(cid:467)नबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40 (cid:464)बहार गजट
(cid:464)बहार सरकार (cid:430)ारा (cid:292)कािशत 17 आषाढ+ 1948 (श0) सं(cid:201)या 27 पटना, बुधवार, ————————
8 जुलाई 2026 (ई0) (cid:464)वषय-सूची पृ(cid:231)ठ भाग-1—िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:464)(cid:416)गत सूचनाएं। 2-4 भाग-1-क—(cid:232)वयंसेवक गु(cid:227)म(cid:585) के समादे(cid:231)टाओं के आदेश।
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भाग-1-ख—मै(cid:282)(cid:547)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:201)तार(cid:547) पर(cid:547)(cid:162)ाओं के पर(cid:547)(cid:162)ा-फल, काय(cid:91)(cid:272)म, छा(cid:287)वृ(cid:464)(cid:419) (cid:292)दान, आ(cid:464)द।
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भाग-1-ग—िश(cid:162)ा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:547)(cid:162)ाफल आ(cid:464)द ---
भाग-2—(cid:464)बहार-रा(cid:207)यपाल और काया(cid:91)(cid:218)य(cid:162)(cid:585) (cid:430)ारा िनकाले गये (cid:464)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आ(cid:464)द। ---
भाग-3—भारत सरकार, पि(cid:433)म बंगाल सरकार और उ(cid:205)च (cid:219)यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और रा(cid:207)य गजट(cid:585) के उ(cid:424)रण। ---
भाग-4—(cid:464)बहार अिधिनयम ---
पृ(cid:231)ठ भाग-5—(cid:464)बहार (cid:464)वधान मंडल म(cid:581) पुर:(cid:232)था(cid:464)पत (cid:464)वधेयक, उ(cid:200)त (cid:464)वधान मंडल म(cid:581) उप(cid:232)था(cid:464)पत या उप(cid:232)था(cid:464)पत (cid:464)कये जानेवाले (cid:292)वर सिमितय(cid:585) के (cid:292)ितवेदन और उ(cid:200)त (cid:464)वधान मंडल म(cid:581) पुर:(cid:232)थापन के पूव(cid:91) (cid:292)कािशत (cid:464)वधेयक।
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भाग-7—संसद के अिधिनयम िजनपर रा(cid:231)(cid:282)पित क(cid:551) (cid:207)ये(cid:231)ठ अनुमित िमल चुक(cid:551) है। ---
भाग-8—भारत क(cid:551) संसद म(cid:581) पुर:(cid:232)था(cid:464)पत (cid:464)वधेयक, संसद म(cid:581) उप(cid:232)था(cid:464)पत (cid:292)वर सिमितय(cid:585) के (cid:292)ितवेदन और संसद म(cid:581) उप(cid:232)था(cid:464)पत (cid:292)वर सिमितय(cid:585) के (cid:292)ितवेदन और संसद म(cid:581) पुर:(cid:232)थापन के पूव(cid:91) (cid:292)कािशत (cid:464)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:464)व(cid:163)ापन ---
भाग-9-क—वन (cid:464)वभाग क(cid:551) नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:464)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:464)द। 5-9
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पूरक
पूरक-क 10-162 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026
भाग-1
िनयु(cid:464)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदल(cid:547), श(cid:464)(cid:416), छु(cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य वैय(cid:464)(cid:416)क सूचनाए ं
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23 जून 2026
सं० -15/पी० 5-08/2026-868—उच्च शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या-633, दिनांक 30.04.2026 द्वारा राज्य के 208 प्रखंडों में डिग्री महाविद्यालयों की स्थापना, नामकरण, अंगीभूतिकरण एवं संचालन की स्वीकृति प्रदान की गई है।
उक्त संकल्प के द्वारा 208 प्रखंडों में स्थापित डिग्री महाविद्यालयों के औपबंधिक संचालन हेतु संकल्प के साथ संलग्न अनुलग्नक-'ख' के अनुसार चिन्हि्त संस्थानों का संसूचन किया गया है।
डिग्री महाविद्यालयों के संचालन की अपरिहार्यता एवं कुछेक जिलों के जिला पदाधिकारियों से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में सहरसा जिले के प्रखंड-नवहट्टा एवं पतरघट, भागलपुर जिले के प्रखंड-रंगराचौक, बेतिया जिले के प्रखंड-ठकराहां एवं शिवहर जिले के प्रखंड-पिपराही में डिग्री महाविद्यालयों के औपबंधिक संचालन हेतु विभागीय संकल्प सं०-633, दिनांक-30.04.2026 के अनुलग्नक-'ख' के द्वारा संसूचित संस्थानों को निम्न विवरणी के अनुसार इस शर्त्त के साथ संशोधित किया जाता है कि सरकार के स्तर से इन महाविद्यालयों के लिए आवंटित राशि के व्यय नहीं होने की स्थिति में ही स्थान परिवर्तन संबंधी अनुमति मान्य होगा।
| 1. | सहरसा | नवहट्टा | कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, कासिमपुर | कन्या मध्य विद्यालय नवहट्टा |
| 2. | सहरसा | पतरघट | उत्क्रमित उच्चतर 2 माध्यमिक विद्यालय, किशनपुर | उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पतरघट |
| 3. | भागलपुर | रंगराचौक | तेज नारायण उच्च विद्यालय, रंगरा | राजकीय संत विनोवा उच्च विद्यालय, तिनटंगा दियारा, रंगरा अवस्थित मध्य विद्यालय के अवशेष कमरों में। |
| 4. | बेतिया | ठकराहां | राजकीय मध्य विद्यालय, मुजौना | राजकीय जी.एम.यू. उच्च विद्यालय, ठकराहां |
| 5. | शिवहर | पिपराही | उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, धनकौल | मध्य विद्यालय शीतलपट्टी |
प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। विभागीय संकल्प सं०-633, दिनांक 30.04.2026 में वर्णित शेष तथ्य यथावत रहेंगे।
3 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026लघु जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
17 जून 2026
अधि0सं0 प्र0-01/ल0ज0सं0/स्था0(राज0)-03/2026-3967—सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-19300 दिनांक-13.10.2023 में निहित्त अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली, 2023 के तहत विभाग के अधीन बिहार अभियंत्रण सेवा के पदाधिकारियों को उच्चतर पद का विहित वेतनमान सहित कार्यकारी प्रभार प्रदान करने हेतु दिनांक-15.06.2026 को आहूत विभागीय स्क्रीनिंग समिति की अनुशंसा के आलोक में निम्नांकित सहायक अभियंता(याँत्रिक)(वेतन स्तर-9) को कार्यपालक अभियंता(याँत्रिक) का, उसके विहित वेतनमान(वेतन स्तर-11) सहित, अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी प्रभार प्रदान किया जाता हैः-
| क्र0 सं0 | पदाधिकारी का नाम/ आई0डी0/गृह जिला/ जन्म तिथि/से0नि0 तिथि | मूल कोटि की वरीयता क्रमांक (विभागीय पत्रांक-8315 दिनांक 18.11.2025 के अनुसार) | आरक्षण कोटि | वर्तमान कोटि |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1 | श्री पंकज कुमार/ M200001/गोपालगंज/ 10.03.1994/31.03.2054 | 01 | GEN | सहायक अभियन्ता |
| 2 | श्री नितेश/ M200002/भागलपुर/ 18.01.1993/31.01.2053 | 02 | GEN | सहायक अभियन्ता |
| 3 | श्री राजीव कुमार सिंह/ M200003/सारण(छपरा)/ 02.05.1995/31.05.2055 | 03 | GEN | सहायक अभियन्ता |
| 4 | श्री अशोक कुमार/ M200004/भागलपुर/ 23.11.1992/30.11.2052 | 04 | GEN | सहायक अभियन्ता |
| 5 | श्री रवीन्द्र कुमार साह/ M200005/मुजफ्फरपुर/ 05.03.1993/31.03.2053 | 05 | GEN | सहायक अभियन्ता |
| 6 | श्री नीतीश कुमार/ M200006/गयाजी/ 14.02.1992/29.02.2052 | 06 | GEN | सहायक अभियन्ता |
| 7 | मो0 माशूक फैजी/ M200007/पटना/ 15.03.1995/31.03.2055 | 07 | EBC | सहायक अभियन्ता |
| 8 | श्री सुजीत कुमार/ M200009/दरभंगा/ 05.12.1993/31.12.2053 | 09 | EBC | सहायक अभियन्ता |
| 9 | श्री अनुराग कुमार/ M200010/पटना/ 28.09.1994/30.09.2054 | 10 | EBC | सहायक अभियन्ता |
| 10 | श्री अभिषेक कुमार/ M200011/मुंगेर/ 14.08.1994/31.08.2054 | 11 | SC | सहायक अभियन्ता |
2. यह अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-19300 दिनांक 13.10.2023 में निहित शर्तों के अध्यधीन है ।
3. संबंधित पदाधिकारियों के पदस्थापन होने तक के लिए उनके द्वारा वर्तमान धारित पद को कार्यपालक अभियन्ता(वेतन स्तर-11) में उत्क्रमित किया जाता है ।
4.
