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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 30 June 2026

Published 30 June 2026

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2026-06-30.691
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 असाधारण अंक (cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 9 आषाढ़ 1948 (श0)

(सं0 पटना 691) पटना, मंगलवार, 30 जून 2026 02/रेगु॰-02-7003/2021—1231

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संकल्प

25 जून 2026

विषयः- बिहार गन्ना उद्योग निवेष प्रोत्साहन नीति-2026 की स्वीकृति

बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। कृषि आधारित उद्योगों में चीनी तथा गन्ना आधारित उद्योगों का महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्य में गन्ना आधारित उद्योग यथा-चीनी मिल, डिस्टीलरी/इथनॉल उत्पादन, सह-विद्युत उत्पादन, कम्प्रेस्ट बायोगैस, कार्बनिक खाद एवं अन्य उद्योग के विकास की असीम सम्भावनाएं हैं।

राज्य के किसानों एवं मजदूरों के हित में चीनी मिलों के तकनीकी उन्नयन और क्षमता विस्तार को प्रोत्साहित करने एवं राज्य मेें नई चीनी मिलों एवं गन्ना आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु पूँजी निवेष को आकर्षित करने के नीतिगत्‌ निर्णय अन्तर्गत गन्ना प्रोत्साहन पैकेज, 2006 एवं संषोधित प्रोत्साहन पैकेज-2014 की घोषणा की गई थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 तक बिहार राज्य में कार्यरत्‌ चीनी मिलों की कुल पेराई क्षमता 33500 टी॰सी॰डी॰ थी, सरकार के प्रोत्साहन नीति 2006 एवं संषोधित प्रोत्साहन पैकेज-2014 के कारण वर्त्तमान्‌ में कुल क्षमता बढ़कर 65450 टी॰सी॰डी॰ हो गयी है। छोआ पर आधारित डिस्टीलरी की क्षमता सिर्फ 75 के॰एल॰पी॰डी॰ थी, जो वर्त्तमान में बढ़कर 530 के॰एल॰पी॰डी॰ हो गयी है। चीनी तथा गन्ना आधारित उद्योगोें के द्वारा पूर्व में सह-विद्युत उत्पादन नहीं किया जाता था। अब चीनी मिलों द्वारा 88.5 मेगावाट का सह-विद्युत उत्पादन किया जा रहा है एवं बिहार राज्य की विद्युत कम्पनी को आपूर्ति की जा रही है। इन सभी उपलब्धियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विषेष रूप में चीनी मिलों के आरक्षित क्षेत्र के किसानों के आय में वृ़द्धि हुई है तथा उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा सात निष्चय-3 के तहत्‌ "समृद्ध उद्योग-सषक्त बिहार" अन्तर्गत राज्य में पुरानी बंद पड़ी चीनी मिलों को चरणवद्ध रूप से चालू करने तथा नई चीनी मिलों की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में एक 'उच्चस्तरीय समिति' का गठन किया गया है। बंद पड़ी सभी चीनी मिलों के पुनर्परिचालन एवं नई मिलों की स्थापना तथा राज्य में गन्ना क्षेत्र के विस्तार हेतु विषेष आर्थिक पैकेज की आवष्यकता है।

राज्य में निजी क्षेत्र/सार्वजनिक क्षेत्र/सहकारिता क्षेत्र के उद्यमियों द्वारा नई चीनी मिलें/बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनर्परिचालन/गन्ना पर आधारित उद्योगों-डिस्टीलरी की स्थापना, सह-विद्युत उत्पादन इकाई की स्थापना, कम्प्रेस्ड बॉयोगैस प्लान्ट की स्थापना एवं वर्त्तमान चीनी मिलों एवं गन्ना आधारित उद्योगों के क्षमता विस्तार, डिस्टीलरी,(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 2 इथनॉल इकाइयों एवं सह-विद्युत उत्पादन इकाइयों के क्षमता विस्तार हेतु बिहार गन्ना उद्योग निवेष प्रोत्साहन नीति-2026 तैयार किया गया है। यह नीति सरकार द्वारा अधिसूचना की तिथि से 31 मार्च, 2031 तक लागू रहेगा। 1. नीति दर्षन ः-'बिहार में प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, प्रोत्साहन और अन्य संबद्ध सहयोग करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाकर गन्ना क्षेत्र को प्रोत्साहित और सवंर्द्धित करना ताकि किसानों को उच्चतर लाभ दिया जा सके और रोजगार के अधिक अवसरों को पैदा किया जा सके।'

2. उद्देष्य :-राज्य में गन्ना क्षेत्र के समग्र वृद्धि और विकास के लिए किसानों की ऊपज पर लाभ प्रदान करने के लक्ष्य के साथ निम्नलिखित उद्देष्यों को प्राप्त करना नीति का लक्ष्य हैः-

2.1. बिहार में गन्ना क्षेत्र में वित्तीय सहायता तथा अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेष को सरल बनाना और प्रोत्साहन देना,

2.2 प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाना, अपव्यय में कमी करना, मूल्य संवर्द्धन करना और निर्यात को प्रोत्साहन देना जिससे गन्ना क्षेत्र का समग्र विकास हो सके।

