सहकारिता विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, अटल नगर, रायपुर
अटल नगर, दिनांक 3 अक्टूबर 2018
आदेश
क्रमांक/एफ 15-21/15-02/2017. राज्य शासन द्वारा दिनांक 11 जुलाई 2017 को निर्णय लिया गया कि, छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 16-ग के प्रावधान अनुसार तथा भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति से अल्पकालीन सहकारी साख संरचना की त्रिस्तरीय संरचना को द्विस्तरीय संरचना में परिवर्तित करने हेतु मध्य स्तर के जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में संविलियन किया जाए।
छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 16-ग की उप-धारा(1) के परन्तुक के प्रावधान अनुसार प्रदेश के छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, बिलासपुर एवं अंबिकापुर का संविलियन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में करने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक के पत्र क्रमांक DCBR.CO.RCB No. 1006/19.51.007/2018-19 दिनांक 03-10-2018 द्वारा अनुमति प्रदान की गई है। अत्एव छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 16-ग की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन एतद्द्वारा, लोकहित में विकास कार्यक्रमों के समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिये प्रदेश के छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, बिलासपुर एवं अंबिकापुर का विलय छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में करने के लिए पुनर्गठन की स्कीम, "जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में संविलियन की योजना, 2018" जारी करता है।
संलग्न :- संविलियन की योजना, 2018.
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
पी.एस. सर्पराज, उप-सचिव.
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में
संविलियन की योजना, 2018
1. संक्षिप्त नाम प्रारंभ तथा विस्तार :-
(1) यह योजना "जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में संविलियन की योजना, 2018" कहलाएगी.
(2) यह योजना छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावशील होगी.
(3) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा तक होगा.
2. परिभाषाएं :-
(क) "अधिनियम" से अभिपे्रत है, छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 (क्रमांक 17 सन् 1961).
(ख) "नियम" से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी नियम, 1962.
(ग) "संविलियन" से अभिप्रेत है, इस योजना के अधीन अल्पकालीन सहकारी साख संरचना के अंतर्गत कार्यरत प्रदेश के छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में विलय किया जाना.
(घ) "अल्पकालीन सहकारी साख संरचना" से अभिप्रेत है-
(i) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर
(ii) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर
(iii) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, दुर्ग
(iv) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, राजनांदगांव
(v) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर
(vi) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर
(vii) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, अम्बिकापुर
(ङ) "परिणामी बैंक" से अभिप्रेत है, अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर जिसमें प्रदेश के उपर्युक्त छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का विलय किया जायेगा.
(च) "प्रभावित बैंक" से अभिपे्रत है, अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित प्रदेश के छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित रायपुर, दुर्ग राजनांदगांव, जगदलपुर, बिलासपुर एवं अम्बिकापुर जिनका विलय छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में किया जायेगा.
(छ) "रजिस्ट्रार" से अभिप्रेत है, सहकारी सोसाइटियों का रजिस्ट्रार अथवा छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रार की शक्तियां जिसे प्रयोक्त हो.
3. संविलियन की रीति :-
(क) अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में नीचे दी गई तालिका अनुसार संविलियन कर पुनर्गठन किया जायेगा।
| क्र. | प्रभावित बैंक | परिणामी बैंक |
| 1 | जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर | छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर |
| 2 | जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, दुर्ग | |
| 3 | जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, राजनांदगांव | |
| 4 | जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर | |
| 5 | जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर | |
| 6 | जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, अम्बिकापुर |
(ख) भारतीय रिजर्व बैंक से अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात् राज्य शासन द्वारा सहकारी बैंकों के पुनर्गठन/संविलियन की तिथि निर्धारित की जावेगी। इस तिथि पर सभी प्रभावित बैंकों का विलय परिणामी बैंक में हो जायेगा।
4. संविलियन की प्रक्रिया :-
(क) इस संविलियन योजना के जारी होने की तारीख से 30 दिवस की समयावधि में विद्यमान परिणामी व प्रभावित बैंक अथवा कोई हितबद्ध पक्षकार आपत्तियां अथवा सुझाव रजिस्ट्रार को प्रस्तुत कर सकेगा.
