REGD. NO. D. L.-33004/99 रजिस्ट्री सं॰ डी॰ एल॰-33004/99
असाधरण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राध्किार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 423] नई दिल्ली, बुध्वार, नवम्बर 23, 2016/अग्रहायण 2, 1938
No. 423] NEW DELHI, WEDNESDAY, NOVEMBER 23, 2016/AGRAHAYANA 2, 1938
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण
अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना
नई दिल्ली, 22 नवम्बर, 2016
संसंसंसं.... 305-27/2010305-27/2010305-27/2010305-27/2010-सेवा गुणवत्तासेवा गुणवत्तासेवा गुणवत्तासेवा गुणवत्ता.—भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 (1997 का 24वां) की धारा 11 की उप-धारा (1) के खंड (ख) के उप-खंड (i) और (v) के साथ पठित धारा 36 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण एतद्द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :-
मोबाइल बैंकिंग (सेवा गुणवत्ता) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2016 मोबाइल बैंकिंग (सेवा गुणवत्ता) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2016 मोबाइल बैंकिंग (सेवा गुणवत्ता) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2016 मोबाइल बैंकिंग (सेवा गुणवत्ता) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2016
(2016 का 7(2016 का 7(2016 का 7(2016 का 7))))
अध्याय-1अध्याय-1अध्याय-1अध्याय-1
प्रारंभिकप्रारंभिकप्रारंभिकप्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और लागू होनासंक्षिप्त नाम और लागू होनासंक्षिप्त नाम और लागू होनासंक्षिप्त नाम और लागू होना.—(1) इन विनियमों को मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2016 कहा जाएगा;
(2) ये विनियम, इनके सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
2. मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता) विनियम, 2012 (जिसे आगे मूल विनियम कहा गया है) के विनियम 2 मेंः-
(क) खंड (ख) के बाद, निम्नलिखित खंड अंतः स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
''(ख क)'' ''अधिकृत संस्थान'' से आशय, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग एवं भुगतान सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकृत की गई संस्थान से है'';
(ख) खंड (थ) के बाद निम्नलिखित खंड अंतः स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
5406 GI/2016
(1)2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4] ''(थ क)'' ''यूएसएसडी आधारित बैंकिंग और भुगतान सेवाएं'' से आशय यूएसएसडी पर मोबाइल फोन के माध्यम से बैंकिंग और भुगतान सेवाएं प्रदान करने से है।
3. मूल विनियमों के विनियम 3 में, —
(क) उप-विनियम (1) के बाद, निम्नलिखित उप-विनियम अंतः स्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :
''(1क) प्रत्येक एक्सेस प्रदाता अपने उपभोक्ताओं को यूएसएसडी आधारित बैंकिंग और भुगतान सेवाएं देने और उप-विनियम (5) में निर्धारित समय-सीमा के अंदर संदेश देने में अधिकृत संस्थान की मदद करेगा'';
(ख) उप-विनियम (4) में, शब्द ''पांच'', जहां कहीं भी यह आता है, के स्थान पर शब्द ''आठ'' से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(ग) उप-विनियम (5) में, शब्दों ''ग्राहक अथवा बैंक या इसके एजेंट'' केे स्थान पर शब्दों ''ग्राहक अथवा बैंक या इसके एजेंट या अधिकृत संस्थान'' और शब्दों ''बैंकिंग सेवाओं'' केे स्थान पर शब्दों ''बैंकिंग और यूएसएसडी आधारित बैंकिंग और भुगतान सेवाओं'' से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