2.3 नई एकीकृत गन्ना मिलों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता का विस्तार करने के अतिरिक्त राज्य में कार्यरत मिलों की तकनीकी उन्नयन और विस्तार करना। 2.4 उपज के बेहतर प्रसंस्करण से प्राप्त बेहतर रिटर्न द्वारा किसानों की आय को बढ़ाना। 2.5 गन्ना उद्योगों को प्रोेत्साहन के माध्यम से रोजगार के नये अवसरों को पैदा करना। 2.6 बंद पड़ी सभी चीनी मिलों का पुनर्परिचालन एवं नई मिल की स्थापना करना।

3. बिहार गन्ना उद्योग निवेष प्रोत्साहन नीति 2026 की मुख्य विषेषताएँ :

3.1 यह नीति बिहार राज्य में एकीकृत गन्ना मिलों की स्थापना/ आधुनिकीकरण/विस्तार के लिए उद्यमी/सुयोग्य निवेषकों को प्रतिपूर्ति/आर्थिक सहायता/पूँजी अनुदान प्रदान करेगी। निवेषक/ उद्यमी अपनी इकाइयों को स्वामित्व, भागीदारी फर्म, एलएलपी, कम्पनी, सहकारी सोसाइटी आदि के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

3.2 यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी और 5 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी। यह पैकेज 31 मार्च, 2029 तक एस॰आई॰पीे॰बीे॰ अनुमोदित मामलों के लिए मान्य होगा। जिस कम्पनी ने गन्ना प्रोत्साहन पैकेज 2014 के अधीन लाभ लिया है; उन्हें अनुदान/प्रतिपूर्ति शेष वर्षों के लिए अनुमान्य होगा, जबकि इस नीति में अन्तर्निहित प्रोत्साहन राषि प्रभावी तिथि के बाद के प्रभाव से अनुमान्य होगा।

4. समावेषन :-यह नीति पूरे बिहार राज्य में लागू होगी। 5. बिहार गन्ना उद्योग निवेष प्रोत्साहन नीति 2026 के अधीन प्रोत्साहन राषि ः-यह नीति राज्य में गन्ना क्षेत्र एवं संलग्न उद्योगों में निवेष संभावनाओं को बढ़ाने के लिए पूँजी अनुदान की जरूरत की पहचान करती है। 5.1 मार्गदर्षक सिद्धांत : 5.1.1 यह प्रावधान सभी पात्र परियोजनाओं/मिलों पर इस नीति के अधीन लागू होंगे। 5.1.2 इस नीति के अधीन लाभ के लिए आवेदन करने वाले निवेषक को आरबीआई/सेबी द्वारा अनुमोदित अधिसूचित राष्ट्रीय बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा तैयार किए गए बैंक मूल्यांकन रिपोर्ट के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) उपलब्ध कराना होगा, जो इकाई के लिए सावधि ऋण का विस्तार करने की क्षमता वाला हो। बैंक/वित्तीय संस्थान द्वारा तैयार किए गए मूल्यांकन रिपोर्ट प्रोत्साहन राषि की गणना के लिए परियोजना लागत का आकलन करने हेतु आधार मानी जायेगी।

5.1.3 इस नीति के अधीन पूँजी अनुदान की गणना के प्रयोजन के लिए नियत पूँजी निवेष (एफ॰सी॰आई॰) का अर्थ डीपीआर में यथा परिभाषित निवेष से होगा।

5.1.4 परियोजना के पूर्ण होने और परिचालन की समय सीमा परियोजना अनुमोदन की तिथि से अधिकतम 36 महीनों के लिए होगी।

5.1.5 परियोजना/मिलों के स्वामित्व या प्रबंधन में बदलाव की दषा में गन्ना उद्योग विभाग यथा परिभाषित सक्षम प्राधिकारी को समय-समय पर सूचित किया जाएगा। यदि अपेक्षित हो, शेष प्रोत्साहन राषि के लिए एक संषोधित पत्र/पात्रता प्रमाण-पत्र परियोजना/मिलों (नये स्वामी के नाम पर) को जारी किया जाएगा। पात्रता अवधि किसी भी परिस्थिति में बढ़ाई नहीं जाएगी और उत्पादन की मूल तिथि के प्रभाव से परिभाषित की जाती रहेगी। 5.1.6 इस नीति के अधीन नई चीनी मिल की स्थापना/बंद पड़ी चीनी मिल का पुनर्परिचालन/क्षमता विस्तारीकरण/आधुनिकीकरण/रूपांतरण का अभिप्राय कार्यरत मिल द्वारा चीनी मिल में अतिरिक्त 1000 टी.सी.डी. (टन क्रषिंग प्रति दिन)/इथेनॉल आसवनी में 15 के.एल.पी.डी. (कि॰ली॰ प्रति दिन) की अतिरिक्त क्षमता वृद्धि/सह-विद्युत उत्पादन में 5 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता वृद्धि से है।(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 3 5.2 इस नीति के अधीन सहायता : 5.2.1 नयी चीनी मिलों की स्थापना के लिए सहायता/कार्यरत चीनी मिलों की क्षमता विस्तार :

(क) नयी चीनी मिलों की स्थापना/बंद पड़ी पुरानी चीनी मिलों के भूमि पर न्यूनतम 3500 टीसीडी क्षमता वाले चीनी मिल स्थापित करने पर तथा कार्यरत चीनी मिलों की क्षमता विस्तार न्यूनतम 1000 टी.सी.डी. करने पर, निम्नलिखित विवरण के अनुसार विषेष पूँजी अनुदान/ आर्थिक सहायता/प्रतिपूर्ति अनुमान्य होगा :-

