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la0 926—पटना सिटी में स्थित छोटी पटन देवी मंदिर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद में निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 710 है। इसका निबंधन 1958 में हुआ था। यह प्राचीन सिद्ध शक्ति पीठ मन्दिर है। इस मंदिर के सम्यक् संचालन के लिए धार्मिक न्यास पर्षद की अधिसूचना ज्ञापांक 804 दिनांक 08.07.2008 द्वारा एक न्यास समिति का गठन 05 वर्षो के लिए किया गया था। उक्त न्यास समिति का कार्यकाल पूरा हो गया है। इस न्यास के सेवायत पद के लिए श्री सीताराम पाण्डेय एवं श्री अभिषेक अनन्त द्विवेदी के बीच अनेक विवाद चलते रहे हैं। पर्षदीय अधिसूचना संख्या 182 दिनांक 07.04.1994 द्वारा गठित न्यास समिति के विरूद्ध मो0 रामपरी देवी ने मिस0 केस नं0 47/1994 दायर किया था। मो0 रामपरी देवी का देहान्त दिनांक 10.12.2002 को हो गया। तत्पष्चात् श्री अभिषेक अनन्त द्विवेदी ने उनका नाती होने का दावा करते हुए उक्त वाद में स्थानापन्न आवेदन (substitution petition) दाखिल किया। पटना के विद्वान जिला न्यायाधीष ने दिनांक 06.10.2012 को अपने फैसले में इस मन्दिर पर श्री अभिषेक अनन्त द्विवेदी के वाद को खारिज करते हुए , इस मन्दिर पर उनका कोई दावा नहीं माना है। जिला जज के फैसले का प्रभावी अंष निम्नलिखित हैः-
"6. After hearing the learned counsels for the parties and going through the record as well as the various documents available on the record I am of the view that the substitution petition filed by Abhishek Anant Dwivedi is not maintainable and liable to be rejected because he is claiming the right of sebaitship on the basis of a unprobated will which was never brought before the court. Further the right of sebatiship is not transferable. Further in view of the fact that the old committee which was the subject matter of challenged misc. Case has already been dissolved and a New Committee has been constituted in place of old one for which another Misc. Case has already been instituted. The present Misc. Case has become infructous and the same is accordingly dismissed as such."2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 11 िसत+बर 2013 इस प्रकार श्री अभिषेक अनन्त द्विवेदी का सेवायत होने का कोई दावा नहीं बनता है। मंदिर की व्यवस्था संतोषप्रद नहीं है। इसकी आय व्यय का सम्यक् संघारण नहीं होता है तथा मंदिर का विकास अवरूद्ध है। अतः इस पौराणिक एवं प्रसिद्ध मंदिर के सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु एक योजना का निरूपण एवं उसे मूर्त्त रूप देने के लिए न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है। अतएव बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम,1950 की धारा-32 में न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार, जो धार्मिक न्यास की उपविधि संख्या 43(द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी मन्दिर की परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
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सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी 1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी मंदिर न्यास योजना मंदिर न्यास योजना मंदिर न्यास योजना मंदिर न्यास योजना '' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' सिद्ध शक्ति सिद्ध शक्ति सिद्ध शक्ति सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी मंदिर न्यास समितिपीठ छोटी पटन देवी मंदिर न्यास समितिपीठ छोटी पटन देवी मंदिर न्यास समितिपीठ छोटी पटन देवी मंदिर न्यास समिति'' होगा ।
2. छोटी पटन देवी मन्दिर न्यास एवं इसकी समस्त चल-अचल सम्पत्ति तथा आय के प्रबंधन, संचालन एवं प्रषासन का अधिकार सिद्ध शक्ति पीठ छोटी पटन देवी मंदिर न्यास समिति में निहित होगा ।
3. इस न्यास समिति का प्रमुख दायित्व मंदिर में परंपरागत पूजा-अर्चना, राग-भोग, उत्सव-समैया आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक् प्रबंधन सुनिष्चित करना होगा।
4. पूजा अर्चना, राग-भोग आदि का कार्य श्री सीताराम पाण्डेय पूर्ववत् करते किन्तु यह विधिवत् हो और भक्तों को कोई असुविधा न हो, यह सुनिष्चित करने का दायित्व न्यास समिति की होगी ।