4. मूल विनियमों के विनियम 4 में, उप-विनियम (1) में शब्दों ''एम-बैंकिंग संदेश'' केे स्थान पर शब्दों ''एम-बैंकिंग और यूएसएसडी आधारित बैंकिंग और भुगतान सेवाएं संदेश'' से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
5. मूल विनियमों के विनियम 7 में, —
(क) उप-विनियम (1) में, शब्दों ''मोबाइल बैंकिंग संदेश'' केे स्थान पर शब्दों ''मोबाइल बैंकिंग और यूएसएसडी आधारित बैंकिंग और भुगतान सेवाएं संदेश'' से प्रतिस्थापित किया जाएगा;
(ख) उप-विनियम (2) के लिए निम्नलिखित उप-विनियम प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :-
"(2) यदि एम-बैंकिंग लेन-देन प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ता या बैंक या इसके एजेंट या अधिकृत संस्थान द्वारा जनित किया गया संदेश किसी भी कारण से वितरित नहीं हो पाता है तो एक्सेस प्रदाता तुरंत त्रुटि (एरर) संदेश भेजकर उपभोक्ता या बैंक या इसके एजेंट या अधिकृत संस्थान, जैसा भी मामला हों, को प्रक्रिया के पूरा नहीं होने की सूचना तुरंत देगा'';
(ग) उप-विनियम (3) में, शब्दों ''एम-बैंकिंग संप्रेशण'' केे स्थान पर शब्दों ''एम-बैंकिंग या यूएसएसडी आधारित बैंकिंग और भुगतान सेवाएं संप्रेशण'' से प्रतिस्थापित किया जाएगा;
सुधीर गुप्ता, सचिव
[विज्ञापन-III/4/असा./312/16(43)] टिप्पणी 1 :टिप्पणी 1 :टिप्पणी 1 :टिप्पणी 1 : मूल विनियम को दिनांक 17 अप्रैल, 2012 की अधिसूचना संख्या-305-27/2011-सेवा गुणवत्ता के द्वारा भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग-III, खंड 4 में 17 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित किया गया।
टिप्पणीटिप्पणीटिप्पणीटिप्पणी 2 :2 :2 :2 : मूल विनियम को अधिसूचना संख्या-305-27/2010-सेवा गुणवत्ता के द्वारा संषोधित किया गया तथा यह भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग-III, खंड 4 में 26 नवंबर, 2013 को प्रकाशित किया गया।
टिप्पणी 3 :टिप्पणी 3 :टिप्पणी 3 :टिप्पणी 3 : व्याख्यात्मक ज्ञापन द्वारा मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2016 के उद्देश्य और कारणों को स्पष्ट किया गया है ।
टिप्पणीटिप्पणीटिप्पणीटिप्पणी 4 : 4 : 4 : 4 : इस अधिसूचना का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाषन सं. [विज्ञापन-III/4/असा./310/16(142)] दिनांक 22.11.2016 को प्रकाषित हो चुका है ।
भारत का राजपत्रा : असाधरण [भाग III—खण्ड 4] 3व्याख्यात्मक ज्ञापनव्याख्यात्मक ज्ञापनव्याख्यात्मक ज्ञापनव्याख्यात्मक ज्ञापन
1. मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता) विनियम, 2012 में वर्तमान संशोधन का उद्देश्य, मोबाइल बैंकिंग लेन-देन और यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए एक संशोधित फ्रेमवर्क का निर्धारण करना है। संशोधन में यूएसएसडी पर मोबाइल फोन के माध्यम से बैंकिंग लेन-देन सहित वित्तीय लेन-देन करने के लिए संशोधित सेवा की गुणवत्ता विनियम विहित किया गया है। इस व्याख्यात्मक ज्ञापन का उद्देश्य इस विनियमकारी कार्रवाई के लिए आधार तैयार करना है।
2. इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने तथा ''कम नकदी'' वाले समाज की ओर बढ़ने की दिशा के प्रयास के रूप में भारत सरकार (जीओआई) ने अनेक कदमों की घोषणा की थी। फरवरी, 2016 में भारत सरकार ने कॉर्डाें तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए भुगतान को बढ़ावा देने के अभियान को आरंभ किया था। दिशानिर्देशों में अन्य बातों के साथ-साथ यह भी निर्देश है कि दूरसंचार विभाग/वित्तीय सेवाएं विभाग/भारतीय रिजर्व बैंक एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म के लिए प्रावधान करेगा, जो सभी भुगतान प्रणालियों में लेन-देनों को सपोर्ट कर सकता है। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक दृष्टि 2018 में भी समाज के प्रत्येक वर्ग को इलेक्ट्रिॉनिक भुगतान का अधिकाधिक उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करने की परिकल्पना की गई है ताकि 'कम-नकदी' समाज के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। दृष्टि में अन्य बातों के साथ-साथ मोबाइल बैंकिंग उन्मुखी नीति बनाने की बात कही गई है ताकि मोबाइल बैंकिंग सेवाओं हेतु उपभोक्ताओं के पंजीकरण के लिए अधिक विकल्पों के माध्यम से स्मार्ट फोन का उपयोग नहींं करने वाले उपभोक्ताओं की अनेक भाषाओं में मोबाइल बैंक सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जा सके तथा मोबाइल आधारित नवोन्मेषी समाधानों को प्रोत्साहित किया जा सके। अप्रैल, 2012 में भादूविप्रा ने यह अधिदेश दिया था कि मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता) विनियम, 2012 के माध्यम से प्रत्येक दूरसंचार सेवा प्रदाता अपने उपभोक्ताओं को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए एसएमएस, यूएसएसडी और आईवीआर का इस्तेमाल करने और बैंक या उपभोक्ता द्वारा जनरेट किए गए संदेश डिलिवर करने में बैंकों की मदद करेगा और इसके लिए एसएमएस के मामले में संदेश के ट्रांसमिशन में दो से अधिक चरण नहीं होंगे या यूएसएसडी और आईवीआर के मामले में विकल्पों की प्रविष्टि के दो से अधिक चरण नहीं होंगे।
प्राधिकरण ने दिनांक 26.12.2013 के मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता) (संशोधन) विनियम, 2013 के माध्यम से मोबाइल बैंकिंग लेन-देन को पूरा करने के चरणों की अधिकतम संख्या को दो सेे बढ़ाकर पांच किया गया।
3. तथापि, इन कदमों से अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए। मई, 2016 में केवल लगभग 37 लाख मोबाइल बैंकिंग लेन-देन के प्रयास (यूएसएसडी चैनल) एनपीसीआई. (*99#) तक ही पहुंच पाए। वर्ष 2015 के4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4] दौरान भी वित्तीय सेवाएं विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से भादूविप्रा को यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग वित्तीय सेवाएं उपयोग को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने पर विचार करने के लिए कहा गया थाः-
• यूएसएसडी सत्र के मौजूदा पांच चरण की सीमा को आठ चरण करने की अनुमति दी जाए,
• टाइमर लिमिटेशन सत्र में वृद्धि की जाए,
• प्रत्येक यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग के लिए 1.50 रुपए की अधिकतम टैरिफ सीमा को कम किया जाए,
• निष्फल यूएसएसडी सत्र के लिए यूएसएसडी पुष्ट संदेश भेजे जाएं,
• एक एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म के लिए प्रावधान किए जाएं, जो सभी भुगतान तत्रों के लेन-देन में मदद कर सके,
