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श्री गयानन्द यादव (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 947/11, सम्प्रति सेवा से बर्खास्त के विरूद्ध उनके प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया के पद पर पदस्थापन अवधि के दौरान इंदिरा आवास की राषि राष्ट्रीय—त बैंक में नहीं जमा करा कर डेहटी पैक्स में जमा कर इंदिरा आवास योजना की मार्गदर्षिका के विपरीत कार्य करने, उच्चाधिकारियों के आदेष की अवहेलना करने, इंदिरा आवास मद की राषि के दुरूपयोग, गबन तथा कदाचार का मार्ग प्रषस्त करने तथा इंदिरा आवास के लाभार्थियों के चयन में भारी अनियमितता बरतने आदि प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 353 दिनांक 02.09.2001 द्वारा निलंबित किया गया। साथ ही विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9421 दिनांक 18.09.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
2. विभागीय कार्यवाही के फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों को विचारित नहीं किये जाने के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 के अन्तर्गत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा पुनः विस्तृत जाँच हेतु संषोधित आरोप-पत्र गठित कर साक्ष्य के साथ संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराते हुए पुनः जाँच कराये जाने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 11055 दिनांक 02.11.2010 द्वारा संचालन पदाधिकारी से आरोपों की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
3. सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 16071/2010 श्री गयानन्द यादव बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 05.10.2010 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेष के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11057 दिनांक 02.11.2010 द्वारा श्री गयानन्द यादव को निलंबन से मुक्त किया गया। साथ ही श्री यादव के निलंबन अवधि के विनियमन एवं वेतन के संबंध में उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही एवं फौजदारी मुकदमें के फलाफल के आलोक में निर्णय लिये जाने का आदेष संसूचित किया गया।
4. आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा पुनः जाँच के उपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
5. अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा जाँँच प्रतिवेदन पर सम्यक् विचारोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली, 2005 (यथा संषोधित) के नियम-14 के तहत आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध ''सेवा से2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 31 [Çत३बर 2(cid:23)1(cid:24) बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं'' का दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया।
6. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन तथा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड पर श्री गयानन्द यादव से अभ्यावेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा समय सीमा के भीतर अभ्यावेदन समर्पित नहीं किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा काफी विलंब से दिनांक 01.07.2011 को अपना कारण पृच्छा समर्पित किया गया, जिसे समीक्षोपरान्त स्वीकारयोग्य नहीं पाया गया।
7. विनिष्चित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग किये जाने पर आयोग द्वारा विनिष्चित दंड पर सहमति संसूचित की गयी।
8. बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति प्राप्त होने के उपरान्त श्री गयानन्द यादव की सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड दिये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् द्वारा स्वी—ति प्रदान की गयी।
9. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2763 दिनांक 21.02.2012 द्वारा श्री गयानन्द यादव (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 947/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया के विरूद्ध सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड संसूचित किया गया।
10. सेवा से बर्खास्तगी आदेष के विरूद्ध श्री गयानन्द यादव द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 20862/2012 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20.05.2016 को पारित आदेष का कार्यकारी अंष कंडिका-20, 21 एवं 22 निम्नवत् है :-
"20. In view of the forgoing reasons, I am of the considered view that the disciplinary authority has failed to produce relevant materials on record to establish the guilt of the petitioner. The enquiry proceeding was conducted in breach of well established norms and principal of law.
21. In the result, both the writ applications are allowed. The enquiry report, the findings of guilt recorded by the disciplinary authority are set aside. The petitioner would be reinstated in service forthwith will consequential benefits.
22. Me. P.N. Shahi, learned senior counsel for the State submits that the matter may be remanded to the disciplinary authority for further enquiry. I need not express any view of my own on the matter and it would be up to the disciplinary authority to take appropriate steps."
11. सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 20862/2012 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20.05.2016 को पारित उपर्युक्त न्यायादेष के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर किये जाने हेतु विधि विभाग से मन्तव्य की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा सूचित किया गया कि महाधिवक्ता द्वारा एल0पी0ए0 दायर किये जाने हेतु मामला को योग्य नहीं पाया गया है। 12. इस बीच सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 20862/2012 में पारित आदेष का अनुपालन नहीं होने के आधार पर श्री गयानन्द यादव द्वारा एम0जे0सी0 संख्या 1671/2017 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त अवमाननावाद में दिनांक 05.07.2017 को पारित आदेष निम्नवत् है :-
" Two weeks time is granted to the learned counsel for the State to file show-cause.
Put up this case after two weeks."
13. सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 20862/2012 में न्यायादेष दिनांक 20.05.2016 के विरूद्ध विधि विभाग द्वारा एल0पी0ए0 दायर किये जाने हेतु मामला को योग्य नहीं पाया गया। अवमाननावाद में दिनांक 05.07.2017 को पारित न्यायादेश के अनुपालन हेतु सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 20862/2012 श्री गयानन्द यादव बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 20.05.2016 को पारित न्यायादेष का अनुपालन के क्रम में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री गयानन्द यादव के विरूद्ध आरोपों की पुनः अगे्रतर जाँच आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा कराये जाने एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आरोपों के लिए सुस्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध कराते हुए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी प्रतिनियुक्त करने एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2763 दिनांक 21.02.2012 को निरस्त करते हुये श्री गयानन्द यादव (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 947/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया सम्प्रति सेवा से बर्खास्त को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् सेवा में पुनः स्थापित करने का निर्णय लिया गया। 14. अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 20862/2012 में दिनांक 20.05.2016 को पारित न्यायादेष के अनुपालन के क्रम में-
(i) श्री गयानन्द यादव के विरूद्ध आरोपों की पुनः अगे्रतर जाँच हेतु आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त करते हुए एवं ग्रामीण विकास विभाग को निदेश दिया जाता है कि आरोपों के लिए सुस्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध कराते हुए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की प्रतिनियुक्त किया जाय।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 31 [Çत३बर 2(cid:23)1(cid:24) (ii) विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2763 दिनांक 21.02.2012 को निरस्त करते हुये श्री गयानन्द यादव (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 947/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया सम्प्रति सेवा से बर्खास्त को सेवा में पुनः स्थापित किया जाता है।
आदेश :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गुफरान अहमद, सरकार के उप-सचिव।
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