िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 940/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, उजियारपुर, समस्तीपुर सम्प्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी, मसौढ़ी के विरूद्ध इंदिरा आवास की काफी बड़ी राषि को रोक कर रखने, गलत मासिक प्रगति प्रतिवेदन भेजने, सैकड़ों इंदिरा आवास लाभुकों का खाता खोलकर छः माह से अधिक अवधि तक उन खातों में राषि नहीं भेजने तथा राषि की उपलब्धता के बावजूद इंदिरा आवास के लिए उक्त राषि का व्यय नहीं करने संबंधित प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 299 दिनांक 08.01.2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
उक्त विभागीय कार्यवाही में नामित संचालन पदाधिकारी-सह-प्रमंडलीय आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 681 दिनांक 20.01.2011 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार को वृहत दण्ड दिये जाने का विनिष्चय किया गया। विभागीय पत्रांक 3229 दिनांक 12.03.2011 एवं स्मार पत्रांक 5392 दिनांक 13.05.2011 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा का उार समर्पित नहीं किया गया। प्रस्तावित वृहत् दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक 3280 दिनांक 01.03.2012 द्वारा सहमति की अपेक्षा की गयी। आयोग के पत्रांक 51 दिनांक 10.04.2012 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध प्रस्तावित वृहत् दण्ड पर सहमति प्रदान की गयी। आयोग के मतव्य के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) (संषोधन) नियमावली, 2007 के नियम 14 में विहित प्रावधान के तहत श्री कुमार को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8732 दिनांक 19.06.2012 द्वारा निम्नलिखित दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया :-
(i) चार वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक, (ii) निलंबन अवधि (दिनांक 25.05.2009 से 17.03.2011) में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं।
उपरोक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 14476/2012 दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेष दिनांक 22.01.2013 का कार्यकारी अंष निम्नवत है :-
2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 31 [Çत३बर 2(cid:23)1(cid:24)"The matter is, now remitted back to the State Government and Respondent no.
2 would proceed a fresh from the stage of service of enquiry report, inasmuch as even when the concept of second show-cause notice has been given away the delinquent is still entitled for service of enquiry report for submitting his comment/reaction to the findings recorded in the enquiry report. Therefore, once the petitioner will be served the copy of the enquiry report and will file his comment/reaction to the same, the competent authority will proceed to pass an appropriate order in the light of the explanation furnished by the petitioner. This exercise however must be completed within a period of six months from the date of receipt/production of a copy of this order. All the consequential benefits to the petitioner would abide by the fresh decision of the Respondents.
This writ application is accordingly allowed to the extent indicated above." उपर्युक्त न्यायादेष के आलोक में विभागीय पत्रांक 12336 दिनांक 25.07.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन को संलग्न करते हुए श्री कुमार से उन्हें संसूचित दण्ड के क्रम में कारण-पृच्छा की मांग की गयी। श्री कुमार के अभ्यावेदन दिनांक 26.08.2013 द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा में उन्हीं तथ्याें का उल्लेख किया गया, जो पूर्व में उनके द्वारा समर्पित किया गया था। अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक विचारोपरान्त श्री कुमार द्वारा समर्पित कारण-पृच्छा को अस्वी—त करते हुए उनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 में विहित प्रावधानों के तहत 'चार वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं निलंबन अवधि (दिनांक 25.05.2009 से 17.03.2011 तक) में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं' का दण्ड निरूपित करने का विनिष्चय करते हुए विभागीय पत्रांक 2249 दिनांक 17.02.2014 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से अभिमत की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 760 दिनांक 30.06.2014 द्वारा प्रस्तावित दण्ड को अनुपातिक नहीं मानते हुए दण्ड प्रस्ताव से असहमति व्यक्त की गयी परन्तु आयोग द्वारा प्रस्तावित दण्ड के अनुपातिक नहीें होने के संबंध में स्पष्ट कारणों का उल्लेख नहीं किया गया। अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोपों एवं जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त आयोग के परामर्ष/अभिमत से असहमत होते हुए उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड को संकल्प ज्ञापांक 12573 दिनांक 10.09.2014 द्वारा पूर्ववत बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 940/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, उजियारपुर, समस्तीपुर सम्प्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी, मसौढ़ी द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12573 दिनांक 10.09.2014 द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 6082/2015 अनिल कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 06.01.2016 को पारित आदेष द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12573 दिनांक 10.09.2014 द्वारा निर्गत दण्डादेष को निरस्त कर दिया गया। उक्त न्यायादेष का कार्यकारी अंष निम्नवत है :- "The Court is left with no option but to quash the impugned order, contained in Annexure-12 and allow the writ application.
