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Extraordinary Gazette of India · Government of India

Statute-(43) adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2/4.4(1) dated 27th June, 1996 and approved by the Visitor vide MHRD letter No. F.14-23/96-Desk(U) Vol-V dated 21st May, 1997.

Published 02 November 2007

Ministry
Tezpur University
Department
NOT available
Office
NOT available
Gazetteid
NOT available ( 12943 )
Identifier
in.gazette.central.e.2007-11-02.12943
Languages
English, Hindi
Published at
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रजिस्ट्री सं० डी० एल०-33004/99

BBGD. NO. D. L -330

भारत को राजपत्र The Gazette of India

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग III - खण्ड 4

PART III-Section 4

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं. 215]

दिल्ली, सुर , मन्बर 2 , 2007 / कार्तिक 11 , 1929

No. 215

NEW DELHI, FRIDAY, NOVEMBER 2, 2007 / KARTIKA 11 , 1929

तेजपुर विश्वविद्यालय

तेजपुर, 30 अक्तूबर , 2007

तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम , 1993

एक अधिनियम

असम प्रान्त के तेजपुर में एक शैक्षणिक एवं आबासीय विश्वविद्यालय की स्थापना एवं संयोजन हेतु तथा उससे सम्बद्ध अथवा उसके नैमित्तिक विषयों के अधान के उद्देश्यसे-

"भारतीय गणराज्य के चौवालिसवें वर्ष में इसे संसद के द्वारा निम्न प्रकार से अधिनियमित किया जाए:

संक्षिप्त शीर्षक एवं प्रारंभण:

1. (1 ) यह अधिनियम तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1993 के रूप में जाना जाएगा ।

( 2 ) केन्द्रीय संरकार द्वारा सरकारी गजट में अधिसूचना के जरिए निश्चित की जानेवाली तिथि से यह अधिनियम लागू होगा ।

परिमाथाएँ:

2. इस अधिनियम, एवं इसके अन्तर्गत बनायी गयी समस्त स्थायी विधियों में , सन्दर्भवशः किसी अन्य अर्थ की आवश्यकता न होने पर- क) 'विद्या परिषद' का अर्थ हैं- इस विश्वविद्यालय की विद्या परिषव;

ख) 'शौक्षिक कमीचारीवर्ग' का आशय है- अध्यादेशों द्वारा शौत्रिक कर्मचारी के रूप में निर्देशित कर्म बारीयों का बर्ग ;

ग) 'प्रबन्धन बोर्ड' का अर्थ है - इस विश्वविद्यालय का प्रबन्धन बोर्ड;

घ) 'पाठ्य समिति' से तात्पर्य है -इस विश्वविद्यालय की पाठ्य समिति;

ङ) 'कुलाधिपति' , 'कुलपति' तथा 'सह कुलपति' से तात्पर्य हैं - इस विश्वविद्यालय के क्रमशः कुलाधिपति , कुलपति तथा शह कुलपतिः च) 'महाविद्यालय' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय द्वारा संचालित महाविद्यालय;

छ) 'विभाग' का आशय है-अध्यायन का विभाग । यह अध्ययन के केन्द्रों को भी सूचत करेगा;

ज) 'दूर शिक्षा व्यवस्था' का आशय है-प्रसारण, सम्प्रसारण, पत्राचार पाठ्यक्रम , संगोष्ठियाँ, सम्पर्क पाठक्रम इत्थतं संचार माध्यमों में से किसी एक या दो या तंतोधिक माध्यमों के जरिए शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था;

झ) 'कर्मचारी' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त व्यक्ति, तथा इस विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी इसमें सम्मिलित होगे;

ञ) 'धित समिति' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय की बित्त समिति;

८) 'हॉल' काअर्थ है-इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों अथवा इस विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किसी महाविचालय या संस्थान के विद्यार्थियों के

आवासीय या सामूहिक जीवन की एक ईकाई;

4470 GI/2007

(1) THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] .

2

어) 'संस्थान' का आशय है- महाविद्यालय से भिन्न कोई शैक्षणिक संस्थान जो इस विश्वविद्यालय से संचालित है;

ड) 'योजना एवं विद्या समिति' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय की योजना एवं विद्या समिति;

ढ) 'योजना बोर्ड' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय का योजना बोर्ड;

ण ) । 'प्रधानाचार्य' का आशय है- इस विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किसी विश्वविद्यालय या संस्थान के प्रमुख । जहाँ प्रधानाचार्य न हो , वहाँ प्रधानाचार्य के कार्य- सम्पादन हेतु उसी अवधि के लिए विधिवत नियुक्त व्यक्ति को तथा प्रधानाचार्य या कार्यकरी प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति में उसी रूप में विधिवत नियुक्त उपप्रधानाचार्य की भी यह सूचित करेगा ;

त) 'मान्यताप्राप्त संस्थान' का आसय है- इस विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत उच्च शिक्षा का संस्थान;

थ) 'मान्यताप्राप्त शिक्षक' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किसी महाविद्यालय या संस्थान में शिक्षा प्रदान करने हेतु मान्यताप्राप्त व्यक्ति;

द) ध) 'विनियम' का अर्थ है- वर्तमान अवधि में लागू इस अधिनियम के तहत इस विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था द्वारा बनाए गए विनियम; '

मकाय' का अर्थ है- इस विश्वविद्यालय का शिक्षा-संकाय;

न) 'स्थायी विधियों' एवं ' अध्यादेशों' का तात्पर्य है- क्रमशः इस विश्वविद्याल की वर्तमान समय में लागू स्थायी विधियाँ एवं अध्यादेश;

प)

फ) 'विश्वविद्यालय के शिक्षक' का आशय है- अध्यादेशों के जरिए शिक्षक के रूप में निर्देशित तथा इस विश्वविद्यालय में या इसके द्वारा सचालित किसी महाविद्यालय या संस्थान में शिक्षा-प्रदान या शोध संचालन हेतु नियुक्त किए जानेवाले आचार्य, प्रवाचक, व्याख्याता एवं ऐसे अन्य व्यक्ति; 'विश्वविद्यालय' का अर्थ है- इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित यह तेजपुर विश्वविद्यालय;

यह विश्वविद्यालय:

3. 1 ) एक विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी जिसका नाम होगा-'तेजपुर विश्वविद्यालय' ।

2 ) इस विश्वविद्यालय का मुख्यालय तेजपुर में होगा तथा अपने क्षेत्राधिकार के भीतर ऐमे ही अन्य उपयुक्त ममझे जानेवाले स्थानों में अपने परिसर स्थापित कर सकेगा ।

3 ) इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति तथा प्रबन्धन बोर्ड , योजना एवं विद्या सभिति या विद्या परिषद या योजना बोर्ड के प्रथम सदस्य गण और सारे व्यक्ति जो भविष्य में ऐसे अधिकारी या सदस्य होंगे उनके ऐसे पदों या सदस्यता पर बने रहने तक उन सबको मिलाकर 'तेजपुर विश्वविद्यालय' के नाम से एक सामूहिक विकाय गठित किया जाता है ।

4 ) इस विश्वविद्यालय का सतत् अनुक्रम होगा इसका एक सामूहिक संप्रतीक होगा तथा उल्लिखित नाम से अभियोग चलाए जाएँगे और अभियुक्त किया जाएगा ।

विश्वविद्यालय का लक्ष्य:

4. इस विश्वविद्यालय के लक्ष्य होंगे- उपयुक्त समझी जानेवाली ज्ञान-शाखाओं पर शिक्षा- प्रदानं एवं शोध की सुविधाओं के जरिए ज्ञान का प्रसार एवं संवर्द्धन करना; विश्वविद्यालय के शैक्षिक कार्यक्रम में आनविकी, प्राकृतिक एवं भौतिक विज्ञान, भामाजिक विज्ञान , कृषि विज्ञान एवं वनविज्ञान तथा अन्य संबंधित ज्ञान - शाखाओं पर पूर्ण पाठ्यक्रमों की व्यवस्था करना; शिक्षा-प्रदान एवं शिक्षा ग्रहण की पनियों , अन्तर्ज्ञान शाखाओं के अध्यायन एवं शोध को बढ़ावा देने हेतु उपयुक्त अभिनव पदक्षेप ग्रहण करना , असम प्रान्त के विकास के लिए मानव-शक्ति को शिचित एवं प्रशिक्षित करना; तथा असम की सामाजिक एवं आर्थिक स्थितियों के संवर्द्धन और वहाँ के लोगों की भलाई उनकी बौद्धिक, शैक्षिक एवं मांस्कृतिक प्रगति की दिशा में विशेष ध्यान देना । इनके अलावा अपने कार्यक्रमों को क्रियान्वित करते समय यह निश्वविद्यालय प्रथम अनुसूची में निर्धारित लक्ष्यों एवं उदृश्यों पर भी यथोचित ध्यान केन्द्रित करेगा ।

विश्वविद्यालय की क्षमताएँ:

5. इस विश्वविद्यालय की निम्नांकित क्षमताएँ होंगी-

i ) विश्वविद्यालय द्वारा समय समय पर निश्चित की जानेवाली ज्ञान - शाखाओं पर शिक्षा प्रदान की व्यवस्था करने तथा शोध और ज्ञान के प्रसार एवं संवर्द्धन की दिशा में यथोचित करने;

ii ) विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शर्तनुसार डिप्लोमाएँ एवं प्रमाण -पत्र लोगों को अनुमोदित करने, परीक्षण, मूल्यांकन अथवा जाँच की किसी अन्य प्रविधि के आधार पर लोगों को डिग्री या अन्य शैक्षिक श्रेष्ठल की स्वीकृति प्रदान करने तथा गोवत्र एवं पर्यास कारण पर ऐसी डिप्लमा, प्रमाण-पत्र , डिग्री अथवा अन्य शैक्षिक विशेषज्ञता वापस लेने;

iii आधार बहिर्भूत अध्यायन, प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवा का आयोजन तथा प्रारंभण करने;

iv) स्थायी विधियों द्वारा विनिर्दिष्ट रीतियों से मानक उपाधि था अन्य श्रेष्ठत्य की स्वीकृति प्रदान करने;

V) इसके द्वारा निर्धारित किए जानेवाले व्यक्तियों को दूर शिक्षा व्यवस्था की सुविधा उपलब्ध कराने;

Vi ) विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक प्रधानाचार्य, आचार्य , प्रवाचक , व्याख्याता के पदों और अन्य शैक्षणिकः या शैक्षिक पदवियों की सृष्टि एव उनमे लोगोंकोनियुक्तकरने;

Vii ) विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति की दिशा में कार्यरत किसी उच्च शिक्षा के संस्थान को स्वीकृति प्रदान करने एवं एसी स्वीकृति वापस लेने;

3

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4]

Viii ) विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किसी महाविद्यालय या संस्थान में शिक्षा-प्रदान हेतु व्यक्तियों को स्वीकृति प्रदान करने;

ix) किसी अन्य विश्वविद्यालय या संस्था में कार्यरत व्यक्तियों को इस विश्वविद्यालय के शिक्षक के रूप में निश्चित अवधि के लिए नियुक्त करने;

प्रशासनिक, कार्यालयी एवं अन्य पदों की सृष्टि करने तथा उनमें नियुक्तिप्रदान करने; X)

xi ) विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित किए जानेवाले उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इसके द्वारा निश्चित की जानेवाली पद्धतियों पर किसी अन्य विश्वविद्यालय या प्राधिकारी संस्था अथवा उच्च शिक्षा के संस्थान के साथ सहयोग या संयुक्तोद्योग या सहोद्योग करने;

xii ) विश्वविद्यालय के मतानुसार इसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने हेतु जरुरी समझे जानेवाले परिसरों, विशेष केन्दों, विशिष्ट प्रयोगशालाओं अथवा शिक्षा-प्रदान एवं शोध की किसी अन्य इकाइयों की स्थापना करने;

xiii ) अध्योतावृत्ति (फेलोशिप ) , छात्रवृत्ति, स्टुडेण्टशिप , पदक एवं पुरस्कार की सृष्टि एवं उन्हें प्रदान करने;

xiv) महाविद्यालयों , संस्थानों एवं हॉलों की स्थापना तथा उनका संचालन करने ;

XV) शोध एवं परामर्श सेवा की व्यवस्था करने तथा उस उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा उपयुक्त विवेचित किसी संस्थान, औद्योगिक या अन्य संस्था के साथ किसी प्रकार के प्रबन्धन के लिए सहमत होने;

XVi ) शिक्षकों मूल्यायन कत्र्ताओं तथा अन्य शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के लिए पूनश्चर्या पाठ्यक्रम , कार्यशाला, संगोष्ठी एवं अन्य कार्यक्रमों का आयोजन तथा संचालन करने;

XVii) महिलाविद्यार्थियों के लिए आवास , अनुशासन तथा शिक्षा-प्रदान के सन्दर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक विवेचित विशेष प्रकार की व्यवस्था करने;

xviii ) विश्वविद्यालय के लक्ष्यों को बढ़ाना देने में सक्षम समझे जानेवाले अभ्यागत (विजिटंग) आचार्यों, यशस्वी ( इमिस्टिस ) आचार्यों, परामिशिंयो विद्वानों तथा अन्य व्यक्तिओं को सांविदिक या अन्य तरीके से नियुक्त करने;

iix ) स्थायी विधियों के अनुरुप किसी महाविद्यालय या संस्थान या विभाग को, यथास्थिति, स्वायत्यता की मर्यादा प्रदान करने;

XX) विश्वविद्यालय में प्रविष्टि के लिए मानदण्डों का निर्धारण करने जिसमें परीक्षण मूल्याकन या जाँच की अन्य कोई पद्धति संयुक्त हो सकती है;

xxi ) शुल्क या अन्य व्यय - भार की अदायगी की माँग करने;

Xxii ) 'विश्वविद्यालय के छात्राबासों का निरीक्षण करने एवं उनके स्वास्थतथा कल्याण के संवर्द्धन की शवम्था करने;

Xxiii ) सभी वर्गों के कर्मचारियों की सेवा- शर्तों, साथ ही उनकी आचरण-विधियों को विहित करने;

XXIV ) विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के बीच अनुशासन का विधान तथा कार्यन्वयन करने और इस सबंध में विश्वविद्यालय द्वारा उचित विवेचित आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाने;

XXV) कर्मचारियों के स्वास्थ एवं कल्याण के संवर्द्धन हेतु व्यवस्था करने;

xxvi ) दान -दक्षिणा , अनुदान एवं उपहार ग्रहण करने तथा विश्वविद्यालय किसी भी चल या अचल सम्पत्ति, साथ ही किसी ट्रस्ट एवं संस्था के प्राभूत धन प्राप्त करने , संचालित करने तथा विक्रय करने;

क्षेत्राधिकार:

6. इस विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार पूरे असम प्रान्त में व्याप्त होगा ।

सभी वर्गों, जातियों एवं सम्प्रदायों के लिए विश्वविद्यालय के द्वार उन्मुक्त:

7. इस विश्वविद्यालय के द्वार पुरुष और स्त्री दोनों के लिए तथा किसी भी जाति, सम्प्रदाय, कुल या वर्ग के लिए उन्मुक्त होंगे एवं किसी व्यक्तिको इस विश्वविद्यालय के शिक्षक के रूप में नियुक्ति के . .पाने या किसी दूसरे पद के अधिकारी बनने योग्य मानने हेतु अथवा विश्वविद्यालय में विद्यार्थी के रूप में प्रतिष्टि या विश्वविद्यालय की उपाधि लेने या किसी प्रकार के विशेषाधिकार भोगने अथवा प्रयोग करने के योग्य मानने के लिए, वह व्यक्ति चाहे किसी भी धार्मिक विश्वास या संस्था का अनुयायी हो- उस पर किसी प्रकार की जाँच चलाना या आरोपित करना विश्वविद्यालय के लिए गैरकानूनी होगाः परन्तु, इस खण्ड की कोई भी बात महिलाओं, शारीरिक रूप से अक्षम लोगों या सामान्यतः समाज के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए नियुक्ति या प्रतिष्टि के सन्दर्भ में विशेष व्यवस्था करनें से विश्वविद्यालय को बाधा प्रदान करनेवाली नहीं मानी जाएगी ।

विद्यार्थीयों के आबास:

8. विश्वविद्यालय का प्रत्येक विद्यार्थी ( दूर शिक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत किसी पाठ्यक्रम को जारी रखनेवाले विद्यार्थीयों को छोड़कर ) किसी हॉल या होस्टल में या अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जानेवाली एसे ही स्थितियों में रहेगा ।

कुलाध्यक्ष:

9. 1 ) भारत के राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष होंगे ।

2) कुलाध्यक्ष समय समय पर एक या एकाधिक व्यक्तियों को विश्वविद्यालय, साथ ही इसके द्वारा संचालित महाविद्यालयों और संस्थानों के कार्य एवं प्रगति के पुनरीक्षण तथा तत्संबंधी प्रतिवेदन जमा करने हेतु नियुक्त कर सकेंगें, और उस प्रतिवेदन के प्राप्त होने पर वे ( कुलध्यक्ष) THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SBC.4] कुलपतिके माध्यम से सबन्धन बोर्ड की राय जान लेने के पश्चात प्रतिवेदन में उठाए गए विषयों में से किसी के सन्दर्भ में अपने द्वारा आवश्यक विवेश्चित कोई कार्य-व्यवस्था लेकर तत्संबंधी निर्देश जारी कर सकेंगे, और विश्वविद्यालय ऐसे निर्देशों को मानने के लिए बाध्य होगा ।

3) कुलाध्यक्ष को अधिकार होगा कि वे अपनी ओर से आदिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा विश्वविद्यालय के, इसके भवनों, प्रयोगशालाओं, उपस्करों के , तथा इसके द्वारा संचालित किसी महाविद्यालय या संस्थान के, साथ ही परीक्षाओं, पाठ- वान एवं विश्वविद्यालय द्वारा सम्पादित या संचालित अन्यकिसी कार्य का निरीक्षण कराएँ तथा विश्वविद्यालय , या महाविद्यालयों या संस्थानों के प्रशासन या विस से संबंधित किसी भी विषय पर इसी तरह से होनेवाले अनुसंधान का आदेश दें ।

कुलाध्यक्ष उपखण्ड ( 2 ) में उल्लिखित प्रत्येक विषय पर कराए जानेवाले निरीक्षण या अनुसंधान संबंधी अपनी इच्छा की सूचना विश्वविद्यालय 4)

कोदेंगे , और विश्वविद्यालय को कुलाध्यक्ष के समक्ष आवश्यकतानुसार अभिवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार होगा ।

5 ) विश्वविद्यालय की ओर से प्रस्तुत अभिवेदनों ( अगर हों ) पर विवेचन करने के पश्चात कुलाध्यक्ष उपखण्ड ( 3 ) में कि गए उल्लेखनुसार निरीक्षण या अनुसंधान करने के लिए आदेश दे सकेंगे ।

6 ) कुलाध्यक्ष के द्वारा किसी निरीक्षण या अनुसंधान के लिए आदेश दिए जाने की स्थिति में विश्वविद्यालय अपमा एक प्रतिनिधि नियुक्त करेगा, जिसे ऐसे निरीक्षण या अनुसंधान के दौरान उपस्थित रहने एवं विश्वविद्यालय का पक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार होगा ।

7 ) विश्वविद्यालय या इसके द्वारा संचालित किसी महाविद्यालय या संस्थान के सन्दर्भ में निरीक्षण या अनुसंधान हो जाने पर, कुलाध्यक्ष ऐसे निरीक्षण याअनुसंधान तथा उस पर ली जानेवाली कार्यव्यवस्था के सन्दर्भ में अपने दृष्टिकोण एवं परामर्श , जो वे प्रस्तुत करना चाहें, के साथ कुलपति को लिख सकेंगे । कुलाध्यक्ष की ओर से ऐसी लिखित सामग्री प्राप्त होने पर, कुलपति निरीक्षण एवं अनुसंधान के परिणाम पर ली जानेवाली कार्य-व्यवस्थाके सन्दर्भ में कुलाध्यक्ष के दृष्टिकोण एवं परामर्श प्रबन्धन बोर्ड को सूचित करेंगे ।

४ ) प्रबन्धन बोर्ड कुलपति के जरिए कुलाध्यक्ष कोऐसे निरीक्षण या अनुसंधान पर लेने के लिए प्रस्तावित या ली गगी ( यदि कोई हो तो ) कार्य- व्यवस्थाके बारे में सूचित करेंगे ।

9 ) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा यथोचित समय के भीतर कुलाध्यक्ष की संतुष्टि के अनुसार कार्य व्यवस्था न ली जाने की स्थिति में, कुलाध्यक्ष प्रबन्धन बोर्ड द्वारा प्रस्तुत किसी व्यवस्था या अभिवेदन पर ध्यान देने के पश्चात उपयुक्त विवेचित निर्देश दे सकेंगे, और प्रभन्धन बोर्ड ऐसे निर्देशों को स्वीकार करेंगे ।

10 ) इस खण्ड के पूर्वोल्सिखत उपबंधों के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के कुलाध्यक्ष लिखित आदेश के जरिए प्रस्तुत अधिनियम, स्थायी विधियों या अध्यादेशों के अनुरूप न बननेवाली विश्वविद्यालय की किसी कार्यवाही को मिटा सकेंगे; परन्तु, ऐसा कोई आदेश पारित करने से पहले कुलाध्यक्ष कुलसचिव को कारण दशनि के लिए कहेंगे कि ऐसा आदेश क्योंपारित नहीं किया जाए, और यथोचित समय के भीतर ऐसे किसी कारण दर्शाए जाने की स्थिति में वे उस पर ध्यान देंगे ।

11 ) कुलाध्यक्ष के पास स्थायी विधियों द्वारा आदिष्ट ऐसी अन्य क्षमताएँ होंगी

विश्वविद्यालय के अधिकारी गण:

10. विश्वविद्यालय के अधिकारी गण निम्नप्रकार से होंगे:

1 ) कुम्लाधिपति,

2) कुलपति,

3 ) सह कुलपति,

4) संकायों के अध्यक्ष,

5) कुलसचिव,

16) वित्त अधिकारी , एवं

7 ) विश्वविद्यालय की स्थायी विधियों के द्वारा अधिकारी के रूप में घोषित होनेवाले ऐसे ही अन्य अधिकारी ।

कुलाधिपति:

11 . 1 ) असम प्रान्त के राज्यपाल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होंगे ।

2) कुलाधिपति, पदेन, विश्वविद्यालय के प्रमुख होगे ।

3 ) कुलाधिपति, उपस्थित रहने की स्थिति में, डिग्रियाँ प्रदान करने के लिए आयोजित समावर्त्तन समारोह की अध्यक्षता करेंगे ।

कुलपति:

12. ( 1 ) कुलपति की नियुक्त कुलाध्यक्ष के द्वारा स्थायी विधियों के जरिए आदिष्ट किए जानेवाली रीतियों से होगी।

2) कुलपति विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यवाहक एवं विद्या अधिकारी होंगे तथा वे विश्वविद्यालय के कार्यों पर सामान्य रूप से निरीक्षण एवं नियन्त्रण रखेंगे और विश्वविद्यालय की समस्त प्राधिकारी संस्थाओं के निर्णयों को कार्य-रूप देंगे ।

3) कुलपति को यदि किसी विषय पर तात्कालिक कार्य-व्यवस्था की आवश्यकता का अनुभव हो वो वैशी स्थिति में वे विश्वविद्यालय की किसी भी प्राधिकारी संस्था को इस अधिनियम के द्वारा दी गयी किसी क्षमता का उपयोग कर सकेंगे , औरवेले विधग पर अपने द्वारा ली गयी कार्य- व्यवस्थाके बारे में संबद्ध प्राधिकारी संस्था को सूचना देंगेः भारत का राजपत्र असाधारण

[भान III- खण्ड 4]

परन्तु, यदि संम्बद्ध प्राधिकारी का यह भत हो कि वैसी कार्य- व्यवस्था ग्रहण करना उचित न था, तो वैसीनिर्धान्त में वह कुलाध्यक्ष को सम्बद्ध बिषय प्रेषित कर सकेंगी, और इसमें कुलाध्यक्ष का निर्णय अन्तिम होगा:

परन्तु यह और कि विश्वविद्यालय की सेवा में रत कोई व्यक्ति, जिसे इस उपखण्ड के अधीन कुलपति के द्वारा ली गयी कार्य -व्यवस्था से वाधा पहुँचीहो, उसे कार्य-व्यवस्था संबंधी निर्णय की सूचना दिये जानेवाले दिनांक से तीन महीने के भीतर उस कार्य-व्यवस्था के विरुद्ध प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष अपील करने का अधिकार होगा , तथा वैसी स्थिति में प्रबन्धन बोर्ड कुलपति द्वारा ली गयी कार्य -व्यवस्था को निश्चयता प्रदान , संशोधन या उलट -फेर कर सकेगा ।

4) कुलपति यदि मत पोषण करें कि विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था द्वारा लिया गया कोई निर्णय इस अधिनियम की व्यवस्थाओं, स्थायीविधियों या अध्यादेशों द्वारा प्रदत क्षमताओं से बाहर है अथवा कोई निर्णय विश्वविद्यालय के स्वार्थ के अनुकूल नहीं है तो वे सम्बद्ध प्राधिकारी संस्थाको वैसे निर्णय लिए जाने के साठ दिन के भीतर उस पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकेंगे, और यदि सम्बद्ध प्राधिकारी संस्था पूरे निर्णय या उसके किसी अंश पर निर्धारित साठ दिन की अवधि के भीतर पुनर्विचार करने से अस्वीकार करे या कोई निर्णय न ले तो वह विषय कुलाध्यक्ष को उनके निर्णय के लिए भेजा जाएगा तथा उस विषय पर उनका निर्णय अन्तिम मान्यहोगा ।

5) कुलपति स्थायीविधियों या अध्यादेशों द्वारा आविष्ट ऐसी अन्य क्षमताओं का प्रयोग एवं ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेंगे ।

सह कुलपति:

13. सह कुलपति कीनियुक्ति स्थायी विधियों द्वारा आदिष्ट रीतियों से होगी और वे स्थायी विधियों द्वारा विहित क्षमताओं एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे।

संकायाध्यक्ष:

14 प्रत्येक संकायाध्यक्ष की नियुक्तिस्थायी विधियों द्वारा आविष्ट रीतियों से होगी और के उनमें विहित क्षमताओं एवं कर्त्तव्यों का पालन करेंगे ।

कुलसचिव:

15. 1 ) कुलसचिव की नियुक्ति स्थायी विधियों द्वारा आविष्ट रीतियों के अनुसार होगी ।

2) कुलसचिव के पास विश्वविद्यालय की ओर से आपसी समझौता करने, लिखित, तथ्यपरक सामग्रिओं पर हस्ताक्षर करने एवं अभिलेखों को प्रामाणीकृत करने की क्षमता होगी तथा वे स्थायी विधियों द्वारा विहित क्षमताओं एवं कर्तव्यों का निर्वाह करेंगे ।

वित्त अधिकारी:

16 . वित्त अधिकारी की नियुक्त स्थायी विधियों द्वारा आदिष्ट रीतियों से होगी एवं वे उनमें बिहित क्षमताओं तथा कर्त्तव्यों का पालन करेंगे ।

अन्यअप्रिराकी गण:

17. विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी गण की नियुक्ति की विधि एवं उनकी क्षमताएँ स्थायी विधियों द्वारा आदिष्ट की आँएगी ।

विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाएँ:

18. विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाएँ निम्न प्रकार से होंगी:

1) प्रबन्धन बोर्ड;

2) योजना एवं विद्या समिति;

3) बिद्या परिषद;

4) योजना बोर्ड;

5) संकाय बोर्ड;

6) बित्त समिति, और;

7) स्थायीविधियों द्वारा विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था के रूप में घोषित अन्य प्राधिकारी संस्थाएँ ।

प्रबन्धन गोर्ड:

19. 1 ) प्रबन्धन बोर्डविश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यपालक निकाय होगा ।

2 ) प्रबन्धन बोर्ड को गठन, इसके सदस्यों को कार्यकाल , इसके कार्य तथा इसकी क्षमताओं का विधान स्थायी निधियों द्वारा किया जाएगा ।

योजना एवं विद्या समिति:

20 . 1 ) विश्वविद्यालय की एक योजना एवं विद्या समिति गठित की जाएगी जो प्रबन्धन बोर्ड को विश्वविद्यालय के शैक्षिक एवं अन्नयन के कार्यों से संबंधित विषयों में परामर्श देगी, साथ ही विश्वविद्यालय की उन्नति का निरीक्षण, पुनरीक्षण एवं नियन्त्रण करेगी तथा विश्वविद्यालय के शिक्षा एवं शोध के स्तर पर बराबर ध्यान रखेगी ।

2) योजना एवं विद्या समिति के गठन , इसके सदस्यों के कार्यकाल , इसके दायित्वों एवं इसकी क्षमताओं का विधान स्थायी विधियों द्वारा किया आएगा ।

3) कुलाध्यक्ष ऐसी तिथि का निर्धारण कर सकेंगे जब से योजना एवं विद्या समिति अंग मानी जाएगी ।

6

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] बिद्या परिषद:

21. 1 ) बिद्या परिषद विश्वविद्यालय की प्रमुख शैक्षिक संस्था होगी तथा इस अधिनियम, स्थायी विधियों एवं अध्यादेशों की व्यवस्थाओं के अनुरूप यह विश्वविद्यालय की शैक्षिक नीतियों का नियमत करेगी तथा उन पर सामान्य निरीक्षण बनाए रखेगी ।

2 ) बिद्या परिषद के गठन, इसके सदस्यों के कार्यकाल , इसके कार्यों एवं इसकी क्षमताओं का विधान स्थायी विधियों द्वारा किया जाएगा ।

योजना बोर्ड:

22. 1 ) योजना बोर्ड , जब इसका गठन हो , तब से विश्वविद्यालय का प्रमुख योजना निकाय होगा ।

: 2 ) योजना बोर्ड के गठन , इसके सदस्यों के कार्यकाल, इसके कार्यों तथा इसकी क्षमताओं का विधान स्थायी विधियों द्वारा किया जाएगा ।

संकाय बोर्ड:

23. संकाय बोर्ड के गठन, इनके कार्यों एवं इनकी क्षमताओं का विधान स्थायी विधियों द्वारा किया जाएगा ।

वित्त मिति:

24. वित्त समिति के गठन , इसके कार्यों एवं इसकी क्षमताओं का विधान स्थायी विधियों के द्वारा किया जाएगा ।

विश्वविद्यालय की अन्य प्राधिकारी संस्थाएँ:

25. स्थायीविधियों द्वारा विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था के रूप में घोषित होनेवाली अन्य प्राधिकारी संस्थाओं के गठन, उनके कार्यों एवं उनकी | क्षमताओं का विधान स्थायी विधियों द्वारा किया जाएगा ।

स्थायी विधियों के प्रणयन की क्षमता:

26. इस अधिनियम की व्यवस्थाओं के अधीन स्थायी विधियाँ निम्नलिखित सारे विषयों या उनमें किसी के बारे में विधाम कर सकेंगी:

क ) प्राधिकारी संस्थाओं तथा समय समय पर बनाए जानेवाले निकायों के गठन, क्षमताएँ और कार्य.

: ख ) उल्लिखित संस्थाओं एवं निकायों के सदस्यों का चुनाव, उनका पदों पर बने रहना , सदस्यों की रिक्तिपूर्ति तथा उ संस्थाओं एवं निकायों से संबंधित शेष समस्त बातें, जिनके सन्दर्भ में विधान करना आवश्यक या वांछित हो;

2 ग ) विश्वविद्यालय के अधिकारियों की नियुक्ति, उनके कर्तव्य एवं क्षमताएँ तथा उनकी उपलब्धियाँ;

घ) विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शैक्षिक कर्मचारीवर्ग तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति, उपलब्धियाँ तथा अन्य सेवा-शर्तें;

ङ) अन्य विश्वविद्यालय या संस्था में कार्यरत शिक्षकों एवं शैक्षिक कर्मचारियों की संयुक्त योजना के ग्रहण हेतु निर्दिष्ट अवधि के लिए नियुक्ति;

च) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की सेवा-शर्तें, साथ ही निवृति-वेतन, जीवन बीमा एवं भविष्यनिधि कीव्यवस्थाएँ, सेवा - समाप्ति की पद्धति और अनुशासनात्मक कारवाई;

छ) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की सेवा वरिष्ठता को नियत्रित करने के नियम;

: ज) विश्वविद्यालय और कर्मचारियों या विद्यार्थीयों के बीच मत - विरोध मध्यस्थता निर्णय की प्रक्रिया;

झ ) विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी या विद्यार्थी द्वारा प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष विश्वविद्यालय के किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा की जानेवाली कारवाई के विरुद्ध अपील करने की प्रक्रिया;

अ ) क्रिसी महाविद्यालय या संस्थान या विभाग को स्वायत्वता का मर्यादा प्रदान;

ट ) संकायों, विभागों, केन्द्रों, हॉलों , महाविद्यालयों एवं संस्थानों की स्थापना एवं विलुप्ति;

ठ) मानक उपाधियों का प्रदान;

ड) डिग्रियों, डिप्लोमाओं, प्रमाण-पत्रों तथा अन्य शैक्षिक महत्वों की वापसी;

: ढ ) फेलोशिपों, छात्र- वृत्तियों, स्टुडेण्टशिपों, पदकों एवं पुरस्कारों का प्रवर्त्तण;

ण) विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाओं एवं अधिकारियों पर आरोपित क्षमताओं का किसी अन्य को समर्पण;

त) कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के बीच अनुशासन का निर्वहण;

थ) इस अधिनियम के द्वारा स्थायी विधियों के लिए विनिर्दिष्ट किए जानेवाले अन्य सभी विषय,

स्थायी विधियों का प्रणयन कैसे किया जाए:

27. 1 ) द्वितीय अनुसूची में विहित विधियाँ ही प्रथम स्थायी विधियाँ होंगी ।

2) प्रबन्धन बोर्ड समय समय पर नयी या अतिरिक्त स्थायी विधियों का प्रणयन अथवा अनुभाग ( 1 ) में सन्दर्भित स्थायी विधियों का संशोधन याविखण्डन कट सकेगाः

परन्तु, प्रबन्धन बोर्ड विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था को लिखित रूप में प्रस्तावित परिवर्तनों पर अपना अभिमत प्रकट करने की सुविधा दिए बिना उसकी मर्यादा, क्षमताएँ या उसके गठन को प्रभावित करनेवाली स्थायी विधियों का प्रणयन , संशोधन या विखण्डन नहीं करेगा तथा इस रूप में अभिव्यक्त अभिमतों पर प्रबन्धन बोर्ड द्वारा विचार किया जाएगा ।

3) प्रत्येक नयी स्थायी विधि. या स्थायी विधियों में संयोजन अथवा स्थायी विधियों में किसी प्रकार के संशोधन या उसके विखण्डन के लिए कुलाध्यक्ष की स्वीकृति की आवश्यकता होगी , जो उसी रूप में स्वीकृति दे सकेंगे या स्वीकृति को रोक कर रख सकेंगे अथवा प्रबन्धन बोर्ड के विचारार्थ उसे पूर्व स्थिति में वापस कर सकेंगे ।

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भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड, 4]

4) किसी नयी स्थायी विधि या विद्यमान स्थायी विधि के संशोधन या विखण्डन से संबंधित किसी स्थायी विधि की वैधता तब तक नहींमान्य होगी जब तक कि वह कुलाध्यक्ष के द्वारा स्वीकृत न हो ।

5 ) पूर्वोक्त उपखण्डों में जो कुछ भी कहा गया हो, उनके होने पर सी कुलाध्यक्ष इस अधिनियम के लागू होने के तत्काल बाद से तीन वर्ष की अवधि के भीतर नयी अथवा अतिरिक्त स्थायी विधियों का प्रणयन अथवा उपखण्ड ( 1 ) में सन्दर्भित स्थायी विधियों का संशोधन या विखण्डन कर सकेंगे:

परन्तु, कुलाध्यक्ष उल्लिखित तीन वर्षकी अवधि के व्यतीत हो जाने पर एक वर्ष के भीतर आवश्यक विवेचित विस्तृत स्थायी विधियों का प्रणयन कर सकेंगे, तथा वैसी विस्तृत स्थायी विधियाँ दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएँगी ।

- 6) पूर्वोक्त उपखण्डों जो कुछ भी कहा गया हो, उसके होने पर भी कुलाध्यक्ष अपने द्वारा विनिर्दिष्ट किसी विषय के सन्दर्भ में स्थायी विधियों मेंप्रावधान रखने हेतु विश्वविद्यालय को निर्देश दे सकेंगे , तथा ऐसे निर्देश की प्राप्ति के साठ दिन के भीतर प्रबन्धन बोर्ड उसे कार्यान्वित करने मेंअसमर्थ हो तो कुलाध्यक्ष प्रबन्धन बोर्ड द्वारा प्रस्तुत ( यदि हो तो ) निर्देशों के पालन की असमर्थता के कारणों पर ध्यान देने के पश्चात यथोचित रूप में स्थायी विधियों का प्रणयन या संशोधन कर सकेंगे ।.

अध्यादेशों के प्रणयन की क्षमता:

28. 1 ) इस अधिनियम तथा स्थायी विधियों के उपबन्धों के उपाश्रित निम्नलिखित सारे या उनमें से किसी विषय पर अध्यादेशों द्वारा विधान किए जासकेंगे:

क) विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की सविष्टि तथा साथ ही उनका नामांकन;

ख ) विश्वविद्यालय की सारी डिग्रियों , डिप्लोमाओं तथा प्रमाण-पत्रों के लिए प्राठ्यक्रमों का निर्धारण;

ग ) शिक्षण एवं परीक्षा के माध्यम ,

घ) डिग्रियों, डिप्लोमाओं, प्रमाण-पत्रों तथा अन्य शैक्षिक श्रेष्ठत्व का प्रदान, उनके लिए अर्हताएँ, तथा उनके अनुमोदन एवं ग्रहण हेतु अपनायी जानेवाली पद्धतियाँ;

ङ) विश्वविद्यालय के अध्ययन पाठ्यक्रमों के लिए तथा परीक्षाओं, डिग्रियों एवं डिप्लोमाओ में प्रवेश हेतु लिए आनेवाले शुल्क;

च ) फेलोशिपों, छात्र - वृत्तियों, स्टुडेण्टशिपों, पदकों एवं पुरस्कारों के प्रदान की शर्तें;

छ ) परीक्षाओं के संचालन, साथ ही परीक्षा निकायों , परीक्षकों एवं सन्तुलनकर्ताओं के कार्यकाल, उनकी नियुक्ति की पद्धति एवं उनके कर्तव्य;

ज) विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की आवासीय स्थितियाँ;

झ ) विश्वविद्यालय की महिला विद्यार्थियों के लिए आवास, अनुशासन एवं शिक्षा प्रदान की विशेष व्यवस्थाएँ ( यदि हो तो ) तथा उनके लिए विशेष पाठ्यक्रमों का निर्धारण;

ञ ) स्थायीविधियों द्वारा विधान किए जानेवाले कर्मचारियों से भिन्न कर्मचारियों की नियुक्ति तथा उपलब्धियों;

ट) अध्ययन केन्द्रों, पाठ्य - समितियों, विशेष केन्द्रों, विशिष्ट प्रयोगशालाओं तथा अन्य समितियों की स्थापना;

ठ) अन्य विश्वविद्यालयों तथा विशेषज्ञताप्राप्त निकायों या संस्थाओं सहित अन्य प्राधिकारी संस्थाओं के साथ सहयोग एवं संयुक्तोद्योग करने की पद्धतियों;

ड ) विश्वविद्यालय के शैक्षिक वातावरण -जीवन के उन्नयन हेतु आवश्यक समझे जानेवाले किसी अन्य निकाय का सर्जन, गठन एवं उनके कार्य;

ढ ) विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं अन्य शैक्षिक कर्मचारियों की सेवा से संबंधित निबन्धने एवं शर्तें जो स्थायी विधियों द्वारा विहित न हों;

ण ) विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित महाविद्यालयों एवं संस्थानों का प्रबन्धनः ।

त ) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की व्यवस्थाओं एवं असुविधाओं के दूरीकरण हेतु प्रक्रिया का प्रणयन, और;

थ) इस अधिनियम अथवा स्थायी विधियोंद्वारा समेटे न जानेवाले अन्य सभी विषय अध्यादेशों के जरिए अनुबंधित किए जा सकेंगे;

2 ) केन्द्रीय सरकार की पूर्वानुमति प्राप्त करके कुलपति प्रथम अध्यादेशों का प्रणयन करेंगे और इस प्रकार प्रणीत अध्यादेशों का संशोधन, विखण्डन या संवर्द्धन किसी भी समय पर प्रबन्धन बोर्ड स्थायी विधियों द्वारा आदिष्ट रीतियों से कर सकेगा;

विनियम:

29. विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाएँ इस अधिनियम , स्थायी विधियों एवं अध्यादेशों के साथ संगति बनाए रखते हुए अपने-अपने कार्यों के निवांह हेतु, तथा प्रस्तुत अधिनियम , स्थायी विधियों या अध्यादेशों द्वारा नहीं अपितु अपने द्वारा नियुक्त की जानेवाली समितियों ( यदि हो तो) के लिए स्थायीविधियों द्वारा निर्धारित रीतियों से विनियमों का प्रणयन कर सकेंगी ।

वार्षिक प्रतिवेदन:

30. 1 ) प्रबन्धन बोर्ड के निर्देश पर विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसमें अन्य बातों के अलावा अपने लक्ष्यों कीप्राप्ति कीदिशामें विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा होगी ।

2) इस रूप में तैयार वार्षिक प्रतिवेदन को कुलाध्यक्ष के पास स्थायी विधियों द्वारा विनिर्दिष्ट दिनांक को या उससे पहले जमा किया जाएगा । 3) उपखण्ड ( 1 ) के आधार पर तैयार वार्षिक प्रतिवेदन की एक प्रति केन्द्रीय सरकार के पास भी भेजी जाएगी , जिसे शीघ्रातिशीघ्र दोनों सदनों मेंप्रस्तुत किए जाने का प्रबन्ध किया जाएगा ।

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[PART III-SEC. 4] लेखा:

31. 1 ) विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखा-पत्र और तुलन के प्रबन्धन बोर्ड के निर्देशों पर तैयार किया जाएगा, और प्रत्येक वर्ष कम से कम एक बार तथा सर्वाधिक पन्द्रह महीने के अन्तराल पर भारतवर्ष के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक अथवा अनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के द्वारा लेखा- परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी ।

2 ) मैखा परीक्षण संबंधी प्रतिवेदन के साथ वार्षिक लेखा की एक प्रति कुलाध्यक्ष के पास जमा की जाएगी।

3) कुलाध्यक्ष द्वारा वार्षिक लेखा पर की गयी किसी भी टिप्पणी और प्रबन्धन बोर्ड के ध्यान में लाया जाएगा और प्रबन्धन बोर्ड के विचारों को ( यदि हो तो) कुलाध्यक्ष के पास प्रस्तुत किया जाएगा ।

4 ) मैखा परीक्षण संबंधी प्रतिवेदन के साथ वार्षिक लेखा की एक प्रति कुलाध्यक्ष के पास जमा करने की भाँति. ही केन्द्रीय सरकार को भी भेजी जाएगी , जो उसे शीघ्रानिशीदा दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करने की व्यवस्था करेगी।

: 5 ) परीक्षित वार्षिक लेखा को दोनों सदनों में प्रस्तुत करने के पश्चात भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएग ॥

कर्मचारी सेवा शर्ते:

32. 1 ) विश्वविद्यालय के प्रत्येक कर्मचारी की नियुक्ति लिखित संविदा के अन्तर्गत होगी , जो विश्वविद्यालय के पास जमा रहेगी और उसकी एक प्रति संबद्ध व्यक्ति को दी जाएगी ।

2 ) विश्वविद्यालय और कर्मचारी के बीच खड़ा किसी प्रकार का विवाद कर्मचारी के अनुरोध पर एक माध्यस्थम् अधिकरण को भेजा जाएगा, जो प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नियूक्त एक सदस्य, सम्बद्ध कर्मचारी द्वारा नामित एक सदस्य और कुलाध्यक्ष द्वारा नियुक्ति एक मध्यस्थताकारी (आम्पयर) से गठित होगा ।

3 ) अधिकरण का निर्णय ही अन्तिम होगा और किसी भी सिविल न्यायालय में अधिकरण द्वारा निर्णीत विषयों को लेकर अभियोग नहीं किया ! जा सफ़गा ।

4 ) कर्मचारी के द्वारा उपखण्ड-2 के अन्तर्गत किया गया प्रत्येक अनुरोध माध्यस्थम अधिनियम , 1940 ( आरबिट्रेण्यन एक्ट, 1940 ) के आशय के अन्तर्गत इस खण्ड के शर्तानुसार मध्यस्थता निर्णय हेतु किया गया निवेदन समझ जाएगा ।

5 ) अधिकरण के कार्य के नियमन करनेवाली प्रक्रिया स्थायी विधियों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएगी ।

विद्यार्थियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक मामलों में अपील और विवाचन की प्रक्रिया:

33. 1 ) कोई विद्यार्थी या परीक्षार्थी जिसका नाम , यथा स्थिति, कुलपति, अनुशासन समिति के आदेश या प्रस्तावानुसार विश्वविद्यालय की नामावली से निकाल दिया गया हो तथा जों एक वर्ष से अधिक समय के लिए विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में बैठने के अयोग्य घोषित कर दिया गया ही , ऐसे आदेश या प्रस्ताव की प्रति उसके द्वारा प्राप्त होने के दस दिन के भीतर वह प्रबन्धन बोर्ड , के समक्ष अपील कर सकेगा , और प्रबन्धन बोर्ड, यथा स्थिति, कुलपति या समिति के निर्णय को संपुष्ट या संशोधित अथवा उसका उलट-फेर कर सकेगा ।

2) विश्वविद्यालय द्वारा किसी विद्यार्थी पर की गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई से उत्पन्न किमी भी विवाद को विद्यार्थी के अनुरोध पर एक माध्यस्थम अधिकरण को भेजा जाएगा और खण्ड 32 के उपखण्डों ( 2 ) , ( 3 ) , ( 4 ) एवं ( 5 ) की व्यवस्थाएँ प्रस्तुत उपखण्ड के अन्तर्गत सन्दर्भित विषय पर, जहाँ तक हो सके, लागू होंगी ।

अपील का अधिकार:

34. इस विश्वविद्यालय का या इसके द्वारा संचालित महाविद्यालय या संस्थान के प्रत्येक कर्मचारी या विद्यार्थी को, प्रस्तुन अधिनियम में जो भी हो, यह अधिकार होगा कि वह प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष यथास्थिति, विश्वविद्यालय के किसी अधिकारी या प्राधिकारी संस्थाअथवा महाविद्यालय था संस्थान के प्रधानाचार्य के निर्णय के विरुद्ध अपील करे, और उस स्थिति में प्रबन्धन बोर्ड उस निर्णय को, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, संपुष्ट या संशोधित अथवा उसका उलट - फेर कर सकेगा ।

भविष्य एवं विवृति वेतन निधि:

35. 1 ) विश्वविद्यालय अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए स्थायी विधियों द्वारा विनिर्दिष्ट रीतियों एवं शर्तोंके उपाश्रितं भविष्य निधि या निवृति वेतन निधि अथवा जीवन बीमा ( जिसे वह उपयुक्त समझे ) की व्यवस्था करेगा ।

2) वैसी भविष्य निधिया निवृति वेतन निधि के गठन होने पर केन्द्रीय सरकार उसे सरकारी भविष्य निधि ही जानकर घोषणा कर सकेगी कि :

उस पर भविष्य निधि अधिनियम , 1925 की व्यवस्थाएँ लागू होंगी ।

विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाओं एवं निकायों के गठन के सन्दर्भ में विवाद:

36 विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था या निकाय के सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति के गही स्श से चुने जाने भा नियुक्त किए जाने अथन्त्र योग्यहोने को लेकर किसी प्रश्न के खड़े होने की स्थिति में वह विषय कुलाध्यक्ष के पास प्रेषित किया जाएगा और उस पर उनका निर्णय अनिव होगा।

समितियों का गठन:

37. प्रस्तुत अधिनियम अथवा स्थायी विधियों द्वारा विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था को समितियों के गठन की क्षमता दी जाने की स्थित

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भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III-खण्ड 4 ]

में, वैसी समितियों, सिवाय अन्य व्यवस्था के, सम्बद्ध प्राधिकारी संस्थाके सदस्यों तथा प्राधिकारी संस्था द्वारा प्रत्येक विषय में बौग्य विचित (यदि हो तो) किसी अन्य व्यक्ति से गठित होंगी ।

आकस्मिक रिक्तियोंकी पूर्ति:

38. विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था या निकाय के सदस्यों की आकस्मिक रिक्तियाँ ( पदेन सदस्यों छोड़कर ) यथासंभव शीघ्र उस व्यक्ति यानिकाय द्वारा भरी जाएँगी, जिसने वर्तमान को खाली स्थान पर किसी सदस्य को नियुक्त, निर्वाचित या सहयोजित किया था, तथा इस प्रकार आकस्मिक रिक्ति में नियुक्त, निर्वाचित या सहयोजित व्यक्ति ऐसे प्राधिकारी संस्था या निकाय के सदस्य उस शेष अवधि के लिए होंगे -जिम अवधि तक वह व्यक्ति सदस्य होता, जिसके रिक्त स्थान की पूर्ति अब हुई हो ।

विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाओं एवं निकायों की रिक्तियों के कारण अमान्यीकृत न होनेवाली कार्यवाहियों:

39 . विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था अथवा अन्य निकाय के अधिनियम या कार्यवाही उसके मदस्यों में से किसी एक या एकाधिक रिक्तियों के होने के कारण मात्र से ही अमान्यीकृत नहींहोगी ।

शुद्धमान से किए गए कार्यों का संरक्षण:

विश्वविद्यालय के किसी अधिकारी अथवा अन्य कर्मचारी के बिरुद्ध शुद्ध भाव से किए गए या इस अधिनियम , स्थायी विधियों अथवा अध्यादेशों कीकिसी व्यवस्था के अनुसरण पर किए जानेवाले किसी कार्य के लिए कोई भी अभियोग या अन्य कानूनी कारवाई नहीं ठहरेगी ।

विश्वविद्यालय के अभिलेखों के प्रामाणिकरण की रीति:

4.1 . विश्वविद्यालय की. किसी प्राधिकारी संस्था या समिति की कोई रसीव, आवेदन, सूचना, आदेश, कार्यव ही और प्रस्ताव की कोई प्रति अथवा विश्वविद्यालय के पास संरक्षित अन्य दलील या विश्वविद्यालय द्वारा सही विधि से पंजिका में की जानेवाली कोई प्रतिष्टि, यदि वह कुलसभिव द्वारा प्रामाणीकृत हो तो वैसी रसीद , आवेदन , सूचना, आवेश , कार्यबाही , प्रस्ताव या वलील अध्धा पत्रिका में की गयी प्रतिष्टि कीस्थिति के प्राथमिक प्रमाण के रूप में उसे ग्रहण किया जाएगा तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम , 1872 ( इंशिया एविडेन्स एका, 1872 ) अथवा वर्तमान समय में लागू अन्य किसी कानून में कुछ भी क्यों न हो , उसे सम्बद्ध विषय एवं आदान-प्रदान के, जिसमे मूल प्रति प्रमाण के रूप में स्वीकृत होती यदि उसे प्रस्तुत किया जाता, प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा ।

कठिनाइयों के दूरीकरण की क्षमता:

42. 1 ) इस अधिनियम की किसी व्यवस्था को कार्य- रूप देने में यदि कोई कठिनाई उपस्थिति हो तो केन्द्रीय सरकार राजकीय गजट में आदेश के रूप में प्रकाशित करते हुए आवश्यक या कठिनाई के दूरीकरण हेतु उचित बिबेचित ऐसी व्यवस्थाएँ कर सकेंगी जो इस अधिनियम के अनुबंधों के बिरोधी न हों: :

परन्तु, अधिनियम के लागू होने के तीन वर्ष के पश्चात इस खण्ड के अन्तर्गत ऐसा आदेश प्रस्तुत नहीं किया जाएगा ।

2 ) इस खण्ड के अन्तर्गत निर्मित प्रत्येक आदेश निर्मित के पश्चात यथासंभव शीघ्र दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।

संक्रमणकालीन व्यवस्थाएँ:

43. इस अधिनियम एवं स्थायी विधियों में कुछ भीहो -

क) प्रथम कुलपति कीनियुक्ति कुलाध्यक्ष द्वारा होगी होगी और वे पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिए पद पर बने रहेंगे,

ख) प्रथम कुलसचिव एवं प्रथम वित्त अधिकारी को नियुक्ति कुलाध्यक्ष के द्वारा होगी और उनमें से प्रत्येक अधिकारी तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए पद पर बने रहेंगे ।

ग ) प्रथम प्रबन्धन बोर्ड कुलाध्यक्ष द्वारा मनोनीत सर्वाधिक ग्यारह सदस्यों से गठित होगा और वे तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए पदों पर बने रहेंगे ।

घ ) इस अधिनियम के लागू होने के दस वर्ष पश्चात प्रथम विद्या परिषद और प्रथम योजना बोर्ड का गठन किया जाएगा तथा उल्लिखित दस वर्ष की अवधि के भीतर सण्ड 20 के अन्तर्गत योजना एवं विद्या समिति उक्त दोनों प्राधिकारी संस्थाओं की क्षमताओं का प्रयोग तथा कार्यों का सम्पादन करेगी:

परन्तु, उपरोक्त पदों या प्राधिकारी संस्थाओं में यदि कोई स्थान रिक्त हो तो कुलाध्यक्ष जैसा उचित हो, नियूक्ति या नामांकन के जरिए उसे पूर्ण करेंगे , और वैसेनियुक्त या नामांकित व्यक्ति तब तक के लिये पद पर बने रहेंगे जब तक के लिए भामांकन हुआ हो, पद पर बने रहते यदि बैसी रिक्सिनहीं होती ।

सरकारी गजट में प्रकाशित किए जानेवाली एवं संसद में रखी जानेवाली स्थायी विधियाँ अध्यादेश एवं विनियम:

44. 1 ) इस अधिनियम के अन्तर्गत बनायी जानेवाली प्रत्येक स्थायी निधि, अध्यादेश या विनियम को सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा ।

2 ) इस अधिनियम के अन्तर्गत बनायी जानेवाली प्रत्येक स्थायी विधि, अध्यादेश या विनियम बनाए जाने के पश्चात यथा संभव शीघ्र दोनों सदनों में तब प्रस्तुत किया जाएगा , जब सदन का सत्र कुल तीस दिन की अवधि के लिए चल रहा हो तथा तीस दिन की यह अवधि एक सत्र में भी हो सकती है अथवा दो या अधिक क्रमबद्ध सत्रों में भी, और यदि सत्रावसान के पूर्व या सत्रारंभ के तुरन्त पश्चात अथवा पूर्वाक्त क्रमबद्ध सत्रों में बोनों सदन स्थायी विधि, अध्यादेश या विनियम में किसी प्रकार के संशोधन के लिये सम्मत हों अथवा दोनों सदन मान ले कि स्थायी विधि

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[PART III-SEC. 4]

अध्यादेश या विनियम यथा स्थिति संशोधित रूप में ही प्रभावी होंगे अथवा वे प्रभावी ही नहीं होंगे , परन्तु ऐसा कोई भी संशोधन या लोप उस स्थायीविधि , अध्यादेश या विनियम के अन्तर्गत की गयी किसी भी व्यवस्थाकी वैधता के संन्दर्भ में पूर्वाग्रहरहित होगा ।

3 ) स्थायीविधियों, अध्यादेशों या विनियमों के प्रणयन की क्षमता के अन्तर्गत स्थायी विधियों , अध्यादेशों या विनियमों अथवा उनमें से किसी को ऐसी तिथि से पश्चाद्दर्शी प्रभाव देने की क्षमता भी शामिल होगी जो इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से पूर्ववत्ती नहीं होगी, परन्तुऐसे व्यक्तिाके जिस पर ऐसी स्थायी विधि, अध्यादेश या विनियम लागू हो सकता हो, उसके स्वार्थ को पूर्वाग्रहपूर्ण ढंग से प्रभावित करने हेतु किसी स्थायी विधि, अध्यादेश या विनियम को पश्चाद्दर्शी प्रभाव से युक्त नहीं किया जाएगा ।

प्रथमअनुसूची

(खण्ड4 देखिए)

विश्वविद्यालय के लक्ष्य

1 यहविश्वविद्यालय शिक्षा, शोध , प्रशिक्षण एवं विस्तारण के जरिए उत्तर - पूर्वांचल के विकास में एक संकारात्मक भूमिका अदा करने का प्रयास करेगा, तथा इस अंचल की समृद्ध विरासत को आधार बनाकर यह असम प्रान्त के लोगों की संस्कृति और यहाँ के मानव संसाधन के विकास एवं प्रगति हेतु कार्यस्थ रहेगा । इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में यह-

(क) स्थामीय एवं आंचलिक आकांक्षाओं तथा असम प्रान्त के विकास की आवश्यकता की पूर्ति हेतु विशेष रूप से स्नातकोत्तर स्तर पर आजीविकोन्मुखी एवं अन्तविषयक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था करने का प्रयत्न करेगा;

ख) इस क्षेत्र के लिए विशेष एवं प्रत्यक्ष रुप से प्रासंगिक तथा विज्ञान एवं तकनीकी के नूतन पाठ्यक्रमों का प्रचलन करेगा तथा शोध को बढ़ावा देगा;

ग ) राष्ट्रीय एकता तथा इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के विशेष रूप से इस प्रान्त की विविधग्तापूर्ण साम्प्रदायिक, भाषिक और आदिवासी संस्कृति के अध्ययन को बढ़ावा देगा;

घ ) जनसँख्या के वृहद् अंश के लिए , विशेष रूप से दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बसे लोगों जैसे, सुविधानों से बंछित समूदायों के लिए उच्च सिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्टि की व्यवस्था करने, सेवारत व्यक्तियों- विशेष रूप से, विद्यालय के शिक्षकों, चिकित्मा से जुडे लोगों तथा विस्तार कार्य से संलग्नित कर्मचारियों के व्यावसायिक ज्ञान एवं कर्म- कुशलता को उन्नत बनाने और वयस्क व्यक्तियों के लिए जीवन भर शिक्षा प्राप्ति की सुविधा प्रदान करने हेतु दूरस्थ शिक्षा पद्धति एवं आधुनिक संचार प्रोद्योगिकी का उपयोग करेगा; जथा

४) विश्वविद्यालय स्तर की एक अभिनव व्यवस्था प्रदान करेगा जिसमें शिक्षा ग्रहण की पद्धति एवं नि , विषयों की एकजुटता, नामांकन की योग्यता और प्रवेश की उम्र आदि की दृष्टि से लचीलापन होगा, साथ ही शिक्षा को बढ़ावा देने तथा ज्ञान के नूतन क्षेत्रों में श्रेष्ठत्व को प्रोत्साहित करने हेतु परीक्षा-संचालन एवं कार्यसूचियों का क्रियान्वयन करेगा ।

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भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग [ 11 - खण्ड 4 ]

द्वितीय अनुसूची

(खण्ड27 बेलिए)

विश्वविद्यालय की स्थायी विधियाँ

कुलाधिपति:

1. असम प्रान्त के राज्यपाल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होंगे ।

कुलपति:

2. क) कुलपति की नियुक्ति कुलाध्यक्ष के द्वारा धारा 2 के अन्तर्गत गठित एक समिति द्वारा संस्तुतित न्यूनतम तीन व्यक्तियों की एक सूची में की जाएगी:

परन्तु, यदि कुलाध्यक्ष सूची में से किसी भी व्यक्ति के नाम का अनुमोदन नहीं करेंगे , तो वे एक नयी सूची के लिए कह सकेंगे ।

ख ) धारा 1 में उल्लिखित समिति तीन व्यक्तियों से गठित होगी और उनमें से कोई भी विश्वविद्यालय को कर्मचारी अथवा प्रबन्धन बोर्ड या बिद्या परिषद या योजना एवं विद्या समिति का सदस्य अथवा विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किसी संस्थान से संबंधित व्यक्ति नदीं होंगे , तथा उन तीन व्यक्तियों में से दो प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा नामित होंगे और एक का मनोनयन कुलाध्यक्ष करेंगे जो समिति के संयोजक होंगे ।

ग ) कुलपति विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन वेतनभोगी अधिकारी होंगे ।

घ) कुलपति , अपने पद के कार्य- भार संभालने की तिथि से पाँच वर्ष अथवा पैंसठ वर्ष की आयु में से जो पहले पूर्ण हो, तब तक की अवधि केलिए कार्य निर्वाह वे पुनर्नियुक्तिके योग्य नहीं होंगे ।

परन्तु, उल्लिखित पाँच वर्ष की अवधि समाप्त होने पर भी वे अपने उत्तराधिकारी की नियूक्ति एवं उनके द्वारा पद -भार के ग्रहण तक कार्य- निर्वाह करते रहेंगे :

परन्तु और कि कुलाध्यक्ष सेवा-काल पूर्ण करनेवाले किसी कुलपति को कुल सर्वाधिक एक वर्ष के लिए अपने द्वारा विनिर्दिष्ट रूप में कार्य- निर्वाह करने हेतु निर्देश दे सकेंगे।

5 ) कुलपति की उपलब्धियाँ एवं अन्य सेवा- शर्तें निम्नप्रकार से होंगी:

i ) केन्द्रीय सरकार द्वारा समय समय पर निर्धारित दर के अनुसार कुलपति को मासिक वेतन और घर- भाड़ा भत्ते को छोड़कर अन्य भत्तेदिये जाएँगे , तथा वे भाड़ा चुकाए बिना ही अपने पूरे कार्यकाल के दौरान एक असवालों से सज्जित आवास का उपयोग कर सकेंगे और ऐसे आवास के रख - रखाव में होनेवाले व्यय का भार उन्हें वहन नहीं करना होगा ।

ii ) कुलपति कुलाध्यक्ष के अनुमोदन पर प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा समय समय पर निर्धारित किए जानेवाले कालावधि सापेक्ष लाभ एवं भत्तेके अधिकारी होंगेः