4 संबंधित हितधारकों अर्थात् एनपीसीआई, दूरसंचार सेवा प्रदाता और डीएफएस के साथ कई महीनों तक चर्चाएं और बैठकें हुईं। तथापि, कोई सहमति नहीं बन पाई। अतः प्राधिकरण ने एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। 02.08.2016 को ''मोबाइल वित्तीय सेवाओं के लिए यूएसएसडी के उपयोग हेतु विनियामक फ्रेमवर्क की समीक्षा'' के संबंध में एक परामर्श-पत्र जारी किया गया। 'भादूविप्रा' की वेबसाइट (www.trai.gov.in) और भारत सरकार के माई गर्वनमेंट प्लेटफार्म के माध्यम से पब्लिक डोमेन में रखा गया। हितधारकों को 14.09.2016 तक लिखित टिप्पणियां और 28.09.2016 तक प्रति-टिप्पणियां प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था। हितधारकों से प्राप्त हुई टिप्पणियों और प्रति-टिप्पणियों को भादूविप्रा की वेबसाइट (www.trai.gov.in) पर डाला गया था। 27.10.2016 को नई दिल्ली में हितधारकों के लिए एक खुला मंच चर्चा का आयोजन किया गया। परामर्श पत्र में उठाए गए मुद्दों और उन पर हितधारकों के विचारों पर प्राधिकरण ने विचार-विमर्श किया जिनकी आगे के पैराग्राफों में समीक्षा की जा रही है।
डी सत्र के लिए प्रविष्ट के लिए विकल्पों की पांच चरणों की मौजूदा सीमा की पर्याप्तता। एक यूएसएसएक यूएसएसएक यूएसएसएक यूएसएसडी सत्र के लिए प्रविष्ट के लिए विकल्पों की पांच चरणों की मौजूदा सीमा की पर्याप्तता। डी सत्र के लिए प्रविष्ट के लिए विकल्पों की पांच चरणों की मौजूदा सीमा की पर्याप्तता। डी सत्र के लिए प्रविष्ट के लिए विकल्पों की पांच चरणों की मौजूदा सीमा की पर्याप्तता।
5 अधिकांश दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और उनके उद्योग सहयोगियों ने यूएसएसडी सत्र में प्रवेश के विकल्पों की पांच-चरणों की मौजूदा सीमा का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि चरणों की संख्या पांच से बढ़ाकर 8 की जानी है, तो सीलिंग टैरिफ को भी अनुपातिक रूप में बढ़ाया जाए क्योंकि चरणों की संख्या बढ़ाने से उनके सिगनलिंग की अवसंचरनाओं पर काफी भार पड़ेगा। यह भी कहा गया कि यदि मात्रा मेंभारत का राजपत्रा : असाधरण [भाग III—खण्ड 4] 5 अचानक बढ़ोतरी होती है तो प्रति सत्र चरणों पर पुनर्विचार और समीक्षा करने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने आगे अपनी राय व्यक्त की कि मौजूदा पांच चरणों से कोई भी वृद्धि बैंकों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के बीच आपसी सहमति के आधार पर होनी चाहिए। तथापि, कुछ दूरसंचार सेवा प्रदाता सत्रों की संख्या 5 से बढ़ाकर 8 करने के लिए तैयार हैं क्योंकि कुछ लेन-देनों के लिए पांच से अधिक चरणों की आवश्यकता पड़ सकती है।
6 अधिकांश बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक ने चरण बढ़ाकर 8 करने का समर्थन किया है और कुछ ने तो यहां तक प्रस्ताव किया है कि प्रति यूएसएसडी सत्र के लिए चरणों की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। इन बैंकों ने कहा है कि कतिपय लेन-देनों जैसे निधि अंतरण, जिनमें इनपुट त्रुटियों की संभावना होती है और जिनमें अधिक समय लगता है, के लिए प्रति यूएसएसडी सत्र के लिए मौजूदा पांच चरण प्र्याप्त नहीं हैं।
दूसरी ओर कुछ बैंकों ने सुझाव दिया है कि केवल पांच ही चरण रहने चाहिए क्योंकि चरणों की संख्या बढ़ाने से इस प्रक्रिया के जटिल और उपयोगकर्ता के अनुकूल न रहने की संभावना है।
7 कुछ संगठनों ने इस बात की भी वकालत की है कि प्रति यूएसएसडी के लिए, चरणों की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से लक्षित उपभोक्ता समूह, जिसमें साक्षरता का स्तर निम्न है और जागरूकता भी कम है, की जरूरतों का समाधान करने में सहायता मिलेगी। इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि पूरे विश्व में अधिकांश बड़े पैमाने पर मोबाइल मनी डिप्लायमेंट यूएसएसडी के माध्यम से किया जाता है। यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग सर्विसेज के लिए व्यैक्तिक हितधारकों ने भी आठ या असीमित चरणों का समर्थन किया है।