क्र॰ सं॰ अनुदान/सहायता मात्रा (Quantum)
i नियत पूँजी निवेष (प्लान्ट एवं मषीनरी) के क्रय एवं स्थापना (Erection and Commissioning) एवं स्थापना हेतु नींव निर्माण पर पूँजी अनुदान (क) नयी चीनी मिल की स्थापना/बंद पड़ी पुरानी चीनी मिलों के भूमि पर न्यूनतम्‌ 3500 टीसीडी क्षमता वाले नयी चीनी मिल स्थापित करने पर मिल परिचालन के एक माह पश्चात्‌ 70.00 करोड़ रूपये को (5 समान वार्षिक किस्तों में) 5 वर्षों की अवधि मे देय होगी। 3500 टीसीडी ं क्षमता से उपर प्रत्येक 100 टीसीडी पर 2.00 करोड़ रूपये अतिरिक्त देय होगी। (ख) कार्यरत चीनी मिलों की क्षमता विस्तार न्यूनतम 1000 टीसीडी करने पर 15.00 करोड़ रूपये देय होगी। 1000 टीसीडी क्षमता से उपर प्रत्येक 100 टीसीडी पर 1.50 करोड़ रूपये अतिरिक्त देय होगी।
ii कर संबंधी प्रोत्साहन 5 वर्षो के लिए उत्पादित चीनी/ कार्यरत चीनी मिलों की क्षमता विस्तार के उपरान्त अतिरिक्त उत्पादित चीनी पर Net SGST (नेट एस.जी.एस.टी.) की 100 प्रतिषत प्रतिपूर्ति।
iii स्टाम्प शुल्क और क्रय की गई भूमि पर रजिस्ट्रीकरण की प्रतिपूर्ति। नयी चीनी मिल की स्थापना / क्षमता विस्तार के लिए भूमि की खरीद पर देय निबंधन शुल्क और स्टाम्प शुल्क पर 100 प्रतिषत प्रतिपूर्ति।

(i) गन्ना उद्योग विभाग/बिहार राज्य चीनी निगम की उपलब्घ भूमि पर 5000 टीसीडी क्षमता की नयी चीनी मिल स्थापित करने पर 40.00 एकड़ तक की भूमि पर 1.00 रू॰ की टोकन राषि पर 30 वर्ष की अवधि की लीज पर जमीन आवंटित की जायेगी। 40.00 एकड़ से उपर भूमि पर भूमि आवंटन के समय लागू एम.वी.आर का 3 प्रतिषत प्रतिवर्ष प्रति एकड़ की दर से 30 वर्ष की अवधि की लीज पर जमीन आवंटित की जायेगी।

(ii) गन्ना उद्योग विभाग/बिहार राज्य चीनी निगम की उपलब्घ भूमि पर 3500 टीसीडी क्षमता की नयी चीनी मिल स्थापित करने पर 25.00 एकड़ तक की भूमि पर 1.00 रू॰ की टोकन राषि पर 30 वर्ष की अवधि की लीज पर जमीन आवंटित की जायेगी। 25.00 एकड़ से उपर भूमि पर भूमि आवंटन के समय लागू एम.वी.आर का 3 प्रतिषत प्रतिवर्ष प्रति एकड़ की दर से 30 वर्ष की अवधि की लीज पर जमीन आवंटित की जायेगी।

(iii) उपरोक्त दोनों मामलों में लीज अवधि समाप्त होने के पश्चात्‌ समरूप अथवा उससे कम के लिए पूर्ण जमीन पर समरूप दर तत्कालीन एम.वी.आर. के आधार पर जमीन का नवीनीकरण किया जा सकेगा। यह दर मात्र चीनी मिल चलाने के लिए लागू होगी।

(ग) चीनी मिलों का आधुनिकीकरण/अपग्रेडेषन ः-राज्य की कार्यरत चीनी मिल द्वारा अपनी चीनी मिल का आधुनिकीकरण/ अपग्रेडेषन किया जाता है अथवा यदि कोई, विषेष श्रेणी (Special grade) के चीनी तथा International Commission for Uniform Methods of Sugar Analysis (ICUMSA) के मानक के अनुरूप, चीनी उत्पादन करने हेतु रिफाइनरी में परिवर्तित करना चाहता है तो उसे नियत पूँजी निवेष (FCI) का 20 प्रतिषत या अधिकतम 5 करोड़ रूपये तक, जो भी कम हो देय होगा।

5.2.2 आसवनी (डिस्टीलरी)/इथेनॉल इकाई की स्थापना/क्षमता बढ़ोत्तरी के लिए सहायता :

(क) चीनी मिल के साथ न्यूनतम 45 के.एल.पी.डी. (कि॰ली॰ प्रति दिन) क्षमता की नई इथेनॉल इकाई की स्थापना या कार्यरत इकाइयों में न्यूनतम 15 के.एल.पी.डी. क्षमता विस्तार/आधुनिकीकरण/रूपांतरण, इकाइयाँ एकल फीड या बहु (Multi) फीड(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 4 हो सकती है जो केवल 100% ईंधन-ग्रेड इथेनॉल का उत्पादन करती है। इन इकाइयों को मोलासेस को फीड स्टॉक के रूप में उपयोग करने की प्राथमिकता देनी होगी। इस हेतु पूँजी अनुदान/आर्थिक सहायता/प्रतिपूर्त्ति निम्नलिखित विवरण के अनुसार किया जाएगा :-

क्र॰ सं॰ अनुदान/सहायता मात्रा (Quantum)
i नियत पूँजी निवेष (प्लान्ट एवं मषीनरी) के क्रय एवं स्थापना (Erection and एवं Commissioning) स्थापना हेतु नींव निर्माण पर पूँजी अनुदान चीनी मिलों के साथ न्यूनतम 45 केएलपीडी नई डिस्टीलरियों/ इथनॉल इकाई की स्थापना तथा न्यूनतम 15 केएलपीडी क्षमता विस्तार पर किये गये अचल पूँजी निवेष (प्लांट एवं मषीनरी) पर 15 प्रतिषत या अधिकतम 5 करोड़ तक जो भी कम हो।
ii ब्याज आर्थिक सहायता कारखानों द्वारा लिए गए सावधि ऋण पर ब्याज आर्थिक सहायता आवधि ऋण पर 10% ब्याज या वास्तविक ब्याज दर, जो भी कम हो, 5 वर्ष की अवधि तक ब्याज आर्थिक सहायता समर्थन पर अधिकतम परियोजना लागत का 50 प्रतिषत अधिकतम 20 करोड़ रूपये तक।
iii कर संबंधी प्रोत्साहन राशि 5 वर्षो तक के लिए उत्पादित इथेनॉल/ कार्यरत चीनी मिलों की क्षमता विस्तार के उपरान्त अतिरिक्त उत्पादित इथेनॉल पर Net SGST (नेट एस. जी.एस.टी.) की 100% प्रतिपूर्ति।
iv स्टाम्प शुल्क और क्रय की गई भूमि पर रजिस्ट्रीकरण की प्रतिपूर्ति। नये आसवनी की स्थापना/ क्षमता विस्तार के लिए भूमि की खरीद पर देय निबंधन शुल्क और स्टाम्प शुल्क पर 100 प्रतिषत प्रतिपूर्ति।

(क) चीनी मिल के साथ न्यूनतम 10 मेगावाट क्षमता की नयी सह-विद्युत उत्पादन इकाई या न्यूनतम 5 मेगावाट क्षमता की कार्यरत सह-विद्युत उत्पादन इकाई की क्षमता विस्तार पर निम्न प्रकार से पूँजी अनुदान/आर्थिक सहायता देय होगा :-

क्र॰ सं॰ अनुदान/सहायता मात्रा
i नियत पूँजी निवेष (प्लान्ट एवं मषीनरी) के क्रय एवं स्थापना (Erection and एवं Commissioning) स्थापना हेतु नींव निर्माण पर पूँजी अनुदान चीनी मिलों के साथ न्यूनतम 10 मेगावाट की नई सह-विद्युत उत्पादन इकाई की स्थापना या कार्यरत इकाइयों में न्यूनतम 5 मेगावाट क्षमता विस्तार पर नियत पूँजी निवेष (एफसीआई) का 20 प्रतिषत अनुदान (अधिकतम 15 करोड़ रूपये तक)।
ii स्टाम्प शुल्क और क्रय की गई भूमि पर रजिस्ट्रीकरण की प्रतिपूर्ति। नयी सह-विद्युत उत्पादन इकाई की स्थापना /क्षमता विस्तार के लिए भूमि की खरीद पर रजिस्ट्रीकरण षुल्क और स्टाम्प षुल्क पर 100 प्रतिषत प्रतिपूर्ति।

(ख) चीनी मिलों द्वारा सह-विद्युत उत्पादन किये जाने की स्थिति में अतिरिक्त उत्पादित विद्युत पर बिहार वितरण कम्पनी से पावर पर्चेज एग्रीमेन्ट (PPA) किया जायेगा तथा चीनी मिल के सह-विद्युत उत्पादन संयन्त्र से 10 कि॰मी॰ तक के संचरण लाइन के निर्माण के खर्च संबंधित DISCOM (डिस्कॉम) द्वारा वहन किया जायेगा। (ग) चीनी मिल द्वारा उत्पादित अधिषेष विद्युत भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी टैरिफ नीति-2016 के प्रावधान के अनुसार DISCOM (डिस्कॉम) द्वारा क्रय की जायेगी।

(घ) नई पावर परचेज एग्रीमेन्ट (PPA)/नवीनीकरण/एग्रीमेन्ट का विस्तार एवं विद्युत टैरिफ के निर्धारण आदि से संबंधित कार्रवाई ऊर्जा विभाग, बिहार, पटना द्वारा निर्धारित दिषा-निर्देष एवं माप-दंड के अनुसार ऊर्जा विभाग, बिहार, पटना द्वारा की जायेगी।

5.2.4 कम्पे्रस्ड बॉयोगैस प्लान्ट (CBG) के लिए प्रोत्साहन ः-चीनी मिल के साथ न्यूनतम 5 टीपीडी (5000 कि॰ग्रा॰) क्षमता की नयी कम्पे्रस्ड बॉयोगैस प्लान्ट की स्थापना पर निम्न प्रकार से पूँजी अनुदान/आर्थिक सहायता देय होगा-(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026

क्र॰ सं॰ अनुदान/सहायता मात्रा (Quantum)
i नियत पूँजी निवेष (प्लान्ट एवं मषीनरी) के क्रय एवं स्थापना (Erection and Commissioning) एवं स्थापना हेतु नींव निर्माण पर पूँजी अनुदान न्यूनतम 5 टीपीडी (5000 कि॰ग्रा॰) क्षमता की नयी कम्प्रेस्ड बॉयोगैस के प्लान्ट एवं मषीनरी के निवेष पर 15 प्रतिषत या अधिकतम 5 करोड़ तक, जो भी कम हो।
ii ब्याज आर्थिक सहायता 5 वर्षो के लिए सावधि ऋण पर 10 प्रतिषत तक ब्याज अनुदान या वास्तविक ब्याज (जो कम हो), अधिकतम परियोजना लागत का 30 प्रतिषत अधिकतम 10 करोड़ रूपये।
iii कर संबंधी प्रोत्साहन 5 वर्षो की अवधि के लिए Net SGST (नेट एस.जी.एस.टी.) की 100% प्रतिपिूर्ति।
iv क्रय की गयी भूमि पर स्टांप षुल्क और रजिस्ट्रीकरण की प्रतिपूर्ति नयी कम्पे्रस्ड बॉयोगैस प्लान्ट (CBG) की स्थापना के लिए भूमि की खरीद पर देय निबंधन शुल्क और स्टाम्प शुल्क पर 100 प्रतिषत प्रतिपूर्ति।

5.3 कैपिंग प्रोत्साहन ः-नीति के अधीन कुल ब्याज आर्थिक सहायता एवं पूँजी अनुदान, अनुमोदित परियोजना लागत का 33 (तैंतीस) प्रतिषत होगा (बैंक मूल्यांकन प्रतिवेदन के अनुसार स्वीकृत परियोजना लागत पर)।

5.4 केन्द्र एवं राज्य सरकार की नीतियों एवं योजनाओं से सामंजस्य स्थापित करना। 5.4.1 केन्द्र सरकार की योजनाओं के साथ प्रोत्साहन का सामंजस्य इस नीति के अधीन अनुमत होगा। भारत सरकार की किसी योजना के अधीन प्रोत्साहक (प्रमोटर) द्वारा उठाए गए लाभ/उठाए जानेवाले लाभ की दषा में जिसमें राज्य का हिस्सा हो या राज्य सरकार की योजना से आगे जुड़ा हो, इस नीति के लिए प्रोत्साहन की गणना के प्रयोजन हेतु अनुमोदित परियोजना लागत राज्य सरकार से लिए गए प्रोत्साहन लाभ के तदनुरूप परियोजना लागत से घटाकर प्राप्त की जायेगी।

यदि निवेषक केन्द्र सरकार की योजना अन्तर्गत कोई अनुदान प्राप्त करता है तो उनके द्वारा प्राप्त किये गये/प्राप्त किये जानेवाले अनुदान की राषि को बिहार गन्ना उद्योग निवेष प्रोत्साहन नीति, 2026 अर्थात्‌ इस नीति अन्तर्गत अनुमान्य तत्स्थानी अनुदान (Corresponding Subsidy) से घटा दिया जायेगा। उदाहरण के लिए यदि एक निवेषक केन्द्र सरकार की एक योजना अन्तर्गत 6 प्रतिषत ब्याज अनुदान प्राप्त करता है तथा उनके द्वारा लिये गये सावधि ऋण पर लागू ब्याज का दर 10 प्रतिषत है तो इस नीति में उल्लिखित अधिसीमा के अधीन शेष 4 प्रतिषत इस अन्तर्गत अनुमान्य होगा। 5.4.2 राज्य सरकार की नीतियों एवं योजनाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करना। राज्य सरकार की नीति एवं योजना के साथ प्रोत्साहन सामंजस्य इस नीति के अधीन अनुमत होगा। बिहार सरकार के किसी योजना के अधीन प्रोत्साहक द्वारा प्राप्त अनुदान/प्राप्त किये जानेवाले अनुदान की दषा में इस नीति के लिए प्रोत्साहन की गणना के प्रयोजनार्थ अनुमोदित परियोजना लागत राज्य सरकार से पूर्व में लिए गए प्रोत्साहन राषि के तदनुरूप परियोजना लागत को घटाकर प्राप्त किया जायेगा। गैर चीनी मिल जिलों में गन्ना क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना के तहत किसानों को प्रोत्साहित किया जायेगा और उक्त योजना का लाभ भी प्रदान किया जायेगा। निवेषकों को भारत सरकार के किसी अन्य मंत्रालय या विभाग या राज्य सरकार के विभाग या उनकी एजेंसियों से समान घटक/उद्देष्य/गतिविधियों के सब्सिडी/आर्थिक सहायता/ अनुदान/प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन ना करने या आवेदन नहीं करने पर घोषणा प्रस्तुत करनी होगी।

6. निवेषक/आवेदक और पात्रता :

6.1 निवेषक/आवेदक 6.1.1 इस नीति के अधीन स्वामित्व, भागीदारी, फर्म, एलएलपी, कम्पनी, कॉपरेटिव (सहकारी) सोसाइटी, निजी क्षेत्र इत्यादि वित्तीय सहायता के योग्य होंगे।

6.1.2 निम्नलिखित के लिए निवेषक/आवेदक जिम्मेवार होंगें।

(क) नीति संबंधी दस्तावेजों एवं विवरणों को ध्यानपूर्वक पढ़ने और अपेक्षित मार्गदर्षिका

के अनुरूप आवेदन समर्पित करना।(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 6 (ख) विस्तृत योजना प्रतिवेदन (डी॰पी॰आर॰) को सूत्रबद्ध करने और दिये गये आवेदन

