िनबंधन सं(cid:26)या पी0ट+0-40 िनबंधन सं(cid:26)या (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत 7777 अमहायणअमहायणअमहायणअमहायण 1936 1936 1936 1936 ((((शशशश0000))))
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पटनापटनापटनापटना, , , , शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार, , , , 28282828 नव(बनव(बनव(बनव(बरररर 2014201420142014 सं0 नि0वि0निगम/बोर्ड (मु0नि0पदा0
नि0वि0निगम/बोर्ड (मु0नि0पदा0)-12/2014—5765
निगरानी विभाग, सूचना भवन, बिहार, पटना ------- संकल्प 27 नवम्बर 2014 पर नियंत्रण हेतु राज्य में विभिन्न कानूनों के अन्तर्गत गठित बडे़-बड़े संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा विषयः-भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हेतु राज्य में विभिन्न कानूनों के अन्तर्गत गठित बडे़-बड़े संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा पर नियंत्रण हेतु राज्य में विभिन्न कानूनों के अन्तर्गत गठित बडे़-बड़े संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा बिहार राज्य में अवस्थित निम्नांकित संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों
संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों में मुख्य निगरानी स्वशासी निकायों में मुख्य निगरानी पदाधिकारी की नियुक्ति के संबंध में। स्वशासी निकायों में मुख्य निगरानी पदाधिकारी की नियुक्ति के संबंध में। विदित हो कि राज्य में सुशासन के कार्यक्रम के तहत भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिये ''जीरो टॉलरेंस'' विदित हो कि राज्य में सुशासन के कार्यक्रम के तहत भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिय विदित हो कि राज्य में सुशासन के कार्यक्रम के तहत भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिय की नीति अपनायी गयी है। इस नीति को मूर्त रूप देने के लिये प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर निरोधात्मक कार्रवाई के की नीति अपनायी गयी है। इस नीति को मूर्त रूप देने के लिये प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर निरोधात्मक कार्रवाई के की नीति अपनायी गयी है। इस नीति को मूर्त रूप देने के लिये प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर निरोधात्मक कार्रवाई के साथ भ्रष्ट लोक सेवकों के विरूद्ध प्राप्त परिवाद पत्रों पर त्वरित कार्रवाई की जानी है। भ्रष्टाचार जैसे व्याधि के निदान साथ भ्रष्ट लोक सेवकों के विरूद्ध प्राप्त परिवाद पत्रों पर त्वरित कार्रवाई की जानी है। भ्रष्टाचार जैसे व्याधि के निदान साथ भ्रष्ट लोक सेवकों के विरूद्ध प्राप्त परिवाद पत्रों पर त्वरित कार्रवाई की जानी है। भ्रष्टाचार जैसे व्याधि के निदान ग के प्रयासों को सफल बनाने में प्रशासी विभागों की अहम भूमिका है। अतः प्रशासी विभागों के ग के प्रयासों को सफल बनाने में प्रशासी विभागों की अहम भूमिका है। अतः प्रशासी विभागों के हेतु निगरानी विभाग के प्रयासों को सफल बनाने में प्रशासी विभागों की अहम भूमिका है। अतः प्रशासी विभागों के अधीन संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों में निगरानी कोषांगों का गठन कर उसमें मुख्य निगरानी अधीन संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों में निगरानी कोषांगों का गठन कर उसमें मुख्य निगरानी अधीन संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों में निगरानी कोषांगों का गठन कर उसमें मुख्य निगरानी पदाधिकरी की नियुक्ति एवं उन्हें सौंपे जाने वाले दाि यत्वों के संबंध में प्रधान सचिव, निगरानी विभाग के नेतृत्व में प्रधान पदाधिकरी की नियुक्ति एवं उन्हें सौंपे जाने वाले दायित्वों के संबंध में प्रधान सचिव, निगरानी विभाग के नेतृत्व में प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग एवं सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के साथ की गयी बैठक में दिये गये सुझावों सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग एवं सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के साथ की गयी बैठक में दिये गये सुझावों सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग एवं सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के