(ख) प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों को अपने अभिमत के साथ रजिस्ट्रार राज्य शासन के समक्ष शीघ्र प्रस्तुत करेगा, इस पर राज्य शासन का विनिश्चय अंतिम होगा.
(ग) राज्य शासन संविलियन स्कीम को ऐसे उपान्तरणों सहित जैसा कि वह उचित समझे, अंतिम रूप से अभिप्रमाणित करेगा.
(घ) नाबार्ड द्वारा सभी अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित प्रभावित बैंकों एवं परिणामी बैंक के लेखाओं की विशेष संपरीक्षा कराया जावेगा, जिससे कि उनकी वास्तविक वित्तीय स्थिति, प्रावधान में कमी एवं हानि को ज्ञात किया जा सके.
(ङ) अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित सभी बैंकों अर्थात् परिणामी एवं प्रभावित बैंकों के लेखाओं की विशेष संपरीक्षा कराने के लिए संपरीक्षक अथवा संपरीक्षा फम्र्स का निर्धारण नाबार्ड द्वारा किया जायेगा.
(च) अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित परिणामी एवं प्रभावित बैंकों के लेखाओं की विशेष संपरीक्षा भारतीय रिजर्व बैंक एवं राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के निर्देशों एवं तत्संबंध में निर्धारित मानदण्डों के अनुसार कराया जावेगा.
(छ) बैंको के संविलियन हेतु भारतीय रिजर्व बैंक एवं राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के निर्देशों एवं मानदण्डों के अनुसार विशेष संपरीक्षा पर सी.आर.ए.आर. में निर्धारित मापदण्डों से कमी की पूर्ति करने हेतु यदि अतिरिक्त राशि की आवश्यकता पड़ती है, तो अतिरिक्त राशि की मांग राज्य शासन से की जा सकेगी.
(ज) प्रभावित बैंकों का पक्षकार के रूप में कोई वैधानिक प्रकरण किसी भी न्यायालय में या किसी प्राधिकारी के समक्ष लंबित हो, तो संविलियन के पश्चात् परिणामी बैंक उसका पक्षकार होगा। प्रभावित बैंकों के पक्ष या विपक्ष में हुए न्यायालयीन आदेशों का पालन/निष्पादन/अपील आदि परिणामी बैंक द्वारा किया जा सकेगा.
(झ) संविलियन होने के पश्चात् परिणामी बैंक को प्रभावित बैंकों की वे समस्त शक्तियां प्राप्त हो जायेगी, जो संविलियन के ठीक पूर्व प्रभावित बैंकों को थी.
(ञ) सहकारी बैंकों के संविलियन के पश्चात् आगामी दिवस से परिणामी बैंक का समस्त बैंकिंग एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजानाओं का संचालन बिना रूके निरंतर पूर्व की तरह जारी रहेगा.
(ट) सहकारी बैंकों के संविलियन होने के पश्चात् सभी प्रभावित बैंकों के मुख्यालय, शाखाओं एवं नोडल/क्षेत्रीय कार्यालयों में परिणामी बैंक की नाम पटि्टका/बोर्ड लगायी जावेगी.
(ठ) सहकारी बैंकों के संविलियन के पश्चात् सभी प्रभावित बैंकों के समस्त अभिलेखों, प्रपत्रों, में परिणामी बैंक का नाम दर्ज किया जावेगा.
(ड) सहकारी बैंकों के संविलियन के पश्चात सभी प्रभावित बैंकों में प्रचलित सील/मुहर निरस्त हो जावेगी तथा परिणामी बैंक के नाम से सील/मुहर का उपयोग किया जावेगा.
