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25 Qjojh 2013
सं0 22/नि0सि0(पट0)-3-07/2005/260—श्री रियाज अहमद आतिश, तत्0 कार्यपालक अभियन्ता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला, नवादा/तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत) के विरूद्ध उक्त पदस्थापन अवधि में विभिन्न आरोपों के संबंध में तीन अलग अलग विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसका सार निम्नवत् हैः-
¼d½ lafpdk la0&22@fu0fla0¼iV0½03&07@2005-श्री आतिश के विरूद्व कार्यपालक अभियन्ता, फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदला, (नवादा) में पदस्थापन काल से संबंधित श्री रामदेव प्रसाद सिंह, सहायक अभियन्ता, सेवानिवृत से प्राप्त परिवाद पत्र की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिए श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयीः-
(1) व्यक्तिगत दूरभाष सं0 25090 के कॅाल शुल्क 5,934 (पॅाच हजार नौ सौ चौतीस रुपये) का भुगतान सरकारी मद से करना।
(ii) अधीनस्थ सहायक अभियन्ता के एक ही वेतन को दो बार निकासी करने के फलस्वरूप उस अधिकारी विशेष के सामान्य भविष्य निधि मद में 660 (छः सौ साठ रू0) की कटौती राशि करवाकर सरकार को इतनी ही राशि का वित्तीय घाटा लगवाना।
(iii) अनुसेवकों को वर्दी आपूर्ति में घोटाला करना। दस (10) व्यक्तियों को 2,817 (दो हजार हजार आठ सौ सतरह रू0) की देय वर्दी आपूर्ति पर 10,000 (दस हजार) रु0 का भुगतान दिखाना। इस तरह सरकार को 7,183 (सात हजार एक सौ तिरासी रू0) की वित्तीय क्षति पहुॅचाना।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड हेतु श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव की विभागीय समीक्षा की गयी एवं उक्त तीनों आरोपों में से मात्र दो आरोप सं0-(i) एवं (iii) प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए पांच (5) प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 5 माच- 2013 ¼[k½ lafpdk la0&22@fu0fla0¼iV0½03&09@2006&श्री आतिश के विरूद्व दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बांध एवं बादलगढ़ (रोहतास) स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में कतिपय अनियमितता बरतने का आरोप है। तत्संबंधी प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री आतिश के विरुद्व निम्नलिखित आरोप प्रमाणित पाये गयेः-
(i) वर्ष 2003-04 में दुर्गावर्ती परियोजनान्तर्गत भीतरीबांध एवं बादलगढ़ रोहतास स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन हेतु निविदाओं के निस्तार में अनियमितता बरतने, दर निर्धारण में गड़बड़ी करने एवं विभागीय क्रय समिति के समक्ष पूर्ण तथ्यों को नहीं रखने के पीछे सरकार को वित्तीय क्षति पहुचाने की आपराधिक मंशा थी रू0 4,99,777 के स्थान पर रू0 6,55,544 प्रति सेट की दर इन्होंने अनुमोदित किया एवं अतिरेक भुगतान कराया।
(ii) जॅाच पदाधिकारी का स्पष्ट मंतव्य है कि दिनांक 17.12.03 को आयोजित क्रय समिति के लिए तैयार संलेख में पूर्व के आमंत्रित दो निविदाओं के दर को उद्वत नहीं करना एवं मौखिक रूप से इसकी जानकारी क्रय समिति को नहीं देना, इनके आपराधिक मंशा को प्रमाणित करता है। इसका अभिप्राय आपूर्तिकत्र्ता मेसर्स एक्सेल को आर्थिक लाभ पहुॅचाना था। इस कारण विभाग को प्रति सेट 1,55,000 रू0 की दर से दो हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति पर 3,10,000 (तीन लाख दस हजार) रू0 का घाटा विभाग को उठाना पड़ा।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभाग द्वारा दस (10) वर्षो तक शत प्रतिशत पेंशन के भुगतान पर रोक का दण्ड प्रस्तावित किया गया।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण पृच्छा के उतर से असहमत होते हुए पूर्व के प्रस्तावित दण्ड को यथावत् रखने का निर्णय लिया गया।
¼x½ lafpdk la0&22@fu0fla0¼iV0½03&11@2005&श्री आतिश, तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन को उनके पदस्थापन अवधि में निम्न आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी'ः-
(i) मे0 केशरी वायर प्रोडक्ट्स प्रा0 लि0, मोगलपुरा ,पटना सिटी को वर्ष 2004 में विभिन्न प्रमण्डलों के लिए बी0 ए0 बायर आपूर्ति करने का आदेश दिया गया जिसका क्रयादेश सं0-44 दिनांक 31.1.04 था, जिसमें जल पथ प्रमण्डल, गया के लिए 27 मे0टन बी0 ए0 बायर की आपूर्ति 30,650 रू0 प्रति मे0टन की दर से करना था। उनके द्वारा इस क्रयादेश को पत्रांक 626 दिनांक 24.9.09 द्वारा अांशिक संशोधन करते हुए 17.30 मे0 टन बी0 ए0 बायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर में 4 प्रतिशत अधिक एक्साइज ड्यूटी की वृद्वि करके (अर्थात रू0 1,226 प्रति मे0 टन) कुल रू0 21,209.80 (इक्कीस हजार दो सौ नौ रू. अस्सी पै0) का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया, जो नियमानुकूल नहीं है।