8 प्राधिकरण इस तथ्य से अवगत है कि यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग सेवाएं वित्तीय समावेशन एजेंडे को चलाने के लिए बनाई गई थी, जिसका लक्ष्य आबादी का वह वर्ग था, जो कम शिक्षित है और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का बहुत आदी नहीं है। अतः उपभोक्ता द्वारा इनपुट को कम से कम रखना होगा क्योंकि मनुष्यों के हस्तक्षेप से त्रुटियां होती हैं। उपभोक्ता से इंटरफेस, आसान कम से कम मेन्यू और शीघ्रता से काम हो जाने के तरीके से होना चाहिए। साथ ही मौजूदा परिदृश्य में प्रति यूएसएसडी सत्र में पांच चरणों की सीमा से कतिपय लेन-देन करने में जहां इनपुट त्रुटियां होना असंभावी है, बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न करता है। इनपुट त्रुटियों के कारण असफल लेन-देन होते हैं और ऐसे उपभोक्ताओं को उनके खराब सेवा गुणवत्ता अनुभव के आधार पर फिर से यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कम करने की संभावना रहती है। अतः एनसीपीआई और बैंकों को सॉफ्टवेयर फीचर्स में लगातार सुधार करते रहने का प्रयास करना पड़ेगा और ऐसी यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4] उपभोक्ताओं के और अधिक अनुरूप डिजाइन तैयार करना पड़ेगा क्योंकि इससे उपभोक्ताओं का अनुभव अच्छा रहेगा और मोबाइल बैंकिंग लेन-देन सफलता की दर भी अच्छी रहेगी। इन तथ्यों के अलावा, प्राधिकरण का विश्वास है कि इस स्तर पर प्रति यूएसएसडी सत्र के लिए इस सेवा को गति देने के लिए चरणों की मौजूदा संख्या पांच की सीमा को बढ़ाकर आठ करने में कोई बुराई नहीं है। प्रति यूएसएसडी सत्र के लिए चरणों की उपरी सीमा आठ है और सॉफ्टवेयर डिजाइन में सुधार से उपभोक्ता की सुविधा के लिए चरणों की संख्या कम करने का प्रयास करना चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए मोबाइल बैंकिंग (सेवा की गुणवत्ता)( द्वितीय संशोधन) विनियम जारी किया जा रहा है, जिसमें मोबाइल बैंकिंग लेन-देन पूरा करने के लिए न्यूनतम चरणों की संख्या पांच से बढ़ाकर आठ की जा रही है।
एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म की आवश्यकता, जो सभी या भुगतान प्लेटफार्मों पर लेन----देनों को सपोर्ट कर देनों को सपोर्ट कर देनों को सपोर्ट कर देनों को सपोर्ट कर एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म की आवश्यकता, जो सभी या भुगतान प्लेटफार्मों पर लेन एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म की आवश्यकता, जो सभी या भुगतान प्लेटफार्मों पर लेन एकीकृत यूएसएसडी प्लेटफार्म की आवश्यकता, जो सभी या भुगतान प्लेटफार्मों पर लेन
सकता है।सकता है।सकता है।सकता है।
9. वर्तमान में, एनपीसीआई द्वारा संचालित राष्ट्रीय यूएसएसडी प्लेटफार्म के यूएसएसडी एग्रीगेशन प्लेटफार्मों पर केवल मोबाइल बैंकिंग लेनदेन करने की अनुमति है। परामर्श पत्र में यह प्रश्न उठाया गया था कि क्या मर्चेंट भुगतान, यूटीलिटी बिल भुगतान, मोबाइल/डीटीएच रिचार्ज आदि सहित सभी प्रकार की मोबाइल भुगतान सेवाओं को यूएसएसडी एग्रीगेशन प्लेटफार्मों पर अनुमति दी जानी चाहिए।
10. दूरसंचार सेवा प्रदाता और उनके संघों का यह मत है कि बेसिक मोबाइल बैंकिंग को यूएसएसडी प्लेटफार्म के जरिये अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि अन्य सेवाओं के लिए अनुमति देने से बैंक विहीन को बेसिक वित्तीय सेवाएं प्रदान करने पर ध्यान कम हो जाएगा। यह भी कहा गया है कि दूसरे भुगतान तंत्र को अनुमति देना वित्तीय समावेशन के लक्ष्य के दायरे से बाहर है। यह भी तर्क दिया गया कि बाजार शक्तियों को विनियामक हस्तक्षेप के बजाय ऐसे अवसरों के लिए दृष्टिकोण तय करने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि इससे परिणाम अनुकुल से कम हो सकते हैं। अगर बैंकिंग लेन-देन से बाहर के भुगतान को यूएसएसडी प्लेटफार्म के जरिये अनुमति दी जाती है तो यह दूरसंचार सेवा प्रदाता और एग्रीगेटर प्लेटफार्म के बीच पी2पी (पी2पी) निर्णय होगा। इसलिए उनका यह मानना है कि अतिरिक्त सेवाओं का समावेशन एनपीसीआई और दूरसंचार सेवा प्रदाता के बीच परस्पर बातचीत से तय समझौते के आधार पर होना चाहिए।