साथ की गयी बैठक में दिये गये सुझावों के आलोक में राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि- के आलोक में राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि- 1. बिहार राज्य में अवस्थित निम्नांकित पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति/नियुक्ति हेतु अग्रतर कार्रवाई किया जायः- पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति/नियुक्ति हेतु अग्रतर कार्रवाई किया जायः- (i) बिहार राज्य पावर (होल्डिंग) कम्पनी लि0 बिहार राज्य पावर (होल्डिंग) कम्पनी लि0 (ii) दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कम्पनी दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कम्पनी (iii) उत्तर बिहार विद्युत वितरण कम्पनी उत्तर बिहार विद्युत वितरण कम्पनी (iv) बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कम्पनी बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कम्पनी (v) बिहार राज्य संचरण कंपनी बिहार राज्य संचरण कंपनी (vi) बिहार राज्य पुल निर्माण निगम बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (vii) बिहार स्टेट रोड डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0 बिहार स्टेट रोड डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0 (viii) ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (ix) बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 22228888 नव(बनव(बनव(बनव(बर र र र 2014201420142014 (x) बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्त्ति निगम (xi) राज्य स्वास्थ्य समिति (xii) बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लि0 (वुडको) (xiii) बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (xiv) बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लि0 (बेल्ट्रॉन) (xv) बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लि0 (xvi) बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम (xvii) बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम (xviii) बिहार राज्य शिक्षा आधारभूत संरचना विकास निगम (xix) बिहार शिक्षा परियोजना (xx) बिहार वियर हाउसिंग कॉरपोरेशन लि0 2. मुख्य निगरानी पदाधिकारी का पद सृजन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया :- (क) संबंधित संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों द्वारा प्रशासी विभाग के अनुमति से मुख्य निगरानी पदाधिकारी के पद का सृजन तथा Suporting Staff एवं अन्य कार्यालय सुविधा की व्यवस्था किया जायेगा। (ख) मुख्य निगरानी पदाधिकारी संयुक्त सचिव या उनके समकक्ष पद के स्तर के होंगे। (ग) सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उक्त पद पर नियुक्त/पदस्थापित करने हेतु योग्य एवं इच्छुक पदाधिकारियों से आवेदन पत्र आमंत्रित किया जायेगा। उनके द्वारा पैनल तैयार कर अनुशंसित पदाधिकारी की सेवा इतिहास एवं वार्षिक गोपनीय चारित्री निगरानी विभाग को उपलब्ध करायेंगे। (घ) संबंधित पैनल एक वर्ष के लिए लागू रहेगा। (ङ) निगरानी विभाग द्वारा उक्त पैनल में से नाम चयन कर संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों में नियुक्ति हेतु भेजी जायेगी। (च) संस्थान, निगम, पर्षद तथा स्वशासी निकाय अनुशंसित पदाधिकारी को मुख्य निगरानी पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन/प्रतिनियुक्ति की कार्रवाई करेगा। 3. मुख्य निगरानी पदाधिकारी का सेवा शर्त्त :- (क) मुख्य निगरानी पदाधिकारी के कार्यकाल की सामान्य अवधि तीन वर्षों की होगी। निगरानी विभाग का अनुमोदन प्राप्त कर दो वर्षों की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है। (ख) मुख्य निगरानी पदाधिकारी को आवश्यकतानुसार विशेष भत्ता एवं अन्य सुविधाएँ देने पर विचार संबंधित संगठन करेगा। (ग) पदस्थापन/प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने पर पैतृक विभाग द्वारा उनसे विकल्प पूछकर यथासंभव पदस्थापन की कार्रवाई की जायेगी। 