(ii) उसी फर्म को वर्ष 2004 में क्रयादेश सं0-160 दिनांक 15.6.04 द्वारा शीर्ष कार्य प्रमण्डल, वीरपुर एवं गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, दीघा को 140 मे0 टन बी0 ए0 वायर आपूर्ति करने का क्रयादेश दिया गया जिसके लिए स्वीकृत दर 30,500 रू0 प्रति मे0 टन था। इस क्रयादेश को क्रयादेश सं0-248 दिनांक 3.9.04 द्वारा संशोधित करते हुए 134.63 मे0 टन बी0 ए0 वायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर प्रति मे0 टन में 4 प्रतिशत अधिक एक्साइज ड्यूटी के वृद्वि करके कुल 1,64,248 रू0 का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया जो नियमानुकूल नहीं है। इस प्रकार कुल 1,85,458.40 रू0 (एक लाख पचासी हजार चार सौ अठावन रू0 चालीस पै0) अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश उनके द्वारा दिया गया, जिसके लिए वे दोषी है।
जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा के जबाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण पृच्छा के उतर से असहमत होते हुए कुल 1,80,937=62 रू0 (एक लाख अस्सी हजार नौ सौ सैतीस रू0 बासठ पैसे) की सरकारी क्षति की वसूली तक पेंशन से 50 प्रतिशत की राशि की वसूली तथा 5 वर्ष तक 20 प्रतिशत पेंशन पर रोक एवं एक वर्ष तक 5 प्रतिशत पेंशन पर रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
(2) उपर्युक्त तीनों संचिकाओं में अलग अलग विभागीय कार्यवाहियों के प्रतिफलों को एक साथ समेकित कर विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी और समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री आतिश द्वारा अपने सेवाकाल में मनमाने ढंग से विभागीय कार्यो का सम्पादन किया जाता रहा है एवं सरकार को इनके कृत्यों से वित्तीय क्षति पहुॅची है जबकि इन्हें समय रहते हुए तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव द्वारा आगाह भी किया गया था।
(3) उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रियाज अहमद आतिश के विरूद्व बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में अन्तर्निहित प्रावधानों के अन्तर्गत संचालित विभागीय कार्यवाही एवं पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त श्री आतिश के विरूद्व सभी आरोपों को समेकित करते हुए ''आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस (10) वर्षो तक रोक'' का दंड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। विभागीय अधिसूचना सं0-1152 दिनांक 09.09.11 द्वारा सरकार का उक्त निर्णय श्री रियाज अहमद आतिश, सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता को संसूचित किया गया।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 5 माच- 2013 (4) उक्त दंड के विरूद्व श्री आतिश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में CWJC No-18651/2011 दायर किया गया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 16.02.12 को न्याय निर्णय पारित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने न्यायादेश में अंकित किया है कि :-
"Considering all aspects of the matter, the Court is of the considered opinion that even if there is a misconduct on the part of the petitioner causing pecuniary loss to the Government or that it may not necessarily relate to the extent of pecuniary loss only, the nature of the punishment raises a serious issue with regard to the fundamental rights of the petitioner under Article 21 of the Constitution of India. He cannot be visited with punishment of a nature which virtually takes away his right to life. In his days of superannuation, with no source of income, he undoubtedly stands deprived of his life and liberty without any pension. It can hardly be a palliative for him that it was to be so for ten years only. Those ten years may prove so arduous that he may not survive to see the period thereafter.
न्यायालय ने न्यायादेश के अंतिम पारा में यह अंकित किया है :- The Court finds it difficult to accept the submission on behalf of the petitioner that pending such a fresh decision by the respondents, they may be directed at least to pay requisite pension to him for survival. To do so by the Court at this stage may amount to Pre- judging issues to the prejudice of the respondents. Liberty is given to the petitioner that he may seek such interim relief before the respondents themselves and which the Court in fairness expects that respondents as a welfare State shall take a decision forthwith without any unreasonable delay and a final decision on the quantum within a maximum period of four months from the date of receipt and/or production of a copy of this order.