परन्तु, इस विश्वविद्यालय अथवा इसके द्वारा संचालित किसी महाविद्यालय या संस्थान के, अथवा किसी अन्य विश्वविद्यालय के या उसके द्वारा संचालित अथवा उससे सम्बद्ध किसी संस्थान के किसी कर्मचारी को कुलपति नियुक्त किए जाने की स्थिति में, वे जिस भविष्य निधि के -सदस्यहैं- उसमें अपना अंशदान जारी रखने की अनुमति उन्हें प्रदान की जा सकेगी और यह विश्वविद्यालय ऐसे व्यक्ति के उस भविष्यनिधिवाले - खाते में उसी दर से अंशदाना करेगा -जिस हिसाब से वे कुलपति के रूप में नियुक्त होने से तत्काल पूर्व अपना अंशदान कर रहे थे: परन्तु, और कि एसे कर्मचारी यदि किसी निवृति वेतन निधि योजना के सदस्य रहे हों तो विश्वविद्यालय उस योजना में आवश्यक अंशदान करेगा ।

iii ) कुलपति प्रबन्धन बोर्ड द्वारा निर्धारित की जानेवाली दर के हिसाब से यात्रा- भत्ते के अधिकारी होंगे ।

iv ) कुलपति एक कलेंडर वर्ष में तीस दिन के हिसाब से पूर्ण वेतन सहित छुट्टीके अधिकारी होंगे और प्रत्येक वर्ष जनवरी और जुलाई महीनें के प्रथम दिनों में दो पन्द्रह दिवसीय अर्द्धबार्षिक किश्तों के रूप में उनके खाते में राशि अग्रिम रूप से जमाकर दीजाएगी:

परम्तु, यदि कुलपतिकिसी चालू वर्षार्द्ध के दौरान कुलपति के पद का कार्य भार ग्रहण करें या उससे निवृति लें, तो प्रत्येक सेवापूर्ण मास पर ढाई दिन के हिसाब से समानुपातिक रूप में छुट्टी की रकम जमाकर दी जाएगी ।

v) उपधारा ( 4 ) में उल्लिखित छुट्टी के अलावा कुलपति प्रत्येक सेवापूर्ण वर्ष बीस दिन के हिसाब से अर्धवेतन सहित छुट्टी के भी आं..कारी होंगे । यह अर्द्धवेतन सहित छुट्टी चिकित्सा प्रमाण- पत्र प्रस्तुत करके अन्तर्वर्तित छुट्टी के रूप में पूर्ण वेतन के साथ ली जा सकेगी । अन्तर्वर्तित छुट्टी ली जाने की स्थिति में, प्राप्त होनवाली अर्द्धवेतन सहित छुट्टी की कुल राशि से अर्द्धवेतन सहित छुट्टी की दुगुणी रकम घटायी जाएगी ।

6 ) कुलपति का पद यदि देहावसान, त्यागपत्र प्रदान या अन्य किसी कारण से रिक्त होता है अथवा वे अस्तस्थता या अन्य किसी कारण से अपने कार्यों का सम्पादन नहीं कर सकते, तो यह कुलपति के कार्यों का सम्पादन करेंगे । परन्तु, सह कुलपति की अनुपस्थिति में सर्वोच्च वरिष्ठताप्राप्त आचार्य , यथास्थिति, नए कुलपति द्वारा कार्य- भार ग्रहण किए जाने याविद्यमान THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SBC. 4] 12

कुलपति के द्वारा अपने पद से जुड़े दायित्वों को संभाले जाने तक कुलपति के कार्यों का सम्पादन करेंगे ।

कुलपति की क्षमताएँ एवं उनके कर्तव्य:

3. क) कुलपति प्रबन्धन बोर्ड, विद्या परिषद, योजना बोर्ड एवं वित्त समिति के पदेन अध्यक्ष होंगे तथा कुलाधिपति की अनुपस्थिति में डिग्री -प्रदान हेतु आयोजित होनेवाले समावर्तन समारोह में अध्यक्षता करेंगे ।

ख) कुलपतिविश्वविद्यालय की किसी भी प्राधिकारी संस्था या अन्य किसी निकाय की बैठक मे उपस्थिति रहने एवं उसे सम्बोधित करने के अधिकारी होंगे , पर वैसी प्राधिकारी संस्था या निकाय के वे यदि सदस्य न हों तो उसमें बोट देने का अधिकार उन्हें महीं होगा ।

ग ) कुलपति का यह कर्तव्य होगा कि वे यह देखें कि इस अधिनियम, स्थायी विधियों, अध्यादेशों एवं बिनियमों का सम्यक रूप से परिपालन हुआ है या नहीं । ऐसे परिपालन की निश्चित के लिए जरुरी सारी क्षमताएँ उनके पास होंगी ।

घ) कुलपति विश्वविद्यालय के समस्त क्रिया-कलापों पर नियन्त्रण रखेंगे तथा विश्वविद्यालय की सारी प्राधिकारी संस्थाओं के निश्चयों को कार्य-रुप देंगे ।

ङ) कुलपति के पास विश्वविद्यालय में यथोचित रुप से अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक सारी क्षमताएँ होंगी, तथा वे अपने द्वारा योग्य विवेचित किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को ऐसी क्षमता सौंप सकेंगे ।

च) कुलपति के पास प्रबन्धन बोर्ड, विद्या परिषद, योजना बोर्ड एवं वित्त समिति की बैठक बुलाने अथवा बुलवाने की क्षमता होगी ।

सह कुलपति:

4. 1 ) प्रत्येक सह कुलपति की नियूक्ति कुलपति की संस्तुति पर प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा की जाएगी:

परन्तु, कुलपति की संस्तुति प्रबन्धन बोर्ड को स्वीकृत न होने की स्थिति में वह विषय कुलाध्यक्ष के पास प्रेषित किया जाएगा- जो कुलपति द्वारा संस्तुलित व्यक्ति को नियूक्ति कर सकेंगे अथवा प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष किसी अन्य व्यक्ति की संस्तुति करने हेतु कुलपति से कह सकेंगे : परन्तु, यह और कि कुलपति की संस्तुति पर प्रबन्धन बोर्ड किसी आचार्य को अपने कर्तव्यों के अलावा सह कुलपति के कर्तव्यों का पलन करने केलिए नियुक्त कर सकेगा ।

2) सह कुलपति का कार्यकाल प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा निश्चित किए जानेवाले रुप में होगा, पर किसी भी स्थिति में यह पाँच वर्ष अथवा कुलपति के कार्यकाल के समापन में से जो पहले समाप्त हो - उससे अधिक नहीं होगा:

परन्तु, अपनाकार्य -काल पूरा करनेवाले सह कुलपति पूनर्नियुक्ति के योग्य होंगेः

परन्तु, यह और कि किसी भी स्थिति में सह कुलपति पैंसठ वर्ष आयु की प्राप्त होने पर अवकाश ग्रहण करेंगे :

परन्तु , यह और भी कि स्थायी विधि 2 की धारा ( 6 ) के अन्तर्गत कुलपति के कर्तव्यों का निर्वाह करते समय सह कुलपति अपने पद के कार्य- काल की समाप्ति होने पर भी तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक यथास्थिति एक नए कुलपति अथवा विद्यमान कुलपति पद- भार संभाल नलें. परन्तु, यह और भी कि जब कुलपति का पद रिक्त हो तथा उनके कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए कोई सह कुलपति न हो, तो प्रबन्धन बोर्ड एक सह कुलपति को नियुक्ति कर सकेगा और इस प्रकार नियुक्त किए जानेवाले सह कुलपति, किसी कुलपति की निर्यास्त एवं उनके द्वारा पद-भार संभाले जाने के साथ ही अपने कार्य भार से मुक्त समझे जाएँगे ।

3) सह कुलपति की उपलब्धियाँ तथा उनकी सेवा के निबन्धन एवं शर्तें अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जानेवाले रूपों में होंगी।

4) सह कुलपति, कुलपति द्वारा अपनी और से समय समय पर विनिर्दिष्ट किए जानेवाले विषयों के सन्दर्भ में उनकी सहायता करेंगे तथा उनके द्वारा आरोपित क्षमता का प्रयोग और सौंपे जानेवाले कर्त्तव्यों निर्वाह भी करेंगे ।

कुलसचिव:

5. 1 ) कुलसचिव कीनियुक्ति प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा संस्तुति हेतु गठित चयन समिति की संस्तुति के अनुसार होंगी और वे विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन वेतनभोगी अधिकारी होंगे ।

2) उनकी नियुक्ति पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिए होगी तथा वे पुनर्नियुक्ति के योग्य होंगे ।

3) कुलसचिव की उपलब्धियों तथा उनकी सेवा के निबन्धन और शर्तें अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जानेवाले रुपों में होंगी:

परन्तु, कुलसचिव साठ वर्षकी आयु प्राप्त होने पर अवकाश ग्रहण करेंगे:

परन्तु, यह और कि साठ वर्ष की आयु प्राप्त होने पर भी कुलसचिव , अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति एवं तत्पश्चात उनके द्वारा पद-भार संभाले जानें अथवा एक वर्ष की अवधि की समाप्ति में से जो पहले घठित हो, तब तक अपने पद पर बने रहेंगे ।

4 ) जब कुलसचिव का पद रिक्त हो , अथवा जब कुलपति अस्वस्थता, अनुपस्थिति या अन्य किसी कारणवशः अपने पद से संबंधित कर्त्तव्योंका पालन करने में असमर्थ हों, तो कुलपति के द्वारा इस उद्देश्य से नियुक्त व्यक्ति के द्वारा कुलसचिव के पद से जुड़े कर्त्तव्यों का सम्पादन किया जाएगा।

5 ) क ) कुलसचिव के पास शिक्षकों एवं शैक्षिक कर्मचारियों को छोड़कर प्रबन्धन बोर्ड के के आवेश में विनिर्दिष्ट कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कारवाई करने , अनुशंधान पूरे होने तक उन्हें निलंबित करने, उन्हें चेतावनी देने अथवा उनको दण्ड स्वरुप मर्त्सता करने या उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की क्षमता होगी:

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भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4]

परन्तु, सम्बद्ध व्यक्ति को उसके संबंध में प्रस्तावित कारवाई के विरुद्ध कारण दशनि के लिए न्यायोचित अवसर प्रदान किए बिना इस प्रकार का कोई भी दण्डारोपण नहीं किया जाएगा।

ख ) उपधारा ( क ) में विनिर्दिष्ट किए गए दण्डों में से किसी वण्ड के आरोपण से संबंधित कुलर्साववं के किसी भी आदेश के विरुद्ध कुलपतिके समक्ष अपील की जा सकेगी ।

ग ) किसी मामले में यदि अनुसंधान से यह प्रमाणित हो कि कुलसचिव की क्षमता से बाहर के दण्ड की आंवश्यकता है , तो कुलसचिव अनुसंधाम की समाप्ति पर अपने सुझाबों के साथ कुलपति को एक प्रतिवेदन मेजेंगे:

परन्तु, किसी दंड के आरोपण से संबंधित कुलपति के आदेश के विरुद्ध प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष एक अपील की जा सकेगी ।

6) कुलसचिव प्रबन्धन बोर्ड, योजना एवं विद्या समिति, विद्या परिषद एवं योजना बोर्ड के पदेन सचिव होंगे, पर वे इन प्राधिकारी संस्थाओं में से किसी के भी सदस्य नहीं माने जाएँगे ।

7 ) कुलसचिव का कर्तव्य होगा-

क) विश्वविद्यालय के अभिलेखों, सामूहिक संप्रतीक तथा प्रबन्धन बोर्ड द्वारा उनके वामित्व के रूप में समर्पित ऐसी अन्य सम्पत्तियों का संरक्षक बनना,

ख ) प्रबन्धन बोर्ड, विद्या परिषद, योजना एवं विद्या समिति, योजना बोर्ड तथा इन प्राधिकारी संस्थाओं द्वारा यठित की जानेवाली समितिबों कीबैठकें बुलाए जानेवाली सूचनाएँ जारी करना:

ग) प्रबन्धन बोर्ड , विद्या परिषद, योजना बोर्ड तथा इन प्राधिकारी संस्थाओं द्वारा गठित की जानेवानी समितियों की बैठकों के ब्योरे रखना, 'ध ) प्रबन्धन बोर्ड, विद्या परिषद, योजना एवं विद्या समिति तथा योजना बोर्ड से संबंधित कार्यालयी पत्राचार करना,

ङ) अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट पद्धतियों के अनुरुप विश्वविद्यालय की परीक्षाओं का आयोजन एवं निरीक्षण करना,

च) विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाओं की कार्य- सूचियों की प्रतियाँ जारी होते ही तथा ऐमी बैठको के ब्योरे कुलाध्यक्ष के पास भेजना, छ) विश्वविद्यालय के द्वारा यां उसके विरुद्ध किए जानेवाले मुकदमों या व्यायिक कार्यवाहियों में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करना, मुखतारनामा पर हस्ताक्षर करना , अदालती बहसों को सत्यापित करना या इस उद्देश्य से अपना प्रतिनिधि नियुक्त करना, और ज) स्थायी विधियों, अध्यादेशों या विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जानेवाले या समय समय पर प्रबन्धन बोर्ड या कुलपति द्वारा इपिस्तऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वाह करना।

विस अधिकारी:

6. 1 ) वित्त अधिकारी की नियुक्ति प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा संस्तुति हेतु गठित चयन समिति की संस्तुति के अनुसार होगी और वे विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन वेतनभोगी अधिकारी होंगे ।

2) उनकीनियुक्तिपाँच वर्ष के कार्य- काल के लिए होंगी और वे पुनर्नियुक्ति के योग्य होंगे ।

3 ) वित्त अधिकारी की उपलब्धियाँ तथा उनकी सेवा के निबन्धन एवं शर्तें अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जानेवाले रुपों में होंगी:

परन्तु, वित्त अदिकारी साठ वर्ष की आयु प्राप्त होने पर अवकाश ग्रहण करेंगे:

परन्तु, यह और कि साठ वर्ष की आयु प्राप्त होने पर भी वित्त अधिकारी अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति एवं तत्पश्चात उनके द्वारा पद-भार संभाले जाने अथवा एक वर्ष की अवधि में से जो पहले घटिल हो तब अपने पद पर बने रहेंगे ।

4) जब वित्त अधिकारी का पद रिक्त हो अथवा जव वित्त अधिकारी अस्वस्थता , अनुपस्थिति या अन्य किसी कारणवशः अपने पद से संबंधित कर्त्तव्यों का पलन करने में असमर्थ हो, तो कुलपति द्वारा इस उद्देश्य से नियुक्त व्यक्ति के द्वारा वित्त अधिकारी के पद से जुड़े कर्त्तव्यों का पलन कियाजाएगा।

5 ) वित्त अधिकारी वित्त समिति के पेदन सचिव होंगे, पर वे ऐसी समिति के सदस्य नहीं माने जाएँगे ।

6) वित्त अधिकारी-

क) विश्वविद्यालय की निधियों का सामान्य निरीक्षण करेंगे तथा विश्वविद्यालय को इसकी वित्तीय नीति के विषय में परामर्श देंगे , और

ख) स्थायी विधियों या अध्यादेशों द्वारा समनुदेशित वित्तीय कार्यों का सम्पादन करेंगे ।

:

7) प्रबन्धन बोर्ड के नियन्त्रण में वित्त अधिकारी-

क ) न्यास एवं किसी की समर्पित सम्पत्ति सहित विश्वविद्यालय की सारी सम्पत्ति तथा समस्त विनियोगों का संरक्षण एवं संचालन करेंगे ,

ख ) यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रबन्धन बोर्डद्वारा वर्ष भर के लिए निर्धारित आवर्तक एवं अनावर्त्तक व्ययों की सीमा पार न कीया जाए तथा यह किसारा धन उस उद्देश्य पर खर्च हो जिसके लिए धन का अनुमोदन या आवंटन किया गया हो,

ग ) विश्वविद्यालय की वार्षिक लेखा एवं वार्षिक आय -व्यय पत्र के प्रस्तुतीकरण तथा प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष उसके उपस्थापन के लिए जिम्मेदार होंगे ,

घ) नकद धन एवं बैंक खाता-शेष तथा विनियोगों पर निरन्तर ध्यान रखेंगे,

ङ) राजस्व के संग्रह की प्रगति पर ध्यान रखेंगे और राजस्व के संग्रह हेतु प्रयुक्त पद्धतियों के बारे में परामर्श देंगे, 14

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

च) यह सुनिश्चित करेंगे कि भवन , जमीन , असवाव और सजावट की सामग्रियों की पंजिकाएँ अद्यतन बनायी रखी जाएँ तथा यह भी निश्चित करेंगे कि सारे कार्यालयों , विशेष केन्द्रों, विशिष्ट प्रयोगशालाओं और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित, महाविद्यालयों एवं संस्थानों के उपस्करों एवं अय -प्राप्ति के योग्य उपकरणों के स्टॉक की जाँच की जाए ,

छ) अनधिकृत व्यय एवं अन्य वित्तीय अनिममितताओं को कुलपति के ध्यान में लाएँगे तथा दोषी व्यक्ति के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का सुझावदेंगे,और

ज ) अपने कर्त्तव्यों के सम्पादन हेतु विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किसी भी कार्यालय, केन्द्र, प्रयोगशाला, महाविद्यालय या संस्थान से अपने द्वारा आवश्यक विवंचित कोई भी सूचना माँग भेजेंगे या उनको वापस करेंगे ।

8 ) वित्त अधिकारी या प्रबन्धन बोर्ड द्वारा उनके स्थान पर सम्यक रुप से अधिकृत व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा विश्वविद्यालय को देय धन के लिए दी जानेवाली रसीव वैसे धन कीअदायगी के भार- मोचन का पर्याप्त प्रमाण समझी जाएगी ।

संकायों के अध्यक्ष:

7. 1 ) प्रत्येक संकायाध्यक्ष की नियुक्ति संकाय के आचार्यों में से कुलपति के द्वारा तीन वर्ष की अवधि मेंः लिये होगी और वे पुनर्नियुक्ति के योग्य होंगे :

परन्तु, साठ वर्ष की आयु प्राप्त होने पर संकायाध्यक्ष ऐसे पद पर नहीं बने रहेंगे:

परन्तु, और जब कभी किसी संकाय में आचार्य नहीं होंगे, तब कुलपति या उनके द्वारा अधिकृत कोई संकायाध्यक्ष सम्बद्ध संकाय के अध्यक्ष की क्षमताओं का प्रयोग करेंगे ।

2 ) नब संकायाध्यक्ष का पद रिक्त हो अथवा जब संकायाध्यक्ष आस्वस्थता, अनुपरिथति या अन्य किसी कारणवशः अपने पद हो संबंधित कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हों, तो कुलपति द्वारा इस उद्देश्य से नियुक्त व्यक्ति के द्वारा संकायाध्यक्ष के पद से जुड़े कर्त्तव्यों का सम्पादन कियाजाएगा ।

3) संकायाध्यक्ष संकाय के प्रमुख होंगे और उन पर अपने संकाय में शिक्षण एवं शोध कार्य के आयोजन तथा इनके स्तर के निर्वहण का दायित्व होगा तथा उनके पास अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जानेवाले ऐसे अन्य कार्य होंगे ।

4) संकायाध्यक्ष को, यथास्थिति, पाठ्य - समिति या संकाय समिति की किसी भी बैठक में उपस्थित रहने और उसे सम्बोधित करने का अधिकार होगा, पर मंतदान का अधिकार तब तक नहीं होगा जब तक कि वे उसके सदस्य न हों

विभागों के अध्यक्ष:

8. 1 ) एकाधिक आचार्योबाले विभाग के सन्दर्भ में विभागाध्यक्ष की नियुक्ति विद्यमान आचार्यों में से कुलपति की संस्तुति पर प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा होगी।

2) , एक आचार्यवाले विभाग के सन्दर्भ में प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष विकल्य होगा कि कुलपति संस्तुति पर आचार्य की या किसी प्रवाचक को विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्तिदे:

परन्तु कोई आचार्य या प्रवाचक विभागाध्यक्ष के रुप में नियुक्ति के प्रस्ताव को अस्वीकार करने को मुक्त होंगे ।

3) विभागाध्यक्ष के रुप में नियुक्त व्यक्ति इस रुप में तीन वर्ष की अवधि के लिए पद पर बने रहेंगे तथा वे पुनर्नियुक्ति के योग्य होंगे ।

4) विभागाध्यक्ष अपने कार्य- काल के दौरान किसी भी समय अपने पद से त्यागपत्र दे सकेंगे ।

5 ) विभागाध्यक्ष अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करेंगे ।

कार्याध्यक्ष:

9. 1 ) प्रत्येक कार्याध्यक्ष की नियुक्ति कुलपति की संस्तुति पर प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा होगी तथा वे कुलपति द्वारा विनिर्दिष्ट क्षमताओं का उपयोग एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे ।

2 ) कार्याध्यक्ष दो साल के कार्यकाल के लिए पद पर बन रहेंगे तथा वे पुनर्नियुक्ति के योग्य होंगे ।

पुस्तकालयाध्यक्ष:

10. 1 ) पुस्तकालयाध्यक्ष की नियुक्ति प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा संस्तुति हेतु गठित चयन समिति की संस्तुति के अनुसार होगी और वे विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन अधिकारी होंगे ।

2) पुस्तकालयाध्यक्ष प्रबन्धन बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट क्षमताओं का प्रयोग एवं कर्त्तव्यों का निर्वाह करेंगे ।

प्रबन्धन बोर्ड की बैठकों के लिए कार्यवाहक संख्या:

11 . प्रबन्धम बोर्ड के पाँच सदस्य इसकी बैठक के लिए कार्यवाहक संख्या पूरा करेंगे ।

प्रभन्धन बोर्ड की क्षमताएँ एवं उसके कार्य:

12. 1 ) प्रचन्धन बोर्ड के पास , अन्यथा विनिर्दिष्ट न किए जाने की स्थिति में, विश्वविद्यालय के राजस्व तथा इसकी सम्पत्ति के प्रबन्धन तथा समस्त प्रशासनिक कार्यों के संचालन की क्षमता होगी ।

2) इस अधिनियम , स्थायी विधियों तथा अध्यादेशों की व्यवस्थायों के उपाश्रित प्रबन्धन बोर्ड के पास इस पर सौंषी समस्त क्षमताओं के

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भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III-- खष्ठ 4]

अतिरिक्त निम्नलिखित क्षमताएँ होगी:

i ) शैक्षणिक एवं शैक्षिक पदों की सृष्टि करना, ऐसे पदों की संख्या एवं उपलब्धियों का निर्धारण करमा तथा आचार्यों , प्रवाचकों, व्याख्याताओं एवं अन्य शैक्षिक कर्मचारियों और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित महाविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रधानाचार्यों के कर्तव्यों एवं उनकी सेवा-शर्तों को परिभाषित करना,

परन्तु, विद्या परिषद की संस्तुतियों पर विचार- विमर्श किए बिना अन्य रूप में प्रबन्धन बोर्ड शिक्षकों तथा शैक्षिक कर्मचारियों की संख्या , योग्यता तथा उपलब्धियों के बारे में कोई कदम नहीं उठाएगा।

ii ) आवश्यकता के अनुसार आचार्यों, प्रवाचकों, व्याख्याताओं एवं अन्य शैक्षिक कर्मचारियों तथा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित महाविद्यालय एवं संस्थानों के प्रधानाचार्यों की नियुक्ति इसी उद्देश्य से मठित चयन समिति की संस्तुति के अनुसार करना और इनमें अस्थायी रिक्तियों को भरना,

iii ) अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट पद्धति से प्रशासनिक , कार्यालयी एवं अन्य पदों की सृष्टि करना तथा उनमें नियुक्तिदेना,

iv) कुलपति एवं कुलाधिपति से भिन्न विश्वविद्यालय के किसी अन्य अधिकारी की छुट्टी मंजूर करना तथा ऐसे अधिकारी की अनुपस्थितिके दौरान उनके कार्यों के सम्पादन हेतु आवश्यक व्यवस्था करना,

V) स्थायी विधियों एवं अध्यादेशों के अनुरुप अनुशासन के नियमों का प्रणयन करना तथा कर्मचारियों के बीच इन्हें कार्यान्वित करना, vi ) वित्त, लेखा, विनियोग, सम्पत्ति , व्यवसाय एवं विश्वविद्यालय के अन्य सभी प्रशासनिक कार्यों का प्रबन्धन एवं नियमन करना तथा इसी उद्देश्यसे योग्य विवेचित प्रतिनिधि की नियुक्ति करना,

vii )वित्त समिति की संस्तुति पर कुलं वार्षिक आवर्त्तक एवं अनावर्त्तक व्ययों की सीमाएँ निर्धारित करना,

viii ) अप्रयुक्त आय सहित विश्वविद्यालय के किसी भी धन का बिनियोजन समय समय पर उचित विवेचित ढंग से स्टॉक्स , फण्ड्स, शेयर, मा प्रतिभूति में करना अथवा उस धन से समय समय पर विनियोजन कीं शक्ति के अनुसार भारत में अचल सम्पत्ति क्रय करना,

ix) विश्वविद्यालय की ओर से किसी भी चल मा अचल सम्पत्ति के हस्तान्तरण से जुड़े ग्रहण और प्रदान के कार्यों का सम्पादन करना, X) विश्वविद्यालय के कार्यों को जारी रखने के लिये आवश्यक भवनों , परिसरों, उपस्करों, उपकरणों एवं अन्य साधनों का प्रबन्ध करना, xi ) विश्वविद्यालय को ओर से संबिधाओं का सम्पादन, परिवर्तन पालन तथा विखण्डन करना,

xii ) विश्वविद्यालय के कर्मचारी तथा विद्यार्थीकिसी कारणवश व्यधित अनुभव करें तो उन्हें सूनना, उन पर निर्णय करना तथा सही विवेचित होने पर व्यथा का निराकरण करना,

xiii ) बिद्या परिषद के साथ विचार -विमर्श के पश्चात परीक्षकों एवं सन्तुलकों की नियुक्ति करना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हटाना तथा उनकी फीस, उपलब्धि तथा यात्रा एवं अन्य भत्तों का निर्धारन करना,

xiv ) विश्वविद्यालय के लिए एक सामूहिक संप्रतीक का चयन करना और उसके संरक्षण एवं उपयोग की व्यवस्थाकरना ,

XV)महिला विद्यार्थियों के लिए आवश्यक आवास और अनुशासन संबंधी विशेष व्यवस्था करना,

xvi ) कुलपति, सहकुलपति, संकायाध्यक्षों, कुलसचिव या वित्त अधिकारी अथवा ऐसे अन्य कर्मचारी या प्राधिकारी संस्था अथवा प्रबन्धन बोर्ड द्वारा गठित किसी समिति को, जैसा वह उचित समझे , अपनी कोई क्षमता सौंपना

xvii ) फेलोशिप, छात्रवृत्ति, स्टुडेण्टशिप , पदकों एवं पुरस्कारों का प्रणयन करना,

xviii ) अभ्यागत आचार्यों ( विजिटिंग प्रोफेसर ) , लब्धप्रतिष्ठ आचार्यों ( इमेरिटस प्रोफेसर ) , परमर्शदाताओं ( कॉनसल्टेंट्स ) एवं बिद्वानों (स्कॉलरस ) कीनियुक्ति करना तथा ऐसी नियुक्तियों के निबन्धन एवं शर्तों को निश्चित करना , और

xix) इस अधिनियम मा स्थायी विधियों द्वारा प्रदत्त मा आरोपित ऐसी अन्य क्षमताओं का उपयोम रात्रा ऐसे अम्म कर्तव्यों का पालन करना ।

योजना एवं बिद्या समिति के गठन, क्षमताएँ एवं कार्य:

13. 1 ) योजना एवं विद्या समिति निम्नांकित सदस्योंसे गठित होगी

i ) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम , 1956 ( 1956 का 3 ) के लण्ड 5 के उपखण्ड ( 1 ) के तहत नियुक्त विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उपाध्यक्ष, पदेन अध्यक्ष;

ii ) कुलपति;

iii ) सह कुलपति;

iv ) समस्तसंकायों के अध्यक्ष;

V) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नामित विश्वविद्यालय के तीन शिक्षक:

vi ) निम्नांकित से एक-एक प्रतिनिधि-

क) विज्ञान और तकनीकि के पूर्वोत्तर माण्डलिक संस्थात;

ख) पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम , 1971 ( 1971 का 84 ) के खण्ड 3 के तहत स्थापित पूर्वोत्तर परिषद;

ग ) मानव संसाधन विकास मन्त्रालय , भारत सरकार ; और

15 [PART III-Sac. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

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घ) असम की प्रान्तीय सरकार,

vii ) कुलाध्यक्ष द्वारा नामांकित किए जानेवाले तीन विशिष्ट शिक्षाविद,

viii ) कुलाध्यक्ष द्वारा नामांकित किए जानेवाले सामाजिक जीवन में प्रसिद्धि प्राप्त तीन व्यक्ति, और

xix ] कुलसचिव , जो समिति के पदेन सचिव होंगे ।

2) पदेन अधिनियम, से भिन्न समिति के समस्त सदस्य पाँच वर्ष के कार्य- काल के लिए पदों पर बने रहेंगे ।

3 ) इस अधिनियम, स्थायी विधियों एवं अध्यादेशों के उपबन्धों के उपाश्रित यह समिति अधिकृत प्रभताओं के अलावा अग्रांकित क्षमताओं से युक्तहोगी-

क ) विश्वविद्यालय के शैक्षिक एवं विकास कार्यों-यानी पाठ्यक्रमों का निर्धारण एवं प्रवर्त्तन , परिसर के बुनियादी ढांचे का विकास, प्रतिष्टि एवं भर्ती की नीतियों का प्रणयन करने,

क ) विद्या परिषद एवं योजना बोर्ड की क्षमताओं का उपयोग तथा कार्यों का सम्पादन करने , और

4 ) स्थायी विधियों द्वारा प्रदत्त या आरोपित ऐसी अन्य क्षमताओं का उपयोग तथा ऐसे अन्य कार्यों का निर्वाह करने ।

4 ) बीजमा एवं विद्या समिति की बैठकें यथोचित अन्तराल पर होंगी , पर वर्ष में दो बैठकें जरुर होंगी ।

5) बण्ड 20 के उपखण्ड 3 के अन्तर्गत कुलाध्यक्ष द्वारा निश्चित की जानेवाली तिथि पर यह स्थायी विधि प्रभावहीन होगी ।

विद्या परिषद की बैठकों के लिए कार्यवाहक संख्या:

14. ब्रिद्या परिषद के नौ सदस्य इसकी बैठक के लिए आवश्यक कार्यवाहक संख्या पूर्ण करेंगे ।

विद्या परिषद की क्षमताएँ:

: 15. इस अधिनियम, स्थायी विधियों एवं अध्यादेशों के अनुबंधों के उपश्रित विद्या परिषद के पास , अधिकृत अन्य क्षमताओं के अलावा, अग्रांकित क्षमताएँहोंगी-

क) विश्वविद्यालय की शैक्षिक नीतियों का समग्रत: परिदर्शन करने तथा अध्यायन की पद्धति, महाविद्यालय और संस्थानों के बीच सहकारितामूलक शिक्षण, शोध को मूल्यांकन अथवा शैक्षिक स्तर के अन्ययन कोदिशा प्रदान करने ,

ख) संकायों के बीच संबंध स्थापना करने, समितियों या बोडौं का गठन या नियुक्ति करने , आन्त: संकाय के स्तर पर परियोजना ग्रहण करने,

ग ) अपनी पहल पर या किसी संकाय या प्रबन्धन बोर्ड द्वारा प्रेषित किए जाने पर शैक्षिक लाभ के सामान्य विषयों पर विवेचन करने और उन पर उचित कारवाई करने , तथा

घ) स्थायी विधियों एवं अध्यादेशों के साथ अनुकूलता बनाए रखते हुए विश्वविद्यालय के शैक्षिक क्रिया-कलाप, अनुशासन , आवास, प्रतिष्ट, फेलोशिप एवंस्टूडण्टशिप प्रदान , शुल्क, छूट (कॉन्सेशन ) , सामूहिक जीवन तथा उपस्थिति के संबंध में विषयों एवं विधियों काप्रणयन करने।

योजनाबोर्ड:

16. 1 ) योजना बोर्ड विश्वविद्यालय का प्रमुख योजना निकाय होगा और निम्नांकित कार्यों के लिए जिम्मेदार रहेगा-

कं ) विश्वविद्यालय द्वारा गृहीत शिक्षा विषयक कार्यक्रमों का पुनरीक्षण,

i ख) समाज में उपयोगी कार्य करने हेतु आवश्यक व्यक्तित्व एवं प्रतिभा के विकास के लिए समुचित विषय- जोड़ चुनने की सुविधा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के शिक्षा-ढाँचे का सुसंगठन,

गः ) मुल्योन्मुखी शिक्षा के अनुकूल परिवेश एवं पर्यावरण का निर्माण , और

घ) व्याख्यान, पार्श्व-शिक्षण ( ट्यूटोरियल ) , संगोष्ठी, प्रदर्शन, स्वाध्याय, एवं सामुहिक व्यावहारिक योजना के समन्वय से पठन-पाठन के नए उपयों का उदभावन ।

2) योजना बोर्ड के पास विश्वविद्यालय के विकास की दिशा में परामर्श देने और अपनी सुझायी नीतियों के अनुरुप कार्यक्रमों के विकास-साधन के पुनरीक्षण करने की क्षमता होगी, साथ ही प्रबन्धन बोर्ड और विद्या परिषद को, संबंधित किसी भी विषय पर परामर्श देने का अधिकार भी रहेगा।

3 ) योजना बोर्ड की संस्तुतियों पर ध्यान देने को विद्या परिषद और प्रबन्धन बोर्ड बाध्य होंगे और ये गृहीत संस्तुतियों को कार्यात्वित कटेंगे ।

4 ) धारा ( 3 ) के तहत प्रबन्धन बोर्ड या विद्या परिषद द्वारा अनगृहीत योजना बोर्ड की संस्तुतियाँ परामर्श हेतु कुलपति द्वारा प्रबन्धन बोर्ड या विद्या परिषद के सुझावों के साथ कुलाध्यक्ष के पास भेजी जाएँगी, तथा कुलाध्यक्ष के परामर्श, यथास्थिति , प्रबन्धन बोर्ड या विद्या परिषद द्वारा कार्यान्वित किए जाएँगे ।

5 ) योजना बोर्ड विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों की योजना तथा देख - रेख हेतु आवश्यक समितियों का गठन कर सकेगा ।

संकाय एवं विभाग:

17 1 ) विश्वविद्यालय में अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट संकाय होंगे ।

17 [ भाग III- खण्ड 4]

भारत का राजपत्र : असाधारण

2 ) प्रत्येक संकाय का एक संकाय बोर्ड होगा और प्रथम बोर्ड के सदस्य प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा मनोनीत किए जाएँगे और वे तीन वर्ष की अवधि के लिए पदों पर बने रहेंगे ।

3 ) संकाय बोर्ड की क्षमताएँ एवं उसके कार्य अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएंगे ।

4) संकाय बोर्ड की बैठकों के संचालन तथा ऐसी बैठकों के लिए आवश्यक कार्यवाहक संख्या के बारे में अधायदेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाएगा।

5 ) क) प्रत्येक संकाय के अन्तर्गत अध्यादेशों द्वारा समनुदेशित विभाग होंगे ।

ख ) स्थायी विधियों से भिन्न साधन के द्वारा किसी विभाग की स्थापना या उसकी विलुप्ति संभव नहींहोगीः

परन्तु, प्रबन्धन बोर्ड योडना एवं विद्या समिति अथवा विद्या परिषद की संस्तुति पर अध्ययन केन्द्रों की स्थापना करके विश्वविद्यालय के आवश्यक विवेचित शिक्षकों को उनसे जोड़ सकेगा ।

ग ) प्रत्येक विभाग निम्नांकित सदस्योंसे गठित होगा:

1) विभाग के शिक्षक ,

2) विभाग में शोध का संचालन करनेवाले व्यक्ति,

3) संकायके अध्यक्ष

4) विभाग से संबंद्ध अवैतनिक आचार्य ( यदि हो) , और

5) अध्यादेशों की व्यवस्थाओं के अनुरुप ऐसे व्यक्ति , जो विभाग के सदस्य हों ।

पाठ्य-समिति:

18 . 1 ) प्रत्येक विभाग की एक स्तानकोत्तर पाठ्य - समिप्ति और एक स्नातक पाठ्य - समिति होंगी ।

2) स्नातकोत्तर पाठ्य- समिति का गठन तथा इसके सदस्यों के कार्य- काल की विनिर्दिष्ट अध्यादेशों द्वारा होगा ।

3 ) स्नातकोत्तर पाठ्य - समिति के कार्य होंगे विभिन्न डिग्रियों के शौध के विषयों एवं शोध की डिग्रियों के लिए दूसरी आवश्यकताओं का

अनुमोदन करना तथा इन्हें अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट पद्धति से संकाय बोर्ड के पास संस्तुतित करके भेजना-

क ) अध्ययन के पाठ्यक्रम तथा शोध- डिग्रियों से भिन्न स्नाकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षकों कीनियुक्ति,

ख) शोध- निर्देशकों की नियुक्ति, तथा

ग) स्नातकोत्तर अध्यापन एवं शोध के स्तर के उम्नयन की व्यवस्था:

परन्तु, इस अधिनियम के लागू होने के तत्काल बाद तीन वर्ष की अवधि के भीतर स्नातकोत्तर पाठ्य समिति के पूर्वोक्त कार्य विभाग द्वारा सम्पादित किए जाएँगे ।

4) स्नातक पाठ्य- समिति का गठन और इसके सदस्यों के कार्यकाल की विनिर्दिष्ट अध्यादेशों द्वारा होगी ।

वित्त समिति:

19 . 1 ) वित्त समिति निम्नांकित सदस्यों से गठित होगी-

क) कुलपति

ख ) सह कुलपति

ग ) प्रबंधन बोर्ड द्वारा नामित तीन व्यक्ति जिनमें से कम से कम एक व्यक्ति प्रबन्धम बोर्ड के सदस्य होंगे , और

घ) कुलाध्यक्ष द्वारा मनोनीत तीन व्यक्ति ।

2 ) वित्त समिति के पाँच सदस्य इसकी बैठक की कार्यवाहक संख्या पूर्ण करेंगे ।

3 ) पदेन सदस्योंको छोड़कर वित्त समिति के शेष सेवस्य तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए पदों पर बने रहेंगे ।

4) वित्त समिति के किसी निर्णय से असहमति की स्थिति में इसके किसी सदस्य की अपनी असहमति दर्ज कराने का अधिकार होगा ।

5 ) वित्त समिति की बैठकें लेखाओं के परीक्षण तथा प्रस्तावों के संवीक्षण हेतु वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित होंगी ।

6 ) प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा विचार किए जाने से पहले पदों की सृष्टि संबंधी सारे प्रस्ताव तथा आय-व्यय पत्र ( बजट ) में सम्मिलित न किए जानेवाले मद वित्त समिति द्वारा जाँचे जाने चाहिए ।

7 ) वित्त अधिकारी द्वारा प्रस्तुत विश्वविद्यालय के बार्षिक लेखा एवं वित्तीय निरुपण वित्त समिति के समक्ष विचार एवं प्रतिक्रिया हेतु रखे जाएँगे तथा उसके पश्चात अनुमोदन के लिए ये प्रबन्धन बोर्ड के पास भेजे जाएँगे ।

४ ) वित्त समिति विश्वविद्यालय की आय एवं उसके साधनों ( उत्पादक कार्यों के सन्दर्भ में ऋण की प्राप्ति की सम्मिलित होगी ) के आधार पर

कुल वार्षिक आवर्तक व्यय एवं अनावर्त्तक व्यय की सीमाओं के संबध में सुझाव देगी ।

चयन समितियों:

20. 1 ) आचार्य , पुरवाचक , व्याख्याता, कुलसचिव , वित्त अधिकारी , पुस्तकालयाध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित महाविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रधानाचार्यों के पदों में नियुक्ति के लिए प्रबन्धन बोर्ड के पास संस्तुति प्रस्तुति करने हेतु चयन समितियाँ होंगी ।

4470 G1 /03-3 18

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[PART III---SEC. 4]

2 ) निम्मांकित सारणी के स्तंभ । में विनिर्दिष्ट पदों में नियुक्ति हेतु चयन समिति कुलपति, सह कुलपति , कुलाध्यक्ष द्वारा मोननीत एक व्यक्ति तथा इस सारणी के स्तंभ 2 में अनुरुप प्रतिष्टि के तहत विशेष रुप से उल्लिखित व्यक्तियों से गठित होगी:

सारणी

1

2

आचार्य

क) सम्बद्ध विभाग के प्रमुख यदि वे आचार्य हों ,

ख ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले एक आचार्य ।

ग ) ऐसे तीन व्यक्ति जो विश्वविद्यालय की सेवा में विद्यामान न हों और जिन्हें आचार्य से सम्बद्ध होनेवाले विषय पर रुचि या विशेष के कारण विद्या परिषद द्वारा संस्तुतिप्त नामों की सूची मे प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नामित किया गया हो ।

प्रवाचक व्याख्याता

क) सम्बद्ध विभाग के प्रमुख ,

ख ) कुलपति द्वारा मोननीत किए जानेवाले एक आचार्य ,

ग ) ऐसे दो व्यक्ति जो विश्वविद्यालय की सेवा में विद्यमान न हों औरजिन्हे प्रवाचक या व्याख्याता से सम्बद्ध होनेवाले विषय पर रुचि से सम्बद्ध ज्ञान के कारण विद्या परिषद द्वारा संस्तुतित नामोंकीसूची से प्रबन्धन बोर्ज द्वारा नामित किया गया हो ।

क ) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नामित इसके दो सदस्य,

कुलसचिव , वित्त अधिकारी

ख ) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नामित एक व्यक्ति जो विश्वविद्यालय की सेवा में विद्यमान न हो ।

पुस्तकालयाध्यक्ष

क) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नामित ऐसे दो व्यक्ति, जिन्हें पुस्तकालय विज्ञान-पुस्तकालय संचालन के विषय का विशेष ज्ञान हो तथा जो विश्वविद्यालय की सेवा में वर्तमान न हों,

विश्वविद्यालय द्वारा संचालित

महाविद्यालय अथवा संस्थान के

प्रधानाच -प्रधानाचार्या

ख ) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा एसा एक व्यक्ति जो विश्वविद्यालय की सेवा में विद्यामान न हो । ऐसे तीन व्यक्तिजो विश्वविद्यालय की सेवा में विद्यामान न हों तथा जिनमें से, महाविद्यालय या संस्थान द्वारा सिक्षा दिए जा रहे विषय के विशेष ज्ञान या उसमें विशेष रुचि के कारण , दो व्यक्ति प्रबन्धन बोर्ड द्वारा और एक विद्या परिषद द्वारा नामित किए गए हों ।

टिप्पणी: जहाँअन्तःज्ञान शाखायीयोजना-अन्तर्विभागीय योजना केलिए नियुक्ति की जा रही हो, वहाँ योजना केप्रमुख ही सम्बद्ध विभाग केप्रमुख माने जाएँगे ।

2 ) मनोनीत किए जानेवाले आचार्य चयन किए जा रहे आचार्य की विशेषज्ञता से सम्बद्ध होने चाहिए । कुलपति आचार्य को मनोनीत करने से पूर्व विभाग के प्रमुख एवं संकाय के अध्यक्ष से विचार-विमर्श करेंगे ।

3 ) चयन समिति की बैठकों में कुलपति या उनकी अनुपस्थिति में सह कुलपति अध्यक्षता करेंगे:

परन्तु, चयन समिति की बैठक कुलपति द्वारा मनोनीत व्यक्ति एवं प्रबन्धन बोर्ड द्वारा धारा ( 2 ) के तहत नामित व्यक्तियों के साथ पूर्व परामर्श के पश्चातउनके सुविधानुसार निश्चित कीजाएगी:

परन्तु, यह और कि चयन समिति की कार्यवाही तब तक बैध नहीं मानी जाएगी जब तक कि-

क) कुलपति एवं प्रबन्धन बोर्ड द्वारा मनोनीत व्यक्तियों की कुल संख्या चार होने पर उनमें से कम से कम तीन बैठक में उपस्थिति न रहें , तथा

ख ) कुलपति एवं प्रबन्धन बोर्ड द्वारा मनोनीत व्यक्तियों की कुल संख्या तीन होने पर उनमें से कम से कम दो बैठक में उपस्थित न रहें ।

1 ) चयन समिति की बैठक कुलपति के द्वारा अथवा उनकी अनुपस्थिति मे सह कुलपति कते द्वारा बुलायीजाएगी ।

3 ) चनयं समिति द्वारा अपनायी जानेवाली प्रक्रिया अध्यादेशों द्वारा विहित की जाएगी ।

6 ) चयन समिति द्वारा की जानेवाली संस्तुतियाँ यदि प्रबन्धन बोर्ड को मान्य न हों- तो वह कारण दर्ज करेगा तथा अन्तिम आदेश के लिए मामले को कुलाध्यक्ष के पास प्रेषित करेगा ।

7 ) अस्थायी पदों पर नियुक्ति निम्नांकित रीतियों से की जाएगी:

क ) रिक्ति की अवधि यदि एक शैक्षिक वर्ष से लंबी हो तो पूर्वोक्त धारा में उल्लिखित रीतियों के अनुरुप चयन समिति के परामर्श परउमे पूर्ण किया जाएगा:

परन्तु, यदि कुलपति समझ लें कि कार्य के स्वार्थ में रिक्ति की पूर्ति जरुरी है, तो उपधारा ( 2 ) में उल्लिखित स्थानीय चयन ममिनि द्वारा नितान्त अस्थायी आधार पर सर्वाधिक छः महोने के लिए नियुक्ति की जा सकेगी ।

ख ) अस्थायी रिक्ति की अवधि यदि एक वर्ष से कम हो, तो ऐसी रिक्ति के लिए संबद्ध संकाय के अध्यक्ष, विभाग के प्रमुख तथा कुलपति 19

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

केद्वारा मनोनीत एक व्यक्ति के द्वारा गठित स्थानीय चयन समिति की संस्तुति पर नियुक्तिकी जाएगी:

परन्तु, संकाय के अध्यक्ष एवं विभाग के प्रमुख यदि एक ही व्यक्ति हों, तो चयन समिति में कुलपति द्वारा मनोनीत दो व्यक्ति हो सकेंगे:

परन्तु, यह और कि देहावसान या किसी अन्य कारण से घटित अध्यापक के पद की अकम्मिक सायिक रिक्ति के सन्दर्भ में संकाय के अध्यक्ष सम्बद्ध विभाग के प्रमुख के साथ विचार- विमर्श करके एक महीने के लिए अस्थायी नियुक्ति दे सकेंगे तथा कुलपति एव कुलसचिव को एसी नियुक्ति की सूचना देंगे ।

ग ) अस्थायी रुप में नियुक्त कोई भी शिक्षक जो स्थायी विधियों द्वारा आर्दिष्ट नियमित चयन समिति के द्वारा संस्तुतित न हों, वे ऐसे अस्थायी पह पर तब तक नहीं बने रह सकते जब तक कि वे तदनन्तर स्थानीय चयन समिति या नियमित चनय समिति द्वारा, यथा स्थिति, अस्थायी या स्थायी नियुक्ति के लिए चुने न गए हों।

नियुक्तिकीविशेष रीति:

21 . 1 ) स्थायी विधि 20 में जो भी कहा गया हो, प्रबन्धन बोर्ड शैक्षिक श्रेष्टत्व के अधिकारी एवं अपने कार्य में महान उपलब्धि प्राप्त करने वाले किसीविद्वान को आचार्य, प्रवाचक या विश्वविद्यालय के किसी अन्य शैक्षिक पद के ग्रहण के लिए बोर्ड द्वारा उचित विवेचित निबन्धन एवं शर्तों पर आमन्त्रित कर सकेगा तथा सम्बद्ध व्यक्ति द्वारा उसे स्वीकार किए जाने पर उन्हें नियुक्ति दे सकेगा ।

2 ) प्रबन्धन बोर्ड अध्यादेशों में निर्धारित की गयी रीतियों के अनुरुप किसी अन्य विश्वविद्यालय या संस्था में कार्यरत किसी शिक्षक या अन्य शैक्षिक कर्मचारी को किसी संयुक्त योजना में कार्य करने के लिए नियुक्ति दे सकेगा ।

निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्ति:

22. प्रबन्धन बोर्ड स्थायी विधि 20 द्वारा निर्धारित प्रक्रियों के अनुरुप चयन किए गए व्यक्ति को उचित विवेचित निबन्धन एवं शर्तों पर एक निश्चित कार्यकाल के लिएनियुक्तिदे सकेगा ।

मान्यताप्राप्त शिक्षक:

23. 1 ) मान्यताप्राप्त शिक्षकों की अर्हताएँ अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट रुपों में होंगी ।

2) अध्यादेशो द्वारा विनिर्दिष्ट रीतियों से शिक्षक की मान्यता के लिए आवेदन किए जाएँगे ।

3 ) अध्यादेशों द्वारा बनायी गयी रीतियों के अनुसार चयन के लिए गठित चयन समिति की संस्तुति के बिना किसी भी शिक्षक को शिक्षक की मान्यता नहीं दी जाएगी ।

4) किसी शिक्षक की मान्यता का निर्धारण इसी उद्देश्य से बनाए गए अध्यादेशों द्वारा किया जाएगा।

5 ) विद्या परिषद एक विशेष प्रस्ताव के जरिए, जो बहुमत से यानी उसके कम के कम दो तिहाई सदस्यों की उपस्थिति तथा मतदान से पारिन हो, किसी शिक्षक की मान्यता विखंडित कर सकेगी:

परन्तु, ऐसा कोई भी प्रस्ताव तब तक पारित नहीं किया किया जाएगा जब तक कि सस्बद्ध व्यक्ति को लिखित सूचना के जरिए उसमें निर्धारित समय के भीतर कारण दशनि के लिए कहा न जाय कि वैसा प्रस्ताव विद्या परिषद क्यों न पारित करे, साथ ही जब तक उनकी आपत्तियों (अगर

हों तो ) एवं इनके समर्थन में प्रस्तुत किए गए साक्ष्य पर विद्या परिषद द्वारा विचार न किया जाए ।

6) धारा 5 के तहत पारित विखण्डन के आदेश से प्रभावित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश के बारे में उनको सूचित करने की तिथि से तीन महीने के भीतर प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष अपील करस पाएँगे , और उस अपील पर प्रबन्धन बोर्ड उचिन विवेचित आदेश पारित कर सकेगा ।

समितियाँ:

24. 1 ) विश्वविद्यालय की कोई भी प्राधिकारी संस्था उचित विवेचित संख्या में स्थायी या विशेष समितियाँ गठित कर उनमें ऐसे लोगों को नियुक्त कर सकेगी जो प्रधिकारी संस्था के सदस्य न हों ।

2) धारा ( 1 ) के तहत गठित ऐसी कोई भी समिति अपने ऊपर सौंपे गए किसी भी विषय के गन्दर्भ में विचार करके नियोग करनेवाली प्राधिकारी संस्था द्वारा परवर्ती समय में पुष्टि के उपाश्रित निर्णय ले सकेगी ।

शिक्षक आदि की सेवा के निबन्धन एवं शर्तें तथा उनकी आचरण विधि:

25 . 1 ) विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य शैक्षिक कर्मचारी , किसी प्रकार की संपादित सहमति के अभाव में, स्थायी विधियों, अध्यादेशों एव विनियमोंद्वारा विनिर्दिष्ट सेवा के निबन्धन एवं शर्तें तथा आचरण विधियों से शासित होंगे ।

2) विश्वविद्यालय के प्रत्येक शिक्षक एवं शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के प्रत्येक सदस्य की नियुक्ति अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट रुप में सम्पादित लिखित संविदा पर होगी ।

3) धारा ( 2 ) में उल्लिखित प्रत्येक संविदा की एक प्रति कुलसचिव के पास जमा रेहेगी ।

अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन एवं शर्तें तथा उनकी आवरण-विधि:

26. शिक्षकों एवं सैक्षिक कर्मचारियों से भिन्न विश्वविद्यालय के अन्य सभी कर्मचारी , किसी प्रकार की सम्पादित सहमति के अभाव में स्थायी विधियों, अध्यादेशों तथा विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट सेवा के निबन्धनों एवं शर्तें तथा आचरण-विधियों से शासित होंगे ।

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4]

L

वरिष्ठता सूची:

27. 1 ) स्थायी विधियों के अनुरुप जब किसी व्यक्ति के द्वारा वरिष्ठता के अनुसार क्रम - क्रम से विश्वविद्यालय के किसी पद पर होने या किसी प्राधिकारी संस्थाके सदस्य बनने की बात हो, तो ऐसे व्यक्तिकी उसी कोटि पर अव्यवहित सेबा की दीर्घता के तथा प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा समय समय पर विनिर्दिष्ट किए जानेवाले अन्य सिद्धान्तों के अनुसार वरिष्ठता निश्चित की जाएगी ।

2) धारा 1 की व्यवस्थाके अनुरुप इन स्थायी विधियों के उपबन्धों के लागू होनेवाले प्रत्येक वर्ग के कर्मचारियों के संबंध में एक पूर्ण एवं अध्यतन वरिष्ठता- सूची तैयार करना एवं उसे बनाए रखना कुलसिचव का कर्तव्य होगा ।

3 ) यदि दो या उससे अधिक व्यक्तियों की किसी विशेष कोटि में समान दीर्घता की अव्यवहित सेवा हो अथवा किसी व्यक्तिया व्यक्तियों की सापेक्षिक वरिष्ठता सन्देहास्पद हो, तो कुलसचिव अपनी ओर से या ऐसे किसी व्यक्ति के अनुरोध पर मामले की प्रबन्धन बोर्ड के पास भेजेंगे , जिसका निर्णय अन्तिम होगा ।

विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का अपसरण:

28. 1 ) जब विश्वविद्यालय के किसी शिक्षक, शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य अथवा किसी अन्य कर्मचारी के विरुद्ध कदाचार का आरोप हो , तो शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य के मामले में कुलपति तथा अन्य कर्मचारियों के मागन्ने मे नियुक्ति देने में सक्षम प्रधिकारी ( आगे नियुक्तिदेनेवाले प्राधिकारी के रुप में उक्त ) , यथास्थिति, ऐसे शिक्षक , शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के गदस्य या अन्य कर्मचारी को लिखित आदेश के जरिए निलंबित करेंगे और तत्काल ही ऐसे आदेश निकाले जाने की परिस्थितियों के बारे में प्रबन्धन बोर्ड को सूचना देंगे:

परन्तु, प्रबन्धन बोर्ड का यदि यह अभिमत हो कि मामले की परिस्थितियाँ शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य के निलंबन को समर्थित नहीं करती- तो वह ऐसा आदेश विखंडित कर सकेगा ।

2 ) नियुक्तिके संविदा के निबन्धनों में अथवा कर्मचारियों की सेवा के किसी अन्य निबन्धन एवं शर्तों में चाहे जी हो - शिक्षकों एवं अन्य शैक्षिक कर्मचारियों के मामले में प्रबन्धन बोर्ड को , तथा अन्य कर्मचारियों के मामले में नियुक्ति देनेवाले प्राधिकारी को यह अधिकार होगा कि, यथास्थिति, किसी शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के किसी सदस्य या अन्य कर्मचारी को वे कदाचार के आधार पर पद से अपसारित करें । 3 ) पूर्वोक्त रुप में, यथास्थिति , प्रबन्धन बोर्ड अथवा नियुक्ति देनेवाले प्राधिकारी एक समुचित कारण के बिना तथा तीन महीने की सूचना या उसके बदले तीन महीने के वेतन चुकाए वगैर किसी शिक्षक, शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य या अन्य कर्मचारी को पद से अपसारित नहीं कर सकेंगे ।

4) धारा ( 2 ) या धारा ( 3 ) के तहत किसी भी शिक्षक, शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य या अन्य कर्मचारी को तब तक पद से अपसारित नही किया जाएगा जब तक कि उनके संबंध में प्रस्तावित कारवाई के विरुद्ध कारण दशनि के लिए उन्हें न्यायोचित सुबिधा नहीं दी जाएगी ।

5 ) किसी शिक्षक, शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य या अन्य कर्मचारी का अपसारण ऐसे आदेश के पारित होने की तिथि से प्रभावीहोगी: परन्तु, जब अपसारण के समय सम्बद्ध शिक्षक, शैक्षिक कर्मचारी वर्ग का सदस्य अथवा अन्य कर्मचारी निलंबन की स्थिति में हो, तो निलबन की तिथि से ही ऐसा अपसारण प्रभावी होगा ।

6) इस स्थायी विधि की पूर्वोक्त व्यवस्थाओं में जो भी हो, कोई शिक्षक , शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के सदस्य या अन्य कर्मचारी पद से त्यागपत्र दे सकेंगे-

क ) यदि वे स्थायी कर्मचारी हों, तो यथास्थिति , प्रबन्धन बोर्ड या नियुक्ति देनेवाले प्राधिकारी को तीन महीने की सूचना देकर ही अथवा उसके बदले तीन महीने के वेतन जमा करके,

ख ) यदिवे स्थायी कर्मचारी न हों, तो यथास्थिति, प्रबन्धन बोर्ड या नियुक्ति देनेवाले प्राधिकारी को एक महीने की सूचना देकर ही अथवा उसके बदले एक महीने का वेतन जमा करके:

परन्तुऐसा त्यागपत्र , यथास्थिति , प्रबन्धन बोर्ड अथवा नियुक्ति देनेवाले प्राधिकारी द्वारा मंजूर कर लिए जाने की तिथि से ही प्रभावीहोगा।

मानक उपाधियाँ:

29. 1 ) प्रबन्धन बोर्ड विद्या परिषद की संस्तुति पर तथा बहुमत से यानी उसके दो तिहाई सदस्यों की उपस्थिति तथा उनके मतदान से पारित एक संस्ताव के जरिए कुलाध्यक्ष के समक्ष मानक उपाधि के प्रदान का प्रस्ताव रख सकेगा:

परन्तु, आपत्कालीन स्थिति में, प्रबन्धन बोर्ड अपनी ओर से ऐसा प्रस्ताव रख सकेगा ।

2 ) प्रबन्धन बोर्ड बहुमन से यानी उसके कम के कम दो- तिहाई सदस्यों की उपस्थिति तथा उनके मतदान से पारित प्रस्ताव के जरिए कुलाध्यक्ष के पूर्व सम्मोदन पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त किसी भी मानक उपाधि का निवर्त्तन कर सकेगा ।

डिग्रियों आदि का निवर्तन:

30. प्रबन्धन बार्ड बहुमत से यानी उसके कम के कम दो- तिहाई सदस्यों की उपस्थिति तथा उनके मतदान से पारित विशेष प्रस्ताव के द्वारा समुचित एवं पर्याप्त कारण से विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त कोई भी डिग्री या शैक्षिक श्रेष्ठत्व अथवा मंजूर किया गया कोई प्रमाण- पत्र या डिप्लोमा निवर्तित कर सकेगा:

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भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4]

परन्तु, ऐसा कोई भी प्रस्ताव तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि सम्बद्ध व्यक्ति को लिखित सूचना के जरिए उसमें निर्धारित समय के भीतर कारण दशनि के लिए न कहा जाय कि वैसा प्रस्ताव क्यों न ग्रहण करें, साथ ही जब तक उनकी आपत्तियों (अगर हों तो ) एवं उनके समर्थन में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों पर प्रबन्धन बोर्ड द्वारा विचार न किया जाए ।

विश्वविद्यालय के विद्याथियों के बीच अनुशासन का निर्वहण:

31. 1 ) विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संबंधित अनुशासन एवं अनुशासनात्मक कारवाई की सारी क्षमताएँ कुलपति के पास रहेंगी ।

2) कुलपति इस सन्दर्भ में; जैसा वे उचित समझें, अपनी पूर्ण या आंशिक क्षमता किसी कार्याध्यक्ष तथा ऐसे अन्य अधिकारी को सौंप सकेंगे ।

3) अनुशासन के निर्वहण से संबंधित अपनी क्षमता की सामग्रिकता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए अपने द्वारा उपयुक्तविवेचित ऐसी कोई कारवाई करते हुए, कुलपति अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हुए, आदेश के जरिए निर्देश दे सकेंगे कि किसी विद्यार्थी या विद्यार्थियों को निर्दिष्ट अविधि के लिये निष्कासितय या बहिष्कृत किया जाय अथवा किसी उल्लिखित अवधि के लिए विश्वविद्यालय केकिसीविभाग या उसके द्वारा संचालित किसी संस्थान या महाविद्यालय में किसी पाठ्यक्रम या पाठ्यक्रमों में प्रतिष्टि न दी जाए अथवा आदेश में निश्चित राशि से दंडित किया जाए अथवा विश्वविद्यालय , महाविद्यालय, संस्थान, विभाग या संकाय द्वारा आयोजित किसी परीक्षा या परीक्षाओं में बैठने से एक या एकाधिक वर्ष के लिए निषेध किया जाए अथवा सम्बद्ध विद्यार्थी जिस परीक्षा या जिन परीक्षाओं में बैठा हो या बैठे हों- उसके या उनके परीक्षा-फल रद्द किया जाय या रद्द किए जाएँ ।

4) महाविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रधानाचार्यों, संकायों के अध्यक्षों तथा शैक्षणिक विभागों के प्रमुखों के पास सम्बद्ध महाविद्यालयों संस्थानों, संकायों तथा शैक्षणिक विभागों के सम्यक संचालन के लिए अपने विद्यार्थियों पर समस्तअनुशासनात्मक कारवाइयाँ करने के अधिकार होंगे । 5 ) कुलपति, प्रधानाचार्यों तथा धारा ( 4 ) में विनिर्दिष्ट व्यक्तियों की क्षमता के प्रति बिना किसी पूर्वाग्रह के विश्वविद्यालय द्वारा अनुशासन एवं सदाचार केविस्तारित नियम बनाए जाएँगे । महाविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रधानाचार्य, संकायों के अध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक

विभागों के प्रमुख पूर्वोक्त उद्देश्य से आवश्यक विवेचित अनुपूरक नियम बना सकेंगे।

6 ) प्रतिष्टि के समय प्रत्येक विद्यार्थी को कुलपति अथवा विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकारियों के अनुशासनात्मक अधिकार- क्षेत्र में अपने को समर्पित करते हुए एक घोषणा पर हस्ताक्षर करने होंगे ।

समावर्तन समारोह:

32. डिग्रियों के प्रदान या अन्य उद्देश्यों से विश्वविद्यालय के समावर्तन समारोह अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट नीतियों के अनुरुप आयोजित किए जाएँगे ।

33 . जहाँविश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था अथवा उसकी किसी समिति की बैठक में अध्यक्षता करने हेतु किसी सभापति या अध्यक्ष का उपबन्ध न हो अथवा जब उपबंधित सभापति या अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो उपस्थित सदस्य अपने में से किसी को बैठक की अध्यक्षता करने के लिएचुनलेंगे ।

त्यागपत्र:

34. प्रबन्धन बोर्ड, विद्या परिषद या विश्वविद्यालय की किसी अन्य प्राधिकारी संस्था अथवा ऐसी प्राधिकारी संस्था की किसी समिति के पदेन सदस्य सेभिन्न अन्य कोई भी सदस्य कुलसचिव करे संबोधित पत्र को लिए त्यागपत्र दे सकेंगे और कुलसचिव द्वारा प्राप्ति के साथ ही त्यागपत्र प्रभावी होगा ।

आयोग्यताएँ:

35: 1 ) कोई व्यक्ति विश्वविद्यालय की किसी भी प्राधिकारी संस्था के सदस्य के रुप में चुने जाने अथवा बने रहने के आयोग्य होंगे- क) यदि वे अस्वस्थ मन के हों,..