4. मुख्य निगरानी पदाधिकारी की भूमिका और कार्य :- (क) मुख्य निगरानी पदाधिकारी सर्वाजनिक क्षेत्र के संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों के मुख्य कार्यपालक के विशेष सलाहकार/विशेष सहायक के रूप में कार्य करेंगे एवं निगरानी से संबंधित सभी मामलों की सूचना सीधे उन्हें देंगे। (ख) मुख्य निगरानी पदाधिकारी संबंधित संगठन का निगरानी कोषांग के प्रमुख होंगे एवं अपने संगठन तथा निगरानी विभाग के बीच कड़ी का कार्य करेंगे। (ग) मुख्य निगरानी पदाधिकारी द्वारा निष्पादित किये जाने वाले निगरानी कार्य व्यापक है और उनमें उसके संगठन के कर्मचारियों/पदाधिकारियों द्वारा किये गये या किये जाने की संभावना वाले भ्रष्ट कार्यों के बारे में आसूचना एकत्र करने, उसके सूचित किये गये आरोपों की जाँच करने या जाँच करवाने, संबंधित अनुशासनिक प्राधिकारी के पुनः विचारार्थ जाँच प्रतिवेदन को तैयार करना, जहाँ आवश्यक हो मामले की सलाह के लिए निगरानी विभाग को भेजना, अनुचित पद्धतियों/अवचारों को रोकने के लिए निवारक उपाय भी करना शामिल है। इस प्रकार मुख्य निगरानी पदाधिकारी के कार्यों को निम्नांकित तीन भाग में बांटा जा सकता है :- (अ) {निवारक सर्त्तकता (Preventive Vigilance)} (ब) {दंडात्मक सर्त्तकता (Punitive Vigilance)} (स) {(निगरानी एव संसूचन सर्त्तकता) (Surveillance Vigilance)} यद्यपि अवचार और अन्य कदाचार के लिए ''निगरानी'' और ''दंडात्मक कार्रवाई'' निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, तथापि मुख्य निगरानी पदाधिकारी द्वारा किये जाने वाले ''निवारक उपाय'' अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे निगरानी मामलों की संख्या में काफी कमी आ सकती है। इस प्रकार मुख्य निगरानी पदाधिकारी की भूमिका मुख्य रूप से निवारक होनी चाहिए।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 22228888 नव(बनव(बनव(बनव(बर र र र 2014201420142014
(अ) {निवारक सर्त्तकता (Preventive Vigilance)}
(i) आम जनता में जागरूकता हेतु अभियान चलाना।
(ii) नागरिकाें से भ्रष्टाचार को प्रतिरोध करने तथा भ्रष्टाचार के मामलों की सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रोत्साहित करना।
(iii) नागरिकों एवं नागरिक समूहों को निराधात्मक सतर्कता के लिए प्रशिक्षित करना। (उदाहरण के लिए विद्यालय एवं कॉलेज के शिक्षक, स्वास्थ्य कार्याकर्त्ता, पंचायत सेवक, जन सेवक एवं कर्मचारी को प्रशिक्षित कर इसके लिए प्रशिक्षित कार्यकर्त्ता (Trained Activists) तैयार करना)। (iv) सरकार के Service delivary points पर नागरिक समिति के माध्यम से निगरानी रखना। (v) भ्रष्टाचार की सूचना के लिए हेल्पलाईन प्रकाशित कर प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करना। (vi) जटिल नियमों/परिनियमों/प्रक्रियाओं का सरलीकरण करना। (vii) निर्णय लेने में स्वविवेक (Discretion) की गुंजाईश को कम/खत्म करना।
(viii) नियुक्तियों तथा क्रय (Procurement) के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हुए इन्हें पारदर्शी बनाने एवं e-procurement को बढ़ावा देना।
(ix) निविदा प्रक्रिया में निविदाता के साथ Integrity pact के प्रावधान करना। (x) भ्रष्टाचार निवारण में नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं कंपनियोें द्वारा किये गये अच्छे कार्य को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार देना।
(xi) निर्णय लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सहभागी (Participative) बनाना। (xii) जनउपयोगी सेवाओं के निष्पादन हेतु citizen charter लागू करना।
(xiii) विद्यालयों के पाठ्यक्रम में ethics विषय पर अध्याय जोड़ने पर विचार करना। (xiv) कालीकृत एजेंसियों की सूची सभी विभागों को परिचारित करना ताकि ऐसे लोगों को अन्य विभागों में कार्य आवंटन नहीं किया जा सके।
(xv) Whistleblower protection सुनिश्चित करना।
(xvi) कार्यालय एवं योजनाओं का नियमित निरीक्षण करना तथा निरीक्षण के प्रतिवेदन पर कार्रवाई सुनिश्चित करना।
(xvii) ऐसे क्षेत्रों का चयन करना जिसमें जहाँ-जहाँ भ्रष्टाचार की संभावना अधिक है उन पर सर्त्तकता निगरानी रखना।
(xviii) योजनाओं का औचक निरीक्षण करना।
(xviii) सामग्री/सेवाओं के निविदा पर नजर रखना
(ब) { दंडात्मक सर्त्तकता (Punitive Vigilance) } (i) भ्रष्टाचार के मामले में रंगे हाथो पकड़ने की गतिविधि को बढ़ावा देना। (ii) आय से अधिक सम्पत्ति मामले दायर करना।