(ढ) सभी प्रभावित बैंकों एवं परिणामी बैंक में कार्यरत सभी सेवायुक्त जहाँ जिस पद एवं स्थान पर सेवारत है, संविलियन के पश्चात पूर्व की भांति तब तक अपने वर्तमान पद पर कार्यरत/पदस्थ रहेंगे जब तक की परिणामी बैंक के प्रबंधन द्वारा उन्हे नवीन दायित्व न सौंप दिया जाये.
(ण) राज्य शासन द्वारा सहकारी बैंकों के संविलियन की कार्यवाही पूर्ण होने की अधिसूचना सर्वसाधारण के सूचनार्थ जारी की जावेगी।
5. सदस्यता :-
संविलियन के पश्चात् प्रभावित बैंकों के सदस्यों की सदस्यता उस बैंक से समाप्त हो जायेगी और ऐसी संस्थाएं जो उस बैंक के सदस्य थे, परिणामी बैंक के अंशधारी सदस्य बन जायेंगे एवं उन्हें परिणामी बैंक के अंशधारी सदस्य के समस्त अधिकार प्राप्त होंगे। प्रभावित बैंकों के नाममात्र के सदस्य परिणामी बैंक में नाममात्र के सदस्य बन जायेंगे.
6. रजिस्ट्रीकरण :-
(क) संविलियन के पश्चात् अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित सभी प्रभावित बैंकों का पंजीयन रजिस्ट्रार द्वारा निरस्त/रद्द किया जायेगा.
(ख) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर की विद्यमान उपविधियॉ आवश्यक उपान्तरणों सहित जैसा कि रजिस्ट्रार विनिश्चय करे, परिणामी बैंक के लिये प्रभावी होगी।
7. बैंकिंग लाईसेंस :-
संविलियन के पश्चात् अल्पकालीन सहकारी साख संरचना से संबंधित सभी प्रभावित बैंकों का भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रदत्त बैंकिंग लाईसेंस भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष समर्पित करना आवश्यक होगा।
8. प्रबंध :-
प्रभावित बैंकों के निर्वाचित पदाधिकारी तथा बोर्ड के सदस्यों के पद सहकारी बैंकों के पुनर्गठन की तारीख से समाप्त होे जायेंगे। परिणामी बैंक के निर्वाचित बोर्ड के सदस्यों के पद पुनर्गठन की तारीख से रिक्त हो जायेंगे। परिणामी बैंक के बोर्ड की शक्तियां रजिस्ट्रार में वेष्ठित हो जायेगी।
9. आस्तियॉ और दायित्व :-
सहकारी बैंकों के संविलियन के पश्चात् प्रभावित बैंकों की समस्त आस्तियॉ और दायित्व परिणामी बैंकों की आस्तियॉ और दायित्व में पूर्णतः अंतरित हो जायेगी।
10. भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमोदन :-
राज्य शासन के द्वारा प्रस्तावित अल्पकालीन सहकारी साख संरचना के अंतर्गत प्रदेश के छः जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में संविलियन के प्रस्ताव पर अधिनियम की धारा 16-ग की उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन के भारतीय रिजर्व बैंक के पत्र क्रमांक DCBR.CO.RCB No. 1006/19.51.007/2018-19 दिनांक 03.10.2018 द्वारा सैद्धांतिक सहमति प्राप्त है, परिशिष्ट-'अ' संलग्न है। 11. अमानतों का बीमा :-
प्रदेश के 06 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों (प्रभावित बैंकों) का छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में संविलियन के पश्चात् डिपॉजिट इन्श्योरेंस एवं क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन को देय प्रब्याजि की पुनः गणना कर संदाय परिणामी बैंक द्वारा किया जायेगा।