ख ) यदि वे निर्मुक्त दिवालियाहों,

ग ) यदि वे नैतिक नीचता के अपराध में किसी न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए हों और उसी सिलसिले में उन्हें कैद की सजा मिली हो, जो छः महीने से कम न हो ।

2 ) यदि कोई प्रश्न इस बात को लेकर खड़ा हो कि कोई व्यक्ति अयोग्य हैं अथवा धारा 1 में उल्लिस्थित अयोग्यताओं में से किसी के साथ उन्हें जोड़ा गयाहै, तो वह मामला कुलाध्यक्ष कोप्रेषित किया जाएगा तथा उनका निर्णय ही अन्तिम होगा औरऐसे निर्णय के विरुद्ध किसी भीसिविल न्यायालय में कोई अभियोग या कोई अन्य कार्यवाही मान्य नहीं होगी ।

सदस्यता एवं पद के लिए आवासीय स्थिति:

36. स्थायीविधियों में जो भी हो, कोई व्यक्ति जो साधारण भारत के आवासी न हों, वे विश्वविद्यालय के कोई पदाधिकारी अथवा विश्वविद्यालय कीकिसी प्राधिकारी संस्था के सदस्य हों सकेंगे ।

अन्यनिकायों की सदस्यता के बल पर प्राधिकारी संस्थाओं की सदस्यता:

37. स्थायीविधियों में जो भी हो, कोई व्यक्ति जो, यथास्थिति , किसी विशेष प्राधिकारी संस्था या निकाय के सदस्य होने के नाते अथवा किसी विशेष पद पर नियुक्त होने के कारण विश्वविद्यालय में किसी पद पर कार्य करें अथवा विश्वविद्यालय की किसी प्राधिकारी संस्था या निकाय के सदस्य बन जाएँ, तो वे विश्वविद्यालय में तब तक पद पर या सदस्य के रुप में बने रहेंगे जब तक वे उस विशेष प्राधिकारी संस्था या निकाय के सदस्य 22

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] अथवा उस विशेष पद के अधिकारी बने रहें ।

उपाधिधारियों की परिषदः (अल्यूमनि असोसियेशन)

38 . 1 ) विश्वविद्यालय में उपाधिप्राप्त विद्यार्थियों की एक परिषद होगी ।

2) उपाधिधारियों की परिषद का सदस्यता शुल्क अध्यादेशों द्वारा विहित किया जाएगा ।

3 ) उपाधिधारियों की परिषद का कोई भी सदस्य मतदान करने अथवा चुनाव में खड़े होने का योग्य नहीं होगा यदि वह चुनाव चुनाव की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व से परिषद का सदस्य न रहा हो तथा विश्वविद्यालय का न्यूनतम पाँच बर्षीय उपाधिधारी न हो:

परन्तु, प्रथम चुनाव के मामले में एक वर्ष की सदस्यता की पूर्ति की शर्त लागू नहीं होगी ।

विद्यार्थी परिषद: (स्टुडेंट्सकाउन्सिल)

39. 1 ) विश्वविद्यालय में प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के लिए निम्नांकित सदस्यों से एक विद्यार्थी परिषद गठित की जाएगी

क) छात्र-कल्याण के अध्यक्ष , जो विद्यार्थी परिषद के सभापति होंगे,

ख़) विगत शैक्षणिक वर्ष में अध्ययन , सुकुमार कला , खेल- कूद एवं विस्तार कार्यक्रम के क्षेत्रों में पुरस्कार पानेवाले विद्यार्थी,

ग ) विद्या परिषद द्वारा अध्ययन, खेल- कूद, कार्य- कलाप तथा व्यक्तित्व के सामग्रिक विकास के आधार पर मनोनीत बीस विद्यार्थी: परन्तु, सभापति की अनुमति से विश्वविद्यालय का कोई भी विद्यार्थी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कोई भी विषय विद्यार्थी परिषद के समक्ष ला सकेगा और उस विषय को विचार - विमर्श के लिए ग्रहण की जानेवाली सभा में लपस्थित रहकर चर्चा में भाग लेने का अधिकार उसे प्राप्त हागा । !

2) विद्यार्थी परिषद के कार्य होंगे-अध्ययन के कार्यक्रम , छात्रों के कल्याण तथा सामान्य रुप से विविद्यालय के कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों

के सन्दर्भ में सम्बद्ध प्राधिकारियों को सुझाव देना । ऐसे सुझाव सहमत के आधार पर दिये जाएँगे ।

3 ) विद्यार्थी परिषद की बैठक एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम एक बार होगी और वह यथा संभव उभ वर्ष के प्राग्भ में अनुष्ठित की जाएगी ।

अध्यादेश कैसेबनाए जाएँ:

40. 1 ) खण्ड 28 के उपखण्ड ( 2 ) के तहत बनाए गए प्रथम अध्यादेश प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा किसी भी समय विशेष रुप से उल्लिखित रीतियों से संशोधित , विखंडित या संबद्धित किए जा सकेंगे ।

2) उपखण्ड ( 1 ) की धारा ( ट ) में विनिर्दिष्ट विषयों को छोड़कर खण्ड 28 में गिनाए गए विषयों के सन्दर्भ में प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा तब तक अध्यादेश नहीं बनाया जा सकेगा जब तक कि ऐसे अध्यादेश का मसौदा विद्या परिषद की ओर से प्रस्तावित नहीं होगा ।

3 ) प्रबन्धन बोर्ड के पास धारा 2 के तहत विद्या परिषद द्वारा प्रस्तावित अध्यादेश के मसौदे को संशोधित करने का अधिकार नहींहोगा , परन्तु, वह उस प्रस्ताव को अस्वीकृत कर सकेगा अथवा मसौदे को आँशिक या सम्पूर्ण रुप में पुनर्विचार के लिए अपनी ओर से सुझाए जानेवाले किसी भीसंशोधन के साथ विद्या परिषद को वापस कर देगा ।

4) विद्या परिषद द्वारा प्रस्तावित किसी भी अध्यादेश को प्रबन्धन बोर्ड द्वारा अस्वीकृत या वापस कर दिए जाने कीस्थिति में , विद्या परिषद उस विष र नए सिरे से विचार कर सकेगी , तथा यदि मूल मसौदे की बहुमत से यानी उपस्थित सदस्योंके कम से कम दा तिहाई के मतदान से एवं विद्या परिषद के कुल सदस्योंमें से आधे से अधिक के द्वारा पुनर्पुष्ट होती है, तो उसे प्रबन्धन बोर्ड के पास वापस भेजा जाएगा , जिसे प्रबन्धन बोर्ड या तो ग्रहण करेगा , अथवा उसे कुलाध्यक्ष को प्रेषित करेगा और इस विषय में कुलाध्यक्ष का निर्णय ही अन्तिम होगा।

5) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा बनाया गया प्रत्येक अध्यादेश तत्काल प्रभावी होगा ।

6 ) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा बनाए गए प्रत्येक आदेश को उसके ग्रहण की तिथि से दो सप्ताह के भीतर कुलाध्यक्ष के पास प्रेषित किया जाएगा । कुलाध्यक्ष को यह अधिकार होगा कि, अध्यादेश की प्राप्ति के चार सप्ताह के भीतर विश्वविद्यालय को वेसे अध्यादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का निर्देश दें, तथा वे यथासंभव शीघ्र प्रबन्धन बोर्ड को प्रास्तवित अध्यादेश पर उनकी आपत्तियों के बारे में सूचना देंगे । कुलाध्यक्ष, विश्वविद्यालय की ओर सेटिप्पणियाँ प्राप्त होने पर अध्यादेश के निलंबन के आदेश को या तो वापभ ले सकेंगे अथवा अध्यादेश को अस्वीकृत कर देंगे, तथा उनका निर्णय अन्तिम होगी ।

विनिग्रम:

41. 1 ) विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाएँ इस अधिनियम , स्थायी विधियों एव अध्यादेशों के साथ संगति बनाए रखकर निम्नांकित विषयों के सन्दर्भमें विनियमों का प्रणयन कर सकेंगी-

क) उनकी बैठको में परिपालित होनेवाली प्रक्रियाओं तथा कार्यवाहक संख्या के लिए आवश्यक सदस्य संख्या का निर्धारण करने ,

ख ) इस अधिनियम, स्थायी विधियों या अध्यादेशों द्वारा वांछित समस्त विषयों की व्यवस्था करने,

ग ) वैसी प्राधिकारी संस्थाओं या उनके द्वारा नियुक्त समितियों से ही सम्बद्ध अन्य समस्त विषयों की व्यवस्था करने जो इस अधिनियम, स्थायी विधियों या अध्यादेशों द्वारा अनुबंधित न हों ।

2 ) विश्वविद्यालय की प्रत्येक प्राधिकारी संस्था अपने सदस्यों को बैठकों की तिथियों और वैसे बैठकों में चर्चित होनेवाले विषयों के बारे में सूचना देने तथा बैठकों की कार्यवाहियों के अभिलेख तैयार किए जाने की व्यवस्था करते हुए विनियम बनाएगी ।

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भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III-खण्ड 4]

3 ) प्रबन्धन बोर्ड स्थायी विधियों के तहत बनाए जानेवाले किसी भी विनियम के सन्दर्भ में अपने द्वारा निर्दिष्ट रुप में संशोधन का ऐसे किसी भीविनियम कीविलुप्ति का निर्देश दे सकेगा ।

क्षमताओं का अर्पण:

42. इस अधिनियम तथा स्थायी विधियों के अनुबंधो के अधीन विश्वविद्यालय के किसी भी अधिकारी या प्राधिकारी संस्था अपने अधीनस्थ किसी अन्य अधिकारी या प्राधिकारी संस्था या व्यक्ति को अपनी क्षमता इस शर्त पर सौंप सकेंगे या सकेगी कि सौंपी गयी क्षमताओं के प्रयोग की सामग्रिक जिम्मेदारी क्षमता सौंपनेवाले अधिकारी या प्राधिकारी संस्था पर ही बनी रहेगी ।

लक्ष्योंएवं कारणोंका विवरण

असम विश्वविद्यालय अधिनियम 1989 संसद द्वारा मई , 1989 को असम के काछार जिले के शिलचर में एक शैक्षणिक सम्बद्धक केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था ।

2. स्थानीय आकांक्षाओं तथा ब्रह्मपुत्र की घाटी के लोगों की आवश्यकताओं पर ध्यान देते हुए असम के तेजपुर में एक द्वितीय केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया ।

3. यह विधेयक असम के तेजपुर में एक शैक्षणिक एवं आवासीय विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहना है ।

नई दिल्ली

अर्जुनसिंह

18 अगस्त, 1992

वित्तीय ज्ञापन

विधेयक की धारा 3 असम के तेजपुर में एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय के स्थापन की व्यवस्था करती है । इस विश्वविद्यालय कीस्थापना का कुल निरुपति व्यय आनुमानिक रुप से 15 करोड़ होगा, जिसमें से 10 करोड़ अनावर्त्तक तथा 5 करोड़ आवर्त्तक व्यय होंगे । इस व्यय का एक प्रधान अंश आठवीं योजना की अवधि के दौरान संघटित होने की संभावना है । शेष राशि परवर्ती योजना में ले ली जाएगी ।

2. उपरोल्लिखित व्यय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा इसके योजना- नियतनं से पूरा किया जाएगा ।

विधायी क्षमता-प्रदान संबंधी ज्ञापन

विधेयक की धारा 27 व्यवस्था देती है कि विधेयक की अनुसूची में विहित स्थायी विधियाँ ही प्रथम हैं । यह विश्वविद्यालय के प्रबन्धन बोर्ड को यह क्षमता भी देती है कि कुलाध्यक्ष की स्वीकृति के उपाश्रित, नयी अथवा अतिरिक्त स्थायी विधियों का प्रणयन अथवा विद्यमान स्थायी विधियों कासंशोधन या विखंडन करे । पूर्वोक्त धारा की उपधारा ( 5 ) कुलाध्यक्ष को भी इस अधिनियम के लागू होने से तत्काल तीन वर्ष की अवधिके भीतर नयी अथवा अतिरिक्त स्थायी विधियों के प्रणयन अथवा विद्यमान स्थायी विधियों के संशोधन या विखंडन की क्षमता प्रदान करती है । उपधारा ( 6 ) पुनः कुलाध्यक्ष को यह क्षमता देती है कि वे अपने द्वारा निर्दिष्ट किसी विषय के सन्दर्भ में स्थायी विधियों में व्यवस्था करने के लिए विश्वविद्यालय को निर्देश दें, तथा यदि प्रबन्धन बोर्ड ऐसे निर्देश की प्राप्ति के 60 दिन के भीतर जसे कार्यान्वित करने में असमर्थ हो, तो कुलाध्यक्ष, प्रबन्धन बोर्ड द्वारा सम्प्रेषित निर्देश- पालन की असमर्थता के कारण ( यदि हो तो ) एवं अनुरोध पर ध्यान देते हुए उपयुक्त रुप में स्थायी विधि बनाएँ या विद्यामान स्थायी विधि का संशोधन करें । प्रबन्धन बोर्ड एवं कुलाध्यक्ष जिन स्थायी विधियों के प्रणयन, संशोधन या विखंडन कर सकेंगे उनके विषय क्षेत्र में विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाओं एवं अन्य निकायों के गठन , क्षमताएँ एवं कार्य , विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं अधिकारियों की नियुक्ति, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की सेवा- शर्तें तथा ऐसी अन्य बातें होंगी ।

2. विधेयक की धारा 28 विश्वविद्यालय के कुलपति को यह क्षमता प्रदान करती है कि वे केन्द्रीय सरकार का पूर्वानुमोदन प्राप्त करके विश्वविद्यालय के प्रथम अद्यादेशों का प्रणयन करें । प्रस्तुत धारा यह व्यवस्था भी करती है कि ऐसे बनाए गए अध्यादेश प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा किसी भी समय पर स्थायी विधियों द्वारा विनिर्दिष्ट रीतियों से संशोधित, विखंडन या संवर्जित किए जा सकेगें । यथा स्थिति , जिन विषयों के सन्दर्भ में अध्यादेशों का प्रणयन संशोधन, विखंडन या संवर्धन किया जा सकेगा , वे विषय विद्यार्थियों को प्रविष्टि, अध्ययन के पाठ्यक्रम, शिक्षण एवं परीक्षण के माध्यम , अध्ययन केन्द्रों की स्थापना , पाठ्य - समितियाँ, विशेष केन्द्र , विशिष्ट प्रयोगशाला , अन्य विश्वविद्यालयों एव प्राधिकारी संस्थाओं के साथ सहयोग एवं संयोजन की पद्धति, विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित महाविद्यालयों एवं संस्थानों का प्रबन्धन तथा ऐसी अन्यबातों से जुड़े होंगे ।

3. विधेयक की धारा 29 विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्थाओं को इस अधिनियम, स्थायी विधियों तथा अध्यादेशों के साथ संगति बनाए रखकर उनके एवं उनके द्वारा नियुक्त समितिओं के कार्यों के सम्पादन हेतु ऐसे विनियमों के प्रणयन की क्षमता प्रदान करती है जो इस अधिनियम, स्थायी विधियों या अध्यादेशों द्वारा अनुबंधित न हो ।

4. जिन विषयों के सन्दर्भ में स्थायी विधियाँ, अध्यादेश या विनियम बनाए जा सकते हैं- वे कार्य-पद्धतियों एवं विस्तारण से जुड़े हुए हैं और उन्हें विधेयक में अनुबंधित करना संभव नहीं है । अतः विधायी क्षमता प्रदान स्वाभाविक स्वरुप का है ।

24

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

(1993 के ससेदाय अधिनियम सख्या -45 के जरिए स्थापित)

संविधिसंख्या-43

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो./ 96/2/4/.4( 1 ) के जरिए गृहित और निरीक्षण किया गया एम. एच. आर. डी. के पत्र संख्या न. एफ. 14-23/96- डेस्क( यू) संख्या- दिनांक 21.05.97 के आगन्तुक द्वारा अनुमोदित)

अधिनियम कि खण्ड 26 ( k) एवं 27 ( 2) और द्वितीय अनुसूची की स्थायी विधि संविधि के खण्ड 17 ( 5 ) के साथ ही खण्ड 13 ( 3 ) (क) के अन्तर्गत।

यह विश्वविद्यालय शिक्षण एवं शोध के उद्देश्य से निम्नलिखित रुपों में स्नातकोत्तर विभागों की स्थापना करेगा: क)

1. भौतिक विज्ञान विभाग

2. रसायन विज्ञान विभाग

3. गणित विज्ञान विभाग

4 कंप्यूटर विज्ञान विभाग

5. इतौक्ट्रोनिकी विभाग

6. सूचनाविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

7. पारमाणविक जीवविज्ञान एवं जीव -प्रौद्योगिकी विभाग

8. शक्तिविभाग

9. पर्यावरण अध्ययन विभाग

10. भूविज्ञान विभाग

11. अंग्रेजी एवं विदेशी भाषाओं का विभाग

12. पारंपरिक संस्कृति एवं कला-रुपों का विभाग

13 . जन-संचार एवं पत्रकारिता विभाग

14. समाज विज्ञान विभाग

15. आधुनिक भारतीय भाषाओं का विभाग

16. व्यवसाय संचालन विभाग

17 . बैंकिंग एवं वित्तीय प्रबन्धन विभाग

18. वाणिज्य विभाग

19. व्यावसायिक अर्थविज्ञान विभाग

ख) विभागोंके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में शोध एवं विकासपरक कार्यों के लिए यथोचित आजीविकोन्मुखी पाठ्यक्रमों के प्रवर्त्तन के उद्देश्य से केन्द्र भी होंगे । इस उद्देश्य से चिह्नित किए गए केन्द्र है:

1) कंप्यूटर केन्द्र

2) आपदाप्रबस्धन केन्द्र

3) औद्योगिक नमूना विकास केन्द्र

4) इलैक्ट्रानिकी नमूने एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र

5) फैश्यन प्रौद्योगिकी विकास केन्द्र

6) खाद्य प्रस्तुतीकरण प्रौद्योगिकी केन्द्र

7) व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र

8) शैक्षिक प्रौद्यागिकी केन्द्र

9) जनसंख्या एवं सामाजिक स्थिति अध्ययन केन्द्र

10) ग्रामीण विकास केन्द्र

11) योजनाएवं विकास तथा भविष्यत संभावना अध्ययन केन्द्र

12) प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन केन्द्र

13) पर्यटन विकास केन्द्र

14) वन प्रबंधन केन्द्र

15) आर्द्र भू- प्रबंधन केन्द्र

16 ) शारीरिक शिक्षा केन्द्र

17 ) अपराम्परागत शक्तिकेन्द्र

1 (क.के. सी. सी. )

(आ.प्र.के/सी.डी.एम )

(औ.न.वि.के/सी.डी.आई.डी)

(इ.न.प्रौ.के/सी.डी.एफ.टी)

(फै.प्रौ.वि.के/सी.डी.एफ.टी ) .

(खा.प्र.प्रौ.के/सी.एफ.पी.टी. )

(व्या.प्र.के/सी.बी.टी. )

(शै.प्रौ.के.सी.ई.टी)

(ज.सा.स्थि.अ.के. सी.पी.डी.एस )

(ग्रा.वि.के /सी.आर.डी )

(यो.वि.भ.सं.अ.के/सी.पी.डी.एस.एफ )

(प्रा.सं.प्र.के/सी.एन आर.एम )

(प.वि.के. सी.डी.टी)

(व.प्र.के/शी.एफ.एम )

(आ.भू.प्र.के/ भी.डब्ल्यू.एल एम )

(शा.शि.के/सी पी.ई )

(अप.श.के. सी.एन.सी.ई ) 25 [भाग III- खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

संशोधन

(संख्या. एफ. 14-6/2005 डेस्क (घू. ) दिनांक 22-9-2006 आगन्तुक द्वारा अनुमोदित)

उपबंध क

क्र.सं. 4: संगणक विज्ञान विभाग को 'संगणक विज्ञान एवं आभियांत्रिकी विभाग' के रूप में पुनर्नामांकित किया गया है ।

क्र.सं. 5: इलेक्ट्रानिक्स विभाग को ' इलेक्ट्रानिक्स एवं संचार आभियांत्रिकी विभाग के रूप में पुनर्नामांकित किया गया है ।

क्र.सं. 6. सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हटा कर संगणक विज्ञान एवं आभियांत्रिकी विभाग में समाहित किया गया है ।

क्र.सं. 6 को आणविक जीव विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के रूप में पाठ किया जाएगा ।

क्र.सं. 7. खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी विभाग के रूप में पाठ किया जाएगा ।

क्र.सं.10: भू- तत्व विज्ञान विभाग को ' धरती विज्ञान विभाग के रूप में पुनर्नामांकित किया गया है ।

क्र.सं. 12: पारंपरिक संस्कृति एवं कल्ला रूप विभाग को ' सांस्कृतिक अध्ययन विभाग के रूप में पुनर्नामांकित किया गया है ।

योग

क्र.सं. 20: यांत्रिक आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 21: योजना एवं स्थापत्य कला विभाग ।

क्र.सं. 22: असामरिक आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 23:, रसायन आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 24: वैद्युतिक आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 25: जैव चिकित्सा आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 26: कृषि आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 27: पर्यावरण आभियांत्रिकी विभाग ।

क्र.सं. 28: मोटरगाडी आभियांत्रिकी विभाग ।

ख-संशोधित

क्र.सं. (vi ) खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी केन्द्र को मिटा दिया गया है ।

( vi ) से xvii के क्रमांको को vi - xvi के रूप में पुनः अंकित किया गया है ।

4470 G1 /08-4 25

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4]

संविधि संख्या-44

2 र बोर्ड 17 -6-96 की प्रस्ताव संख्या बी./96/2/4.4( 2) द्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र संख्या एफ. 14-23/96- डेस्क(यू) सं-1 दिनांक 21-05-97 के आगन्तुक द्वारा अनुमोदित)

अधिनियम के खण्ड 26 ( k) एवं 27 ( 2) और द्वितीय अनुसूची की स्थायी विधि संविधि के खण्ड 17 ( 5) के साथ ही खण्ड 13 ( 3 ) ( क) के अन्तर्गत।

अधिनियम के अनुभाग 26 ( D ) के अधीन द्वितीय अनुसूची के संविधि 25( 1 ) और 25(2) के तहत शिक्षक और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन और सेवा की शर्तें-

1.0 अधिनियम द्वारा परिभाषित विश्वविद्यालय के शिक्षक का अर्थ है प्रोफेसर , रीडर, व्याख्याता और इसी प्रकार के अन्य व्यक्तिगण जिन्हें विश्वविद्यालय शिक्षण, निर्देशन तथा शोध संचालन के लिए या विश्वविद्यालय द्वारा परिरक्षित अन्य महाविद्यालय या संस्थान में और अध्यादेशों द्वारा शिक्षक के रूप में पदनामित किया गया हो।

2.0 शिक्षक की नियुक्ति इस प्रकार होगी-

(अ) स्थायी पदों के लिए पूर्ण कालीन शिक्षक ।

(ब) अस्थायी पदों के लिए पूर्ण कालीन शिक्षक ।

आगन्तुक प्रोफेसर ।

(स)

: (द) अंशकालीन शिक्षक ।

(इ) अतिथि व्याख्याता ।

3.0 आगन्तुक प्रोफेसर, अंशकालीन शिक्षक और अतिथि व्याख्याता की नियुक्ति तथा वेतन के संबंध में सेवा की शर्तें प्रबंधन समिति तय करेगी ।

4.0 पूर्ण कालीन नियोजित शिक्षक

अध्यादेश के अनुसार शिक्षक का अर्थ है विश्वविद्यालय का एक पूर्ण कालीन वेतनभोगी शिक्षक, जिसमें विश्वविद्यालय जानियक्त मानदेय आगन्तुक , अतिथि या अंशकालीन शिक्षक शामिल नहीं होंगे ।

विश्वविद्यालय के पूर्ण कालीन वेतनभोगी शिक्षक प्रबंधन परिषद के अनुमति के बिना प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अन्य किसी भी वतन प्राप्त अथवा मानदेय काम में शामिल नहीं होगें ।

उखित है कि विश्वविद्यालय , लोक सेवा आयोग अथवा इसी तरह के प्रतिष्ठानों के परीक्षा संबंधी कार्यों तथा साहित्यिक कार्यों अथवा प्रकाशनों अथवा रेडियों वार्ता अथवा वक्तृता अथवा कुलपति के अनुमति से किए गये अन्य किसी शैक्षणिक कार्य क लिए यह नियम लागू नहीं होगा ।

5.0 कर्तव्य की प्रकृति

समय समय पर लागू होनेवाले विश्वविद्यालय के अधिनियम, संविधि और अध्यादेश के तहत प्रत्येक शिक्षक को कर्तव्यों का पालन करना होगा, जिसमें अंतर्विषयी शिक्षण अथवा शोध अथवा छात्रों की परिक्षाएँ अथवा अनुशासन अथवा उनके कल्याण तथा शिक्षणं से सबंधित सभी कार्यों को विश्वविद्यालय के प्राधिकरण के निर्देश के तहत पालन करना होगा ।

27

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III-खण्ड 4]

6.0 परीविक्षा

साधारणतः नियुक्तिप्राप्त शिक्षक 12 महीने के लिए परीविक्षा की अवस्था में रहेंगे , लेकिन किसी भी मामले में परीविक्षा का समय. 24 महीने से ज्यादा नहीं होगा ।

उल्लिखित है कि प्रबंधन परिषद निर्दिष्ट कारण के तहत परीविक्षा की शर्त हटा सकेगा ।

उल्लिखित है कि प्रबंधन परिषद द्वारा द्वितीय अनुसूची की संविधि 21 ( 1 ) के अधीन नियुक्त शिक्षकों के लिए परीविक्षा की शर्त लागू नहीं होगी ।

व्याख्या : प्रबंधन परिषद को किसी भी शिक्षक के 12 महीने की परीविक्षा अवधि समाप्त होने के पहले ही स्थिरीकरण के विषय में निर्धारण करने का अधिकार है लेकिन यह निर्धारण नियुक्ति की तिथि से 9 महीने के पहले नहीं हो सकेगा ।

उल्लिखित है कि परीविक्षा के वर्द्धित कार्यकाल के किसी भी समय प्रबंधन परिषद स्थिरीकरण के लिए शिक्षक को निर्धारण करने का अधिकार रखता है ।

7.0 स्थिरीकरण

7.1 पंजीयक का यह कर्तव्य होगा कि परीविक्षा अवधि के समाप्त होने के कम से कम 40 दिन पहले ही शिक्षक के स्थिरीकरण- का मामला प्रबंधन परिषद के समक्ष रखें ।

7.2 प्रबंधन परिषद शिक्षक को स्थिर कर सकता है अथवा स्थिरीकरण न करने का सिद्धान्त ले सकता है अथवा परीविक्षा की अवधि को बढा सकता है, जो कि चौबीस महीने से ज्यादा न हो । यदि प्रबंधन परिषद एक शिक्षक के बारह महीने की परीविक्षा अवधि की समाप्ति पर अथवा परीविक्षा के बढे हुए समय के पहले यथास्थिति , स्थिरीकरण न करने का फैसला लेता है तो संश्लिष्ट शिक्षक को इसकी लिखित जानकारी अवधि समाप्त होने के तीस दिन पहले देना होगा ।

उल्लिखित है कि किसी शिक्षक को स्थायी न करने का फैसला लेते वक्त प्रबंधन परिषद में उपस्थित और वोट में शामिल सदस्यों का दो तिहाई बहुमत आवश्यक होगा।

8.0 अल्पवृद्धि

कुलपति के संदर्भ से यदि प्रबंधन समिति स्थगित अथवा मुल्तवी न करें , तो प्रत्येक शिक्षक अपने वेतनमान के अनुसार अल्पवृद्धि की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे; पर संश्लिष्ट शिक्षक को अपनी बात रखने की पूर्ण सुविधा प्रदान की जाएगी ।

9.0 सेवानिवृत्ति की आयु

9.1 विश्वविद्यालय का प्रत्येक शिक्षक जिनका सेवा स्थायी किया गया हो, साठ वर्ष की आयु पूर्ण होने तक काम कर सकते हैं और इसके बाद सेवा अवधि की कोई परवर्ती वृद्धि नहीं होगी ।

28

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

उल्लिखित है कि यदि किसी शिक्षक के सेवा निवृत्ति का समय शैक्षणिक सत्र के बीच में पड जाये तो उस शिक्षक को कुलपति चलित शैक्षणिक सत्र के समाप्त होने तक पुनर्नियोजित कर सकता है ताकि विभाग के शिक्षण कार्य में कोई बाधा उपस्थित न हो ।

9.2 विशेष मामलों में साठ वर्ष पूरा करने के बाद एक शिक्षक को संविदा पर पुनर्नियोजित किया जा सकता है, जो कि पाँच वर्ष से ज्यादा न हो और उन्हे प्रबंधन परिषद द्वारा निर्धारित वेतन दिया जा सकेगा ।

9.3 सेवानिवृत्त शिक्षकों की पुनर्नियोजन के लिए निर्धारित नियम एवं सिद्धान्त-

(i) संश्लिष्ट शिक्षक अपने शैक्षणिक गतिविधि का स्व -निर्धारण प्रतिवेदन भेजेंगे, जिसमे विशेषतः सेवानिवृत्त के पाँच साल पहले की गयी कार्यों के दस्तावेज भी शामिल होंगे ।

(ii) सेवानिवृत्त होनेवाले/सेवानिवृत्त शिक्षक को एक स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र पेश करना होगा, जो कि असम राज्य के स्वीकृति प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालय के मेडिसिन के अध्यापक स्तर के चिकित्सक से प्रदत्त होना पडेगा ।

उल्लिखित है कि प्रबंधन परिषद को यह अधिकार है कि अपने द्वारा नामित एक विशेषज्ञ चिकित्सक से उनकी स्वास्थ्य परीक्षा करा सकता है ।

(iii) इन दस्तावेजों को प्राप्त करने के बाद निम्नलिखित रूप से विश्वविद्यालय एक गाँव समिति गठित करेगा और सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ- साथ संश्लिष्ट शिक्षकों की सेवा अभिलेख उस समिति में पेश करेगा , ताकि समिति आवश्यक कार्रवाई कर सके ।

जाँच समिति:

(अ) कुलपति।

(ब) संश्लिष्ट विद्यालय के संकायाध्यक्ष , यदि कोई है ,

(स) आगन्तुक द्वारा नामित संश्लिष्ट शिक्षक के विशिष्टता के क्षेत्र से एक विशेषज्ञ ।

(द) प्रबंधन परिषद द्वारा नामित संश्लिष्ट शिक्षक के विशिष्टता के क्षेत्र से दो विशेषज्ञ ।

( iv ) पुनर्नियोजन की अवधि प्रथम चरण में दो वर्ष की रहेगी और बाद में एक वर्ष अथवा कम समय के लिए रहेगी । किसी भी हालत में 65 वर्ष की आयु पूरे कर चुके शिक्षकों को पुनर्नियोजित नहीं किया जाएगा ।

( iv) शिक्षक की अपनी प्रदर्शन अथवा शोधपत्र की गुणवत्ता अथवा प्रकाशित पुस्तकों के आधार पर जाँच समिति शिक्षक के पुननियोजन करने की सिफारिश पर विचार करेगी । चलित शोध कार्यक्रम के लिए संरिलद शिक्षका की उपस्थिति अनिवार्य है , इस बात की पुष्टि सिफारिश में स्पष्ट रूप से होनी चाहिए ।

( v ) शिक्षक का पुनर्नियोजित होने पर सेवानिवृत्त होने के समय प्राप्त वेतनमान ही उन्हें दिया जा सकेगा ।

(vi ) विश्वविद्यालय के वेतन नियत करने के नियम और केन्द्रीय सरकार के नियमों के आधार पर वेतन को नियत किया जाएगा , जिसमें बतन , पेंशन तथा अन्य लाभ अंतिम वेतन प्राप्ति से ज्यादा नहीं होगा ।

( vii ) पुनर्नियोजन को एक नियमित कार्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा और यह केवल असाधारण मामलों में ही मान्यहोगा, जिसे उपरोक्त ( v ) में दिखाया गया है ।

9.4 प्रत्येक मामले मे जाँच समिति की सिफारिश को प्रबंधन समिति के विचारार्थ पेश करना होगा ।

9.5 इस तरह से पुनर्नियोजित शिक्षक किसी भी सांविधिक पद के क़ाबिल नहीं होंगे ।

[ भाग III--खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

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10.0 सेवा के नियमों एवं शर्तों में बदलाव

विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक विश्वविद्यालय में लागू सभी विनियमों , अध्यादेशों एवं संविधियों के अधीन हैं ।

उल्लिखित है कि नियुक्त होने के बाद पदनाम, वेतनमान, अल्पवृद्धि, भविष्य निधि , सेवानिवृत्ति लाभ, सेवनिवृत्ति की अवधि, परिवीक्षा , स्थिरीकरण , छुट्टी का वेतन और सेवा से अपसारण के विषय में कोई बदलाव नहीं हो सकेगा , जो उनको प्रतिकूल रूप से प्रभावित करे ।

11.0 निर्वहन संहिता

विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत संहिता सभी शिक्षकों के लिए मान्य होगा और निम्नलिखित भूलों को विश्वविद्यालय के शिक्षक का अनुचित व्यवहार माना जाएगा ।

:

11.1 अपने कर्तव्य को पालन करने में चुकना , जैसे- पढाना तथा मार्गदर्शन करना, जिसमें अंतर्विषयी कक्षा, निर्धारण , मार्गदर्शन , निरीक्षण इत्यादि शामिल हैं ।

11.2 पक्षपात , छात्रों के निर्धारण एवं मूल्यांकन में इच्छानुसार अधिक अंक देना/निम्न अंक देना अथवा छात्र को प्रताडित करना ।

11.3 अन्य छात्रों, सहकर्मियों एवं प्रशासन और प्राधिकारियों के विरूद्ध किसी छात्र को उत्तेजित करना । लेकिन , इसमें किसी संगोष्ठी और अन्य स्थानों पर जहाँ छात्र भी उपस्थित हों, शैक्षिक विषयों की नीतियों पर अपनी मत की भिन्नता प्रकट करने का शिक्षक का अधिकार शामिल नहीं होगा ।

11.4 साम्प्रदायिक गतिविधियों में शामिल होना अथवा अपने सहकर्मियों के साथ जाति , धर्मभत , धर्म , उपजाति अथवा लिंग के प्रश्न को उठाना और अपने विकास के क्षेत्र में इन्हें प्रयोग करना ।

11.5 विश्वविद्यालय के प्राधिकारी अथवा/और प्रशासनिक और शैक्षणिक निकाय द्वारा लिए गए उचित निर्णयों का पालन न करना ।

11.6 व्यभिचार, अविश्वास, अनैतिकता , नैतिक अनाचार, अनियमित कार्यों, उच्छृंखलता अथवा असंस्कृत व्यवहार , कर्तव्यों में कोताही बरतना, अपने उच्चाधिकारी प्राधिकारी को न मानना , हडताल, पिकेटिंग, घेराव, हडताल के लिए अन्य को उकसाने तथा इसी तरह के कार्यों में शामिल होने को असंस्कृत व्यवहार माना जाएगा ।

12.0 पदत्याग

प्रबंधन समिति को तीन महीने पहले का लिखित सूचना देने अथवा विकल्प के रूप में तीन महीने का वेतन विश्वविद्यालय को प्रदान करने पर एक शिक्षक, किसी भी समय विश्वविद्यालय से अपने कार्य को समाप्त कर सकता है ।

उल्लिखित है कि इस सूचना के प्रयोजन को अपने ही विशेषाधिकार से प्रबंधन समिति परित्याग कर सकता है ।

13.0 सभी प्रकार के अव्यवहार के प्रकरण को संविधि के द्वितीय अनुसूचि की धारा 28 ( 1 से 6) के अधीन व्यवहृत किया जाएगा।

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

14.0 संविदा

अधिनियम के द्वितीय अनुसूचि के संविधि 25 (2 ) के अधीन विश्वविद्यालय और शिक्षक के बीच एक लिखित संविदा होगा , जिसे अध्यादेश में अधिसूचित किया गया है ।

15.0 विशेष संत्रिदाएँ

शिक्षकों को संविदा पर नियुक्त करने के मामले मे , जो संविधि में उल्लिखित नहीं है, प्रबंधन समिति निर्णय ले सकता है तथा उपयुक्त शर्तें लागू कर सकता है ।

उल्लिखित है कि इस उपबंध के अधीन नियुक्ति की समय सीमा तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी।

16.0 वेतन स्थिरीकरण एवं भत्ता

समय-समय पर विश्वविद्यालय द्वारा गृहित वित्तीय नियम के अधीन शिक्षकों के वेतन और भत्ताओं को नियत किया जाएगा ।

17.0| वर्तमान वेतन मान

रु. 4500-150-5700-200-7300/-

प्रोफेसर

(अ)

रु . 3700-125-4950-150-5700/-

(ब) रीडर

रु . 2200-75-2800-100-4000/-

(स) व्याख्याता

कुलपति की सेवा के निबन्धन एवं शर्तें तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1993 की संविधि संख्या-2 ( 5) ( ii ) को पढ़ें

संविधि संख्या -45

प्रबंधन समिति के संकल्प संख्या बी-97/ 2/ 29 दिनांक 14-6-97 द्वारा गृहित और संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र संख्या एफ14-21 /96

डेस्क(यू) दिनांक 4-11-97 के आगन्तुक द्वारा अनुमोदित

1 . यदि कुलपति सेवा-निवृत्ति की स्वाभाविक आयु की प्राप्ति के पश्चात तथा विगत सेवा हेतु प्राप्त होनेवाले सेवा निवृत्ति वेतन कि ग्रहण की स्थिति में अपने पद का दायित्व - भार ग्रहण करते हैं तो वैसी स्थिति में , या तो उनके वेतन एवं भत्तों की कुल राशि से परिवर्तन के पूर्व की सेवा-निवृत्ति- वेतन - राशि की कटौती की जाएगी अथवा कुलपति के दायित्व - भार को छोड़ने की तिथि तक सेवा-निवृत्ति- बेतन का भुगतान रोके रखा जाएगा । दूसरी स्थिति में, अगर वे सेवा निवृत्ति की स्वाभाविक आयु की प्राप्ति के पश्चात दायित्व- भार संभालते हैं और वे सेवा निवृत्ति वेतन न प्राप्त होनेवालेपद पर रह चुके हों-तो कुलपति के पद के वेतन एवं भत्तों की कुल राशि से सेवा- निवृत्ति वेतन के समान सेवा- निवृत्ति लाभ की राशि कीकटौती की जाएगी । !

2. कुलपति को कार्यालयी एवं व्यक्तिगत काम - काज निपटाते हेतु एक कार्यालयी वाहन प्राप्त रहेगा । व्यक्तिगत काम -काज़ के लिये वाहन के उपयोग करने के कारण उन्हें 300/- रुपये का मासिक शुल्क अदा करना होगा , पर कार्यालयी दायित्व-पालन हेतु वाहन के उपयोग के लिये कोई शुल्कुलागू नहींहोगा ।

3. क) यदि कुलपति की सेवा से जुड़ने से पूर्व राज्यिक/केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय / राज्यिक स्वायत्व निकाय अथवा केन्द्रीय/ राज्यिक विश्वाविद्यालय के कर्मचारी के रुप में सेवा-निवृत्ति- योजना के लाभ के योग्य रह चुके हों तो कुलपति के रुप में अपने कार्य- काल के आरंभ होने से पूर्व सेवा- निवृत्ति की स्वाभाविक आयु प्राप्त न होने की स्थिति में, कुलपति सामान्य भविष्य निधि सेवा निवृत्ति वेतन उपदान योजना को ग्रहण करने के अधिकारी होंगे ।

यदि वे विश्वविद्यालय की सामान्य भविष्य निधि- सेवा निवृत्ति वेतन उपदान योजना को ग्रहण करें- तो कुलपति सेवा निवृत्ति वेतन के सन्दर्भ में अपनी विगत सेवा को कुलपति के रुप में सेवा-निवृत्ति की स्वाभाविक आयु तक की सेवा से जोड़ने के लाभ के अधिकारी होंगे । इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय पूर्व संस्थाओं से सेवा/निवृत्ति वेतन/अंशदानमूलक भविष्य निधि संबंधी उत्तदायित्व को ग्रहण करेगा । सेवा निवृत्ति कीस्वाभ विक आयु से अतिरिक्त अवधि की विश्वविद्यालय में उनकी सेवा, सेवा -निवृत्ति वेतन संबंधी लाभ के सन्दर्भ में किसी प्रकार का योगदान नहीं करेगी । सवा-निवृत्ति वेतन एवं उपदान के लाभ उनके द्वारा कुलपति के पद को छोड़े जाने की तिथि से ही देय होंगे ।

[भाग III-खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

31

यदि कुलपति सेवा-निवृत्ति के पश्चात अपने पद का कार्य- भार संभालते हैं अथवा कार्यकाल के दौरान सेवा- निवृत्ति होते हैं- तो, यथाप्रयुक्त, सेवा निवृत्ति हो चुकने या कार्य-काल के दौरान सेवा निवृत्त की तिथि से वे अंशदानमूलक भविष्य निधि एवं उपदान योजना से जुड़ने के अधिकारी होंगे ।

3. ख ) कुलपति प्रत्येक कलेण्डर वर्ष में 30 दिन के हिसाब से पूर्ण वेतन सहित छुट्टी के हकदार होंगे । प्रत्येक वर्ष पहली जनवरी और पहली जुलाई को 15 दिन की दो अर्द्धवार्षिक किश्त के रुप में छुट्टी अग्रिम रुप में उनके खाते में जमा कर दी जाएगी , परन्तु, यदि कुलपति किसी अर्द्धवर्ष के जारी रहने के दौरान अपने पद से जुड़े कार्य- भार का ग्रहण करते हैं या उसे छोड़ते हैं, तो प्रत्येक सेवा- पूर्ण महीने पर 22 के हिसाब से आनुपातिक रुप में छुट्टी जमाकर दी जाएगी ।

3. ग ) कुलपति के खाते में जमा पूर्व के अर्द्ध वर्ष की छुट्टी नए अद्ध वर्ष तक आगे ले जायी जाएगी । पर शर्त यह रहेगी कि सम्बद्ध अर्द्ध वर्ष की जमा छुट्टी सहित आगे ले जायी गयी छुट्टी समय समय पर प्रभाती केन्द्रीय सरकार की तत्संबंधी सर्वाधिक सीमा को पार न कर जाए ।

3. घ ) कुलपति अपने पद का कार्यभार छोड़ने पर , अत्यत्र उपलब्द छुट्टी नकद भुगतान लाभ सहित केन्द्रीय सरकार के नियमानुसार दिनों की सर्वाधिक संख्या के उपाश्रित , अपने पद का कार्यभार छोड़ने के समय तक प्राप्त होनेवाले पूर्ण वेतनयुक्त छुट्टी के दिनों के वेतन के बराबर की रकम की प्राप्ति के हकदार होंगे ।

3 ङ) कुलपति प्रत्येक पूर्ण सेवा-वर्ष पर 20 दिन के हिसाब से अर्द्ध वेतन छुट्टी के भी हकदार होंगे । यह अर्द्धवेतन छुट्टी चिकित्सा प्रमाण -पत्र प्रस्तुत करके पूर्ण वेतन सहित अन्तवर्तित छुट्टी के रुप में ली जा सकेगी । अन्तवर्तित छुट्टी के ग्रहण की स्थिति में, प्राप्त होनेवाली अद्धवेतन छुट्टी से अर्द्ध वेतन छुट्टी की दुगुनी रकम घटायी जाएगी ।

3. च) कुलपति चिकित्सा या अन्य आधार पर पाँच वर्ष के कार्यकाल में सर्वाधिक तीन महीने की वेतनरहित असाधारण छुट्टी की प्राप्ति के भी हकदार होंगे ।

4. कुलपतिविश्वविद्यालय के दूसरे कर्मचारियों की प्राप्त होनेवाले चिकित्सा- सुविधा तथा छुट्टी-यात्रा-छुट जैसे लाभों के भी अधिकारी होंगे ।

कुलपति, उनकी नियुक्ति पर स्थानान्तरण तथा अपने पद का कार्य- भार छोड़ने समय यात्रा भत्ते के भी हकदार होंगे । 5.

6. सेवारत अवस्थामें कुलपति के देहान्त होने की स्थिति में , अगर वे किसी अन्य विभाग या संस्थान के स्थायी पद के लीअन पर न हो, तो सामान्य भविष्यनिधि या. अंशदानमूलक भविष्य निधि, उपदान तथा छुट्टी नकद भुगतान के रुप में उनके देहान्त तक एकत्रित होनेवाले लाभौ का भुगतान उनके मनोनीत व्यक्ति अथवा अन्तराधिकारी को किया जाएगा ।

संविधि संख्या-46 (प्रबंधन समिति के संकल्प सं. बी92/ 2/4.4(4) दिनांक -27.6.96 द्वारा गृहित मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-23 / 96 डेस्क (यू) सं.- Vi दिनांक 21.05.97 के आगन्तुक द्वारा अनुमोदित

( अधिनियम के खण्ड-10 , उपखण्ड -7 , खण्ड -17 तथा खण्ड-26 (ग) के अधीन पदों की सृष्टि तथा अधिकारीयों की नियुक्तिके बारे में । )

1. पद का नाम: परीक्षाओं के नियन्त्रक:

विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के आयोजन तथा निरीक्षण के लिए एक परीक्षाओं के नियन्त्रक होंगे-जिन्हें आगे ' नियन्त्रक' कहा जाएगा । नियन्त्रक निम्नांकित अर्हताओं एवं योग्यताओं से युक्त होंगे: :

i ) किसी श्रेणी विश्वविद्यालय से कला- विज्ञान- वाणिज्य में न्यूनतम द्वितीय श्रेणी की स्नातकोत्तर डिग्री सहित सुसंगत रुप से अच्छा शैक्षिक जीवन,

ii ) किसी स्वीकृत विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री अथवा समान स्तर की कोई प्रकाशित कृति अथवा शैक्षिक योजना तथा उच्च शिक्षा के सन्दर्भ में परीक्षण-पद्धति के क्षेत्रों में योगदान,

iii ) प्राशासनिक क्षेत्र में किसी दायित्वपूर्ण पद परीक्षाओं के आयोजन उच्च शिक्षा के संस्थान में अध्यापन का न्यूनतम 10 ( दस ) साल का

अनुभव,

iv ) तथा, सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया , अंक-प्रदान के बदले आक्षरिक ग्रेड के व्यवहार और छमासिक परीक्षा- पद्धति के ज्ञान को किसी व्यक्ति के लिए अतिरिक्तअर्हता माना जा सकेगा ।

1.1 परीक्षाओं के नियन्त्रक की नियुक्ति प्रबन्धन बोर्ड के द्वारा, सिफारिश के लिए गठित चयन समिति की सिफारिश के आधार पर की जाएगी , और वे विश्वविद्यालय के पूर्ण कालीन वेतनभोगी अधिकारी होंगे ।

1.2 नियन्त्रक कोविश्वविद्यालय के कर्मचारी वर्ग को मिलनेवाले भत्तों के अलावा 4500-150-5700-7300/- रुपये वेतन- मान अथवा प्रबन्धन बोर्ड द्वारा समय - समय पर विहित किए जाने के अनुसार वेतन प्राप्त होंगे ।

परन्तु, नियन्त्रक 60 ( साठ ) साल के आयु की पूर्ति पर सेवा से निवृत्त होंगे ।

1.3 नियन्त्रक के पद के खाली होने पर अथवा अस्वस्थता या अन्य किसी कारण से यदि नियन्त्रक अपने पद से जुड़े दायित्वों का पालन नहीं कर सकते, तो ऐसी स्थिति में कुलपति द्वारा इसी उद्देश्य से नियुक्त व्यक्ति नियन्त्रक के पद से जुड़े दायित्वों का निर्वाह करेंगे ।

32

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] 2 . नियन्त्रक निम्नलिखित दायित्वों का पालन करेंगे:-

2.1 उपयुक्त प्राधिकारी संस्थाके अनुमोदनार्थ विविध अध्ययन क्रमों, पाठ्यक्रमों तथा परीक्षाओं से संबंधित अध्यादेशों, निगमों एवं विनियमों के प्रारुप तैयारीकरेंगे ।

2.2 शैक्षणिक पत्रा ( एकैडेमिक केलेण्डर ) प्रस्तुत करने हेतु व्यवस्था करंगे ।

2.3 विभिन्न विभागों की सम्बद्ध प्रविष्टि- समितियों के चयन के आधार पर विश्वविद्यालय के विविध विभागों/केन्द्रो में विद्यार्थियों के दाखिले की व्यवस्था करेंगे ।

2.4 अध्यादेशों एवं विनियमों द्वारा विहित प्रासंगिक नियमों के अनुरुप विश्वविद्यालय की विभिन्न परीक्षाओं में बैठने के लिए योग्य प्रत्याशियों को अनुमति प्रदान करेंगे।

2.5 परीक्षाओं के आयोजन, उत्तर पुस्तिकादि के मूल्यांकन एवं परीक्षाफल की घोषणा की व्यवस्था करेंगे ।

2.6 विभिन्न पराक्षोओं के प्रत्याशियों को 'ग्रेड कार्ड' जारी करने की व्यवस्था करेंगे ।

2.7 परीक्षा हॉलों में विहित नियमों के उल्लंघन पर परीक्षार्थियों के विरुद्ध अनुशाशनात्मक कार्यवाई लागू करेंगे ।

2.8 परीक्षाओं के सुधार तथा शैक्षणिक योजना से संबंधित विषयों के विवेचनार्थ उठाएँगे ।

2.9 परीक्षाओं से संबंधित सारे परीक्षा- रजिस्टारों तथा अन्य अभिलेखों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगे ।

2.10 परीक्षा समितियों एवं शोध समिति के सदस्य सचिव होंगे ।

2.11 अन्यविश्वविद्यालयों /संस्थानों/बोडौँ की परीक्षाओं एवं डिग्रियों की स्वीकृति संबंधी बातों को उठाएँगे ।

2.12| कुलपति/प्रबन्धन बोर्ड/योजना एवं विद्या समिति द्वारा समय - समय पर विनिर्दिष्ट ऐसे अन्य दायित्वों का पालन करेंगे /

संविधिसंख्या-47

(प्रबंधन समितिके संकल्प सं. बी. 96-2-4.4 (5) दिनांक 27.06-96, सं. बी. 96/ 4/ 2.10 दिनांक 28.12.96 और बी.98/4/ 25 दिनांक 30-12-98 द्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-23/ 96 डेस्क ( यू)

दिनांक 2-6-2000 के आगन्तुक द्वारा अनुमोदित

तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1993 के खण्ड 26 ( F ) तथा द्वितीय अनुसूची की संविधि संख्या-12 (2 ) (V) और 26 के अन्तर्गत विश्वविद्यालय के कर्मचारियों (विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा अन्य शैक्षिक कर्मचारियों से भिन्न) की सेवा के निबन्धनों एवं शर्तों तथा आचरण-विधि के बारे में ।

म्खण्ड-26 का उपखण्ड ( च ) यह उपबंधित करता है कि अधिनियम की व्यवस्थओं के अधीन , संविधि के जरिए पदोन्नति की व्यवस्था, वार्षिक वेतन वृद्धि, भविष्य निधि, सेवा- समाप्ति के तरीके तथा अनुशासनात्मक कारवाई सहित कर्मचारियों की सेवा के निबंधनों एव शर्तों को उपबंधित किया जा सकता है, और अधिनियम के खण्ड-27 का उपखण्ड-2 प्रबन्धन बोर्ड को यह अधिकार देता है कि वह नयी एवं अतिरिक्त संविधियाँ बनाए अथवा विश्वविद्यालय की :

किसी संविधि का संशोधन या विखण्डन करे ।

विश्वविद्यालय के कर्मचारी ( शिक्षकों एवं शैक्षिक कर्मचारियों से भिन्न ) निम्नलिखित व्यवस्थाओं से अनुशासित होंगे ।

1. प्रयोगः

2. भर्ती: विश्वविद्यालय के समस्त गैर शैक्षिक पदों में भर्ती इस अधिनियम एवं इस संविधि तथा किसी अध्यादेश ( अगर ही, तो ) में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कीजाएगी ।

3. नियुक्ति: विश्वविद्यालय के समस्त गैर शैक्षिक पदों में नियुक्ति विश्वविद्यालय से सम्बद्ध अध्यादेशों में निर्धारित तरीकों से चयन समिति/चयन बोर्ड की सिफारिश पर उपयुक्त नियोगाकारी प्राधिकारी द्वारा विहित प्रक्रिया के जरिए की जाएगी । 4. परिलब्धियाँ: सम्मोदित पदों में नियुक्त विश्वविद्यालय के सभी नियमित कर्मचारियों को विहित वेतन - मान पर वेतन दिये जाएँगे । संघ लोकसेवा आयोग /केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित वेतन - मान के आधार पर प्रबन्धन बोर्ड द्वारा विविध शैक्षिक पदों के वेतन- मान निर्धारित किए जाएँगे । वेतन के अलावा विश्वविद्यालय के कर्मचारी भारत सरकार/ संघ लोक सेवा आयोग द्वारा विहित की जानेवाली दरों के हिसाब से महँगाई भत्ते, आवास भत्ते तथा अन्य भत्तों के लाभ के हकदार होंगे ।

5. छुट्टी:सारी छुट्टियाँ तेजपुर विश्वविद्यालय के कर्मचारी छुट्टी विनिमय से अनुशासित होंगी ।

6. छुट्टीयात्रा छुट (एल. टी. सी): विश्वविद्यालय के वर्तमान विनिमय के अनुसार सारे कर्मचारियों को छुट्टी यात्रा प्राप्त होगी ।

7. अन्यलाभः केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को मिलनेवाली चिकित्सा- खर्च की प्रतिपूर्ति तथा अन्य प्रकार के लाभ, तेजपुर विश्वविद्यालय के प्रबन्धन बोर्ड द्वारा उद्देश्य से प्रासंगिक विनिमयों के प्रणयन के उपाश्रित इस विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को भी उपलब्ध कराये जा सकेंगे ।

8. कर्तव्य: विश्वविद्यालय का प्रत्येक कर्मचारी उस पर सौंपे गए कार्यालयी कर्त्तव्यों का पालन समय की पाबन्दी और आन्तरिकता के साथ करेगा । कोई भीकर्मचारी अपने उत्तम विचार में सच्चाई और शुद्धता से भिन्न तथा विश्वविद्यालय के सही स्वार्थ के विरुद्ध कोई भी काम नहीं करेगा ।

8.1 विश्वविद्यालय का प्रत्येक कर्मचारी पूर्ण ईमानदारी बरतेगा तथा अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठाभाव रखेगा । वह कभी भी ऐसा काम नहीं करेगा जो विश्वविद्यालय के कर्मचारी के लिए शोभनीय न हो ।

33 [भाग III- खण्ड 4]

भारत का राजपत्र असाधारण

8.2 प्रत्येक कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेशों एवं निर्देशों का विश्वास एवं बाध्यता के साथ पालन करेगा ।

8.3 निरीक्षक के पद पर काम करनेवाला हरेक कर्मचारी अपने नियन्त्रन एवं प्राधिकार के अधीनस्थ सभी कर्मचारियों में ईमानदारी तथा निष्ठा का भाव सुनिश्चित करने के लिए यथासंभव सारा कदम उठाएगा ।

8.4 प्रत्येक कर्मचारी:

क) व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन में आचरण का दायित्वपूर्ण तथा शिष्ट स्तर बनाए रखेगा ।

ख ) जनता की शीघ्र सद्भावपूर्ण सेवा उपलब्ध करेगा ।

ग ) कार्यालय में तथा बाहर उचित शिष्टाचार का प्रदर्शन करेगा ।

घ ) किसी मामले के सन्दर्भ में पुलिस के द्वारा कैद कर लिए जाने की स्थिति में अथवा कानूनी अदालत द्वारा अपराधी घोषित किए जाने पर तथ्यकी जानकारी देगा ।

ङ) कार्यालयी लेखों के सन्दर्भ में पूर्ण गोपनीयता बरतेगा तथा किसी भी प्रकार के गोपनीय विषय को दूसरे पर प्रकट नहीं करेगा ।

च ) दहेज देने या लेने से तथा ऐसी माँग करने के लिए उकसाने अथवा प्रोत्साहित करने से दूर रहेगा।

छ ) कर्तव्यरत अवस्था में या सार्वजनिक स्थानों पर नशीले पानीये या नशीली दवाइयों का सेवन नहीं करेगा ।

ज) परिसर के भीतर किसी प्रकार के राजनीतिक कार्य- कलापों में भाग नहीं लेगा ।

अ ) विश्वविद्यालय के स्वार्थ तथा इसकी स्वायन्तता में हानि पहुँचानेवाले किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेगा।

ञ) विश्वविद्यालय में अपनी नौकरी से संबंधित किसी विषय के सन्दर्भ में किसी भी रूप में किसी प्रकार की हड़ताल, बल-प्रयोग अथवा शारीरिक अवरोध अथवा घेराबन्दी-जैसे कदम नहीं उठाएगा ।

ट ) विश्वविद्यालय में पूर्णकालीन सेवा में नियुक्त रहने की स्थिति में अन्य किसी प्रकार की अजीविका अथवा ऐसे अन्य किसी प्रकार के कार्य नहीं अपनाएगा ।

9. कादाचार, अनुशासनहीनता तथाआज्ञा-मंग:

विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी के निम्नलिखित कार्य, आचरण तथा त्रुटि से कदाचार, कार्यालयी अनुशासन का उल्लंघन तथा आज्ञा-भंग की स्थितिबनेगी:

9.1 विश्वविद्यालय के स्वार्थ एवं प्रसिद्धि में हानि पहुँचाने वाला कर्मचारी का कोई भी कार्य या आचरण ।

9.2 विश्वविद्यालय के प्रति शान्तिपूर्ण तरीके से दायित्व निर्वाह करने के साथ असंगत किसी प्रकार का कार्य या आचरण ।

9.3 कर्मचारी का ऐसा कार्य या आचरण जिससे उसे विश्वविद्यालय की सेवा में बनाए रखने में असुरक्षा कीस्थिति उत्पन्न हो ।

9.4 कोई भी अनैतिक कार्य ।

9.5 कर्मचारी का कोई भी ऐसा या आचरण जो उसे अविश्वसनीय प्रमाणित करे ।

9.6 यदिकोई कर्मचारी गाली- गलौज करता हो अथवा कर्म - क्षेत्र की शान्ति बिध्निता करता हो।

9.7 यदिकोई कर्मचारी किसी का अपमान करता हो तथा अपने से वरिष्ठ कर्मचारी के आदेशों का अनादर हो अथवा अपने दायित्वों के पालन करने सेअस्वीकार करता हो ।

9.8 कार्यालयी दायित्वों के प्रति अभ्यासगत उपेक्षा ।

9.9 अश्रद्धा , अविश्वास , बेईमानी, भरोसाहीनता, चोरी, छल, कार्य - सम्पादन के सन्दर्भ में या विश्वविद्यालय की सम्पत्ति के मामले में असाधुता ।

9.10 कानूनी उपबंधों के विरुद्ध हड़ताल, पिकेटिंग , घेराबन्दी तथा दूसरों को हड़ताल के लिए उकसाना ।

9.11 पूर्ण अनैतिक अवचार, अनुशासनहीन कार्य, कार्य- समय के दौरान उच्छृंखल एवं अव्यस्थित व्यवहार ।

9.12 कार्य में अभ्यासगत रुप से देरी से उपस्थित होना और पहले ही चले जाना ।

9.13 कार्य के प्रति अभ्यासगत अवज्ञा ।

9.14 बिना छुट्टी या अनुमति के कार्य में अभ्यास से अनुपस्थित रहना तथा छुट्टी की अवधि से अधिक काल तक ठहराना ।

9.15 फौजदारी अदालत द्वारा अपराधी घोषित किया जाना ।

9.16 विश्वविद्यालय के कार्यालयी काम - काज के सिलसिले में जमता, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों को स्वेच्छाचारिता से परेशान करना ।