4 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 20265. अस्थायी स्थानापन्न कार्यकारी व्यवस्था नियमावली,2023 के प्रावधानों के तहत अधिसूचना में यदि भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि/विसंगति पायी जाती है तो प्रदत्त प्रभार आदेश को रद्द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा भुगतान की गई अन्तर राशि की वसूली कर ली जाएगी ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुशांत कुमार, सरकार के अपर सचिव ।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 16—571+20 डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: https://egazette.bihar.gov.in
5 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026भाग-9(ख)
िनिवदा सूचनाएं , प(cid:303)रवहन सूचनाएं , (cid:802)यायालय सूचनाएं और सव(cid:330)साधारण सूचनाएं इ(cid:797)यािद।
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lwpuk
No. 581— I, Niraj Kumar, S/o Suresh Chandra Verma, R/o Girja Niwas, Durga Sthan, Shahganj Lane, P.O-Mahendru, Distt.-Patna. Bihar-800006 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-1104, dt. 04.042026 that my name is written in my daughter Keya Verma's CBSE Class 10th all educational documents as Neeraj Kumar. In Aadhar Card written in Niraj Kumar. Both names are same and one person. From now I will be known as Niraj Kumar for all purposes.
NIRAJ KUMAR.
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582—I, Kumari Pushpanjali, W/o Niraj Kumar, R/o Girja Niwas, Durga Sthan, Shahganj Lane, P.O-Mahendru, Distt.-Patna, Bihar-800006 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-1103, dt. 04.04.2026 that my name is written in my daughter Keya Verma's CBSE Class 10th all educational documents as Pushpanjali Kumari in Aadhar Card written as Kumari Pushpanjali. Both names are same and one person: From now I shall be known as Kumari Pushpanjali for all purposes.
KUMARI PUSHPANJALI.
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No. 583—I, RENU KUMARI, W/o- Shyam Kishore Sinha, R/o- Prabha Niketan, Baghwa Gali, Mahadeva Road, Arrah, P.O. - Arrah, Distt. - Bhojpur, Bihar - 802301. Do hereby solemnly affirm and declare that in my daughter's (SAUMYA SUMAN) birth certificate and in her educational documents as well as in her passport my name is mentioned as RENU SINHA.
But, in my Aadhar as well as in my PAN card my name is mentioned as RENU KUMARI.
Here, both the names belong to the names of the same person. And, from now in my future I will be known as RENU KUMARI for all legal purposes.
RENU KUMARI.
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No. 584— I, Rupali Ghosh, W/o Bibekananda Dutta, R/o Flat No. 405, Sona Apartment, Ganga Vihar Colony, behind Pani Tanki, Ilahi bag, P.o. Bairia, P.S. Gopalpur, Patna, Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 1553 dt. 20.03.2026 that my name is mentioned in my adhar card and educational certificates as Rupali Ghosh. In my passport it mentioned as Rupali Dutta. Both names are same and one person that's myself. From now I shall be known as Rupali Ghosh for all future purposes.
RUPALI GHOSH.
6 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026No. 585—I, Manish Kumar, S/o Laxman Choudhary, R/o Doctor's Colony Kankarbagh, Ashok Nagar, Patna, Bihar-800020 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 3086 dt. 29.05.2026 that Sujal Kumar is my son. His name is written in his Aadhar Card as Sujan Kumar. In Birth Certificate written as Sujal Kumar. Both name are same and one person. From now he will be known as Sujal Kumar for all purposes
MANISH KUMAR.
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No. 586—I, Asmita Kumari, D/o Pradip Sah, R/o Ward No.-26, Bakhri Bazar, P.O-Bakhri Bazar, Distt-Begusarai, Bihar-848201 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-1582 dt. 23.03.2026 my name is written in my Aadhar Card as Asmita Kumari (ि(cid:214)मता कु मारी). In birth and educational certificate written as Asmita Kumari (अि(cid:214)मता कु मारी). Both names are same and one person. From now I shall be known as Asmita Kumari (अि(cid:214)मता कु मारी) for all purposes.
ASMITA KUMARI.
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No. 587—I, ABHILASHA SINHA, W/o-Saksham Sarvesh, R/o-House no.- 59, Maulabagh near kabristan, Ara, Distt. - Bhojpur, Bihar - 802301. Do hereby solemnly affirm and declare that in my Aadhar my name is mentioned as ABHILASHA SINHA. But, in my educational documents my name is mentioned as KUMARI ABHILASHA. Here, both the names belong to the names of the same person. And, from now in my future I will be known as ABHILASHA SINHA for all my legal purposes.
ABHILASHA SINHA.
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No. 588—I, RENU KUMARI, W/o- Shyam Kishore Sinha, R/o- Prabha Niketan, Baghwa Gali, Mahadeva Road, Arrah, P.O.- Arrah, Distt.- Bhojpur, Bihar- 802301. Do hereby solemnly affirm and declare that in my son's (MIHIR SUMAN) birth certificate and in his educational documents as well as in his passport my name is mentioned as RENU SINHA. But, in my Aadhar as well as in my PAN card my name is mentioned as RENU KUMARI. Here, both the names belong to the names of the same person. And, from now in my future I will be known as RENU KUMARI for all legal purposes.
RENU KUMARI.
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No. 589—I, Sonu Samdarshi, S/o - Sri Anil Kumar Ray, R/o-Gram Akbarpur, puranidih, P.o-Akbarpur, puranidih, Shamho Akha Kurha, Begusarai, Bihar- 851129. Do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 1877 dt. 07.04.2026, that my name is mentioned in my Service Record as Sonu Shamdarshi where as in Aadhar card and Educational certificate as Sonu Samdarshi. Both names are same and one person. From now I will be known as Sonu Samdarshi for all future purposes.
SONU SAMDARSHI.
7 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026No. 592—I, MEGHA KUMARI, W/o. - RAHUL KUMAR KHIRWAL, R/o - vill- C- 405, ambition triveni home, Naya Tola, Bhikhna Pahadi beside Jain Colony, Bankipur, Rajendra Nagar, P.S.- Kadam kuwan, Patna, Bihar - 800004. Do hereby solemnly affirm and declare that in my educational documents as well as in my Aadhar and PAN Card my name is mentioned as MEGHA KUMARI. Now, I want to add the title 'KHIRWAL' to my name. Hence, in this way my name became MEGHA KHIRWAL. Here, both the names belong to the names of the same person. And, from now in my future I will be known as MEGHA KHIRWAL for all my legal purposes. Affidavit no.: - 1549 Date: - 20/03/2026
MEGHA KUMARI.