(iii) भ्रष्ट आचरण में लिप्त लोगों के विरूद्ध दायर किये गये मामलों में उनकी सम्पत्ति को अधिहरण की कार्रवाई करना।
(iv) अभियोजन स्वीकृति हेतु लम्बित मामलों पर त्वरित कार्रवाई करना। (v) भ्रष्टाचार निवारण में उल्लेखनीय काम करने वाले कर्मियों को पुरस्कार/मेडल से सार्वजनिक समारोह में पुरस्कृत करने के लिए अनुशंसा देना।
(vi) निगरानी विशेष न्यायालयों में चल रहे वादों के अभियोजन पक्ष के गवाहों को संबंधित न्यायालयों में उपस्थित कराने में सहयोग करना।
(स) {(निगरानी सर्त्तकता) (Surveillance Vigilance) }
(i) सरकारी सेवकों के सम्पत्ति विवरणी की समीक्षा (Scrutiny) करना।
(ii) संदिग्ध आचरण वाले सरकारी सेवकों की सूची तैयार करना तथा उनके आचरण पर निगरानी रखना।
(iii) बड़े-बड़े वित्तीय निकासी/भुगतान पर चौकसी रखना। (iv) बिचौलियों, दलालों एवं मध्यस्थों जो सरकारी कार्य-कलापों में भ्रष्टाचार बढ़ाने का कड़ी का काम करते हैं की सूची तैयार कर उन पर निगरानी रखने तथा उनकी सूची विभाग एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों को सर्त्तकता हेतु परिचारित करना।
(घ) मुख्य निगरानी पदाधिकारी यह पता लगाने के लिए कि क्या लोक सेवकों द्वारा भ्रष्ट एवं अनुचित तौर तरीके तो अपनाये नहीं जा रहे हैं, संवेदनशील स्थलों का नियमित एवं अचानक निरीक्षण करेंगे। इसके अतिरिक्त4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 22228888 नव(बनव(बनव(बनव(बर र र र 2014201420142014 संभावना वाले अवचार/कदाचार के बारे में जैसे वह उपयुक्त समझें उसी तरीके से अपने स्वयं के स्रोतों से आसूचना एकत्र करें। 5. समीक्षाएँ :- (क) संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों के मुख्य निगरानी पदाधिकारी प्रत्येक माह के पहले सप्ताह में सभी विचाराधीन मामले की समीक्षा कर जाँच प्रतिवेदन, अनुशासनिक मामले और निगरानी संबंधी शिकायतें और मामलों पर शीघ्र कार्रवाई कर आवश्यक कदम उठायेंगे। (ख) लोक उपक्रमों में किये गये निगरानी कार्यों की समीक्षा के लिए मुख्य निगरानी पदाधिकारी संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव या मुख्य कार्यपालक द्वारा किये जाने वाले त्रैमासिक बैठक की व्यवस्था करेंगे। (ग) मुख्य निगरानी पदाधिकारी परस्पर हित के मामले में विशेष रूप से जाँच से उत्पन्न मामलों पर चर्चा करने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो/तकनीकी परीक्षक कोषांग/विशेष निगरानी इकाई के अधिकारियों के साथ बैठक भी आयोजित करेंगे। 6. रिपोर्ट एवं विवरणी प्रस्तुत करना :- (क) संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों के मुख्य निगरानी पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि निगरानी मामलों में किये गये कार्य की मासिक प्रतिवेदन या निर्धारित अवधि तक निगरानी विभाग को प्रस्तुत करेंगे। (ख) मुख्य निगरानी पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि निगरानी मामले पर किये गये कार्य के पिछले वर्ष (जनवरी से दिसम्बर तक) की वार्षिक रिपोर्ट अगले वर्ष की 30 जनवरी तक निगरानी विभाग को प्रस्तुत करेंगे। (ग) मुख्य निगरानी पदाधिकारी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि प्रगति पर चल रहे निर्माण कार्य, विद्युत कार्य एवं सामानों के क्रय पर त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट मार्च, जून, सितम्बर और दिसम्बर को समाप्त तिमाहियों के अगले माह की 15 तारीख तक अभियंता प्रमुख तकनीकी परीक्षक कोषांग को प्रस्तुत कर देंगे। सरकार भ्रष्टाचार को दृढ़ता से नियंत्रण करना चाहती है। अतः उपरोक्त निदेशों के आलोक में नियमानुसार अग्रतर कार्रवाई करने की कार्रवाई की जाय। 7. आदेश-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार गजट (राजपत्र) के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय। यह भी आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति महालेखाकार/संबंधित संस्थानों, निगमों, पर्षदों तथा स्वशासी निकायों के प्रशासी विभागों के प्रधान सचिव/सचिव एवं अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अंजनी कुमार सिंह, मुख्य सचिव।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 970-571+10-ड+0ट+0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in