9.17 विश्वविद्यालय के प्राधिकारी से अनुमति लिए बिना किसी शैक्षिक संस्थान अथवा किसी अध्ययन क्रम में दाखिल होना ।

10. अनधीकृत अनुस्थिति:

छुट्टी की मंजूरी के अन्तर्गत न आनेवाली स्वेच्छाचारमूलक कार्यानुपस्थिति को, वार्षिक वेतन वृद्धि, छुट्टी, निवृत्ति-वेतन-जैसे सभी मामलों में ' दायित्व का अनिर्वाह समझा जाएगा । ' बिना छुट्टी की ऐसी अनुपस्थिति सेवा/नौकरी में बाधा या व्यवधान प्रमाणित होगी-जिसके परिणाम स्वरुप पिछली सेवा के लाभ हो बंछित होना पड़ेगा । छालाँकि छुट्टी मंजूर करने में सक्षम प्राधिकारी स्वयंमान्य विशेष तथा गंभीर परिस्थितियां कोछोड़कर दूसरी स्थितियों में ऐसे सेवा-व्यवधान की माफी दे सकेंगे ।

4470 G1/08-5 34

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[PART III-SEC. 4]

11. विवाह संबंधी बाधा:

हिन्दूविवाह कानून के दायरे में आनेवाला कोई कर्मचारी , ( जिसकी पत्नी जीवित हो ) , तब तक दूसरे विवाह के बंधन में नहीं बंध सकता -जब तक किकानूनी अदालत से प्राप्त विवाह - विच्छेद से पहले विवाह की समाप्ति नहीं होती । द्विपन्तीकरण के अपराध से अभियुक्त व्यक्ति अथवा कर्मचारी नियुक्तिका आयोग्य अथवा विश्वविद्यालय की सेवा में बने रहने का अनुपयुक्त समझा जाएगा और उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कारवाई की जाएगी ।

12. दहेज:

दहेज़ कानूनी तौर से निषिद्ध है । अतः विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी द्वारा दहेज निषेध कानून का अल्लंघन उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु करने के लिए सही एवं पर्याप्त कारण माना जाएगा ।

13.निलंघन:

निम्नांकित परिस्थितियों को किसी कर्मचारी के निलंबन के लिए यथोपयुक्त कारण माना जाएगा:

क) जबकिसी कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु करने पर विचार किया जाए और सम्बद्ध कर्मचारी के कार्यालय/दायित्व में बने रहने की जाँच कार्य में बाधाप्रद समझा जाए ।

ख ) जब प्रारंभिक जांच , अभियुक्त साबित करने/नौकरी से बर्खास्त या निरस्त आदि करने के परिणाम तक ले जानेवाली फौजदारी/विभागीय कार्यवाही शुरु करने के लिए प्रथम दृष्टि के मामले की ओर संकेत करे ।

जब विश्वविद्यालय के स्वार्थ को हानि पहुँचानेवाले कार्यों में कर्मचारी के किसी प्रकार शामिल होने का सन्देह हो । ग)

घ) जब नैतिक स्खलन का आरोप लगाया जाय ।

ङ) i जब दुर्नीति, गबन, छल , विश्वविद्यालय की धनराशि के दरुपयोग तथा व्यक्तिगत लाभ के लिए पद की क्षमता के अपभ्यवहार का आरोप लगाया जाएं।

च) जब अपने से वरिष्ठ अधिकारी के आदेशों के पालन में इच्छाकृत व्यर्थता अथवा अस्वीकार का आरोप लगाया जाए ।

छ) विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी को तुरन्त निलंबित कर दिया जाना चाहिए यदि 'दहेज संबंधी मृत्यु' के साथ संबंध के या उससे जुड़े हुए होने के आधार पर उसे कैद कर लिया जाए, चाहे बन्दीत्व की अवधि कुछ भी हो ।

ज) जब किसी कर्मचारी को पुलसि द्वारा बन्दी बना लिया जाए और अपनी हिरासत में 48 घण्टे से अधिक की अवधि के लिए रोके रखे ।

14.मानाहुआ निलंबन:

पुलिश - हिरासत में 48 घंटे से अधिक समय के लिये रखे गए अथवा 48 घंटे अधिक समय के लिये बन्दीत्व की सजा प्राप्त करनेवाले विश्वविद्यालयोः किसी कर्मचारी को कैद की तारीख से ही निलंबित माना जाएगा तथा तदनुसार निलंबन का आदेश निकाला जाएगा ।

15. जीवनोपाय भत्ता:

विश्वविद्यालय का निलंबित या निलंबित माना गया कर्मचारी विश्वविद्यालय से जीवनोपाय भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगा । इस जीवनोपाय भत्तेकी राशि, अर्द्ध वेतन अथवा अर्द्ध औसतन वेतन पर सम्बद्ध कर्मचारी के छुट्टी की स्थिति में होते से मिलनेवाली छुट्टी वेतन राशि के समान होगी । ऐसे छुट्टी वेतन के आधार पर मिलनेवाले अन्य भत्ते तथा निलंबन के दिन तक सम्बद्ध कर्मचारी को मिलनेवाले अन्य क्षतिपूरक भत्ते भी मिलेंगे- ताकि निलंबन की अवधि का खर्च पूरा हो सके । :

15.1 निलंबित कर्मचारी को तब तक जीवनोपाय भत्ते का भुगतान नहीं किया जाएगा-जब तक कि वह सम्बद्ध कर्मचारी इस बात का प्रमाण -पत्र न । प्रस्तुत कर दे कि वह किसी अन्य नौकरी , व्यापार , व्यवसाय या वृत्ति से जुड़ा हुआ नहीं

15.2 जीवनोपाय भत्ते की राशि में वृद्धि की जा सकेगी, पर उसके 50% से अधिक नहीं- अगर निवंबन करनेवाले प्राधिकारी का यह मत हो कि सम्बन्द्र कर्मबारी से न जोड़े जा सकनेवाले कारणों से निलंबन की अवधि 3 तोन महीनों से अधिक हो रही है ।

15.3 जीवनोपाय भत्ते की राशि में कमी की जा सकेगी पर उसके 50 % से अधिक नहीं- अगर निलंबन करनेवाले प्राधिकारी का यह मत हो कि सम्बन्द्र कर्मवारी के साथ प्रत्यक्ष रुप से जुड़े जा सकनेवाले कारनों से निलंबन की अवधि 3 ( तीन ) महीनों से अधिक हो रही है ।

15.4 निलंबन करनेवाला प्राधिकारी ही जीवनोपाय भत्ते की मंजूरी देनेवाला तथा उस भत्ते के परिमाण पर पुमविचार करनेवाला प्राधिकारी होगा । 15.5 निम्नलिखित कारणों से जीवनोपाय भत्ते में कटौती की जा सकेगी:

j 1 ) कुल वार्षिक आय यदि आयकर की सीमा में आती हो - तो आयकर तथा अधिकर या अधिभार ।

ii ) घर- भाड़ा तथा बिजली का शुल्क इत्यादि ।

iii ) प्राधिकारी द्वारा विचारपूर्वक निर्धारित वर के हिसाब से विश्वविद्यालय से लिए गए ऋण तथा अग्रिम धन - राशि की वापसी।

iv) सामूहिक जीवन बीमा योजना की रकम ।

15.6 सम्बद्ध कर्मचारी की लिखित सम्मति के बिना निम्नाकित कटौतियाँ नहीं की जाएँगी:

i ) जीवन बीमा की रकम।

ii ) अंशदानमूलक भविष्य निधि/साधारण भविष्य निधि से ली जानेवाली अग्रिम राशि की वापसी ।

15.7 निम्नांकित कटौतियाँ जीवनोपीय भत्ते से नहीं की जाएँगी:

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भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

i ) अदालती कुर्की की स्थिति में देय रकम ।

ii ) कर्मचारी के कारण से विश्वविद्यालय को होनेवाली क्षति की पूर्ति।

16. सेवा में/ नौकरी में न होने की स्थिति में निलंबन:

जब अपील या पुनर्विचार में अदालत के द्वारा विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्यवाही के परिणामस्वरुप लगाए गए नौकरी. मे वर्खास्तगी, वहिष्ककरण अथवा बाध्यतामूलक अवकाश जैसे दण्ड को दर किनार किया जाता है तथा अपेलेट न्यायालय या पुनर्विचार करनेवाली संस्था याअदालत द्वारा मामले को पूर्वस्थिति में रखते हुए अनुशासनात्मक प्राधिकारि के पास अधिक छानबिन या कार्य के लिए किसी निर्देश के साथ भेजा जाता है, तो वैसी स्थिति में निलंबन के आदेश का प्रभाव मूल आदेश अथवा बर्खास्तगी , बविष्करण या बाध्यतामूलक अवकाश की तिथि से जारी रहा माना जाएगा तथा अगले आदेश तक वैध रहेगा ।

17. आरोप पत्र:

अनुशासनात्मक कारवाई करने के लिए सोचे गए कर्मचारी के विरुद्ध - चाहे वह निलंबित हो या न हो, अनुशासनात्मक प्राधिकारी कदाचार या दुर्व्यवहार के दोषारोपण के सार सहित एक वक्तव्य प्रस्तुत करेगा तथा आरोपों की निश्चित एवं स्पष्ट धारा तय करेगा । अभियोग-नामा में आरोपित व्यक्ति द्वारा की जानेवाली किसी स्वीकारोक्ति या वक्तव्य के साथ सारे प्रासंगिक तथ्य प्रतिकलित होंगे । निलंबित कर्मचारी को , यथासंभव शीघ्र , पर निलंबन की तिथि सेतीन महीने के बाद नहीं , आरोप-पत्र दिया जाएगा।

दिनांक

संख्या

सेवामें,

श्री..

इसके द्वारा आपको कारण दर्शाना है कि इसके साथ संलग्नित अभियोगनामा पर आधृत निम्नलिखित आरोपों के लिए आप पर निम्नांकित दण्डों में से एक या एकाधिक क्यों न लगाये जाएँ:

1.

2. दण्ड

3.

1. जबकि आप अतः आप पर आरोप लगाया जाता है कि

2. जबकि आप अतः आप पर आरोप लगाया जाता है कि

आपको अपने बचाव में इस पत्र की प्राप्ति के 10 ( दस ) दिन के भीतर यदि जुड़े हुए विषयों के सन्दर्भ में प्रासंगिक तथ्य प्रमाणों का अवलोकन आप न करना चाहें , तो लिखित वक्तव्य जमा करना होगा । यदि आप उन तथ्य-प्रमाणों का अवलोकन करना चाहें तो उसके लिए आपको इस पत्र की प्राप्ति के 7 ( सात ) दिन के भीतर अधोहस्ताक्षरकारी को लिखना होगा, तथा, तत्पश्चात प्राधिकारी द्वारा निश्चित अवधि के भीतर अपना अवलोकन कार्य पूरा करके उससे 10 ( दास ) दिन के भीतर अपने उत्तर जमा करने होंगे।

यदि आप चाहें कि आपको व्यक्तिगत रुप से सुना जाए तो उपरोल्लिखित अवधि के भीतर लिखित रुप में सूचित करें ।

तथ्य प्रमाणों की एक सूची-जिनके आधार पर, तथा गवाहों की एक सूची- जिनके जरिए आरोपों की धाराओं को उचित ठहराने का प्रस्ताव किया गया है, इसके साथ संलग्न हैं ।

कुलसचिव अनुशासनात्मक प्राधिकारी नीचे क्रमिक संख्या-19 की आरोप की धाराओं के अन्तर्गत उल्लिखित दण्डों में से एक या एकाधिक पर भी विचार कर सकता है ।

17.1 विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था सम्बद्ध कर्मचारी को अभियोगनामा सहित आरोप -पत्र तथा तथ्य प्रमाणों की एक सूची -जिसके आधार पर और गवाहों की एक सूची-जिनके जरिए आरोपों की धाराओं को उचित ठहराने का प्रस्ताव किया गया हो, एक निर्धारित समय -सीमा के भीतर देगी या देने कीव्यवस्था करेगी । साथ ही वह एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर सम्बद्ध कर्मचारी से बचाव के लिखित वक्तव्य की प्रस्तुति माँगेंगी तथा व्यक्तिगत रुप से सुने जाने संबंधी कर्मचारी की इच्छा के बारे में जानना चाहेगी ।

18. दण्ड:

18.1 लघु दण्ड:

i ) निन्दा करना ।

ii ) अस्थायी तौर पर पदोन्नति रोकना ।

सम्बद्ध कर्मचारी की कर्तव्य अवहेलना या आदेशों की अवज्ञा के परिणामस्वरुप विश्वविद्यालय की पहुँचनेवाली आर्थिक क्षति की पूरी या आँशिक भरपाई की व्यवस्था कर्मचारी के वतन से करना ।

iv ) निवृत्ति- वेतन पर प्रभाव डाले बिना तथा इकट्ठा होनेवाले प्रभाव के वगैर, तीन साल से ज्यादा की अवधि के लिए नहीं, समयबद्ध वेतन-मान मेंनिम्नस्तर तक कमी लाना ।

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4 ]

v). भविष्य की वार्षिक वेतन वृद्धि रोक कर रखना ।

18.2 गुरु वण्ड:

क) लघु दण्डोंके तहत ( iv ) में उल्लिखित से भिन्न समयबद्ध वेतन- मान में किसी निम्न स्तर तक कमीलाना ।

स्व) | समयबद्ध वेतन- मान, ग्रेड, पद या कार्य में निम्न स्तर तक कमी लाना ।

ग ) बाध्यवामूलक अवकाश -प्रदान।

घ ) नौकरी से हटाना ।

ङ) नौकरी से बर्खास्त करना ।

19. लघु दण्ड- विधान की प्रक्रिया:

विश्वविद्यालय कीअनुशासनात्मक प्राधीकारी संस्था आरोपित कर्मचारी को विचाराधीन सजाओं के उल्लेख के साथ पूरी धाराओं सहित आरोप -पत्र की एक प्रति. अपने बचाव में आरोपों के उत्तर प्रस्तुत करने हेतु उचित समय निश्चित करके दे देगी ।

19.1 बचाव में लिखित उत्तर प्राप्त होने पर, अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था आरोपों तथा उनपर दिए जानेवाले उत्तरों पर विचार करेगी तथा सही एवं योग्य विवेचित आदेश निकाल कर अनुशासनात्मक कार्यवाही को समाप्त करेगी । :

19.2 हालाँकि , यदि अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था की यह राय हो कि तथ्य प्रमाणों के परीक्षण हेतु जाँच करना वाँछनीय है, तथा सम्बद्ध कर्मचारी को व्याक्तिगत रुप से अपना पक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति देनी है , तो अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था एक जाँच अधिकारी नियुक्त करेगी।

19.3 अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था तत्पश्चात जाँच की रिपोर्ट एवं उपलब्धि पर विचार करेगी तथा योग्यता के आधार पर मामले को निपटाएगी ।

19.4 अनुशासनात्मक कार्यवाही की समाप्ति पर अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था- दण्ड सहित अन्यथा अन्तिम आदेश निकालेगी तथा उसकी एक प्रति सम्बद्ध कर्मचारी को दी जाएगी ।

20.1 गुरु दण्ड-विधान की प्रक्रियाः

: ऊपर अनुच्छेद 18 में सम्मिलित निर्देशानुसार कर्मचारी पर डाले गए आरोपों की धाराओं के विरुद्ध दिए गए बचाव के लिखित वक्तव्य के प्राप्त होने पर, अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था स्वयं आरोपों की ऐसी धाराओं की छानबीन कर सकती है- जिन्हें अन्तर्भूक्त नहीं किया गया हो, अथवा यदि वह जरुरी समझे तो इसी उद्देश्य से एक जाँच अधिकारी को नियुक्ति दे सकती है और जहाँ सम्बद्ध कर्मचारी के बचाव वक्तव्य में आरोपों की सारी धाराएँ सम्मिलित कर ली गयी हों, अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था अपने द्वारा सही विवित सथ्य प्रमाणों पर ध्यान देते हुए अपनेविचार दर्ज करेगी तथा आरोप -पत्र में विचाराधीन जैसे दण्ड का विधान करेंगी ।

20.2: यदि जाँच अधिकारी के निष्कर्ष के प्रति आदरभाव रखनेवाली अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था की पक्की राय हो कि आरोप की सारी या कोई धारा कर्मचारी के विरुद्ध प्रमाणित हुई है तो वह आरोप- पत्र में उल्लिखित एक या एकाधिक दण्डों का विधान करेगी ।

20.3 यदि अनुशासनात्मक प्राधिकारी संस्था आरोपों की धाराओं में से किसी के सन्दर्भ में जाँच अधिकारी के निष्कर्ष से असहमत हो, तो वहऐसी असहमति के कारण दर्ज करेगी तथा ऐसे आरोपों के सन्दर्भ में , यदि उपलब्ध तथ्य - प्रमाण पर्याप्त हों तो , अपनी राय प्रस्तुत करेगी, तत्पश्चात सम्बद्ध कर्मचारी को आरोपों से बरी करतें हुए अथवा आरोपों के समतुल्य विचारधीन दण्डों में से सही दण्डों का विधान करते हुए निर्णय देगी।

20.4 जब विश्वविद्यालय के कर्मचारी को निलंबन के पश्चात नौकरी में पुनःस्थापित किया जाता है ,

अथवा जब विश्वविद्यालय के किसी नौकरी से बर्खास्त, बहिष्कृत या बाध्यतामूलक अवकाशप्राप्त कर्मचारी को नौकरी में पुनः स्थापित किया जाताहै , तब विश्वविद्यालय की योग्य अधिकारी संस्था उस पर गौर करेगी और विशेष आदेश निकालेगी:

क) कर्मचारी को निलंबन सहित अनुपस्थिति की अवधि के लिए भुगतान किए जानेवाले वेतन तथा भत्ते के बारे में, तथा

उल्लिखित अवधि को कर्तव्यरत अवस्था में बीती अवधि मानी जाय या नहीं, उसके बारे में ।

20.5 सब पुनः स्थापन का आदेश देने में सक्षम प्राधिकारी संस्था की यह राय हो कि विश्वविद्यालय की नौकरी से निलंबति, बर्खास्त, बहिष्कृत या बाध्यतामूलक रुप से अवकाशप्राप्त सम्बद्ध कर्मचारी सारे आरोपों से पूर्ण रुप से बरी हो गया है , तो उसे सतत सेवा की स्थिति में मिलनेवाले पूर्ण वेतन तथा भत्तों का भुगतान किया जाएगा ।

और अगर विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था की यह राय हो कि सम्बद्ध कर्मचारी से सीधे जुड़नेवाले कारणों से कार्यवाही को समाप्त करने अनावश्यक विलम्ब हुआ था , तो ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था सम्बद्ध कर्मचारी को इसके संबंध में अपनी राय के बारे में सूचना देते हुए उसे भुगतान किए जानेवाले वेतन एवं भत्तों के परिमाण का निर्धारण करेगी ।

20.6: जब विश्वविद्यालय के कर्मचारी को उसके फोजदारी कार्यवाही से सम्बन्द्ध होने के कारण से निलंबित किया गया हो और वह व्यायिक हिरासत में 48 घंटों से अधिक समय के लिए रहे, तथा तत्पश्चात अदालत द्वारा गुणवत्ता के आधार पर नहीं, अपितु तकनीकी कारणों से उसे बिना अभियुक्तकिए रिहा कर दे, तो विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था पूरे मामले पर विचार करेगी और यदि उसकी राय यह हो कि मूल मामले पूरी तरह अनुचित था, तो कर्मचारी को पूर्ण वेतन तथा भत्तों का भुगतान किया जाएगा।

20.7 और अगर विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था की यह राय हो कि मूल निलंबन पूरी तरह अनुचित नहीं था, तो वैसी स्थिति में वह निलंबन की अवधिया नौकरी की समाप्ति- घोषणा के कारण से बनी अनुपस्थिति की अवधि के लिए सम्बद्ध कर्मचारी को भुगतान किए जानेवाले वेतन और [भाग III- खण्ड 4]

भारत का राजपत्र असाधारण

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भत्तों का परिमाण निर्धारित करेगी । प्राधिकारी संस्था अपनी राय के बारे में सम्बद्ध कर्मचारी को सूचना देगी और सम्बद्ध कर्मचारी से उस पर मिलनेवाले उत्तर पर विचार करके मामले पर अन्तिम रुप से निर्णय लेगी ।

21. कर्मचारी को यह अधिकार होगा की वह किसी प्रकार के दण्ड या निलंबन के आदेश के विरुद्ध सही एपेलेट प्राधिकारी के समक्ष ऐसे आदेश की प्राप्तिके 45 ( पैंतालीस ) दिन के भीतर अपील करे ।

22. प्रस्तुत संविधि में किसी बात के होते हुए भी, अनुशासनात्मक तथा अपील के सारे मामलों का निपटारा भारतीय संविधान के अधीन किए गए किसी भी उपबंध का उल्लंघन किए बिना केन्द्रीय सरकार के एफ. आर. एवं एस. आर. के साथ समरुपता बनाए रखते हुए किया जाएगा ।

23.स्थायीकरण:

किसी भी स्थायी पद पर नियुक्त या निप्रोन्नित अधिकारियों सहित सारे कर्मचारी नौकरी से जुड़ने की तिथि से 12 ( बारह ) महीने की अवधि तक, जिसे 24 ( चौबीस ) महीने तक भी बढ़ाया जा सकता है , परिवीक्षण में रहेंगे ।

23.1 यदिप्राधिकारी संस्थासम्बद्ध कर्मचारी के सामग्रिक कार्य- कलाप पर विचार करते हुए उसकी उपयुक्तता एवं योग्यता से सन्तुष्ट होती है, तो नियुक्तिदिए गए पद पर सम्बद्ध कर्मचारी का स्थायीकरण किया जाएगा ।

23.2 और यदि 12 महीने की समाप्ति पर प्राधिकारी संस्था कर्मचारी का स्थायीकरण न करने का निर्णय लेगी , तो सम्बद्ध कर्मचारी को लिखित रुप में सूचित किया जाएगा कि उसकी परिवीक्षा की अवधि 24 महीने तक बढ़ायी जाएगी ।

23 3 यदि 24 महीने की परिवीक्षा के अन्त में कर्मचारी की उपयुक्तता तथा योग्यता पर विचार करते हुए प्राधिकारी संस्था सम्बद्ध कर्मचारी के स्थायीकरण के विरुद्ध निर्णय लेती है , तो प्राधिकारी संस्था कर्मचारी को यह सूचना देगी कि पद्म पर उसका स्थायीकरण नहीं किया जाएगा । ऐसीस्थिति में वह कर्मचारी विश्वविद्यालय की सेवा से विरत माना जाएगा और विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था परिवीक्षण अवधि के 24 महीने की समाप्ति से पहले ही तदनुरुप कर्मचारी को लिखित सूचना देगी ।

23.4 कर्मचारी की उपयुक्तता एवं योग्यता या अन्य किसी बात का लेखा- जोखा लेने के उद्देश्य से प्राधिकारी संस्था 'ख' , 'ग' , 'घ' वर्गों के कर्मचारियों केमामले में सम्बद्ध विभाग प्रमुख/अधिकारी/नियन्त्रण अधिकारी से विहित प्र -पत्र पर कर्मचारी के कार्य के बारे में गोपनीय प्रतिवेदन प्राप्त करेगी । दूसरे अधिकारी के मामले में, विश्वविद्यालय के कुलसचिव विहित प्ररुपों गोपनीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे । कुलपति के अनुमोदन पर कुलसचिव प्रतिवेदन के प्ररुप को विहित करेंगे ।

23.5 अध्यादेश में किए गए विधान के अनुसार विश्वविद्यालय के सम्बद्ध नियुक्ति प्राधिकारी स्वयं ही गोपनीय प्रतिवेदनों पर विचार करेंगे । तथा स्थायीकरण के पक्ष या विपक्ष में निर्णय लेंगे अथवा ऐसे प्राधिकारी द्वितीय अनुसूची के खण्ड-24 के तहत उपयुक्त सदस्यों से एक स्थायीकरण समिति गठित करेंगे, जिसका कार्य होगा मामलों का परीक्षण करके सिफारिक्षों या अन्यथा, अपनी राय प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना

सम्बद्ध नियुक्ति-प्राधिकारी स्थायीकरण समिति की सिफारिशों के आधार पर स्थायीकरण के मामलों पर निर्णय लेंगे । 23.6 पूर्वोक्त उपबंध- 24.5 में किसी बात के होते हुए भी , स्थायीकरण के मामलों पर अनुकूल या प्रतिकूल निर्णय लेने के पूरी जिम्मेदारी नियुक्ति प्राधिकारियों पर होगी ।

24. सेवा-निवृति:

सांविधिक अदिकारियों एवं अनुबंध की सेवा के व्यक्ति/व्यक्तियों से भिन्न सारे कर्मचारी 60 वर्ष की आयु की पूर्ति पर सेवा- निवृत्ति होंगे ।

24.1 परन्तु, अगर किसी कर्मचारी की सेवा निवृत्ति की तारीख किसी महीने के भीतर किसी भी दिन को पड़ती हो, तो उसे सम्बद्ध महीने की अन्तिम तिथि के अपराह्न समय सेवा निवृत्ति लेने की अनुमति दी जाएगी ।

25 . विश्वविद्यालय का कोई भी कर्मचारी 55 बर्ष की आयु की प्राप्ति तथा 20 वर्ष की सेवा की पूर्ति होने पर कुलसचिव को न्यूनतम 3 ( तीन ) महीने की सूचना देकर नौकरी से अवकाश ग्रहण कर सकेगा । हालाँकि विश्वविद्यालय के प्राधिकारी कोइस बात का मुक्त अधिकार होगा कि वे विश्वविद्यालय के स्वार्थ में अवकाश चाहनेवाले ऐसे कर्मचारी का अनुमोदन रोक कर रखे या तीन महीने की सूचना की शर्त को हटा दें ।

25.1 विश्वविद्यालय की प्राधिकारी संस्था को यह अधिकार होगा कि सार्वजनिक स्वार्थ में किसी कर्मचारी को 30 वर्ष की गुणयुक्त सेवा की पूर्ति पर 3 ( तीन ) महीने की सूचना अथवा उसके स्थान पर तीन महीने के वेतन का भुगतान करके नौकरी से अवकाश प्रदान करें ।

26. सेवा-समाप्ति:

विश्वविद्यालय के अस्थायी कर्मचारी की सेवा/नौकरी दोनों और से किसी भी समय एक महीने की सूचना अथवा उसके स्थान पर एक महीने का वेतन -चुकाकर समाप्त की जा सकेगी । सेवा- समाप्ति की सूचना नियुक्ति प्राधिकारी से सम्बद्ध कर्मचारी को अर्थवा सम्बद्ध कर्मचारी की और सेनियुक्तिप्राधिकारी को दी जा सकेगी ।

26.1 विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी को सेव -निवृत्ति की सूचना देने के सन्दर्भ में नियुक्त प्राधिकारी द्वारा निम्नांकित प्रक्रिया का चुपालन किया जाएगाः क) सम्बद्ध कर्मचारी को व्यक्तिशः सूचना दी जाएगा ।

ख ) व्यक्तिशः सूचना देना अगर व्यावहारिक न हो, तो विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध पते पर पावती सहित रजिष्ट्री डाक द्वारा सम्वद्ध कर्मचारी को सूचना भेजी जाएगी ।

38

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III- SEC: 4]

ग ) अगर रजिष्ट्री डाक से भेजी गयी सूचना सम्बद्ध कर्मचारी को बिना वितरित किए वापस आती हो , तो उसे अखबार में छापवाया जाएगा ।

घ) सेवा- समाप्ति- सूचना में समाप्ति के कारण का उल्लेख करना आवश्यक न होगा ।

27. विश्वविद्यालय के किसी अस्थायी सेवक ( पीउन ) की नौकरी उसके निलंबन या विभागीय कार्यवाही के रुके पड़े होने की स्थिति में समाप्त घोषित की जा सकेगी ।

28. सेवा- समाप्ति की घोषणा तथा त्यागपत्र दिये जाने की स्थितियों में छुट्टी के रकम भुगतान आदि का निर्णय समय - समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाने के अनुसार ही किया जाएगा । 1

29. इस संविधि द्वारा समेटे न जानेवाले मामलों पर कुलपति/प्रबन्धन बोर्ड द्वारा भारत सरकार के एफ. आर. एवं एस. आर. में सम्मिलित उपबंधो के अनुसार निर्णय लिए जाएंगे ।

संविधि संख्या -48

प्रबंधन समिति के संकल्प सं. बी- 96-2-4.4 ( 6 ) दिनांक 27.6.96 और बी/ 96/ 4 / 2-10 दिनांक 28-12-96 द्वारा गृहित और

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-23/ 96 डेस्क(यू)

सं.- iii दिनांक 21.5.97 एवं एफ. 14-23-96 डेस्क ( यू) दिनांक 20-4-2000 के आगन्तुक द्वारा अनुमोदितः

संघ लोकसेवा आयोग के दिशा-निर्देशन के अनुरुप बिल्डिंग समिति के बारे में प्रारुपित संविधि।

1. निम्नांकित सदस्योंसे एक बिल्डिंग समिति गठन की जाएगी:

क) तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति अथवा अध्यक्ष उनके द्वारा मनोनीत एक व्यक्ति जो आचार्य की पद- मर्यादा से नीचे के न हों ।

ख) असम लोक- निर्माण विभाग का एक प्रतिनिधि-सदस्य जो कार्यवाही अभियन्ता की पद- मर्यादा से नीचे का न हो ।

गः) तेजपुर विश्वविद्यालय के प्रबन्धन बोर्ड का सदस्य एक सदस्य ।

घ) तेजपुर विश्वविद्यालय की योजना एवं विद्या सदस्य समिति का एक सदस्य ।

ङ) तेजपुर विश्वविद्यालय के प्रबन्धन बोर्ड द्वारा सदस्य मनोनीत 2 विशेषज्ञ ।

च ) तेजपुर विश्वविद्यालय का वित्त अधिकारी सदस्य

छ ) विश्वविद्यालय अभियन्ता, तेजपुर विश्वविद्यालय - सदस्य

जं) विश्वविद्यालय का शिल्पकार ( आर कि टेक्ट ) सदस्य अथवा सरकारी शिल्पकार

झ ) कुलसचिव, तेजपुर विश्वविद्यालय सदस्य सचिव

2. बैठक के लिए पाँच सदस्य कार्टवाहक संख्या वनाएँगे । परन्तु किसी निर्माण प्रकल्प की योजना एवं उसके मूल्य निर्धारण का अनुमोदन ऐसी बैठक मेंहोनी होगी-जिसमें पी डब्लू डी- सी पी डब्लू डी का प्रतिनिधि जरुर उपस्थिति हो ।

3 ब्रिल्डिंग समिति के कार्य :

3.1 बिल्डिंग समितियोजना एवं मूल्य निर्धारण को अन्तिम रुप देने, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अनुमोदित विभिन्न निर्माण प्रकल्पों- योजनाओं की निविदाओं तथा गृहीत नक्शों- योजनाओं एवं मूल्य निर्धारण के अनुरुप प्रकल्पों की समाप्ति और विविध एसेन्सियों एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुदानों के समूचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी ।

3.2 बिल्डिंग समिति यह देखेगी कि विश्वविद्यालय अनुदान के दिशा निर्देशों के अनुरुप निर्माण प्रकल्पों- योजनाओं को लिया गया है ।

3.3. बिल्डिंग समिति तेजपुर विश्वविद्यालय के प्रबन्धन बोर्ड द्वारा उस पर सौपें जानेवाले ऐसे अन्य कार्यों का सम्पादन करेगी ।

संविधि-49

प्रबंधन समिति के संकल्प सं. बी-96/ 2/ 4.4 (7) दिनांक 27.6.96द्वारा गृहित एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-7/ 96 डेस्क (यू) दिनांक 04.11.96 के आगन्तुक द्वारा अनुमोवित

1. निम्नलिखित सदस्योंसे प्रबन्धन बोर्ड का गठन होगा:

अध्यक्ष

क) कुलप्ति,

सदस्य

ख) सह कुलपति,

सदस्य

ग ) एक संकायाध्यक्ष, जो बारी - बारी से तथा वरिष्ठता के आधार पर कुलपति द्वारा मनोनीत होंगे ,

सदस्य

घ) एक आचार्य, जो किसी संक्या के अध्यक्ष नहीं होंगे तथा जो बार - बारी से एव वरिष्ठता के आधार पर कुलपति द्वारा मनोनीतहोंगे, 39

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

सदस्य ङ) एक प्रवाचक , जो बारी - बारी से वरिष्ठता के आधार पर कुलपति द्वारा मनोनीत होंगे,

सदस्य च ) एक व्याख्याता , जो बारी - बारी से वरिष्ठता के आधार पर कुलपति द्वारा मनोनीत होंगे ,

सदस्य छ) एक भद्रमहिला, जिन्हें शैक्षिक एवं सार्वजनिक जीवन में श्रेष्ठता हो और जो कुलपति द्वारा भनोनीत होंगी,

सदस्य ज) 4 (चार ) व्यक्ति, जिन्हें शैक्षिक एवं सार्वजनिक जीवन में श्रेष्ठता प्राप्त हो और जो कुलाध्यक्ष द्वारा मनोनीत होंगे ।

बैठक के लिए बोर्ड के पाँच सदस्य कार्यवाहक संख्या बनाएँगे ।

2. तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति और सहकुलपति को छोड़कर प्रबन्धन बोर्ड के शेष सदस्य तीन वर्ष के लिये गवीं पर बने रहेंगे ।

3. कुलपति की अनुपस्थिति में सहकुलपति बैठक की अध्यक्षता करेंगे ।

4. कुलसचिव प्रबन्धन बोर्ड के पदेन सचिव होंगे ।

5. प्रबन्धन बोर्ड की बैठकें जब कभी आवश्यक हों, पर वर्ष में न्यूनतम चार बार, अनुष्ठित होंगी ।

6. कुलसचिव्र, कुलपति के अनुमोदन पर बैठक की निर्धारित तिथि से कम के कम 21 ( इक्कीस ) दिन पूर्व कार्यसूची भहित बैठक की तिथि की सूचना देंगे ।

7. किसी स्थगित बैठक की सूचना बैठक की निर्धारित तिथि से कम से कम 10 (दस ) दिन पूर्व दी जाएगी ।

8. स्थगित बैठक के लिये कार्यवाहक संख्या की आवश्यकता नहीं होगी ।

9. प्रबन्धन बोर्ड की बैठक की कार्यवाही का विवरण अगली बैठक से न्यूनतन एक महीना पूर्व इसके सदस्यों के बीच विपरित किया जाएगा ।

संविधि संख्या-50

(तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम 1993 के अधीन भाग 21 (2), 26 ( क) और 27( 2 ) के तहत शैक्षणिक परिषद का गठन और इसके सदस्यों की कार्य एवं क्षमताएँ )

( प्रबंधन समिति के संकल्प सं.बी 44/2005/2/3.11 दि. 17/06/2005 द्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-3/2006- डेस्क (यू) दि. 03-02-2006 द्वारा अनुमोदित)

1.0 शैक्षणिक परिषदं का गठन

निम्रलिखित सदस्यों से शैक्षणिक परिषद का गठन किया जाएगा-

(1 ) कुलपति शैक्षणिक परिषद के पदेन सभापति होंगे ( संविधि 3 ( 1 ) के अधीन ) ।

(ii ) सह- कुलपति ।

(iii ) विद्यालयों के सभी संकायाध्यक्ष और छात्र कल्याण के संकायाध्यक्ष ।

( iv ) वरीयता के आधार पर कुलपति द्वारा नामित दो प्रोफेसर ( परिवर्तनीय रूप से) ।

(v) विभागों /केन्द्रों के सभी विभागाध्यक्ष ।

( vi ) वरीयता के आधार पर कुलपति द्वारा नामित दो रीडर ( परिवर्तनीय रूप से) ।

(vii ) वरीयता के आधार पर कुलपति द्वारा नामित दो व्याख्याता (परिवर्तनीय रूप से) ।

( viii ) प्रबंधन समिति द्वारा नामित तीन विशिष्ट शिक्षाविद ।

( ix) प्रत्येक से एक प्रतिनिधि-

(अ) मानव संसाधन विकास मंत्रालय , भारत सरकार ।

(ब) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ।

(स) पूर्वोत्तर परिषद ।

(द) असम के राज्य सरकार ( शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ) ।

(x) परीक्षाओं के नियंत्रक और पुस्तकालयाध्यक्ष ।

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] 40

(xi) पंजीयक पदेन सचिव होंगे ( संविधि (6) के तहत ) ।

2.0 सदस्यों के कार्यकाल

पदेन सदस्यों के अलावे शैक्षणिक परिषद के सभी सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा ।

3.0 शैक्षणिक परिषद की कार्य एवं क्षमताएँ

शैक्षणिक परिषद विश्वविद्यालय की मूल शैक्षणिक निकाय है ( संविधि 21 ( 1 ) के अधिनियम के तहत ) तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम 1993 जो कि विश्वविद्यालय का पहला संविधि और अध्यादेश के अधीन पहले प्रदत्त कार्यों के अलावा अन्य कुछ कार्य एवं क्षमताएँ सौंपी गई हैं , जैसे-

(i ) विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित विषयों के लिए प्रबंधन समिति को सलाह देना; जैसे प्रवेश और भती की नीतियों का गठन करना

और

( ii ) संविधि 15 के तहत प्रदत्त क्षमताएँ निम्नलिखित रूप में पुनःप्रस्तुत

(अ) विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नीतियों का साधारण पर्यवेक्षण करना और व्याख्यान के पद्धति , महाविद्यालयों और संस्थानों में सहकारी शिक्षण , शोध का मूल्यांकन तथा शैक्षणिक मानदंड की उन्नति के संबंध में मार्ग दर्शन करना ।

(ब) आंतः विद्यालय संयोजन का विकास करना, समितियों और परिषद की स्थापना एवं नियुक्ति, आंतः विद्यालय के आधार पर परियोजनाओं की शुरूआत ।

(स) विद्यालय अथवा प्रबंधन समिति के संदर्भ में अथवा अपनी शुरूआत में साधारण शैक्षणिक रूचि के विषयों पर विचार करना और इन पर उचित कार्रवाई करना ।

(द) संविधि और अध्यादेश के मुताबिक विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्य प्रणाली, विभिन्न विषय, आवासों, नामांकन, वृति और छात्रवृत्ति, शुल्क, छुट, सामग्रिक जीवन और उपस्थिति के विषय में नियम एवं विनियम का गठन,

4.0 बैठकों की संख्या

शैक्षणिक समिति इच्छानुसार मध्यांतरो में बैठक कर सकता है , लेकिन एक वर्ष में कम से कम दो बैतक करना जरूरी होगा ।

5.0 शैक्षणिक परिषद की बैठकों के लिए गणपूर्ति

शैक्षणिक परिषद की बैठक के लिए नौ सदस्य गणपूर्ति कर सकेंगे ( संविधि 14 के तहत ) ।

6.0 बैठक की नियमावली

(i) कुलपति के अनुमोदन से पंजीयक बैठक की तिथि से 21 दिन पहले कार्यसूची सहित बैतक की तिथि घोषित करेंगे , लेकिन आपातकालीन स्थिति में तीन दिन के सूचना से ही सभा का आह्वान किया जा सकेगा ।

( ii ) स्थगित बैठक के आह्वान के लिए सात दिन पहले सूचित करना होगा ।

(iii ) सभा की तिथि के तीन सप्ताह के अन्दर सभा की लघुकार्यवाही का वितरण करना होगा ।

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भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4]

संविधि संख्या-51

(तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम 1993 के अधीन भाग 22(2) , 26(क) और 27(2 ) के तहत योजना परिषद का गठन और इसके सदस्योंकी कार्य एवं क्षमताएँ)

(प्रबंधन समिति के संकल्प सं.बी 44/2005/2/3.11 दि. 17/06/2005 द्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-3/2006- डेस्क (यू) दि. 03-02-2006 द्वारा अनुमोदित)

1.0 योजना परिषद का गठन

निम्नलिखित सदस्यों से योजना परिषद का गठन किया जाएगा-

(1 ) कुलपति योजना परिषद के पदेन सभापति होंगे ( संविधि 3 ( 1 ) के अधीन ) ।

(ii ) विद्यालयों के सभी संकायाध्यक्ष और छात्र कल्याण के संकायाध्यक्ष ।

( iii ) शैक्षणिक परिषद द्वारा नामित छः शिक्षक जहाँ प्रत्येक वर्ग से कम से कम एक का होना निवार्य है ।

(iv) प्रत्येक से एक प्रतिनिधि-

(अ) भानव संसाधन विकास मंत्रालय , भारत सरकार ।

(ब) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग।

(स) पूर्वोत्तर परिषद ।

(द) असम के राज्य सरकार ( शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ) ।

(v ) प्रबंधन समिति द्वारा नामित शिक्षा एवं उद्योग के क्षेत्र से विशेष दो व्यक्ति।

परीक्षाओं के नियंत्रक, वित्त अधिकारी और पुस्तकालयाध्यक्ष स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे ।

पंजीयक योजना बोर्ड के पदेन सचिव होंगे (संविधि 6 के अधीन ) ।

2.0 सदस्यों के कार्यकाल

पदेन सदस्यों के अलावे योजना परिषद के सभी सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा ।

3.0 योजना परिषद की कार्य एवं क्षमताएँ

(i ) योजना परिषद विश्वविद्यालय की मूल योजना निकाय है ( संविधि 21 ( 1 ) के अधिनियम के तहत) ।

(ii ) संविधि 16( 1 ) (अ) (ब) ( स) (द), (2 ) (3) (4 ) (5 ) के तहत योजना परिषद के क्षमता और कार्यों को नीचे पुनः प्रस्तुत किया गया है-

(अ) विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त शैक्षणिक कार्यक्रमों की समीक्षा ।

(ब) विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढाँचा को इस प्रकार संगठित करना ताकि विभिन्न विषयों, के विद्यार्थियों को समाज के लिए काम आनेवाले ढंग से अपनी क्षमता एवं व्यक्तित्व के विकास के लिए अवसर दिया जा सके ।

(स) मूल्यबोध आधारित शिक्षा के लिए उपयोगी वाताबरण की सृष्टि करना ।

(द) नयी शिक्षण , अध्ययन बिधि का विकास करना, जिसमें व्याख्यान, ट्युटोरियल कक्षाएँ, संगोष्ठी , प्रदर्शन , स्वाध्याय , सामूहिक व्यावहारिक परियोजना ।

(2) योजना परिषद की, विश्वविद्यालय के विकास के लिए तथा कार्यान्वयन की प्रगति के संबंध में सलाह देने की क्षमता होगी और इसके साथ - साथ सभी कार्यक्रम इसके सिफारिश के आधार पर चलने की स्थिति तथा इस विषय में प्रबंधन समिति और शैक्षणिक परिषद को सलाह देने की क्षमता होगी ।

(3) योजना परिषद के सिफारिशों को मानने के लिए तथा ग्रहण किए गये सिफारिशों के कार्यान्त्रयन के लिए शैक्षणिक परिषद और प्रबंधन बोर्ड बाध्य है ।

4470 G1/08--6 42

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[PART III-SEC . 4]

(4) उपबंध (3 ) के अधीन प्रबंधन समिति और शैक्षणिक परिषद द्वारा योजना परिषद के अग्राह्य सिफारिशों को कुलपति प्रबंधन समिति अथवा शैक्षणिक परिषद के सिफारिशों के साथ परामर्श हेतु आगन्तुक को पेश करेंगे और आगन्तुक के परामर्शानुसार प्रबंधन समिति और शैक्षणिक परिषद द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा ।

(5) योजना परिषद विश्वविद्यालय के योजना और कार्यक्रमों की देख- रेख के लिए आवश्यक समितियों का गठन करेगा ।

4.0 बैठकों की संख्या

योजना परिषद इच्छानुसार मध्यांतर में बैठक कर सकता है , लेकिन एक वर्ष में कम से कम दो बैठक करना जरूरी होगा।

5.0 योजना बोर्ड की बैठकों के लिए गणपूर्ति

सात सदस्य योजना बोर्ड की बैठक के लिए गणपूर्ति कर सकेंगे ।

6.0 बैठक की नियमावली

( i ) कुलपति के अनुमोदन से पंजीयक बैठक की तिथि से 21 दिन पहले कार्यसूची सहित बैठक की तिथि घोषित कर सकेंगे ।

( ii ) स्थगित बैठक के आह्वान के लिए सात दिन पहले सूचित करना होगा । स्थगित बैठक के लिए गणपूर्ति की आवश्यकता नहीं होगी।

( iii ) सभा की तिथि के तीन सप्ताह के भीतर सभा की लघुकार्यवाही का वितरण करना होगा ।

अध्यादेश संख्या-1

द्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24-96 डेस्क ( यू) दिनांक 30.10.96 दुबारा अनुमोदित

विश्वविद्यालय में वर्तमान समय के लिए निम्नलिखित संकाय होंगे :

क) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय ।

ख) शक्ति, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संपदा संकाय ।

ग) मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय ।

घ) व्ववसाय संचालन विज्ञान संकाय ।

2. प्रत्येक संकाय में उससे सम्बद्ध निम्नलिखित विभाग होंगे :

क) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधीनस्थविभाग:

1) भौतिकी विभाग

12) रसायन विज्ञान विभाग

3) गणित विज्ञान विभाग

4) कंप्यूटर विज्ञान विभाग

5) इलैक्ट्रोनिकीविभाग

6) सूचना विज्ञान एवं प्रौद्यागिकी विभाग

7) पारमाणविक जीव विज्ञान एवं जीव-प्रौद्योगिकी विभाग ।

ख) शक्ति, पर्यावरण एवं प्राकृतिक सम्पदा संकाय के अधीनस्थ विभाग:

1) शक्तिविभाग

2 ) पर्यावरण अध्ययन विभाग

3) भूविज्ञानविभाग

:ग ) मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधीनस्थविभाग:

1 ) अंग्रेजी एवं विदेशी भाषाओं का विभाग

2) पारम्परिक संस्कृति एवं कला- रुपों का विभाग [ भाग III- खण्ड 4]

भारत का राजपत्र असाधारण

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3) जन- संचार एवं पत्रकारिता विभाग

4) सामाजिक विज्ञान विभाग

5) आधुनिक विज्ञान विभाग

घ) व्यवसाय संचालन विज्ञान संकाय के अधीनस्थ विभाग:

1) व्यवसाय संचालन विभाग

2) बैंकिंग एवं वित्तीय प्रबन्धन विभाग

3 ) वाणिज्यविभाग

4) व्यवसायिक अर्थविज्ञान विभाग

3. द्वितीय अनुसूची की संविधि संख्या-7 ( 1 ) के तहत विहित व्यवस्था के अनुसार किसी संकाय के अध्यान ही उस संकाय के प्रमुख होंगे ।

4. तेजपुरविश्वविद्यालय के शैक्षिक कुलसचिव उप कुलसचिव सह कुलसचिव (शैक्षिक ) संकाय बोर्ड के सचिव के रुप में कार्य करेंगे और वे संकाय के अध्यक्ष को बैठकों के आयोजन तथा सतत लेख-अभिलेखों के रख - रखाव के साथ ही बोर्ड के निर्णयों के क्रियान्वयन में सहयोग देंगे ।

5. संकाय बोर्ड:

विश्वविद्यालय के पवित्र लक्ष्यों को वास्तव -रुप देना संकाय बोडौँ का दायित्व होगा । संकाय बोर्ड, योजना एवं बिद्या समिति या विद्या परिषद को अध्ययन के ऐसे विषय तथा शोध कार्यक्रमों के बारे में सुझाव देंगे जो विशेष रुप से उत्तर-पूर्वांचल के एवं सामान्य रुप से असम प्राप्त के विकास के सन्दर्भ में संकारात्मक भूमिका निभाएँ, साथ ही, इस प्रान्त की सांस्कृतिक विरासत तथा विविधता मयी जातीय , भाषिक एवं आदिवासी संस्कृति के क्षेत्र में अध्ययन एवं शोध के जरिए राष्ट्रीय समन्वय को बढ़ावा दें । इस इंचल भी आवन्यूकता के सन्दर्भ में प्रासंगिक वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय शिक्षा एवं शोध, दूरस्थ शिक्षण पद्धतियाँ, आधुनिक संचार प्रौद्योगिकी इत्यादि पर उनित बल देना होगा-ताकि अशिक्षित आबादी के एक बड़े भाग तक पहुँचा जा सके ।

5.3 संकाय के सम्बद्ध विभागों एवं केन्दों के शिक्षण तथा शोध कार्यक्रमों में बोर्ड पारस्मरिक संबंध स्थापित करेगा ।

5.4 संकाय बोर्ड इसके अधीनस्थविभागों के लिए शैक्षिक पदों की सृष्टि एवं उनकी विलुप्ति के प्रस्तावों पर विचारकरके यो जना एवं विद्या समिति कोसिफारिश भेजेगा ।

5.5 संकाय बोर्ड पाठ्य समिति के प्रस्तावों के आधार पर परीक्षकों सन्तुलकों के नामों की सिफारिश योजना एवं विथा समिति को भेजेगा ।

5.6 संकाय बोर्ड शोध-डिग्रियों के लिए परीक्षकों के नामों की सिपारिश करेगा ।

5.7 बोर्ड अपने अधीनस्थविद्यार्थियों के सतत मूल्यांकन के लिए सामान्य नियमों का प्रणयन करेगा ।

5.8 बोर्ड अन्तर्विभागीय शोध को बढ़ावा देगा और ऐसे शिक्षण तथा शोध के आयोजन के लिए समिति नियुक्त कर सकेगा ।

5.9 बोर्ड अधिनियम, संविधियों या अध्यादेशों के तहत विहित तथा समय - समय पर योजना एवं विद्या समिति अथवा विद्या परिषद अथवा प्रबन्धन बोर्ड अथवा कुलपति के द्वारा निर्देशित ऐसे अन्य समस्त कार्यों का निष्पादन करेगा ।

5.10संकाय बोर्डों कीबैठक:

6.1 संकाय बोर्डों को बैठकें सम्बद्ध संकायाध्यक्षों के द्वारा 2 ( दो) महने के अन्तराल अपने अधीनस्थविभागों के कार्य तथा शिक्षण एवं शोध की प्रगति पर पुनर्विचार करने हेतु बुलायी जाएँगी ।

6.2 बोर्ड की बैठक की सूचना निर्धारित तिथि के न्यूनतम 10 ( दस ) दिन पूर्व दी जाएगी ।

6.3 बोर्ड की विशेष बैठक सम्बद्ध संकायाध्यक्ष द्वारा अपनी और से अथवा कुलपति के परामर्श से न्यूनतम 24 ( चौबीस ) घंटे की पूर्व सूचना पर बुलायी जा सकेगी ।

संशोधनः केन्द्र सरकार के पत्र सं. एफ. 14-6/ 2005 डेस्क ( यू) दिनांक 25-7-06 द्वारा अनुमोदित ।

उपबंध 1.0

योगः डी के बाद ई योग करके अध्ययन का नया विद्यालय आभियांत्रिकी विद्यालय का संयोग किया गया है ।

उपबंध - 2.0

अ-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विद्यालय के अंतर्गत विभाग समूह

क्र.सं .4 संगणक विज्ञान विभाग को पुनर्नामांकित करके आभियांत्रिकी विद्यालय के अंतर्गत स्थानांतरित किया गया है ।

क्र.सं.5 इलेक्ट्रानिक्स विभाग को पुनर्नामांकित करके आभियांत्रिकी विद्यालय के अंतर्गत स्थानांतरित किया गया है ।

44

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4] क्र.सं .6 सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हटाकर संगणक विज्ञान एवं आभियांत्रिकी विभाग में समाहित किया गया है ।

क्र.सं .4 आणविक जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के रूप में पाठ किया जाएगा ।

क्र.सं .5 खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी विभाग के रूप में पाठ किया जाएगा ।

इ. आभियांत्रिकी विद्यालय के अंतर्गत विभाग समूह

1. संगणक विज्ञान एवं आभियांत्रिकी विभाग

2. इलेक्ट्रानिक्स एवं संचार आभियांत्रिकी विभाग

3. यांत्रिक आभियांत्रिकी विभाग

4. योजना एवं स्थापत्य कला विभाग

5. असामरिक आभियांत्रिकी विभाग

6. रसायन आभियांत्रिकी विभाग

7. विद्युत आभियांत्रिकी विभाग

8. जैव चिकित्सा आभियांत्रिकी विभाग

9. कृषि आभियांत्रिकी विभाग

10. पर्यावरण आभियांत्रिकी विभाग

11. मोटरगाडी आभियांत्रिकी विभाग

उपबंध 4.0

तेजपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक/ शैक्षणिक पंजीयक/ उप पंजीयक/ सह पंजीयक (शैक्षणिक ) विद्यालय परिषद के सचिव के रूप में कार्यरत होंगे और बैठक के संचालन करने तथा परिषद के लगातार अभिलेखों का देखरेख करने के साथ- साथ इसके सिद्धांतों को अमल में लाने के कार्य में विद्यालयों के संकायाध्यक्ष को सहयोग प्रदान करेंगे ।

5.0 संशोधित

5.1 . (स) परीक्षा नियंत्रक/शैक्षणिक पंजीयक/ उप पंजीयक/ सह पंजीयक ( शैक्षणिक) पदेन सचिव ।

5.2. विश्वविद्यालय के अंतर्निहित उद्देश्यों को वास्तविक रूप में परिणत करने का उत्तरदायित्व विद्याला परिषद को है । शैक्षणिक परिषद की विद्यालय परिषद अध्ययन तथा शोध के ऐसे कार्यक्रम एवं पाठ्यक्रमों का सिफारिश करेगा, ताकि विशेषतः पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा साधारणतः असम के विकास में ये एक सकारात्मक भूमिका अदा कर सके, साथ ही साथ सांस्कृतिक अस्मिता , राज्य के विभिन्न जातीय-जनजातीय एवं भाषिक संस्कृति के क्षेत्र में अध्ययन तथा शोध के जरिए राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करके व्यापक रूप से अशिक्षित जनता के निकट पहुँचाने तथा इस क्षेत्र के प्रयोजन से संहति रखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा तथा गवेषणा , दूर शिक्षा प्रविधि , आधुनिक संचार प्रविधि आदि को आवश्यकतानुसार महत्व दे सके ।

5.5 . अध्ययन परिषद के प्रस्ताव के अनुसार बोर्ड शैक्षणिक परिषद को परीक्षक/ परीक्षा नियंत्रक के नामों का सिफारिश करेगा ।

45

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

अध्यादेश संख्या-2

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्तावसंख्या बो. -96/ 2/ 4.4 ( 2 ) के इद्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र संख्या एफ. 14-24/ 96-डेस्क (यू) दिनांक 30.10.96 इद्वारा अनुमोदित)

द्वितीय अनुसूची की संविधि संख्या-17 ( 1,2,3,4 एवं 5 (क) के अन्तर्गत अध्ययन-संकायों एवं संकाध-बोर्डों की स्थापना के बारे में ) । (अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में सन्निविष्ट संविधि-7(3 ) और 7(4) के तहत संकायाध्यक्षों की क्षमताओं एवं उनके कार्यों के बारे में) ।

संकायाध्यक्ष की क्षमताएँ एवं उनके कार्य निम्नप्रकार से होंगे:

1. संकाय बोर्ड की बैठक बुलाना और आयोजित करना ।

2. संकाय के अधीनस्थविभागों -केन्द्रों के प्रमुखों के जरिए साधारण रुप से शिक्षण एवं शोध का निरीक्षण करना तथा उनमें समन्वय स्थापित करना ।

3. जहाँआवश्यक हो, परिवर्तित तथा अन्तर्विभागीय शिक्षण एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाना ।

4. विभागों-केन्दों के प्रमुखों के जरिए संकाय में अनुशासन बनाए रखना ।

5. संकाय बोर्ड अथवा योजना एवं विद्या समिति द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरुप अपने संकाय के विद्यार्थियों के सन्दर्भ में विश्वविद्यालय की परीक्षा

के आयोजन में विश्वविद्यालय के साथ सहयोग करना ।

6. संकाय बोर्ड के निर्णयों एवं सिफारिशों के क्रियान्वयन की दिशा में कदम उठाना ।

7. प्रबन्धन बोर्ड , योजना एवं विद्या समिति अथवा कुलपति द्वारा सौपे जानेवाले ऐसे अन्य कायित्व का पालन करना ।

अध्यादेश संख्या-3

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्तावसंख्या बी. -96/ 2 / 4.4 (3) के दूद्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र संख्या एफ. 14-24/96-डेस्क ( यू) दिनांक 30.10.96 द्वारा अनुमोदित) (अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में सन्निविष्ट संविधि-7 (3 ) और 7(4) के तहत संकायाध्यक्षों की क्षमताओं एवं उनके कार्यों के बारे में अध्यदेश ) ।

1. विभागके प्रमुख पाठ्य समिति-विभाग की बैठक बुलाएँगे और उनकी अध्यक्षता करेंगे तथा सम्बद्ध संकायध्यक्ष द्वारा की जानेवाली सामान्य व्यवस्थाओं के तहत कार्य-निर्वाह करेंगे ।

संकाय बोर्ड और पाठ्य- समिति के निर्णयों को क्रियान्वित करेंगे । 2.

3. विभागीय पुस्तकालय के प्रभारी होंगे ।

4. विभाग के शिक्षण एवं शोध कार्यक्रम का आयोजन करेंगे ।

5. विभाग की सारी परीक्षाओं का संचालन एवं निरीक्षण करेंगे ।

6. विभाग के द्वारा आवंटित अध्यापन कार्य के अनुरुप समय -सारणी प्रस्तुत करेंगे ।

7 . प्राध्यापकोंके जरिए श्रेणी-कक्षों एवं प्रयोगशालाओं में अनुशासन बनाए रखेंगे ।

8. विभाग के सुचारु संचालन के लिए जरुरी दायित्व प्राध्यापकों को सौंपेंगे ।

9. विभाग के गैर शिक्षण कर्मचारियों पर नियन्त्रण रखने के दायित्व का अर्पण करेंगे ।

10. विहित व्यवस्था के अनुसार वर्गीय परीक्षाओं में किए जानेवाले सतत आन्तरिक मूल्यांकन , अनुपस्थिति इत्यादि के अभिलेख तैयार करेंगे, तथा आवश्यक कार्यवाई हेतु परीक्षाओं के नियन्त्रक के पास समय पर मूल्यांकन के तथ्याभिलेख अग्रसारित करेंगे ।

11. संकायाध्यक्ष , पाठ्य समिति तथा कुलपति द्वारा सौंपे जानेवाले ऐसे अन्य दायित्वों का पालन करेंगे ।

[PART III-SEC. 4] 46

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

अध्यादेश संख्या-4

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्तावसंख्या बी./96/2/4.4 ( 4) के ड्वारा गृहित और। मानव संसाधन मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24-96 डेस्क ( यू) दिनांक 30.10.96द्वारा अनुमोषित) (अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में सन्निविष्ट संविधि-18 ( 2) के तहत पाठ्य समिति के विषय में ।।

1

1. गठन:

क) विभाग के प्रमुख अध्यक्ष एवं आह्वायक

ख ) विभाग के समस्त पूर्णकालीन प्राध्यपक - सदस्य

ग ) विभाग प्रमुख के साथ विचार विमर्श से कुलपति द्वारा मनोनीत 2 ( दो ) विशेषज्ञ सदस्य

अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित संविधि संख्या-7 ( 4 ) के तहत किए गए उपबन्ध के अनुसार संकायाध्यक्ष भी उपस्थिति रह सकेंगे । परन्तु, प्रथम 3 (तीन ) वर्ष की अवधि में स्नातकोत्तर पाठ्य समिति के कार्य विभाग के द्वारा सम्पादित किए जाएँगे ।

2. कार्यकाल:

। पाठ्य समिति के मनोनीत सदस्यों का कार्य काल 3 वर्ष का होगा ।

क्षमताएँ एवंकार्य: 3.