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सं0 604—म(cid:583), प(cid:224)मी (cid:871)म(cid:302)ा, प(cid:467)त-शंकर कु मार, (cid:467)नवासी (cid:274)ाम-बाथ, पो(cid:232)ट-बाथ, थाना-मधेपुर,
ँ (cid:873)क प(cid:224)मी (cid:871)म(cid:302)ा एवं प(cid:224)मी िजला-मधुबनी ((cid:466)बहार), (cid:874)पनकोड-847408 शपथपूव(cid:91)क बयान करती हू
कु मार(cid:547) दोन(cid:585) नाम मेरा ह(cid:547) है। अब म(cid:583) भ(cid:874)व(cid:231)य म(cid:581) सभी काय(cid:91) हेतु प(cid:224)मी (cid:871)म(cid:302)ा के नाम से जानी एवं पहचानी जाऊँ गी। शपथ-प(cid:287) सं(cid:201)या-471, (cid:465)दनांक 18.3.2026.
प(cid:224)मी (cid:871)म(cid:302)ा।
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No. 603—I, Santosh Kumar Mochi, S/o Raj Kumar Mochi, R/o Village-Kolhaura, P.O.-Prarariya, Bodh Gaya, Gaya, Bihar-824231 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-3365 dt. 09.06.2026 that my name is written in my Aadhar Card, Pan Card as Santosh Kumar Mochi. From now I will be known as Santosh Kumar for all purposes.
SANTOSH KUMAR MOCHI.
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No. 611—I, SHUBHANG Raj, S/o Manoj Kumar Sinha, R/o Near Old Post Office Sareya Banjari Road, PO+PS+Dist -Gopalganj, State- Bihar declare vide affidavit no. 1566 dated 02.06.26 shall be known as Shubhang Vastava.
SHUBHANG Raj.
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No. 614—I, Sunita Agrawal, W/o Ajoy kumar Bose, R/o Saidpur Canal Road, Hosue No.-777, Anpurna Bhawan, P.S.-Kadamkuan, Distt.-Patna, Bihar-800006 do hereby solemnly affirm and declare as per affidevit. No.-3007 dt. 25.05.2026 that my name is mentioned in Pan Card, Husband's PPO and Passport as Sunita Bose. In educational documents mentioned as Sunita Agrawal. Both names are same and one person. From now I shall be known as Sunita Agrawal for all purposes.
SUNITA AGRAWAL.
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No. 615—I, MOUSAM BHALOTIA, W/o - Ayush Kumar Bhalotia, R/o - Shree Siddhnath Apartment Flat no. 101, Marwari Colony, Shyam Mandir, Road no. 13B, Bahadurpur, Patna, Bihar - 800016. Do hereby solemnly affirm and declare that in my voter ID card my name is mentioned as MOUSAM BHALOTIA. But, in my Aadhar card my name is mentioned as MOUSAM DARUKA. Here, both the names belong to the names of the same person i.e. me. And, from now in my future I will be known as 'MOUSAM BHALOTIA' for all my legal purposes. Affidavit no.: - 2734 Date: - 06/12/2026
MOUSAM BHALOTIA.
8 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026No. 616—I, SHIVJI SAH, S/o.–Rajgir Sah, R/o–ward no.- 03, Chandpur, P.O.– Hasanpur Gurda, Distt. – Samastipur, Bihar - 848504. Do hereby solemnly affirm and declare that in my Aadhar card my name is mentioned as SHIVJE SAH. But, in my voter ID card as well as in my residential certificate my name is SHIVJI SAH. Here, both the names belong to the names of the same person. And, from now in my future I will be known as SHIVJI SAH for all my legal purposes. Affidavit no.: - 490 Date: - 09/03/2026
SHIVJI SAH.
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No. 617—I, AMRENDRA KUMAR, S/O- BALMIKI SINGH, Permanent resident of Vill.-Nonay, PO-Makhar, PS-Akbarpur, Dist.-Nawada, State- Bihar declare by affidavit no.- 2330/ 14.03.2026 that in the 10th Admit Card, Marksheet, and all other documents issued to my son, Asmit Kumar, by the Central Board of Secondary Education, my name (as his father) has been erroneously recorded as Amrendra Singh instead of Amrendra Kumar. I am submitting this affidavit for the purpose of rectifying the incorrect entry of my name as Amrendra Singh in all of my son Asmit Kumar's documents, and replacing it with the correct name Amrendra Kumar. AMRENDRA KUMAR.
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No. 618 —I, Prabhat Kumar, S/o Rajendra Prasad Singh, R/o Das Tola Bararpur, P.S.-Balia, P.O-Rahatpur, Begusarai. Bihar-851211 do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No. 3283 dt. 05.06.2026 that Saurav Bhardwaj is my minor son his name is written in his Aadhar Card as Suman Saurav. Whereas in educational certificate written as Saurav Bhardwaj. Both names are same and one person.. From now he will be known as Saurav Bhardwaj for all future purposes.
PRABHAT KUMAR.
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No. 613—I, Ajoy Kumar Bose, S/o Late Nirmal Kumar Bose, R/o.- Saidpur Canal Road, House No.777, Anpurna Bhawan, P.S.-Kadamkuan, Distt.-Patna, Bihar-800006 do hereby solemnly affirm and declare as per affidevit. No.-3372 dt. 10.06.2026 that my name is written in my P.P.O. as Ajay Kumar Bose. Where as in Aadhar Card and Driving Licence written as Ajoy Kumar Bose. Boath Name are same and one Person. From now I will be known as Ajoy Kumar Bose for all purposes.
AJOY KUMAR BOSE
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No. 612—I Deepika, D/o-Azad Kumar, R/o-Navnit Housing Colony, Near Dr. Y.P.Mandal, Akhilesh Nagar, Jhauganj, Patna City, Patna-800008, Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per affidavit No, 3380 dated 10-06-2026 that my name is written in Aadhar Card, Pan Card and educational ducuments as Deepika whereas in my marriage Certificate written as Deepika Kumar. Boath Name are same and one person. From now I will be known as Deepika Kumar for all purposes.
DEEPIKA.
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No. 646—I, Hemant Kumar, son of Shri Ray Shyam Nandan Kumar, R/o Chowk Shikarpur, Nala Par, Patna City, PO- Begampur, PS- Chowk, Patna-800009, Bihar at present add- Jyotish Path (Shivaji Chowk), Ramkrishana Nagar, PO-Dhelwan, PS- Ramkrishna Nagar, Patna-800027, Bihar. Affidavit no. 6907 dated 09.06.2026 as per do hereby solemnly that my son Akshat Sinha known now as Akshat Naman.
HEMANT KUMAR.
9 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026सं0 645—म(cid:583) सुलोचनावती देवी (Sulochanawati Devi) प(cid:467)त-रतन (cid:292)साद (cid:871)संह, (cid:274)ाम-पूर(cid:547),
ं (cid:873)क मेरा सह(cid:547) नाम सुलोचनावती देवी पो(cid:232)ट-थाना - पावापुर(cid:547), िजला-नालंदा (cid:466)बहार, सू(cid:876)चत करती हू (Sulochanawati Devi) है, आधार काड(cid:91) म(cid:581) मेरा पुका(cid:510) नाम सुलोचना देवी (Sulochana Devi) अं(cid:873)कत है। म(cid:583) सुलोचनावती देवी (Sulochanawati Devi) एवं सुलोचना देवी (Sulochana Devi) उ(cid:200)त दोन(cid:585)
ं। शपथ प(cid:287) सं(cid:201)या 10261, (cid:465)दनांक 28.08.2025 के (cid:622)वारा अब नाम से जानी व पहचानी जाती हू म(cid:583) सुलोचनावती देवी (Sulochanawati Devi) के नाम से जानी एवं पहचानी जाऊं गी ।
सुलोचनावती देवी ।
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No. 625—I, Mohammad Shahid Raza, S/o Late Mohammad Muntazir Alam, R/o Ghordaur, P.O.-Ghordaur, P.S.-Banma Itahri, Distt.-Saharsa-852127, Bihar do hereby solemnly affirm and declare as per aff. No.-153 dt. 02.02.26 that my name is written as Mohammad Shahid. In my son Saquib Raza's CBSE class 10th educational documents. As per Aadhar card my name is Mohammad Shahid Raza. Both names are same and one person. From now I will be known as Mohammad Shahid Raza for all future purposes.