11. दूसरी ओर, अन्य संगठनों का यह मानना है कि स्वीकृत अवसंरचना का विकास करने की आवश्यकता है और यूएसएसडी एग्रीगेशन प्लेटफार्म नकदी रहित/कॉर्ड रहित होने के नाते इसका इस्तेमाल कॉर्ड, मर्चेंट डिस्काउंट दर और इंटरनेट के बिना किया जा सकेगा और इससे उपभोक्ता मर्चेंट स्वीकृति और प्रोमोशनभारत का राजपत्रा : असाधरण [भाग III—खण्ड 4] 7 के माध्यम से डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होेंने यह सुझाव भी दिया है कि मोबाइल रिचार्ज, यूटीलिटी बिल भुगतान, डीटीएच भुगतान, पी2पी मनी ट्रांसफर जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि ये किसी भी श्रेणी के सबसे अधिक लोकप्रिय भुगतान हैं और इससे यूएसएसडी सेवाओं को अपनाने में बढ़ावा मिलेगा।
12. इसी तरह, आरबीआई सहित अधिकांश बैंकों ने यूएसएसडी प्लेटफार्म पर मर्चेंट भुगतानों, भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) के समावेशन का समर्थन किया है। बैंकों ने *99# प्लेटफार्म पर प्रीपेड इंस्ट्रुमेंट (पीपीआई) को शामिल करने का भी अनुरोध किया है क्योंकि ये भुगतान ईकोसिस्टम में महत्वपूर्ण हैं। आरबीआई ने भी यह अनुरोध किया है कि सभी संस्थानों, जो भारतीय रिजर्व बैंक के भुगतान एवं निपटान अधिनियम, 2007 के अंतर्गत आती हैं, को *99# इंटरओपरेटेबल यूएसएसडी प्लेटफार्म पर सेवाओं की पेशकश करने की अनुमति दी जाए।
13. मर्चेंट भुगतान, यूटीलिटी बिल भुगतान, मोबाइल/डीटीएच रिचार्ज आदि सहित विभिन्न मोबाइल भुगतान सेवाओं को यूएसएसडी एग्रीगेशन प्लेटफार्म पर अनुमति देने का यह प्रश्न डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के महत्व के अलोक में विशेष रूप से जरूरी है क्योंकि यह वित्तीय समावेशन योजना का महत्वपूर्ण भाग है। जीआईआरओ आधारित भुगतान प्रणालियों को लागू करने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित जी. पदमनाभन समिति1 ने अनुमान लगाया था कि देश के प्रमुख 20 शहरों में प्रतिवर्ष 6223 बिलियन राशि के 30800 मिलियन बिल जनरेट किए जाते हैं। रोकड़ और चेक भुगतान इन बिलों के भुगतान के सर्वाधिक प्रचलित रूप हैं हालांकि अन्य रूप में भी भुगतान स्वीकार किए जा रहे हैं। डिमिरगुक-कुंट एट एल2 ने टिप्पणी की है कि ''इस तरह की डिजिटाइजिंग भुगतान खाताधारक को अधिक आसान, अधिक किफायती और अधिक सुरक्षित तरीके से भुगतान करने में समर्थ बनाएंगे''। लेखिका ने टिप्पणी की है कि इसके निम्नलिखित लाभ हो सकते हैंः-
• यह भुगतान की गति बढ़ाकर और इनके संवितरण एवं प्राप्त करने की लागतों में कमी करके भुगतान करने की कुशलता को बेहतर कर सकता है।
• यह भुगतानों की सुरक्षा बढ़ा सकता है और इससे जुड़ी अपराधिक घटनाओं में कमी आएगी।
1 भारत में जीआईआरओ अधारित भुगतान प्रणाली के कार्यान्वयन का अध्ययन करने वाली समिति की दिनांक 7 मई, 2013 की रिपोर्ट,https://rbi.org.in/scripts/PublicationReportDetails.aspx?UrlPage=&ID=701#R5