3.1 विभाग में शिक्षण एवं शोध कार्य-कार्यों में समन्वय स्थापित करना ।

3.2 अध्ययन के पाठ्यक्रम को प्रस्तुत करना तथा योजना एवं विद्या समिति के अनुमोदनार्थ विवेचन एवं सिफारिश करने हेतु संकाय बोर्ड के पास उसे भेजना ।

स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिये परीक्षकों की सूची तैयार करना और उसे संकाय बोर्ड के पास भेजना।

3.4 शैक्षिक एवं अध्यापन से सम्बद्ध पदों की सृष्टि तथा विलुप्ति के लिए संकाय बोर्ड के पास सिफारिश भेजना ।

3.5 अध्यापन एवं शोध के स्तर को ऊपर उठाने के लिए योजनाओं पर विचार करना तथा संकाय बोर्ड के पास ऐसे प्रस्ताव भेज देना ।

3.6 विभाग की समय - सारणी को तैयार तथा उसे विचार एवं अनुमोनार्थ कुलपति के पास भेजना ।

3.7 अधिनियम , अध्यादेशों , संविधियों तथा विनियमों द्वारा विहित किए जानेवाले ऐसे अन्य समस्त कार्यों का सम्पादन करना तथा प्रबन्धन बोर्ड, योजना एवं विद्या समिति, संकाय बोर्ड अथवा कुलपति द्वारा प्रेषित समस्त विषयों पर विचार करना ।

4. पाठ्य समिति की बैठक:

पाठ्य समिति की बैठकें शस्द्छःमासी के दौरान अगस्त एवं नवम्बर महीनों में और वसन्त छःमाभी के दौरान जनबरी एवं अप्रैल के महीनों में आयोजित की जाएँगी । जब कभी आवश्यक हो , विशेष बैठकें कुलपति के परामर्श पर बुलायी जा भकेंगी । पाठ्य समति की बैठकों के आयोजन की सूचना , कार्यवाहक संख्या की बनावट, बैठकों के संचालन के नियम तथा ऐसे अन्य विषय विनियमों के जरिए विहित किए जाएँगे ।

अध्यादेश संख्या-5

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्तावसंख्या बी. -96/ 2/ 4.4 (5) एवं दिनांक 28-12-96 की प्रस्तावसंख्या बी -96/ 4/ 2.10 के द्वारा गृहित एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24-96-डेस्क ( यू) दिनांक 12.01.98 द्वारा अमुमोदित)

अधिनियम के खण्ड 28 ( ज) तथा द्वितीय अनुसूची में सन्निविष्ट खण्ड-12( 2) ( 3 ) के तहत ( संविधियों के अन्तर्गत उपबंध किए जानेवाले पदोंसे भिन्न पद) विश्वविद्यालय के प्रशासनिक, कार्यालयी तथा अन्य कर्मचारीयों के पदी की सृष्टि, उनमें नियुक्तितथा उनकी परिलब्धियों एवं चयन-पद्धति के बारे अध्यादेश ।

1. 1 क) सामान्य उपबंध:

अ ) 1.1.96 में वर्तमान वेतन मान के अनुसार पदों के वर्ग-ग्रेड ( गैर शैक्षिक कर्मचारी ):

1 ) ' क' वर्ग के पद:जिनका वेतन मान न्यूनतम 2200.00 रुपये तथा उससे अधिक हो ।

2) 'ख' वर्ग के पद: जिनका वेतन मान न्यूनतम 2000.00 रुपये हो ।

3 ) 'ग' वर्ग के पद: जिनका वेतनमान न्यूनतम 950-00 रुपये तथा उससे अधिक हो, पर 200000 रूपये से कम हो ।

4) 'घ' वर्ग के पद: जिनके वेतनमान का अधिकतम 1200.00 रुपये से अधिक न हो ।

ख) पदों की प्रकृक्ति:

पद स्थायी, अस्थायी अथवा किसी निश्चित अवधि का हो सकता है । स्थायी पद का आशय है वह पद जिसमें बिना किसी समय -सीमाके अनिश्चित काल तक जारी रहने के अभीष्ट निश्चिंत दर का वेतन या वेतन - मान अनुमोदित हो । अस्थायी पद का मतलब है- वह पद जिसमें केवनकिसी निश्चित समय के लिये तथा अनिश्चित समय तक जारी न रहनेवाले निश्चित दर का वेतन या वेतन मास अनुमोदित हो । निश्चित 47

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

अवधिके पद का अर्थ है- वह पद जो स्थायी हो और जिस पर एक ही पदाधिकारी-अधिकारी एक निश्चित कालावधि से अधिक समय के लिये नहींबने रह सकते ।

2. पदोकी सृष्टि:

किसी भी वर्ग एवं किसी भी प्रकृति के पद की सृष्टि के लिए प्रस्ताव सम्बद्ध शैक्षिक विभागों के प्रमुखों तथा प्रशासनिक अधिकारी द्वारा प्रस्तावित पद से जुड़े जानेवाले दायित्वों एवं कर्त्तव्यों, वेतनमान, आवश्यक अर्हता एवं अनुभव तथा उसी वर्ग एवं 'केडर' के वर्तमान के कर्मचारियों की कुल संख्या इत्यादि के विस्तृत विवरण के साथ कुलसचिव के पास भेजे जा सकेंगे । प्रस्ताव से सन्तुष्ट होने पर कुलसचिव उसे वित्त समिति के अनुमोनार्थवित्त अधिकारी के पास संस्तुतित करके भेज देंगे । वित्त समिति कि सिपारिस पर प्रबन्धन बोर्ड ऐसे सारे पदों की सृष्टि करेगा ।

2.2 परन्तु, प्रबन्धन बोर्ड के पास यह अधिकार होगा कि वित्त समिति की सिफारिश के बिना भी वह किसी भीपद की सृष्टि कर सकेगा । वित्त समिति कीसिफारिश से प्रबन्धन बोर्ड बंधा हुआ नहीं होगा ।

2.3 जरुरी एवं अनदेखी प्रकृति के मामले में कुलपति भी 'घ' वर्ग के किसी अस्थायी पद की सृष्टि कर सकेंगे जिसकी कालावधि 11 (ग्यारह ) महीनों से अधिक की न हो, तथा वे वित्त समिति एवं प्रबंधन बोर्ड को वर्ष के ' बजट' में आवश्यक व्यवस्था रखने या पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया से खर्च को पूरा करने हेतु सूचना देंगे ।

2.4 पूर्वोक्तनियमों मेंकिसी बात के होते हुए भी, किसी पद की सृष्टि संघ लोकसेवा आयोग द्वारा समय- समय परदिए जानेवाले दिशा-निर्देशोंया आदेशोंके उपाश्रित होगी । पदों की सृष्टि एवं उनमें नियुक्ति के सन्दर्भ में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निहित की जानेवाली प्रक्रिया का अनुकरण विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा ।

3. नियुक्ति:

3.1 सांविधिक अधिकारी से भिन्न 'क' वर्ग के पदों में नियुक्ति की प्रक्रिया संविधि के ( द्वितीय अनुसूची ) हण्ड-20 के अन्तर्गत किए गए उपबन्धों के अनुसार चयन समिति के जरिए शुरु की जाएगी , जिसके सदस्य निम्न प्रकार से होंगे:

क) अध्यक्ष - कुलपति,

ख)

- प्रबंधन बोर्ड द्वारा मनोनीत उसके दो सदस्य,

ग)

- कुलपति द्वारा मनोनीत दो व्यक्ति- जो विश्वविद्यालय में सेवारत न हो,

- संदस्य सचिव ।

घ) कुलसचिव

3.2 पदेन सदस्यों( कुलपति एवं कुलसचिव ) को छोड़कर शेष सदस्यों का कार्यकाल अधिसूचना की तिथि से 3 ( तीन ) साल का होगा ।

3.3 चयन समिति की सिफारिश अन्तिम अनुभोदन हेतु प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी । 'क' वर्ग के समस्त पदों के सन्दर्भ में प्रबन्धन बोर्ड नियुक्तिप्राधिकारी होगा।

3.4 चयन समिति की सिफारिश के आधार पर प्रबन्धन बोर्ड प्रत्याशियों की एक सूची का अनुमोदन कर सकेगा, तथा ऐसी सूची एक वर्ष की कालावधिके लिए वैध होगी ।

3.5 'क' वर्ग के सारे पदं एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार, रोजधार समाचार तथा इस अंचल के एक अग्रणी समाचार पत्र में समस्त सूचनाओं एवं सेवा- शर्तों के साथ विज्ञापन किए जाएँगे ताकि व्यापक प्रचार मिले तथा वस्तुतः योग्य एवं समर्थ व्यक्ति आकर्षित हों ।

3.6 प्राप्त आवेदनों का परीक्षण कुलसचिव या दायित्व प्राप्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा विज्ञापन में दिये गए निबन्धनी एवं शर्तों के सन्दर्भ किया जाएगा । अधूरे एवं विज्ञापन के निबन्धनों एवं शर्तों के अनुसार न पाए जानेवाले आवेदन अस्वीकृत किए जाएंगे ।

3.7 नियुक्तिके लिए योग्य समझे जानेवाले समस्तप्रत्याशियों का विस्तृत विवरण सारणी के रुप में तैयार करके उसे कुलसचिव द्वारा प्रामाणीकृत किया जाएगा तथा उसे चयन समिति के समक्ष साक्षात्कार के लिये बुलाए गए सारे प्रत्याशियों के गुल आवेदनों या जीवन तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा । साक्षात्कार के समय चयन समिति सारे प्रमाण -पत्रों तथा तथ्यों के मेलान प्रत्याशियों के मूल प्रमाण पत्रों के साथ करेगी ।

3.8 चयन समिति अपने समक्ष विवेचनार्थ प्रस्तुत प्रत्याशियों क सूची से तथ्यों एवं साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार अपनी सिफारिश देगी । चयन समिति प्रत्याशियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन हेतु प्रविधि का निर्णय स्वयं करेगी ।

3.9 चयन समितिके द्वारा विहित अर्हताओं एवं अनुभव की किसी बात की ढील पर किसी प्रत्याशी को fir पुक्ति की सिफारिश करती है , तो सिफारिश में कारण सहित ढील की बातों का उल्लेख अनिवार्य होगा ।

3.10 चयन समिति प्रबन्धन बोर्ड के विचारार्थ किसी सुयोग्य प्रत्याशी को प्रस्ताव (ऑफर ) देने हुते कारणों के लिखित उल्लेख के साथ प्रारंभिक उच्चतर वेतनमान की सिफारिश कर सकेगी ।

3.11 चयन समिति की कार्यवाही अत्यन्त गोपनीय समझी जाएगी । अतःचयन पर विचार एवं सिफारिश करते समय केवल चयन समिति के सदस्यों की उपस्थिति वांछनीय होगी ।

3.12 चयन समिति की सिफारिश पर प्रबन्धन बोर्ड द्वारा प्रत्याशियों के जीवन तथ्यों के साथ विचार करके उसका अनुमोदन किया जाएगा । एकाधिक प्रत्याशियों की सिफारिश प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की स्थिति में यदि प्रबन्धन बोर्ड प्रत्याशियों के प्राथमिकता- क्रम मेंकोई परिवर्तन जरुरी समझता है , तो लिखित रुप में कारणों के उल्लेख के साथ वैसा कर सकेगा । प्रबन्धन बोर्ड चयन समिति की सिफारिश को पूरी तरह आस्वीकृत भी कर सकेगा और ऐसी स्थिति मं सम्बद्ध पद को पुनः विज्ञापित किया जाएगा ।

48

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

3.13 चयन समिति की सिफारिश एक वर्ष तक वैध रहेगी ।

3.14 एक वर्ष से कम की कालावधिवाली अस्थायी रिक्ति के मामले में अगर कुलपति' का यह विचार हो कि पद की पूर्ति तुरन्त की जाए , तो पूर्णतः अस्थायी तौर पर नियुक्ति एक चयन समिति की सिफारिश के आधार पर की जा सकेगी- जिसका गठन निम्नलिखित सदस्यों से होगा:

अध्यक्ष

क) कुलपति

ख) कुलपतिद्वारा मनोवीत किए जानेवाले एक संकायाध्यक्ष

ग ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले प्रबन्धन बोर्ड का एक सदस्य

घ) सम्बद्ध प्रशासनिक कार्यालय के प्रमुख

- सदस्य सचिव

ङ) कुलसचिव

कुलपति विचार एवं अनुमोदनार्थ प्रबन्धन बोर्ड को मामले की सूचना देंगे ।

3.15

3.16 'ख' वर्ग के अधिकारी से ' क' वर्ग के अधिकारी पद के लिए अथवा 'क' वर्ग के पदों में ही एक निम्न वेतनभान वाले पर से दूसरे अधिक वेतनमान वाले पदोंके लिए प्रोन्नति के आधार पर नियुक्ति के मामले में , उपरोक्त 3.1 की चयन समिति ही विगत सेवा अभिलेखों, वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों एवं व्यक्तिशः साक्षात्कार के आधार पर चयन की प्रक्रिया सुरु करेगी तथा प्रबन्धन बोर्ड को श्रेष्ठत्व सहित रिष्ठता के आंधार पर प्रत्याशियों के बारे में सिफारिश भेजेगी प्रबन्धन बोर्ड चयन समिति की सिफारिश पर विचार करते हुए प्रोन्नति बोर्ड द्वारा पदोन्नति के लिये उपयुक्त प्रत्याशी नं ढूँढ़ पाने की स्थिति में उस पद की पूर्ति सीधी भर्ती के जरिए की जाएगी ।

4. 'ख' वर्ग के पदों में नियुक्ति:

4.1 विश्वविद्यालय के ' ख' वर्ग के पदों ( ' ख' वर्ग के अधिकारियों ) में नियुक्ति हेतु एक चयन समिति रहेगी जो निम्नांकित सदस्यों से गठित होगीः - सदस्य

क) कुलपति

ख) प्रबन्धन बार्ड द्वारा मनोनीत किए जानेवाले उसके दो सदस्य

ग ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले दो सदस्य-जो विश्वविद्यालय में सेवारत न हों ।

सदस्य सचिव ।

घ) कुलसचिव

चार सदस्य कार्यवाहक संख्या बनाएँगे । 4.2

4.3 'ख' वर्ग के समस्त पदों की नियुक्ति का प्राधिकार कुलपति पर व्यस्त होगा ।

4.4 पदेन सदस्योंको छोड़कर शेष सदस्यों का कार्यकाल अधिसूचना की तिथि से तीन वर्ष का होगा ।

4.5 चयन की तिथि से एक साल तक चयन की वैधता रहेगी ।

'ख' वर्ग के अधिकारियों के सारे पद कम से कम दो अखबारों एक राष्ट्रीय और एक स्थानीय में तथा रोजगार समाचार में व्यापक प्रचार हेतु 4.6 समस्तविस्तृत विवरणों के साथ विज्ञापित किए जाएँगे ।

4.7 अर्हताएँ आदि प्रबन्धन बोर्ड- कुलपति द्वारा विहित किए के अनुसार ही होंगे ।

4.8 निम्न वर्ग से अथवा 'ख' वर्ग के ही निम्न वेतनमान से ' ख' वर्ग के पदों तक प्रोन्नति के मामले में एक ही चयन समिति पदोन्नति हेतु चयन की प्रक्रिया शुरु करेगी।

5. 'ग' वर्ग कि पदों में नियुक्ति:

5.1 विश्वविद्यालय के ' ग' वर्ग के पदों में नियुक्ति हेतु एक चयन बोर्ड होगा जो निम्नांकित सदस्यों से गठित होगा:

-सदस्य

क) कुलपति

ख) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा मनोनीत किए जानेवाले दो सदस्य ।

ग ) विभाग-कार्यालय का प्रमुख जिसके लिए विशेष रुप से कोई पद विज्ञापित किया गया हो ।

घ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले एक प्राध्यापक ।

सदस्य सचिव ।

ङ) कुलसचिव

5.2 चार सदस्य कार्यवाहक संख्या बनाएगि ।

5.3 पदेन सदस्यों को छोड़कर शेष सदस्यों का कार्यकाल अधिसूचना की तिथि से तीन वर्ष का होगा ।

5.4 'ग' वर्ग कि पदों के लिए नियुक्ति प्राधिकारी कुलपति होंगे ।

5.5 'ग' वर्ग कि पदों की सारी रिक्तियों का विज्ञापन प्रदेश के एक अग्रणी दैनिक समाचार पत्र एवं एक राष्ट्रीय दैनिक में ध्यापक प्रचार हेतु प्रकाशित :कराया जाएगा ।

5.6 कुलसचिव सारे योग्य प्रत्यिाशियों के आवेदन पत्रों की जाँच पड़ताल करके चयन समिति द्वारा उनके साक्षात्कार की व्यवस्था करेंगे । आवश्यक समझे जाने पर कुलपति प्रत्याशियों की लिखित परीक्षा का आदेश दे सकेंगे और लिखित परीक्षा में योग्य विवेचित प्रत्याशी चयन समिति द्वारा साक्षात्कार हेतु बुलाए जाएँगे ।

49

भारत का राजपत्र : असाधारण

[ भाग III--खण्ड 4 ]

5.7 चयन समितिअपने समक्ष कुलसचिव द्वारा विवेचनार्थ प्रस्तुत प्रत्याशियों की सूची से अपना सिफारिशों प्रस्तुत करेगी सूची में साक्षात्कार हेतु बुलाएजानेवाले सारे प्रत्याशियों के जीवन तथा सम्मिलित होंगे ।

5.8 साक्षात्कार के लिए प्रत्याशियों को सूचना साक्षात्कार की तिथि से न्यूनतम 15 पन्द्रह दिन पूर्व पोस्टिंग प्रमाण पत्र के तहत भेजी जाएगी । चयन बोर्डके समक्ष समय पर उपस्थित होने में असफल प्रत्यांशी नियुक्ति के लिये विवेचित नहींहोंगे ।

5.9 चयन बोर्ड प्रत्याशियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन हेतु अपनी प्रविधि स्वयं निर्धारित कर सकेगा ।

510 चयन बोर्ड के प्रतिवेदन को गोपनीय समझा जाएगा । अतः चयन पर विचार- विमर्श एवं सिफारिश करते समय सिर्फ सदस्यों की उपस्थिति वांछनीय होगी ।

5.11 चयन बोर्ड की सिफारिशें चयन की तिथि से सिर्फ 12 ( बारह ) महीनों तक वैध रहेंगी ।

5.1.2 कुलपति द्वारा सिपारिशों के अनुमोदन के पश्चात ही नियुक्तियाँ की जाएँगी ।

6. 'घ' वर्ग के पदों में नियुक्ति:

6.1 विश्वविद्यालय के 'घ' वर्ग के विभिन्न पदों की नियुक्ति हेतु एक वयन बोर्ड होगा ।

6.2 चयन बोर्ड का गठन निम्नप्रकार से होगा:

- अध्यक्ष

i) कुलसचिव

ii ) प्रबन्धन बोर्ड द्वारा मनोनीत किए जानेवाला उसका एक सदस्य,

iii ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले एक प्राध्यापक ,

IV ) तेजपुर के जिलाविनियोजन अधिकारी या उनका प्रतिनिधि

V) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले सार्वजनिक जीवन में प्रसिद्धि प्राप्त एक व्यक्ति,

vi ) उप कुलसचिव तथा उनकी अनुपस्थिति में सह कुलसचिव ( स्थापन ) चयन बोर्ड के सचिव के रुप में कार्य करेंगें ।

6.3 विश्वविद्यालय के ' घ' वर्ग के सारे कर्मचारियों के नियुक्ति प्राधिकारी कुलसचिव होंगे ।

6.4. 'घ' वर्ग के सारे तकनीकी पदों का विज्ञापन एक स्थानीय दैनिक अखबार में प्रकाशित किया जाएगा तथा सारे गैर तकनीकि पद की सूचनाएँ विश्वविद्यालय के सारे विभागों- कार्यालयों एवं जिला बिनियोजन कार्यालय के सूचना पट्टों पर दी जाएँगी।

6.5 नियुक्तिपत्र जारी करने से पूर्व चयन बोर्ड की सिफारिशों के बारे में कुलपति को सूचना दी जाएगी ।

6.6 . उप कुलसचिव के द्वारा काटि- क्रम में आवेदन पत्रों का संवीक्षण किया जाएगा । चयन बोर्ड द्वारा साक्षात्कार ग्रहण हेतु सारे योग्य प्रत्याशी बुलाए जाएँगे ।

6.7 पदों की आवश्यकता के अनुसार प्रशासन द्वारा वर्ग ' घ' के विविध पदों के लिए अलग- अलग शैक्षिक अर्हताएँ विहित की जाएँगी ।

6.8 चयन बोर्ड की कार्यवाही गोपनीय समझी जाएगी । अतः प्रत्याशियों की योग्यता पर विचार करते तथा सिफारिशें प्रस्तुत करते समय चयन बोर्ड के सदस्योंसे भिन्नकिसी व्यक्ति को वहाँ उपस्थित रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी ।

6.9 चयन बोर्ड की सिफारिशें चयन के समय से 12 ( बारह ) महीने की कालावधि के लिए वैध रहेंगी ।

7. परिलब्धियाँ: अधिकारी , 'ग' वर्ग, ' घ' जैसे विभिन्न वर्गो के पदों के लिए वेतनमान समय - समय पर प्रबन्धन भोर्ड द्वारा विहित किए जाएँगे । प्रबन्धन बोर्ड द्वारा विहित नियमों के अनुसार उनके वेतन सम्बद्ध वेतनमान में निर्धारित किए जाएँगे । बेतन के अलावा कर्मचारी केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को समय- समय पर मिलनेवाले अन्य भत्तों के हकदार होंगे । प्रबन्धन बोर्ड, जब की आवश्यकता हो, भनों के परिमाण का निर्धारण कर सकेगा ।

7.1 प्रबन्धन बोर्ड गैर- शैक्षणिक कर्मचारियों के वेतन के गठन का समय- समय पर पुनरीक्षण करेगा तथा जरुरत के अनुसार वर्गीकरण के मामले में आवश्यक समायोजन करेगा ।

7.:2 वेतन और भत्तों के अलावा सारे कर्मचारी समय-समय पर संविधियों द्वारा विहित किए जाने के अनुसार सेवा निवृत्ति लाभों के अधिकारी होंगे।

7.3 जयन समिति- बोर्ड किसी सुयोग्य प्रत्याशी के लिए कारणों के लिखित उल्लेख के साथ प्रारंभिक उच्चतर वेतनमान की सिफारिश भी कर सकेगा । नियुक्तिप्राधिकारी ऐसी सिफारिशों पर विचार करके अन्तिम निर्णय लेंगे ।

8. पदोन्नति:

प्रबन्धन बार्ड निम्न वेतनमान के निम्न पद से उच्च वेतनमान के किसी पद के लिए तथा किसी वर्ग के भीतर किसीं उच्च वर्ग के लिए पदोन्नति हेतु उपायों का उद्‌भावन करेगा । प्रबन्धन बोर्ड प्रत्येक प्रोन्नतिमूलक पदों के लिए पदोन्नति की योग्यताएँ भी बिहित करेगा ।

8.1 परन्तु, किसी वर्ग में पदोन्नति के लिए उपयुक्त प्रत्याशी के अभाव में पद की पूर्ति सीधी भर्ती के जरिए कीजाएगी ।

8.2 पदोन्नति द्वारा की जानेवाली प्रत्येक नियुक्ति वरिष्ठता एवं उपयुक्तता के आधार पर होगी ।

8.3 प्रोन्नति के सारे मामलों पर, यथास्थिति, सम्बद्ध चयन समिति चयन बोर्ड के जरिए प्रस्तुत अध्यादेश में विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों की 'नियुक्ति के लिये अलग- अलग रुप से विहित किए जाने के अनुसार प्रक्रिया शुरु की जाएगी ।

4470 G1 /08-7 50

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[PART III-SEC. 4]

8.4 चयन बोर्ड- चयन समिति पदोन्नति के विचारार्थ इस उद्देश्य से प्राप्त विगत सेवा-अभिलेखों, वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों तथा विशेष गोपनीय प्रतिवेदन पर सम्यक रुप से विचार करेगी ।

8.5 एक ही बर्ग की सेवा के अन्तर्गत विभिन्न केडरों के पद हो सकते हैं । निम्न केडर के किसी पद से उच्च वर्ग -केडर के किसी पद के लिए प्रौन्नति कीदिशा बनाते समय केडर को चिह्नत करना आवश्यक होगा । कर्मचारियों के दायित्वों की प्रकृति , विहित अर्हताएँ, सम्बद्ध वेतनमान तथा स्थानान्तरण की बातों पर विचार करते हुए कुलपति विश्वविद्यालय के 'ग' तथा 'घ ' वर्गों के कर्मचारियों की प्रोन्नतिमूलक व्यवस्थाओं का निर्णय करेंगे तथा प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष उसके अनुमोदनार्थ प्रशासनिक अधिकारियों की पदोन्नति से सम्बद्ध ऐसे प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे ।

9. भारत सरकार द्वारा समय- समय पर विहित हुए जानेवाले दिशा निर्देशों के अनुसार अनुसूचित जाति ' अनुसूचित जनजाति' अन्य पिछड़ी जातियों इत्यादि के लिए पदों के आरक्षण की व्यवस्था की जाएगी ।

अध्यादेश संख्या-6

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या-बो. 96/ 2/ 4.4 ( 6 ) के इद्वारा गृहित

मानव संसाधनविकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/ 96-डेस्क ( यू) दिनांक 30.10.96 द्वारा अनुमोदित)

एवं द्वितीय अनुसूची की संविधि संख्या-25 ( 2 ) के तहत अनुबन्ध का प्ररुप ।

करार का ज्ञापन सम्पन्न किया गया इस

के तथा आचार्य/डॉ/श्री .

तिथिकी,

पुत्र/पुत्री/ के/को, आवास

में, उम्र..

पत्नी ( इसके पश्चात यहाँ' शिक्षक' के रूप में उल्लिखित ) , जो प्रथम पक्ष है तथा संसद के तेजपुर विश्वविद्यालग अधिनियम 1993 के तहत गठित तेजपुर विश्वविद्यालय नामक सार्वजनिक निकाय के बीच ( इसके पश्चात यहाँ ' विश्वविद्यालय' के रुप में उल्लिखित ) , ओ द्वितीय पश्न है ।

1. ऐसी अवस्थामें प्रबन्धन बोर्ड उक्त तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम, 1993 द्वारा प्रदत्त क्षमता का उपयोग करते हुए प्रथम पक्ष के भागीदार के व्यक्तिको आचार्य/प्रवाचक/व्याख्याता ( इसके पश्चात यहाँ शिक्षक के रुप में उल्लिखित ) के रुप में तेजपुर विश्वविद्यालय में नियमानुसार मिलनेवाले अन्यभत्तोंके साथ .रुपये के वेतनमान पर सेवा से जुड़ने कीतिथि •से प्रभावी बनाकर नियुक्ति प्रदान करता है ।

तथा ऐसी अवस्थामें उक्त श्री/डॉ/आचार्य तेजपु'र विश्वविद्यालय में दिनांक

से प्रभावी बनाकर उक्त नियुक्ति को ग्रहण करने के लिए स्वीकार करते हैं ।

2. अब इसके दोनों पक्ष निम्नलिखित बातों पर सहमति प्रदान करते हैं :

शिक्षक विश्वविद्यालय में इस अधिनियम, संविधियों तथा प्रभावी अध्यादेश के अनुरुप तथा इनकी आवश्यकताओं के अनुसार दायित्वों का- चाहे वह शिक्षण के आयोजन या अध्यापन के साथ अन्तविर्भागीय शिक्षण या शोध या परीक्षार्थियों के परीक्षण या उनके अनुशासन या उनके कल्याण से संबंधित हो- निर्वाह करने तथा सामान्य रुप से विश्वविद्यालय के प्राधिकारी के निर्देश पर कार्य करने को प्रतिश्रुतिबद्ध हैं ।

2.1 2.2 शिक्षक 12 महीने की अवधि के लिये परिवीक्षण में रहेंगे । परिवीक्षण की यह अवधि बढ़ायी जा सकेगी , पर कुल 24 महीनों से अधिक नहीं । विश्वविद्यालय के पास यह क्षमता होगी कि वह उप-अनुच्छेद 2.1 में सन्निविष्ट उपबन्धों के सन्दर्भ में ढील दे तथा यह भी क्षमता होगी कि शिक्षक कीनियुक्ति की 12 महीने की कालावधि की समाप्ति से पहले , पर 9 महीने से पहले नहीं, स्थायीकरण के लिए उनकी उपयुकाता का मूल्यांकन करे ।

2.3 यदिस्थायीकरण के लिए विश्वविद्यालय शिक्षक की उपयुक्तता से सन्तुष्ट हो , तो परिवीक्षा की अवधि के अन्त में उनका स्थायीकरण उसी पद पर कियाजाएगा , जिसमें उनकी नियुक्तिकी गयी थी ।

2.4. और यषि विश्वविद्यालय , यथास्थिति , परिवीक्षा की 12 महीनों की अवधि अथवा परिवीक्षा की वर्धित की समाप्ति पर शिक्षक के स्थायीकरण न करने का निर्णय सैता है, तो सम्बद्ध शिक्षक को लिखित रुप में परिवीक्षण की अवधि की समाप्ति से न्यूनतम 30 दिन पूर्व इसबात की सूचना दी जाएगी कि उनका स्थायीकरण नहीं किया जाएगा और इसके परिणाम स्वरुप परिवीक्षा की अवधि के अन्त पर वे विविद्यालय की से निरत समझे जाएँगे ।

3. यह कि उक्त विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन शिक्षक होंगे तथा जब तक कि प्रबन्धन बोर्ड द्वारा अथव। शिक्षक के द्वारा यह अनुबंध समाप्त घोषित नहीं किया जाता, जैसा कि यहाँ आगे उपबंधित किया गया है , वे विश्वविद्यालय की सेवा में सात वर्ष की आयु पूर्ण होने तक बने रहेंगे । यह किविश्वविद्यालय नियुक्ति में बने रहने की स्थिति के दौरान शिक्षक को उनकी सेवा के पारितोषिक के रूप में निम्नोक्त वेतन मान पर वेतन 4.

का भुगतान करेगा:

रुपये तथा का मासिक वेतन ।

रुपये प्रतिमास ,

रुपये की वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़ के सर्वाधिक

परन्तु, जब कभी नियुक्ति की प्रकृति में अथवा शिक्षक की परिलब्धियों में किसी प्रकार का परिवर्तन होता है , तो परिवर्तन के विवरण इससे संलग्न अनुसूची में दोनों पक्षों के हस्ताक्षरों के तहत अंकित किए जाएँगे तथा इस करार के निबन्धन नए पद के निबन्धनों एवं शर्तों तथा उस पद से सम्बद्ध निबन्धनों एवं शर्तों की तुलना के आधार पर किए जानेवाले आवश्यक परिवर्तनों के साथ लागू होगें,

परन्तु, वह और कि कुलपति द्वारा भेजे जाने पर प्रबन्धन बोर्ड के किसी प्रस्ताव द्वार रोके बगैर तथा शिक्षक को लिक्षित प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने हेतु पर्याप्त सुविधा दिये बिना वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी या स्थगित नहीं की जाएगी ।

1 51

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

5. यह कि उक्त शिक्षक विश्वविद्यालय में वर्तमान समय प्रभावी संविधियों अध्यादेशों, विनियमों तथा नियमों से बंधे हुए होमे को सहमत हैं, शर्त यह कि शिक्षक की नियुक्ति के पश्चात उनके पदनाम, वेतनमान, वार्षिक वेतन- वृद्धि, भविष्यनिधि, सेवा निवृतिलाभ सेवा निवृति की आयु, परिवीक्षा, स्थायीकरण , छुट्टी, छुट्टी वेतन तथा नौकरी से वहिष्करण के सन्दर्भ में उन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली बातों के साथ उनकी सेवा की शर्तों एवं निबन्धानों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।

6. यह कि शिक्षक विश्वविद्यालय की सेवा में अपना पूरा समय अर्पित करेंगे तथा विश्वविद्यालय से लिखित अनुमति के बिना, प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से, अपने को किसी व्यापार या व्यवसाय में से जो ही उसके साथ अथवा किसी व्यक्तिगत गृह- अध्यापन के साथ अथवा किसी प्रकार की परिलब्धिया पारितोषिक से सम्बद्ध किसी अन्य कार्य के साथ नहीं जोड़ेंगे । परन्तु , यह निषेध विश्वविद्यालय की परीक्षाओं या विज्ञ निकयों से संबंधित कार्य के ग्रहण अथवा पुस्तकों के प्रकाशन या रेडियो वार्ता के प्रसारण अथवा विस्तारण व्याख्यान प्रदान अथवा कुलपति की अनुमति से किसी अन्य शैक्षणिक कार्य के सम्पादन में लागू नहीं होगा ।

7. यह कि उक्त शिक्षक विश्वविद्यालय द्वारा अपने शिक्षकों के लिये निश्चित आचरण- विधि का पालन करने को सहमन हैं ।

8. और इस बात पर सम्मति प्रकट की जाती है कि विनिर्दिष्ट आधारों के अलावा तथा संविधि संख्या-28 की धारा-संख्याओं ( 1 ) , ( 2 ) , ( 3 ) , ( 4 ) ,

( 5 ) और ( 6 ) में ( नीचे पुनर्कथित ) विहित प्रक्रिया की अनुरुपता के बिना यह अनुबंध विश्वविद्यालय द्वारा भमाप्न घोषित करने योग्य नहीं माना जाएगा ।

जहाँ किसी शिक्षक या शैक्षिक वर्ग के किसी सदस्य के विरुद्ध कदाचार का आरोप हो, कुलपति अगर उपयुक्त समझें, तो लिखित आदेश द्वारा शिक्षक 8.1 को नौकरी से निलंबित करेंगे तथा तुरन्त ही प्रबन्धन बोर्ड की उन परिस्थितियों की सूचना देंगे जिसमें निलंबन का आदेश किया गया हो:

परन्तु, अगर प्रबन्धन बोर्ड की यह राय हो कि मामलें की परिस्थितियाँ शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के मवस्य के निलंबन को स्थापित नहीं करतीं , तो वह ऐसे आदेश को खंडित कर सकेगा।

8.2 सेवा अनुबंध या नियुक्ति के निबन्धनों में किसी बात के होते हुए भी प्रबन्धन बोर्ड को यह अधिकार होगा कि वह कदाचार के आधार पर किसी शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के किसी सदस्य को पद से अपसारित करें।

8.1 पूर्वोक्त रुप में, प्रबन्धन बोर्ड समुचित कारण के बिना या तीन महीने की लिखित सूचना या उसके बदने तीन महीने के वेतन चुकाए वगैर किसी शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के किसी सदस्य को पद से अपसारित नहीं कर सकेगा ।

8.4 धारा-8.2 या.धारा 8.3 के तहत किसी शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के किसी सदस्य को तब तक' पन से अपसारित नहीं किया जाएगा जब तक किउनके संबंध में प्रस्तावित कार्रवाई के विरुद्ध कारण दशनि के लिए उन्हें न्यायोचित सुविधा नहीं दी जाएगी ।

8.5 किसी शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के किसी सदस्य को नौकरी से अपसारित करने के लिए प्रबन्धन बोर्ड के उपस्थित तथा मतदान में भाग

लेनेवाले सदस्यों के दो- तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी ।

8.6 किसी शिक्षक या शैक्षिक कर्मचारी वर्ग के किसी सदस्य को अपसारण ऐसे आदेश के पारित होने की तिथि से प्रभावी होगा ।

9. प्रस्तुत अनुबंध से उत्पन्न किसी भी मामले को तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम 1993 की धारा 32 ( 2 ) एवं ( 3 ) के उपबंधों के अनुरुप सुलझाया जाएगा।

विश्वविद्यालय और किसी शिक्षक के बीच अनुबंध के लेकर खड़ा किसी प्रकार का विवाद शिक्षक के अनुरोध पर एक माध्यस्थम् अधिकरण को भेजा जाएगा, जो सम्बद्ध प्रबन्धन बोर्ड द्वारा नियुक्त एक सदस्य और सम्बद्ध शिक्षक द्वारा मनोनीत एक सदस्य तथा कुलाध्यक्ष द्वारा नियुक्त एक मध्यस्थताकारी (आम्पयर) से गठित होगा ।

अधिकरण का निर्णय ही अन्तिम होगा और किसी सिविल न्यायालय में अधिकरण द्वारा निर्जीत मामले को लेकर अभियोग नहीं चलाया जाएगा ।

10. शिक्षक, किसी भी समय , प्रबन्धन बोर्ड को लिखित रुप में तीन महीने की सूचना अथवा उसके बदले विश्वविद्यालय को तीन महीने का वेतन चुकाकर अपने समनुदेश को समाप्त घोषित कर सकेंगे । परन्तु, प्रबन्धन बोर्ड स्वाधिकार से सूचना की आवश्यकता को हटा भी सकेगा ।

11. किसी भी कारण से इस अनुबंध की समाप्ति होने पर शिक्षक विश्वविद्यालय को उनकी ओर से देय किताबें, उपस्कर तथ्यां भिलेख तथा ऐसी अन्य सामग्रियाँ वापस कर देंगे ।

निमांकित साक्षों के समक्ष दोनों पक्ष यहाँ अपने अपने हस्ताक्षर एवं मुहर लगाते हैं:

1. शिक्षक/ कर्मचारी के हस्ताक्षर:

पदनाम

की उपस्थिति में

2.

हस्ताक्षर:

1.

हस्ताक्षर:

पदनाम:

पदनाम:

विश्वविद्यालय की ओर से हस्ताक्षरित एवं मुहरबद्ध किया गया:

कुलसचिव,

तेजपुर विश्वविद्यालय

1. हस्ताक्षर:

2. हस्ताक्षर:

पदनाम:

पदनाम:

52

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4]

अनुसूची

शिक्षक का पूरा नाम:

पता:

पदनाम:

वेतन:

के ग्रेड में :

टिप्पणी:

वर्ग ( ग्रेड ) , वेतन और पदनाम में होनेवाले परिवर्तन के संक्षिप्त विवरण दिये जाने चाहिए ।

पदनाम या ग्रेड में परिवर्तन:

प्रबन्धन बोर्ड के अनुमोदन कीतिथि:

परिवर्तन के प्रभावी होने की तिथि :

शिक्षक के हस्ताक्षर:

विश्वविद्यालय के अधिकारी के हस्ताक्षर:

अध्यादेश संख्या-7

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बी-96/ 2 / 4.4 ( 7) एवं प्रस्ताव संख्या बी- 98/2/22 दिनांक 14-6-97 के द्वारा गृहित एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-/ 96-डेस्क (यू) दिनांक 30.10.96 एवं पत्र सं. एफ. 14-4/99 डेस्क (यू) दिनांक 2-3-2000 द्वारा अनुमोदित)

तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के खण्ड-28 ( 1 ) , (ख) , (ग) एवं (घ) के तहत स्नातकोत्तर डिग्री के सन्दर्भ में विद्यार्थियों की प्रविष्टि, अध्ययन के विषय, शिक्षण का माध्यम तथा परीक्षाओं के बारे में अध्यादेश ।

1.1 किसीस्वीकृत विश्वविद्यालय/संस्थान से ( 10 + 2+ 3 ) की अध्ययन व्यवस्था के तहत स्नातक की डिग्री परीक्षा या किसी समान डिग्री की परीक्षा में अथवा किसी स्वीकृत विश्वविद्यालय/संस्थान से किसी तकनीकी डिग्री/परीक्षा में उत्तीर्ण प्रत्याशी द्वरा विश्वविद्यालय के किसी स्नातकोत्तर डिग्री अध्ययन-क्रम में प्रविष्टि के योग्य होंगे ।

1.2 विशेष स्नातकोत्तर अध्ययन- क्रम में प्रविष्टि हेतु तकनीकी स्नातक के सन्दर्भ में स्नातक स्तर पर विषय जोड़ भा अध्ययन के विषय संबंधी आवश्यकता, न्यूनतम योग्यता अंक तथा अन्य शैक्षिक आवश्यकताएँ सम्बद्ध विषय-अध्ययन-क्रम के विनिगयों/पाठ्यक्रमों में विहित की जाएँगी ।

1.3 किसीअध्ययन- क्रम में प्रविष्टि के योग्य प्रत्याशियों को सम्बद्ध विभाग केन्द्र द्वारा निर्णीत तथा आयोजित की जानेवा-नी प्रवेश परीक्षा में बैठना पड़ सकताहै ।

2. किसीबिशेष स्तानकोत्तर डिग्री अध्ययन - क्रम के अध्ययन की अवधि सम्बन्द्र अध्ययन- क्रम के पाराक्रण में विहित को जाएगी ।

3. शिक्षण एवं परीक्षाओं का माध्यम अंग्रेजी होगा ।

परन्तु, भाषा- विषयों के सन्दर्भ में, यदि अन्यथा आवश्यक हो, तो सम्बद्ध विषय के भाषा को शिक्षा एत्र परीक्षा के आाध्यम के रूप में ग्रहण किया जाएगा ।

4. अध्ययम के विषय एवं अध्ययन- क्रम के आधार पर किसी अध्ययन- क्रम के सत्र का शुभारंभ 16 जनवरी या 24 जुलाई से हो सकेगा ।

जहाँशैक्षणिक वर्ष का विभाजन , यथास्थिति, दो छमाहियों या तीन चौमाहियों के रुप में हो, उस सन्दर्भ में विद्यार्थियों के लिये छमाही/चौमाही पद्धति की शिक्षा एवं मूल्यांकन की व्यवस्था होगी । 5.1

5.2 वर्षमें पन्द्रह ( 15 ) दिनों के शीतावकाश तथा तीस ( 30 ) दिनों के ग्रीष्मावकाश के रुप में दो अवकाश होंगे जो क्रमशः पहली जनवरी से 15वीं जनवरी तक और 24 जून से 23 जुलाई तक व्याप्त होंगे ।

5.3 छमाही/चौमाही के अन्त की परीक्षाओं की तिथियों की सूचनाएँ परीक्षाओं के नियन्त्रक द्वारा निकाली जाएँगी ।

जाएँगे । परन्तु, परीक्षाओं के आयोजन , मूल्यांकन एवं परीक्षा- फल की घोषणा के समस्त कार्य , यथास्थिति, 31 दिसम्बर अथवा 23 जून तक पूरे किए 6 स्तानकोत्तर पाठ्य समिति की सिफारिश पर संकाय बोर्ड द्वारा किसी अध्ययन- क्रम के पाठ्यक्रम तथा अन्य विवरणों का अनुमोदन किया जाएगा । किसी नए पाठ्यक्रम के प्रवर्तन अथवा किसी पाठ्यक्रम के संशोधन के लिए दिशा- निर्देश विनियमों के जरिए विहित किए जागि । अध्ययन के प्रत्येक विषय के पाठ्यक्रम में पाठ्यपुस्तकों एवं सन्दर्भ- ग्रंथों की एक सूची सम्मिलित होगी । पाठ्यक्रम प्रस्तुतीकरण हेतु विनियमों में विहित दिशा-निर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम बनाया जाएगा ।

7. विश्वविद्यालय की कक्षाओं में उपस्थिति अनिवार्य होगी ।

7.2 सम्बद्ध विषय में नियमित अध्ययन- क्रम पूरा करनेवाले तथा सम्बद्ध कालावधि के दौरान आयोजित प्रत्येक विषय-प्रश्नपत्र/एकांश ( सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक कक्षाएँ, संगोष्ठियाँ, सत्र के कार्य, एकांश परीक्षा इत्यादि सहित ) में पृथक रुप में न्यूनतम 75 % कक्षाओं में उपस्थित रहने वाला विद्यार्थी ही छमाही/चौमाही के अन्त में होनेवाली परीक्षा में छमाही/चौमाही की समाप्ति पर बैठने का योग्य माना जाएगा ।

[ भाग III-खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

53

परन्तु, विभागीय परामर्शदाता समिति उपस्थिति की सर्वाधिक 5 % तक की कमी के मामले में माफी प्रदान हेतु कारणों सहित अपनी सिफारिश कुलपति को भेज सकेगी तथा उपस्थिति की कमी को माफ करने या न करने संबंधी कुलपति का निर्णय ही अन्तिभ होगा ।

7.3 75% से अधिक की उपस्थिति वाला विद्यार्थी उपस्थिति के लिए निम्नांकित पद्धति से किसी प्रश्नपत्र/एकांश के कुल 100 अंक में से सर्वाधिक 5 अंक तक अंक प्राप्ति का योग्य समझा जाएगा:

प्रतिशत में उपस्थिति

अंक

76-80

1

81-85

2

86-90

3

91-95

96-100

8.1 सतत आकलन एवं मूल्यांकन की पद्धति के आधार पर विद्यार्थी के मूल्यांकन का विधान किया गया है । इस प्रकार छमाही -चौमाही के दौरान संगोष्ठी कार्य, योजना-कार्य, व्यावहारिक- कार्य, सत्र कार्य एवं एकांश परीक्षा के जरिए विद्यार्थी का सतत मूल्यांकन होगा और प्रत्येक छमाही/चौमाही के अन्त में भी छमाही/चौमाही के अंत की एक परीक्षा होगी । सतत मूल्यांकन के तथा छमाही/चौमाही के अन्त की परीक्षा के अंकों को जोड़कर अन्तिम परीक्षा- फल निकाला जाएगा ।

3.2 किसी अध्ययन- क्रम के पाठ्यक्रम में प्रत्येक छमाही/चौमाही के लिए प्रश्नपत्रों के वितरण तथा अंकों के आवंटन का विधान किया जाएगा । प्रत्येक प्रश्नपत्र- एकांश 100 अंकों का होगा । प्रत्येक प्रश्नपत्र एकांश के लिए 5 % अंक सहित का 60 % महत्व मूल्यांकन पर तथा 40- महत्व छमाही -चौमाही के अन्त में होनेवाली परीक्षा पर दिया जाएगा । सतत मूल्यांकन के 60% अंक निम्नप्रकार से वितरित किए जाएँगे:

30अंक

एकांश परीक्षा ( कम से कम दो)

15अंक

समनुदेश-कक्षार अध्यन

5अंक

योजनाएँ

उपस्थिति

5अंक

5अंक

आन्तरिक आकलन

8.3 विविध अध्ययन क्रमों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आकलन हेतु विनियमों में व्याख्यायित किए के अनुसार एक छ सूचनांकोंवाली छमाही ग्रेड सूचनाक औसत ( एस . जी. पी. ए. ) चौमाही ग्रेड सूचनांक औसत ( टी. जी. पी. ए. ) तथा प्रथम छमाही/चौमाही से अन्तिम तक के विद्यार्थी के प्रदर्शन को दशनि हेतु एकत्रित ग्रेड सूचनांक औसत ( सी. जी. पी. ए. ) जोडे जाएँगे ।

8.4 अक्षर ग्रेड-च- ( एफ ) 45 से कम अंक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थी

8.5 विद्यार्थी को सतत आकलन एवं छमाही/चौमाही के अन्त की परीक्षा दोनों में अलग -अलग रुप से बैठना तथा उत्तीर्ण होना होगी।

अगर कोई विद्यार्थी किसी छमाही/चौमाही प्रत्येक एकांश में पृथक रुप से सतत आकलन में अनुत्तीर्ण है तो उसे अवधि के अन्त में होनेवाली परीक्षा मेंबैठने से रोका जाएगा और उसका नाम विश्वविद्यालय के नामांकन रजिस्टर से काट दिया जाएगा । ऐसा विद्यार्थी तत्काल परवर्ती सत्र की अनुरुप छमाही/ चौमाहीमें प्रविष्टि ले सकेगा ।

ऐसे पुनर्प्रविष्टिप्राप्त विद्यार्थी को अपना अध्ययन बन्द करना होगा अगर दूसरी बार भी सतत आकलन में उत्तीर्ण होने से असफल रह जाएगा । ऐसी पुनर्प्रविष्टि प्राप्त विद्यार्थी यदि उपलब्ध छमाही/चौमाही परीक्षा में पहले मौके ही अथवा धारा -8.5 के उपबंधों के तहत उपलब्ध होनेवाली

तत्काल परवतीं क्षतिपूरक परीक्षा में उत्तीर्ण होने से असफल रह जाता है- तो उसे अपना अध्ययन जारी रखना बन्द करना होगा ।

9.1 लेखा परीक्षा अध्ययन-क्रम:

पाठ्यक्रम में विहातानुरुप लेखा परीक्षाण ( नॉन क्रेडिट ) अध्ययन- क्रम भी रहेगा/ रहेंगे ।

9.2 डिग्री प्रदान हेतु योग्य प्रमाणित करने के लिए विद्यार्थी को न्यूनतम ग ( सी ) अक्षर ग्रेड प्राप्त करना होगा लेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम परीक्षा मेंन्यूनतम ' ग' ( सी ) अक्षर- ग्रेड प्राप्त करना होगा ।

9.3 लेखा परीक्षा विषय/विषयों में अपने को योग्य प्रमाणित करने हेतु विद्यार्थी अपनी प्रविष्टि तथा कक्षारंभ के तत्काल पश्चात आयोजित होनेवाली लेखा परीक्षण अध्ययन- क्रम परीक्षा में बैठ सकेगा अथवा सम्बद्ध विषय/विषयों के लेखा परीक्षण की कक्षाओं में उपस्थित रहकर बाद की तिथि में आयोजित होनेवालीलेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम परीक्षा में बैठा सकेगा ।

परन्तु, यदि कोई विद्यार्थी इस परीक्षा में अक्षर- ग्रेड ' ग' ( सी ) प्राप्त करने से असफल रहता है तो उमे लेखा परीक्षण की कक्षाओं में उपस्थित रहना

पड़ेगा और बाद में एक उपयुक्त तिथि पर लेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम की परीक्षा में बैठकर उत्तीर्ण होना होगा ।

10 . पुनःकुलजोड़/ पुनर्मूल्यांकन:

विद्यार्थी किसी छमाही/चौमाही के अन्त की परीक्षा के एक या एकाधिक प्रश्नपत्रों के अंकों के पुनः कुलाजोड़ या उसके पुनर्मूल्यांकन हेतु विहित शुल्कों के साथ अपने विभाग के प्रमुख प्रभारी के जरिए परीक्षाओं के नियन्त्रक को विहित प्ररुप पर आवेदन कर सकेगा । परीक्षाओं के नियन्त्रकऐसे मामले पर उपयुक्त कार्रवाई करेंगे और सही समय पर उसके परिणाम के बारे में सम्बद्ध विद्यार्थी को सूचना देंगें ।

[PART HI-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

54

11.

जिग्री प्रदान:

उपरोक्लिखित आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर कोई विद्यार्थी सम्बद्ध विषय पर विश्वविद्यालय के द्वारा स्नातकोत्तर

अध्यादेश संख्या-8

( प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बी -96/ 2/ 4.4 (8 ) के द्वारा गृहित एवं दिनांक 14-6-97 प्रस्ताव संख्या बी-98/ 2/ 22 द्वाश संशोधित एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/96-डेस्क (यू) दिनांक 30.10.96 एवं पत्र संख्या एफ 14-4/ 99 डेस्क

(यू) दिनांक 2-3-2000 द्वारा अनुमोदित)

तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के खण्ड -28 ( 1 ) , ( ख) , ( ग) एवं (घ) के तहत स्नातकोत्तर डिप्लोमा स्नातकोत्तर प्रमाण-पत्र के सन्दर्भ में विद्यार्थियों की प्रविष्टि, अध्ययन के विषय , शिक्षण का माध्यम तथा परीक्षा के बारे में अध्यादेश ।

1.1 किसीस्वीकृत विश्वविद्यालय/संस्थान से ( 10 + 2 + 3 ) की अध्ययन व्यवस्था के अन्तर्गत स्नातक की डिग्री परीक्षा या किसी समान डिग्री की परीक्षा में अथवा किसी स्वीकृत विश्वविद्यालय/संस्थान के किसी तकनीकी डिग्री परीक्षा में उतीर्ण प्रत्याशी इस विश्वविद्यालय के किसी डिप्लोमा/प्रमाण-पत्र अध्ययन -क्रम में प्रविष्टि के योग्य होंगे ।

परन्तु, ( 10+ 2+ 3 ) की अध्ययन व्यवस्था के अन्तर्गत स्तातक की डिग्री प्राप्त अभिनियुक्त प्रत्याशी भी किसी डिप्लोमा अध्ययन क्रम में प्रविष्टिके योग्य हो सकेंगे ।

परन्तु, यह और कि अध्ययन - क्रम की प्रकृति के अधार पर ( 10 + 2 + 3 ) की अध्ययन व्यवस्था के अन्तर्गत स्नातक की डिग्री प्राप्त प्रत्याशी भी प्रविष्टिके योग्य हो सकेंगे ।

1.2 विशेष डिप्लोमा/प्रमाण-पत्र अध्ययन-क्रम में प्रविष्टि हेतु तकनीकी स्नातक के सन्दर्भ में स्नातक स्तर विषय जोड़ या अध्ययन के विषय संबंधी आवश्यकता, न्यूनतम योग्यता अंक तथा अन्य शैक्षिक आवश्यकताएँ सम्बद्ध विषय/अध्ययन- क्रम के विनियमों/सठ्यक्रमों में विहित की जाएँगी ।

1.3 किसी अध्ययन -क्रम में प्रविष्टि के योग्य प्रत्याशियों को सम्बद्ध विभाग/केन्द्र द्वारा निर्णीत तथा आयोजित की जानेवाली प्रवेश परीक्षा में बैठना पड सकताहै ।

2. किसीविशेष डिप्लोमा/प्रमाण-पत्र अध्ययन-क्रम के अध्ययन की अवधि सम्बद्ध अध्ययन- क्रम के पाठशक्रम मे विहित की जाएगी ।

3. शिक्षण एवं परीक्षाओं का माध्यम अंग्रेजी होगा ।

परन्तु, अध्ययन के विषय की प्रकृति के आधार पर अंग्रेजी के अलावा हिन्दी तथा असमीया को भी शिक्षण एवं परीक्षण के माध्यम के रुप में उपयोग मेंलाया जा सकेगा । हालाँकि उसका निर्णय स्नातकोत्तर पाठ्य समिति की सिफारिश पर संकाय बोर्ड द्वारा लाया जाएगा ।

4. अध्ययन के विषय एवं अध्ययन - क्रम के आधार पर किसी अध्ययन- क्रम के सत्र का शुभारंभ 16 जनवरी या 24 जुलाई से हो सकेगा ।

5.1 जहाँ शैक्षणिक वर्ष के विभाजन, यथास्थिति , दो छमाहियों या तीन चौमाहियों के रुप में हो, उस सन्दर्भ में विद्यार्थियों के लिए छमाही-चौमाही पद्धति की शिक्षा एव मूल्यांकन की व्यवस्था होगी ।

5.2 वर्ष में 15 दिनों के शीतावकाश तथा 30 दिनों के ग्रीष्मावकाश के रुप में दो अवकाश होंगे जो क्रमशः पहली जनवरी से 15 वीं जनवरी तक और

24 जून से 24 जुलाई तक व्याप्त होंगे ।

5.3 छमाही-चौमाही के अन्त की परीक्षाओं की तिथियों की सूचनाएँ परीक्षाओं के नियन्त्रक द्वारा निकाली जाएँगी ।

परन्तु, परीक्षाओं के आयोजन, मूल्यांकन एवं परीक्षा-फल की घोषणा के समस्त कार्य , यथास्थित , 31 दिसम्बर अथवा 23 जून तक पूरे किए जाएँगे ।

6. स्नातकोत्तर पाठ्य समिति की सिफारिश पर संकाय बोर्ड द्वारा किसी अध्ययन- क्रम के पाठ्यक्रम तथा अन्य विवरणों का अनुमोदन किया जाएगा । किसी नए पाठ्यक्रम के प्रवर्तन अथवा किसी पाठ्यक्रम के संशोधन के लिएदिशा -निर्देश विनियमों के जरिए विहित किए जाएंगे । अध्ययन के प्रत्येक विषय के पाठ्यक्रम में पाठ्यपुस्तकों एवं सन्दर्भ ग्रंथों की एक सूची सम्मिलित होगी । पाठ्यक्रम प्रस्तुतीकरण हेतु विनियमों में विहित दिशा-निर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम बनाया जाएगा ।

7.1 विश्वविद्यालय की कक्षाओं में उपस्थिति अनिवार्य होगी ।

7.2 सम्बद्ध विषय में नियमित अध्ययन- क्रम पूरा करनेवाले तथा सम्बद्ध कालावधि के दौरान आयोजित प्रत्येक विषय/प्रश्नपत्र /एकांश ( सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक कक्षाएँ, संगोष्ठियाँ, सत्र के कार्य , एकांश परीक्षा इत्यादि सहित ) में पृथक रुप से न्यूनतम 75% कक्षाओं में उपस्थित रहनेवाला विद्यार्थी ही छमाही/चौमाही के अन्त में होनेवाली परीक्षा में छमाही/चौमाही की समाप्ति पर बैठने का योग्य माना जाएगा ।

परन्तु, विभागीय परामर्शदाता समिति उपस्थिति की सर्वाधिक 5 % तक की कमी के मामले में माफी प्रदान हेतु कारणां सहित अपनी सिफारिश कुलपति को भेज सकेगी तथा उपस्थिति की कमी को माफ करने या न करने संबंधी कुलपति का निर्णय ही अन्तिम होगा ।

7.3 75% से अधिक की उपस्थिति वाला विद्यार्थी उपस्थिति के लिए निम्नांकित पद्धति से किसी प्रश्नपत्र /एकांश के कुल 130 अंक में से सर्वाधिक 5 अक तक भंक- प्राप्ति का योग्य समझा जाएगा:

प्रतिशत में उपस्थिति 55 भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III-खण्ड 4 ]

81-85

86-90

91-95

96-100

2

3

4

5

8.1 सतत आकलन एवं मूल्यांकन की पद्धति के आधार पर विद्यार्थी के मूल्यांकन का विधान किया गया है । इस प्रकार छमाही/चौमही के दौरान संगोष्ठी-कार्य, योजना- कार्य , व्यावहारिक कार्य, सत्र- कार्य एवं एकांश परीक्षा के जरिए विद्यार्थी का सतत मूल्यांकन होका और प्रत्येक छमाही-चौमाही के अन्त में भीछमाही- चौमाही के अन्त की एक परीक्षा होगी । सतत मूल्यांकन के तथा छमाही- चौमाही के अन्त की परीक्षा के अंकों को जोड़कर अन्तिम परीक्षा- फलनिकाला जाएगा ।

8.2 किसी अध्ययन- क्रम के पाठ्यक्रम में प्रत्येक छमाही/चौमाही के लिए प्रश्नपत्रों के वितरण तथा अंकों के आवंटन का विधान किया जाएगा । प्रत्येक प्रश्नपत्र एकांश 100 अंकों का होगा । प्रत्येक प्रश्नपत्र/एकांश के लिए 50- अंक सहित अंकों का 60 % महत्व सतत मूल्यांकन पर तथा 40 % महत्व छमाही/ चौमाही के अन्तु में होनेवाली परीक्षा पर दिया जाएगा । सतत मूल्यांकन के 60% अंक निम्नप्रकार से वितरित किए जाएँगे :

एकांश परीक्षा ( कम से कम दो )

समनुदेश-कक्षा अध्ययन योजनाएँ

उपस्थिति

आन्तरिक मूल्यांकन

30अंक

15अंक

5अंक

5अंक

5अंक

8.3 विविध अध्ययन-क्रमों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आकलन हेतु विनियमों में व्याख्यायित किए के अनुसार एक छः सूचनांकोवाली अक्षर ग्रेड पद्धति (स्किस प्वाइंट लेटर ग्रेड सिस्टम ) लागू की जाएगी । विनियमों में विहित प्रक्रिया के अनुसार छमाही ग्रेड सूचनांक औसत ( सेमेस्टर ग्रेड प्वाइंट एवरेज ) (एस. जी. पी. ए. ) /चौमाही ग्रेड सूचनांक औसत (ट्राइमेस्टर ग्रेड प्वाइंट एवरेज ) ( टी. जी. पी. ए. ) तथा प्रथम छमाही/चौमाही में अन्तिम तक के विद्यार्थी के प्रदर्शन को दशनि हेतु एकत्रित ग्रेड सूचनांक औसत ( क्यूम्यूलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज ) ( सी. जी. पी. ए. ) जोड़े जाएँगे ।

8.4 अक्षर ग्रेड-च- ( एफ ) यानी 45 % से कम अंक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थी

8.5 विद्यार्थी को सतत आकलन एवं छमाही के अन्त की परीक्षा

परन्तु, तत्काल परवर्ती छमाही/चौमाही की अन्तवायी परीक्षा के पूर्व आयोजित होनेवाली क्षतिपूरक परीक्षा में विद्यार्थी को अनुत्तीर्ण प्रश्नपत्रों/ एकांशों के अपने अंकों में कम से कम उत्तीर्ण ग्रेड तक का सुधार लाना होगा।

8.7 क्षतिपूरक परीक्षा के लिए अयोग्य अथवा प्रस्तुत अध्यादेश की धारा 8.5 के उपबंधों के अनुसार विशेष छमाही/चौमाही की क्षतिपूरक परीक्षा में अनुत्तीर्ण विद्यार्थी कक्षा जारी नहीं रख सकेगा और उसे तत्काल परवर्ती अनुरुप छमाही/चौमाही में पुनर्प्रविष्टि लेनी होगी ।

ऐसापुनर्प्रविष्टि प्राप्त विद्यार्थी यदि उपलब्ध छमाही-चौमाही परीक्षा में पहले मौके पर ही अथवा धारा 8.5 के उपबंधो के तहत उपलब्ध होनवाली तत्काल परवर्ती क्षतिपूरक परीक्षा में उत्तीर्ण होने से असफल रह जाता है , तो उसे अपना अध्ययन जारी रखना बन्द करना होगा ।

9.1 लेखा परीक्षण अध्ययन-क्रम:

पाठ्यक्रम में विहितानुरुप लेखा परीक्षण ( नॉन क्रेडिट ) अध्ययन- क्रम भी रहेगा/ रहेंगे ।

9.2 डिप्लोमा प्रदान किए जाने हेतु योग्य प्रमाणित करने के लिए किसी विद्यार्थी लेखा परीक्षण अध्ययन- क्रम में न्यूनतम ग ( सी ) अक्षर ग्रेड प्राप्त करनाहोगा ।

9.3 लेखा परीक्षण विषय ( विषयों ) में अपने को योग्य प्रमाणित करने हेतु विद्यार्थी अपनी प्रविष्टि तथा कक्षारंभ के तत्काल पश्चात आयोजित होने वाली लेखा परीक्षण अध्ययन- क्रम परीक्षा में बैठ सकेगा अथवा सम्बद्ध विषय/विषयों के लेखा परीक्षण की कक्षाओं में उपस्थित रहकर बाद की तिथि मे आयोजित होनेवाली लेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम परीक्षा में बैठ सकेगा ।

9.4 यहविहित किया जाता है कि प्रमाण -पत्र अध्ययन - क्रमों के सन्दर्भ में लेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम परबल नहीं दिया जाएगा ।

10 . पुनः कुलजोड़-पुनर्मूल्यांकन:

विद्यार्थी किसी छमाही/ चौमाही के अन्त की परीक्षा के एक या एकाधिक प्रश्नपत्रों के पुनः कुलजोड़ या उसके पुनर्मूल्यांकन हेतु विहित शुल्कों केसाथ अपने विभाग के प्रमुख प्रभारी के जरिए परीक्षाओं के नियन्त्रक को विहित प्ररुप पर आवेधन कर सकेगा । परीक्षाओं के नियन्त्रक ऐसे मामले पर उपयुक्त कार्यवाई करेंगे और सही समय पर उसके परिणाम के बारे में सम्बद्ध विद्यार्थी को सूचना देंगे ।

11. डिप्लोमा/ प्रमाण -पत्र प्रदान:

उपरोल्लिखित आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर कोई विद्यार्थी सम्बद्ध विषय पर विश्वविधालय के द्वारा भिप्लोमा- प्रमाण -पत्र प्रदान किए जाने हेतु योग्य विवेचित होगाः।

1.2. अध्यादेश में विहित उपबंधानुसार किसी विद्यार्थी को पुनर्प्रविष्टि की एकाधिक बार की सुविधा को अनुभति भहीं की जाएगी ।

56

[PART III--SEC . 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

संविधि संख्या-9

( प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/ 2/ 4.4 (9) एवं दिनांक 28.12.96 की प्रस्ताव संख्या बो. /96/4/ 2.10 के द्वारा गृहित एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24-96-डेस्क ( यू) दिनांक 12.1.98 द्वारा अनुमोदित) कुलसचिव की सेवा की शर्तें एवं निबन्धन तथा परिलब्धियाँ (अधिनियम के खण्ड-15 ( 1 ) (2) एवं द्वितीय अनुसूची की संविधि संख्या-5 (3 ) के अन्तर्गत ) ।

1 संविधिके अनुसार कुलसचिव विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन अधिकारी होंगे ।

2. कुलसचिव, प्रबन्धन बोर्ड द्वारा समय - समय पर अपने कर्मचारियों के लिए अनुमोदित किए जानेवाले अन्य भत्तों के साथ 4500-150-5700-7300- रुपये के वेतनमान पर वेतन प्राप्त करेंगे ।

परन्तु, जब कभी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कुलसचिव के वेतनमान तथा भत्तों का संशोधन किया जाएगा, वे सभी इस विश्वविद्यालय के कुलसचिव के सन्दर्भ में भी लागू होंगे तथा इस विश्वविद्यालय के प्रबन्धन बोर्ड द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संशोधमों/परिवर्तनों को ग्रहण किए जाने के साथ ही प्रस्तुत अध्यादेश का यह उपबंध स्वाभाविक रुप से संशोधित मान्य होगा ।

परन्तु, यह और कि असम/ भारत सरकार अथवा अन्य संस्था/संस्थान के किसी अभिनियुक्त व्यक्ति की सेवा से कुलप्तचिव के पद को भरे जाने की स्थिति में इस विश्वविद्यालय या भारत सरकार के अभिनियुक्ति नियमों अथवा प्रबन्धन बोर्ड द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के सन्दर्भ में स्वीकृत किए जानेवाले निबन्धनों एवं शर्तों के अनुसार उनके वेतन एवं अन्य भत्ते तथा सेवा- शर्तें एवं निबन्धन विनियमित किए जाएंगें ।

अभिनियुक्तिमें आनेवाले अधिकारी द्वारा विश्वविद्यालय के वेतनमान को ग्रहण किए जाने की स्थिति हा तो सेवा से जुड़ने के तीन महीने के भीतर उसे ग्रहण करमा होगा ।

3. प्रबन्धन बोर्ड, चयन समिति की सिफारिश पर किसी विशेष रुप से उपयुक्त प्रत्याशी को उच्चतर प्रारंभिक वेतनमान का प्रस्ताव दे सकेगा।

कुलसचिव को विश्वविद्यालय की ओर से बिना असबाबों का एक आवास- स्थल उपलब्ध कराया जाएगा जिसके लिए उन्हेंस्वाभाविक दर पर किराया चुकाना होगा। 4.

