुसार अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा।
आदेश से,ह॰/- सीमा त्रिपाठी, सचिव।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,