MOHAMMAD SHAHID RAZA.
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,
(cid:464)बहार, पटना (cid:430)ारा (cid:292)कािशत एवं मु(cid:464)(cid:289)त।
(cid:464)बहार गजट, 16—571+50 डी0ट(cid:547)0पी0।
Website: https://egazette.bihar.gov.in
10 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026(cid:464)बहार गजट
का
पूरक(अ0)
(cid:292)ािधकार(cid:547) (cid:430)ारा (cid:292)कािशत
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—श्री मणिरंजन, तत्कालीन जिला अवर निबंधक, समस्तीपुर सम्प्रति अवर निबंधक, सहायक निबंधन महानिरीक्षक का कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के विरूद्ध विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना द्वारा दर्ज प्राथमिकी से संबंधित जब्ती सूची एवं अन्य कागजात के अनुसार कुल 64,24,621/-(चौसठ लाख चौबीस हजार छः सौ इक्कीस) रूपये नगद एवं 16,62,460/-(सोलह लाख बासठ हजार चार सौ साठ) रूपये के सोने एवं चाँदी के जेवरात बरामद किया गया तथा 1,87,46,986/-(एक करोड़ सत्तासी लाख छियालीस हजार नौ सौ छियासी) रूपये की चल-अचल सम्पत्ति आकलित की गयी। इस प्रकार श्री मणिरंजन के विरूद्ध 1,62,36,926/-(एक करोड़ बासठ लाख छत्तीस हजार नौ सौ छब्बीस) रूपये के अप्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-12 r/w 13(1)(b) r/w 13(2) एवं आई.पी.सी. की धारा-120 (बी0) के अधीन प्राथमिकी सं0-06/2021 दिनांक-16. 12.2021 दर्ज किया गया है।
उक्त मामले में विभागीय अधिसूचना सं0-4986 दिनांक-18.12.2021 के द्वारा श्री मणिरंजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय ज्ञापांक-810 दिनांक-08.02.2022 द्वारा लिखित अभिकथन की मांग की गयी।
श्री मणिरंजन के द्वारा आरोप पत्र पर लिखित अभिकथन समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि विशेष निगरानी इकाई के द्वारा आय की गणना में सिर्फ वेतन से प्राप्त आय को सम्मिलित किया गया है जबकि आय के अन्य स्त्रोत भी है। व्यय के आंकलन में स्वयं के साथ-साथ उनकी पत्नी द्वारा किये गये व्यय को भी शामिल कर लिया गया है जबकि आय की गणना में पत्नी की आय की गणना नहीं की गयी है। श्री मणिरंजन द्वारा बताया गया कि उनके स्वयं एवं पत्नी की कुल आय 3,95,90,965/-(तीन करोड़ पंचानवे लाख नब्बे हजार नौ सौ पैसठ) रूपये है जबकि कुल व्यय (पत्नी द्वारा सम्पत्ति एवं अन्य वस्तुओं पर किये गये व्यय सहित) 2,97,79,446/-(दो करोड़ संतानवे लाख उन्नासी हजार चार सौ छियालीस) रूपये लगभग है। विषेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना द्वारा कुल सम्पत्ति 1,87,46,986/-(एक करोड़ सत्तासी लाख छियालीस हजार नौ सौ छियासी) रूपये बतायी गयी है जबकि यह राषि 3,95,90,965/-(तीन करोड़ पंचानवे लाख नब्बे हजार नौ सौ पैसठ) रूपये है। विषेष निगरानी इकाई की गणना की विवरणी मनगढं़त, अतार्किक, तथ्यहीन, बेबुनियाद व सत्य से परे है। विषेष निगरानी इकाई का आरोप कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 का उल्लंघन किया है, बिल्कुल असत्य, भ्रामक, तथ्यहीन, अदूरदर्शी, मनगढं़त एवं अतार्किक है।
श्री मणिरंजन द्वारा समर्पित अभिकथन की समीक्षा की गयी तथा पाया गया कि श्री मणिरंजन के विरूद्ध आय के ज्ञात स्त्रोतों से 1,62,36,926/-(एक करोड़ बासठ लाख छत्तीस हजार नौ सौ छब्बीस) रूपये अप्र्रत्यानुपातिक धनार्जन किया गया है, जो वैध स्त्रोत से प्राप्त आय का लगभग 165 प्रतिशत है। श्री मणिरंजन द्वारा अपने पद का दुरूपयोग कर आय से अधिक सम्पत्ति नाजायज एवं भ्रष्ट तरीके से अर्जित किया गया है।
उक्त के आलोक में समीक्षोपरांत श्री मणिरंजन से आरोप पत्र पर प्राप्त अभिकथन को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए श्री मणिरंजन का आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के प्रावधानों के प्रतिकूल पाये जाने एवं आरोपों की गंभीर प्रकृति होने के कारण विभागीय कार्यवाही का संचालन मुख्य जाँच आयुक्त को सुपुर्द किये जाने का11 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026 निर्णय लिया गया। तत्पश्चात् विभागीय संकल्प सं0-2792 दिनांक-02.06.2022 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही के लिए मुख्य जॉच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा प्रशाखा पदाधिकारी, प्रशाखा-8'ए' को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
प्रधान सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना-सह-जॉच आयुक्त के पत्रांक-135 दिनांक-23.01.
2025 द्वारा विभागीय कार्यवाही का अंतिम जॉच प्रतिवेदन विभाग मेें समर्पित किया गया। जॉच प्रतिवेदन में अंकित निष्कर्ष निम्नवत् हैः-
संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री मणिरंजन के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, उनके द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन तथा गवाहों के परीक्षण प्रतिपरीक्षण के उपरांत निष्कर्षित किया है कि श्री मणिरंजन द्वारा भिन्न-भिन्न आय-व्यय एवं बचत की विवरणी प्रस्तुत की गयी है, जो स्वयं में विरोधाभाषी है। श्री मणिरंजन अपनी पत्नी और स्वयं के सभी ोतों से सम्मिलित सम्पूर्ण आय का विवरण अंतिम रूप से 4,81,13,800/- (चार करोड़ इक्यासी लाख तेरह हजार आठ सौ) रूपये अंकित किया है, जिसमें अपनी पत्नी का आय कुल-3,10,10,344/- (तीन करोड़ दस लाख दस हजार तीन सौ चौवालीस) रूपये दिखाया गया है, परंतु श्री मणिरंजन द्वारा अपनी पत्नी की वास्तविक आय से संबंधित कोई वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। दूसरी ओर श्री मणिरंजन ने स्वयं के वेतन तथा अन्य ोतों से प्राप्त आय कुल 1,71,03,456/- (एक करोड़ एकहत्तर लाख तीन हजार चार सौ छप्पन) रूपये दर्शाया है, जबकि विशेष निगरानी इकाई के द्वारा श्री मणिरंजन के वैध ोतों से प्राप्त आय लगभग 98,00,000/- (अन्ठान्वे लाख) रूपये आकलित की गई है। श्री मणिरंजन द्वारा अंकित राशि तथा विशेष निगरानी इकाई द्वारा श्री मणिरंजन के आय की आकलित राशि का अंतर 73,03,456/- (तिहत्तर लाख तीन हजार चार सौ छप्पन) रूपये होता है, परंतु श्री मणिरंजन अन्तर राशि के वैध ोतों का सम्पूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहे है, जबकि आरोप के संदर्भ में सबूत का बोझ (Burden of Proof) आरोपित पदाधिकारी/कर्मी का होता है। श्री मणिरंजन द्वारा अपने परिवार को संयुक्त परिवार बताया गया है परंतु इस संदर्भ में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे इस तथ्य की पुष्टि हो सके कि इनका संयुक्त परिवार हिन्दु अनडिभाइडेड फैमिली की श्रेणी में आता है। जहाँ तक उनके भाई द्वारा उनके पत्नी के फ्लैट में परिवार सहित निवास करने का प्रश्न हैं, के संबंध में कोई वैधानिक कागजात/समझौता दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो सके कि पटना स्थित फ्लैट का उपयोग इनके द्वारा नहीं किया जा रहा था। पटना स्थित फ्लैट से बरामद संपति विशेषकर नगद राशि रू0 38,70,000/- एवं जेवरात रू0 6,84,264/- जिसका सम्मिलित मूल्य रू0 45,54,264/- विशेष निगरानी इकाई द्वारा आकलित किया गया है, का खंडन श्री मणिरंजन द्वारा यह कहते हुए किया गया है कि यह राशि उनके भाई की है परन्तु इस तथ्य का प्रमाण नहीं प्रस्तुत किया गया है कि संपति उनके भाई की है और न ही इतनी बड़ी राशि के आय के ोत का वर्णन उनके द्वारा किया गया है। श्री मणिरंजन ने बैंकिंग स्टेटमेंट के आधार पर पत्नी सुनीता का वर्ष 2010-11 से 2021-22 तक कुल आय की विवरणी में विविध नातेदारों से 97,85,895/- (सन्तानवे लाख पचासी हजार आठ सौ पन्चानवे) रूपये लोन लेने का उल्लेख