http://documents.worldbank.org/curated/en/187761468179367706/pdf/WPS7255.pdf#page=38 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4] • यह भुगतानों की पारदर्शिता बढ़ा सकता है, जिससे भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के लिए लीकेज की संभावना कम होगी।
14. यह सभी समझते हैं कि कम नकदी वाला समाज न केवल वित्तीय रूप से अधिक समावेशी होता है बल्कि राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ाने की दृष्टि से भी फायदेमंद होता है। किसी भी वित्तीय संस्था के लिए रोकड़ का प्रबंधन महत्वपूर्ण प्रचालनिक व्यय होता है। बैंक की यह लागत मद अंततः व्यक्तियों और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक लागत मद बन गई है। इस लागत मद सेे सबसे अधिक चोट गरीब को पहुंचती है और इसीलिए वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को कम नकदी वाले समाज के दृश्टिकोण से जोड़ दिया गया है। अतः कम नकदी और अधिक डिजिटल भुगतान लेन-देन वाला समाज बनाने में फायदा है क्योंकि इसे सरकार द्वारा अपने विभिन्न दिशानिर्देशों और कदमों के जरिये बढ़ावा दिया जा रहा है।
15. निर्धन सहायता परामर्श समूह (सीजीएपी) के अनुसार, पहुँच (हैंडसेट के साथ कंपेटिबिलिटी), यूजर अनुभव, सुरक्षा, लागत और प्रदाताओं के लिए लागू करने में आसानी जैसे कारकों को देखते हुए वर्तमान में कम आय वाले उपभोक्ता की भुगतान जरूरतों को पूरा करने लिए उपलब्ध विकल्पों में से यूएसएडी सबसे अच्छा विकल्प है3।
16. एनपीसीआई द्वारा इसी तरह, भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) एकीकृत और इंटरओरेटेबल बिल भुगतन प्रणाली कार्यान्वित की जा रही है, जिसमें उपभोक्ता विभिन्न बिलों को एक ही प्वाईंट पर कुशल और सुविधाजनक तरीके से अदा कर सकते हैं। इससे आशा है कि बैंक विहीन और बैंक अधीन आबादी के बड़े हिस्से को पहुॅंच योग्य बिल भुगतान प्रणाली उपलब्ध होगी। यह बिलर के लिए भी सुविधाजनक होगी।
इसकी शुरूआत में बिजली, पानी, गैस, टेलीफोन और डायरेक्ट-टु-होम (डीटीएच) जैसी प्रतिदिन की यूटीलिटी सेवाओं के लिए केवल दोहराव वाले भुगतान बीबीपीएस में शामिल किए जाएंगे। फिर धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जाएगा और स्कूल/विश्वविद्यालय की फीस, निगम कर आदि जैसे दोहराव वाले अन्य भुगतान शामिल किए जाएंगे। बीबीपीएस प्लेटफार्म पर यूएसएसडी के इस्तेमाल को अनुमति देने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि बेसिक फोन के यूजर, जिनकी इंटरनेट तक पहुंच नहीं है, भी इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल करके डिजिटल भुगतानों में भाग लेने में समर्थ हैं।
3 सीजीएपी, मोबाइल भुगतान में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहा हैः यूएसएसडी, सीजीएपी की भूमिका, फरवरी, 2015, https://www.cgap.org/sites/default/files/Brief-The-Role-of-USSD-Feb-2015.pdfभारत का राजपत्रा : असाधरण [भाग III—खण्ड 4] 9 17. उपरोक्त में दृष्टिगत, प्राधिकरण का यह मानना है कि दूरसंचार विभाग द्वारा वित्तीय सेवा विभाग को आवंटित *99# एनपीसीआई एग्रीगेशन प्लेटफार्म पर भारतीय रिजर्व बैंक के भुगतान एवं निपटान अधिनियम, 2007 के अधीन आने वाले सभी अधिकृत यूनिटों के लिए भुगतान सेवाओं और भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) पर प्राप्त किए जा रहे भुगतानों की पेशकश करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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- असली डिमिरगुक-कुंट, लिओरा कलप्पर, डोरोथी सिंगर, पीटर वैन ओघीयुस्डेन, द ग्लोबल फिनडेक्स डेटाबेस 2014ः दुनियाभर में वित्तीय समावेशन का आकलन करना, विश्व बैंक समूह, अप्रैल, 2015, ↩