फॉर्मट के अनुरूप कार्यान्वयन समय से सुनिष्चित करना।

(ग) परियोजना के लिए वित्त और प्राप्त अनुदान का समय और समझदारी से उपयोग सुनिष्चित करना और लाभप्रदता और समय से अदायगी सुनिष्चित करना। (घ) पर्यावरण संबंधी अनुमति/सांविधिक अनुमति/स्वीकृति प्राप्त करने जो परियोजना

के आरंभ एवं संचालन करने के लिए पूर्व अपेक्षित हों।

(ड़) विनिर्दिष्ट समयसीमा में वित्तीय समापन को पूरा करने और परियोजना को समय से

पूरा करना सुतिष्चित करना।

(च) सामान्य सुविधाएँ और समर्थकारी आधारभूत संरचना को रखने और संधारित करना। (छ) परियोजना कार्यान्वयन के समुचित लेखे को संधारित करने और परियोजना के प्रवर्त्तन करने के पश्चात्‌ सामान्य सुविधाओं और आधारभूत संरचना का अनुरक्षण करना।

(ज) परियोजना का प्रगति प्रतिवेदन बिहार सरकार को सौपने/साइट के फोटोग्राफ/तस्वीर सहित देय प्रगति प्रतिवेदन सुपुर्द करने और अनुश्रवण को सुसाध्य बनाने तथा जब और जैसा अपेक्षित हो, निरीक्षण करना।

(झ) बिहार सरकार की सहमति से चयनित निवेषक द्वारा हस्ताक्षरित सभी षर्तों एवं

निबंधनों का पालन करना।

6.2 पात्रता :

6.2.1 इस नीति के अधीन समर्पित किये जानेवाले परियोजना प्रस्ताव को बैंक/वित्तीय संस्था द्वारा सम्यक रूप से मूल्यांकन किया जाना और सावधि ऋण का लाभ उठाना अपेक्षित है। बैंक/वित्तीय संस्था से सावधि ऋण, परियोजना लागत के 20 प्रतिषत से कम नहीं होना चाहिए।

6.2.2 वित्तीय संस्थान/बैंक से परियोजना मूल्यांकन के प्रतिवेदन में योजना के सभी घटक अवष्य षामिल होने चाहिए, जिसके लिए पूँजी अनुदान की मांग की जाती हो।

6.2.3 परियोजना को उद्योग विभाग, बिहार, पटना के राज्य निवेष प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) के Stage-I की मंजूरी प्राप्त होनी चाहिए।

7. नीति का कार्यान्वयन, अनुश्रवण एवं षिकायत निवारण :-

7.1 नीति का कार्यान्वयन : 7.1.1 गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार, नोडल एजेंसी होगा जो राज्य में इस नीति के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगा। गन्ना उद्योग विभाग इस नीति के नोडल एजेंसी के रूप में बदली हुई परिस्थिति के अनुरूप कार्यकारी आदेष के माध्यम से संषोधन/विलोपन के प्रावधानो और दिषा निर्देषों को संषोधित कर सकेगा।

7.1.2 ईखायुक्त, बिहार की अध्यक्षता में विभाग प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा और इस नीति के अधीन आवेदक निवेषकों को पूँजी अनुदान/आर्थिक सहायता/प्रतिपूर्ति को उपलब्ध कराने की अनुमति के लिए एक परियोजना अनुश्रवण समिति (Project Monitoring Committee-PMC) गठित करेगा।

क्र॰सं॰ पदनाम स्थिति
1 ईखायुक्त, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार अध्यक्ष
2 संयुक्त सचिव/उप सचिव, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार सदस्य
3 आंतरिक वित्तीय सलाहकार/वित्त विभाग, बिहार सरकार का प्रतिनिधि सदस्य
4 संयुक्त ईखायुक्त/सहायक ईखायुक्त, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार सदस्य सचिव
5 निदेशक, (एम.एस.एम.ई. निदेषालय), उद्योग विभाग, बिहार सरकार सदस्य
6 संयुक्त निदेशक (ईख विकास),गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार सदस्य

आवेदक की पात्रता के आधार पर अनुदान की मंजूरी और संवितरण का निर्णय करेगी। 7.1.4 इस नीति के अधीन निवेषकों को सुविधा प्रदान करने और नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रस्ताव अनुदान गणना और संवितरण की समीक्षा में पी॰एम॰सी॰ और विभाग की सहायता के लिए तकनीकी सहायता समूह (टी॰एस॰जी॰) नियुक्त किया जा सकेगा।

7.1.5 इस नीति के कार्यान्वयन एवं पूँजी अनुदान के दावों के निपटारा के लिए गन्ना उद्योग विभाग विस्तृत मार्गदर्षिका निर्गत करेगी।(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 7 7.2 अनुश्रवण नीति एवं षिकायत निवारण 7.2.1 इस नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा समय-समय पर की जायेगी और इस नीति के उद्देष्यों की पूर्ति के लिए प्रक्रिया सुधार एवं आवष्यक सरलीकरण आवष्यकतानुसार किया जायेगा। पी॰एम॰सी स्वीकृत परियोजनाओं के कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए जिम्मेवार होगें। 7.2.2 व्यवसाय को सरल बनाने के लिए सरकारी प्रयास के रूप में आवेदन/संबद्ध प्राधिकारी से अनुमति तथा संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क स्थापित करने के विभिन्न चरणों में निवेषकों की तत्काल सहायता के लिए विभाग निवेषक सुविधा सेवा डेस्क स्थापित करेगा। 7.2.3 सभी मामलों की व्याख्या/विवादों का निर्णय गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव के द्वारा किया जायेगा एवं उनका निर्णय अंतिम होगा। 7.3 सामान्य षर्त्तेः-इस नीति के अधीन पूँजी सहायिकी प्रतिपूर्ति का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित सामान्य षर्त्ते लागू होंगी :

7.3.1 यदि प्रोत्साहन का लाभ लेने के प्रयोजन से कोई झूठी घोषणा की जाती है या यदि निवेषक/इकाई, न्यूनतम निवेष करने में असफल होते हैं या यदि प्रोत्साहन का लाभ किसी ऐसी इकाई द्वारा ली जाती है, जो योग्य नहीं था या इस नीति के षर्त्तो का उल्लंघन हुआ हो तो अनुदान/प्रतिपूर्ति/आर्थिक सहायता की राषि अनुदान विमुक्ति की तिथि से 18 प्रतिषत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से वसूली की जायेगी। निर्धारित तिथि तक भुगतान नहीं करने पर राज्य सरकार भू-राजस्व की भाँति सूद सहित बकायों की राषि वसूली करेगी।

7.3.2 उत्पादन तिथि उस तिथि को निर्दिष्ट करता है जबसे कारखाने द्वारा व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ किये हों जिसके लिए निबंधित हुआ था। उत्पादन की तिथि संयुक्त निदेषक, गन्ना उद्योग विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति जिसमें संबंधित जिला के महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र एवं श्रम अधीक्षक सदस्य हो, के द्वारा भौतिक निरीक्षण के पश्चात्‌ निर्गत प्रमाण-पत्र के आधार पर निर्धारित की जाएगी।

7.3.3 राज्य निवेष प्रोत्साहन बोर्ड/राज्य मंत्रिमंडल, से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की स्वीकृति की तिथि से तीन वर्षो के अन्दर व्यावसायिक उत्पादन करनेवाले कारखाने इस नीति के अधीन प्रोत्साहन राषि के लिए योग्य होंगे। सुगर कॉम्प्लेक्स (नयी चीनी मिल, डिस्टीलरी एवं को-जेन की स्थापना) के मामले में व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने की तिथि से 5 वर्षो तक छूट देय होगी।

7.3.4 इस नीति के अधीन नयी इकाइयों द्वारा उत्पादन/मौजूदा इकाई की क्षमता में बढ़ोत्तरी की तिथि से पाँच वर्षो की अवधि तक सहायता प्राप्त करने योग्य होगी।

7.3.5 आसवनी इकाइयों के मामले में, इस नीति के तहत्‌ राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 और राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति द्वारा अनुमोदित फीडस्टॉक इथेनॉल उत्पादन के लिए मान्य होगी। किसी भी अतिरिक्त फीडस्टॉक के अनुमति के बाद इथेनॉल उत्पादन के लिए स्वचालित रूप से अनुमति दी जायेगी।

7.3.6 वैसी इथेनॉल निर्माण इकाइयाँ इस नीति के तहत्‌ वित्तीय सहायता के लिए पात्र होगी जो इंधन ग्रेड इथेनॉल का उत्पादन करेगी और भारत सरकार के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ई॰वी॰पी॰) के तहत्‌ तेल विनिर्माण कम्पनियों (OMCs) को अपने इथेनॉल का 100% आपूर्ति करेगी। इस उद्देष्य के लिए, वित्तीय मंजूरी के समय कम्पनियाँ, या तो (i) यूनिट, उनके बैंकरों और तेल विपणन कम्पनियों (OMCs) के बीच त्रिपक्षीय समझौतें की एक प्रति, या (ii) यूनिट द्वारा निर्मित इथेनॉल की सोर्सिंग के लिए तेल विपणन कम्पनियों (OMCs) से खरीद आदेष की प्रति प्रस्तुत करेगी।

7.3.7 चीनी मिल/डिस्टीलरी/को-जेन की स्थापना के लिए नियत पूँजी निवेष (प्लान्ट एवं मषीनरी) के क्रय एवं स्थापना (Erection and Commissioning) एवं स्थापना हेतु नींव निर्माण पर पूँजी अनुदान व्यवसायिक उत्पादन के शुरू होने के पश्चात्‌ देय होगा। प्रथम वर्ष में नये कारखानों/विस्तार इकाइयों का क्षमता प्रदर्षन नहीं किये जाने की दषा में अगले पेराई सत्र में क्षमता का प्रदर्षन करने के पश्चात्‌ ही अनुदान देय होगा। 7.3.8 गन्ना उद्योगों एवं इसके उप उत्पादों के लिए उपबंधित अनुदान/आर्थिक सहायता अन्य गन्ना आधारित उद्योगों को भी देय होगा।

8. परिभाषाएँ ः-इस नीति के तहत्‌ विभिन्न लाभों को प्रदान करने के लिए कुछ विषिष्ट परिभाषाएँ निम्नवत्‌ है :

(क) ''पेराई वर्ष'' से अभिपे्रत है किसी वर्ष के जुलाई के प्रथम दिन से आरम्भ होकर अगले वर्ष के 30 जून को समाप्त होनेवाला वर्ष;

(ख) ''कारखाना'' से अभिप्रेत है कोई परिसर जिसके अन्तर्गत उसकी परिसीमा का ऐसा भाग हो जहाँ निर्वात-पात्र (वैक्यूम पैन) प्रक्रिया के माध्यम से चीनी विनिर्मित की जाती है।(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 8 (ग) ''नया कारखाना'' ''नई इकाई'' से अभिप्रेत है ऐसा कारखाना/ऐसी इकाई जिसमें इस अधिसूचना के निर्गत होने की तिथि के पश्चात्‌ व्यावसायिक उत्पादन प्रारम्भ हो चुका हो नया कारखाना से निम्नलिखित षर्त्तो को पूरा करने की अपेक्षा होगी।

(i) पहले से अस्तित्व में रहने वाले व्यवसाय का बँटवारा कर अथवा पुनर्गठन कर यह

स्थापित न हो, या

(ii) नयी इकाई के किसी अन्य प्रयोजन के लिए पूर्व में प्रयुक्त संयंत्र एवं मषीनरी के

अंतरण से यह स्थापित न हो,

(iii) दूसरी जगह से स्थानांतरित किया गया न हो और/या नये नाम और तरीके से

मौजूदा इकाई पुनः नहीं खोली गई हो।

(घ) ''कार्यरत कारखाना'' से अभिपे्रत है वह कारखाना जिसमें इस अधिसूचना

की तिथि से या पूर्व से व्यावसायिक उत्पादन होता हो।

(ड़) ''प्रभावी तिथि'' से अभिप्रेत है वह तिथि जब से लागू हो/यह नीति प्रभावी

तिथि से पाँच वर्षों तक लागू रहेगी।

(च) ''सावधि ऋण'' से अभिपे्रत है वित्तपोषण के लिए बैंको/वित्तीय संस्थाओं

द्वारा स्वीकृत एवं संवितरित सावधि ऋण।

(छ) ''विस्तार'' ऐसी परियोजनायें जो प्रारम्भिक स्थापित उत्पादन क्षमता में

विस्तार करती है।

(ज) ''आधुनिकीकरण'' ऐसी परियोजनायें जो आधुनिकीकरण के परिणाम स्वरूप

पूर्व स्थापित उत्पादन क्षमता में वृृद्धि करती है।

(झ) ''रूपांतरण'' मूल इकाई में नये घटकों की स्थापना के साथ अनुमोदित

परियोजना में रूपांतरित करने वाली परियोजनायें।

(ञ) ''निवेष'' या ''नियत पूँजी (एफ.सी.आई.)'' से अभिप्रेत है नये संयंत्र और मषीनरी और संबंधित अन्य नियम परिसंपत्तियों के क्रय, स्थापना एवं प्रवर्त्तन और षिलान्यास में किए गए निवेष जो व्यवसायिक उत्पादन के प्रारम्भ होने की तिथि से विनिर्मित अंतिम उत्पाद के लिए अपेक्षित हो। सड़क, चहारदिवारी, क्र्वाटर इत्यादि जैसे सिविल काम जो उत्पादन से नहीं जुड़े हो, को शामिल नहीं किया जाएगा। संयंत्र एवं मषीनरी में निम्नलिखित मानदण्ड शामिल होंगे, या पूरा करेंगे।

• संयंत्र और मषीनरी, उपयोगी वस्तुएँ, औजार और उपकरण एवं अन्य परिसंपत्तियों में किया गया निवेष अंतिम उत्पाद के विनिर्माण के लिए अपेक्षित है किन्तु परियोजनाओं में उपरगत कैप्टिव या नॉन कैप्टिव उपयोग और ब्याज पूँजी और अन्य उपभोग लागत के सिवाय भूमि, कार्यषील पूँजी प्रारंभिक और प्रवर्त्तनषील, विद्युत उत्पादन शामिल नहीं होंगे।

• इस नीति के अधीन स्थानांतरित/पुनर्नवीनीकृत/पुनर्निर्मित/संयंत्र एवं मषीनरी अनुदान के योग्य नहीं है। मषीन की खरीद खुले बाजार से सामान्य बाजार मूल्य पर की जायेगी। मषीन की खरीद संबंधित पार्टी से नहीं की जानी चाहिए और यह सुनिष्चित किया जायेगा कि क्रय ''आम्र्स लेन्थ प्राइसिंग'' से किया गया है।

(ट) ''आम्र्स लेन्थ प्राइस'' आयकर अधिनियम 1961 के उपबंध के अधीन

पारिभाषित है।

(ठ) ''वर्ष'' से अभिप्रेत है वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक और तिमाही से अभिप्रेत है तीन माह की अवधि, जो 30 जून, 30 सितम्बर, 31 दिसम्बर और 31 मार्च को समाप्त होता है।

9. अनुवादित संस्करण के अर्थ और व्याख्या में किसी भी प्रकार की विसंगति होने की स्थिति में अंग्रेजी भाषा संस्करण हर तरह से बाध्यकारी होगा और लागू होगा।

10. बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत मार्गदर्षिका निर्गत किया जायेगा एवं समय-समय पर आवष्यकतानुसार संषोधित किया जायेगा।(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 30 जून 2026 9 11- izLrko eas jkT; eaf=ifj"kn~ dh Lohd`fr fnukad&24-06-2026 dks en la[;k&39 esa lafpdk la[;k&02/रेगु॰-02-7003/2021 के पृष्ठ-210/टि॰ पर प्राप्त है।

आदेशः- आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय और इसकी सूचना सभी संबंधित पदाधिकारियों को दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से,

धर्मेन्द्र सिंह, सचिव।

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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,

(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त ।

(cid:464)बहार गजट (असाधारण) 691-571+10-डी0ट(cid:547)0पी0

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 30 June 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2026-06-30.691/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2026-06-30.691.