किया है, परंतु इतनी बड़ी मात्रा में नातेदारों से लोन लेने से संबंधित कोई वैधानिक साक्ष्य उनके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। इतनी बडी राशि का सम्व्यवहार बिना किसी वैधानिक साक्ष्य/दस्तावेज के आलोक में किया जाना स्वयं में बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 में निहित प्रावधान का उल्लंघन है। दूसरी ओर श्रीमती सुनीता का वर्षवार एवं मदवार कुल आय की विवरणी में वर्ष 2018-19 में उनकी आय 1,98,96,505/- (एक करोड़ अन्ठानवे लाख छियानवे हजार पाँच सौ पाँच) रूपये दर्शाया गया है, परन्तु उक्त 01 वर्ष में इतनी वृहद पैमाने पर प्राप्त की गई आय का वैधानिक ोत प्रस्तुत नहीं किया गया है। यहाँ यह भी अंकित करना प्रासंगिक है कि श्री मणिरंजन और उनके नातेदारों द्वारा cash in hand का शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया है, परन्तु इतनी बड़ी राशि का नकद के रूप में पाये जाने के संदर्भ में न तो उन सभी के द्वारा कोई ठोस कारण अंकित किया गया है और न ही राशि के ोत का वर्णन किया गया है। अतः श्री मणिरंजन का लिखित अभिकथन/बचाव बयान ठोस साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए अप्रत्यानुपातिक धनार्जन से संबंधित गठित आरोप पत्र में सभी आरोप को प्रमाणित किया गया है।
''फलतः उभयपक्षों की दलीलों, गवाह के बयान के परिशीलन, उपलब्ध अभिलेखों एवं उपर्युक्त समीक्षा से ठोस साक्ष्यों के अभाव में श्री मणिरंजन, तत्कालीन जिला अवर निबंधक, समस्तीपुर के विरूद्ध अप्रत्यानुपातिक धनार्जन से संबंधित गठित आरोप पत्र में उल्लेखित आरोप प्रमाणित होता है।''
तदोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 के तहत् संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोपों पर विभागीय पत्रांक-878 दिनांक-25.02.2025 द्वारा आरोपी पदाधिकारी से द्वितीय बचाव बयान की मांग की गयी। श्री मणिरंजन के द्वारा समर्पित बचाव बयान/लिखित अभ्यावेदन/निवेदन दिनांक-19.06.2025 में उनके द्वारा बताया गया है कि विशेष निगरानी इकाई द्वारा आकलित सभी आरोप अनुसंधानांतर्गत होने के कारण अनुसंधान के उपरांत यह स्पष्ट होगा कि उनके विरूद्ध अप्रत्यानुपातिक धनार्जन का मामला बनेगा या नहीं? जाँच आयुक्त ने बिना जाँच किये, बिना पत्रों के अवलोकन किये, बिना परीक्षण व प्रतिपरीक्षण पर विचार किये एवं बिना उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों का अध्ययन किये जाँच प्रतिवेदन में यह एकतरफा निर्णय ले लिया गया है कि उनके द्वारा स्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया जा सका। उनके विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी सं0-06/2021 का आधार पुलिस अधीक्षक, विशेष निगरानी इकाई की आसूचना में कई प्रकार की त्रूटि विद्यमान है। उनके विरूद्ध अवैध धनार्जन का आरोप सिर्फ अनुमान के आधार पर आकलित डाटा के माध्यम से किये जाने का प्रयास किया गया है जबकि उनके आय के स्त्रोत में बैंक ऋण को शामिल नहीं किया गया है। आय एवं व्यय की गणना में तथ्यात्मक जाँच के बजाय अनुमान को प्राथमिकता दी गयी है। जाँच आयुक्त द्वारा उनके12 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026 विरूद्ध लगाये गये आरोपों के संबंध में न तो कंडिकावार अपना मंतव्य दिया है और न ही लिखित बयान का कंडिकावार खण्डन किया है। उनके द्वारा विशेष निगरानी इकाई द्वारा लगाया गया आकलित आरोप बेबुनियाद बताते हुए उन्हे आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मणिरंजन के बचाव बयान/अभ्यावेदन/निवेदन के सम्यक् समीक्षोपरांत पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में कोई भी नया तथ्य उल्लेखित नहीं किया है। उन्होने अपने बचाव बयान में उन्ही तथ्यों को पुनः उल्लेखित किया है, जो तथ्य उन्होने संचालन पदाधिकारी-सह-जाँच आयुक्त के समक्ष रखा था जिसका विचारण पूर्व में ही किया जा चुका है। संचिका के अवलोकनोपरांत पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा परिसम्पाि अर्जित करने अथवा उसके निवटाव करने से पूर्व विभाग को लिखित रूप से कोई जानकारी नहीं दी गयी। संचालन पदाधिकारी-सह-जाँच आयुक्त द्वारा पुर्ण जाँचोपरांत आरोपी पदाधिकारी श्री मणिरंजन का लिखित अभिकथन/बचाव बयान ठोस साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए अप्रत्यानुपातिक धनार्जन से संबंधित गठित आरोप पत्र में सभी आरोप को प्रमाणित किया गया है। मुख्य सचिव, बिहार, पटना के आदेष पत्रांक-6268 दिनांक-29.06. 2021 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि कोई सरकारी सेवक सरकार की पूर्व जानकारी के बिना, किसी अचल सम्पाि का अर्जन या निबटाव अपने नाम से या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से पट्टे, बन्धक खरीद, बिक्री या प्रीतिदान के द्वारा या अन्यथा न करेगा। उक्त आदेष में यह भी वर्णित है कि सरकारी सेवक द्वारा अचल सम्पाि (जमीन, मकान, फ्लैट, गाड़ी आदि) क्रय/विक्रय किये जाने की स्थिति में यदि ऐसा सम्व्यवहार किसी नियमित या ख्याति प्राप्त से की जा रही हो तब ऐसा सम्व्यवहार के एक माह के अन्दर इसकी सूचना विहित प्राधिकार को उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है। यदि ऐसा सम्व्यवहार किसी नियमित या ख्याति प्राप्त से नहीं की जा रही हो तो विहित प्राधिकार से ऐसा सम्व्यवहार की पूर्व मंजूरी प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही वास्तविक क्रय/विक्रय किये जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-18119 दिनांक-26.09.2023 द्वारा जारी बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 (समय-समय पर यथासंषोधित) का Master Circular के साथ संलग्न बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 (समय-समय पर यथासंषोधित) की नियम 19(2) में स्पष्टतः अंकित है कि कोई सरकारी सेवक सरकार की पूर्व जानकारी के बिना, किसी अचल सम्पाि का अर्जन या निबटाव अपने नाम से या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से पट्टे, बन्धक, खरीद, बिक्री या प्रीतिदान के द्वारा या अन्यथा न करेगा। उपरोक्त नियमावली के नियम 19(6) में वर्णित है कि यदि किसी सरकारी सेवक के पास ऐसे र्आर्थिक साधन स्रोत या ऐसी सम्पाि पाई जाए जो उसके ज्ञात आय-स्रोतों के अनुपात से अधिक हो और जिसका वह संतोषजनक हिसाब न दे सके, तो जब तक प्रतिकूल सिद्ध न किया जाए तब तक यह माना जाएगा कि वह अपने सरकारी र्काव्य पालन में गम्भीर कदाचार का दोषी है, जिसके लिए उस पर विभागीय कार्यवाही के साथ-साथ दांडिक वाद भी चलाया जा सकेगा। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय बचाव बयान/लिखित अभ्यावेदन/निवेदन के अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 यथासंशोधित 2007 के नियम-14(xi) के तहत् सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड अधिरोपित करने के प्रस्ताव पर अनुशासनिक प्राधिकार माननीय विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त करते हुए विभागीय पत्रांक-5821 दिनांक-08.10.2025 एवं पत्रांक-444 दिनांक-20.01.2026 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के अभिमत की माँग की गयी। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-4408 दिनांक-05.02.2026 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि दिनांक-22.01.2026 को आहुत आयोग की पूर्णपीठ की बैठक में सम्यक् विचारोपरान्त आयोग विभागीय दण्ड प्रस्ताव से सहमति व्यक्त करता है।
तदोपरांत श्री मणिरंजन को सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड के निर्णय पर विचार हेतु मंत्रिपरिषद् के समक्ष प्रस्ताव उपस्थापित किया गया। मंत्रिपरिषद् की बैठक दिनांक-08.06.2026 कोे मद संख्या-12 के रूप में विभागीय दंड प्रस्ताव में स्वीकृति प्रदान की गई है। अतः मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति के आलोक में श्री मणिरंजन, तत्कालीन जिला अवर निबंधक, समस्तीपुर सम्प्रति अवर निबंधक, सहायक निबंधन महानिरीक्षक का कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 यथा संशोधित 2007 के नियम-14(xi) के तहत् सेवा से बर्खास्त करने का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।13 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026 सं॰-कारा/नि॰को॰(अधी॰)-01-31/2026-6019 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ——— संकल्प 23 जून 2026
दिनांक-20.06.2026 को आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना में कारा निरीक्षणालय एवं जिला प्रषासन के पदाधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण/छापेमारी की गई, जिसमें कतिपय गंभीर अनियमितता एवं कुव्यवस्था पाई गयी है; यथा-कारा के अन्दर लगभग सभी वार्डों में अवैध रूप से मेस का संचालन एवं खाना बनाने हेतु हीटर का प्रयोग किया जाना, जाँच दल के कारा में रहते हुए बंदियों द्वारा हीटर पर खाना बनाया जाना, कैंटीन में MRP से अधिक दर पर बंदियों को सामान बेचा जाना, बाहर से सामान खरीदकर कारा प्रषासन द्वारा बंदियों को उच्च दर पर उपलब्ध कराया जाना, निर्धारित मेन्यू के अनुसार बंदियों को भोजन नहीं दिया जाना तथा अधिकतर बंदियों द्वारा प्राईवेट मेस का संचालन एवं उससे भोजन की सुविधा उपलब्ध कराया जाना एवं जिसके लिए बंदियों से अवैध वसूली किया जाना, उच्च सुरक्षा कक्ष में तरूण बंदियों को उम्रदराज एवं कुख्यात बंदियों के साथ रख कर तरूण बंदियों के मानसिक एवं शारीरिक शोषण के मार्ग को प्रषस्त करना एवं इस अनाचार को बढ़ावा देना, लेखा पंजियों का संधारण नियमानुसार नहीं पाया जाना, जाँच के क्रम में कारा पदाधिकारी द्वारा जाँच टीम को सहयोग नहीं किया जाना तथा जाँच के समय बिना सुरक्षा के बंदियों के बीच जाँच दल को छोड़कर बाहर चले जाना, जाँच के क्रम में अवकाष में रहने के बावजूद श्री नीरज कुमार झा, अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना द्वारा कारा में पहुँचकर जाँच कार्य में प्रतिरोध उत्पन्न करना उनकी गंभीर अनुषासनहीनता, कर्त्तव्यहीनता, लापरवाही एवं धृष्टता का परिचायक है।
2. इस प्रकार उपरोक्त कुव्यवस्था एवं गंभीर अनियमितता तथा कारा में व्याप्त अराजकता के लिए श्री नीरज कुमार झा, अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना पूर्णतः दोषी पाये गये हैं। श्री झा का यह कृत्य गंभीर प्रषासनिक विफलता, अनुषासनहीनता एवं कर्त्तव्यहीनता का द्योतक है तथा उनका कारा प्रषासन पर नियंत्रण, पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण में घोर प्रषासनिक विफलता एवं गलत कार्यों में संलिप्तता को परिलक्षित करता है।
3. उपरोक्त के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत श्री नीरज कुमार झा, अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है तथा निलंबनावस्था में इनका मुख्यालय विषेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर निर्धारित किया जाता है।
4. श्री झा के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में आरोप पत्र गठित कर अलग से विभागीय कार्यवाही संचालित करने की कार्रवाई की जायेगी।
5. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के विहित प्रावधानों के अन्तर्गत श्री झा को निलंबनावस्था में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता संलग्न कारा से देय होगा।
6. आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत श्री राजीव कुमार, बिहार कारा सेवा, सहायक कारा महानिरीक्षक (क्षेत्र), कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना (वेतन स्तर-12) को अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।
7. उपरोक्त पर माननीय मुख्य (गृह) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। सं॰ कारा/नि0को0(प्रोबेषन)-12-06/2023-6081 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ——— संकल्प 23 जून 2026
श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार के विरूद्ध कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना में बंदी कल्याण पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन के दौरान अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के बचत खाता संख्या-32636163692 का अवैध तरीके से संचालन करने, नियमों की अनदेखी कर स्वयं के स्तर से हस्ताक्षरित पत्र निर्गत कराकर बैंक से गलत तरीके से अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के कुल राशि 16,09,75,564/- (सोलह करोड़ नौ लाख पचहत्तर हजार पाँच सौ चौसठ) रूपये को MOD Accounts से बचत खाता में स्थानान्तरित करने, करीब 11 माह के पश्चात् एकमुश्त राशि 22,22,20,000/- (बाईस करोड़, बाईस लाख, बीस हजार) रूपये को बचत खाता से पुनः MOD Accounts में14 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026 स्थानांतरित करने, वरीय पदाधिकारी से बिना अनुमोदन प्राप्त किये स्वेच्छा एवं अवैध तरीके से नियम विरूद्ध किये गये कार्य के कारण अपराध पीड़ित कल्याण न्यास से संबंधित खाता के संचालन में गंभीर वित्तीय अनियमितता, लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1551 दिनांक-20.02.2024 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई, जिसके संचालन हेतु आयुक्त पटना प्रमण्डल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 2. सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-13655/सा0प्र0, दिनांक-15.12.2011 की कंडिका-2 (1) (ग) में निहित प्रावधान के तहत आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमण्डल, पटना के आदेश ज्ञापांक-163/स्था0, दिनांक-29.02.2024 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में जाँच का कार्य संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना को हस्तांतरित किया गया। 3. विभागीय कार्यवाही के जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमण्डल, पटना के पत्रांक-388/स्था0, दिनांक-09.05.2025 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है, जिसमें श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित सभी तीन आरोपों को अंषतः प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। 4. अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 (3) के प्रावधान के तहत विभागीय ज्ञापांक-5054 दिनांक-10.07.2025 द्वारा श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेषन कार्यालय, कटिहार को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे पन्द्रह (15) दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गयी थी।
5. तद्आलोक में श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेशन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार द्वारा पत्रांक-387 दिनांक-28.07.2025 के माध्यम से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब/लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरांत उनके द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब/लिखित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14(vi) के प्रावधान के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1345 दिनांक-23.02.2026 द्वारा श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार के विरूद्ध निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया हैः-