Let a copy of the order be marked to the Principal Secretary, General Administration
Department as well as the Chief Secretary, Government of Bihar, to review the situation and to
ensure that the officers who are saddled with the responsibility of holding departmental enquiry
either know their job or they are trained to deliver."
साथ ही संबंधित विधि पदाधिकारी, श्री अषोक कुमार केसरी, ए0ए0जी0-11 के पत्रांक 261 दिनांक 12.01.2016 द्वारा परामर्ष दिया गया कि-
"The aforesaid case has been taken up on 06.01.2016 by Hon'ble Mr. Justice A.K. Tripathi
and lordship has been pleased to set aside the impugned order and allowed the writ application
holding that the departmental proceeding was not conducted in accordance with law. In my opionon
this is fit case in which an L.P.A. should be filed in this case by the State."
इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा एल0पी0ए0 संख्या 947/2016 (बिहार राज्य एवं अन्य बनाम अनिल कुमार) दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 23.08.2017 को पारित आदेष निम्नवत है :-
"We find that the learned Writ Court summoned the original record of the departmental
proceedings. We have gone through the records. Finding that the enquiry has been conducted in total
violation to the Bihar Government Servants (Classification, Control and Appeal) Rules, 2005, no
enquiry in the eye of law has been conducted and finding the entire proceedings vitiated due to non-
compliance of the statutory provision, has interfered into the matter. In the memorandum of appeal,
except for contending that action has been taken after following due process of law and the learned
Writ Court has not adverted to consider the questions properly, no substantial ground has been made
out warranting re-consideration.
3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 31 [Çत३बर 2(cid:23)1(cid:24)Once on scrutiny of the original records the learned Writ Court records a finding that the
enquiry has not been conducted in accordance with the statutory requirement, even copy of the
enquiry report has not been handed over to the delinquent employee, and has interfered into the
matter, we see no reason to make indulgence into the matter. The appeal is accordingly dismissed. "
श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या 6082/2015 में दिनांक 06.01.2016 को पारित आदेष के अनुपालन हेतु अवमाननावाद याचिका एम0जे0सी0 संख्या 805/2016 दायर की गयी। उक्त अवमाननावाद की सुनवाई के पश्चात् दिनांक 06.09.2017 को पारित आदेष में न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार द्वारा दायर एल0पी0ए0 संख्या 947/2016 को दिनांक 23.08.2017 को निरस्त कर दिया गया है। साथ ही उक्त वाद की सुनवाई के क्रम में सरकारी वकील द्वारा सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या 6082/2015 में दिनांक 06.01. 2016 को पारित आदेष का अनुपालन दो सप्ताह के अन्दर सुनिष्चित किये जाने का आष्वासन माननीय न्यायालय को दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 20.09.2017 को निर्धारित है।
एम0जे0सी0 संख्या 805/2016 में दिनांक 06.09.2017 का पारित न्यायादेष निम्नवत है :- "Counsel for the State does accept the position that the LPA against the order of the Learned Single Judge has been dismissed on 23.08.2017.
In view of the same, they are willing to take steps for compliance of the order within
two weeks.
Matter will be listed after two weeks, i.e., on 20th of September, 2017." माननीय उच्च न्यायालय, पटना के उपर्युक्त आदेष के अनुपालन में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 940/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, उजियारपुर, समस्तीपुर सम्प्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी, मसौढ़ी के विरूद्ध निर्गत दण्डादेष को निरस्त किये जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही/प्रक्रिया की समीक्षा किये जाने एवं समीक्षोपान्त समुचित कार्रवाई किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 940/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, उजियारपुर, समस्तीपुर सम्प्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी, मसौढ़ी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12573 दिनांक 10.09.2014 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दण्ड को निरस्त किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 940/11, नगर कार्यपालक पदाधिकारी, मसौढ़ी एवं अन्य संबंधितों को दी जाय। ह0/-
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गुफरान अहमद, सरकार के उप-सचिव।
——— [ध(cid:25)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१#ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) 'क(cid:4)०शत eव* म१ॢ#त(cid:16) ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1017+571+10+ड(cid:25)(cid:23)ट.(cid:23)प(cid:25)(cid:23)? Website: http://egazette.bih.nic.in