(5). माननीय उच्च न्यायालय के निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा अपना अभ्यावेदन विभाग में दिनांक 12.03.12 को समर्पित किया गया। श्री आतिश से प्राप्त अभ्यावेदन के आलोक में उन्हें दिनांक 12.04.12 को अपना पक्ष रखने का निदेश दिया गया। निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा निर्धारित तिथि को उपस्थित होकर निम्न तथ्य रखा गया :-
(i) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय में उल्लेखित माननीय उच्चतम न्यायालय के न्याय निर्णय से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्व आरोप साबित होने का कोई ठोस वैद्विक आधार नहीं बनता है।
(ii) तीनों आरोपों पर अलग-अलग दंडादेश की प्रकृति, समय एवं 100 प्रतिशत पेंशन पर 10 साल तक रोक के परिमाण का प्रश्न पर माननीय उच्च न्यायालय का निदेश दिनांक 16.02.12 द्वारा उनके गुण दोष पर पुनर्विचार करने का अनुरोध है। यदि सरकार को वितीय क्षति हुई है तो पेंशन से उस घाटे को आसान किस्तों में वसूला जा सकता है। (iii) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 41 की ओर माननीय उच्च न्यायालय ने ''जीने का अधिकार'' एवं ''सहायता पाने का अधिकार'' जो जीवन की संध्या में बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशकत्ता के समय 10 साल तक 100 प्रतिशत पेंशन पर रोक ''जीने का अधिकार'' के आत्मा के खिलाफ है जो संविधान की धारा अनुछेद 21 में प्रावधानों को वंचित करता है एवं न्यायालय के आंतरिक चेतना को गंभीर रूप से झिझोर कर दुखित करता है। (iv) जीवन की संध्या में शान्तिपूर्ण समय अन्य राजपत्रित पदाधिकारियों की तरह बिताने के लिए आदेश सं0-1152 दिनांक 09.09.2011 पर रोक लगाया जाय या तत्काल 95 प्रतिशत पेंशन पर से रोक हटाया जाय जबतक पुनर्विचार/पुनर्समीक्षा याचिका आवेदन पर सेवा के अधिकार के तहत समय रहते अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता है। (6). श्री आतिश द्वारा रखे गये तथ्यों के आलोक में मामले की पुनः समीक्षा की गई तथा समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :-
(क) श्री आतिश द्वारा कार्यपालक अभियन्ता, फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदला, नवादा में पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता से राज्य सरकार को 13,200 रू0 की क्षति हुई।
(ख) श्री आतिश द्वारा दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बांध एवं बादलगढ़ रोहतास स्थल पर दो अद्द हाई मास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में बरती गई अनियमितता से राज्य सरकार को कुल 3,10,000 की क्षति हुई।
(ग) श्री आतिश द्वारा निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन के रूप में पदस्थापन अवधि में बरती गई अनियमितता से राज्य सरकार को कुल 1.80,937.62 रू0 की क्षति हुई।
(7). इस प्रकार श्री आतिश के कार्यकलाप से कुल 5.04 लाख रू0 की क्षति राज्य सरकार को हुई। समीक्षा में यह भी पाया गया कि शत प्रतिशत पेंशन रोकने से सेवानिवृत कर्मी को जिन्दगी जीने में कठिनाई होगी। उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी न्याय निर्णय में 100 प्रतिशत पेंशन रोकने से जीने के अधिकार से वंचित रखने की बात कही गई है।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 5 माच- 2013 (8). उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सरकार द्वारा विचारोपरान्त आवेदक के पक्ष में असीम अनुकम्पा दर्शाते हुए पूर्व में अधिसूचना सं0 1152 दिनांक 9.9.11 द्वारा संसूचित ''आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस वर्षो तक रोक'' दंड को संशोधित करते हुए निम्न दंड देने का निर्णय लिया गया हैः-
''पचास प्रतिशत पेंशन पर दस वर्षो तक रोक'' (9). अतः उक्त निर्णय के आलोक में अधिसूचना सं0-1152 दिनांक 09.09.11 द्वारा संसूचित ''आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस वर्षो तक रोक'' दंड को संशोधित करते हुए उक्त दंड के बदले निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-
''पचास प्रतिशत पेंशन पर दस वर्षो तक रोक'' (10). उक्त दंड श्री रियाज अहमद आतिश सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम कुमार सिंह, सरकार के विशेष सचिव।
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अधी/क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 184-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in