''दो (02) वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड''। 6. उपर्युक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार द्वारा पत्रांक-237 दिनांक-08.04. 2026 के माध्यम से पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनका कहना है कि आरोप पत्र का सम्पूर्ण आधार और संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को ''आंशिक रूप से सिद्ध'' पाए जाने का निष्कर्ष, ''बिहार अपराध पीड़ित कल्याण ट्रस्ट नियम'' के नियम-4 की गलत व्याख्या पर आधारित है। विधायी आशय बिल्कुल स्पष्ट है कि निधियों की निकासी (निकास) के लिए दोहरे हस्ताक्षर अनिवार्य है अर्थात् जब निधियों को ट्रस्ट के दायरे से बाहर लाभार्थियों या तृतीय पक्षों को वितरित किया जाता है। नियम में जानबूझकर ''संचालन'' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। यदि विधायी आशय सभी आंतरिक परिचालन निर्णयों या बैंक के भीतर प्रारूप परिवर्तन (जैसे कि ऑटो-स्वीप सुविधा को निष्क्रिय करना जबकि धन उसी मुख्य ट्रस्ट खाते में रहता है) के लिए दोहरे हस्ताक्षर अनिवार्य करना होता, तो ''संचालन'' शब्द का स्पष्ट रूप से प्रयोग किया जाता। बैंक मैनेजर को दिनांक-29.07.2019 को लिखा उनका पत्र केवल ''ऑटो-स्वीप'' सुविधा को बंद करने और ट्रस्ट के अपने फंड को उसके मुख्य बचत खाते में समेकित करने का निर्देश था। एक भी रुपया निकाला (''निकासी'') नहीं गया और न ही किसी तीसरे पक्ष को भुगतान किया गया। खाता संख्या-32636163692 में फंड पूरी तरह सुरक्षित रहा, इसलिए आंतरिक खाता प्रबंधन निर्देश को प्रधान सचिव के हस्ताक्षर की आवश्यकता वाले ''निकासी'' के रूप में व्याख्या करना नियम-4 का कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण विस्तार है।
श्री राजीव कुमार का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि आरोप संख्या-01 में कहा गया है कि उन्होंने स्वीप एमओडी (एफडी) खाते गलत तरीके से बंद कर दिए। अनुशासनिक प्राधिकार ने इस तथ्य को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है कि उन्होंने (श्री कुमार ने) यह कार्रवाई अपने पूर्ववर्तियों द्वारा किए गए एक स्पष्ट वैधानिक उल्लंघन को सुधारने के लिए की थी। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित ट्रस्ट नियम, 2013 के नियम-4 में स्पष्ट रूप से यह अनिवार्य किया गया है कि ट्रस्ट की धनराशि बचत खाते में रखी जानी चाहिए, इसके अलावा ट्रस्ट अभिलेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि गतिविधियाँ ''लाभ-रहित हानि'' के आधार पर होंगी। उनके पूर्ववर्ती ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नियमों का उल्लंघन करते हुए और वित्त विभाग की अनुमति के बिना व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से ''सेविंग प्लस'' (ऑटो स्वीप मोड) नामक एक हाईब्रिड खाता खोला था। वित्त लेखापरीक्षा दल ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। उनका दिनांक-29.07.2019 का पत्र अनधि—त ऑटो-स्वीप को निष्क्रिय करने और खाते को शुद्ध बचत खाते में पुनस्र्थापित करने के लिए की गई एक उचित प्रशासनिक कार्रवाई थी, जिससे कानून का पूर्णतः पालन सुनिश्चित हो सके।
श्री राजीव कुमार का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि आरोप संख्या-02 में ब्याज के रूप में 53,00,707/- के वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया है। यह आरोप तथ्यात्मक रूप से निराधार है। जैसा कि संचालन पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है, विभागीय सतर्कता और बैंकिंग विभाग में दर्ज शिकायत के15 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026 कारण लोकपाल (संख्या-N202425023529662) के समक्ष, भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी गलती स्वीकार की और दिनांक-10.01.2025 को ट्रस्ट के मूल खाते में 57,53,365/- की राशि वापस जमा कर दी। चूँकि कथित हानि ब्याज सहित पूरी तरह वसूल कर ली गई है, इसलिए ''ट्रस्ट को हानि पहुँचाने वाली गंभीर वित्तीय अनियमितता'' का पूरा ढांचा ध्वस्त हो जाता है। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने एक गैर-मौजूद वित्तीय हानि पर भरोसा करके एक बड़ी सजा को उचित ठहराया है।
श्री राजीव कुमार का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि मनमाने ढंग से कार्य करने का आरोप निराधार है। प्रशासनिक प्रमुख, अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग (ट्रस्ट के प्रबंध अध्यक्ष), को निधि की सटीक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी। अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग की अध्यक्षता में दिनांक-17.06.2020 को आयोजित राज्य स्तरीय अपराध पीड़ित कल्याण ट्रस्ट समिति की बैठक के कार्यवृत्त में बिंदु संख्या-7 पर स्पष्ट रूप से दर्ज है कि उन्होंनेे बंदी कल्याण पदाधिकारी के रूप में, समिति को सूचित किया कि ट्रस्ट के बचत खाते में अद्यतन शेष राशि 21,80,00,483.50/- थी। अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग को इस बात की पूरी जानकारी थी कि धनराशि बचत खाते में जमा है और इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। इसके अतिरिक्त दिनांक-09.07.2020 को MOD Accounts में धनराशि के पुनः हस्तांतरण के संबंध में (जो वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह पर अंतरिम अवधि के दौरान अधिकतम ब्याज प्राप्त करने के लिए किया गया था), फाईल को विधिवत् संधारित किया गया था और निदेशक, प्रोबेशन (ट्रस्ट के सचिव) और महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना (ट्रस्टी सदस्य) से लिखित स्वी—ति प्राप्त की गई थी। श्री कुमार का कहना है कि उनका कार्य पारदर्शी, दस्तावेजी—त और विभागीय पदानुक्रम की जानकारी में निष्पादित किए गए थे। श्री कुमार द्वारा समर्पित अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में उन्हें पूर्णतः बरी किये जाने का अनुरोध किया गया है।
7. श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार द्वारा दायर उक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। श्री कुमार का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि आरोप पत्र का सम्पूर्ण आधार और संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को ''आंशिक रूप से सिद्ध'' पाए जाने का निष्कर्ष, ''बिहार अपराध पीड़ित कल्याण ट्रस्ट नियम'' के नियम-4 की गलत व्याख्या पर आधारित है। विधायी आशय बिल्कुल स्पष्ट है कि निधियों की निकासी (निकास) के लिए दोहरे हस्ताक्षर अनिवार्य हैं अर्थात् जब निधियों को ट्रस्ट के दायरे से बाहर लाभार्थियों या तृतीय पक्षों को वितरित किया जाता है। नियम में जानबूझकर ''संचालन'' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। यदि विधायी आशय सभी आंतरिक परिचालन निर्णयों या बैंक के भीतर प्रारूप परिवर्तन (जैसे कि ऑटो-स्वीप सुविधा को निष्क्रिय करना जबकि धन उसी मुख्य ट्रस्ट खाते में रहता है) के लिए दोहरे हस्ताक्षर अनिवार्य करना होता, तो ''संचालन'' शब्द का स्पष्ट रूप से प्रयोग किया जाता। बैंक मैनेजर को दिनांक-29.07.2019 को लिखा उनका पत्र केवल ''ऑटो-स्वीप'' सुविधा को बंद करने और ट्रस्ट के अपने फंड को उसके मुख्य बचत खाते में समेकित करने का निर्देश था। एक भी रुपया निकाला (''निकासी'') नहीं गया और न ही किसी तीसरे पक्ष को भुगतान किया गया। खाता संख्या-32636163692 में फंड पूरी तरह सुरक्षित रहा, इसलिए आंतरिक खाता प्रबंधन निर्देश को प्रधान सचिव के हस्ताक्षर की आवश्यकता वाले ''निकासी'' के रूप में व्याख्या करना नियम-4 का कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण विस्तार है। श्री कुमार का कहना है कि उनके पूर्ववर्ती ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नियमों का उल्लंघन करते हुए और वित्त विभाग की अनुमति के बिना व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से ''सेविंग प्लस'' (ऑटो स्वीप मॉड) नामक एक हाईब्रिड खाता खोला था।