12. शक्तियॉं :-
परिणामी बैंक को अपने कार्यक्षेत्र में वह समस्त शक्तियॉं होगी जो संविलियन के ठीक पूर्व विद्यमान प्रभावित बैंकों को थी।
13. अधिकार, हित एवं कर्तव्य :-
परिणामी बैंक को अपने कार्यक्षेत्र में अधिकार, हित और कर्तव्य उसी अनुरूप होंगे जैसा कि संविलियन के ठीक पूर्व विद्यमान प्रभावित बैंकों को थे।
14. कर्मचारी वृन्द :-
प्रभावित बैंकों के सेवायुक्तों की सेवाएं संविलियन की तारीख से परिणामी बैंक में स्वतः अंतरित हो जायेगी। 15. कर्मचारी वृन्द की सेवा की शर्ते :-
(क) विद्यमान प्रभावित बैंकों के प्रभावशील सेवा नियम, परिणामी बैंक में प्रभावित बैंक से अंतरित कर्मचारी वृन्द के लिए अनन्तिम रूप से आवश्यक उपान्तरणों सहित तब तक लागू रहेंगे, जब तक रजिस्ट्रार द्वारा नये सेवा नियम लागू न कर दिये जाये।
(ख) सभी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों एवं छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के कर्मचारियों के वेतनमान में भिन्नता है। संविलियन के पश्चात् यह सुनिश्चित किया जायेगा कि किसी भी कर्मचारी को मिलने वाले कुल वेतन (मूलवेतनडी.ए.) में किसी प्रकार की कमी नहीं की जायेगी। इस प्रकार सेवायुक्तों की कुल परिलब्धियॉं व उनके वित्तीय हितों को संरक्षित किया जावेगा। (ग) संविलियन के पश्चात् सभी सेवायुक्तों को परिणामी बैंक के सेवा नियमों के अनुसार वर्गवार वर्णित अन्य भत्ते उसी प्रकार प्राप्त होंगे, जैसा कि परिणामी बैंक के उस वर्ग के सेवायुक्तों को प्राप्त हो रहे है।
(घ) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के प्रचलित सेवा नियम में अधिकारी/कर्मचारी के वर्ग एवं पदनाम में भिन्नता है तथा एक ही वर्ग में विभिन्न पदनाम के पद स्वीकृत है। बैंकों के संविलियन के पश्चात् इन बैंकों के वर्ग एवं पदनाम में एकरूपता रखना आवश्यक है, जिसके लिये परिणामी बैंक में अधिकारी/कर्मचारियों के वर्ग एवं पदनाम का पुनर्निर्धारण रजिस्ट्रार द्वारा कंडिका (क) के तहत नए सेवानियम लागू होने तक निम्नानुसार किया जावेगा :-
(i) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर (परिणामी बैंक) के अधिकारी/कर्मचारियों की श्रेणी एवं पदनाम का पुनर्निर्धारण :-
| क्र. | वर्तमान पदनाम एवं श्रेणी | परिणामी बैंक का पदनाम एवं श्रेणी | ||
| श्रेणी | पदनाम | श्रेणी | पदनाम | |
| 1 | प्रबंध संचालक | प्रबंध संचालक | ||
| 2 | विशेष श्रेणी | महाप्रबंधक | विशेष श्रेणी | महाप्रबंधक |
| 3 | विशेष श्रेणी | उप महाप्रबंधक | विशेष श्रेणी | उप महाप्रबंधक |
| 4 | विशेष श्रेणी | सहायक महाप्रबंधक | विशेष श्रेणी | सहायक महाप्रबंधक |
| 5 | श्रेणी-I | प्रबंधक | श्रेणी- I (अ) | प्रबंधक |
| 6 | श्रेणी- I I | उपप्रबंधक | श्रेणी- I (ब) | उपप्रबंधक |
| 7 | श्रेणी- I I I | सहायक प्रबंधक | श्रेणी- I I (अ) | सहायक प्रबंधक |
| श्रेणी- I I (ब) | ||||
| 8 | श्रेणी- I V | लेखाधिकारी | श्रेणी- I I I (अ) | लेखाधिकारी |
| श्रेणी- I I I (ब) | ||||
| 9 | श्रेणी- V | सामान्य सहायक | श्रेणी- I v(अ) | सामान्य सहायक |
| श्रेणी- I v(ब) | ||||
| 10 | श्रेणी- VI | वाहन चालक एवं भृत्य | श्रेणी- V (अ) | वाहन चालक एवं भृत्य |
| श्रेणी-V(ब) |
(ii) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों (प्रभावित बैंकों) के अधिकारी/कर्मचारियों के वर्ग एवं पदनाम का पुनर्निर्धारण :-
| क्र. | वर्तमान पदनाम एवं वर्ग | परिणामी बैंक का पदनाम एवं वर्ग | ||
| वर्ग | पदनाम | वर्ग | पदनाम | |
| 1 | वर्ग-01(अ) | अतिरिक्त प्रबंधक | वर्ग-01(अ) | प्रबंधक |
| 2 | वर्ग-01(ब) | मुख्य लेखापाल, मुख्य पर्यवेक्षक, सहायक प्रबंधक, विपणन अधिकारी, अतिरिक्त सहायक प्रबंधक, अतिरिक्त मुख्य पर्यवेक्षक, अतिरिक्त विपणन अधिकारी, निरीक्षण अधिकारी, अतिरिक्त मुख्य लेखापाल, औद्योगिक विकास अधिकारी, अमानत विकास अधिकारी, सहायक यंत्री, कृषि अधिकारी | वर्ग-01(ब) | उप प्रबंधक |
| क्र. | वर्तमान पदनाम एवं वर्ग | परिणामी बैंक का पदनाम एवं वर्ग | ||
| वर्ग | पदनाम | वर्ग | पदनाम | |
| 3 | वर्ग-02(अ), (ब) | शाखा प ्रबंधक, सहायक मुख्य पर्यवेक्षक, उपयंत्री, लेखापाल, कार्यालय अधीक्षक, आंतरिक अंकेक्षक, सांख्यिकी अधिकारी, स्टेनोग्राफर | वर्ग-02 | सहायक प्रबंधक |
| 4 | वर्ग-03 | सहायक लेखापाल, पर्यवेक्षक, उच्च श्रेणी लिपिक, | वर्ग-03(अ) | लेखाधिकारी |
| वर्ग-03(ब) | ||||
| लैम्प्स प्रबंधक | वर्ग-3 संवर्ग | डाईंग केडर | ||
| 5 | वर्ग-04 | लिपिक, | वर्ग-04(अ) | सामान्य सहायक |
| वर्ग-04(ब) | ||||
| संस्था प्रबंधक | वर्ग 4 संवर्ग | संस्था प्रबंधक | ||
| 6 | वर्ग-05(अ) , (ब),(स) | भृत्य, वाहन चालक, दफ्तरी, माली, जमादार, चौकीदार, गनमेन, सफाई कर्मचारी | वर्ग-05(अ) | वाहन चालक एवं भृत्य |
| वर्ग-05(ब) |
(iii) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित रायपुर (परिणामी बैंक) के संवर्ग सेवा के अधिकारी के वर्ग एवं पदनाम का पुनर्निर्धारण :-
| क्र. | वर्तमान पदनाम एवं श्रेणी | परिणामी बैंक का पदनाम एवं श्रेणी | ||
| श्रेणी | पदनाम | श्रेणी | पदनाम | |
| 1 | विशेष श्रेणी-1 | प्रबंध संचालक | विशेष श्रेणी | उप महाप्रबंधक |
| 2 | विशेष श्रेणी-2 | महाप्रबंधक | विशेष श्रेणी | सहायक महाप्रबंधक |
| 3 | वर्ग-1 | प्रबंधक | वर्ग-1(अ) | प्रबंधक |
| 4 | वर्ग-2 | सहायक प्रबंधक, मुख्य लेखाधिकारी, मुख्य पर्यवेक्षक, विपणन अधिकारी | वर्ग-1(ब) | उप प्रबंधक |
| 5 | वर्ग-3 | सहायक प्रबंधक, मुख्य लेखाधिकारी, मुख्य पर्यवेक्षक, विपणन अधिकारी | वर्ग-2 | सहायक प्रबंधक |
(ङ) उपरोक्त तालिका में परिणामी बैंक के लिये उल्लेखित पुनर्निर्धारित वर्गों एवं पदों का निर्धारण करने हेतु रजिस्ट्रार से स्वीकृति प्राप्त की जावेगी। रजिस्ट्रार उपरोक्त पुनर्निर्धारित वर्ग एवं पदनाम को यथावर्णित अथवा उपांतरणों सहित स्वीकृति प्रदान कर सकेगा।
(च) परिणामी बैंक का प्रशासन एवं प्रबंधन सुचारू रूप से संचालित करने हेतु निम्नानुसार प्रतिनियुक्ति पदों का सृजन किया जाएगा :-
| कार्यालय | पदनाम | विवरण | |
| प्रधान कार्यालय | 1. | प्रबंध संचालक | प्रतिनियुक्ति में भा.प्र.से. के अधिकारी |
| 2. | अतिरिक्त प्रबंध संचालक | प्रतिनियुक्ति में अपर पंजीयक, सहकारी संस्थाएं | |
| 3. | महाप्रबंधक | प्रतिनियुक्ति में संयुक्त पंजीयक, सहकारी संस्थाएं |
(छ) राज्य शासन/रजिस्ट्रार आवश्यकता अनुसार परिणामी बैंक में सहकारिता विभाग के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ कर सकेगा। (ज) प्रभावित बैंकों के कर्मचारियों को परिणामी बैंक में जिस वर्ग में संविलियन किया जाएगा, उस वर्ग के वरिष्ठता क्रम में परिणामी बैंक में पूर्व से कार्यरत उस वर्ग के कर्मचारियों के अंतिम व्यक्ति के ठीक नीचे रखा जावेगा।
(झ) प्रभावित बैंकों के कर्मचारियों को परिणामी बैंक में जिस वर्ग में संविलियन किया जावेगा उस वर्ग में वरिष्ठता का निर्धारण वर्तमान वर्ग के पद पर नियुक्ति/पदोन्नति के दिनांक के अनुसार होगा। वर्तमान वर्ग में पहले नियुक्त/पदोन्नत होने वाले कर्मचारियों को वरिष्ठता क्रम में उपर रखा जावेगा। (ञ) प्रभावित बैंक के कर्मचारियों को परिणामी बैंक में एक ही पद (वर्ग) में नियुक्ति/पदोन्नति का दिनांक समान होने पर वरिष्ठता का निर्धारण कर्मचारी की जन्मतिथि के आधार पर किया जावेगा। जिस कर्मचारी की जन्मतिथि पहले होगी उसे वरिष्ठता प्रदान की जावेगी।
(ट) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों हेतु बनाए गए संवर्ग के सेवायुक्तों की सेवाएं समान वर्ग, समान वेतनमान एवं समान नियोक्ता होने के कारण स्वमेव परिणामी बैंक की सेवाओं में उसी वर्ग में अंतरित हो जावेगी जिस वर्ग में वर्तमान में संवर्ग सेवायुक्त कार्यरत है।
(ठ) छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर के संवर्ग सेवायुक्तों का परिणामी बैंक में वरिष्ठता का निर्धारण संवर्ग के सेवायुक्तों के वर्तमान वर्ग में नियुक्ति/ पदोन्नति के दिनांक के अनुसार होगा। वर्तमान वर्ग में पहले नियुक्त/पदोन्नत होने वाले सेवायुक्तों को वरिष्ठता क्रम में ऊपर रखा जावेगा। (ड) परिणामी बैंक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, रायपुर का प्रधान कार्यालय रायपुर में होगा तथा इसके 6 क्षेत्रीय कार्यालय जिला मुख्यालय रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, बिलासपुर एवं अम्बिकापुर में स्थापित किये जायेगें, इन 6 जिलों को छोडकर राज्य के शेष 21 जिलों में जिला स्तर पर नोडल कार्यालय स्थापित किये जायेंगे। प्रभावित बैंकों की वर्तमान में कार्यरत शाखाएं परिणामी बैंक की शाखाओं के रूप में कार्य करेगी। परिणामी बैंक के प्रधान कार्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय एवं नोडल कार्यालय का स्टाफिंग पैटर्न पृथक से रजिस्ट्रार द्वारा निर्धारित किया जायेगा।
(ढ) प्रभावित बैंकों में संविदा पर नियुक्त कर्मचारी अधिकारी की सेवाएं संविदा अवधि तक परिणामी बैंक में भी जारी रहेगी।
16. विवाद :-
अल्पकालीन सहकारी साख संरचना के अंतर्गत सहकारी बैंकों के संविलियन की इस योजना के अधीन संविलियन से संबंधित उद्भुत किसी विवाद की दशा में उसका निपटारा प्रथमतः आपसी सहमति द्वारा किया जा सकेगा, किन्ही पक्षकारों की असहमति की दशा में ऐसा विवाद निराकरण हेतु रजिस्ट्रार को प्रस्तुत किया जायेगा, रजिस्ट्रार उभय पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करते हुए प्रकरण का निराकरण करेगा।
17. अपील :-
रजिस्ट्रार के द्वारा पारित किसी आदेश अथवा किये गये किसी विनिश्चिय के विरूद्ध पीड़ित पक्षकार द्वारा राज्य शासन को 30 दिन के भीतर अपील की जा सकेगी तथा ऐसी अपील में राज्य शासन का निर्णय/आदेश विनिश्चायक तथा पक्षकारों के लिये आबद्धकर होगा।
18. प्रकीर्ण :-
अधिनियम की धारा 16-ग के प्रावधानों के अंतर्गत जारी या संविलियन/पुनर्गठन की योजना के उपबंध और तत्संबंध में राज्य शासन द्वारा जारी आदेश हितबद्ध पक्षकारों पर आबद्धकर होंगे।
हस्ता./-
उप सचिव सहकारिता विभाग.
परिशिष्ट-'अ'
भारतीय रिजर्व बैंक
RESERVE BANK OF INDIA
www.rbi.org.in
मुख्य महाप्रबंधक Chief General Manager
DCBR.CO.RCB. No. 1006/19.51.007/2018-19 October 03, 2018 By Speed Post
Shri Ajay Singh Chief Secretary Government of Chhattisgarh Room No. S-4/21 4th floor, Mantralaya Mahanadi Bhawan, Naya Raipur Chhattisgarh-492002
Dear Sir,
Proposal of Government of Chhattisgarh – Merger of District Central Cooperative Banks (DCCBs) with Chhattisgarh State Cooperative Bank (CStCB) Please refer to your DO letter no 476/CS/2018 dated April 5, 2018 addressed to the Deputy Governor, Reserve Bank of India on the captioned subject.
2. In this connection, it is advised that, we are agreeable "in-principle" to the proposal of State Government of Chhattisgarh for Amalgamation of all six District Central Co-operative Banks in the State with Chhattisgarh State Co-operative Bank Ltd. However, our final approval, and consequential licensing of the branches of the DCCBs as CStCB branches is contingent on prior fulfilment of conditions indicated in the annex to this letter and such additional conditions as NABARD may impose.
3. We further advise that the CStCB may approach RBI through NABARD for final approval with the status of compliance on all the applicable conditions for amalgamation.
4. The process may be completed before March 31, 2019.
Yours faithfully
Sd/ (Neeraj Nigam) Chief General Manager Encl: As above Conditions for grant of „in-principle" approval for amalgamation of 6 DCCBs in Chhattisgarh with Chhattisgarh StCB.
(i) The due process as required under the provisions of the State Cooperative Societies Act and the State Cooperative Societies Rules as adopted by the Chhattisgarh Government shall be followed. At every stage the provisions of the Chhattisgarh Co-operative Societies Act shall be complied with.
(ii) Government of Chhattisgarh shall verify that there are no Court Orders prohibiting or staying the proposal for amalgamation of the 6 DCCBs in Chhattisgarh with Chhattisgarh StCB.
(iii) A scheme of amalgamation shall be prepared by the chhattisgarh StCB and the DCCBs are to present the same to their members and creditors.
(iv) A resolution passed by a two third majority of the members present and voting at a Special General Meeting of StCB and each DCCBs shall be a pre-requisite for amalgamation for StCB and all DCCBs.
(v) A MOU shall be executed between the constituents i.e. all 6 DCCBs, Chhattisgarh StCB and Government of Chhattisgarh covering issues of governance structure, management, manpower/HR issues, amicable solution of asset and liabilities of each bank to Chhattisgarh StCB.
(vi) The share Capital of the Chhattisgarh StCB shall be strengthened so as to ensure sustained net worth of the bank and ongoing compliance with capital regulations post-merger. The amalgamated entity shall strictly adhere to the CRAR norms of RBI for co-operative banks. The shortfall in capital or additional capital, if any, for meeting CRAR, net worth etc. shall be met by State Government.
(vii) The balance sheet of the amalgamated bank shall meet with the regulatory requirements laid down for grant of various permissions/approvals so that none of the services (being provided by the DCCBs) are jeopardized. The required permissions for the said services shall be obtained, if required, before the actual functioning of the amalgamated entity.
(viii) The impaired assets due to frauds, misappropriation etc. shall have to be fully provided for.
(ix) Special audit of all the entities shall be carried out by NABARD as on the date of amalgamation to arrive at the actual financial position and losses/shortfall in provisions. The assets and liabilities shall be valued for all banks. Once the valuation is completed, the loss assets shall be written off or fully provided for in the respective balance sheet of the banks" and the real net worth including the revaluation of tangible assets shall be ascertained.
(x) in case of divergence in interest rate between the StCB and DCCBs, the StCB shall provide sufficient notice period to the customers of DCCBs.
(xi) Chhattisgarh StCB shall get their technology in place for smooth transfer of services to the existing clients with appropriately configured software to enable the system integration with all DCCBs.
(xii) The migration audit of the all the DCCBs shall be completed within a given time frame, before the amalgamation. The system integrity shall be established and certified before the DCCBs can migrate to the Chhattisgarh StCB platform.
(xiii) Chhattisgarh StCB shall hold elections for Board of Directors within three month after the amalgamation takes place. Committees of the Board like Audit Committee, Risk management committee, ALCO etc shall be constituted to ensure best Corporate Governance practices.
(xiv) The CEO of the merged bank shall be appointed as per the Fit & Proper Criteria prescribed by RBI. There shall be 2 professional directors on the Board.
(xv) A Board of Management (BoM) shall be set up for Chhattisgarh StCB on the lines of draft guidelines for BoM proposed for Urban Co-operative Banks in consultation with RBI. Accordingly, Government of Chhattisgarh shall suitably amend the bye-laws for introducing BoM in Chhattisgarh StCB or provisions of the State Co-operative Societies Act/Rules, as may be required.
(xvi) The licence issued to the Chhattisgarh StCB shall continue after the Process of amalgamation. Existing branches of the DCCBs shall be converted into branches of the Chhattisgarh StCB and will come under the purview of Section 23 of the BR Act, 1949 (AACS). Thus, the Chhattisgarh StCB shall be required to apply for branch licence from RBI. The Chhattisgarh StCB shall also seek prior approval of RBI for shifting of branches. DCCBs shall surrender their licences to RBI.
(xvii) DICGC clearance shall be obtained by Chhattisgarh StCB for the proposal.
(xviii) The Chhattisgarh StCB shall approach RBI through NABARD for final approval with the status of compliance of all the applicable conditions for amalgamation.