5. मंदिर परिसर में भेंट पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की समस्त नगदी राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति के दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर पंजी में प्रविष्टि के बाद बैंक खाता में जमा की जायेगी ।
6. मन्दिर में प्राप्त होने वाले सभी चन्दा, चढ़ावा, उपहारों के लिए दाताओं को उचित पावती रसीद दी जायेगी और उन्हें सत्यापित पंजी में प्रविष्टि कर उसे प्रदर्ष के रूप में रखा जायेगा ।
7. मन्दिर परिसर में होने वाले संस्कार के लिए निर्धारित राषि ही ली जायेगी, जिसका सम्यक् लेखा संघारण किया जायेगा।
8. न्यास समिति न्यास के आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखेगी। 9. मन्दिर में आने वाले आस्थावान भक्तों में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा। दुर्गापूजा एवं अन्य विषेष अवसरों पर भक्तों की सुविधा एवं सुरक्षा का विषेष ख्याल रखा जायेगा।
10. न्यास की समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा की जायेगी और उसका संचालन समिति के अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो के हस्ताक्षर से होगा।
11. न्यास समिति मन्दिर परिसर को अतिक्रमणमुक्त एवं किसी का निजी कब्जा न हो, यह सुनिष्चित करेगी।
12. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए वार्षिक आय-व्यय विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी । 13. जिन नियमों का उल्लेख इस योजना में नहीं है, और न्यास हित में आवष्यक समझा जा रहा हो, तो न्यास समिति विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के अनुमोदन के बाद इसे लागू करेगी।
14. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक बलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे। सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्तरूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष लेखा का सम्यक् संघारण करने के लिए जिम्मेवार होंगे।
15. न्यास-समिति की बैठक सामान्यतः मन्दिर परिसर में होगी। यह बैठक प्रत्येक तिमाही में कम-से-कम एक बार अवष्य होगी। यदि किसी तिमाही में बैठक नहीं हो पाती है, तो सचिव अध्यक्ष से पुनः अनुरोध करेंगे और दूसरी तिमाही में भी एक महीने तक बैठक नहीं बुलायी जाती है, तो सचिव उपाध्यक्ष की अनुमति से बैठक बुलायेगे। यदि उपाध्यक्ष की भी अनुमति नहीं प्राप्त होती है, तो पाँच सदस्यों के हस्ताक्षर से अध्यक्ष-सहित सभी सदस्यों को सूचित कर बैठक बुला सकेंगे।
16. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष उनके अधिकार , कर्त्तव्य एवं दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा सचिव की अनुपस्थिति में सह-सचिव उनका कार्य-भार सभालेंगे।
17. इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्द्धन अथवा संषोधन का अधिकार पर्षद में निहित रहेगा । 18. इस शक्ति-पीठ का माहात्म्य एवं गरिमा अतीत में गौरवपूर्ण होने के कारण न्यास-समिति इसके गौरव को पुनरूज्जीवित करने के लिए हर सार्थक प्रयास करेंगी।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी - अध्यक्ष,3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 11 िसत+बर 2013 2. श्री ब्रह्मानन्द चतुर्वेदी, प्रधानाचार्य, सेठ निरंजन दास मुरारका संस्कृत महाविद्यालय, चौक, पटना सिटी - सचिव,
3. श्री ज्ञानवर्द्धन मिश्र, डा0 बी0डी0 मिश्र रोड, पटना सिटी - उपाध्यक्ष 4. श्रीमती मीना गुप्ता, पूर्वी नन्दगोला, पटना सिटी - सह-सचिव 5. श्री ओम प्रकाष जायसवाल, हाजीगंज, पटना सिटी - कोषाध्यक्ष 6. श्री मिश्री लाल यादव, दीरा, पटना सिटी - सदस्य 7. श्री राय अतुल कृष्ण, वरिष्ठ पत्रकार, पटना सिटी - सदस्य 8. श्री प्रह्लाद प्रसाद, मंगल तालाब,पटना सिटी - सदस्य 9. श्री प्रदीप जैन, बेगमपुर, पटना सिटी - सदस्य 10. पं0 रामनरेष शास्त्री, उद्भट संस्कृत विद्वान, जंगली प्रसाद लेन, पटना सिटी - सदस्य यह योजना दिनांक 30 अगस्त, 2013 से प्रभावी होगी और इसका कार्यकाल 05 (पांच) वर्षों का होगा । निवर्तमान न्यास-समिति के कार्यकाल का अवसान होने एवं नया कार्यकाल प्रारम्भ होने की अवधि को विनयमित किया जाता है। आदेश से,आदेश से,आदेश से,आदेश से,/-/-/-/- किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल, अध्यक्ष।अध्यक्ष।अध्यक्ष।अध्यक्ष।
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 715-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in