5. कुलसचिव को अपने पद से जुड़े दायित्वों के निर्वाह , साथ ही साथ व्यक्तिगत कार्य हेतु महीने में सर्वाधिक 500 किलोमीटर की दूरी तथा शुल्कके रुप में 300/- रुपये के भुगतान के उपाश्रित एक कार्यालयी वाहन के उपयोग करने का अनुमोदन प्राप्त होगा । उनके वेतन से प्रत्येक महीने में उस राशिकी कटौती कीजाएगी ।

परन्तु , यदि कुलसचिव कार्यालयी वाहन का उपयोग किसी व्यक्तिगत कार्य के लिये न करके कार्यालय में उपस्थित रहने हेतु आवास-स्थल से कार्यालय तथा वहाँ से वापसी के लिये उपयोग करते हैं तो उनके वेतन से हर महीने 100/- काटे जाएँगे ।

6. कुलसचिव विश्वविद्यालय के कर्मचारी छुट्टी- नियमों के अनुसार स्थायी कर्मचारियों को मिलनेवाली अर्जित छुट्टी, अर्द्ध वेतन छुट्टी तथा अन्य प्रकार की छुट्टीयों के हकदार होंगे ।

7. विश्वविद्यालय के नियमानुसार कुलसचिव को अपनी नियुक्तिके कार्यकाल को पूर्ण करने की शर्त पर कुल सर्वाधिक 240 दिनों के उपाश्रित , अपने कार्यकाल की समाप्ति होने पर उनके हिसाब में शेष बची अनप्रयुक्त अर्जित छुट्टी के दिनों के लिए नकद भुगतान का अनुमोदन प्राप्त होगा ।

8. सेवा के कार्यकाल के दौरान कुलसचिव की पूर्ति के देहान्त हाने की स्थिति में, उनके द्वारा नियुक्ति के निबन्धनों की पूर्ति न हाने पर भी, उनके परिवार को छुट्टी नकद भुगतान किया जाएगा ।

9. विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए सेवा निवृति- लाभ संबंधी संविधियों के अनुरुप कुलसचिव के सन्दर्भ में सेवा- निवृति -लाभ उपलब्ध रहेंगे ।

10. अधिनियम तथा संविधियों में विहित शर्तों एवं निबन्धनों के अनुरुप कुलसचिव की नियुक्ति की जाएगी ।

11. अखिल भारतीय आधार पर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा समय - समय पर कुलसचिव के लिए विहित अर्हता एवं अनुभव आदि के बारे में निश्चय किया जाता है । जब तक प्रबन्धन बोर्ड अन्यथा निर्णय न ले , संघ लोक सेवा आयोग के एतद् विषयक निर्णय इस विश्वविद्यालय के सन्दर्भ में भी लागू होंगे ।

कुलसचिव के पद संबंधी विज्ञापन न्यूनतम तीन अखबारों में प्रकाशित किया जाएगा , जिनमें से न्यूनतम एक राष्ट्रीय स्तर का अखबार होगा । 12.

युक्त विज्ञापन के जरिए उपयुक्त प्रत्याशी उपलब्ध न हाने की स्थिति में, चयन समिति प्रबन्धन बोर्ड को अभिनियुक्ति के आधार पर केन्द्रीय/ 13 . राज्यिकसरकार अथवा ख्यातिप्राप्त शैक्षिक संस्थान/संस्था के किसी सुयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति हेतु सुझाव दे सकेगी ।

अध्यादेश संख्या-10

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/ 2/ 4.4 ( 10 ) के इद्वारा गृहित एवंभानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/96- डेस्क (यू) दिनांक 30.10.96 इवारा अनुमोदित ) वित्त अधिकारी की सेवा की शर्तें एवं निबन्धन तथा परिलब्धियों

(अधिनियम के खण्ड-16 द्वितीय अनुसूची की संविधि संख्या-6 (3 ) के अन्तर्गत )।

1 . संबिधि के अनुसार वित्त अधिकारी विश्वविद्यालय के पूर्णकालीन अधिकारी होंगे ।

वित्त अधिकारी , प्रबन्धन बोर्ड द्वारा समय - समय पर अपने कर्मचारियों के लिए अनुमोदित किए जानेवाले अन्य भत्तों के साथ 4500/- , 150 / - , 2. 5700/- , 7300/- रुपये के वेतनमान पर वेतन प्राप्त करेंगे । प्रबन्धन बोर्ड के निर्णयानुसार यह वेतनमान परिवर्तन- संशोधन का उपाश्रित होगा ।

परम्तु, असम/ भारत सरकार के अथवा अन्य संस्था/ संस्थान के किसी अभिनियुक्त व्यक्ति की सेवा से कुलसचिव के पद को भरे जाने की स्थिति में [भाग III-- खण्ड 4 ]

57

भारत का राजपत्र असाधारण

इस विश्वविद्यालय या भारत सरकार के अभिनियुक्ति नियमों अथवा प्रबन्धन बोर्ड द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के सन्दर्भ में स्वीकृत किए जानेवाले निबन्धनों एवं शर्तों के अनुसार उनके वेतन एवं अन्य भत्ते तथा सेवा-शर्तें एवं निबन्धन विनियमित किए जाएँगें ।

अभिनियुक्तिमें आनेवाले अधिकारी द्वारा विश्वविद्यालय के बेतनमान को ग्रहण किए जाने की स्थिति हा, तो सेवा से जुड़ने के तीन महीने के भीतर उसे ग्रहण करना होगा ।

3. प्रबन्धन बोर्ड चयन समिति की सिफारिश पर किसी विशेष रुप से उपयुक्त प्रत्याशी को उच्चतर प्रारंभिक वेतन-मान का प्रस्ताव दे सकेगा ।

4. वित्त अदिकारी को विश्वविद्यालय की ओर से बिना असबाबों का एक आवास- स्थल उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके लिए उन्हें स्वाभाविक दर पर किरायाचुकाना होगा।

5. वित्त अधिकारी को अपने आवास- स्थान से कार्यालय में उपस्थित होने हेतु एक कार्यालयी बाहन के उपयोग का अनुमोदन मिलेगा , तथा इसकेलिये उन्हें शुल्क के रुप में हर महीने 100/- रुपए चुकाने होंगे । यह राशि उनके वेतन से हर महीने काट ली जाएगी ।

6. वित्त अधिकारी विश्वविद्यालय के कर्मचारी- छुट्टी- नियमों के अनुसार स्थायी कर्मचारियों को मिलनेवाली अर्जित छुट्टी , अर्द्ध वेतन छुट्टी तथा अन्य प्रकार की छुट्टीयों के हकदार होंगे ।

7. विश्वविद्यालय के नियमानुसार वित्त अधिकारी को अपनी नियुक्ति के कार्यकाल को पूर्ण करने की शर्त पर कुल सर्वाधिक 240 दिनों के उपाश्रित, अपने कार्यकाल की समाप्ति होने पर उनके हिसाब में शेष बची अनप्रयुक्त अर्जित छुट्टी के दिनों के लिए नकद भुगतान का अनुमोदन प्राप्त होगा ।

8. सेवा के कार्यकाल के दौरान वित्त अधिकारी के देहान्त हाने की स्थिति में, उनके द्वारा नियुक्ति के कार्यकाल की पूर्ति न हाने पर भी, उनके परिवार कोछुट्टी नकंद भुगतान किया जाएगा ।

9. रहेंगे । विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए सेवा निवृति- लाभ संबंधी संविधियों के अनुरुप, बित्त अधिकारी के सन्दर्भ में सेवा निवृति-लाभ उपलब्ध

अधिनियम तथा संविधियों में विहित शर्तों एवं निबन्धनों के अनुरुप वित्त अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी । 10.

11. जब वित्त अधिकारी का पद रिक्त होता है , तब कुलसचिव न्यूनतम तीन समाचार पत्रों में उसका बिज्ञापन निकालेंगे- जिसमें से कम-से- कम एक राष्ट्रीय स्तर का समाचार-पत्र होगा । विश्वविद्यालय की संविधियों एवं अध्यादेशों में विहितानुसार आवश्यक अर्हता , अनुभव तथा समस्तसेवा-शर्तों एवं निबन्धनों का उल्लेख विज्ञापन में रहेगा ।

12. अर्हताएँ एवं अनुभव:

वित्त अधिकारी के पद के प्रत्याशी में निम्नांकित अर्हताएँ एव अनुभव होने चाहिए ।

12.1 उनके पास वाणिज्य- वित्तीय संचालन में न्यूनतम द्वितीय श्रेणी की स्नातकोत्तर डिग्री होनी बाहिए ।

अथवा

उनके पास इन्स्टट्युट ऑफ कस्ट एण्ड वर्क्स एकाउन्ट्सऑफ इंडिया ( आई. सी. डबल्यू.ए ) अथवा इन्स्स्टिट्यूट ऑफ भार्टर्ड ( एकाउन्टेन्ट्स) में व्यावसायिक अर्हता होनी चाहिए । 12.2 उनके पासकिसीविश्वविद्यालय के वित्त एवं लेखा विभाग में अथवा सरकारी विभाग की वित्तीय संस्थामें अधिकारी के ग्रेड पर कार्य- निर्वाह करने के न्यूनतम 15 वर्षों का अनुभव होना चाहिए ।

परन्तु, वित्त एवं लेखा कार्य का संचालन -स्तर पर पर्याप्त प्रशासनिक अनुभव वाले अथवा प्रसिद्ध व्यावसायिक संस्था या विश्वविद्यालय या सरकारी विभाग में न्यूनतम 10 वर्षों के प्रशासनिक अनुभववाले प्रत्याशियों को अग्रता दी जाएगी ।

12.3 साक्षात्कार के लिए आमन्त्रण देने तथा प्रबन्धन बोर्ड को सिफारिश करते समय , अन्यथा असामान्य रुप में अच्छे आवेवनकर्ता के सन्दर्भ में उपरोक्त अर्हताओं एवं अनुभवों में से किसी में ढील दी जा सकेगी ।

13. चाहिए। उम्र: किसी प्रत्याशी की उम्र नियुक्ति हेतु किए जानेवाले आवेदन के ग्रहण की अन्तिम तिथि को 45 वर्षों से कम तथा 55 वर्षों से अधिक नहीं होनी 14. चयन समिति तथा चयन समिति को बुलाने की प्रक्रिया तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में सन्निविष्ट संविधियों विहितानुसार होंगी।

15. सारे योग्य प्रत्याशी चयन समिति के समक्ष साक्षात्कार में उपस्थिति होने हेतु बुलाए जाएंगे,

परन्तु, चयन समिति को यह अधिकार होगा कि प्रत्याशियों की अनुपस्थिति में भी उनके जीवन-सभ्यों पर विचार करें।

16 मुक्तविज्ञापन के जरिए उपयुक्त प्रत्याशी के उपलब्ध न होने की स्थिति में, चयन समिति प्रबन्धन बोर्ड को अभिनियुक्ति के आधार पर केन्द्रीय/ राज्यिक सरकार अथवा ख्याति प्राप्त शौक्षिक संस्थान/ संस्था के किसी सुयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति हेतु सुझाब दे सकेगी ।

4470 G1/08-8 58

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III -SEC . 4 ]

अध्यादेश संख्या-11

( प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/ 2 / 4.4 ( 11 ) तथा दिनांक 28.12.96 की प्रस्ताव सख्या-

बो. -96/4/ 2.10 के द्वारा गृहित

एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/ 96-डेस्क (यू) दिनांक 12.1.98 द्वारा अनुमोदित) तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के खण्ड-28 ( 1 ) ( क) के तहत विद्यार्थियों की प्रविष्टि एवं उनके नामांकन के बारे में ।

1. आवेदन-आमन्त्रण:

विश्वविद्यालय के किसी विभाग/केन्द्र में किसी अध्ययन- क्रम में प्रविष्टियोग्य प्रत्याशियों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर की जाएगी । इसी उद्देश्य से, कुलसचिव के द्वारा न्यूनतम एक स्थानीय तथा एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित होने वाले मुक्त विज्ञापन के जरिए विहित प्ररुप पर आवेदन आमन्त्रित किए जाएँगे । कुलसचिव के कार्यालय से सूचना पुस्तिका एवं आवेदन प्ररुप इसी उद्देश्य से निर्धारित किए जानेवाले शुल्क के भुगतान पर उपलब्ध कराएजाएँगे ।

2. 1 किसी अध्ययन - क्रम के लिए प्रत्याशियों का चयन वस्तुतः श्रेष्ठता के आधार पर किया जाएगा ।

3. आसनों का आरक्षण:

अनुसुचिव जातियों, अनुसुचिव जनजातियों अन्य पिछड़ी जाति आदि के प्रत्याशियों के लिए निम्नांकित रुप में 49 %% आसनों का आरक्षण रहेगा

15%

क) अनुसुचिव जाति

ख) अनुसचिव जनजाति 72%

ग) अन्य पिछड़ी जाति-अन्य

अधिकपिछड़ीजाति 27%

उपरोक्त कोटियों के प्रत्येक के प्रत्याशियों की पृथक सूचियाँ श्रेष्ठता के आधार पर योग्य प्रत्याशियों में से प्रस्तुत की जाएँगी ।

परन्तु, इन तीन कोटियों में से किसी में यदि कुछ आरक्षित आसन रिक्त रहे जाते हैं, तो विशेष कोटि के लिए आरक्षित उन रिक्त स्थानों की पूर्ति में प्रथम अग्रता अन्य कोटियों के प्रत्याशियों को दी जाएगी ।

परन्तु, यह और कि योग्य प्रत्याशी के अभाव में आरक्षित कोटे का कोई आसन रिक्त रह जाता है, तो वह आसन श्रेठता के आधार पर साधारण कोटि के योग्य प्रत्याशियों में से भरा जाएगा ।

4. प्रविष्टि के लिए न्यूनतम अर्हता:

जाएगी। विविध विषयों के अध्ययन - क्रम में प्रविष्टि हेतु न्यूनतम अर्हता सम्बद्ध विषय /अध्ययन- क्रम के विनियमों/पाटवक्रम के जरिए विनिर्दिष्ट की 5 प्रत्येक अध्ययन - क्रम के सन्दर्भ में प्रविष्टि हेतु विहित शैक्षिक तथ्याभिलेख तथा/अथवा योग्यतामूलक प्रवेश परीक्षा में मौलिको में प्रत्याशी प्रत्याशियों परविचार किया जाएगा ।

6j विशेष आरक्षण:

असम से भिन्न दूसरे प्रान्तों के तथा विदेशी राष्ट्रों के प्रत्याशियों के लिये भारत सरकार विभाग में निश्चित संख्या के आसन आरक्षित कर सकेगी । हालोंकि ऐसे आरक्षित आसनों की संख्या किसी विभाग के कुल आसनों की संख्या के 5% से अधिक नहीं हो सकेगी । सम्बद्ध अध्ययन - क्रम के लिए विहित न्यूनतम अर्हता की पूर्ति की शर्त पर प्रायोजित प्रत्याशियों को ही प्रविष्टि दी जा सकेगी ।

7 अध्ययन-क्रम:

प्रस्येक अध्ययन - क्रम दी तरह का होगा- क्रेडिट अध्ययन - क्रम और लेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम । विद्यार्थी के प्रदर्शन का लेखा- जोखा सिर्फ क्रेडिट अध्ययन- क्रम के सामग्रिक परिणाम के आधार पर लिया जाएगा । लेखा परीक्षण अध्ययन- क्रम में विद्यार्थी के प्रदर्शन का सामग्रिक परीक्षा-फल पर कोई प्रभाव नहींपड़ेगा। हालाँकि प्रत्येक विद्यार्थि को न्यूनतम एक लेखा परीक्षण अध्ययन- क्रम लेना होगा और किसी डिग्री/डिप्लोमा के लिये योग्य प्रमाणित कारने के लिए उस लेखा परीक्षण अध्ययन - क्रम में न्यूनतम ग ( सी ) ग्रेड प्राप्त करना होगा- जिसे ग्रेड- कार्ड पर अंकित किया जाएगा ।

एक छमाही में साधारणतः एक लेखा परीक्षण अध्ययन- क्रम की अनुमति दी जाएगी ।

8! चुनि गए प्रत्याशियों को अध्यादेश द्वारा विनिर्दिष्ट शुल्कों के भुगतान पर प्रविष्ट कर लिया जाएगा ।

9. विश्वविद्यालय में प्रविष्टिप्राप्त विद्यार्थी विश्वविद्यालय हॉल का सदस्य होगा ।

10. जब कभी यह प्रमाणित होगा कि प्रविष्टि प्राप्त करने हेतु किसी विद्यार्थी ने गलत तथ्य दिया है अथवा छलपूर्ण तरीका अपनाया है तो उसकानाम 59

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III-- खण्ड 4]

विश्वविद्यालय की नाम सूची से हटा दिया जाएगा ।

11. नामांकन:

विविध अध्ययन-क्रमों के लिए प्रविष्टिप्राप्त विद्यार्थियों के नाम प्रत्येक अध्ययन- क्रम के लिए अलग अलग रुप में रक्षित नामांकन रजिस्टर में दर्ज किए जाएँगे। सही एवं पर्याप्त कारणों से किसी विद्यार्थी का नाम का बना रहना यदि अवांछित हो तो कुलपति के आदेश के तहत उसे नामांकन रजिस्टर से हटादिया जाएगा ।

1. नियमों एवं आदेशों का परिपालन:

विश्वविद्यालय में प्रविष्टिप्राप्त विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय प्राधिकारी द्वारा समय - समय पर जारी किए गए अध्यादेशों, नियमों एवं आदेशों का पालन करना होगा । विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय के अध्यादेशों, नियमों एवं आदेशों के उपबंधों के उल्लंघन किए जाने की स्थिति में उनपर विश्वविद्यालय से बहिष्करण सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई लागू होगी ।

अध्यादेश संख्या-12

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/2/4.4 ( 12 ) के इवारा गृहित एवंमानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/96-डेस्क( यू) दिनांक 30.10.96 द्वारा अनुमोदित) तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के खण्ड-28 ( 1 ) ( ग) के अन्तर्गत शिक्षण एवं परीक्षा के माध्यम के बारे में ।

1.

शिक्षण का माध्यमः

शिक्षण एवं परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी होगा । परन्तु , भाषा विषयों के मामलों में सम्बद्ध भाषाएँ शिक्षण एवं परीक्षा का माध्यम होंगी ।

2. परीक्षा:

क ) विश्वविद्यालय की सभा परीक्षाएँ, अन्यथा बताए न जाने पर, तेजपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होंगी ।

ख) प्रत्येक छमाही के अन्त की परीक्षा तिथियों की सूचना परीक्षाओं के नियन्त्रक द्वारा दीजाएगी।

ग ) किसी परीक्षा में बैठने की अनुमति के आवेदन विभाग/केन्द्र के प्रमुख के जरिए विनिर्दिष्ट तिथि के भीतर निर्धारित शुल्क सहित परीक्षाओं केनियन्त्रक के पास जमा करने होंगे ।

परन्तु, विनिर्दिष्ट तिथि से 7 दिन बाद तक विभाग /केन्द्र प्रमुख की सिफारिश पर समय- समय पर निर्धारित किए जानेवाले दण्ड शुल्क के भुगतान किए जाने की स्थिति में देरी के आवेदन स्वीकार किए जा सकेंगे ।

घ) किसी परीक्षा में बैठने में असफल प्रत्याशी उसके द्वारा चुकाए गए शुल्कों को वापस प्राप्त करने का अधिकारी में होगा ।

अध्यादेश संख्या-13

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/ 2/ 4.4 ( 13 ) के इवारा गृहित

एवंमानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/ 96-डेस्क (यू) दिनांक 30.10.96 इद्वारा अनुमोदित ) तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के खण्ड-28 ( 1 ) ( ङ) के तहत विश्वविद्यालय में अध्ययन के विषय तथा डिग्रियों एवं डिप्लोमाओं के लिए प्रविष्टि/ परीक्षा हेतु मांग किए जानेवाले शुल्कोंके बारे में ।

-100/- रुपये

1. एम.ए

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार)

10/- रुपये

(कोई भीविषय)

2. नामांकन शुल्क (प्रत्येक छमाही)

-250/- रुपये

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

- 50/- रुपये

4. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार)

50/- रुपये

5. विद्यार्थियों के कार्य- कलाप शुल्क (प्रत्येक छमाही )

20/- रुपये

6. परिचय -पत्र शुल्क

2.

-100/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

10/- रुपये

एम. एस. सी. (कोई भीविषय)

2. नामांकन शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

-250/- रुपये

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

50/- रुपये

4. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

50/-रुपये

5. प्रयोगशाला शुल्क ( प्रत्येक छमाहो )

50/- रुपये

6. विद्यार्थियों के कार्य- कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

200/- रुपये

7. परिचय -पत्र शुल्क 60

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

-200/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

3. एम. एस. जी. (तकनीकी) (कोई भीविषय)

11/- रुपये

2. नामांकन शुल्क (प्रत्येक छमाही )

-250/- रुपये

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

5(1/ - रुपये

4. प्रयोगशाला शुल्क (प्रत्येक छमाही)

-100/- रुपये

5. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

5(1/- रुपये

6. विद्यार्थियों के कार्य- कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

7. परिचय -पत्र शुल्क

4. : एम. सौ. ए.

200/- रुपये

-200/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

10/- रुपये

2. नामांकन शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

-250/- रुपये

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

50/- रुपये

4. प्रयोगशाला शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

-100/- रुपये

5. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

50/- रुपये

6. विद्यार्थियों के कार्य-कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

7. परिचय-पत्र शुल्क

5. एम. बी. ए.

20/- रुपये

-100/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

10/- रुपये

2. नामांकन शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

-250/- रुपये

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

-100/- रुपये

4. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

50/- रुपये

5. विद्यार्थियों के कार्य- कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

6. परिचय- पत्र शुल्क

20/- रुपये

-150/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

6. एम.फील (कोई भीविषय)

50/- रुपये

2. नामांकन शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

-250/- रुपये -

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

50/- रुपये

4. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार)

50/- रुपये

5. विद्यार्थियों के कार्य- कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

6. परिचय-पत्र शुल्क

7. पी. एच. डी.

20/- रुपये

-300/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार)

-100/- रुपये

2. नामांकन शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

50/- रुपये

3. अध्ययन-क्रम शुल्क ( प्रत्येक अध्ययन- क्रम )

4. शोध शुल्क -500/- रुपये

-200/- रुपये

5. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

50/- रुपये

6. विद्यार्थियों कार्य- कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

7. परिचय-पत्र शुल्क

8. डिप्लोमा अध्ययन क्रम

20/- रुपये

-100/- रुपये

1. प्रवेश शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

10/- रुपये

2. नामांकन शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

-200/- रुपये

3. शिक्षण शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

50/- रुपये

4. पुस्तकालय शुल्क ( प्रविष्टि के समय एक बार )

50/- रुपये

5. प्रयोगशाला शुल्क ( प्रत्येक छमाही)

50/- रुपये

6. विद्यार्थियों कार्य-कलाप शुल्क ( प्रत्येक छमाही )

7. परिचय-पत्र शुल्क

9. परीक्षा, अंक- पत्र ( मार्कशीट) और प्रमाण-पत्रों के शुल्क:

परीक्षा

सैद्धान्तिक

व्यावहारिक

1. एम. ए .

50/-( प्रत्येक छमाही)

50/-

2. एम. एस. सी.

20/- रुपये

अंक-पत्र-ग्रेड-कार्ड

प्रमाण-पत्र (लघु) शोध प्रबंध 150/-

25/-

150/-

100/- ( प्रत्येक छमाही )

25/-

50/- 50/- 61

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

50/-

25/-

150/-

100/-

50/-

3. एम. एस. सी. (तकनीकी)

25/-

50/-

150/-

100/-

50/-

4. एम. सी. ए.

50/-

25/-

150/-

100/-

50/-

5. एम. बी. ए.

50/-

500/-

150/-

150/-

7. एम.फील.

100/-

2000/-

8. पी. एच. डी.

10. परन्तु, प्रवन्धन बोर्ड किसी भी छमाही से प्रभावी बनाकर उपरोक्त शुल्कों में संशोधन करने को मुक्त होगा ।

अध्यादेश संख्या-14

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो/ 96/2/ 4.4 ( 14 ) के दूद्वारा गृहित एवंमानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/ 96-डेस्क(यू) दिनांक 30.10.96 इद्वारा अनुमोदित) परीक्षण निकायों तथा संतुलकों के कार्यकाल, नियुक्ति के ढंग तथा कर्तव्यों सहित परीक्षा के आयोजन के बारे में । अधिनियम के खण्ड 23 ( 1 ) ( छ) के तहत।

1. परीक्षा का आयोजन:

प्रत्येक विभाग/केन्द्र के 60% सतत मूल्यांकन के अंकों हेतु परीक्षा का आयोजन विभाग/केन्द्र के प्रमुख के निरीक्षण में मम्बद्ध विभाग -केन्द्र द्वारा किया जाएगा ।

परन्तु, 40 % अंकों के महत्ववाली छमाही के अन्त की परीक्षा का आयोजन परीक्षाओं के नियन्त्रक द्वारा किया जाएगा ।

परन्तु, यह और कि अन्तिम परीक्षा-फल और ग्रेड -कार्ड के प्रस्तुतीकरण तथा तथ्याभिलेख दर्ज करने के लिए विभाग /केन्द्र नियन्त्रक के पास जमा किएजाएँगे ।

2 . परीक्षकों एवं सन्तुलकों की नियुक्ति:

2.1 एम. फील./पी. एच. डी. जिग्री से भिन्न अन्य समस्त परीक्षाओं के लिए परीक्षकों एवं सन्तुलकों की सूची विभाग केन्द्र द्वारा प्रस्तुत की जाएगी ।

संकायाध्यक्ष आवश्यक संवीक्षण के पश्चात उस सूची को अग्रसारित करके उपयुक्त प्राधिकारी के अनुमोदन हेतु परीक्षाओं के नियन्त्रक के पास भेजेंगे । 2.2 एम. फील./पी. एच.डी. के लिए परीक्षकों की सूची सम्बद्ध शोध निर्देशक के द्वारा परीक्षाओं के नियन्त्रक के पास शोध समिति के विचार एवं अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करने हेतु जमा की जाएगी । यह सूची आवश्यक संख्यक परीक्षकों के चयन हेतु कुलपति के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी ।

2.3 ऐसे/अध्ययन - क्रम की परीक्षा के प्रश्नपत्र सम्बद्ध विभाग के प्रमुख तथा एक विषय विशेषज्ञ द्वारा गठित समिति के द्वारा संतुलित किए जाएँगे ।

2.4 बाहरी परीक्षकों/संतुलकों को समय समय पर विहित दरों पर पारिश्रमिक दिए जाएँगे ।

अध्यादेश संख्या-15

(प्रबन्धन बोर्डद्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/ 2/ 4.4 ( 15) के इद्वारा गृहित

एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/ 96 -डेस्क(यू) दिनांक 30.10.96 द्वारा अनुमोदित) तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में शामिल संविधि-20 (5) के अन्तर्गत शिक्षकों एवं सांविधिक अधिकारियों की नियुक्तिहेतु चयन समितिद्वारा सिफारिश प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया के बारे में अध्यादेश ।

1. चयन समिति को विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञापित पद के लिये चयन से संबंधित अर्हताओं, अनुभवों तथा अन्य विषयों के निबन्धनों एवं शर्तों की जानकारी दी जाएगी और समिति इन बातों पर सम्यक ध्यान देगी ।

2.1 कुलसचिव अथवा कुलपति द्वारा इसी उद्देश्य से नियुक्त अधिकारी द्वारा प्रामाणीकृत , अनुपस्थिति में ध्यान चाहनेवाले और ध्यान देने योग्य प्रत्याशियों सहित समस्तप्रत्याशियों का सारणी रुप में तैयार एक विस्तृत तुलनात्मक विवरण प्रत्येक प्रत्याशी के आबेदन तथा/अथवा जीवन तथा की मूल प्रतिके साथ चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।

2.2. साक्षात्कार के प्रारंभ से पहले कुलसचिव अथवा इसी उद्देश्य से कुलपति द्वारा नियुक्त अधिकारी अर्हताओं , अनुभवों , उम्र के प्रमाण तथा प्रत्याशी द्वारा प्रस्तुत किएजानेवाले किसी विवरण के तथ्याभिलेख से संबंधित मूल प्रमाण -पत्रों की सच्चाई की जाँच करके उन्हें प्रामाणीकृत करेंगे ।

2.3 अध्यक्ष द्वारा विचारार्थ रखी जानेवाली प्रत्याशियों की सूची के आधार पर चयन समिति अपनी सिफारिश प्रस्तुत करगी । सूची में अनुपस्थिति की हालत में ध्यान चाहनेवाले प्रत्याशियों से संबंधित व्यतीत समय की आजीविका, शिक्षा इत्यादि संबंधी लिखित संक्षिप्त विवरण भी सम्मिलित होंगे ।

2.4 प्रत्याशियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन हेतु चयन समिति अपनी पद्धति का निर्णय स्वयं कर सकेगी ।

परन्तु, दो या अधिक प्रत्याशियों को चुने जाने की स्थिति में प्रबन्धन बोर्ड के लिये निश्चित रुप से अग्रता- क्रम पर सिफारिश भेजनी होगी ।

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

62

परन्तु, यह और कि चयन समिति के द्वारा , विनिर्दिष्ट अर्हताओं/अनुभवों में से किसी की ढील पर किसी प्रत्याशी की नियुक्ति की सिफारिश की जाने कीस्थिति में, प्रबन्धन बोर्ड के विचारार्थ चयन समिति की कार्यवाही में ऐसे कार्य को उचित ठहराते हुए विवरण वर्ज किया जाएगा ।

2.5 जब चयन समिति की यह राय हो कि किसी चुने गये प्रत्याशी को उच्चतर प्रारंभिक वेतन के प्रस्ताव दिये जाने संबंधी सिफारिश की जाए , तो वह प्रबन्धन बोर्ड के विचारार्थ अपनी कार्यवाही में ऐसे कार्या को उचित ठहराते हुए विवरण दर्ज करके वैसी सिफारिश कर सकेगी।

परन्तु, प्रबन्धन बोर्ड द्वारा सिफारिश को ग्रहण करने हेतु वेतन एक शर्त नहीं बनेगा ।

3. यदि इस प्रक्रिया से किसी पद पर नियुक्ति के लिये योग्य प्रत्याशी उपलब्ध न हो तो, चयन समिति के अध्यक्ष अभिनियुक्ति की स्थिति मेंनियुक्ति हेतु ध्यान चाहनेवाले व्यक्तियों के जीवन तथ्यों सहित एक सूची प्रस्तुत कर सकेंगे । चयन समिति सम्यक विचार विमर्श के पश्चात प्रबन्धन बोर्ड द्वारा अभिनियुक्ति की स्थिति में नियुक्तिप्रदान करने हेतु ऐसे व्यक्ति की सिफारिश कर सकेगी । :

4. चयन समिति कीकार्यवाही गोपनीय समझी जाएगी । अतः चयन पर विचार विमर्श एवं सिफारिश करते समय सिर्फ चयन समिति के सदस्य ही उपस्थित रहेंगे ।

5. प्रबन्धन बोर्ड द्वारा अनुमोदित चयन समिति की सिफारिशें अनुमोदन की तिथि से एक वर्ष तक वैध रहेंगी।

अध्यादेश संख्या-17

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्तावसंख्या बो-96/ 2/ 7 के द्वारा गृहित एवंमानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/ 96-डेस्क ( यू) दिनांक 30.10.96 द्वारा अनुमोदित) अधिनियम के खण्ड-28 ( 5) के अन्तर्गत पुस्तकालय समिति के बारे में ।

पुस्ताकलय समितिके गठन , क्षमताएँ एवं कार्य :

1.

गठन:

एक पुस्ताकलय समिति होगी- जिसका गठन निम्नांकित सदस्यों से होगी :

1.

अध्यक्ष

कुलपति

(कुलपति की अनुपस्थिति में सह कुलपति बैठक की अध्यक्षता करेंगे । सह कुलपति की अनुपस्थिति में वरिष्ठतम संकायाध्यक्ष द्वारा बैठक की अध्याक्षता कीजाएगी ) ।

2.

सदस्य

सह

3.

सदस्य

सारे संकायाध्यक्ष

4. योजना एवं विद्या समिति द्वारा मनोनीत किए

जानेवाले एक व्यक्ति- जो संकायाध्यक्ष से भिन्न हो सदस्य

5.

सदस्य

पुस्तकालयाध्यक्ष

:

पुस्तकालयाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उप पुलस्तकालयाध्यक्ष तथा उप पुस्तकालयाध्यक्ष की अनुपस्थिति में सह पुस्तकालयाध्यक्ष समिति के सदस्य सचिव होंगे ।

चार सदस्य कार्यवाहक संख्या बनाएँगे । मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्षों का होगा ।

2. क्षमताएँ एवं कार्य:

पुस्तकालय समिति की क्षमताएँ एवं कार्य निम्नप्रकार से होंगे:

2.1 पुस्तकालय के संचालन हेतु सामान्य नियम बनाना

2.2 पुस्तकालय के सामग्रिक विकास की दिशा में पुस्तकालयाध्यक्ष को परामर्श देना,

2.3 प्रबन्धन बोर्ड के समक्ष जमा करने हेतु पुस्तकालय के वार्षिक आय- व्यय के हिसाब का पूर्वानुमान प्रस्तुत करना,

2.4 विश्वविद्यालय के अनुमोदित वार्षिक बजट से विभागों एवं अध्ययन-क्रेन्दों को पुस्तकालय के लिए आवश्यक किताबें , पत्रिकाएँ , सामयिकी पुस्तकाएँ तथा अन्य सहायक उपस्करों के क्रय हेतु धनराशि का आवंटन करना ,

2.5 पुस्तकालय के वार्षिक स्टॉक -ग्रहण की व्यवस्थाकरना,

2.6 योजना एवं विद्या समिति की जानकारी एवं आवश्यक कार्यवाई हेतु पुस्तकालय के कार्य- कलापों के संक्षिप्त विवरण से पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन पर विचार करना तथा उसका अनुमोदन करना,

2.7 योजना एवं विद्या समिति-कुलपति द्वारा सौंपे जानेवाले ऐसे अन्य दायित्वों का निर्वाह करना ।

63 [भाग III- खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

अध्यादेश संख्या-18

(प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 27-6-96 की प्रस्ताव संख्या बो-96/ 2/ 7 के द्वारा गृहित एवंमानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-24/96- डेस्क (यू) बिमांक 30.10.96 इवाराअनुमोदित) अधिनियम के खण्ड-28 ( 3 ) के तहत निविदा एवं क्रय समिति के गठन के बारे में ।

1. एक निविदा एवं क्रय समिति होगी जो कार्यालयी उपकारणों , प्रयोगशाला के उपस्करों, रासायनिक द्रव्यों, असबाबों, स्टेशनेरी सामानों, वैद्युतिक सामग्रियों इत्यिादि की आपूर्ति से संबंधित निविदाओं का संवीक्षण तथा उन्हें ग्रहण करेगी ।

2. समिति का कार्यकाल अधिसूचना की तिथि से तीन वर्षों का होगा ।

3. समिति का गठन निम्नप्रकार से हो:

सदस्य

i) कुलसचिव

सदस्य

ii ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले . शैक्षिक विभागों के तीन प्रमुख

iii ) कुलपति द्वारा मनोनीत किए जानेवाले एक व्यक्ति जो खरीदने हेतु प्रस्तावित

सदस्य

सामग्रियों के बारे में विशेष ज्ञान रखता हो

सदस्यसचिव

iv ) वित्त अधिकारी

4. निविदा एवं क्रय समिति की सिफारिश अनुमोदनार्थ कुलपति के समक्ष रखी जाएगी । वित्तीय अनुमोदन की प्राप्ति के पश्चात ही क्रय-कार्य किया जाएगी ।

5. चार सदस्य कार्यवाहक संख्या बनाएँगे ।

6. एक लाख अथवा उससे अधिक रुपये मूल्य के उपस्करों का मामला हो और विशेषज्ञ सदस्य ( क्रमिक संख्या ( iii ) में उल्लेखानुसार ) अनुपस्थिति रहे - तो उनकी राय प्राप्त कर ली जाएगी ।

अध्यादेश नं -20

प्रबन्धन बोर्ड द्वारा दिनांक 29-8-98 की प्रस्ताव संख्या बी-98/ 3/ 32 के द्वारा गृहित

एवंमानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ. 14-19/ 98- डेस्क ( यू) दिनांक 16.2.2000 इद्वारा अनुमोदित)

तेजपुर विश्वविद्यालय 1993 के वाक्यांश नं 11 ( 3 ) के अनुसार कुलाधिपति यदि उपस्थित हों तो, विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेंगें- कुलाधिपति के अनुपस्थिति में कुलपति दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेगें ।

प्रतिपादन उपाधि के दीक्षांत समारोह पर - संविधि 32 के अम्बर द्वितीय अनुसूची के नियम।

1.0 प्रतिपादन उपाधि के उद्देश्य से साधारणतः एक दीक्षांत समारोह होगा जो सलाना उसी दिनांक और स्थान में होगा जो कुलाधिपति के पूर्व अनुमोदित के साथ कुलपति द्वारा होगा ।

2.0 कीर्ति उपाधि के एक विशेष दीक्षांत समारोह जो संविधि 29 के भीतर द्वितीय अनुसूची के नियम में विचार की गयी है उस प्रकार के समारोह उत्पन्न भी हो सकता है. वह कुलाधिपति से अनुमोदित किया गया हो ।

3.0 डिप्लोमा या डिग्रीयों में विश्वविद्यालय के कुल - सचिव और कुलपति के हस्ताक्षर होना चाहिए ।

4.0 विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के लिए सामुहिक सदस्य और अन्य प्रवीण मनुष्य के जैसे सदम्य और अन्य प्राधिकारी होगें जो खण्ड न ० 16 के नीचे दर्शाया गया है । वे दीक्षांत समारोह के शैक्षणिक वेश- भुषा की आवश्यकताओं को पुर्ति करेगें ।

5.0. दीक्षांत समारोह के लिए योग्य प्रार्थीयों से आवेदन के साथ निमन्त्रण आवेदन के साथ निश्वित शुल्क का सूचना दीक्षांत समारोह के 6 सप्ताह पुर्व देगें ।

6.0. कुल- सचिव प्रत्येक दीक्षांत समारोह के सदस्य को दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम का एक विस्तार जारी करेंगे और दीक्षांत समारोह के दिन से कम से कम 10 दिन पहले यह प्रक्रिया होगा ।

7.0 परवर्ती साल , यदि दीक्षांत समारोह नहीं सम्पन्न हो तो विद्यार्थी , जो पिछले दीक्षांत समारोह के बाद परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हो , अगले दीक्षांत समारोह में फॉम और शुल्क देने के बाद दीक्षांत समारोह में प्रवेश होने में सक्षम होगें ।

यदि कोई प्रार्थी दाखिले के लिए आवेदन पत्र जमा नहीं किये हो या दीक्षांत समारोह में भाग नहीं लिए हों ऐसे प्रार्थी कुलाधिपति-कुलपति के अनुपस्थिति में उपाधि के लिए दाखिल हो सकेगे और दीक्षांत समारोह के बाद निदिष्ट उद्देश्य से निधारित फोर्म में आवेदन तथा निर्धारत शुल्क जमाकरने के बाद कुल- सचिव द्वारा उपाधि डिग्री ग्रहण कर सकेगे ।

8.0 कीर्ति उपाधि केवल दीक्षांत समारोह में प्रदान कि जायेगी और व्यक्ति द्वारा लिया जाएगा या अनुपस्थिति में ।

[PART III-SEC . 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

64

9.0 दीक्षांत समारोह में प्रस्तुतिकरण व्यक्ति -व्यक्तियों जिन्हें कृर्ति उपाधि- उपाधियाँ प्रदान कि जायेगी । वह विश्वविद्यालय के कुलपति या बरिष्ठ डीन द्वारा होगा ।

10.0 विश्वविद्यालय के निजी डीन या उनके उनकी उपस्थिति में भार प्राप्त डीन अपने प्रार्थीयों को प्रस्तुत करेगें । कुलाधिपति या उनके उनकी अनुपस्थिति में कुलपति दीक्षांत समारोह के उपाधि के पुरस्कार दे सकते हैं ।

11.0 मेडल पुरस्कारपानेवाले का नाम विश्वविद्यालय के कुल - सचिव द्वारा पढ़ा जाएगा ।

12.0 प्रार्थी केडिग्री में नामांकन का प्रदान कुल - सचिव करेंगे ।

13.0 दीक्षांत समारोह में प्रार्थी को डिग्री प्रमाण-पत्र: कुलपति द्वारा प्रदान की जायेगी ।

14.0 शैक्षणिक वेशभुषा-पोशाक एस्र्काभ का वर्णन कुलपति के द्वारा निर्धारित की जायेगी ।

दीक्षांत समारोह की पद्धति:

15.0 कुलपतिःद्वारा निर्धारित शैक्षणिक पोशाक ही दीक्षांत समारोह में सभी प्रार्थी द्वारा पहनी जायगी । कोई भी प्रार्थी बिना उपयुक्त पोषाक के दीक्षांत समारोह में प्रवेश नहीं कर सकेंगे ।

16.0 कुलाधिपति, मुख्यअतिथि, कुलपति, प्रो. कुलपति, कुल- सचिव , विद्यालय के डीन , विश्वविद्यालय के प्राधिकारी सदस्य और अंश दीक्षांत समारोह के पोशाक पहनेंगे जो कुलपति द्वारा निर्धारित की गयी हो और एक स्थान पर एकत्रित होंगे जिस उद्देश्य के लिए जो निर्धारण किया गया हो और दीक्षांत समारोह कक्ष में शोभायात्रा निम्न क्रम के अनुसार होगा ।

विश्वविद्यालय के झंडे के साथ कुल- सचिव ।

प्रबंधक बोर्ड के सदस्य ।

योजना और शैक्षणिक कमिटि/शैक्षणिक काउन्सिल और योजना बोर्ड के सदस्य ।

शिक्षा विद्यालय के डीन ।

वित्तीय अधिकारी , प्रो. कुलपति ।

कुलाधिपति।

मुख्य अतिथि।

कुलाधिपति- कुलपति यदि कुलपति अनुपस्थित हो तो ।

सभी अपने सुरक्षित आशन पर बेठेंगे ।

17.0 प्रार्थी निर्दिष्ट स्थान पर अपना शैक्षणिक पोशाक पहनकर शोभा यात्रा में भाग लेने के लिए एकत्रित होगें । दीक्षांत समारोह के निर्धारित समय से +15मिनट पहले प्रार्थी अपने विद्यालय के दल और विभाग के अनुसार अपने सुरक्षित आशन पर बैठेगे ।

18.0 जब शोभायात्रा कुल- सचिव द्वारा संचालित दीक्षांत समारोह में प्रवेश करेंगे , तब, सभी प्रार्थी और अन्य निमंत्रित व्यक्ति गण और बचे हुए लोग बचे खडे होंगे जबकि शोभायात्रा के सदस्य गण अपने आशन पर बैठे रहेंगे ।

19.0 विश्वविद्यालय के संगीत।

20.0 उप कुलपति द्वारा स्वागत के बाद लेकिन यदि कुलपति अनुपस्थित हों और कुलपति दीक्षांत समारोह के आशन पर बैठे हों तो प्रो.

कुलपति विद्यालय के वरिष्ठ डीन स्वागत भाषण देंगे ।

21.0 अध्यक्ष/ अध्यक्षा दीक्षांत समारोह के शुभारंभ करेंगे जो इस प्रकार कहेंगे-

22.0 "तेजपुर विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह प्रार्थी को जो उत्तीर्ण हुए हों और विश्वविद्यालय प्राधिकारी द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त किये हो डिग्री और डिप्लोमा पाने की बुलाये गये हों उन्हें डिग्री और डिप्लोमा प्रदान कि जायगी । "

23.0 तब कुलाधिपति के आदेश से , कुलपति प्रार्थी को सम्बोधन करेंगे और कहेंगे-

" मभी विश्वविद्यालय के प्रार्थी डिग्री और डिप्लोमा के लिए कृपया कर खड़े हो जायें" विद्यार्थी खड़े होने के साथ बुलाधिपति प्रार्थी को जो प्रश्न करेंगे उनका उत्तर देंगे "मैं प्रतिज्ञा करता हूँ " प्रत्येक प्रश्न के बाद ।

प्रश्न नं -1 क्या आप सत्यनिष्ठ और ईमानदारी से प्रतिज्ञा करते हैं और घोषणा करते हैं जिसे आपको सुपुर्द करता है डिग्री किन्नीमा में दाम्बिले के लिए, आप विश्वविद्यालय के अपने रोज मर्या जीवन में आचरण सदस्य होगें ?

उत्तर: मैं प्रतिज्ञा करता हूँ ।

प्रश्न नं-2 क्याआप सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से प्रतिज्ञा करते हैं कि आप सामाजिक सुरक्षा, सुनीति और समाज के औचित्य बनाये रखने में प्रयास करेंगे ?

उत्तरः मैं प्रतिज्ञा करता हूँ ।

प्रश्ननं-3 क्या आप सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से प्रतिज्ञा करते हैं कि आप अपने सत्य कर्म से अपने रोज मर्या जीवन के सभी प्रकार के उत्प्रेरण और पथ भ्रष्ट प्रभाव को प्रतिरोध करेंगे ?

उत्तर: मैं प्रतिज्ञा करता हूँ ।

अन्त में कुलपति सभी प्रार्थी को अपने आशन छोड़ने के लिए कहेंगे ।

65

भारत का राजपत्र : असाधारण

[भाग III-खण्ड 4 ]

24.0 तब कुलाधिपति कहेंगे- "प्रार्थी को अब प्रदान करें ' ।

25.0 निजी विद्यालय के डीन तब प्रार्थी को निम्नलिखित आदेश जारी करेंगे ।

1.. विज्ञान प्रौद्योगिकी विद्यालय

विज्ञान और प्रौद्योगिक विद्यालय के डीन कहेगें :

"क्याविज्ञान और विद्यालय के डिग्री ऑफ डॉ ऑफ फिलोशोफी, मास्टर ऑफ साईन्स एंड डिप्लोमा कोर्स के प्रार्थी बड़े होंगे, और जब प्रार्थी खड़े होजाये"

तब डीन कुलाधिपति-कुलपति के सम्बोधन करते हुए कहेंगे-

"श्रीमान् कुलाधिपति-कुलपति, महाशय , मैं ये सभी प्रार्थी को प्रस्तुत करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ किडिग्री भऔर डॉ. ऑफ फिलोशोफी, मास्टर ऑफ फिलोशोफी, मास्टरऑफ साइन्स एण्ड डिप्लोमा कोर्स के प्रार्थी अपने निजी विज्ञान और प्रौद्योगिकी बिद्यालय में प्रवेश करें ।" कुलाधिपति-कुलपति प्रार्थी खड़े होंगे निम्न शब्द के साथ दाखिलें करेंगे :

सदाचारी प्राधिकारी पोशाक के साथ तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति-कुलपति, मैं आपको आश्वसन देता हूँ कि आपने निजी डिग्री ऑफ डॉ. ऑफफिलोशोफी, मास्टर ऑफ फिलोशोफी, मास्टर ऑफ साइन्स एण्ड डिप्लोमा कोर्स में दाखिला करता हूँ और आपको अपने जीवन में डिग्री की श्रेष्ठता साबित करने के लिए जिम्मेदारी सौंपता हूँ ।

डीन प्रार्थी के प्रत्येक डिग्री और डिप्लोमा के लिए क्रमानुसार माम पढ़ेंगे जो नीचे दिया हुआ है

"पी.एच.डी. डिग्री के प्रार्थी अब मंच पर एक - एक कर कुलाधिपति से डिग्री प्रमाण-पत्र लेने के लिए आयेंगे । " ( प्रार्थी के नाम पड़ेगें ) इसी प्रकार एम. फील. विज्ञान और डिप्लोमा के मास्टर डिग्री के प्रार्थी को मंच पर अपना निजी प्रमाण -पत्र लेने के लिए बुलाये जायेंगे ।

प्रार्थी प्रमाण -पत्र लेने के बाद अपने आशन पर पुनर्ग्रहण करेंगे ।

2. उर्जा, पर्यावरण और प्राकृतिक स्त्रोत विद्यालय ।

3. प्रबंधन विज्ञान विद्यालय।

4. मानवतावादी और समाज विज्ञान विद्यालय

निजी डील विज्ञान और प्रौद्योगिकी विद्यालय में दशायें गयें सामान प्रद्धति को. अनुशरण करेंगे ।

26.0 एवसेन्टीया में डिग्री और डिप्लोमा के नामांकण में:-

कुल-सचिव कहेंगे -श्रीमान् कुलाधिपति-कुलपति, महाशय , मैं प्रस्तावित करता हूँ कि . लिए अपने निजी डिग्री और डिप्लोमा के लिए- (प्रार्थी के संख्या ) प्रार्थी एवसेन्टीया में नामांकन के

विभिन्नडिग्री और डिप्लोमा के एवसेन्टीया में प्रार्थी नामांकरण कुल - सचिव प्रस्तुत करेगें । कुलाधिपति/कुलपति तब कहेंगे- सदाचारी पोशाक के साथ मैं तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति- कुलपति, में नामांकित करता हूँ कि जो प्रार्थी सूची में हैं अपने निजी डिग्री और डिप्लोमाविभिन्न शिक्षा विद्यालय में, एवसेन्टीया में और प्रतिक में उसका अनुमति देता हूँ । कुल- सचिन उन प्रार्थी को उनके डिग्री और डिप्लोमा के पानेवाले को प्रस्तुत करने के साथ उन्हें अपने जीवन में डिग्री की श्रेष्ठता साबित करने के लिए कहेगें ।

27.0 कुलाधिपति तथा कुलपति द्वारा उद्बोधन

सत्य बोलो। सदाचार और दूसरों के प्रति क्षमाशिल बनों । सुनों दूसरे क्या कह रहे हैं । अपना समय और उर्जा अच्छे कर्म के लिए पूरे समाज में अर्पित करो । यदि तुम्हारे चारों ओर खुशियाँ न हों और जीवन में दुर्गति हों तो तुम खुश नहीं हो सकते हो । तुम्हारे पास मौका अपने आप आने का इन्तजार मत करो , तुम उत्पन्न करो और उस स्थान को पाने के लिए करो । समय ही जीवन है, एक क्षण भी नष्ट न करो । जीवन में कभी भी निराश न हो, तुम्हारी सफलता निश्चित है तुम अपने अंतस्थ को लक्ष्य के लिए आदेश दो अपने कत्तर्व्य में ध्यान केन्द्रित करौं ।

28.0 मेडेल और पुरस्कार

जिस प्रार्थी को विश्वविद्यालय द्वारा अक्षय निधि, मेडल और पुरस्कार की घोषणा कि गई हो, उसका नाम कुल - सचिव पढ़ेगें । जैसे वे नाम पढ़ेगें, प्रत्येक प्रार्थी मंच पर आकर कुलपति से मेडल और पुरस्कार ग्रहण करगें । लेकिन जब कुलाधिपति के अनुपस्थिति में कुलपति दीक्षांत समारोह चला रहे हों तब विश्वविद्यालय के प्रो. कुलपति/बरिष्ठ डीन प्रार्थी को मेडल और पुरस्कार वितरण करेगें ।

29.0

i

मुख्य अतिथि द्वारा संम्बोधन- कुलपतिःकहेंगे-

"मैं अब आमन्त्रित करता हूँ डॉ. " प्रो. को दीक्षांत समारोह को संम्बोधन करने के लिए-

30.0 अध्यक्ष द्वारा भाषण ।

31.0 तेजपुर विश्वविद्यालय के पंजीकार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन ।

32.0 अध्यक्ष द्वारा दीक्षांत समारोह का समापन घोषणा करेंगे ।

33.0 तब राष्ट्रीय संगीत गायी जायेगी और सभी खड़े हो जायेगें ।

34.0 कुलाधिपति, कुलपति सभी प्राधिकारी सदस्य गण और डीन कक्ष से एकांतवास कर एक समान क्रम से शोभायात्रा में जायेगें जैसे वे कुल- सचिव द्वारा नेतृत्व किये गये थे ।

35.0 प्रार्थीगण कक्ष को छोड़कर एक आदेशिक शैली से शोभायात्रा में जायेगें ।

4470 G1/08-9 [PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

66

अध्यादेश सं. - 22

उपस्नातक अध्ययन परिषद

तेजपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के द्वितीय अनुसूची के नियम 18( 1 ) और (4) के तहत

(प्रबंधन समिति के संकल्प सं. बी 44/2005/2/3.8 दि. 17/06/2005 द्वारा गृहित और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र सं. एफ.14-6/2005-डेस्क (यू) दि. 25-07-2006 में उल्लिखित)

1.      गठन
        (i)    विभागाध्यक्ष                                    सभापति तथा आयोजक
        (ii)   विभाग के पूर्णकालिक शिक्षकगण                    सदस्य
        ( iii ) विभागाध्यक्ष के सलाह से कुलपति द्वारा
               नामित दो विषय विशेषज्ञ                          सदस्य
       अधिनियम के द्वितीय भाग के नियम 7 (4 ) के तहत विद्यालय के संकायाध्यक्ष उपस्थित रह सकते हैं ।
       इसके उपरान्त सभापति द्वारा कुलपति के अनुमोदन से विश्वविद्यालय के सम्बद्ध विभागों से आवश्यकतानुसार दो शिक्षकों को
 आमंत्रित करने का प्रावधान है ।
 (2)    कार्यकालः नामांकित सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा ।
(3)     क्षमता एवं कार्य :
3.1     (i)     उपस्नातक कार्यक्रम, के शिक्षण का संयोजन
        (ii)    उपस्नातक कार्यक्रम के पाठ्यक्रम की प्रस्तुति और विचार तथा सिफारिश के लिए विद्यालय परिषद में दाखिल ।
        (iii)   उपस्नातक स्तर के शिक्षण मानदण्ड की उन्नति के लिए योजना बनाना और इसे योजना परिषद में दाखिल ।
        ( iv)    प्रबंधन समिति, शैक्षणिक परिषद , योजना परिषद और/या कुलपति द्वारा निर्देशित तथा अधिनियम , नियम,
                अध्यादेश और विनियम द्वारा निर्धारित सभी कार्यों का पालन करना ।
 3.2    उपस्नातक पाठ्यक्रम के लिए परीक्षक की तालिका प्रस्तुति और विद्यालय परिषद में दाखिल ।
3.3     विभाग के समय - सारणी की प्रस्तुति तथा विचार एवं अनुमोदन के लिए कुलपति को दाखिल ।
4.      उपस्नातक अध्ययन परिषद की बैठक

अध्ययन परिषद की बैठक यथावश्यक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम दो बार सेमिस्टार के आरम्भ होने से पहले अनुष्ठित होगी । कुलपति के अनुमोदन से आवश्यकतानुसार विशेष बैठक बुलाया जा सकता है । बैठक अनुष्ठित होने के कम से कम 21 दिन पहले बैठक की पूर्व सूचना दी जाएगी । कुल सदस्यों के दो- तिहाई सदस्य सभा की गणपूर्ति कर सकेंगें । आपातकालीन स्थिति में अध्ययन समिति की बैठक तीन दिन की पूर्व सूचना से आह्वान की जा सकेगी ।

एम. अहोम, रजिस्ट्रार

[विज्ञापन III/IV/असा/360बी/2007 ] 67 [भाग III-खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

TEZPUR UNIVERSITY

NOTIFICATION

Tezpur, the 30th October, 2007

STATUTE- ( 43)

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2/ 4.4 ( 1 ) dt . 27.6.96 and approved by the Visitor vide MHRD letter No. F.14-23/96-Desk (U ) Vol- V dt . 21.5.97 )

Under Section 26 ( K ) and 27(2 ) of the Act and Sections 13 (3 )( a ) of the statute of the Second Schedule read with Section 17(5 ) of the said Statute .

A. The University shall establish different Post-Graduate Departments for the purpose of teaching and research as detailed below:

1. Department of Physics

2. Department of Chemical Sciences

3. Department of Mathematical Sciences

4. Department of Computer Science

5. Department of Electronics

6. Department of Information Science & Technology

7. Department of Molecular Biology & Biotechnology .

8. Department of Energy

9. Department of Environmental Studies

10. Department of Geological Sciences

11. Department of English & Foreign Languages

12. Department of Traditional Culture & Art Forms

13. Department of Mass Communication & Journalism

14. Department of Sociology

15. Department of Modern Indian Languages

16. Department of Business Administration

17. Department of Banking and Financial Management

18. Department of Commerce

19. Department of Business Economics

B. Besides the Departments , there shall be Centres for the purpose of Research and Development works in different fields for introducing suitable job oriented courses .

The Centres identified for the purpose are : --

( i ) Computer Centre

(CC)

(CDM)

(ii ) Centre for Disaster Management

(CDID)

(iii) Centre for Development of Industrial Design.

(CEDT)

(iv) Centre for Electronics Design & Technology

( CDFT)

(v) Centre for Development of Fashion Technology

(CFPT)

(vi) Centre for Food Processing Technology

(CVT)

(vii ) Centre for Vocational Training

(CET)

(viii ) Centre for Education Technology

(CPDS)

(ix) Centre for Population & Demographic Studies

(CRD)

( x) Centre for Rural Development .

(CPDSF)

(xi ) Centre for Planning and Development Studies and Futurology 68

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

(CNRM)

(xii ) Centre for Natural Resource Management

( CDT)

(xiii) Centre for Development of Tourism

(CFM)

(xiv) Centre for Forest Management

(CWLM)

(xv) Centre for Wet -land Management

(CPE)

(xvi) Centre for physical Education

(CNCE)

(xvii ) Centre for Non - Conventional Energy

(Amendments as Approved by The Visitor vide MHRD letter No. F. 14-6/2005- Desk (U) dated 22-9-2006 )

Clause A

Sl . 4 Department of Computer Science renamed as "Department of Computer Science & Engineering"

Sl . 5 Department of Electronics renamed as " Department of Electronics & Communication Engineering "

Sl 6 Department of Information Science & Technology deleted and merged with the Department of Computer Science and Engineering . Sl 6 be read as Department ofMolecular Biology & Biotechnology

Sl 7 Be read as Department of Food Processing Technology

Sl 10 Department of Geological Science renamed as "Department of Earth Science" .

S1 12 Department of Traditional Culture and Art Form renamed as " Department of Cultural Studies" .

Addition :

Sl 20 Department of Mechanical Engineering.

SI 21 Department of Planning & Architecture.

SI 22 Department of Civil Engineering .

SI 23 Department of Chemical Engineering .

S1 24 Department of Electrical Engineering .

S1 25 Department of Biomedical Engineering .

Sl 26 Department of Agricultural Engineering .

Sl 27 Department of Environmental Engineering .

Sl 28 Department of Automobile Engineering .

B Amended :

St (vi) Centre for Food Processing Technology deleted.

Serial Numbers vii to Xvii renumbered as vi - xvi

STATUTE - ( 44)

(Adopted by the Board of Management Vide Resolution No. B/96/2 /4.4 (2 ) dated 27.6.96 and approved by the Visitor Vide MHRD Letter No. F.14-23/ 96 - Desk(U) Vol- I dated 21.5.97 . )

On appointment of teacher and other Academic Staff, their emoluments and conditions of service as per provisions under Section 26 (d) of the Act and 25 ( 1 ) and 25(2 ) of the Statute of the Second Schedule.

[भाग III- खण्ड 4]

भारत का राजपत्र असाधारण

69

1.0 As defined in the Act " Teachers of the University " means Professor , Reader , Lecturer and such other persons as may be appointed for imparting instruction and conducting research in the University or in any College or Institution maintained by the University and are designated as teachers by the Ordinances .

2.0 Teacher may be appointed as-

a) Whole- time against permanent posts .

b) Whole-time against temporary posts .

c) Visiting Professors .

d) Part- time Teachers .

e) Guest Lecturers .

3.0 The terms and conditions of appointment and emoluments of Visiting Professors , Part-time Teachers and Guest Lecturers shall be determined by the Board of Management .

4.0 Teacher to be a whole time employee:

For the purpose of this ordinance " Teachers " means a whole time salaried teacher of the University and does not include honorary , visiting , guest or part-time teachers to be appointed by the University from time to time.

No whole - time salaried teachers of the University shall, without the permission of the Board of Management engage directly or indirectly in any other occupation in which any emolument or honorarium is attached .

Provided that nothing contained in this Statute shall apply to the work undertaken in connection with any examination of Universities or learned bodies or Public Service Commission or to any literary work or publication or radio talk or extension lectures or with the permission of the Vice- chancellor to do any other academic work.

5.0 Nature of Duties:

Every teacher shall undertake such part in the activities of the University and perform such duties in the University as may be required in accordance with the Act , the Statutes and Ordinances framed there under for the time being in force, whether the saine relate to the organization of instruction or teaching including inter -disciplinary teaching or research or the examination of students or their discipline or their welfare and generally to act under the direction of the authorities of the University.

6.0Probation:

Teachers appointed shall be on probation ordinarily for a period of twelve months, but in no case shall the total period of probation exceed twenty four months .

Provided that the Board of Management, for reasons to be recorded, may waive the condition of probatiorı.

Provided further that the condition of probation shall not apply to the case of teachers appointed by the Board of Martagement under the provisions of Statutes 21 ( 1 ) of the Second Schedule .

Explanation: The Board of Management shall have the right to assess the suitability of a teacher for confirmation even before the expiry of the probationary period of twelve months from the date of his /her appointment but not earlier than nine months from that date.

70

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

Provided that the Board of management shall have the right to assess a teacher for confirmation or otherwise at any time during the extended period of probation.

7.0 Confirmation :

7.1 It shall be the duty of the Registrar to place before the Board of Management the case of confirmation of a teacher on probation, not later than forty days before the end of the period of probation .

7.2 The Board of management may then either confirm the teacher or decide not to confirm, or extend the period of probation so as not to exceed twenty- four months in all . In case the Board of management decides not to confirm the teacher , whether before the end of twelve months period of his/her probation , or before the end of the extended period of probation, as the case may be , he/ she shall be informed in writing to that effect , not later than thirty days before the expiry of that period.

Provided that the decision not to confirm a teacher shall require two third majority of the members of the Board of Management present and voting .

8.0 Increment:

Every teacher shall draw increment in his/her scale of pay , unless it is withheld or postponed by a resolution of the Board of Management on a reference by the Vice- chancellor and after the teacher has been given sufficient opportunity to make his /her written representation.

9.0 Age of retirement :

9.1 Every teacher confirmed in the service of the University shall continue in such service until he/ she completes the age of 60 years and thereafter no further extension of service shall be given.

Provided further that if the date of superannuation of a teacher falls at any time during the Academic Session , Vice - chancellor may re - employ the teacher for any period up to the end of the Academic Session , with a view not to disturb the teaching work of the department.

9.2:In 'special cases , a teacher on his/her completing the age of sixty years , may be re-appointed on contract for a period not exceeding five years on such emoluments as may be prescribed by the Board of management .

9.3 The procedure and principles to be followed for re -employment of retired teachers are given below:

(i) The teacher concerned should send a self- assessment report indicating his /her academic activities particularly during the last five years preceding the date ofhis /her superannuation , supported by relevant documents .

(ii ) The retiring/retired teacher shall also produce a health fitness certificate from a medical doctor not below the rank of a Professor of Medicine of a recognized Medical college of the State of Assam . Provided that the Board of Management shall have the right to get him/her examined by an expert Doctor to be nominated by it .

(iii)On receipt of such documents , the University shall form a Screening Committee with members as given below and place all the relevant documents and the service records of the teacher concerned before the Committee for its perusal and necessary action 71

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4]

Screening Committee :

a) . Vice-Chancellor .

b) Dean of the School concerned, if any,

c) One expert in the field of specialization of the teacher concerned, to be nominated by the Visitor .

d) Two experts in the field of specialization of the teacher concerned to be nominated by the Board of management .

(iv) Such period of re -employment shall initially be for a period of two years and subsequently for a period of one year or less at a time. In no case, such re- employment can be given if the teacher concerned has completed the age of 65( sixty five) years .

(iv) The recommendation of the Screening Committee regarding re - employment. shall be made on the basis of the performance of the teacher concerned as a teacher and or the quality of research papers or books produced by him/her . The recommendation should also justify that he/ she cannot be replaced immediately or his/her continued availability will be indispensable for existing research programme .

(v) Whenever a teacher is re -employed , such re -employment shall be made only in an appropriate existing scale of pay on which the teacher concerned retired from service.

(vi) Pay would be fixed in accordance with the normal rules applicable in the Central Government under which such pay plus pension and other benefits do not exceed the last pay drawn at any stage or in accordance with the pay fixation rules of the University .

(vii ) Re - employment should not be offered as a matter of course but only in exceptional cases with sufficient justification as indicated in sub - para (v) above and subject to any law in force.

9.4 The recommendation of the Screening Committee in each case be placed before the Board of management for its consideration .

9.5 Such re-employed teacher shall not be eligible to hold any statutory office .

10.0 Variation in terms and conditions of service:

Every teacher of the University shall be bound by the Statutes, Ordinances and Regulations for the time being in force in the University.

Provided that no change in the terms and conditions of service

of a teacher shall be made after his/her appointment in regard to designation, scale `of pay, increment, provident fund, retirement benefits , age of retirement, probation , confirmation , leave salary and removal from service so as to adversely affect him .

11.0 Code of Conduct:

Every teacher of the University shall abide by the Code of Conduct framed by the University and the following lapses would constitute misconduct on the part of a University teacher .

11.1 Failure to perform his/her assigned duties such as taking classes and demonstrations including inter disciplinary classes , assessment , guidance , invigilation etc.

11.2 Gross partiality in assessment and evaluation of students , deliberately over marking/under- marking or attempts at victimization of students on any grounds.

72

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

11.3 Inciting students against other students , colleagues or administration and authority. This does not , however interfere with the right of a teacher to express his /her difference on principles on academic matters in seminars or other places where students are present .

11.4 Indulging in communal activities , or raising question of caste , creed . religion, race or sex in his/her relationship with his/her colleagues and trying to use the above considerations for improvement of his /her prospects .

11.5 Refusal to carry out the decisions by appropriate administrative and academic bodies and/ or authorities of the University .

11.6 Indulging infidelity , unfaithfulness , dishonesty , gross moral misconduct, action subversive of discipline , riotous or disorderly behaviors , negligence to duty , insubordination , strike , picketing , gherao , inciting others to strike etc. involvement in criminal cases shall be sufficient cause of action for committing misconduct .

12.0 Resignation :

A teacher may , at any time , terminate his /her engagement by giving the Board of Management three months notice in writing or on payment to the University of three months salary in lieu thereof. Provided that the Board of management may waive the requirement of notice at its discretion.

13.0 All cases of misconduct shall be dealt with in accordance with the provision under Statute 28 ( 1 to 6) of the Second Schedule .

14.0 Contract :

The written contract between teacher and the University to be executed as required under Statute 25 (2) of the Second Schedule of the Act , shall be in the form prescribed under Ordinance or as merely or substantively to like effect .

15.0 Special Contracts:

Notwithstanding anything contained in these Statutes , the Board of Management may , in special cases appoint teachers on contract on such terms and conditions as itmay deem fit.

Provided that no appointment shall be made under this clause for a period exceeding three years at a time.

16.0 Fixation of pay and emoluments:

Fixation of pay and emoluments of the teachers shall be made as per financial rules to be adopted by the University from time to time.

17.0 Existing pay Scale:

Rs . 4500-150-5700-200-7300/-

a) Professor

Rs . 3700-125-4950-150-5700/-

b) Reader

Rs . 2200-75-2800-100-4000/-

c) Lecturer 73

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

STATUTE- 45

TERMS AND CONDITIONS OF SERVICE OF VICE -CHANCELLOR

(Read with Statute 2 (5) ( ii) of the Tezpur University Act, 1993)

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/97/2/29 dt.14.6.97 and approved by the Visitor vide MHRD letter No. F.14-21 /96- Desk(U) dt. 4.11.97)

1.0 If the Vice- Chancellor assumes his/her charge after attaining the normal age of superannuation and is receiving pension due to his/her past services , then either his/her pay and allowances will be reduced by the gross amount of his/her pension amount prior to commutation or the payment of pension shall be held in abeyance upto the date of his/her relinquishing charge of the post of Vice - Chancellor . On the other hand, if he/she assumes charge after attaining the normal age of superannuation and if he /she was on a non -pension able post his/her gross pension equivalent of retirement benefits will be reduced from the pay & allowances admissible for the post of Vice -Chancellor .

2.0 The Vice- Chancellor shall be entitled to use an official car för attending official duty as well as for private purpose . The Vice- Chancellor shall pay a monthly charge of Rs . 300/- for using the car for private purpose and need not pay any charge for using the car for official duty .

3.0

a) The Vice-Chancellor shall be eligible to opt før General Provident Fund-Pension- Gratuity scheme of the University if he/she has not attained the normal age of superannuation prior to commencement of his tenure and provided he/she has been eligible for pension scheme as an employee of Central/State government or a Central /State autonomous body or a Central State University before joining as Vice-chancellor .

If he/she opts to join General Provident Fund - cum -Pension -Gratuity scheme of the University, the Vice- chancellor shall be entitled to the benefit of combining his/her past service with the service as Vice-Chancellor upto the normal age of . superannuation for the purpose of pension . For this purpose the University will receive pension/contributory provident fund liability from the previous organisations .

The period of service rendered by him/her in the University beyond the normal age of superannuation shall not qualify for the purpose of pensionery benefits .

The pension cum Gratuity benefits shall be payable only from the date of his /her relinquishing the post of the Vice-Chancellor .

74

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

If the Vice- Chancellor assumes his/her office either after superannuation or superannuates during the tenure he/she shall be entitled to joining contributory Provident Fund- cum-Gratuity Scheme from the date of his/her joining the post if, already superannuated or the date of his/her superannuation during the tenure as applicable.

b) The Vice-Chancellor shall be entitled to leave on full pay at the rate of 30 days in a calendar year . The leave shall be credited to his/her account in advance in two half yearly installments of 15 days each on the first day of January and first day of July every year .

Provided that if the Vice- chancellor assumes /relinquishes charge of the office of the Vice - chancellor during the currency of a half year , the leave shall be credited proportionately at the rate of 2½ days for each completed month of service.

c) The leave at the credit of the Vice- chancellor at the close of the previous half year shall be carried forward to the new half year , subject to the condition that the so carried forward plus the credit for that half year does not exceed the maximum limit as per Central Government rules in force from time to time .

d) The Vice- chancellor on relinquishing the charge of his/her office shall be entitled to receive a sum equivalent to the leave salary admissible for the number of days of leave on full pay due to him/her at the time of his/her relinquishment of charge subject to a maximum number of days as per Central Government rules including encashment benefit availed elsewhere .

e). The Vice -chancellor shall also he entitled to half pay leave at the rate of 20 days for each completed year of service . This half pay leave may only be availed of as commuted leave on full pay on medical certificate . When commuted , leave is availed, twice the amount of half pay leave shall be debited against half pay leave due .

f) The Vice-chancellor shall also be entitled to avail himself/herself extra ordinary leave without pay for a maximum period of three months during full term of five years on medical ground or otherwise.

4.0 The Vice-Chancellor shall be entitled to all other benefits such as Medical Attendance and Leave Travel Concession as admissible to other University employees .

5.0 The Vice-Chancellor shall be entitled to traveling allowance on transfer on his appointment as Vice- Chancellor and after relinquishment of his /her charge .

6.0 In case of the death of a Vice- Chancellor while in service , who had no lien in any permanent post in any Department or Institution , the benefit accrued to the Vice- Chancellor by way of GPF or CPF , Gratuity and leave encashment till the death shall be paid to the nominee or the successor of the Vice- chancellor .

75

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

STATUTE 46

(Adopted by the Board ofManagement vide Resolution No. B/96/2/4.4(4) dt. 27.6.96 and approved by the Visitor vide MHRD letter No.F.14-23/96- Desk( U) Vol- VI dt . 21.5.97)

( On creation of post and appointment of officer under Section 10 , Sub - Section 7 , Section 17 and Section 26 ( C) of the Act .)

1.0 Name of the post: Controller of Examinations

There shall be a Controller of Examinations to be called the Controller hereafter , to look after and conduct the examinations of the University . The Controller shall be a personwith:

(i) Consistently good academic career with at least a 2nd Class Master's Degree in Arts/Science/Commerce from a recognised University.

(ii ) A Doctorate Degree from a recognised University or equivalent published work or contribution in the field of educational planning and examination system in higher education .

(iii )At least 10 ( ten ) years experience in a responsible position in administration/ conduct ofexaminations/ teaching in Institutions ofhigher education .

(iv) And a person conversant in the system of continuous evaluation , use of letter grade in place of marking and the Semester type of examination may be treated as an additional qualification.

1.1 The controller of Examinations shall be appointed by the Board of Management on the recommendation of a Selection Committee constituted for the purpose and shall be a whole time salaried officer of the University .

1.2 The Controller shall receive pay besides allowances as admissible to the University staff in the scale of pay of Rs . 4500-150-5700-7300 /- or as may be prescribed from time to time by the Board of Management . Provided that the Controller shall retire on completion of the age of sixty years .

1.3 When the office of the Controller is vacant or when the controller is , by reason of illness is absent or for any other cause , unable to perform the duties of his offices, the duties of the office shall be performed by such person as the Vice- Chancellor may appoint for the purpose .

2.0 The Controller shall perform the following duties

2.1 Prepare Draft Ordinances , Regulations and rules relating to different course of studies , syllabi and examinations for approval by the appropriate authority.

2.2 Arrange for preparation of academic calendars .

2.3 Arrange for admission of students into the University, Departments / Centres on the basis of the selection made by the respective Admission Committees ofthe Departments .

:

2.4 Admit eligible candidates to various examinations of the University as per relevant rules prescribed in the ordinance / regulations .

2.5 Arrange for conduct of Examinations , evaluation and declaration of results .

2.6 Arrange for issuing Grade Cards to the candidates of different examinations .

2.7. Enforce disciplinary action against the candidates for violation of prescribed rules in the Examination halls .

76

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

2.8 Deal with matters connected with reforms of examinations and academic planning .

2.9 Be responsible for safe custody of all important examination registers and records concerning the examinations.

2.10 Be the Member Secretary of Examination Committees and the Research Committee.

2.11 Deal with matters of recognition of degrees and examination of other University / Institutions /Boards

2.12 Perform such other duties as may be allotted by the Vice- Chancellor/ Board of Management/Planning and Academic Committee from time to time .

STATUTE - 47

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B.96/2/4.4(5) dt.27.06.96 , No. B.96/4/2.10 dt . 28.12.96 and No. B.98 /4/25 dt.30.12.98 and approved by the Visitor vide MHRD letter No.F. 14-23/96 - Desk ( U) dt : 2.6.2000)

On Service Conditions and Code of Conduct of the employees of the University (other than Teachers and Academic staff of the University) under Section 26( f) of the Tezpur University Act , 1993 and Statute 12 (2) V and 26 of the Segond Schedule .

Section 26 Sub Sec ( f) provides that subject to the provisions of the Act , the Statute may provide the condition of service of the employees including provision for promotion , increment and provident Fund, the manner of termination of service and disciplinary action and section 27 sub Section 2 of the Act empowers the Board of Management to make new and additional Statutes or to amend or repeal any Statute of the University .

1.0 Application :

The employees of the University shall be governed by the following ( Other than Teachers and Academic staff) :

: 2.0 Recruitment :

Recruitment to all non-teaching posts of the University shall be made as per procedure laid down in the Act and in this Statute and Ordinances , if any .

3.0 Appointment :

Appointment to all posts of non-teaching staff shall be made through prescribed process by the appropriate appointing authorities on the recommendation of the Selection Committee/Selection Board as may be laid down in the respective ordinances of the University .

4.0 Emoluments :

1

All regular employees of the University appointed against sanctioned posts shall be paid salary in the prescribed scale of pay . The pay scales of various non- teaching posts shall be prescribed by the Board of Management on the basis of the scale of pay approved by the UGC/ Central Govt . In addition to pay, the employees shall be entitled to the benefits of other allowances such as Dearness Allowance , House Allowance etc. at such rates as may be prescribed by the Govt . of India/UGC .

भारत का राजपत्र असाधारण

77 [ भाग III--खण्ड 4 ]

5.0 Leave :

All leave shall be governed by the employees Leave Regulation of the Tezpur University.

6.0 Leave Travel Concession

Leave travel concession shall be admissible to all the employees as per prevailing Regulation of the University.

7.0 Other Benefits :

Reimbursement of medical expenses and other benefits that may be available to the Central Government employees may also be made available to the employees of the University subject to formulation of relevant Regulations for such purpose by the Board ofManagement of the Tezpur University .

8.0 Duties : Every employee of the University shall perform his official duties as may be assigned to him , punctually and with devotion. No employee shall act otherwise than in his best judgment to be true and correct and for the best interest of the University.

8.1 Every University employee shall at all time maintain absolute integrity, maintain devotion to duty and shall do nothing which is unbecoming of an University employee .

8.2 Every employee shall carry out the orders and instructions of the superiors faithfully and obediently.

8.3 Every employee holding supervisory post shall take all possible steps to ensure integrity and devotion to duty of all employees under his/her control and authority.

8.4 Every employee shall

Maintain a responsible and decent standard of conduct in private and public life.

Render prompt and courteous services to the public .

Observe proper decorum in office and outside.

Report the fact of his /her arrest by the police in connection with any case or if convicted in the Court of Law.

Maintain absolute secrecy of all official documents and shall not disclose any. confidential matters to any body .

Refrain from giving or taking dowry or abetting or indulging such demand .

Not consume any intoxicating drinks or drugs while on duty or in public place.

Shall not take part in any political activities on the campus .

Not participate in any demonstration which is prejudicial to the interest of the University and its autonomy .

Not resort to any way in any form of strike or coercion or physical duress or gherao in the University .

Not join in any other occupation , undertake any venture while employed in the University in a whole time service.

9.0 Misconduct, Indiscipline and Insubordination

The under mentioned acts , conduct and commission of a University employee shall constitute misconduct , violation of office discipline and insubordination.

9.1 Any act or conduct of the employee prejudicial to the interest or reputation of the University.

78

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

9.2 Any act or conduct inconsistent with peaceful discharge of duty to the University .

9.3 Any act or conduct of the employee making it unsafe for the University to retain him in service .

9.4 Any immoral act .

i 9.5 Any act or conduct of the employee rendering him untrustworthy .

9.6 If the employee is abusive or disturb the peace of the place or work .

9.7 If the employee is insulting and defies carrying out the orders of his superior or refuse to attend to his duties .

9.8 Habitual negligence to official duties .

9.9 Infidelity , unfaithfulness , dishonesty , untrustworthiness , theft and fraud, dishonesty in connection with the functioning or properties of the University .

9.10 Strike , picketing , gherao , inciting others to strike in contravention of the provisions of Law .

9.11 Gross moral misconduct , act of indiscipline , disorderly and unruly behaviour , during working hours .

9.12 Habitual late attendance in duty and early departure .

9.13 Habitual negligence to work .

9.14 Habitual absence from duty without leave or permission and overstaying of leave.

9.15 Conviction by Criminal Court.

9.16 Willful harassment of public, students , teachers and other employees in course ofofficial business of the University .

9.17 Joining Educational Institution or any Courses of study without the permission ofthe authority .

10.0 Unauthorised absence :

Willful absence from duty not covered by grant of leave will be treated as non-duty for all purposes viz . Increment , leave and pension etc. Such absences, without leave will constitute an interruption or break in services entailing forfeiture of past services . The authority competent to grant leave may, however , condone such break except in exceptional and grave circumstances as may be considered by the authority.

11.0 Marriage restriction:

Any employee governed by Hindu Marriage Act whose spouse is living cannot enter into or contract a second marriage unless the earlier marriage is terminated by means of divorce obtained from the Court of Law. Person or employee found guilty of bigamy would disqualify for appointment or to continue in the University service and would face appropriate disciplinary action .

12.0 Dowry:

Dowry is prohibited by law. Hence any violation of the Dowry Prohibition Act by any University employee shall constitute a good and sufficient reason for instituting disciplinary proceedings against such employees .

79

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4]

13.0 Suspension :

The following circumstances may be considered appropriate to place an employee under suspension :

a) When disciplinary proceedings contemplated and the employee's continuance in office/duty considered to be prejudicial to the investigation .

b) When preliminary enquiry indicates a prima-facie case for initiating Criminal /Departmental proceedings likely to lead to conviction dismissal or removal etc. from the service

c) When the employee is suspected to have engaged in activities prejudicial to the interest of the University in any way.

d) When charged with offence involving moral turpitude.

e) When charged with corruption , embezzlement , fraud , misappropriation of University money , misuse of office power for personal gain .

f) When charged with refusal or deliberate failure to carry out orders of the superior officer.

g) An employee of the University should be placed under suspension immediately ifhe/ she is arrested in connection with or involving " Dowry Death " irrespective ofthe period of detention .

h) When an employee is arrested by the Police and detained in custody for a period exceeding 48 hours .

14.0 Deemed Suspension :

Anemployee of the University detained in police custody for more than 48 hours or sentenced to a term of imprisonment exceeding 48 hours shall be deemed to have beenplaced under suspension with effect from the date of detention and suspension order shall be issued accordingly.

15.0 Subsistence Allowance

An employee of the University under suspension or deemed suspension shall be entitled to receive from the University a subsistence allowance equal to leave salary which the Employee would have drawn had he/she been on leave, ' on half average pay' on half pay and in addition to the other allowances admissible on the basis of such leave salary and to other compensatory allowances which the employee was in receipt on the date of suspension ; and continues to meet those expenditure during the period of suspension.

15.1 The employee under suspension shall not be entitled to receive payment of the subsistence allowance unless the employee concerned furnishes a certificate to the effect that he/she is not engaged in any other employment, business , profession or vocation .

15.2 The amount of subsistence allowance may be increased by not exceeding 50% of the subsistence allowance if the suspending authority is of the opinion that the period of suspension has been prolonged beyond 3 months for reasons cannot be attributable to the employee concerned.

80

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

15.3 The amount of subsistence allowance may be reduced by not exceeding 50 % of the subsistence allowance if the suspending authority is of the opinion that the period of suspension has been prolonged beyond 3 months for reasons directly contributable to the employee concerned.

15.4 The authority to grant subsistence allowance or to review the quantum on subsistence allowance shall be the suspending authority .

15:5 Deduction from the subsistence allowance on account of the following shall bepermissible

(i ) Income tax and Super tax or Surcharge if the total annual income is taxable

(ii) House rent & electric charges etc.

(iii ) Repayment of loans and advances taken from the University at such rates as may be judiciously fixed by the authority.

(iv) Premium of Group Insurance Scheme

1

15.6 The following deductions shall not be made except with the consent of the employee in writing .

(i) Life insurance premium

(ii) Refund of advance taken from the CPF /GPF

15.7 The following deductions should not be made from subsistence allowance

(i) Amount due on court attachment ,

(ii) Recovery of loss to the University for which the employee concerned is responsible

16.0 $ uspension while not in service

When as a result of Disciplinary proceedings a penalty of dismissal removal or compulsory retirement from the service imposed upon the University employee is set aside in Appeal , Revision of by the Court and the case is remitted by the Appellate, Revising or the Court to the disciplinary authority for further inquiry or action or with any direction , the order of the suspension will be deemed to have been continued in force with effect from the date of original order or dismissal , removal or compulsory retirement etc. and shall remain valid until further orders.

17.0 Charge Sheets

The employee against whom any disciplinary action is contemplated whether the employee has been placed under suspension or not , the disciplinary authority shall draw up a statement containing the substance of imputation of misconduci or misbehavior and frame definite and distinct articles of charge . The Statement of allegation shall reflect all relevant facts including any admission or confession made by the charged employee . Suspended employee shall be served with charge as early as possible but not later than 3 months from the date of suspension .

No.

Date .

To

Sri 81

भारत का राजपत्र असाधारण

['भाग III-खण्ड 4 ]

You are hereby required to show cause why one or more of the following penalties should not be inflicted upon you on the under mentioned charges based on the statement of allegations attached herewith

1.

2:

3.

1. That while you were you are therefore charged with

2. That while you were with you are therefore charged .

You should submit your written statement in your defence within 10 (ten) days from the date of receipt of this communication provided you do not intend to inspect the documents which have relevance with the issues involved . In case you intend to inspect those documents you should write to the undersigned for the same within 7(seven) days from the date of receipt of this communication and submit your replies thereafter within 10 (ten) days from the date of completion of your inspection, time for which will be specified by the authority .

Please intimate in writing within the period as aforesaid if you desire to be heard inperson.

A list ofdocuments by which and a list of witnesses by whom the articles of charges are proposed to be sustained are enclosed herewith

Registrar

This disciplinary authority may also contemplate one or more of the penalties listed under Sl.18 below in the article of charges .

17.1 Disciplinary authority of the University shall deliver or cause to be delivered the charge sheet together with the statement of allegations and a list of documents by which and a list of witnesses by whom the article of charges are proposed to be sustained, and shall require the employee to submit his/her written statement of defence within a specified time limit and also to state whether the employee desires to be heard in person .

18.0 Penalties :

18.1 Minor penalties

(i) Censure .

(ii ) Withholding of promotion temporarily .

( iii ) Recovery from pay of the whole or part of any pecuniary loss to the University caused by the employee's negligence of duty or breach of orders.

4470 G1/08-11 82

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

(iv) Reduction to a lower stage in the time scale of pay for a period not exceeding 3 years , without cumulative effect and not effecting pension .

(v) Withholding of future increment of pay.

18.2 Major penalties:

(i) Reduction of pay to a lower stage in the time scale other than ( iv) under Minor Penalties

(ii) Reduction to a lower time scale of pay , grade , post or service

(iii) Compulsory retirement

(iv) Removal from service

(v) Dismissal from service

19.0 Procedure for minor penalties

The disciplinary authority of the University shall deliver a copy of the complete articles of charge sheet to the charged employee incorporating punishment contemplated therein and giving the employee a reasonable time to submit replies to the charges in defence .

19.1 On receipt of the written reply in defence the disciplinary authority shall consider the charges and replies thereto and pass appropriate orders as it deems fit and proper and conclude the disciplinary proceedings .

19.2 If however, the disciplinary authority is of the opinion that an enquiry should beheld to. examine the documents and allow personal hearing to the employee the disciplinary authority shall appoint an Enquiry Officer .

19.3 The disciplinary authority shall then consider the report and findings of the enquiry and dispose of the case on merit .

19.4 The final order at the close of the disciplinary proceedings with punishment or otherwise shall be issued by the disciplinary authority and copy of the same shall be served on the employee concerned .

20.0 Procedure for major penalties :

20.1 On receipt of the written statement of defence against the articles of charges served on the employee as indicated in para 17 above, the disciplinary authority may itself inquire into such of the articles of charges as are not admitted or if it considers necessary to do so , appoint an Inquiry Officer for the purpose and where all the articles of charges have been admitted in his/her statement of defence , the disciplinary authority shall record its findings on each charge after taking such evidence as it may think fit and award such of the punishment/ punishments as may have been contemplated in the charge sheet .

83

'भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III-खण्ड 4]

20.2 If the disciplinary authority having regard to the findings of the Inquiry Officer is convinced that all or any of the articles of charges have been proved against the employee it shall impose one or more of the penalties mentioned in the charge sheets .

20.3 If the disciplinary authority disagrees with the findings of the Inquiry Officer on any of the articles of charges, it shall record reason for such disagreement and record its own findings on such charges , if the evidence on record is sufficient and record its verdict and exonerate the employee of the charges or impose adequate punishment commensurate with the offences within the contemplated punishment .

20.4 When the University employee is reinstated in the service after suspension .

Or

When the University employee who has been dismissed, removed or compulsorily retired from service is reinstated the competent authority of the University shall consider and make specific order.

a) Regarding pay and allowances to be paid to the employee during the period of his/her absence including the period of suspension, and

b) Whether or not the said period shall be treated as a period spent on duty .

20.5 Where the authority competent to order for reinstatement is of the opinion that the University employee who had been suspended, dismissed, removed or compulsorily retired has been fully exonerated from the charges , the University employee shall be paid full pay and allowances to which he/she would have been entitled had he/she been in continuous service .

If however, the University authority is of the opinion that termination of the proceedings against the employee was unduly delayed for reasons directly attributable to the employee concerned, the University authority shall decide the quantum of pay and allowances payable to the employee concerned after notifying the employee its intention in this regard.

20.6 Where the University employee has been placed under suspension due to his/her involvement in any Criminal proceedings and spend more than 48 hours in judicial custody and released by the Court without conviction on technical ground and not on merit , the University authority shall consider the whole case and if in its opinion the original suspension was wholly unjustified the employee shall be paid pay and allowance in full .

20.7 If however, the University authority is of the opinion that the original suspension was not wholly unjustified, it shall decide the quantum of pay and allowance to be paid to the employee for the period of suspension or during the period of absence due to termination of service . The authority shall communicate its intention to the employee concerned and finally decide the matter after considering his /her reply thereto .

84

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4 ]

21.0 The employee shall have the right to appeal against any order of punishment or suspension to the appropriate appellate authority within 45 (forty five) days from the date of receipt of the order appealed against .

22.0 Notwithstanding anything contained in this Statute all disciplinary and appeal cases shall be dealt with in conformity with the F.R. and S.R. of the Central Government without violating any of the provisions under the constitution of India .

23.0 Confirmation : All employee including officers appointed or promoted to any permanent post shall remain on probation for a period of 12 months from the date of joining which may be extended upto a period of 24 months only .

23.1 If the authority is satisfied with the suitability and efficiency considering the overall performance of the employee concerned the employee shall be confirmed in the post he/ she was appointedto.

23.2 In case the authority decides not to confirm the employee at the end of the 12 months , the employee shall be intimated in writing that his/her period of probation would be extended upto 24 months .

23.3 If the authority decides considering the suitability and efficiency of the employee at the end of 24 months probation of the employee against confirmation of the employee , the authority shall inform the employee that he/she would not be confirmed in the post. In which event the employee would cease to be in service of the University and the University authority shall notify the employee in writing accordingly, before the lapse of the probationary period of 24 months.

23.4 For the purpose of assessing the suitability of efficiency or otherwise of the employee , the authority shall obtain Confidential Report on the performance of the employee, in case Grade B , Grade- C and Grade Demployees from the Head of the Department/Office or the Controlling Officer concerned in prescribed forms . In case of other officers , the Registrar shall submit Confidential Report in the prescribed forms . The form of the confidential Report shall be prescribed by the Registrar with the approval of the Vice- chancellor.

23.5 The respective Appointing Authorities of the University as laid down in the Ordinance shall consider the confidential report themselves and decide the cases for or against confirmation or such authorities may appoint a Confirmation Committee with suitable members to examine the cases and submit recommendations or otherwise to the authority under Section 24 of the Statutes of the Second Schedule . The relevant Appointing Authority shall decide the cases of confirmation on the basis of the recommendations of the Confirmation Committee .

23.6 Notwithstanding the provisions under 23.5 above, the entire responsibilities of confirming or rejecting a case of confirmation shall remain with the appointing authorities .

85

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

24.0 Retirement :

All employees other than Statutory Officers and person (s ) on contract service shall retire from service on completion of 60 years of age .

24.1 Provided that if the date of retirement falls on any date during a month the employee shall be allowed to retire on the afternoon of last day of the month.

25.0 Any University employee may by giving notice of not less than 3 months in writing to the Registrar, retire from service if he/she has attained the age of 55 years and has completed 20 years of service .

It shall however, be open to the University authority to withhold permission to such employee to retire for the interest of the University and may also waive the condition of 3 months Notice

25.1 The University authority shall have the right to retire an employee from service on completion of 30 years of qualifying service by giving three months notice or 3 months pay in lieu thereof, on public interest.

26.0 Termination :

The service of a temporary University employee is liable to be terminated at any time with one month's notice , or on payment of one month's pay thereof from the either sides . The termination notice may be given by the appointing authority to the employee or by the ernployee to the appointing authority.

26.1 The following procedure shall be followed by the appointing authority while serving notice of termination of service on any University employee:

a) The notice shall be delivered to the employee in person.

b) Where personal delivery is not practicable , the notice shall be served by registered post with acknowledgement due at the address available with theUniversity.

c) If notice sent by registered post is returned undelivered the notice shall be; published in the News Paper .

d) No reason for termination need be given in the termination notice .

27.0 The services of a temporary University servant can be terminated while he is under suspension or the departmental proceedings are pending against him.

28.0 Cases of leave encashment etc. on termination and resignation shall be decided as per Central Government Rules prescribed from time to time .

29.0 Cases not covered by this Statute shall be decided by the Vice - Chancellor/Board ofManagement in accordance with provisions in the F.R. & S.R. of the Government of India .

86

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4 ]

STATUTE - 48

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2 /4.4(6 ) dt . 27.6.96 and Resolution No.B/96/4/ 2.10 dt. 28.12.96 approved by the Visitor vide MHRD letter No F.14-23/96 - Desk(u ) Vol- III dt . 21.5.97 & F.14-23 /96- Desk (U) dt : 20/4/2000)

Statute on Building Committee in conformity with the UGC Guide lines

1.0 There shall be a Building Committee consisting of the following -

- Chairman

(i ) The Vice- Chancellor, T.U. or his nominee not below the rank of a Professor

- Member

(ii ) One representative of the Assam PWD not below the rank of a Superintending Engineer.

- Member

( iii ) One representative of the Board OfManagement of the University.

Member

(iv) One representative of the Planning & Academic Committee

Member

(v) Two experts to be nominated by the Board of Management

(vi) Finance Officer of Tezpur University Member

(vii ) University Engineer of the University Member

Member

(viii ) University Architect/Govt . Architect

Member Secretary .

(ix) Registrar of the University

Member

(x) One representative of the user Department(s) .

2.0 Five members shall form the quorum for the meeting . Provided that the plans and estimates of any construction project must be approved by the Building Committee in a meeting where the representative of the PWD/CPWD must be present .

3.0 Functions of the Building Committee :

3.1 The Building Committee shall be responsible for finalising the plans and estimates , Tenders of various construction projects approved by the University Grants Commission and for ensuing completion of the projects in accordance with the accepted plans and estimates and proper utilisation of the grants received from different agencies and the UGC .

3.2 The Building Committee shall see that all construction projects are undertaken as per UGC guide lines .

3.3 The building committee shall perform such other functions as may be entrusted to it by the Board of Management , Tezpur university .

87

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4]

STATUTE - 49

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96//2 /4.4( 7) dt . 27.6.96 and approved by the Visitor vide MHRD letter No.F.14-7/96- Desk(U) dated 04.11.96)

On Constitution, Power and functions of the Board of Management under Section 19(2) read with Section 27(2) and Section 43(c) of the Act .

1.0 The Board of Management shall be composed of

Chairman

(i) Vice- Chancellor

Member

(ii ) Pro Vice-Chancellor

Member

(iii) One Dean of Schools , by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice- Chancellor

Member

(iv) One Professor who is not a Dean of School by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice-Chancellor

- Member

(v) One Reader by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice- Chancellor

-Member

(vi ) One lecturer by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice- Chancellor

-Member

(vii) One lady of distinction of academic and public life to be nominated by the Vice-chancellor

- Member

(viii) 4( four ) persons of distinction inacademic and public to be nominated by the Visitor.

Five members of the Board shall form the quorum for a meeting.

2.0 All members of the Board of Management other than the Vice- Chancellor and the Pro-Vice- Chancellor of Tezpur University shall hold office for a period of three years .

3.0 In absence of the Vice- Chancellor , the Pro Vice-Chancellor shall preside over the meeting.

4.0 The Registrar shall be the Ex - officio Secretary of the Board of Management .

5.0 The Meeting of the Board of Management shall be held as and when necessary but there shall be at least four meetings in a year.

88

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4 ]

6.0 The Registrar with the approval of the Vice-Chancellor shall notify the date of the meeting with the Agenda at least 21 ( Twenty one ) days before the date of the Meeting.

7.0 Notice for an adjourned Meeting may be issued at least 10 days before the date of the Meeting.

8.0 No Quorum shall be required for an adjourned Meeting .

9.0 The minutes of the Meeting of the Board of Management shall be circulated at least one month before the next meeting to the members .

Statute 50

(On constitution of the Academic Council, the term of office of its members and its powers and functions under Section 21 (2), 26 (a) and 27 (2) of the Tezpur University Act, 1993) .

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B. 44/2005 /2/3.11 dt: 17/06/05 and approved by the visitor vide MHRD's letter No. F.14-3/2006- Desk (U) dated 03.02.2006)

1.0 Constitution of the Academic Council .

The Academic Council shall consist of the following members , namely

(i) The Vice-Chancellor shall be the Ex - officio Chairman of the Academic Council (under Statute 3 ( 1 ) ) .

(ii) The Pro Vice- chancellor .

(iii) All Deans of School of Studies , Dean of Students' Welfare .

(iv) Two Professors by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice- Chancellor.

(v) All Heads of Departments/ Centres .

(vi) Two Readers by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice- Chancellor.

(vii ) Two lecturers by rotation on seniority basis to be nominated by the Vice- Chancellor.

(viii ) Three distinguished academicians to be nominated by the Board of Management .

(ix) One representative each from

(a) Ministry of Human Resource Development, Government of India.

[ भाग III- खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

89

(b) University Grants Commission .

(c) North Eastern Council.

(d) The State Government of Assam (Education , Science & Technology Department) .

(x) The Controller of Examinations and the Librarian .

(xi) The Registrar shall be the Ex- officio Secretary (under Statute (6)) .

2.0 Term of office of the members .

..All members of the Academic Council , other than ex - officio members shall hold office for a term of three years .

3.0 Powers and functions of the Academic Council .

The Academic Council shall be the principal academic body of the University (under Statute 21 ( 1 ) of the Act .

Subject to the provisions of the Tezpur University Act, 1993 , the first Statutes and Ordinances , the Academic Council shall in addition to the powers vested in it, have the following powers , namely .

(i) to advise the Board of Management on matters relating to the University academic activities , that is to say, framing of admission and recruitment policies

And

(ii) the powers vested in it under Statute 15 ,

Reproduced as below

(a) to exercise general supervision over the Academic Policies of the University and to give directions regarding methods of instructions, cooperative teaching among colleges and institutions , evaluation of research or improvements in academic standards .

(b) to bring about inter school coordination, to establish or appoint committees and Boards , for taking up project on an inter school basis .

(c) to consider matters of general academic interest either on its own initiative or on the reference by a School or the Board of Management and to take appropriate action there on .

And

(d) to frame such regulations and rules consistent with the Statutes and Ordinances regarding the academic functioning of the University , discipline , residences , admissions , award of fellowships and studentships , fees , concessions , corporate life and attendance .

4470 G1/08-12 90

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

4.0 Number of meetings .

TheAcademic Council shall meet at such intervals as it shall deem expedient , but it shall meet at least twice in a year .

5.0 :Quorum for meetings of the Academic Council .

Nine members of the Academic Council shall form a quorum for a meeting of the Academic Council (under Statute 14) .

6.0 Procedures of the meeting .

(1) The Registrar with the approval of the Vice- chancellor shall notify the date of a meeting with the agenda at least 21 days before the date of the meeting . However, in the case of emergency the meeting may be called giving three days intimation .

(ij) Notice for adjourned meeting may be issued at least seven days before the date of the meeting .

No quorum shall be required for an adjourned meeting .

(ili) The minutes of the meeting shall be circulated within three weeks from the date of the meeting held .

Statute 51

(On constitution of the Planning Board, the term of office of its members and its powers andfunctions under Section 22 (2), 26 (a) and 27 (2) of the Tezpur University Act, 1993) .

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. Β. 44/2005 /2/3.11 dt: 17/06/05) and approved by the visitor vide MHRD's letter No. F.14-3/2006-Desk (U) dated 03.02.2006)

1.0 Constitution of the Planning Board .

The Planning Board shall consist of the following members namely

(i) The Vice- Chancellor shall be the Ex - officio Chairman of the Planning Board (under Statute 3 ( 1 ) ) .

All Deans of Schools of studies and Dean of Students' Welfare .

(ii)

(iii ) Six teachers to be nominated by the Academic Council with at least one teacher of each rank .

(iv) One representative each from the

(a) Ministry of Human Resource Development , Government of India .

(b) University Grants Commission.

( c) North Eastern Council .

(d) The State Govemment of Assam. ( Education , Science & Technology, Department).

91

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4]

(v) Two eminent persons from the field of education and industry to be nominated by the Board of Management .

Controller of Examinations , Finance Officer and Librarian shall be the permanent invitees . The Registrar shall be the ex - officio Secretary of the Planning Board (under Statute 6) .

2.0 Term of office of the members :

All members of the Planning Board other than ex -officio members shall hold office for a term of three years .

3.0 Powers and functions of Planning Board .

( i ) The Planning Board shall be the principal Planning body of the University (under Section 22 ( 1 ) of the Act).

( ii ) The powers and functions of the Planning Board as provided under Statute 16 ( 1 ) ( a) (b ) ( c ) (d ) , (2) ( 3 ) (4 ) ( 5 ) are reproduced below .

(a) Reviewing the educational programmes offered by the University .

(b) Organising the structure of education in the University so as to provide opportunities tom students to offer different combinations of subjects appropriate for the development of personality and skills for useful work in society .

(c) Creating an atmosphere and environment conducive to value-oriented education ; and

(d) Developing new teaching-learning processes which will combine the lectures , tutorials , seminars , demonstrations , self- studies and collective practical projects.

(2) The Planning Board shall have the power to advise on the development of the University and review the progress implementation of programmes so as to ascertain whether they are on the lines recommended by it and shall also have the power to advise the Board of Management and the Academic Council on any matter in connection therewith .

(3) The Academic Council and the Board of Management shall be bound to consider the recommendations of the Planning Board and shall implement such of the recommendations as are accepted by it .

(4) Such as those recommendations of the Planning Board as have not been accepted by the Board of Management or the Academic Council under clause (3 ) shall be submitted by the Vice- chancellor along with the recommendations of the Board of Management or the Academic Council , to the Visitor for advice and the advice of the Visitor shall be implemented by the Board of Management or the Academic Council , as the case may be .

(5) The Planning Board may constitute such committees as may be necessary for planning and monitoring the programmes of the University .

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4] 92

4.0 Number of meetings .

The Planning Board shall meet at such intervals as it shall deem expedient , but it shall meet at least twice in a year .

5.0 Quorum for meetings of the Planning Board .

Seven members of Planning Board shall from quorum for a meeting of the Planning Board.

6.0 Procedure of the meetings .

(i) The Registrar with the approval of the Vice -Chancellor shall notify the date of a meeting with the agenda at least 21 days before the date of the meeting .

(ii) Notice for adjourned meeting may be issued at least seven days before the date of the meeting.

No quorum shall be required for an adjourned meeting .

(iii) the minutes of the meeting shall be circulated within three weeks from the date of the meeting held .

ORDINANCE No. - 1

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2/4.44( 1) dt. 27.6.96 and noted by the Government vide MIIRD letter No.F.14-24/96- Desk(U) dt.30.10.96 )

On establishment of Schools of Studies and School Boards under Statutes No. 17( 1 ) , (2), (3 ) , (4 ) and 5 (a) of the Second Schedule .

1.0 There shall be the following Schools of Studies in the University for the present A. The School of Science and Technology

B. The School of Energy , Environment and Natural Resources.

C. The School of Humanities and Social Sciences .

D. The School of Management Sciences .

2.0 Each School shall consists of the Departments assigried to it hereunder:

A. Departments under the School of Science and Technology

1. Department of Physics

2. Department of Chemical Sciences

3. Department of Mathematical Sciences

4. Department of Computer Science

5. Department of Electronics

6. Department of Information Science and Technology

7. Department of Molecular Biology and Biotechnology

B. Departments under the School of Energy , Environment and Natural Resources Department of Energy

Department of Environmental Studies

Department of Geological Science 93

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

C. Departments under the School of Humanities and Social Sciences

1. Department of English and Foreign Languages

2. Department of Traditional Culture and Art Forms

3 . Department of Mass Communication and Journalism

4. Department of Sociology

Department of Modern Indian Languages

5.

D. Departments under the School of Management Sciences

1. Department of Business Administration

2. Department of Banking and Financial Management

Department of Commerce

3.

4. Department of Business Economics

3.0 The Dean of School shall be the Head of the School as specified under Statute No. 7( 1 ) of the Second Schedule.

4.0 The Academic Registrar / Deputy Registrar / Assistant Registrar (Academic ) of the Tezpur University shall act as the Secretary of the School Board and render assistance to the Dean of the School in conducting the meeting and implementation of the decision of the Board including maintenance of continuous records .

5.0 School Boards

5.1 Every School shall have a School Board . The School board shall consist of

Chairman

a) The Dean of the School concerned

b) The Heads of all the Departments under the school

Member

Ex Officio Secretary.

c) The Academic Registrar / Dy . Registrar/Asstt. Registrar (Academic)

5.2 Power & Functions of the School Boards :

It shall be the responsibilities of the School Boards to translate the enshrined objectives of the University into realities . The School Board shall recommend to the Planning and Academic Committee or the Academic Council such courses of Studies and Research Programmes so as to play a positive role in the development of the North - Eastern Region in particular and the State of Assam in general , besides , encouraging national integration through study and research in the field of cultural heritage and diverse ethnic linguistic and tribal culture of the state. Due importance should be given to scientific and technological education and research, distance education techniques , modern communication technologies to reach the large segments of uneducated population etc. relevant to the needs of the region .

5.3 The Board shall co- ordinate teaching and research works in the Departments and Centres assigned to the School .

5.4 The School Board shall consider and recommend to the Planing and Academic Committee proposals for creation and abolition of teaching posts for the departments under it.

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

94

$5.5 The Board shall recommend to the Planning and Academic Committee the names of examiners / Moderators on the basis of proposals of the Board of Studies .

5.6 The School Board shall recommend the names of Examiners for the research degrees.

5.7 The Board shall frame general rules for the continuous evaluation of the students under it .

5.8 The Board shall encourage inter -disciplinary research and may appoint Committee to organise teaching and research of such nature .

5.9 The Board shall perform all other functions as may be prescribed under the Act , Statutes or Ordinances and as may be directed by the Planning and Academic Committee or Academic Council or the Board of Management and the Vice- Chancellor from time to time .

6.0 Meeting of Sehool Boards :

6.1 The meetings of the School Boards shall be convened by the respective Deans ! of the Schools at the interval of 2 ( two) months to review the performance and progress of teaching and research in the Departments under it .

6.2 Notice for the meeting of the Board shall be issued at least 10 days before the | day fixed for the meeting .

6.3 Special meeting of the Board may be called at any time by the Dean concerned on his/her own or at the suggestion of the Vice- Chancellor with at least 24 hours notice .

Amendments :

As approved by the Central Government vide letter No. F. 14-6/ 2005 - Desk (U ) (Pt) , dt : 25/07/06.

Clause1.0

Addition: after D added a New School of Studies as E - The School of Engineering

Clause 2.0

A - Departments under the School of Science & Technology

St 4 Department of Computer Science renamed and shifted to the school of Engineering .

SI $ Department of Electronics renamed and shifted to the School of Engineering .

Sl & Department of Information Science & Technology deleted as merged with the Department of Computer Science and Engineering.

SI 4 Be read as Department of Molecular Biology and

Biotechnology

S15 Be read as Department of Food Processing Technology 95

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4 ]

E. Departments under the school of Engineering:

1. Department of Computer Science & Engineering

2. Department of Electronics & Communication Engineering

3. Department of Mechanical Engineering

4. Department of Planning & Architecture

5. Department of Civil Engineering

6. Department of Chernical Engineering

7. Department of Electrical Engineering

8. Department of Biomedical Engineering

9. Department of Agricultural Engineering

10. Department of Environmental Engineering

11. Department of Automobile Engineering

Clause 4.0

The Controller of Examinations / Academic Registrar / Deputy Registrar / Assistant Registrar (Academic ) of the Tezpur University shall act as the secretary of the School Board and render assistance to the Dean of the School in conducting the meeting and implementation of the decision of the Board including maintenance of continuous records .

Clause 5.0

5.1 ( c ) The Controller of Examinations / Academic Registrar Ex - Officio Secretary /Dy. Registrar / Asstt . Registrar (Academic).

5.2 It shall be the responsibilities of the School Boards to translate the enshrined objectives of the University into realities . The School Board shall recommend to the Academic Council such courses of studies and Research Programmes so as to play a positive role in the development of the North- Eastern Region in particular and the state of Assam in general . Besides , encouraging national integration through study and research in the field of cultural heritage and diverse ethnic linguistic and tribal culture of the state . Due importance should be given to scientific and technological education and research , distance education techniques , modern communication technologies to reach the large segments of uneducated population etc. relevant to the needs of the region.

5.5 The Board shall recominend to the Academic Council the names of examiners / Moderators on the basis of proposals of the Board of Studies .

ORDINANCE No - 2

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B /96/ 2 /4.4 (2 ) dt . 27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-24/96- Desk(U) dt . 30.10.96)

On Powers and Functions of the Deans of Schools under Statute 7 (3 ) and 7 (4 ) included in the Second Schedule of the Act

The Dean shall have the following powers and function :

1.0 To convene and conduct the meeting of the School Boards .

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

96

2.0 To coordinate and generally supervise the teaching and research work in the school through the Head of the Departments /Centres .

3.0 To take steps to promote modular and inter- disciplinary teaching and research wherever necessary .

4.0 To maintain discipline in the School through the Heads of the Departments/ Centres .

5.0 To cooperate with the University in the conduct of the University examinations in respect of the students of the School in accordance with such conditions as may be given by the School Board or the Planning and Academic Committee .

6.0 To take steps and to give effect to the decisions and recommendations of the School Board.

7.0 To perform such other duties as may be assigned to him by the Board of Management, the Planning and Academic Committee or the Vice-chancellor

ORDINANCE No - 3

(Adopted by the Board of Management vide resolution No. B/96/2 /4.4 (3) dt . 27.06.96 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-24 /96 - Desk (U) dt . 30.10.96)

Ordinance on Powers and Functions of the Heads of the Departments included in the Second Schedule of the Act , under Statute No.8 (5)

1.0 The Head of the Department shall convene and preside over the meetings of the Board of Studies /Department and shall function under the general supervision of the Dean of School .

2.0 Shall implement the decision of the School Board and the Board of Studies .

$ .0 Shall be the in- charge of the Departmental Library.

4.0 Organise teaching and research works in the Department .

$ .0 Supervise and conduct all examinations of the Department.

6.0 Frame the time table in conformity with the allocation of the teaching work made by the Department .

7.0 Maintain discipline in the Class room and Laboratories through the teacher.

8.0 Assign to the teachers in the Department such duties as may be necessary for proper functioning of the Department .

9.0 Assign work to exercise control over the non - teaching staff in the Department .

!

97

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4.]

10.0 To keep records of continuous internal evaluation of class examinations , attendance etc. of the students as prescribed, and to forward the records of such evaluation in time to the Controller of Examinations for necessary action.

11.0 Perform such other duties as may be assigned to him by the Dean, Board of Studies and the Vice- Chancellor .

ORDINANCE No. - 4

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2/4.4(4) dt.27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F.14-24/96 - Desk(U) dt . 30.10.96 )

On Board of Post- Graduate Studies under Statute 18(2) included in the Second Schedule of the Act.:

1.0 Composition :

(i) The Head of the Department

Chairman & Convenor

Member

(ii ) All full time teachers in the Department

Member

(iii) 2(two) experts to be nominated by the Vice- Chancellor in consultation with the Head of the Department

Dean of the School may be present as provided under Statute 7 (4 ) included in the Second Schedule of the Act.

Provided that the function of the Board of Post Graduate Studies during the period of first 3 years shall be performed by the Department .

2.0 Term of Office:

The term ofoffice of the nominated members of a Board of Studies shall be 3 years .

3.0 Powers and Functions :

3.1 To coordinate teaching and research work(s) in the Department .

3.2 To prepare the course of studies and submit the same to the school Board for consideration and recommendation to the Planning and Academic Committee for approval.

3.3 To prepare and submit to the School Board the panel of examiners for Post- Graduate courses .

3.4 To recommend to the School Board for creation and abolition of teaching and academic posts .

3.5 To consider schemes for the advancement of the standard of teaching and research and to submit such proposals to the School Board.

3.6 To prepare the time table of a Department and submit the site to the Vice- Chancellor for consideration and approval.

4470 G1/08-13 98

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

3.7 To perform all other functions which may be prescribed by the Act, Ordinances , Statutes and Regulations and to consider all such matters as may be referred to it by the Board of Management, Planning and Academic Committee , School Board or the Vice- Chancellor .

4.0 Meeting of the Board of Studies:

The Board of Studies shall meet in the months of August and November in the Autumn Semester and in January and April in the Spring Semester . Special meeting , if and when necessary may be called at the suggestion of the Vice - Chancellor. Notice for holding meetings of the Board of Studies , formation of quorum , rules for conduct of the meeting and such other matters shall be prescribed by the Regulation .

ORDINANCE No - 5

(Adopted by the Board of Management vide resolution No. B/96/ 2/4.4( 5 ) dt . 27.6.96 and Resolution No.B/ 96/ 4/2.10 dt. 28.12.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F.14-24/96 - Desk ( U ) dt.12.01.98 )

:

Ordinance on creation of post , appointment and emoluments and manner of Selection of Administrative , Ministerial and Other staff of the University under Section 28 (j ) of the Act and under Section 12 (2 ) III of the Statutes under Second Schedule ( other than those posts for whom provisions have been made under the Statutes)

1.0 A. General Provision :

a) Grade of post as per existing scale of pay as on 1.1.96 ( Non teaching staff )

(i) Grade A posts : The minimum of whose Scale of pay is Rs.2200/- and above .

( ii) Grade B Posts : The minimum of whose scale of pay is Rs . 2000/-

(iii ) Grade C Posts : The minimum of whose scale of pay is Rs.950 /- and above but below Rs.2000/-

(iv) Grade D Posts : The maximum of whose scale of pay does not exceed Rs . 1200/-

B. Nature of posts :

Apost may be permanent , temporary or a tenure post . A permanent post means a post carrying a definite rate of pay or scale of pay sanctioned without any limit of time and is intended to continue indefinitely . A temporary post means a post carrying a definite rate of pay or scale of pay sanctioned for a limited period of time only and cannot continue indefinitely . A tenure post means a permanent post which the same incumbent/ officer cannot hold for more than a fixed period of time .

2.0 Creation of Posts :

2.1 Proposals for creation of any post under any grade and of any nature may be submitted by the respective Heads of teaching Department and administrative officer to the Registrar with detailed particulars of duties

and responsibilities proposed to be attached to the post , scale of pay , qualification and experience required and total number of existing employee of the same grade and cadre etc. The Registrar when satisfied, shall recommend such proposal to the Finance Officer for obtaining approval of the Finance Committee . The Board of Management shall create all such posts on recommendation of the Finance Committee .

99

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III-खण्ड 4 ]

2.2 Provided that the Board of Management shall have the authority to create any post without the recommendation of the Finance Committee . The recommendation of the Finance Committee shall not be binding on the Board of Management .

2.3 In the case of urgent and unforeseen nature the Vice- Chancellor may also create any temporary post of Grade ' D ' for a period not exceeding 11 (eleven) months duration and report the matter to Finance Committee and the Board of Management for making necessary provision in the Budget for year or to meet the expenditure by re - appropriation.

2.4 Notwithstanding anything contained in the above rules , creation of any post shall be subject to any guide lines or direction that may be issued by the University Grants Commission from time to time. Any procedure that may be prescribed by the UGC for the creation of post and appointment there to shall be followed by the University.

3.0 Appointment:

3.1 Appointment to Grade A Posts : Other than the Statutory Officer shall be processed through the Selection Coinmittee as provided for under Section 20 of the Statutes (2nd Schedule ) and constituted with the following members .

Vice-Chancellor

Chairman -

(2) Member

2 (two) Members of the Board of Management to be nominated by the BoM

(3)Member

2 persons not in service of the University to be nominated by the Vice-Chancellor .

Registrar

(4) Member Secretary -

4(four) members shall form the quorum

3.2 The term of the members other than Ex- Officio ( V.C. & Registrar ) shall be of 3 years from the date of notification.

3.3 The recommendation of the Selection Committee shall be placed in the Board of Management for final approval . The Board of Management shall be the appointing authority for all purpose of all Grade ' A' Posts .

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4] 100

3.4 The Board of Management may approve a panel of candidates on the basis of recommendation of the Selection Committee, such panel shall remain valid for a period of one year only .

3.5 . All Grade ' A' posts shall be advertised in one National Daily, Employment News and one leading news paper of the region for wide publicity with all detailed information and service conditions to attract suitable and competent person.

3.6 . The Screening of the applications received shall be done by the Registrar or any other officer that may be assigned to , with reference to the terms and conditions of the advertisement . Applications found incomplete and not in accordance with the terms and conditions of the Advertisement shall be rejected.

3.7 . A detailed statement of all the candidates found eligible to be considered for appointment shall be made in a tabular form and be authenticated by the Registrar and placed the same before the Selection Committee together with the original applications or biodata of all the candidates called for the interview. The Selection Committee shall verify all certificates and records with the original certificates of the candidates at the time of interview .

i 3.8 . The Selection Committee shall make its recommendation from the list of candidates placed before it for consideration on the basis of records and performance in the interview. The Selection Committee shall decide its own method of evaluating the performance of the candidates .

3.9 . If any candidate is recommended by the Selection Committee for appointment in relaxation of any of the prescribed qualification and experience , it shall be so stated in the recommendation with reason for such relaxation. i

3.10 The Selection Committee may recommend higher initial pay to be offered to a deserving candidate for consideration of the Board of Management with reason to be recorded in writing .

3.11 The proceeding of the Selection Committee shall be treated as most confidential . Hence only the members of the Selection Committee should be present when the selections are deliberated upon and the recommendations are made.

3.12 The recommendations of the Selection Committee shall be considered by the . Board of Management along with the bio-data of the candidates and shall approve of the recommendation of the selection . If the Board of Management should consider it necessary to alter the preferential position of the candidate where more than one candidate are recommended in order of preference , it may do so with reason to be recorded in writing . The Board of Management may not accept the recommendation of the Selection Committee at all in which event the post shall be re - advertised.

101

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4]

3.13 The recommendations of the selection Committee shall remain valid for one year .

3.14 In the case of temporary vacancy of less than a period of one year , if the Vice- Chancellor is satisfied that the post should be filled up immediately, the appointment may be made on purely temporary basis on the recommendation of the Selection Committee consisting of the following :

Chairman i ) Vice- Chancellor

Member ii ) One of the Deans of Schools to be nominated by the Vice - Chancellor .

Member iii ) One member of the Board of Management to be nominated by the Vice - Chancellor .

Member iv) The Head of the Administrative Office .

Member Secretary v) The Registrar

3.15 The Vice-Chancellor shall report the matter to the Board of Management for consideration and approval .

3.16 In the cases of appointment on promotion from Grade ' B ' Officer to Grade ' A' Officer's post or within the Grade ' A' posts from one lower scale to another post with higher scale of pay, the same Selection Committee as under 3.1 above shall process the selection on the basis of past service records , Annual Confidential Reports and personal interview and shall recommend the candidate(s) on merit cum seniority basis to the Board of Management . The Board of Management shall consider the recommendation of the Selection Committee and finalise the appointment on promotion. If the Selection Committee or the Board of Management cannot find any suitable candidate for promotion, the post shall be filled up through direct recruitment .

4.0 Appointment to Grade ' B ' Posts

4.1 There shall be a Selection Committee for selection of candidates for appointment to Grade ' B ' posts (B Grade Officers ) of the University. The Committee shall be constituted with the following niembers:

Chairman .

i) Vice- Chancellor

Member

ii ) Two members of the BoM to be nominated by the BoM.

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

102

[PART III-SEC. 4 ]

Member

iii) Two members not in University Service to be nominated by the Vice- Chancellor .

:

iv) Registrar

Member Secretary

4.2 Four members shall form the quorum.

4.3 The appointing authority shall be vested with the Vice- Chancellor for all the posts of Grade ' B ' Officers .

4.4 The term of the members other than Ex - Officio members shall be of 3 years from the date of notification .

4.5 The selection shall remain valid for a period of one year from the date of selection .

4.6 All Grade ' B ' officers posts shall be advertised at least in two news papers one National and one local and Employment news for wide publicity with all particulars in details.

4.7 Qualification etc. shall be as may be prescribed by the Board of Management/Vice- Chancellor . ;

4.8 In the case of promotion to the Grade ' B' posts from the lower Grade or lower scale within the Grade , the same Selection Committee shall process the selection for promotion .

5.0 Appointment to Grade ' C' Posts :

5.1 There shall be a Selection Board for selection of candidates for appointment to Grade ' C ' posts of the University . The Board shall be constituted as below :

Chairman

i ) Vice -Chancellor

Member

ii ) Two members to be nominated by the Board ofManagement.

Member

iii) The Head of the Department/Office for which the post is advertised specifically for a Department/ Office . -

Member

iv) One Teacher to be nominated by : the Vice- Chancellor .

Member Secretary

v) Registrar

5.2 Four members shall form the quorum.

103 [भाग III-खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

5.3 The term of the members other than Ex - Officio members shall be of 3 years from the date of notification.

5.4 The Vice - Chancellor shall be the appointing authority of all Grade ' C ' posts .

5.5 All vacancies in the grade ' C' posts shall be advertised in a leading daily newspaper of the State and in one National daily for wide publicity.

5.6. The Registrar shall screen the applications and arrange for interview of all the eligible candidates by the Selection Board. If considered necessary , the Vice- Chancellor may order for a written test of the candidates and the candidates qualified in the written test may be called for interview by the Selection Committee.

5.7 The Selection Board shall make its recommendations from the list of candidates placed before it by the Registrar for consideration . The list shall contain biodata of all the candidates called for interview.

5.8 Notice to the candidates for the interview shall be issued at least 15 ( fifteen) days before the date of interview under certificate of posting . Candidates failed . to appear before the Selection Board in time shall not be considered for appointment .

5.9 The Selection Board may decide its own method of evaluating the performance ofthe candidates.

5.10 The report of the Selection Board shall be treated as confidential . Hence, only the members of the Selection Board shall be present when selections are deliberated upon and recommendations are made .

5.11 The recommendations of the Selection Board shall remain valid only for a period of 12 months from the date of recommendation.

5.12 Appointment shall be made only after the approval of the recommendations by the Vice- Chancellor.

6.0 Appointment to Grade ' D' Posts :

6.1 There shall be a Selection Board to select Grade ' D ' staff for appointment to various Grade ' D ' posts of the University

6.2 The composition of the Selection Board shall be as under: -

Chairman

i ) Registrar

Member

ii ) One member of the Board of Management to be nominated by the Board.

Member

iii ) One teacher to be nominated by the Vice- Chancellor .

104

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

Member

iv) District Employment officer , Tezpur or his nominee

Member

v) One reputed member of the public life nominated by the Vice- Chancellor

vi ) Deputy Registrar , in his absence Assistant Registrar (Estt . ) will act as Secretary.

Four members shall form the quorum .

6.3 The Registrar shall be the appointing authority for all Grade ' D ' staff of the University.

6.4 All technical post of Grade ' D ' staff shall be advertised in a local daily news paper and all non- technical posts shall be notified in the Notice Boards of all the Departments/Offices and District Employment office .

6.5 The recommendation of the Selection Board shall be reported to the Vice- Chancellor before appointments letters are issued .

6.6 Applications shall be scrutinised category - wise by the Deputy Registrar . All eligible candidates shall be called for interview by the Selection Board .

6.7 The administration shall prescribe different educational qualifications required for different posts of Grade ' D ' staff on the basis ofjob requirement .

6.8 The proceeding of the Selection Board shall be treated as confidential and none other than the members of the Selection Board shall be allowed to be present while deliberating upon the merit of the candidates , recommendations are made .

6.7 The recommendations of the Board shall remain valid for a period of 12 months from the date of recommendation .

7.0 Empluments :

The scale of pay for the posts in various Grades like officers , Grade ' C ' and Grade 'D' shall be as prescribed by the Board of Management from time to time . Their pay shall be fixed in the respective scales of pay as per rule prescribed for the purpose by the Board of Management . In addition to pay all the staff shall be eligible to such other allowances as may be available to the employee of the Central Government from time to time. The Board of Management may decide the quantum of the alloivances as and when necessary .

105

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III-खण्ड 4]

7.1 The Board of Management shall review the pay structure of all the non-teaching staff from time to time and shall make necessary adjustment in classification/Gradation of different posts as may be necessary .

7.2 In addition to pay and allowance , all the staff shall be eligible to such retirement benefits as may be prescribed by the Statute from time to time.

7.3 The Selection Committee/ Board may also recommend higher initial pay to any candidate considered deserving with reason to be recorded in writing . The appointing authority shall consider and finalise such recommendation .

8.0 Promotion :

The Board of Management shall devise means of promotion from lower post of lower scale to a post with higher scale of pay within the same grade and also from one lower grade to higher grade. The Board of Management shall also prescribe eligibility of such promotion for each promotional post.

8.1 Provided that if there is no suitable candidate for promotion in any grade , the post shall be filled up by direct recruitment .

8.2 Every appointment by promotion shall be on the seniority- cum - suitability basis .

8.3 All Promotional cases shall be processed through the respective. Selection Committee/Selection Board as the case may be as prescribed separately for appointment to different grades of staff in the Ordinance

8.4 The Selection Board/Committee shall consider the past service records , Annual confidential Report and specific confidential report relating to the promotion obtained for consideration of the promotion.

8.5 There may be different cadre of posts within the same grade of service . It will be necessary to identify the cadre for creating promotional channel from one post of lower cadre to a post in higher grade/cadre. Considering the nature of duties , prescribed qualification, scale of pay attached and transferability of the employee, the Vice-Chancellor shall finalise the cadre of promotional channel of all Grade ' C ' & ' D ' staff of the University and submit such proposals for promotion of the administrative officers to the Board of Management for approval .

9.0 Reservation of posts for SC/ST/OBC etc. shall be made as per guideline prescribed by the Govt . of India from time to time.

ORDINANCE No - 6

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B /96 /2/4.4(6) dt . 27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F.14-24/96- Desk(U) dt . 30.10.96)

Form of Contract under Statutes 25 (2 ) of the Second Schedule:

Memorandum of agreement made this

aged

and between Prof/Dr./Mr . residence day of Son/Daughter/ Wife of ( hereinafter called the 'Teacher' ) on the first part, and the Tezpur University being a body corporate constituted under the Tezpur University Act, 1993 of Parliament (hereinafter called the "University") ofthe second part

4.170 G1/08--14 106

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC..4]

10 Whereas the Board of Management in exercise of the power conferred on it by the said Tezpur University Act . 1993 appoints the party of the first part to serve as Professor/Reader/ Lecturer , hereinafter called the Teacher, in the Tezpur University in the scale of pay of Rs. plus other allowances as admissible under rules with effect from the date ofjoining the post

And whereas the said Mr/Dr./Prof. said engagement in the Tezpur University with effect from agrees to accept the

2.0 Now the parties hereto agrees as follows :

The teacher undertakes to take such duties in the University as may be required by and in accordance with the said Act . the Statutes and the Ordinance being in force , whether the same relate to organisation of instruction or teaching including inter disciplinary teaching or research or the examination of students or their discipline or their welfare and generally to act under the direction of the authorities of the University .

2.1 The teacher shall be on probation for a period of 12 months which may be extended so as not to exceed 24 months in all.

2.2 The University shall have the power to relax the provisions contained in sub paragraph 2.1 and shall also have the right to assess the suitability of the teacher for confirmation even before the expiry of the period of 12 months from the date of his /her appointment but not earlier than 9 months from that date .

2.3 If the University is satisfied with the suitability of the teacher for confirmation he/ she shall be confirmed in the post to which he/she was appointed at the end of the period of his /her probation .

2.4 In case the University decides not to confirm the teacher whether at the end of the 12 months period of probation or at the end of the extended period of probation , as the case may be , the teacher shall be informed in writing , at least 30 days before the expiry of that period that he/ she would not be confirmed and would , consequently cease to be in the service of the University at the end of the period of his /her probation.

i

3.0 That the said shall be a whole time teacher of the University and unless the contract is terminated by the Board of Management or by the teacher as hereinafter provided , shall continue in the service of the University until he/she completes the age of sixty ( 60 ) years or as prescribed by the MHRD /UGC from time to time.

4.0 That the University shall pay salary in the said scale of pay during the continuance of his/her engagement hereunder as remuneration for his her service a salary of Rs . per mensem rising by annual increment of Rs .. to a maximum salary ofRs . permensem .

Provided that whenever there is any change in the nature of appointment or the emoluments of the teacher , particulars of the change shall be recorded in the Schedule annexed hereto , under the signature of both the parties and the terms of this agreement shall apply mutatis mutandis to the new post and the terms and conditions attached to that post .

107

-भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III- खण्ड 4]

Provided further , that no increment shall be withheld or postponed save by a resolution of the Board of Management on a reference by the Vice- chancellor to it and after the teacher has been given sufficient opportunity to make his /her written representation.

5.0 That the said teacher agrees to be bound by the Statutes , Ordinances , Regulations and Rules for the time being in force in the University . Provided that no change in the terms and conditions of service of the teacher shall be made after his /her appointment in regard to designation , scale of pay , increment , provident fund, retirement benefits , age of retirement . Probation confirmation, leave , leave salary and removal from service so as to adversely affect him .

6.0 That the teacher shall devote his /her whole time to the service of the University and shall not , without the written permission of the University , engage directly or indirectly , in any trade or business whatsoever , or in any private tuition or other work to which any emoluments or honorarium is attached, but this prohibition shall not apply to the work undertaken in connection with the Examination of Universities or learned bodies or publication or radio talk or extension lecturers , or with the permission of the Vice - chancellor to do any other academic work .

7.0 That the said teacher agrees to observe the code of conduct formulated by. the University on its teachers .

8.0 It is further agreed that this agreement shall not be liable to be terminated by the University except on the grounds specified and in accordance with the procedure laid down in clauses ( 1 ) , ( 2) , ( 3 ) , (4) , (5) and ( 6 ) of Statute 28 ( reproduced below ) :

8.1 Where there is an allegation of misconduct against a teacher, or a member of the academic staff, the Vice- chancellor may, if he thinks fit , by order in writing, place the teacher under suspension and shall forthwith report to the Board of Management the circumstances in which the order was made .

Provided that the Board of Management may, if it is of the opinion , that the circumstances of case don't warrant the suspension of the teacher or a member ofacademic staff, revoke such order.

8.2 Notwithstanding anything contained in the terms of his /her contact of service -or of his /her appointment the Board of Management shall be entitled to remove a teacher or a member of the academic staff on the grounds of misconduct.

8.3 Save as aforesaid, the Board of Management shall not be entitled to remove a teacher or a member of the academic staff except for good cause and after giving three months notice in writing or on payment of three months salary in lieu of notice.

8.4 No teacher or a member of the academic staff shall be removed under clause 8.2 or under clause 8.3 until he/she has been given a reasonable opportunity of showing cause against the action proposed to be taken in regard to him/her.

8.5 The removal of a teacher or a member of the academic staff shall require a two thirds majority of the members of the Board of Management present and voting.

108

[PART III-SEC. 4] THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

8.6 The removal of a teacher or a member of the academic staff shall take effect from the date on which the order of removal is made .

9.0 Any dispute arising out of the contract shall be settled in accordance with the provisions of clause 32(2 ) and (3 ) of the Tezpur University Act , 1993 .

"Any disputes arising out of the contract between the University and any teacher shall , al the request of the employee , be referred to a Tribunal of Arbitration consisting of one member appointed by the Board of Management concerned , one member nominated by the employee concerned and an umpire appointed by the Visitor

The decision of the Tribunal shall be final and no suit shall be in any Civil Court in respect ofthe matter decided by the Tribunal . "

10.0 A teacher may, at any time , terminate his/her assignment by giving the Board of Management three months notice in writing or on payment to the University of three months salary in lieu thereof, provided that the Board of Management may waive the requirement of notice at its discretion .

11.0 On the termination of this agreement , for whatsoever cause , the teacher shall deliver to the University all books , apparatus , records and such other articles belonging to the University as may be due from him .

In witness whereof the parties hereto affix their hands and seal

Signed and sealed

Signature of the employee

Designation:

on behalf of the University by Registrar , Tezpur University

In the presence of

In the presenceof

1. Signature Designation:

1. Signature Designation

2. Signature Designation

2. Signature . Designation

SCHEDULE

Name of the teacher in full :

Address:

Designation:

SalaryRs .

In the grade of:

Note

: The change in grade , salary on designation should be briefly described.

Change of Designation or Grade:

Date of approval of the Board of Management .

Date from which change takes effect:

Signature of the teacher:

Signature of the Officer of the University :

109

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

ORDINANCE No - 7

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. 96/2 /4.4( 7) dt . 27.6.96 and B.98/2 /22 dt : 14.6.97 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14- /96- Desk(U) dt . 30.10.96 & F.14-4/99 - Desk ( U) dated 2.3.2000)

Ordinance on admission of students , course of studies , medium of instruction and examination leading to Master's Degree, ( under Section 28 ( 1 ) , ( b) , (c) and ( d) of the Tezpur University Act . )

1.0

1.1 Candidates who have passed the Bachelor Degree Examinations or equivalent degree examinations from a recognised University/Institute under the ( 10 +2 +3 ) pattern of study or any technical degree examination from a recognised University/ Institute are eligible for admission to a Master's Degree course of thisUniversity.

1.2 The requirement of subject combination in the degree course or the discipline of study in case of a technical graduate , the minimum qualifying marks and other academic necessities for admission to a particular Master's Degree Course shall be laid down in the regulations/Syllabi of the concerned subject/ Course .

1.3 Candidates eligible for admission to a Course may have to appear at an entrance test to be decided and conducted by the respective Department/ Centre .

2.0 The duration of study for a particular Master's Degree course shall be laid down in the syllabus for the concerned course.

3.0 The medium of instructions and examinations shall be English Provided that for Language subjects , if it is not otherwise required, the language of the concerned subject shall be the medium of instruction and examination .

4.0 The starting of a session for a course may be either from 16th January or from 24th July depending upon the subject and the course .

5.0

5.1 There shall be Semester/Trimester pattern of education and evaluation of the students where such academic year is divided into either two Semester or three Trimester as the case may be .

5.2 There shall be a winter break and a summer break each of 15 ( fifteen ) days and 30(thirty) days duration from 1st January to 15th January and from 24th June to 23rd July respectively.

110

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4]

5.3 The dates of end semester/End Trimester examinations shall be notified by the Controller of Examinations .

Provided that the examinations , evaluation and declaration of the results shall be completed by 31st December or 23rd June as the case may be.

6.0 The syllabi and the details of the course of study shall be as approved by the School Board on the recommendation of the Board of Post Graduate Studies .

The guide lines for introducing a new syllabus or for modification of certain syllabus shall be laid down by Regulations . The Syllabus for each course of study shall include a list of text books framed as per guidelines given in the Regulations for preparation of syllabi .

7.0

7.1 Attendance of classes in the University is compulsory.

7.2 A student shall be eligible to appear in the End Semester/End Trimester examination at the end of each semester/Trimester only if he/ she has pursued a regular course of study in the subject concerned and has attended at least 75% of the classes separately in each course/paper/unit ( including theory and practical classes , Seminars , sessional works , unit test etc) held during the period.

!

1

Provided that the shortage in attendance upto a maximum of 5% may be recommended by the Departmental Advisory Committees for condonation to the Vice-Chancellor stating reasons for such recommendation and the decision of the Vice- Chancellor to condone or not to condone the short fall in attendance shall be final .

7.3 A student having more than 75 % attendance shall be eligible to score marks for attendance subject to a maximum of 5

marks out of the total of 100 marks in a paper/unit in the following pattern:

Marks

Attendance in percentage

76-80

1

2

81-85

86-90

3

91-95

4

96-100

5

8.0 Evaluation of Students 111

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III - खण्ड 4]

8.1 The evaluation of a student is designed on the system of continuous assessment and evaluation . Thus there shall be continuous evaluation of the student through seminar work, project work, practicals , sessional work and unit test during the semester/Trimester and there shall be an End Semester/Trimester examination at the end of each Semester/Trimester. The final results shall be worked out by combining the marks of the continuous evaluation and of the End Semester /End trimester Examinations .

8.2 The distribution of papers and marks allotted to each Semester/Trimester shall be laid down in the syllabus of a course . Each paper/Unit shall be of 100 marks , 60% weightage in marks shall be given to continuous evaluation including 5 % marks for attendance and 40% weightage to End Semester examination for each paper /unit . The 60% continuous evaluation marks shall be distributed as follows:

30 marks

Unit Tests ( At least two)

marks

15

Assignment/Class studies

marks

5

Project

marks

5

Attendance

marks

5

Internal Assesment

60 marks

Total

8.3 A six point letter grade system as detailed in the regulations shall be employed to assess the performance of a student in various courses . A Semester Grade point Average (SGPA)/ Trimester Grade point average ( TGPA) and to reflect the cumulative performance of a student from the first Semester/Trimester to the last , cumulative Grade point Average ( CGPA) shall be calculated as per procedure laid down in the regulations .

8.4 A student who secures letter Grade F i.e. less than 45% marks shall be deemed to have been unsuccessful or failed in the paper/Unit .

8.5 Candidate shall have to appear and qualify in both the continuous assessment and semester/ trimester End examination separately.

If a candidate fails to qualify in the continuous assessment separately in each unit in a semester/ trimester he/ she shall be debarred from appearing in the term end examination and his /her name shall be struck off from the rolls of the University . Such a candidate can get himself/herself readmitted in the immediately next session's corresponding semester/trimester .

Such a readmitted candidate shall have to discontinue his/her studies if he/she fails to qualify in the continuous assessment in the second instance also .

8.6 A student who has failed in two or less number of papers/ units but obtains a SGPA/TGPA of 6.0 or more in the other papers , exclusive of the papers/units in 112

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III SEC. 4]

which the student has failed , shall be allowed to continue his/her studies in the next semester/Trimester .

Provided that the student must improve his/her marks in the failed papers/units at least to the passing grade in the make -up examination to be held before the immediate next End Semester/End Trimester examinations .

8.7 A student who was ineligible for Make- up Examinations or who has failed in the Make up Examination of a particular Semester/Trimester as per the provisions of clause 8.6 of this Ordinance shall have to discontinue the class and may get himself/herself re - admitted in the immediately next corresponding Semester/Trimester .

Such re-admitted candidate shall have to discontinue his/her studies if he/she fails to pass the Semester/Trimester examination available to him/her at the first instance or the immediately next Make - up Examinations as may be available to him/her under the provisions of clause 8.6 .

9.0 Audit Course :

9.1 There shall also be audit ( Non-Credit ) course (s ) as prescribed in the syllabus .

9.2 A student shall have to secure at least letter Grade C in the

Audit Course( s) examination in order to qualify himself/herself for award of a Degree.

19.3 A student may appear at an examination in Audit Course(s) to be held immediately after his/her admission and commencement of the Classes to qualify himself/herself in the Audit subject(s ) or may attend Audit Classes in the concerned subject (s ) and may appear the audit course ( s) examination to be held at a later date.

Provided that if the student fails to secure letter Grade C in this examinations He / She shall have to attend Audit Classes and shall have to appear and pass the Audit course( s ) examination at a suitable date later .

10.0 Re-totaling/Re-evaluation :

A student may submit application in a prescribed form to the Controller of Examinations through the Head/In charge of the department along with the prescribed fees for re- totaling/ re-evaluation of one or mores of his/her papers in any End Semester/ End Trimester examinations . The Controller of examinations shall take appropriate action on the matter and inform the student about the outcome indue course .

11.0 Award of Degree

A student who successfully completes all the requirements as above shall be qualified for award of a Master's Degree by the University in the concerned subject .

113

भारत का राजपत्र असाधारण

[ भाग III खण्ड 4 ]

Provided that a student shall be given a certificate to the above effect by the Registrar after the declaration of the results of his/ her last End Semester/End Trimester Examinations .

Provided further that the degree shall be conferred on him/her at the immediate next Convocation of the University.

12.0 Not more than one chance of readmission , as provided by the Ordinance shall be allowed to a candidate.

ORDINANCE No - 8

(Adopted by the Board of Management Vide Resolution . No.96/2 /4.4( 8 ) dt . 27.6.96 and amended vide BoM resolution No. B.98/2/22 dated 14/06/97 and noted by the Government Vide MHRD letter No. F.14-24/96- Desk (U) dt . 30.10.96 & F.14-4/99- Desk (U) đt : 2.3.2000)

(Ordinance on admission of students , course of studies , medium of instruction and examination leading to Post-Graduate Diploma/Post-Graduate Certificate ( Under Section 28 ( 1 ) , ( b) , ( c) and (d) of the Tezpur University Act )

1.0

1.1 Candidates who have passed the Bachelor Degree Examination or equivalent degree examinations from a recognised University / Institute under the ( 10 +2 + 3 ) pattern of study or any technical degree examination from a recognised Univerity /Institute are eligible for admission to a Diploma/ Certificate course of thisUniversity.

Provided that deputed candidates having a Bachellor's Degree under the (10+2+3 ) pattern of education shall also be eligible for admission to a Diploma Course.

Also provided that depending upon the nature of the course candidates having a Bachelor's degree under the ( 10+ 2+ 3 ) pattern of education may also be eligible foradmission.

12 The requirement of subject combination in the degree course or the discipline of study in case of a technical graduate , the minimum qualifying marks and other academic necessities for admission to a particular Diploma/Certificate course shall be laid down in the Regulations/ Syllabi of the concerned subject/ course .

1.3 Candidates eligible for admission to a course may have to appear at an entrance test to be decided and conducted by the respective department/centre .

2.0 The duration of study for a particular Diploma/ Certificate course shall be laid down in the syllabus for the concerned course .

3.0 The medium of instructions and examinations shall be English.

Provided that depending upon the nature of the course of studies , Hindi and Assamese may also be used as the medium of instruction and examination in addition to English . However , the same shall be decided by the School Board on the recommendations of the Board of Post Graduate Studies .

4470 G1/08-15 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4] 114

4.0 The starting of a session for a course may be either from 16th January or from 24th July depending upon the subject and the course .

5.0

5.1 There shallbe Semester /Trimester pattern of education and evaluation of the students where such academic year is divided into either two Semesters or three Trimesters as the case may be .

5.2 There shall be a winter break and a summer break each of 15 ( fifteen) days and 30 (thirty ) days duration from 1st January to 15th January and from 24th June to 23rd July respectively .

5.3 The dates of end semester/End Trimester examinations shall be notified by the Controller ofExaminations .

Provided that the examinations , evaluation and declaration of the results shall be completed by 31st December or 23rd June as the case may be .

1 6.0 The syllabi and the details of the course of study shall be as approved by the School Board on the recommendation of the Board of Post Graduate Studies . The guidelines for introducing a new syllabus or for modification of certain syllabus shall be laid down by Regulations . The Syllabus for each course of study shall include a list of text books and other recommended books of study . Syllabus shall be framed as per guidelines given in the Regulations for preparation of syllabi .

7.0

1

7.1 Attendance of classes in the University is compulsory.

7.2 A student shall be eligible to appear in the End Semester/End Trimester examination at the end of each Semester/Trimester only if he/ she has pursued a regular course of study in the subject concerned and has attended at least 75 % of the classes separately in each course/paper/unit ( including theory and practical classes , Seminars , sessional works , unit test etc) held during the period.Provided that the shortage in attendance upto a maximum of 5 % may be recommended by the Departmental Advisory Committees for condonation to the Vice-Chancellor stating reasons for such recommendation and the decision of the Vice- Chancellor to condone or not to condone the short fall in attendance shall be final .

7.3 A student having more than 75%, attendance shall be eligible to score marks for attendance subject to a maximum of 5 marks out of the totall of 100 marks in a paper/unit in the following pattern:

Marks

Attendance in percentage

76-80

1

81-85

2

86-90

3

4

91-95

96-100

5 115 [भाग III-खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

8.0

8.1 The evaluation of a student is designed on the system of continuous assesment and evaluation. Thus there shall be continuous evaluation of the student through seminar work, project work , practicals , sessional work and unit test during the semester/Trimester and there shall be an End Semester/Trimester examination at the end of each Semester/Trimester. The final results shall be worked out by combining the marks of the continuous evaluation and of the End Semester/End Trimester examinations .

8.2 The distribution of papers and marks allotted to each Semester /Trimester shall be laid down in the syllabus of a course . Each paper/Unit shall be of 100 marks . 60% weight age in marks shall be given to continuous evaluation including 5% marks for attendance and 40% weight age to End Semester/End Trimester examinations for each paper /unit . The 60% continuous evaluation marks shall be distributed as follows :

30 marks

Unit Tests (At least two)

15 marks

Assignment/Class studies .

5.marks

Project

5 marks

Attendance

Internal Assesment

5 marks

Total

60 marks

8.3 A six point letter grade system as detailed in the regulations shall be employed to assess the performance of a student in various courses . A Semester Grade point Average (SGPA)/Trimester Grade point average ( TGPA) and to reflect the cumulative performance of a student from the first Semester/Trimester to the last , cumulative Grade point Average (CGPA) shall be Calculated as per procedure laid down in the Regulations .

8.4 A student who secures letter Grade F i.e. less than 45 % marks shall be deemed to have been unsuccessful or failed in the paper/Unit .

8.5 Candidate shall have to appear and qualify in both the continuous assessment and semester/ trimester End examination separately.

If a candidate fails to qualify in the continuous assessment separately in each unit in a semester/ trimester he/ she shall be debarred from appearing in the term end examinations and his /her name shall be struck off from the rolls of the University. Such a candidate can get himself/herself readmitted in the immediately next session's corresponding semester/trimester .

Such a readmitted candidate shall have to discontinue his/her studies if he/she fails to qualify in the continuous assessment in the second instance also .

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] 116

8.6 A student who has failed in two or less number of papers/units but obtains a SGPA/TGPA of 6.0 or more in the other papers , exclusive of the papers /units in which the student has failed , shall be allowed to continue his/her studies in the next semester/Trimester .

Provided that the student must improve his/her marks in the failed papers/units at least to the passing grade in the make -up examinations to be held before the immediate next End Semester/End Trimester examinations.

8.7 A student who was ineligible for Make- up Examinations or who has failed in the Make -up examinations of a particular Semester/ Trimester as per the provisions of clause 8.6 of this Ordinance shall have to discontinue the class and may get himself/herself re - admitted in the immediately next corresponding Semester/Trimester

Such re -admitted candidate shall have to discontinue his/her studies if he/she fails to pass the Semester/ Trimester examination available to him/her at the first instance or the immediately next Make - up Examination as may be available to him/her under the provisions of clause 8.6

9.0 Audit Course :

9.1 There shall also be audit (Non - Credit) course (s) as prescribed in the syllabus.

9.2 A student shall have to secure at least letter Grade C in the Audit Course(s) examination in order to qualify himself/ herself for award of a Diploma.

9.3 A student may appear at an examination in Audit Course(s) to be held immediately after his/her admission and commencement of the Classes to qualify himself/herself in the Audit Subject (s ) or may attend Audit Classes in the concerned subject ( s) and may appear the audit course ( s) examination to be held at a later date .

9.4 It is provided that the Audit Course ( s) shall not be insisted upon in the case of Certificate Courses .

10.0 Re -totaling/Re-evaluation:

A student may submit application in a prescribed form to the Controller of Examinations through the Head/ In charge of the department/Centre along with the prescribed fees for re- totaling/re-evaluation of one or more of his/her papers in any End Semester/ End Trimester examinations . The Controller of examinations shall take appropriate action on the matter and inform the student about the outcome in due course.

11.0 Award of Diploma/Certificate :

A student who successfully completes all the requirements as above shall be qualified for award of a Diploma/Certificate by the University in the concerned subject.

12.0 Not more than one chance of readmission, as provided by the Ordinance shall be allowed to a candidate .

भाग III- खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

117

ORDINANCE No - 9

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2/4.4(9) dt. 27.6.96 and No.B/96/4 /2.10 dt. 28.12.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F 14-24/96- Desk ( U) dated 12/01/98)

Emoluments , terms and conditions of service of the Registrar :

(Under Section 15(1) (2) of the Act and Statutes No. 5(3) of the Second Schedule )

1.0 The Registrar shall be a whole time officer of the University as per the Statute .

2.0 The Registrar shall draw pay in the scale of pay of Rs.4500-150-5700-7300 /- with other allowances as may be sanctioned by the Board of Management to the employees of the University from time to time.

Provided that whenever the pay and allowances of the Registrar are revised by the UGC , the same shall be applicable to the Registrar of this University also and this provision of the ordinance shall automatically stand amended as soon as the revisjon/ modifications are accepted by the Board of Management of this University.

Provided further that in the event of the office of the Registrar being filled up by obtaining services of a person on deputation from the Govt . of Assam/ India, of other Organisation/ Institute , the salary and other allowances and service condition shall be regulated as per deputation rules of the University or the Govt. of India or the terms and conditions the Board of Management may agree to in each individual case .

In the event of opting for the University scale of pay by the officer on deputation, the officer concerned shall have to opt for the same within a period of three months from thedate ofjoining.

3.0 The Board of Management may also offer higher initial pay on the recommendation of the Selection Committee to an exceptionally suitable candidate.

4.0 The Registrar shall be provided with an unfurnished residential accommodation by the University and the Registrar shall have to pay rent for the same at the usual rate .

5.0 The Registrar shall be allowed to use an official vehicle for attending official duties as well as for private purposes subject to maximum distance of 500 k.m. per month on payment of a monthly charge of Rs . 300/- . The amount will be deducted from the salary every month . Provided that if the Registrar uses the car only for attending office from the residence and back and does not use the vehicle for any private purpose at all , an amount of Rs . 100 p.m. shall be recovered from the salary.

6.0 The Registrar shall be eligible to earned leave, half pay leave and other form of leave as per the Employees Leave Rules of the University as admissible to permanent employees.

118

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

7.0 Encashment of earned leave shall be allowed to the Registrar as per University Rules for the number of days of unutilised earned leave at his /her credit at the end of term of office, subject to a maximum of 240 days in all and provided that the Registrar completes the tenure of his her/ appointment .

8.0In the event of death of the Registrar during the tenure of service , the leave encashment shall be paid to his/her family even though the Registrar does not complete the terms of appointment .

9.0 Other retirement/terminal benefits shall be admissible as per the Statutes of the University for Retirement benefits of the Employees .

10.0 The Registrar shall be appointed in accordance with the terms and conditions laid down in the Act and the Statutes .

11.0 The prescribed qualification and experience etc. of the Registrar shall be determined by the University Grants Commission from time to time on all India basis . The same shall be applicable in this University also unless the BoM decides otherwise .

12.0 The Advertisement for the post of Registrar shall be made in at least three News Papers out of which one must be of National News paper .

13.0 In case of non - availability of suitable candidates through the open advertisement , the Selection Committee may suggest appointment of a suitable person on deputation from the Central/ State Government or from other reputed educational Institute/Institutions to the BoM .

ORDINANCE No - 10

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2 /4.4 (10) dt. 27.06.96 & noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-24/96 - Desk (U) dt . 30.10.96)

Emoluments ,terms and conditions of service of the Finance Officer . (Under Section 16 of the Act and Statute 6 (3 ) of the Second Schedule )

1.0 The Finance Officer shall be a whole time salaried Officer of the University as per Statute .

2.0 The Finance Officer shall receive pay in the scale of pay of Rs . 4500-150-5700-200- 7300/- with other allowances as may be sanctioned by the BoM to the employees of the University from time to time. The scale of pay shall be subject to modification/ revision as may be decided by the BoM.

Provided that in the event of the office of the Finance officer being filled up by obtaining the services of a person on deputation from the Govt . of Assam/ India or other Organisation /Institution , the salary and other allowances and service conditions shall be regulated as per deputation rules of the University or the Govt. of India or as per terms and conditions the Board of Management may agree to in each individual cases .

119 [ भाग III- खण्ड 4 ]

भारत का राजपत्र असाधारण

In the event of opting for the University scale of pay by the officer on deputation, the officer concerned shall have to opt for the same within 3 months from the date of joining.

3.0 The Board of Management may also offer higher initial pay on the recommendation of the Selection Committee to à deserving candidate .

4.0 The Finance Officer shall be provided with an unfurnished residential accommodation by the University and the Finance Officer shall pay rent for the same at the usual rate .

5.0 The Finance officer shall be allowed to use an official car for attending office from his residence and the Finance Officer shall have to pay a monthly charge of Rs . 100/- The amount shall be recovered from the salary every month ..

6.0 The Finance officer shall be eligible to earned leave , half pay leave and other form of leave as per the Employees Leave Rules of the University , as admissible to permanent employees.

7.0 Encashment of earned leave shall be allowed to the Finance Officer as per the University Rules for the number of days of unutilised earned leave at his/her credit at the end of the term of office , subject to a maximum of 240 days in all and provided that the Finance Officer completes the tenure of his /her appointment..

8.0 In the event of death of the Finance Officer during the tenure of service, the leave encashment shall be paid to his /her family even though he/ she does not complete the tenure of appointment .

9.0 The Finance Officer shall be eligible to other . retirement/terminal benefits as per Statutes on Retirement Benefits of the University .

termand 10.0 The Finance Officer shall be appointed in accordance with the terms and conditions laid down in the Act and the relevant Statutes .

11.0 When the post of Finance Officer falls, vacant the Registrar shall float an advertisement in at least three news papers out of which one shall be National News paper. The advertisement shall mention the required qualification, experience and all the terms and conditions of service as laid down in the Statutes and Ordinances of the University.

12.0 Qualification and experiences:

The applicant for the post of Finance Officer should possess qualifications and experiences as laid down hereunder:

12.1 He/She must have at least a high second class Master's degree in Commerce/Financial Management .

Or

He / She should have professional qualifications in Finance/Accountancy from the Institute of Cost and Works Accounts of India ( ICWA) or from the Institute of Chartered Accountants of India ( ACA/FCA) .

120

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

12.2 He/ She should have at least 15 years experience in the officer's grade in the finance and accounts department in a University or Financial Organisation of Government Department . Provided that preference will be given to candidates possessing adequate administrative experience at management level in Finance & Accounts work or Business Organisation of repute or in University or Government Department for at least 10 years .

12.3 Any of the above qualifications and experiences may be relaked in case of otherwise exceptionally good applicants in calling for interview and making recommendations to the Board of Management .

13.0 Age The age of a candidate shall not be less than 45 years and more than 55 years on the last day of receipt of the application for appointment ..

14.0 The Selection Committee and procedure for convening the Selection Committee as shall be as laid down in the Statutes included in the Second Schedule of the Tezpur University.

15.0 All the eligible candidates shall be called to appear at an interview before the Selection Committee . Provided that the Selection Committee shall have the right to consider bio -data of candidates in absentia also .

16.0 In case of non - availability of suitable candidate through advertisement , the Selection Committee may also suggest appointment of a person having requisite qualifications and experiences on deputation from State Govt./Central Govt . or other University/ Institutions by the Board of Management.

ORDINANCE No. - 11

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2/4.4(II ) dt. 27.6.96, No.B/96/4 /2.10 dt . 28.12.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F.14-24/96- Desk ( U) dt . 12.1.98 )

ON ADMISSION OF STUDENTS AND THEIR ENROLMENT UNDER SECTION 28( 1 ) ( a) OF THE TEZPUR UNIVERITY ACT

1.0 Invitation of Application

Admission to a course in a Department/ Centre of the University shall be made on the basis of the applications received from the eligible candidates . For this purpose , applications in the prescribed form shall be invited by the Registrar from the eligible candidates through open advertisement inserted at least in one regional and one National Daily News paper . Information Brochure and application form shall be made available from the Registrar's office on payment of fee to be prescribed for the purpose.

2.0 Selection of candidates to a course shall be made strictly on the basis of merit .

3.0 Reservation of Seats : 49 2 % of the seats in a course shall be offered to the candidates belonging to the Scheduled Castes , Scheduled Tribes and OBC/MOBC as shown below:

121

भारत का राजपत्र असाधारण

भाग III- खण्ड 4]

15%

(a) Schedule Caste

72 %

(b ) Schedule Tribe

27%

(c) OBC/MOBC

Separate lists for each of the above categories of the candidates shall be prepared in order of merit from amongst the eligible candidates .

Provided that if some seats reserved in any of the three categories remain unfilled, then the unfilled seats reserved for a particular category of candidates shall first be offered to candidates belonging to the other categories .

Further provided that if any seat in the reserved quota remain vacant due to death of eligible candidates , the same shall be filled up by eligible candidates of the general categories on merit basis .

4.0 Minimum qualification for admission :

Minimum qualification for admission to the various courses of studies shall be prescribed by the Regulations /Syllabus of the concerned subject/ course.

5.0 Candidates having the requisite qualifications may be considered for admission on the basis of the academic record and / or performance of a candidate in the qualifying admission test/Viva voce as may be prescribed in respect of each course .

6.0 Special reservation :

Certain number of seats in each department may be kept reserved by the Govt . of India for candidates from States other than Assam and foreign Countries . However , the number of such reserved seats shall not exceed 5 % of the total number of seats in the department . Sponsored candidates may only be admitted provided they fulfil the minimum qualification for admission prescribed for the course .

7.0 Courses :

Each course shall be of 2 types , Credit and Audit course . The performance of a student will be accounted for in the overall result in the Credit Courses only. Performance of a student in the Audit Course will not have any bearing on the overall result .

However, each student shall have to take at least one Audit Course and shall have to secure at least Grade ' C' in order to qualify for a degree/diplóma performance of which shall be recorded in the Grade Card.

In a Semester one Audit Course may normally be allowed .

8.0 The selected candidates shall be admitted on payment of fees prescribed by the Ordinance .

9.0 A student admitted to the University shall be a member of a University hall.

10.0 If at any time, it is discovered that a candidate has made a false or incorrect statement or fraudulent means have been used for securing admission his/her name shall be removed from the rolls of the University.

4470GI/08--16 A 122

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4 ] 11.0 Enrolment :

The name of a student admitted to various courses of studies

shall be entered in the Enrolment Register maintained for each course separately . Name of a student whose continuance in a course is considered to be undesirable for good and sufficient reasons may be removed from the Enrolment Register under orders of the Vice - Chancellor .

12.0 Compliance of Rules and Orders :

The students admitted to the University shall be required to abide by the Ordinances , Rules and Orders issued by the University authorities from time to time. Violation of provisions of the Ordinances , Rules and Orders of the University by the students shall be liable to disciplinary action including expulsion from the University.

ORDINANCE No. -12

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No.B/ 96/ 2 /4.4 ( 12 ) dt . 27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F.14-24/96/Desk ( U) dt . 30.10.96)

On Medium of Instruction and Examination under section 28 ( 1) (c) of the Tezpur University Act .

1.0 Medium of Instruction :

Medium of Instruction and Examination at all levels shall be in English. But in case of language subjects, the instruction and examination may be in the respective languages .

2.0 Examination :

a) All examinations of the University shall be held at Tezpur University campus unless otherwise stated .

Dates for each End Semester examination shall be notified by the Controller .

c) Application for permission to appear at any examination together with the prescribed fees shall be submitted to the Controller through the Head of the Department/Centre within the date specified for the purpose .

Provided that late application may be entertained upto 7 days after the prescribed date on payment of penalty fee as may be prescribed from time to time on the recommendation of the Head .

d) A candidate who fails to appear at any examination shall not be entitled to refund ofthe examination fees paid by him .

4470G1/08-16B 123

भारत का राजपत्र असाधारण

[ 'भाग III- खण्ड 4]

ORDINANCE No. - 13

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/96/2 /4.4( 13 ) dt.27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-24/96 - Desk- ( U) dt . 30.10.96)

ON FEES TO BE CHARGED FOR COURSE OF STUDY IN THE UNIVERSITY AND FOR ADMISSION /EXAMINATION TO DEGREES AND DIPLOMAS

UNDER SECTION 28 ( 1 ) ( C) OF THE ACT

I. MA (Any subject)

Admission fee ( once on admission)

Enrolment fee (per semester)

Tuition fee( per semester)

Library fee ( Once on admission)

Students activities fee(per semester) Identity Card fee

II . M.Sc ( Any subject )

1. Admission fee ( once on admission)

2. Enrolment fee(per semester)

3. Tuition fee( per semester)

4. Library fee (Once on admission )

5. Laboratory fee (Per semester)

6. Students activities fee( per semester)

7. Identity Card fee

III.M.Sc. (Tech ) ( Any Subject )

Admission fee(once on admission )

Enrolment fee (per semester )

Tuition fee( per semester )

Laboratory fee

Library fee (Once on admission)

Students activities fee(per semester) Identity Card fee

IV . MCA

1. Admission fee (once on admission)

2. Enrolment fee( per semester)

3. Tuition fee( per semester)

4. Laboratory fee ( Per Semester)

5. Library fee (Once on admission)

6. Students activities fee ( per semester)

7. Identity Card fee

Rs.100/-

Rs . 10/-

Rs.250/-

Rs 50/-

Rs.50/-

Rs. 20/-

Rs.100/-

Rs . 10/-

Rs.250/-

Rs 50/-

Rs. 50/-

Rs. 50/

Rs. 20/-

Rs.200/-

Rs . 10/-

Rs.250/-

Rs.50/-

Rs100/-

Rs. 50/

Rs . 20/-

Rs.200/-

Rs . 10/-

Rs.250/-

Rs. 50/-

Rs 100/-

Rs. 50/

Rs . 20/- [PART III-SEC. 4]

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

124

V. Μ.Β.Α.
    1. Admission fee( once on admission )          Rs.100/-
    2. Enrolment fee (per semester)                Rs . 10/-
    3. Tuition fee ( per semester)                 Rs. 250/-
   4. Library fee (Once on admission)              Rs 100/-
    5. Students activities fee (per semester)      Rs. 50/
    6. Identity Card fee                           Rs. 20/-
VI . M.Phil ( Any subject )
    1. Admission fee (once on admission)           Rs.150/-
    2. Enrolment fee(per semester )                Rs . 50/ -
    3. Tuition fee( per semester)                  Rs. 250/ -
   4. Library fee (Once on admission )             Rs 50/-
    5. Students activities fee(per semester )      Rs. 50/
    6. Identity Card fee                           Rs. 20/-
VII .   Ph . D.
      Admission fee ( once on admission)           Rs.300/-
      Enrolment fee ( Once on admission)           Rs.100/-
      Cource fee( per cource)                      Rs . 50/-
      Research fee                                 Rs.500/-
      Library fee (Once on admission)              Rs.200/-
      Students activities fee (per semester)       Rs.50/
      Identity Card fee.                           Rs . 20/-
VIII . Diploma Course :
     1. Admission fee ( once on admission)         Rs.100/-
    2. Enrolment fee( per semester)                Rs . 10/-
    3. Tuitionfee( per semester )                  Rs.200/-
    4. Library fee ( Once on admission)            Rs. 50/-
    5. Laboratory fee                              Rs 50/-
    6. Students activities fee ( per semester)     Rs . 30/
    7. Identity Card fee                           Rs . 20/-
IX. Fee for Examination , Mark - Sheet and Certificates
Sl   Examination    Theoretical

Practical

Certificate

Dissertation Marksheet/ Grade Card

No.

(Per Semester)

(Persemester)

MA

50/-

150/-

25/-

50/-

2.

M.Sc

50/-

100/-

25/-

150/-

50/-

50/ -

100/-

3. M.Sc. Tech

150/-

25/-

50/-

MCA

50/-

100/-

150/-

25/-

50/- 125

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

Theoretical Practical Sl Examination

No.

(PerSemester)

Certificate Dissertation Marksheet/ Grade Card

(Persemester)

MBA

100/- 5 .

50/-

6.

50/-

100/- PG Diploma

7. M. Phil

150/-

150/-

8.

Ph.D.

150/-

25/-

50/-

150/-

25/-

50/-

500/-

50/-

2000/-

100/-

Χ. Provided that the Board of Management shall be free to revise the above fees at any time from any Semester .

ORDINANCE No. - 14

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No.B/96/2 /4.4 ( 14 ) dt . 27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-24/ 96 - Desk (U) dt : 30.10.96)

On conduct of examinations including the term of office and manner of appointment and the duties ofExamining Bodies and Moderators .

Under Section 23( 1 ) ( g) of the Act .

1.0 Conduct of examinations :

Examination. for the 60 % continuous evaluation marks for each Department/ Centre shall be conducted by the respective Department/Centre under the supervision of the Head of the Department/ Centre .

Provided that the End Semester Examinations having weightage of 40 % marks shall be conducted by the Controller of Examinations .

Provided further that all the records of the continuous evaluation shall be submitted to the Controller of Examinations by the Head of the Department/ Centre for preparation of the final results , preparation of the Grade Card and record .

2.0 Appointment of Examiners and Moderators .

2.1 The lists of Examiners and moderators for all examinations except for M. Phil/Ph.D . degree shall be drawn up by the Department/ Centre . The Dean, after necessary scrutiny, shall forward the same to the Controller of Examinations for approval of the appropriate authorities .

2.2 The panel of examiners for M. Phil / Ph.D degree shall be submitted by the respective supervisors to the Controller of Examinations to place it before the Research Committee for consideration and approval . The panel will be placed before the Vice-Chancellor for selecting required number of examiners .

2.3 The question papers for examination in such subject/ course shall be moderated by a committee consisting of the Head of the Department concerned, a subject Expert.

2.4 The external examiners/ moderators shall be paid remuneration at the rates to be prescribed from time to time .

126

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III -SEC . 4]

ORDINANCE No. 15

(Adopted by the Board of Management Vide Resolution No. B/96/2/4.4 ( 15) dt . 27.6.96 and noted by the Government vide MHRD letter No.F.14-24/ 96- Desk(U) dt.30.10.96)

Ordinance on the procedure to be followed by Selection Committee in making recommendation for appointment of teachers and Statutory Officers under Statute 20(5) included in the Second Schedule of the Tezpur University Act .

1.0 The Selection Committee shall be informed and it shall duly take note of the terms and conditions with regard to the qualifications , experiences and other matters advertised by the University with which the selection is concerned .

2.0

2.1 A detailed comparative statement of all the candidates including those candidates who desire to be considered in absentia , eligible to be considered , made in a tabuler form and authenticated by the Registrar or by an officer assigned for the purpose by the Vice- Chancellor be placed before the Selection Committee together with the application and /or bio -data in original of each such candidate .

2.2 Before the commencement of the interview , the original certificates of qualifications , experiences , proof of age and other documents in respect of any statement made by the candidate shall be duly verified and authenticated by the Registrar or an officer assigned for the purpose by the Vice- Chancellor .

2.3 The Selection Committee shall make its recommendations from the list of candidates placed before it by the Chairman for consideration . The list shall include curricular vitae of candidates who have desired to be considered in absentia.

2.4 A Selection Committee may decide its own method of evaluating the performance of candidates .

Provided that when two or more candidates are selected , the recommendations to the Board of Management shall invariably be made in order of preference .

Also provided that if any candidate is recommended by the Selection Committee for appointment in relaxation of any of the prescribed qualification/ experience , it shall be so stated justifying its action and recorded in the proceedings of the Selection Committee for consideration of the Board of Management.

2.5 When the Selection Committee considers it fit to recommend a higher initial pay to be offered to a selected candidate , it may do so justifying its action and recording the same in the proceedings of the Selection Committee for consideration of the Board of Management . Provided that , pay shall not be a condition for accepting the recommendation by the Board of Management.

127

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

3.0 In case suitable candidates for appointment to the post through this process is not available the Chairman of the Selection Committee may place before it a list of persons together with their bio -data who desire to be considered for appointment on deputation . The Selection Committee after due consideration may recommend such a person for appointment by the Board of Management on deputation .

4.0 Proceedings of the Selection Committee shall be treated as confidential . Only members of the Selection Committee shall be present when the selections are deliberated upon and recommendations are made.

5.0 The recommendations of the Selection Committee when approved by the Board of Management shall remain valid for a period of one year from the date of such approval.

ORDINANCE No. 17

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. 96/2/7 dt . 27.6.96and noted by the Government vide MHRD letter No F..14-24/96 - Desk (U) dt.30.10.96 )

On Library Committee under Section 28( m) of the Act .

COMPOSITION , POWER AND FUNCTIONS

OF THE LIBRARY COMMITTEE

1.0 Composition .

There shall be a library Committee . The Library Committee shall consist of the following members.

Chairman

( i ) Vice- Chancellor

( Inabsence of the Vice- Chancellor , the Pro - Vice- Chancellor will preside over the meeting . In the absence of Pro -Vice- Chancellor , the senior most Dean shall preside over the meeting .

Member

(ii) Pro- Vice- Chancellor

Member

(iii ) All Deans of Schools

Member

(iv) One person from each of the Schools to be nominated by the Planning and Academic Committee other than the Deans of Schools

(v) Librarian

Member Secretary

In the absence of the Librarian , the Deputy Librarian and in the absence of the Deputy Librarian , the Assistant Librarian shall be the Member Secretary of the Library Committee.

Four members shall form the quorum . The terms of the nominated members shall be for a period of 3 years .

128

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] 2.0 Powers & Functions

The following shall be the powers and functions of the Library Committee-

2.1 To frame general rules for management of the Library.

2.2 To advise the Librarian regarding the overall development of the Library.

2.3 To prepare the annual budget estimates of the Library for submission to the Board of Management.

2.4 To allocate funds from the sanctioned annual budget of the University to the Departments and Centres of Studies for purchase of books , journals , periodicals and other accessories required for the Library .

2.5 To arrange for annual stock taking of the Library .

2.6.To consider and recommend the annual report prepared by the Librarian, summerising the activities of the Library for perusal and necessary action by the Planning and Academic Committee .

2.7 To perform such other duties as may be assigned to it by the planning and Academic Committee/Vice - Chancellor .

ORDINANCE No. 18

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B /96/2 /7 dt . 27.06.96 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-24/ 96 - Desk ( U ) dt: 30.10.96. )

Constitution of a Tender & Purchase Committee under Section 28( m) of the Act .

1.0 There shall be a Tender & Purchase Committee for the purpose of scrutiny of tender ( s) for supply of office equipments , Laboratory equipment , Chemicals , Furniture , Stationary , Electrical goods etc. and their acceptance .

2.0 The term of the committee shall be 3 years from the date of notification .

3.0 The composition of the committee shall be as under .

Chairman

( i ) Registrar

Member

( ii ) Three Heads of the teaching Departments to be nominated by the Vice- Chancellor .

Member

(iii) One person having special knowledge in the item proposed to be purchased to be nominated by the Vice- Chancellor.

(iv) Finance Officer

Member Secretary

4.0 The recommendation of the Tender & Purchase Committee shall be placed before the Vice - Chancellor for approval . The purchase should be made only after the financial sanction is received .

5.0 Four members shall form the quorum .

6.0 In case of equipments valued at Rs . 1.00 lakh or more , comments of the expert member ( as in Sl . iii ) shall be obtained in the event of his absence in the meeting .

129

भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

ORDINANCE No. 20

( Adopted by the Board of Management vide Resolution No. B/98/3/32 dt.29.08-98 and noted by the Government vide MHRD letter No. F.14-19/98- Desk (U) dt : 16.2.2000 )

As per clause No.11 (3 ) of the Tezpur University Act , 1993 " The Chancellor shall , if présent, preside at the Convocation of the University" ; in the absence of the Chancellor the Vice-Chancellor shall preside over the Convocation.

On Convocation for Conferring Degrees/ under Statute 32 of the Second Schedule of theAct.

1.0 A Convocation for the purpose of conferring degrees shall ordinarily be held annually on such date and place as may be fixed by the Vice - Chancellor with prior approval of the Chancellor .

2.0 A special Convocation for conferring honorary Degree envisaged under Statute 29 of the Second Schedule of the Act may also be held as and when such occasion arises , with the approval of the Chancellor .

3.0 The Diplomas or Degrees shall bear the signatures of the Registrar and the Vice- Chancellor ofthe University.

However, the Provisional Certificates/Diplomas shall be issued by the Registrar under his seal and signature .

4.0 The Convocation shall consist of the body corporate of the University and such other members of authorities and other officers as indicated in clause No.16 below. They will be supplied with the Academic costumes for the Convocation.

5.0 The Registrar shall issue notice for the convocation at least 6 weeks before the convocation inviting applications with prescribed fees from the eligible candidates .

6.0 The Registrar shall issue to each member of the Convocation a detailed programme of the Convocation and the procedure to be observed there at least 10 days before the date of Convocation .

7.0 The candidates who have passed their Examinations in any year prior to the holding of the first Convocation of the University shall be eligible to be admitted to the convocation on payment of prescribed fees as may be decided by the Vice- Chancellor. If, in any subsequent year , the Convocation is not held, all candidates who have passed their Examinations after the last Convocation , shall be eligible to be admitted to the immediate next Convocation on submission of forms and payment of fees . If any candidate does not submit application for admission or fails to attend the Convocation , such candidates may be admitted to the Degree by

4470 G1/08--17 A 130

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4]

the Chancellor / Vice -Chancellor in absentia and the Degree/Diploma shall be delivered by the Registrar after the Convocation , on submission of application in prescribed form with necessary fees prescribed for the purpose .

8.0 Honorary Degree shall be conferred only at the Convocation and may be taken in person or in absentia.

9.0 The presentation of the person(s) at the convocation on whom the Honorary Degree(s ) is/ are to be conferred shall be made by the Vice- Chancellor or the senior most Dean of the University.

10.0 The respective Deans of Schools or in his/her absence the Dean in charge shall present their students to the Chancellor or in his /her absence to the Vice- Chancellor for award of the Degrees at the Convocation .

11.0 The names of the recipient of medals and prizes shall be read out by the Registrar of the University .

12.0 The Registrar shall present the candidates for admission to their Degrees in absentia.

13.0 Degree Certificates to the candidates present in the Convocation shall be delivered in person at the Convocation by the Chancellor /Vice- Chancellor as the case may be .

14.0 Descriptions of the Academic Costumes/Dress /Scarves shall be decided by the Vice-Chancellor .

Convocation Procedure :

15.0 All candidates at the Convocation shall wear appropriate Academic Dress prescribed by the Vice - Chancellor. No candidates without the proper Academic Dress shall be admitted to the Convocation .

16.0 The Chancellor , the Chief Guest , the Vice- Chancellor , the Pro -Vice-Chancellor, the Registrar , the Deans of Schools , the members of the University authorities and bodies shall wear their convocation Dress prescribed by the Vice-Chanccellor and shall assemble at a place appointed for the purpose and shall enter the convocation Hall in a procession in the following order .

The Registrar with the University Flag

Members of the Board of Management

Members of Planning and Academic Committee/Academic Council and the Planning Board

The Deans of Schools of Studies

The Finance Officer

The Pro -Vice- Chancellor

4470G1/08-17B [भाग III- खण्ड 4]

भारत का राजपत्र असाधारण

131

The Vice- Chancellor

The Chief Guest.

The Chancellor/Vice-Chancellor when the Chancellor is absent

All of them shall take seats reserved for them .

17.0 The students shall assemble at a place appointed for the purpose and wear their Academic Dresses and shall proceed in a procession in separate groups Schools and Department - wise, so that they can occupy their seats reserved for each School / Department at least 15 minutes before the schedule time of the convocation .

:

18.0 When the procession led by the Registrar enters the Convocation Hall , the candidates and all other invitees shall rise and remain standing until the members of the procession have taken their seats .

19.0 University song.

20.0 Welcome address by the Vice- Chancellor but when the Chancellor is absent and the Vice-Chancellor chairs the Convocation , the Pro-Vice- Chancellor /Senior most Dean of School shall deliver the welcome address .

21.0 The President/Chairperson shall declare the convocation open and shall say

22.0 " This convocation of the Tezpur University has been called to confer Degrees and Diplomas upon the candidates who have been examined and found to be worthy of Degrees and Diplomas by the University authorities"

23.0 Then with the permission of the Chancellor, the Vice -Chancellor shall address the students and say-

"Will all the candidates for the Degrees and Diplomas of the Tezpur University kindly stand"

With the candidates standing , the Chancellor shall put the following questions to the candidates to which they shall answer " I do promise " after each question .

Question 1 : Do you solemnly and sincerely promise and declare that if admitted to the Degrees /Diplomas for which you have been recommended , you will in your daily life conduct yourselves as become the members of the University?

Answer: I do promise

Question 2 : Do you solemnly and sincerely promise that you will endeavour to uphold social security , equity and justice in the society ?

Answer : I do promise 132

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC . 4]

Question 3 : Do you solemnly and sincerely promise that in your daily life you will resist all kinds of inducements and influences to deviate you from your rightful duty ?

Answer : I do promise

At the end the Vice-Chancellor shall ask the candidates to resume their seats .

24.0 The Chancellor will then say - " Let the candidates be now presented"

25.0 The Deans of respective Schools then shall present the candidates in the following orders.

(1 ) School of Science & Technology

The Dean of School of Science and Technology shall say-

"Will the candidates for Degrees of Doctor of Philosophy , Master of Philosophy and Master of Science and Diploma Courses in the school of Science and Technology kindly stand " ,.

And when the candidates stand up , the Dean shall address the Chancellor/Vice- Chancellor and say-

"Mr. Chancellor/Vice- Chancellor , Sir , I present you these candidates and pray that they be admitted to their respective Degrees of Doctor of Philosophy , Master of Philosophy, Master of Science and Diploma Courses in the School of Science & Technology.

The Chancellor/Vice - Chancellor shall admit the candidates who shall remain standing , with the following words :

"By virtue of the Authority vested in me as Chancellor / Vice- Chancellor of the Tezpur University , I admit you to your respective Degrees of Doctor of Philosophy , Master of Philosophy, Master of Science and Diploma Courses and I charge each of you to prove worthy of the Degree throughout your life" .

The Dean shall read the names of the candidates serially for each Degree and Diploma as below:

" Candidates for Ph.D. Degree will now come to the dias one by one to receive their Degree Certificate from the Chancellor . (Read the names of the candidates)

In the same manner the candidates for M.Phill , Master Degree in Science and Diploma shall be called to the dais to receive their respective Certificates . Candidates resume their seats after receiving the certificates .

(II ) School of Energy, Environment and Natural Resources.

(III) School of Management Sciences 133

असाधारण

भारत का राजपत्र

[ भाग III-खण्ड 4 ]

( IV) School of Humanities and Social Sciences .

The respective Deans shall follow the same procedure as laid down in case of the School of Science and Technology.

26.0 Admission to Degrees and Diploma in absentia: The Registrar will present the candidates for admission to various Degrees and Diploma IN ABSENTIA . He will say "Mr Chancellor / Vice - Chancellor, Sir, I move that (nosof candidates) candidates be admitted to their respective degrees and Diplomas in absentia.

The Chancellor/Vice -Chancellor will then say- By Virtue of the Authority vested in me as Chancellor/Vice - Chancellor of the Tezpur University, I admit the candidates listed to their respective Degrees and Diplomas in several school of studies , in absentia and in token thereof permit the Registrar to present them with their Degrees and Diplomas and charge the Degree/Diploma holders to prove worthy of their degrees and diplomas throughout their lives .

27.0 EXHORTATION by the Chancellor /Vice-Chancellor.

Speak the truth. Be virtuous and tolerant to other. Listen what others have to say. Devote your time and energy for the betterment of yourself and the society as a whole . You cannot be happy if all around you are unhappy and live in misery. Do not wait for the opportunity to come to you by itself, instead , you create them and be quick to get hold of it. Time is life; donot waste a moment . Do not neglect your "Gurus , Father , Mother and the Teachers . Never be despair in life , your success is sure to come. Concentrate on your duty and let your innerself to command you to yourgoal .

28.0 Award of Medals and Prizes .:

The Registrar shall read out the names of the candidates who have been declared entitled to the University and Endowment Medals and Prizes . As he reads the names , each candidates shall come to the dias and receive the medal or prize from the Vice- Chancellor. But when the Vice-Chaancellor chairs the convocation in absence of the Chancellor the medals and prizes shall be delivered by the Pro-Vice- Chancellor/ Seniormost Deans of the Tezpur University.

29.0 Address by the Chief Guest

The Chancellor will say " I now invite Dr. / Prof.. the Convocation Address " . to deliver

30.0 Speech from the Chair.

31.0 Vote of thanks by the Registrar , Tezpur University.

32.0 The Chair will declare the Convocation closed .

134

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART III-SEC. 4] 33.0 National Anthem will then be played and all shall remain standing .

34.0 The Chancellor , Vice - chancellor with all members of the authority and Deans shall retire from the hall in a procession in the same order when they entered the hall led by the Registrar. All other audience including the candidates and invitees will remain standing till the entire procession is retired.

35.0 The Candidates shall leave the hall in an orderly manner in a procession.

ORDINANCE NO -22

ON

Board of undergraduate studies Under Statute 18 ( 1 ) & (4) of the Second Schedule of the Tezpur University Act.

(Adopted by the Board of Management vide Resolution No. Β. 44/ 2005/2/3.8 dt: 17/06/05 and noted by MHRD's letter No. F. 14-6/2005 -Desk (U) dated 25/07/2006)

1. Constitution

- Chairman & Convenor (i) The Head of the Department

- Member

(ii) All the full time teachers in the Department

(iii) Two subject experts to be nominated by the

- Member

of the Department Vice-chancellor in consultation with the Head

Dean of the School may be present as provided under Statute 7 (4) of the Second Schedule of the Act .

Further , provided that the Chairman with the approval of Vice- chancellor may invite two teachers of the allied Departments of the University as and when necessary .

2. Term of office: The term of office of the nominated members shall be three years .

3. Powers and Functions :

3.1 ( i ) To coordinate the teaching of the undergraduate programmes .

( ii ) To prepare the curriculum of the undergraduate programme and submit the same to the School Board for consideration and recommendation.

(iii ) To consider scheme for advancement of standard of teaching at the undergraduate level and submit said proposal to the Scheme Board.

(iv) To perform all other functions which may be prescribed by the Act . Statutes , Ordinances and Regulations and to consider all such matters as may be referred to it by the Board of Management , Academic Council , Planning Board and/ or the Vice- chancellor.

3.2 To prepare and submit panel of examiners to the School Board for Undergraduate courses .

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भारत का राजपत्र असाधारण

[भाग III- खण्ड 4 ]

3.3 To prepare the time table of the Department and submit the same to the Vice-chancellor for consideration and approval .

4. Meeting of the Board of undergraduate studies .

The Board of Studies shall meet at least twice in an academic year preferably before the commencement of a Semester . Special meeting, if and when necessary , may be called with the approval of the Vice- chancellor. Notice for holding meetings shall be issued at least 21 days before the date of the meeting. Two third of the total members shall form quorum for a meeting. In the case of emergency the meeting of the Board of studies can be called with 3 days notice .

M. AHOM, Registrar

[ ADVT III / IV /Exty ./360B/ 2007]

Printed by the Manager, Govt. of India Press , Ring Road, Mayapuri , New Delhi- 110064 and Published by the Controller of Publications , Delhi - 110054.

Cite this issue. Extraordinary Gazette of India, Government of India, 02 November 2007. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.central.e.2007-11-02.12943/. Archive identifier in.gazette.central.e.2007-11-02.12943.