िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 22 (cid:207)ये(cid:231)ठ 1948 (श0)
(सं0 पटना 612) पटना, शु(cid:272)वार, 12 जून 2026 y?kq ty lalk/ku foHkkx ———— vf/klwpuk 26 ekpZ 2026
सं0सं0-ल0ज0सं0/नि0प्र0/नि0जाँच-01/22/2103—श्री पवन कुमार, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, लखीसराय के द्वारा 'बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना' के अनुदान के भुगतान हेतु लाभुक से रिश्वत की मांग किये जाने संबंधी आरोपों की जांच अधीक्षण अभियंता, योजना एवं स्थापना-सह-प्रभारी मुख्य अभियंता, यो0अनु0भू0, लघु जल संसाधन विभाग, पटना की अध्यक्षता में गठित जाँच दल एवं विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, योजना एवं स्थापना के पत्रांक-531(न0को0) दिनांक-22.09.22 एवं अधीक्षण अभियंता (मु0), उड़नदस्ता, लघु जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-440 दिनांक-23.11.23 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया । जाँच प्रतिवेदनों के समीक्षोपरांत श्री पवन कुमार को निम्नलिखित अनियमितताओं के लिए जिम्मेवार पाया गया -
(i) श्री कुमार द्वारा रिश्वत की मांग किये जाने संबंधी वायरल ऑडियों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया है, जिसमें श्री कुमार द्वारा 'बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना' के एक लाभुक से अनुदान के भुगतान हेतु रूपये दो हजार के रिश्वत की मांग की गयी है।
(ii) दिनांक-24.10.21 एवं दिनांक-26.03.22 को चोरी की घटना से संबंधित प्राथमिकी दर्ज करने की सूचना दी गयी, परन्तु इन पर प्राप्ति एवं कांड संख्या का उल्लेख(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 12 जून 2026 2 नहीं है। साथ ही दिनांक-25.12.21 को घटित चोरी की घटना के संबंध में श्री कुमार द्वारा चौकीदार श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह द्वारा सूचित किये जाने के बावजूद मामले का संज्ञान नहीं लिया गया ।
(iii) प्रमंडल अंतर्गत विभागीय सामग्रियों की चोरी की लगातार घटनाओं के बावजूद श्री कुमार द्वारा विभागीय सामग्रियों का लेखा अद्यतन किये जाने हेतु समुचित प्रयास नहीं किया गया। पूर्व के कनीय अभियंता श्री नन्द किशोर प्रसाद के प्रभाराधीन सामग्रियों की इन्वेन्ट्री तैयार करते हुए लेखा का संधारण किया जा सकता था, परन्तु उनके द्वारा विभागीय सामग्रियों की बार-बार हो रही चोरी की घटना के बावजूद भंडार लेखा अद्यतन नहीं किया/कराया गया। जिसके फलस्वरूप चोरी की घटना के बावजूद चोरी हुई सामग्रियों एवं सरकार को हुई क्षति का आकलन नहीं किया जा सका।
उक्त आरोपों के संबंध में श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत विभागीय ज्ञापन सं0-4705 दिनांक-23.09.24 द्वारा उनके विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए बचाव के लिखित अभिकथन की मांग की गयी ।
उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित बचाव के लिखित अभिकथन में अंकित तथ्य को असंतोषप्रद पाया गया क्योंकि किसी ऑडियो में उनके द्वारा रिश्वत मांगे जाने के आरोप को मात्र दुर्भावना से प्रेरित बताया जाना स्वीकार योग्य नहीं है। साथ ही प्रमंडल में तीन बार चोरी होने पर भी लेखाओं के संधारण हेतु समुचित कार्रवाई नहीं किया जाना उनकी कर्तव्यहीनता एवं लापरवाही का स्पष्ट रूप से द्योतक है। बिहार लोक निर्माण विभाग की संहिता के अनुसार कार्यपालक अभियंता अपने प्रमंडल अंतर्गत सभी प्रकार के प्रबंधन हेतु जिम्मेवार है। फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सं0-1710 दिनांक-13.02.25 द्वारा उनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित की गयी ।
उक्त अनुशासनिक कार्यवाही के संचालन हेतु अभियंता प्रमुख, लघु जल संसाधन विभाग, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, लखीसराय को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी-सह-अभियंता प्रमुख, लघु जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-710 दिनांक-27.06.2025 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की प्रति प्रेषित करते हुये श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-5287 दिनांक-23.07.25 द्वारा नियमानुसार अभ्यावेदन/निवेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार के पत्रांक-430 दिनांक-14.08.25 द्वारा अभ्यावेदन/निवेदन विभाग को समर्पित किया गया ।
संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री पवन कुमार, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, लखीसराय के अभ्यावेदन/निवेदन के समीक्षोपरांत श्री कुमार द्वारा बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना के भुगतान हेतु लाभुक से रिश्वत की मांग किये जाने संबंधी(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 12 जून 2026 3 ऑडियो/सीडी प्रमाणीकरण नहीं किया जा सका। परन्तु उनके कार्यकाल में लघु सिंचाई प्रमंडल, लखीसराय की गोदाम में तीन बार चोरी हुई। तीनों बार चोरी हुई सामग्रियों/विभाग को हुई क्षति का आकलन संभव नहीं हो सका, क्योंकि उनके द्वारा बार-बार चोरी के बावजूद लेखाओं/भंडार पंजी का सम्यक् संधारण नहीं करवाया गया है। जिसके लिए श्री कुमार को स्पष्ट रूप से जिम्मेवार पाया गया । सम्यक् समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध शास्ति का विनिश्चय करते हुए विभागीय पत्रांक-7612 दिनांक-14.10.25 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँच पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन, आरोपित पदाधिकारी के अभ्यावेदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-सं0सं0-05/प्रो0-42-04/2025 4417 दिनांक-05.02.26 से प्राप्त परामर्श के सम्यक् समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत ''03(तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' की शास्ति अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
अतः अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री पवन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी-सह-सहायक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, अररिया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत ''03(तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' की शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित की जाती है।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,