श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना द्वारा बिना सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के Sweep MOD से सृजित सभी FD खाता बंद कर राशि को बचत खाता में स्थानान्तरित कराया गया, जो नियम विरूद्ध है। श्री कुमार द्वारा नियमों की अनदेखी कर स्वयं के स्तर से हस्ताक्षरित पत्र निर्गत कराकर बैंक को उपलब्ध कराया गया तथा गलत तरीके से अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के कुल राशि 16,09,75,564 (सोलह करोड़, नौ लाख, पचहत्तर हजार, पाँच सौ चौसठ) रूपये को MOD Accounts से बचत खाता में स्थानान्तरित कराया गया, जबकि बिहार अपराध पीड़ित कल्याण न्यास नियमावली, 2013 के नियम-04 के अनुसार न्यास के खाता का किसी प्रकार के संचालन हेतु व्यवस्थापक अध्यक्ष (प्रधान सचिव/सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना) एवं न्यासी कोषपाल (बंदी कल्याण पदाधिकारी) का संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य है, परन्तु श्री कुमार द्वारा बिना संयुक्त हस्ताक्षर के स्वयं के स्तर से पत्र हस्ताक्षरित कर बैंक को प्रेषित किया गया, जो उनकी कर्त्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता तथा वित्तीय अनियमितता का द्योतक है। अतः श्री कुमार द्वारा अपने बचाव में उपरोक्त नियम की गलत व्याख्या करते हुए आरोप से बचने का प्रयास किया गया है, जो स्वीकार योग्य नहीं है।
बिहार अपराध पीड़ित कल्याण न्यास नियमावली, 2013 की कंडिका-04 में स्पष्ट प्रावधान है कि ''राज्य के विभिन्न काराओं में संसीमित सजावार बंदियों के पारिश्रमिक में से अपराध से पीड़िताें के लाभार्थ की गयी कटौती की राशि न्यास की सम्पत्ति होगी। ऐसी राशि राष्ट्रीय—त बैंक के बचत खाता, जो प्रधान सचिव/सचिव-सह-व्यवस्थापक न्यास एवं बंदी कल्याण पदाधिकारी-सह-न्यास कोषाध्यक्ष के संयुक्त पदनाम से होगी, में जमा की जायेगी। जमा राशि की निकासी, व्यवस्थापक अध्यक्ष एवं न्यास कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जाएगी।'' न्यास के वित्तीय लेन-देन से संबंधित प्रस्ताव पर प्रधान सचिव/सचिव-सह-व्यवस्थापक न्यास का अनुमोदन एवं पत्र पर हस्ताक्षर अनिवार्य है, किन्तु श्री राजीव कुमार द्वारा स्वयं के स्तर से हस्ताक्षर कर पत्र बैंक को प्रेषित किया गया है। इस प्रकार श्री राजीव कुमार का यह कृत्य उनकी गंभीर लापरवाही एवं अनुषासनहीनता तथा वित्तीय अनियमितता का द्योतक है।16 (cid:464)बहार गजट, 8 जुलाई 2026 श्री राजीव कुमार का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि ब्याज के रूप में 53,00,707/- के वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया है, जो तथ्यात्मक रूप से निराधार है। विभागीय सतर्कता और बैंकिंग विभाग में दर्ज शिकायत के कारण लोकपाल (संख्या-N202425023529662) के समक्ष, भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी गलती स्वीकार की और दिनांक-10.01.2025 को ट्रस्ट के मूल खाते में 57,53,365/- की राशि वापस जमा कर दी।
जबकि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि विभागीय पत्रांक-9215 दिनांक-18.11.2024 द्वारा अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के खाता संचालन संबंधी शासनादेश का उल्लंघन करने के कारण हुई हानि की वसूली करने एवं राशि वापस करने का अनुरोध बैंकिंग लोकपाल, रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया, गाँधी मैदान, पटना से किया गया। इस संदर्भ में बैंकिंग लोकपाल संख्या-N202425023529662 दर्ज की गई। उक्त शिकायत पर बैंक के आंतरिक कार्रवाई के फलस्वरूप सहायक महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, सिंचाई भवन, पुराना सचिवालय, पटना के पत्रांक-AGM/BR/15/1101 दिनांक-10.01.2025 द्वारा सूचित किया गया कि सक्षम पदाधिकारी द्वारा वांछित सूद की राशि के आलोक में 57,53,365/- अनुमोदित कर दिया गया है, जिसके अनुरूप राशि 57,53,365/- रूपये विभाग की मूल न्यासी खाता संख्या-32636163692 में क्रेडिट कर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि सर्वप्रथम श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी द्वारा शासनादेश की अनदेखी करते हुए स्वयं के हस्ताक्षर से MOD Account समाप्त किया गया एवं ग्यारह (11) माह के बाद बचत खाता से पुनः MOD Account में स्थानांतरित किया गया, जिसके कारण अपराध पीड़ित कल्याण न्यास को 53,00,707/- रूपये की हानि हुई। विभागीय सतर्कता/प्रयास से श्री कुमार एवं बैंक के कारण हुई हानि ब्याज सहित 57,53,365/-रूपये की वसूली बैंक से की गई। इससे स्पष्ट है कि श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी के उक्त —त्य के लिए उनके ऊपर लगे आरोप की पुष्टि होती है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना (सम्प्रति प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार) के कारा निरीक्षणालय में बंदी कल्याण पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन के दौरान अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के बचत खाता संख्या-32636163692 का अवैध तरीके से संचालन करने, नियमों की अनदेखी कर स्वयं के स्तर से हस्ताक्षरित पत्र निर्गत कराकर बैंक से गलत तरीके से अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के कुल राशि 16,09,75,564/- (सोलह करोड़, नौ लाख, पचहत्तर हजार, पाँच सौ चौसठ) रूपये को MOD Accounts से बचत खाता में स्थानान्तरित करने, करीब 11 माह के पष्चात् एकमुष्त राषि 22,22,20,000/- (बाईस करोड़, बाईस लाख, बीस हजार) रूपये को बचत खाता से पुनः MOD Accounts में स्थानांतरित करने, वरीय पदाधिकारी से बिना अनुमोदन प्राप्त किये स्वेच्छा एवं अवैध तरीके से नियम विरूद्ध किये गये कार्य के कारण अपराध पीड़ित कल्याण न्यास से संबंधित खाता के संचालन में वित्तीय अनियमितता, लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता के आरोपों के लिए संस्थित विभागीय कार्यवाही में सभी विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार को ''दो (02) वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड'' अधिरोपित किया गया है, जो आरोप के सापेक्ष है। अतः उनका पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है।
8. अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में श्री राजीव कुमार, तत्कालीन बंदी कल्याण पदाधिकारी, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रोबेषन पदाधिकारी, जिला प्रोबेशन कार्यालय, कटिहार के विरूद्ध गठित आरोप की प्र—ति एवं गंभीरता पर विचार करने के उपरांत समेकित रूप से उन्हें दिया गया दण्ड न्यायोचित है एवं इसमें किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। अतः उनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त किया जाता है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार राज्यपाल के आदेश से, संजीव जमुआर, अपर सचिव-सह-निदेशक (प्र0)।
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अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय,