राजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला,शिमला,शिमला,शिमला, वीरवीरवीरवीरववववार, ार, ार, ार, 17171717 मार्च मार्च मार्च मार्च, 2011, 2011, 2011, 2011////26262626 फाल्गुन फाल्गुन फाल्गुन फाल्गुन, 1932, 1932, 1932, 1932
हिमाचल प्रदेश सरकारहिमाचल प्रदेश सरकारहिमाचल प्रदेश सरकारहिमाचल प्रदेश सरकार
लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 15 मार्च, 2011
संख्याःपीसंख्याःपीसंख्याःपीसंख्याःपी....बीबीबीबी....डब्लयू(बी)एफ(5)24/2010डब्लयू(बी)एफ(5)24/2010डब्लयू(बी)एफ(5)24/2010डब्लयू(बी)एफ(5)24/2010....--------यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव अणू खुर्द, तहसील व जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में बाई पास सडक के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद् द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
259-राजपत्र/2011-17-3-2011 (9831) 9832 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932 2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्व व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस(30) दिन की अवधि के भीतर लिखित रुप में भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग (मण्डी क्षेत्र) मण्ड़ी के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (कनाल-मरले में) हमीरपुर हमीरपुर अणू खुर्द 55 0-11 418/292 0-10 419/292 0-10 420/292 14-9 377/341 1-0 378/341 0-10 379/342 2-0 380/342 1-0 404/381 0-12 405/381 0-4 406/381 0-10 407/381 4-13
कुल किता 12कुल किता 12कुल किता 12कुल किता 12 26-926-926-926-9
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (लोक निर्माण)।
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हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
शिमला-4, 16 मार्च, 2011
संख्याःसंख्याःसंख्याःसंख्याः वि0स0-वि-बिल/1-49 वि0स0-वि-बिल/1-49 वि0स0-वि-बिल/1-49 वि0स0-वि-बिल/1-49/2011/2011/2011/2011....--------हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2011 (2011 का विधेयक संख्यांक 5) जो आज दिनांक 16 मार्च, 2011 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है ।
आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह, सचिव, हिमाचल प्रदेश विधान सभा। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932 9833 2222011 का विधेयक संख्यांक 5011 का विधेयक संख्यांक 5011 का विधेयक संख्यांक 5011 का विधेयक संख्यांक 5
प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2011 हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2011 हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2011 प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2011 हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के
(विधानसभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 (2010 का अधिनियम संख्यांक 9) का और संशोधन करने के लिए विधेयकविधेयकविधेयकविधेयक।
भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :--
1111.... संक्षिप्त नाम और प्रारम्भसंक्षिप्त नाम और प्रारम्भसंक्षिप्त नाम और प्रारम्भसंक्षिप्त नाम और प्रारम्भ....--------(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) अधिनियम, 2011 है।
(2) यह 22 जनवरी, 2011 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
2222.... धारा 3 का संशोधनधारा 3 का संशोधनधारा 3 का संशोधनधारा 3 का संशोधन....--------हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 (2010 का 9) (जिसे इसमें इसके पश्चात् "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा 3 में,-- (क) उपधारा (3) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः--
''(3) प्रत्येक व्यौहारी जो किसी भी माल को विनिर्माण, प्रसंस्करण, संपरिवर्तन, फुटकर काम, संमजन या माल की पैकिंग के लिए स्थानीय क्षेत्र में लाता है और ऐसा माल मूल्य परिवर्धित कर विक्रयों से अन्यथा राज्य के भीतर विक्रीत किया जाता है या अंतरराज्यिक विक्रय के क्रम में से अन्यथा या भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर निर्यात के क्रम में राज्य से बाहर भेजा जाता है, तो वह इस अधिनियम के अधीन कर के संदाय के लिए दायी होगा।''; और
(ख) उपधारा (4) के खण्ड (iii) के पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :--
''(iii-क) अनुसूची-2 में विनिर्दिष्ट ऐसा माल, जिसे स्थानीय क्षेत्र में प्रवेश के पश्चात् विनिर्माण, प्रसंस्करण, संपरिवर्तन, फुटकर काम, संमजन या माल की पैकिंग के लिए उपयोग में या उपभोग में लाया जाता है और ऐसा माल अन्तरराज्यिक विक्रय के क्रम में या भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर निर्यात के क्रम में, विक्रय द्वारा राज्य से बाहर भेजा जाता है;"।
3333.... नई धारा 6-क का अन्तःस्थापननई धारा 6-क का अन्तःस्थापननई धारा 6-क का अन्तःस्थापननई धारा 6-क का अन्तःस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 6 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः--
"6-क. कर का संदाय और विवरणियॉंँ.--(1) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यौहारी, ऐसे मास के अवसान से पन्द्रह दिन के भीतर और ऐसी रीति में, ऐसी विशिष्टियों से अन्तर्विष्ट जैसी विहित की जाएं, मासिक विवरणी प्रस्तुत करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन विवरणी दाखिल करने से पूर्व व्यौहारी, पूर्ववर्ती पाक्षिक अवधि के लिए पाक्षिक आधार पर देय कर की पूर्ण रकम जमा करेगा और ऐसे कर के संदाय का सबूत निर्धारण प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा ।
(3) यदि व्यौहारी बिना किसी पर्याप्त हेतुक के उपधारा (1) के अधीन मासिक विवरणियांँ प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो वह ऐसी विवरणी को प्रस्तुत करने मेें हुए विलम्ब के लिए दस दिन तक सौ रुपए प्रतिदिन के बराबर की राशि शास्ति स्वरूप संदा करने के लिए दायी होगा, जिसके पश्चात् जब 9834 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932
तक व्यतिक्रम जारी रहता है, शास्ति पांच सौ रूपए प्रतिदिन होगी; परन्तु जहां कोई भी कर संदेय नहीं है, तो ऐसी शास्ति प्रत्येक विवरणी के लिए पांच सौ रुपए से अधिक नहीं होगी ।
(4) यदि व्यौहारी बिना किसी पर्याप्त हेतुक के, उपधारा (2) के उपबन्धों की अपेक्षाओं का अनुपालन करने में असफल रहता है, तो आयुक्त या हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन उसकी सहायता के लिए नियुक्त कोई अन्य व्यक्ति, ऐसे व्यौहारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, उसे देय कर की रकम के पचास प्रतिशत के बराबर की राशि शास्ति स्वरूप संदा करने का निदेश दे सकेगा।"।
4444.... धारा 7 का संशोधनधारा 7 का संशोधनधारा 7 का संशोधनधारा 7 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 7 की उपधारा (1) में विद्यमान खण्ड (ग) के पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः--
"(गग) माल का मूल्य जो विनिर्माण, प्रसंस्करण, संपरिवर्तन, फुटकर काम, संमजन या पैकिंग के पश्चात् अन्तरराज्यिक विक्रय के क्रम में या भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर निर्यात के क्रम में राज्य से बाहर भेजा जाता है;"।
5555.... धारा 8 का संशोधन धारा 8 का संशोधन धारा 8 का संशोधन धारा 8 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 8 में,--
(क) "जब किसी व्यौहारी" शब्दों से पूर्व "(1)" चिन्ह और अंक रखा जाएगा; और
(ख) इस प्रकार पुनः संख्याँकित उपधारा (1) के विद्यमान परन्तुक के पश्चात् निम्नलिखित नई उपधारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः--
"(2) जहां प्रवेश कर, अनुसूची-2 में विनिर्दिष्ट माल के मूल्य पर संदेय हो गया है और ऐसे माल को विनिर्माण, प्रसंस्करण, संपरिवर्तन, फुटकर काम, संमजन या पैकिंग में उपयोग में लाया जाता है और अन्तरराज्यिक विक्रय के द्वारा या भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर निर्यात के क्रम में राज्य से बाहर भेजा जाता है, तो व्यौहारी, राज्य के भीतर या अन्तरराज्यिक विक्रय या भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर निर्यात में किए गए मूल्य परिवर्धित कर विक्रयों के आवर्त के अनुपात में इस अधिनियम के अधीन कर की मुजर्रार (सैट-आफ) का हकदार होगा।"।
6666.... 2011 के अध्यादेश संख्यांक2011 के अध्यादेश संख्यांक2011 के अध्यादेश संख्यांक2011 के अध्यादेश संख्यांक 1 का निरसन और व्यावृत्तियॉंंँ 1 का निरसन और व्यावृत्तियॉंंँ 1 का निरसन और व्यावृत्तियॉंंँ 1 का निरसन और व्यावृत्तियॉंंँ....--------(1) हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) अध्यादेश, 2011 का एतद्द्वारा निरसन किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवार्ई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
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उद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथन
हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 के प्रवर्तन में आने पर व्यौहारियों को विवरणियों के माध्यम से कर जमा करना अनुज्ञात करने और उन्हें कर के दायित्व का मुजर्रार (सैट ऑफ) अनुज्ञात करने के लिए अधिनियम के कतिपय उपबंधों को सरल बनाने की आवश्यकता अनुभव की गई है । बैरियरों पर प्रवेश कर के संग्रहण से बैरियरों पर ट्रैफिक में निश्चित रूप से वृद्धि हुई है, जिस कारण अबाध यातायात में बाधा आ रही है । औद्योगिक निकायों और व्यापारिक समुदायों के विभिन्न संगमों ने भी विवरणियों के माध्यम से उन्हें कर जमा करने को अनुज्ञात करने के लिए अभ्यावेदन किए हैं, क्योंकि उन्हें राज्य में प्रवेश के स्थल अर्थात् बैरियरों पर असुविधाजनक समय के दौरान नकदी ले जाना कठिन होता है । इसके अतिरिक्त विशेषतया विनिर्माण सेक्टर के लिए राज्य में पर्याप्त विपणन अवसर नहीं हैं और इस प्रकार उत्पादित अधिकांश माल को राज्य से बाहर विभिन्न बाजारों में भेजा जाना अपेक्षित होता है, जिससे कड़ी राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932 9835 प्रतिस्पर्धा हो जाती है । इसलिए राज्य में विनिर्मित माल को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने के आशय से और विनिर्माण सेक्टर में उनके अन्य राज्यों में प्रतिपक्षियों के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए, आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवाने हेतु उक्त अधिनियम को संशोधित कर राज्य में किए गए विक्रयों (जहां पर मूल्य परिवर्धित कर राज्य को प्रोद्भूत होता है) अन्तर्राज्यीय विक्रय (जहां राज्य को एक प्रतिशत केन्द्रीय विक्रय कर प्रोद्भूत होता है) राज्य क्षेत्र से बाहर निर्यात् (निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने के लिए) के आनुपातिक मुजर्रार (सैट-ऑफ) के लिए विशेष उपबंध करने का विनिश्चय किया गया है।
क्योंकि विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 में संशोधन किया जाना अनिवार्य हो गया था, इसलिए, हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल द्वारा, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) अध्यादेश, 2011 (2011 का हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 1) 22 जनवरी, 2011 को प्रख्यापित किया गया था, जिसे राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में 22 जनवरी, 2011 को प्रकाशित किया गया था । अब उपरोक्त अध्यादेश को नियमित अधिनियमिति द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना अपेक्षित है।
यह विधेयक उपर्युक्त अध्यादेश को बिना किसी उपान्तरण के प्रतिस्थापित करने के लिए है। (प्रेम कुमार धूमल)(प्रेम कुमार धूमल)(प्रेम कुमार धूमल)(प्रेम कुमार धूमल) मुख्य मन्त्री । शिमला :
तारीख :.................., 2011
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वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन
विधेयक के उपबन्ध अधिनियमित होने पर विद्यमान सरकारी तन्त्र के माध्यम से प्रवर्तित किए जाने हैं और इससे कोई अतिरिक्त व्यय अन्तर्वलित नहीं होगा ।
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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
--शून्य--
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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 5 of 2011
THE HIMACHAL PRADESH TAX ON ENTRY OF GOODS INTO LOCAL AREA
(AMENDMENT) BILL, 2011
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
9836 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932
A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 (Act
No. 9 of 2010).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-second Year
of the Republic of India as follows:—
1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area (Amendment) Act, 2011.
(2) It shall be deemed to have come into force on 22nd day of January, 2011.
2. Amendment of section 3.—In section 3 of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010, (9 of 2010)(hereinafter referred to as the "principal Act"),—
(a) for sub-section (3), the following sub-section shall be substituted, namely:—
"(3) Every dealer who brings any goods into local area for use in manufacturing, processing, conversion, job-work, assembling or packing of goods and such goods sold inside the State otherwise than Value Added Tax sales or sent outside the State otherwise than in the course of inter-state sale or in the course of export out of territory of India, shall be liable to pay tax under this Act."; and
(b) in sub-section (4), after clause (iii), the following new clause shall be inserted, namely:—
"(iii-a) in respect of goods specified in Schedule–II, which after entry into local area are used or consumed in manufacturing, processing, conversion, job-work, assembling or packing of goods and such goods are sent outside the State by way of sale in the course of inter-state sale or in the course of export out of territory of India;".
3. Insertion of new section 6-A.—After section 6 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"6-A. Payment of tax and returns.— (1) Every registered dealer shall furnish monthly return within 15 days from the expiry of such month and in such manner containing such particular as may be prescribed.
(2) Before filing of return under sub-section (1), a dealer shall deposit full amount of tax due on fortnightly basis for the period of preceding fortnight and shall furnish the proof of payment of such tax to the Assessing Authority.
(3) If a dealer fails without sufficient cause to furnish the monthly returns under sub-section (1), he shall be liable to pay, by way of penalty, a sum equal to Rs. 100 per day for delay in furnishing such return upto ten days, where after the penalty shall be Rs. 500 per day till the default continues; provided that where no tax is payable, such penalty shall not exceed Rs. 500 for every return.
(4) If a dealer fails without sufficient cause to comply with the requirements of provisions of sub-section (2), the Commissioner or any other person appointed to assist him under sub-section (1) राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932 9837 of section 3 of Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005, may, after giving such dealer a reasonable opportunity of being heard, direct him to pay, by way of penalty, a sum equal to 50 percentum of the amount of tax due.".
4. Amendment of section 7.—In section 7 of the principal Act, in sub-section (1), after existing clause (c), the following new clause shall be inserted, namely:—
"(cc) the value of goods which after manufacturing, processing, conversion, job-work, assembling or packing are sent outside the State in the course of inter-state sale or in the course of export out of the territory of India;".
5. Amendment of section 8.—In section 8 of the principal Act,—
(a) before the words "Where entry tax", the signs and figure "(1)" shall be inserted; and (b) after existing proviso to sub-section (1) as so renumbered, the following new sub- section shall be inserted, namely:—
"(2) where entry tax has become payable on the value of goods specified in Schedule-II and such goods are used in manufacture, processing, conversion, job- work, assembling or packing and sent outside the State by way of inter-state sale or in the course of export out of territory of India, the dealer shall be entitled to a set off of tax under this Act proportionate to the turnover of Value Added Tax sales made within State or inter-state sale or export out of territory of India.".
6. Repeal of Ordinanance No. 1 of 2011 and savings.—(1) The Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area (Amendment) Ordinance, 2011 is hereby repealed.
(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act. ___________
STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
Since, coming into operation of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010, necessity has been felt to streamline certain provisions of the Act by allowing the dealers to deposit tax by way of returns and allow them set off of tax. The collection of entry tax at barrier has definitely added to traffic congestion at the barrier thereby impeding free flow of traffic. Various Associations of Industrial bodies and trading communities has also represented to allow them to deposit tax by way of returns as it is difficult to carry cash during odd hours up to the point of entry in the State i.e. barriers. Further, manufacturing sector, in particular, does not have sufficient marketing opportunities within State and most of the goods so produced are required to be sent to various markets outside the State which make competition very tough. Therefore, in order to keep goods manufactured in the State competitive and to provide necessary edge to manufacturing sector to compete with their counter parts in other States, it has been decided to make specific provisions of set off proportionate to the sales made within State (where VAT accrues to the State), inter-State sale (where 1% CST accrues to the State) and export out of the territory of India (to keep exports competitive) by amending the Act ibid.
Since, the Legislative Assembly was not in session and amendments in the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 had to be made urgently, therefore, the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area (Amendment) Ordinance, 2011 (H.P.
9838 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 मार्च, 2011/26 फाल्गुन, 1932
Ordinance No. 1 of 2011) was promulgated under clause (1) of article 213 of the Constitution of India by the Governor of Himachal Pradesh on 22nd January, 2011, which was published in the Rajpatra, Himachal Pradesh on 22nd January, 2011. Now, the said Ordinance is required to be replaced by a regular enactment.
This Bill seeks to replace the said Ordinance without modification.
(PREM KUMAR DHUMAL) Chief Minister.
SHIMLA: The …………2011.
___________
FINANCIAL MEMORANDUM
The provisions of the Bill when enacted are to be enforced through the existing Government machinery and no additional expenditure will be involved.
___________
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
—Nil—
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नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित